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वृंदावन नाव दुर्घटना: 250 रेस्क्यू कर्मियों की टीम सर्च ऑपरेशन में जुटी

मथुरा

मथुरा के वृंदावन में यमुना में हुए नाव हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है. हादसे के तीन दिन बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, जहां 13 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 3 लोग अब भी लापता हैं. सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की बड़ी टीम लगातार सर्च ऑपरेशन में जुटी है.

वृंदावन में एक नाव हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं. वहीं कुछ परिवार अब भी अपने अपनों के मिलने की आस में नदी किनारे टकटकी लगाए खड़े हैं. हादसा शुक्रवार को हुआ, जब श्रद्धालुओं से भरी एक मोटर बोट देवरहा बाबा के दर्शन के लिए जा रही थी. किसे पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा.

अचानक मौसम ने करवट ली. तेज हवा चली और देखते ही देखते नाव का बैलेंस बिगड़ गया. नाव पांटून पुल से टकरा गई और कुछ ही पलों में यमुना की धारा में पलट गई. चीख-पुकार मच गई. जो तैर सकते थे, उन्होंने खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन कई लोग नदी की गहराई में समा गए.

हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया. सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमों को मौके पर तैनात किया गया. करीब 250 लोगों की टीम लगातार तीन दिनों से रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई है.

अब तक 22 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन 13 लोगों की मौत हो चुकी है. आज रविवार को तीसरे दिन भी सर्च ऑपरेशन जारी रहा और सुबह दो और शव बरामद किए गए. इनकी पहचान पंजाब के लुधियाना की डिंकी और जगराओं के ऋषभ शर्मा के रूप में हुई.

प्रशासन के अनुसार, शव नदी में फूलकर ऊपर आ गए थे, जिन्हें रस्सियों की मदद से नाव में खींचकर बाहर निकाला गया. परिजनों ने मौके पर पहुंचकर उनकी पहचान की. यह दृश्य इतना दर्दनाक था कि वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं.

डिंकी बीए फाइनल ईयर की छात्रा थी, जिसके सपने अभी अधूरे ही रह गए. वहीं ऋषभ शर्मा 12वीं पास था और अपने पिता के काम में हाथ बंटाता था. दोनों अपने परिवार के साथ धार्मिक यात्रा पर निकले थे, लेकिन यह यात्रा कभी खत्म न होने वाले दर्द में बदल गई.

इससे पहले शनिवार को सर्च ऑपरेशन के दौरान पंजाब के ही मानिक टंडन का शव देवरहा बाबा घाट के पास मिला था. इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है. अब भी तीन लोग लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है.

रेस्क्यू टीमों ने सर्च ऑपरेशन का दायरा बढ़ाकर 20 किलोमीटर तक कर दिया है. गोताखोर नदी की गहराई में लगातार तलाश कर रहे हैं, जबकि किनारों पर भी सघन सर्च अभियान चलाया जा रहा है.

इस बीच हादसे को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं. लोगों का आरोप है कि नाव चालक की लापरवाही और प्रशासन की अनदेखी इस हादसे की बड़ी वजह है. उनका कहना है कि नाव में क्षमता से अधिक लोग सवार थे, न तो लाइफ जैकेट की व्यवस्था थी और न ही सुरक्षा के अन्य इंतजाम.

कुछ लोगों ने यह भी बताया कि हादसे के बाद उन्होंने कई बार 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल किया, लेकिन कॉल बार-बार कटती रही. चौथी बार कॉल कनेक्ट होने के बाद ही मदद पहुंच सकी.

परिजनों का यह भी सवाल है कि जब पांटून पुल पर काम चल रहा था, तो उस क्षेत्र में नावों के संचालन पर रोक क्यों नहीं लगाई गई. अगर समय रहते एहतियात बरता जाता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था.

प्रशासन की ओर से एडीएम प्रशासन अमरेश कुमार ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी ताकत के साथ जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है. वहीं सीओ मांट संदीप कुमार सिंह ने कहा कि हर पहलू की जांच की जा रही है और सख्त कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल, नदी किनारे खड़े परिजनों की आंखें सिर्फ एक ही उम्मीद में लगी हैं कि उनके अपने जल्द मिल जाएं. यमुना की लहरें अब भी उठ रही हैं, लेकिन अपने साथ कई जिंदगियों की कहानी और अधूरे सपने समेटे हुए… इसी के बीच जारी है तलाश- उन तीन लोगों की, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल सका है.

 

 

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