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गौरवशाली विरासत खतरे में! जहांगीरिया स्कूल के बंद होने की कगार पर उठे सवाल

भोपाल  दीवारों में दरारें, सीलन से भीगी ईंटें और कक्षाएं जो अब खंडहरों जैसी नज़र आती हैं, ये किसी प्राकृतिक आपदा के बाद की तस्वीरें नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के हजारों सरकारी स्कूलों की हकीकत है. राज्य सरकार की ओर से स्कूली शिक्षा के लिए इस साल 3,000 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत इस राशि के प्रभाव से बिल्कुल अछूती दिखती है. जर्जर ढांचे, अधूरी मरम्मत और वादों के मलबे के बीच स्कूलों में पढ़ाई नहीं, बल्कि साहस की परीक्षा होती है. यहां बच्चे किताबों से कम और छत से ज़्यादा डरते हैं. भोपाल में ही विडंबना की कहानी शुरू होती है. शहर की ऐतिहासिक सदर मंज़िल, जो कभी जर्जर हालत में थी, आज एक आलीशान होटल में तब्दील हो चुकी है. इसे PPP मॉडल के तहत शानदार तरीके से रेनोवेट किया गया है. इतिहास की गरिमा बरकरार रखते हुए आधुनिकता की झलक दी गई है, लेकिन इस चमक से ठीक 800 मीटर दूर एक और इमारत है- जहांगीरिया स्कूल. ये स्कूल अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है. साल 1830 में बनी और 1901 से शिक्षा का केंद्र रही इस इमारत की दीवारों से आज पानी टपकता है, प्लास्टर झड़ चुका है और छत कभी भी गिर सकती है. ये वही स्कूल है जहां भारत के पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा पढ़े थे, जिनकी तस्वीर अब एक सीलन भरी दीवार पर लटकी है. कुछ महीने पहले एक कक्षा की छत का हिस्सा अचानक ढह गया. बाहर एक पोस्टर चिपका है- यह मंज़िल असुरक्षित है, लेकिन क्लास अब भी उसी मंज़िल में लगती है.  कई बार छत से गिर चुका है प्लास्टर  एक छात्रा ज़ीनत बताती है कि हर बार बारिश होती है, तो हमारी नज़र किताबों पर नहीं, छत पर जाती है. छत से प्लास्टर कई बार गिर चुका है. हमारे माता-पिता पूछते हैं कि कब मरम्मत होगी, लेकिन प्रिंसिपल हर बार यही कहती हैं बहुत जल्दी. और वो जल्दी कभी आती ही नहीं. स्कूल के पिछले हिस्से में एक कमरा पहले ही ढह चुका है. टीकमगढ़ में भी भरभराकर गिरी स्कूल की बिल्डिंग टीकमगढ़ में भी बारिश के बाद एक पुराना स्कूल भवन भरभराकर गिर पड़ा. गनीमत रही कि ये स्कूल पहले से बंद था और कोई बच्चा मौजूद नहीं था, लेकिन यह घटना इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश में ऐसे कई स्कूल हैं, जो अब केवल दुर्घटना के इंतज़ार में खड़े हैं.  भोपाल की तत्कालीन बेगम के आग्रह पर दान में दी थी इमारत भोपाल के जहांगीरिया स्कूल की कहानी तब और भावुक हो जाती है, वे उसी परिवार से हैं जिन्होंने ये इमारत राज्य को दान दी थी. शहनाज़ बताती हैं कि ये बिल्डिंग भोपाल की तत्कालीन बेगम के आग्रह पर दान में दी गई थी, ताकि बच्चे पढ़ सकें. लेकिन आज शहनाज़ की आंखों में आंसू हैं. उन्होंने कहा कि  हर साल बजट पास होता है, लेकिन कभी स्कूल तक नहीं पहुंचता. जब विरासत भवनों को होटल बनाया जा सकता है, तो इस स्कूल को क्यों नहीं बचाया जा सकता? सुल्तानिया स्कूल भी कमजोर ढांचे में तब्दील  भोपाल का सुल्तानिया स्कूल भी अब कमजोर ढांचे में तब्दील हो चुका है. 50 साल पुरानी इस इमारत में बारिश के दौरान छत टपकती है. दीवारें रिसती हैं और बिजली की तारें खुलकर लटकती हैं. स्कूल का निचला तल पूरी तरह बंद कर दिया गया है. हालांकि इसका कोई सरकारी आदेश नहीं आया, बल्कि ये निर्णय स्कूल प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए लिया है. पुरानी इलेक्ट्रिक फिटिंग बड़े हादसे को न्योता देती है.  हर पल रहता है खतरा प्रिंसिपल रूबीना अरशद ने ऐसी फाइलें दिखाईं जिनमें कई सालों की चिट्ठियां, निवेदन और रिमाइंडर दर्ज हैं. दो साल पहले PWD के इंजीनियर ने साफ शब्दों में कहा था कि ये भवन असुरक्षित है, इसे गिराकर दोबारा बनाया जाना चाहिए, लेकिन तब से फाइलें, दूसरी फाइलों में ही दबी हैं. महिला शिक्षक रशीदा और सुषमा हर दिन क्लास लेती हैं, इस डर के साथ कि कहीं आज कुछ टूट न जाए. क्या बोले स्कूली शिक्षा मंत्री?  