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यूनुस का विवादित फैसला: ट्रंप की खुशामद में गाजा भेजना चाहते हैं सेना, अपने ही देश में विरोध तेज

ढाका
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार मुहम्मद यूनुस द्वारा गाजा में प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होने की रुचि जाहिर करने के बाद फिलिस्तीन समर्थक संगठन पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी, बांग्लादेश ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह इस फोर्स में किसी भी प्रकार की भागीदारी से दूर रहे, क्योंकि यह बांग्लादेश की ऐतिहासिक और नैतिक नीति के खिलाफ होगा। द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, कमेटी ने बयान जारी कर अंतरिम सरकार की इस कथित रुचि की कड़ी निंदा की। सदस्य-सचिव प्रोफेसर मोहम्मद हारुन-ओर-रशीद ने कहा कि इस फोर्स का मुख्य उद्देश्य इजरायल की सुरक्षा के नाम पर गाजा के स्वतंत्रता सेनानियों को निरस्त्र करना और फिलिस्तीनी प्रतिरोध आंदोलन को समाप्त करना होगा।
 
कमेटी ने क्या कहा?
पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी, बांग्लादेश के सदस्य-सचिव प्रोफेसर मोहम्मद हारुन-ओर-रशीद ने कहा कि इस स्थिरीकरण बल का मुख्य उद्देश्य इजरायल की सुरक्षा के बहाने गाजा के स्वतंत्रता सेनानियों को हथियार छीनना और फिलिस्तीनी प्रतिरोध आंदोलन को पूरी तरह खत्म करना है। बयान में कमेटी ने दावा किया कि बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान ने अमेरिका दौरे के दौरान वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक में गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में बांग्लादेश की रुचि जाहिर की थी। यह जानकारी मुख्य सलाहकार मुहम्मद युनूस के प्रेस विंग के बयान के हवाले से सामने आई थी।

कमेटी ने जोर दिया कि बांग्लादेश के लोग हमेशा फिलिस्तीनी अधिकारों और स्वतंत्रता के समर्थन में खड़े रहे हैं और आगे भी खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश खुद संघर्ष और आजादी की लड़ाई से जन्मा देश है, इसलिए यहां की जनता उत्पीड़न और कब्जे के खिलाफ लड़ने वालों के दर्द को अच्छी तरह समझती है। इस दौरान संगठन ने याद दिलाया कि बांग्लादेश ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीन के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया है और इजरायली कब्जे की लगातार निंदा की है।

क्यों हो रहा विरोध?
दरअसल, पाकिस्तान की तर्ज पर बांग्लादेश ने भी गाजा में सेना भेजने पर सैद्धांतिक चर्चा की थी, लेकिन अब देश में इस पर विरोध बढ़ गया है। कमेटी का मानना है कि इस फोर्स में शामिल होना बांग्लादेश की नैतिक और कूटनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है, खासकर जब गाजा गंभीर मानवीय संकट से गुजर रहा है। हालांकि सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।

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