samacharsecretary.com

बुजुर्ग विधवा मामले में HC का फैसला, बेटे की गवाही न मानकर आरोपी को किया बरी

तिरुवनंतपुरम

बुजुर्ग महिला के बलात्कार और हत्या के मामले में मौत की सजा काट रहे शख्स को केरल हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि पीड़िता के मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटे की तरफ से सबूत दिया गया था, जिसपर अभियोजन पक्ष काफी निर्भर था। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता का बेटा गवाही देने में सक्षम नहीं था और ऐसे में इस सबूत को शामिल नहीं किया जा सकता।

साल 2018 में परिमल साहू को ट्रायल कोर्ट ने 60 साल की विधवा के बलात्कार और हत्याकांड में दोषी पाया था। अभियोजन पक्ष का कहना है कि परिमल ने बुजुर्ग महिला को बेरहमी से पीटा, रेप किया और फिर हत्या कर दी थी। वारदात के समय पीड़िता अपने बेटे के साथ रह रही थी। जबकि, परिमल पीड़िता के घर के पास उसी परिसर में रहता था।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता के रिश्तेदार के बयान के आधार पर FIR दर्ज की गई थी। रिश्तेदार का कहना था कि जब वह घर पहुंचा, तो पीड़िता के बेटे ने बताया कि मुन्ना (परिमल) ने उसकी मां के सिर पर पत्थर मारा, कमरे में घसीट कर ले गया और वहां उसपर हमला किया। रिपोर्ट के अनुसार, अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से बेटे की गवाही पर आधारित था।

कोर्ट ने पाया कि डॉक्टर ने कहा है कि बेटे की मानसिक उम्र साढ़े सात साल है। जबकि, उसकी उम्र 35 साल है। इसके बाद भी ट्रायल कोर्ट ने voir dire टेस्ट नहीं कराया। कोर्ट ने कहा, 'voir dire टेस्ट का नहीं कराया जाना PW4 (बेटे) के गवाही के देने की क्षमता और विश्वसनीयता के बारे में गंभीर संदेह पैदा करता है। खासतौर से तब जब PW4 जैसे गवाहों को सिखाया पढ़ाया जा सकता है।'

हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया है कि voir dire टेस्ट का नहीं होना गवाही को खारिज करने के लिए हमेशा पर्याप्त कारण नहीं होता, लेकिन ट्रायल कोर्ट और अपील कोर्ट की जिम्मेदारी है कि गवाही की सावधानी से जांच करें। इस मामले में कोर्ट ने पाया कि पीड़िता का बेटा मुख्य परीक्षा में गवाही देने में सक्षम था, लेकिन क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान वह साधारण सवालों के भी ठीक जवाब नहीं दे सका। कोर्ट ने कहा कि इससे संकेत मिलते हैं कि बेटे को सिखाया गया है।

अभियोजन पक्ष का दावा है कि परिमल के हाथों पर बचाव के जख्मों के निशान थे, जो संकेत देते हैं कि पीड़िता ने संघर्ष किया होगा। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता पर परिमल के कोई स्किन सेल नहीं मिले और जुटाए गए अन्य सबूत भी डीएनए टेस्टिंग के लिए पर्याप्त नहीं है। मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस एके जयशंकरन नाम्बियार और जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने परिमल को बरी कर दिया।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here