स्कूली शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से सवाल किया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि हां, खामियां हैं. मंत्री राव उदय प्रताप ने ये भी कहा कि आजतक इसके पहले भी कई बार जर्जर स्कूल को लेकर कई रिपोर्ट कर चुका है, जिसके आधार पर उन्होंने कई बार संज्ञान भी लिया है. उन्होंने कहा कि मरम्मत के लिए वित्त विभाग को भेजा गया है, स्वीकृति का इंतज़ार है. कुछ बजट विभाग के पास है जिससे जल्द ही मरम्मत का काम शुरू होगा. बच्चों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट भी किया जाएगा और सरकार इसे लेकर चिंतित है. जल्द काम पूरा होगा.  

दुबई और स्पेन दौरे पर 13 जुलाई से रवाना होंगे सीएम यादव, विकास एजेंडे पर फोकस

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए एक बार फिर विदेश दौरे पर जा रहे हैं। उनके साथ एक प्रतिनिधिमंडल भी जाएगा। मुख्यमंत्री की यात्रा 13 से 19 जुलाई तक होगी। इस दौरान वे दुबई और स्पेन में कई विदेशी कंपनियों के सीईओ से वन टू वन चर्चा कर उन्हें मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करेंगे। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश का एक प्रतिनिधिमंडल 13 से 19 जुलाई के दौरान दुबई और स्पेन की यात्रा पर रहेगा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल व्यावसायिक बैठकों और विभिन्न कंपनियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग भी करेगा। मुख्यमंत्री के इस विदेश दौरे का उद्देश्य निवेश प्राप्त करना, प्रौद्योगिकी के पारस्परिक हस्तांतरण और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अपनी पहुंच बनाना है।  जिसमें सीएम कार्यालय के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई मुख्य होंगे। दो हिस्सों में यह यात्रा होगी। शुरु के 3 दिन वह दुबई में रहेंगे और अंतिम 3 दिन स्पेन में बिताएंगे। इस दौरान पूरा जोर मध्यप्रदेश में निवेश लाने पर रहेगा। (mp news) वन टू वन होगी चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोनों ही देशों के उ‌द्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे। वहां की सरकार के प्रतिनिधियों से भी निवेश पर संवाद होंगे। यही नहीं, मुख्यमंत्री व उनके साथ मौजूद अफसरों का दल मप्र के पुरातात्विक, वाइल्डलाइफ, धार्मिक व ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों समेत सभी प्रकार की खूबियों को दोनों देशों के सामने रखेंगे। अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के अलावा प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह, संस्कृति विभाग और पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला, औ‌द्योगिक विकास निगम के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला, सीएम कार्यालय में सचिव इलैया राजा टी और आयुक्त जनसंपर्क सुदाम पी खाड़े मुख्य होंगे। सूत्रों के मुताबिक इसके अलावा भी दल में कुछ अफसर शामिल हो सकते हैं। ये टीम अधिक से अधिक लोगों को प्रदेश में निवेश को प्रेरित करेगी। नवंबर में की थी यूके और जर्मनी की यात्रा मुख्यमंत्री नवंबर 2024 में यूके व जर्मनी की यात्रा कर चुके हैं, उसके बाद जनवरी 2025 में चार दिन के लिए जापान भी गए थे। तब उन्होंने तीनों देशों के साथ औ‌द्योगिक निवेश पर बातचीत की थी, इसका असर भोपाल के मानव संग्रहालय में 24 व 25 फरवरी को हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में देखने को भी मिला था। तब इन देशों के निवेशक शामिल हुए थे। इंदौर कॉन्क्लेव में निवेशकों से मिलेंगे सीएम इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निवेशकों से संवाद करेंगे।कॉन्क्लेव में देश के 1500 से अधिक निवेशकों, उ‌द्योगपतियों, कॉर्परिट प्रतिनिधियों की सहभागिता होगी। सीएम दोपहर 1.30 बजे कॉन्क्लेव स्थल पर पहुंचकर एक्जीबिशन का अवलोकन करेंगे, उसके बाद चार सत्रों में बैठक कर चर्चा करेंगे। पहली विदेश यात्रा में गए थे लंदन पहली विदेश यात्रा में मप्र को लंदन के 12 प्रमुख औ‌द्योगिक घरानों ने 59 हजार 350 करोड़ के निवेश प्रस्ताव दिए थे। इनमें रोजगार के अवसर भी शामिल हैं। जर्मनी : मुख्यमंत्री यहां 12 प्रमुख औ‌द्योगिक घरानों के प्रमुखों से मिले थे, वन-टू-वन बातचीत की थे। जिसमें 17 हजार 890 करोड़ के निवेश का भरोसा मिला था।

