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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: महामारी के दौरान दर्ज केसों से तबलीगी जमात के 70 लोग बरी

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को कोविड-19 महामारी के दौरान मार्च 2020 में तबलीगी जमात से जुड़े 70 भारतीय नागरिकों के खिलाफ दर्ज 16 मामलों को खारिज कर दिया है। इन लोगों पर ये मामले वहां आयोजित कार्यक्रम में शामिल विदेशी लोगों की गुपचुप मेजबानी करने के आरोप में दर्ज किए गए थे। इस मामले में फैसला सुनाते हुए जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा, 'सभी आरोपपत्र खारिज किए जाते हैं।' इन 70 भारतीय लोगों के खिलाफ कुल 16 FIR दर्ज की गई थीं, जिन्हें उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए रद्द करने की मांग की गई थी। इस मामले में अधिवक्ता आशिमा मंडला और मंदाकिनी सिंह ने अदालत में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा। इन 70 लोगों पर आरोप था कि कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान तबलीगी जमात से जुड़े इन लोगों ने 190 से ज्यादा विदेशियों को निजामुद्दीन मरकज में पनाह दी थी। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), महामारी रोग अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम और विदेशी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। दिल्ली पुलिस ने तर्क दिया कि आरोपियों ने विदेशी नागरिकों को पनाह देकर देशव्यापी लॉकडाउन और अन्य निषेधाज्ञाओं का उल्लंघन किया था। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने मार्च 2020 में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल हुए विदेशी लोगों की मेजबानी करने के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिकाओं का विरोध किया था और कहा था कि आरोपी स्थानीय निवासियों ने कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए जारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए निज़ामुद्दीन मरकज़ में आए लोगों को शरण दी थी।  

पंचायत प्रतिनिधि लापता: इलाज का बहाना बनाकर घर से निकली, थाने में दर्ज हुई रिपोर्ट

कोंडागांव छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक 45 वर्षीय महिला जनपद सदस्य अचानक लापता हो गई है. महिला फरसगांव जनपद पंचायत की सदस्य है. वह 8 दिन पहले अपने घर से बिना कुछ कहे निकली थी और फिर न वो घर लौटी और न ही उसकी कोई खबर मिल सकी है. महिला का फोन भी 8 दिनों से स्विच ऑफ है. जानकारी के मुताबिक, फरसगांव जनपद पंचायत के वार्ड क्रमांक 8 से जनपद सदस्य रैयमती कोर्राम (45 वर्ष) के पति ने पुलिस में आज गुमशूदगी की शिकायत दर्ज कराई है. उसने बताया कि रैयमती 9 जुलाई की दोपहर 3:30 बजे घर से बिना कुछ बताए निकली और बाद में फोन कर के कहा कि वह जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए गई हुई है. लेकिन इसके बाद से वह अब तक घर नहीं लौटी. पिरजनों ने कई बार उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन नंबर अब तक स्विच ऑफ आ रहा है. महिला के वापिस घर नहीं आने पर परिजनों ने जिला अस्पताल जाकर पूछताछ की और सभी रिश्तेदारों से संपर्क कर पतासाजी की. लेकिन कहीं से रैयमती कोई खबर नहीं मिली. अंत में महिला के पति ने फरसगांव थाने में गुमशूदगी की शिकायत दर्ज कराई है. शिकायतकर्ता (पति) ने बताया कि महिला ने 9 जुलाई को लाल रंग की साड़ी पहनी थी. उसने बैग में कपड़े रखे थे, गले में सोने का मंगलसूत्र, कानों में सोने के टॉप्स और नाक में सोने की फूली पहनी हुई थी. उनका रंग सांवला और कद करीब 5 फुट है. वह हिंदी, हल्बी और छत्तीसगढ़ी भाषा बोलने में सक्षम हैं. पुलिस जांच में जुटी फिलहाल पुलिस मामला दर्ज कर सुराग जुटाने में लगी है. परिजनों ने भी आमजन से अपील की है कि यदि रैयमती कोर्राम के बारे में कोई जानकारी मिले तो नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दें.

