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राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दो साल: जानिए क्या-क्या हुआ निर्माण, धर्मध्वजा से लेकर राम दरबार तक

अयोध्या 

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को दो साल पूरे हो चुके हैं. इन दो वर्षों में मंदिर में लगातार निर्माण हो रहे हैं और आस्था के इस नए केंद्र का नया ही स्वरूप बदलकर सामने आ रहा है. रोज हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. मंदिर में दर्शन की व्यवस्था से लेकर टाइमिंग आदि में भी बदलाव हुए हैं जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सहूलियत को देखते हुए अपनाए जा रहे हैं. 

श्रीराम मंदिर का मुख्य ढांचा अब लगभग पूर्ण हो चुका है. गर्भगृह में श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की मूर्ति स्थापित है और नियमित पूजा-अर्चना हो रही है. मंदिर की भूतल संरचना पूरी तरह तैयार है, जबकि पहली और दूसरी मंजिल पर निर्माण और कलात्मक कार्य अंतिम चरण में हैं. मंदिर का शिखर, मंडप और स्तंभ पारंपरिक नागर शैली में निर्मित किए गए हैं, जिन पर बारीक नक्काशी की गई है. पत्थरों पर रामायण से जुड़े प्रसंग उकेरे गए हैं, जो मंदिर को सांस्कृतिक पहचान देते हैं.

पिछले दो साल में मंदिर परिसर का बड़ा हिस्सा विकसित किया गया है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चौड़ा परिक्रमा पथ बनाया गया है, जिससे दर्शन के दौरान भीड़ नियंत्रित रहती है. परिसर में रास्ते, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है. सुरक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक तकनीक से मजबूत किया गया है ताकि श्रद्धालु निश्चिंत होकर दर्शन कर सकें.

राम मंदिर में फहराई गई धर्म ध्वजा
बीते साल नवंबर 2025 में अयोध्या में राम मंदिर पर धर्म ध्वजारोहण हुआ. राम मंदिर पर फहराने वाला ध्वज केसरिया रंग का है. ध्वज की लंबाई 22 फीट चौड़ाई 11 फीट और ध्वजदंड 42 फीट का है. इस ध्वज को 161 फीट के शिखर पर फहराया गया. ध्वज पर 3 चिन्ह चिह्नित किए गए हैं- सूर्य, ऊं, कोविदार वृक्ष. माना जा रहा है कि यह ध्वज सूर्य भगवान का प्रतीक है. सनातन परंपरा में केसरिया त्याग, बलिदान, वीरता और भक्ति का प्रतीक माना गया है.

रघुवंश के शासनकाल में भी यह रंग विशेष स्थान रखता था. भगवा वह रंग है जो ज्ञान, पराक्रम, समर्पण और सत्य की विजय का प्रतिनिधित्व करता है. ध्वज पर उकेरे गए ये पवित्र चिन्ह ध्वज पर कोविदार वृक्ष और 'ऊं' की छवि अंकित की गई है. कोविदार वृक्ष का उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है और इसे पारिजात व मंदार के दिव्य संयोग से बना वृक्ष माना गया है.

मुख्य राम मंदिर: गर्भगृह और रंग मंडप सहित इसका निर्माण पूरा हो गया है.

परकोटा: मुख्य मंदिर के चारों ओर लगभग 800 मीटर लंबा परकोटा तैयार है, जिसमें कई छोटे मंदिर शामिल हैं.

सप्त मंडप: महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, शबरी और ऋषि पत्नी अहल्या के मंदिर बनकर तैयार हैं.

छोटे मंदिर: भगवान शिव, गणेश, हनुमान, सूर्यदेव, मां दुर्गा और मां अन्नपूर्णा के मंदिर भी पूर्ण हो चुके हैं.
प्रतिमाएं और ध्वज: जटायु, गिलहरी और संत तुलसीदास की प्रतिमाएं स्थापित हैं, और सभी मंदिरों पर कलश व धर्म ध्वज लगा दिए गए हैं.

लक्ष्मण जी का मंदिरः परकोटे के बाहर शेषावतार लक्ष्मणजी का मंदिर भी बनकर तैयार है और सभी मंदिरों के शिखरों पर कलश और धर्म ध्वज भी स्थापित किए जा चुके हैं.

मंदिर परिसर में राम कथा को समझाने के लिए संग्रहालय और प्रदर्शनी स्थल विकसित किए जा रहे हैं. यहां श्रद्धालुओं को भगवान राम के जीवन, वनवास, राम-रावण युद्ध और रामराज्य की अवधारणा को चित्रों, शिल्प और आधुनिक माध्यमों से समझाया जाएगा. यह व्यवस्था खासतौर पर युवाओं और बच्चों के लिए बनाई जा रही है ताकि वे रामायण को सरल भाषा और दृश्य रूप में समझ सकें.

जन्मभूमि पर राम मंदिर के निर्माण से संबंधित काम 15 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच अगस्त 2020 को भूमि पूजन किया था. भूमि पूजन के बाद जनवरी 2021 से मंदिर निर्माण के लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नींव की खोदाई शुरू कराई थी. कुल मिलाकर, दो साल बाद श्रीराम मंदिर अपनी भव्यता और गरिमा के साथ खड़ा है. कुछ कार्य अभी शेष हैं, लेकिन मंदिर अब अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था और सांस्कृतिक चेतना का मजबूत केंद्र बन चुका है.

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