भारतीय सेना को मिलेगी नई ताकत, देश में बनेगा ब्राजील का मल्टीरोल मिलिट्री एयरक्राफ्ट C-390

नई दिल्ली ब्राजील की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) और भारत की महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स ने C-390 मिलेनियम मध्यम परिवहन विमान (Medium Transport Aircraft) के लिए साझेदारी की है. इसके अलावा, दोनों देश हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली (Airborne Warning and Control System – AWACS) के विकास में भी सहयोग कर रहे हैं. एम्ब्रेयर ने नई दिल्ली में अपनी एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी भी स्थापित की है, जो भारत में रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगी. साथ ही, ब्राजील भारत के स्वदेशी रक्षा सिस्टम जैसे आकाश मिसाइल और गरुड़ तोप प्रणाली में भी रुचि दिखा रहा है. आइए, इस साझेदारी और C-390 मिलेनियम विमान की विशेषताओं और भारत के लिए इसके फायदों को समझते हैं. भारत-ब्राजील रक्षा साझेदारी: एक नई शुरुआत भारत और ब्राजील, दोनों ही BRICS देश, रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में एक-दूसरे के पूरक हैं. भारत स्वदेशी रक्षा तकनीकों जैसे आकाश सतह-से-हवा मिसाइल (Surface-to-Air Missile) और गरुड़ तोप प्रणाली के लिए जाना जाता है, जबकि ब्राजील की एम्ब्रेयर कंपनी C-390 मिलेनियम जैसे आधुनिक परिवहन विमानों और अन्य एयरोस्पेस तकनीकों में माहिर है. दोनों देशों के बीच सहयोग की शुरुआत कई साल पहले तब हुई, जब भारत ने एम्ब्रेयर के ERJ-145 प्लेटफॉर्म पर आधारित 'नेत्रा' AWACS विमान विकसित किया. यह विमान भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए खुफिया जानकारी और निगरानी मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.  2024 में एम्ब्रेयर और महिंद्रा ने नई दिल्ली में ब्राजील दूतावास में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना के मध्यम परिवहन विमान (MTA) प्रोजेक्ट के लिए C-390 मिलेनियम को भारत में बनाना है. यह साझेदारी न केवल भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में C-390 विमानों का एक उत्पादन केंद्र (हब) बनाने की संभावना भी तलाशेगी. इसके अलावा, एम्ब्रेयर ने मई 2025 में नई दिल्ली के एयरोसिटी में अपनी सहायक कंपनी शुरू की, जो रक्षा, वाणिज्यिक उड्डयन और शहरी हवाई गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग बढ़ाएगी. ब्राजील ने भारत के आकाश मिसाइल सिस्टम में भी रुचि दिखाई है, जो 4 से 25 किलोमीटर की रेंज में हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमान और ड्रोन को मार गिराने में सक्षम है. यह सिस्टम पूरी तरह स्वचालित है. 82% स्वदेशी है, जिसे 2026-27 तक 93% स्वदेशी करने की योजना है. ब्राजील गरुड़ तोप प्रणाली और तटीय निगरानी प्रणाली (Coastal Surveillance System) में भी रुचि रखता है. दोनों देश स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के रखरखाव और संयुक्त अनुसंधान व विकास (R&D) में भी सहयोग करना चाहते हैं. एम्ब्रेयर C-390 मिलेनियम: विशेषताएं C-390 मिलेनियम एक आधुनिक, दो इंजन वाला, जेट-संचालित मध्यम परिवहन विमान है, जिसे ब्राजील की एम्ब्रेयर कंपनी ने डिजाइन किया है. यह विमान 2019 से ब्राजीलियाई वायुसेना में सेवा दे रहा है. 