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किसानों के लिए सरकार का बड़ा कदम, 2024-25 वित्त वर्ष में 834.64 लाख टन उर्वरक की उपलब्धता

नई दिल्ली 
 सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में देश में उर्वरकों की जरूरत लगभग 152.50 करोड़ बोरी (722.04 लाख टन) आंकी गई थी, जिसके मुकाबले सरकार ने करीब 176.79 करोड़ बोरी (834.64 लाख टन) उर्वरक उपलब्ध कराए। 

सरकार ने कहा कि किसानों की खेती से जुड़ी जरूरतों को समय पर पूरा करने के लिए 2024-25 में रिकॉर्ड मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने कहा कि यह अतिरिक्त उपलब्धता किसानों की मदद करने और देशभर में खेती का काम बिना रुकावट चलाने के लिए सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दिखाती है।

सरकार के मुताबिक, यह सफलता रेलवे, बंदरगाह प्राधिकरण, राज्य सरकारों और उर्वरक कंपनियों के आपसी तालमेल से संभव हो पाई।सरकारी बयान में कहा गया कि भारतीय रेलवे ने उर्वरक ढुलाई को प्राथमिकता दी, जिससे उर्वरक तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सके। वहीं, बंदरगाहों पर आयात किए गए उर्वरकों को जल्दी उतारा गया और आगे भेजने की व्यवस्था की गई।

इसके साथ ही सरकार ने भंडारण और वितरण व्यवस्था को मजबूत किया, ताकि उर्वरक सही समय पर किसानों तक पहुंच सकें।सरकार ने उर्वरक कंपनियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें कीं, मांग और आपूर्ति पर लगातार नजर रखी और जहां भी समस्या आई, उसे तुरंत दूर किया।

इन पहले से की गई तैयारियों की वजह से देश के किसी भी हिस्से में उर्वरकों की कमी नहीं हुई। सरकार के अनुसार, इसी निरंतर और मिलकर किए गए प्रयासों से पूरे देश में 2024-25 के दौरान रिकॉर्ड उर्वरक उपलब्धता हासिल हुई।
इसी बीच, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा सर्दी के मौसम में रबी फसलों की बुवाई का क्षेत्रफल बढ़कर 644.29 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल इसी समय 626.64 लाख हेक्टेयर था।
इस तरह रबी फसलों की बुवाई में 17.65 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बुवाई क्षेत्र बढ़ने से फसल उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और खाद्य महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।
आंकड़ों के अनुसार, दलहनी फसलों का क्षेत्र 3.74 लाख हेक्टेयर बढ़ा है, जबकि चना की बुवाई में 4.66 लाख हेक्टेयर की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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