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साढ़े 4 करोड़ की योजना कागजों में दबी, गोपालगंज आज भी बस स्टैंड को तरसा

गोपालगंज

गोपालगंज को जिला का दर्जा मिले 52 वर्ष का समय गुजर गया है। इसके बावजूद जिले को स्तरीय बस स्टैंड की सुविधा नहीं मिल सकी है। ऐसी बात नहीं कि इस दिशा में घोषणाएं नहीं हुई।

शहर के राजेंद्र बस पड़ाव को स्तरीय बस स्टैंड बनाने की कई बार घोषणा हुई। बस स्टैंड के लिए नए स्थान पर जमीन ढूंढने की भी बात हुई। इस बीच ना ही बस स्टैंड के लिए जमीन मिली और ना ही इसका कायाकल्प हुआ। नगर परिषद के स्तर पर इसके लिए मास्टर प्लान बनाकर नगर विकास विभाग को सौंपा गया। नगर विकास विभाग से संचिका बाहर नहीं निकलने के कारण जिला मुख्यालय को स्तरीय बस स्टैंड तक नहीं मिल सका है।

शहर का एकमात्र बस पड़ाव उपेक्षित

शहर का राजेंद्र बस स्टैंड जिले का एक मात्र मुख्य बस पड़ाव है। इस स्टैंड से सूबे की राजधानी पटना, मुजफ्फरपुर से लेकर, यूपी के गोरखपुर, वाराणसी, असम के सिलीगुड़ी तथा झारखंड के रांची तक के लिए बसें चलती हैं। हर साल इस स्टैंड की बंदोबस्ती से नगर परिषद को प्रति वर्ष करीब एक करोड़ से अधिक की आय होती है। इसके बाद भी इस स्टैंड में यात्री सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है।

यहां न तो यात्रियों के लिए बैठने की व्यवस्था है और ना ही बसों को खड़ी करने की ठीक व्यवस्था है। वर्षा होने पर पूरा बस स्टैंड परिसर जल जमाव की चपेट में आ जाता है। इससे यहां बस पकड़ने के लिए आने वाले यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।

छह वर्ष पूर्व हुई थी कायाकल्प की हुई थी पहल

वर्ष 2019 में राजेंद्र बस पड़ाव के कायाकल्प की पहल की गई। इस पहल के तहत बस स्टैंड परिसर में वातानुकूलित भवन बनाए जाने की नगर परिषद ने योजना बनाई। इस भवन में यात्रियों के बैठने की बढि़या व्यवस्था से लेकर टीवी भी लगाया जाना था। डिसप्ले पर बस के बारे में सूचना देने से लेकर बस स्टैंड परिसर में मॉल का भी निर्माण कराए जाने की बात थी। जहां रेस्टोरेंट से लेकर यात्रियों की जरूरत के सभी सामान उपलब्ध हो सकें।

इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए यहां वाई-फाई की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना तैयार की गई। इस बीच बात तैयारियों तक ही सिमटकर रह गई।

साढ़े चार करोड़ की योजना नगर विकास विभाग की संचिका में

तब करीब साढ़े चार करोड़ की योजना तैयार कर नगर परिषद ने स्वीकृति के लिए नगर विकास विभाग को भेज दिया। इस बीच यह योजना नगर विकास विभाग की फाइलों में ही दब कर रह गई। हालांकि, इसी बीच करीब दो साल पूर्व नगर विकास विभाग ने नगर परिषद को राजेंद्र बस स्टैंड का कायाकल्प करने के लिए फिर से प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया।

इस निर्देश के बाद नगर परिषद ने नया प्रस्ताव विभाग को भेज दिया, लेकिन लंबी अवधि बीतने के बाद भी अब तक नगर विकास विभाग ने इस योजना को अपनी स्वीकृति नहीं दी है।

लाचार दिखते हैं यात्री

बस स्टैंड में सुविधा के नाम पर कुछ भी उपलब्ध नहीं होने के कारण यहां आने वाले यात्री लाचार दिखते हैं। विशेष तौर पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री स्टैंड में संसाधन नहीं होने के कारण व्यवस्था को कोसते नजर आते हैं। पटना के लिए बस पकड़ने बस स्टैंड पहुंचे प्रमोद कुमार ने बताया कि सुबह आठ बजे बस स्टैंड पहुंचा। पता चला कि बस 8.40 बजे सुबह है। करीब आधे घंटे से सड़क पर बच्चों के साथ खड़ा हूं।

कहीं बैठने तक की सुविधा नहीं है। राजेश कुमार की तरह बस स्टैंड में मौजूद विकास कुमार, राजेंद्र सिंह तथा

राजेंद्र बस पड़ाव के कायाकल्प की योजना काफी पुरानी है। नगर विकास विभाग को काफी पहले इसके विस्तार की योजना भेजी गई थी। इस दिशा में अबतक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। नए स्थान पर बस स्टैंड को ले जाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भूमि चयन की प्रक्रिया पूर्ण की जा रही है।

 

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