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US नागरिकों से 130 करोड़ की ठगी, भारत में फर्जी कॉल सेंटर पर ED की छापेमारी

नई दिल्ली
भारत में संचालित फर्जी कॉल सेंटरों के माध्यम से विदेशी, खासतौर से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर की जा रही साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। एक अनुमान के मुताबिक, अमेरिका में हर साल इंटरनेट से जुड़ी ठगियों के कारण कई हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा भारत आधारित कॉल सेंटरों से जुड़ा है। इसी को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गुरुग्राम जोनल ऑफिस टीम ने एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इससे पहले पुणे में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी।

जांच एजेंसी ने बुधवार को गुरुग्राम और नई दिल्ली में सात स्थानों पर छापेमारी की और करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अहम सबूत अपने कब्जे में लिए। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) 2002 के तहत की गई। जानकारी के मुताबिक, कुछ युवाओं ने मिलकर अमेरिकी नागरिकों से 2-3 वर्षों में 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर (130 करोड़ रुपये से अधिक) की ठगी की।

ईडी की जांच में सामने आया है कि तीन युवक- अर्जुन गुलाटी, दिव्यांश गोयल और अभिनव कालरा नोएडा और गुरुग्राम में अवैध कॉल सेंटर चला रहे थे। ये कॉल सेंटर तकनीकी सहायता के नाम पर मुख्यतः अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाते थे। आरोपी पीड़ितों के बैंक खातों तक अनधिकृत पहुंच बनाकर पैसे विदेशी खातों में ट्रांसफर करते थे और बाद में जटिल लेनदेन के जरिए उन रकम को भारत में वापस लाते थे।

130 करोड़ रुपये की ठगी
ईडी के मुताबिक, नवंबर 2022 से अप्रैल 2024 के बीच इस गिरोह ने लगभग 1.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 130 करोड़ रुपये) की ठगी की। जांच में अब तक 200 से अधिक बैंक खातों की जानकारी सामने आई है जिनका इस्तेमाल धन शोधन के लिए किया गया। छापेमारी के दौरान एजेंसी ने कई अहम डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त किए। साथ ही, 30 बैंक खाते फ्रीज किए गए, आठ लग्जरी कारें और महंगी घड़ियां जब्त की गईं। ईडी का कहना है कि आरोपी आलीशान मकानों में रहते थे और अवैध कमाई से 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित कर चुके थे।

यह जांच सीबीआई, आईओडी दिल्ली द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। एफआईआर में अज्ञात आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता, 1860 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज था। आरोप था कि दिल्ली और आसपास अवैध कॉल सेंटर चलाकर अमेरिकी नागरिकों को टेक सपोर्ट स्कैम के जरिए धोखा दिया जा रहा था। ईडी ने बताया कि आरोपियों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और आगे की जांच जारी है।

पुणे में भी ऐसी ही कार्रवाई
हाल ही में पुणे पुलिस ने भी एक बड़े साइबर अपराध का पर्दाफाश करते हुए एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया था, जिसके जरिए हजारों अमेरिकी नागरिकों से लाखों डॉलर की ठगी की गई। पुलिस के अनुसार, यह कॉल सेंटर पुणे के एक व्यावसायिक क्षेत्र में संचालित हो रहा था और इसमें शामिल लोग खुद को तकनीकी सहायता कर्मचारी बताकर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाते थे।

पुणे पुलिस की साइबर क्राइम शाखा को गुप्त सूचना मिली थी कि शहर में एक अवैध कॉल सेंटर संचालित हो रहा है। इसके बाद, पुलिस ने छापेमारी कर इस गिरोह का खुलासा किया। छापेमारी के दौरान, कॉल सेंटर से कंप्यूटर, सर्वर, फर्जी दस्तावेज और अन्य उपकरण बरामद किए गए। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया।

मई में एक गुप्त सूचना के आधार पर, एसीपी गणेश इंगले और वरिष्ठ निरीक्षक स्वप्नाली शिंदे, शब्बीर सैय्यद और अजय वाघमारे के नेतृत्व में 150 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की एक टीम ने रात करीब 10 बजे खराडी स्थित आलीशान प्राइड आइकॉन प्रोजेक्ट की नौवीं मंजिल पर स्थित कॉल सेंटर पर छापा मारा। पुलिस ने पाया कि "मैग्नेटल बीपीएस एंड कंसल्टेंट्स एलएलपी" के नाम से कथित अवैध कॉल सेंटर में जुलाई 2024 से 12 महिलाओं और 111 पुरुषों सहित 123 कर्मचारी काम कर रहे थे। इस बीच, लगभग दस घंटे चली छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 64 लैपटॉप, 41 मोबाइल फोन, चार राउटर जब्त किए, जिनकी कीमत 13.74 लाख रुपये है। पुलिस को जब्त लैपटॉप में संदिग्ध ऑनलाइन एप्लिकेशन, वीपीएन सॉफ्टवेयर और लाखों अमेरिकी नागरिकों का डेटा मिला।

 

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