2023 में पुर्तगाल की वायुसेना में भी शामिल हुआ. यह विमान अपनी बहुमुखी प्रतिभा, विश्वसनीयता और कम परिचालन लागत के लिए जाना जाता है. नीचे इसकी प्रमुख विशेषताएं दी गई हैं…      पेलोड क्षमता: C-390 अधिकतम 26 टन कार्गो ले जा सकता है, जो इसे अन्य मध्यम आकार के सैन्य परिवहन विमानों (जैसे लॉकहीड मार्टिन C-130J, जो 20.2 टन ले जा सकता है) से बेहतर बनाता है.       यह दो M113 बख्तरबंद वाहन, एक बॉक्सर बख्तरबंद वाहन, एक सिकोरस्की H-60 हेलिकॉप्टर या 80 सैनिकों या 66 पैराट्रूपर्स को उनके पूर्ण गियर के साथ ले जा सकता है.  गति और रेंज     अधिकतम गति: 870 किमी/घंटा (470 नॉट या मैक 0.8).     रेंज: 26 टन पेलोड के साथ 1,852 किमी (1,080 नॉटिकल मील).     यह तेज गति और लंबी रेंज इसे त्वरित प्रतिक्रिया मिशनों के लिए आदर्श बनाती है.     इंजन: दो IAE V2500-E5 टर्बोफैन इंजन, जो इसे शक्तिशाली और ईंधन-कुशल बनाते हैं. मिशन की बहुमुखी प्रतिभा कार्गो और सैनिकों का परिवहन, हवा से हवा में ईंधन भरना (एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग), मेडिकल निकासी, खोज और बचाव, हवाई अग्निशमन और मानवीय मिशन.  यह कच्ची या अस्थायी हवाई पट्टियों (जैसे मिट्टी, बजरी) पर भी उतर और उड़ान भर सकता है.   नई ISR (Intelligence, Surveillance, Reconnaissance) वैरिएंट, जिसे C-390 IVR कहा जाता है, समुद्री निगरानी और आपदा प्रबंधन के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसमें सिंथेटिक अपर्चर रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और उन्नत संचार प्रणालियां शामिल हैं. परिचालन विश्वसनीयता 11,500 उड़ान घंटों के साथ 80% परिचालन उपलब्धता और 99% से अधिक मिशन पूरा करने की दर. 2023 में ब्राजीलियाई वायुसेना द्वारा पूर्ण परिचालन क्षमता (FOC) प्राप्त. NATO मानकों के अनुरूप. तीन घंटे से कम समय में विभिन्न मिशनों के लिए पुन: कॉन्फ़िगर किया जा सकता है. गहन देखभाल इकाई (ICU) किट, जो मानवीय मिशनों में चिकित्सा सहायता प्रदान कर सकता है.  भारत के लिए C-390 मिलेनियम के फायदे पुराने विमानों को बदलना  भारतीय वायुसेना के पास अभी एंटोनोव An-32 जैसे पुराने परिवहन विमान हैं. C-390 इनकी जगह ले सकता है और IAF की परिवहन क्षमता को बढ़ा सकता है. यह उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों (जैसे लद्दाख) और त्वरित तैनाती के लिए उपयुक्त है. मेक इन इंडिया को बढ़ावा एम्ब्रेयर और महिंद्रा भारत में C-390 के लिए एक अंतिम असेंबली लाइन (Final Assembly Line) स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. इससे भारत में उच्च-मूल्य विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय रोजगार सृजित होंगे.    यह साझेदारी भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में C-390 का क्षेत्रीय हब बना सकती है, जिससे इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों को निर्यात किया जा सकता है. तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) के साथ, भारत की रक्षा उद्योग की क्षमता बढ़ेगी. लागत: C-390 की प्रति यूनिट लागत $140-160 मिलियन अनुमानित है, जो लॉकहीड मार्टिन C-130J ($130-167 मिलियन) से थोड़ी कम है. इसकी कम परिचालन लागत और उच्च विश्वसनीयता भारत के लिए लंबे समय के लिए आर्थिक फायदा कराएगी.  नई तकनीकों का विकास    भारत की भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) एम्ब्रेयर के साथ रडार, एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के लिए सहयोग कर सकती है. इससे भारत की रक्षा तकनीक में सुधार होगा. C-390 IVR जैसे ISR वैरिएंट भारत की समुद्री निगरानी और आपदा प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ा सकते हैं.  रणनीतिक लाभ C-390 की हवा से हवा में ईंधन भरने की क्षमता भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की रेंज और मिशन अवधि को बढ़ा सकती है. यह विमान मानवीय मिशनों (जैसे COVID-19 के दौरान आपूर्ति पहुंचाना) और अंतरराष्ट्रीय सहायता मिशनों में … Read more

