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Green Corridor फिर बना मिसाल: सिपाही कुलदीप के अंगदान से पांच जिंदगियों में लौटी उम्मीद

रोहतक.

पंडित भगवत दयाल शर्मा पीजीआइएमएस में अंगदान की एक और प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। तीन दिन में दूसरी बार ग्रीन कोरिडोर बनाया गया है। सोनीपत के गोहाना क्षेत्र के 51 वर्षीय सिपाही कुलदीप के दिमागी रूप से मृत घोषित होने के बाद उनके परिजनों ने मानवता का परिचय देते हुए सभी अंग दान करने का निर्णय लिया। इस अंगदान से पांच जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिला है।

सोमवार सुबह करीब 4 बजे आपरेशन शुरू किया गया और कुछ ही समय बाद अंग निकालने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई।विभिन्न राज्यों के अस्पतालों की टीमें पहले ही पीजीआइएमएस पहुंच चुकी थीं। अंगों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए रोहतक से दिल्ली तक ग्रीन कोरिडोर बनाया गया, जिसके जरिए 81 किलोमीटर की दूरी महज 50 मिनट में तय की गई। इस दौरान करीब 100 पुलिसकर्मी तैनात रहे। सुबह 7:30 बजे पहला अंग लीवर दिल्ली के आइएलबीएस अस्पताल भेजा गया। इसके बाद किडनी, दोनों आंखों के कार्निया और पैंक्रियाज भी विभिन्न अस्पतालों में भेजे गए। इस प्रक्रिया से कुल पांच मरीजों को जीवनदान मिला। मृतक की पत्नी प्रमिला ने बताया कि उनके पति सुनारिया जेल में वार्डन थे और पिछले 11 महीनों से ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे थे।

इलाज के लिए उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने समाज के हित में अंगदान का फैसला लिया। हेल्थ विवि के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने कहा कि जागरूकता अभियान के चलते लोग अब अंगदान के प्रति आगे आ रहे हैं। तीन दिनों में यह दूसरा मामला है, जो समाज के लिए प्रेरणा है।

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