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25 मार्च से छत्तीसगढ़ में पहली बार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का आयोजन, 2000 खिलाड़ी होंगे शामिल

रायपुर
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर एक बार फिर बड़े खेल आयोजन की मेजबानी के लिए तैयार है। 25 मार्च से 3 अप्रैल तक आयोजित होने जा रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। देशभर से आने वाले 1069 खिलाड़ी और ऑफिशियल्स के ठहरने, आवागमन और प्रतियोगिताओं के सुचारू संचालन के लिए प्रशासन और खेल विभाग ने व्यापक इंतजाम किए हैं।

25 मार्च से शुरू होने वाले ये खेल छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल इलाकों की विविधता और गहराई को दर्शाते हुए तीन सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों – रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित किए जाएंगे। एक विज्ञप्ति के अनुसार, 25 मार्च से 3 अप्रैल तक छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले केआईटीजी 2026 में 2300 से अधिक एथलीट और 3700 प्रतिभागी भाग लेंगे।

छत्तीसगढ़ की 32% से अधिक आबादी आदिवासी समुदायों से संबंधित है और यहाँ की स्वदेशी संस्कृति, परंपराओं और खेल उत्कृष्टता की जीवंत विरासत इसे न केवल एक मेजबान राज्य बनाती है, बल्कि इन खेलों का स्वाभाविक घर भी बनाती है। रायपुर के मैदानी इलाकों से लेकर बस्तर के समृद्ध आदिवासी परिदृश्य और अंबिकापुर के ऊंचे इलाकों तक, खेल लंबे समय से रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न अंग रहा है, जो परंपरा, दृढ़ता और समुदाय द्वारा आकारित है।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स इस चिरस्थायी विरासत का जश्न मनाते हैं, और छत्तीसगढ़ की मेजबानी भारत की आदिवासी पहचान में इसके केंद्रीय स्थान को रेखांकित करती है।

7 होटलों में ठहरेंगे खिलाड़ी और ऑफिशियल्स
इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में शामिल होने वाले खिलाड़ियों और उनके ऑफिशियल्स को रायपुर के 7 अलग-अलग होटलों में ठहराया जाएगा। खासतौर पर वीआईपी रोड और आसपास के प्रमुख होटलों में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जहां सुरक्षा, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

इन खेलों में दिखेगा जनजातीय प्रतिभा का दम
ट्राइबल गेम्स में इस बार स्विमिंग, वेटलिफ्टिंग, हॉकी, फुटबॉल और तीरंदाजी जैसी प्रमुख प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन खेलों में केवल जनजातीय वर्ग के खिलाड़ी ही हिस्सा लेंगे, जिससे देशभर की पारंपरिक और उभरती खेल प्रतिभाओं को मंच मिलेगा।

छत्तीसगढ़ से 200 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा
मेजबान राज्य छत्तीसगढ़ की ओर से करीब 200 खिलाड़ियों का दल इस आयोजन में भाग लेगा। स्थानीय खिलाड़ियों को अपने घरेलू मैदान पर प्रदर्शन का मौका मिलेगा, जिससे राज्य के खेल प्रतिभाओं को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

पहली बार लद्दाख की टीम भी शामिल

इस बार आयोजन की खास बात यह है कि पहली बार लद्दाख की टीम भी इसमें हिस्सा लेने रायपुर पहुंचेगी। इससे खेलों का दायरा और अधिक व्यापक हो गया है और विभिन्न क्षेत्रों की जनजातीय खेल संस्कृति का संगम देखने को मिलेगा।

खिलाड़ियों का आगमन शुरू, कंट्रोल रूम स्थापित
खिलाड़ियों के रायपुर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। अरुणाचल प्रदेश की वेटलिफ्टिंग टीम 22 मार्च को राजधानी पहुंच गई है। वहीं, 24 मार्च की सुबह तक सभी टीमों के पहुंचने की संभावना है। खिलाड़ियों की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशन पर विशेष कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, जिससे आवागमन और समन्वय में किसी तरह की परेशानी न हो।

10 दिनों तक चलेगा खेल महाकुंभ
करीब 10 दिनों तक चलने वाले इस खेल आयोजन का उद्घाटन 25 मार्च को रायपुर में होगा। वहीं, समापन समारोह अंबिकापुर में आयोजित किए जाने की संभावना है। यह आयोजन इस वर्ष राजधानी में स्कूल नेशनल के बाद दूसरा बड़ा स्पोर्ट्स इवेंट है।

व्यापक तैयारियों में जुटा प्रशासन
इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रशासन और खेल विभाग पूरी तरह सक्रिय है। खिलाड़ियों के ठहरने से लेकर प्रतियोगिता स्थलों की तैयारी, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री मांडविया बोले- आदिवासी बच्चों को मिलेगा बड़ा फायदा
केंद्रीय मंत्री मांडविया ने कहा कि यह आयोजन युवाओं को अवसर देने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” विजन का हिस्सा है, जिसमें खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मांडविया ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों से प्रतिभाओं को सामने लाना बेहद जरूरी है। सरकार का फोकस है कि प्रतिभाओं की जल्दी पहचान हो, उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण मिले और राष्ट्रीय खेल ढांचे में शामिल किया जाए।

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