तीसरे देश की भूमिका से इनकार ने बढ़ाया तनाव, सेनाध्यक्ष मुनीर ने दी तीखी प्रतिक्रिया

इस्लामाबाद भारत के खिलाफ चीन और तुर्की की मदद के बाद भी बुरी तरह हाल झेलने वाले पाकिस्तान के आर्मी चीफ बौखला गये हैं। भारत के खिलाफ चीन और तुर्की के हथियार बुरी तरह से नाकाम रहे थे, जिससे चीन की पूरी दुनिया में कलई खुल गई है। वहीं तुर्की की ड्रोन इंडस्ट्री भी, जिसने पिछले कुछ सालों से भ्रम पैदा किया था, उसकी भी पोल खुल गई है। जिसके बाद अब पाकिस्तान आर्मी चीफ, चीन और तुर्की को बचाने में लगे हैं। इसीलिए उन्होंने कहा है कि 'भारत के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान की किसी ने मदद नहीं की थी।' जबकि पूरी दुनिया जान गई है कि किस तरह से चीन और तुर्की लगातार पाकिस्तान की मदद कर रहे थे। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने रावलपिंडी में दावा करते हुए कहा है कि ' भारत औप पाकिस्तान के बीच का संघर्ष पूरी तरह से द्विपक्षीय था।' यानि उन्होंने किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को नकारा है, जबकि भारतीय सेना ने सबूत देकर कहे हैं कि किस तरह से चीन, पाकिस्तान की लगातार लाइव मदद कर रहा था। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल रावलपिंडी में पूरी तरह से बौखलाए थे और अनाप शनाप आरोप लगा रहे थे। अपनी हार छिपाने और पाकिस्तान की जनता को बर्गलाने के लिए असीम मुनीर ने अपनी हताशा छिपाते हुए कहा कि "भारत की यह रणनीति ब्लॉक पॉलिटिक्स के जरिये पश्चिमी देशों की सहानुभूति लेने और खुद को क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता साबित करने की नाकाम कोशिश है।" आपको बता दें कि मई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया था और पीओके और पाकिस्तान स्थिति 9 आतंकवादी शिविरों पर सटीक हमले किए थे, जिनमें दर्जनों आतंकवादी मारे गये थे और इसके बाद भारत और पाकिस्तान की सेना के बीच करीब 4 दिनों तक संघर्ष चला था। ये 1971 के बाद पहली बार था जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान के अंदर हमला किया था। भारत ने लाहौर के रडार सिस्टम को युद्ध के पहले ही दिन तबाह कर दिया था, जिससे पाकिस्तान सेना असहाय हो गई थी। पाकिस्तानी सेना ने 'तीसरे पक्ष' की भूमिका को नकारा पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR के मुताबिक सम्मेलन में भारत पर पाकिस्तान में होने वाले आतंकवादी हमलों का आरोप लगाया गया है और मारे गये जवानों के लिए फातेहा पढ़ा गया। रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में फैसला लिया गया है कि "भारत के एजेंटों और आतंकवादी प्रॉक्सी नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।" फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने कहा कि "पहलगाम के बाद की बौखलाहट" में भारत अब नए-नए प्रॉक्सी इस्तेमाल कर रहा है, जिनमें 'फितना अल खवारिज' और 'फितना अल हिंदुस्तान' जैसी शक्तियां शामिल हैं। आपको बता दें कि मई महीने में चले भारत और पाकिस्तान संघर्ष के दौरान भारत ने पाकिस्तान के करीब 11 एयरबेस पर सटीक हमले किए थे। जिनमें रावलपिंडी स्थिति नूर खान एयरबेस था। नूर खान एयरबेस पर भारतीय वायुसेना ने ब्रह्मोस मिसाइल दागी थी, जिसे इंटरसेप्ट करने में पाकिस्तान नाकाम रहा था। आपको बता दें कि तमाम रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि चीन ने पाकिस्तान को भारत के खिलाफ युद्ध के दौरान भारतीय सैन्य ठिकानों को लेकर लाइव फीड पाकिस्तान को दी थी। इसके अलावा भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पहले तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन भेजे थे, जिसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया था। हालांकि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के तमाम तुर्की ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। जिससे तुर्की के बायरकतार टीबी-2 ड्रोन का भ्रम भी टूट गया।