बेगुनाही साबित होने पर रिहा हुआ नेत्रहीन दिव्यांग, गांव में हुआ जोरदार स्वागत

चुरू बिना किसी अपराध के दो महीने से जेल में बंद नेत्रहीन दिव्यांग अमीचंद जब रिहा होकर अपने गांव भीमसाना लौटे, तो गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। न्यायालय से रिहाई का आदेश जैसे ही शाम 4 बजे तारानगर जेल पहुंचा, परिवारजन और ग्रामीणों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। जेल से बाहर आते ही अमीचंद का फूलमालाओं और डीजे साउंड के साथ जोरदार स्वागत किया गया। गांव तक पूरे रास्ते डीजे बजता रहा और लोग नाचते-गाते अमीचंद को घर लेकर पहुंचे। इस मौके पर क्षेत्रवासियों ने भी इस अन्याय के विरुद्ध अपनी एकजुटता का परिचय दिया। इस मामले में एडवोकेट हरदीप सुंदरिया ने अमीचंद की ओर से नि:शुल्क पैरवी कर इंसानियत की मिसाल कायम की। कोर्ट ट्रायल शुरू होने से पहले ही उन्होंने यह साबित कर दिया कि अमीचंद निर्दोष हैं। 14 मार्च को तारानगर थाना क्षेत्र के झोथड़ा गांव में मारपीट और अपहरण की एक घटना हुई थी। इस संबंध में पुलिस ने मामला दर्ज किया था, जिसमें कुल पांच आरोपी शामिल थे। वीडियो साक्ष्यों के आधार पर घटना में शामिल एक आरोपी भीमसाना निवासी पवन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था लेकिन आरोप है कि आरोपी पवन ने जांच अधिकारी धर्मेंद्र मीणा से मिलीभगत कर षड्यंत्रपूर्वक अपने ही गांव के नेत्रहीन दिव्यांग अमीचंद को फर्जी रूप से आरोपी बनाकर पेश करवा दिया। बिना उचित जांच के चार्जशीट अमीचंद के खिलाफ दाखिल कर दी गई और उन्हें जेल भेज दिया गया, जबकि असली आरोपी खुलेआम घूमता रहा। इतना ही नहीं पवन अमीचंद के परिजनों को यह कहकर गुमराह करता रहा कि अमीचंद जम्मू ट्रांसपोर्ट ऑफिस के किसी कार्य से गया हुआ है। परिजनों को इस साजिश की भनक तक नहीं लगी। अब दिव्यांग अमीचंद की रिहाई से जहां एक ओर परिवार को राहत मिली है, वहीं यह मामला न्यायिक व्यवस्था और पुलिस जांच की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब क्षेत्र में मांग उठ रही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और असली दोषियों को दंडित किया जाए।

स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग: जयपुर की डबल कामयाबी, ग्रेटर और हैरिटेज दोनों आगे

जयपुर स्वच्छ रैंकिंग में जयपुर ग्रेटर नगर निगम और हैरिटेज निगम ने बड़ी छलांग लगाई है। स्वच्छ सर्वेक्षण में जयपुर ग्रेटर को 16वीं तथा हेरिटेज को 20वीं रैंकिंग मिली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय आवासन और शहरी मंत्रालय की ओर से आयोजित एक समारोह में स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 पुरस्कार दिए। गौरतलब है कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2023-24 में जयपुर हैरिटेज नगर निगम 171वें स्थान पर था, जबकि ग्रेटर नगर निगम 173वें पायदान पर था। इस लिहाज से दोनों निगमों ने सर्वेक्षण में बड़ी छलांग लगाई है। वहीं 20 से 50 हजार की जनसंख्या में राजस्थान के डूंगरपुर ने देशभर में टॉप किया है। जयपुर ग्रेटर नगर निगम की महापौर सौम्या गुर्जर ने सोशल मीडिया पर इस अवॉर्ड की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत आज ग्रेटर जयपुर को स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 पुरस्कार के तहत राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार प्राप्त हुआ। यह सम्मान नगर निगम ग्रेटर की समर्पित टीम, स्वच्छता योद्धाओं और हर उस जागरूक नागरिक को समर्पित है, जिनके सहयोग से जयपुर ने देशभर पहली बार में 16वां स्थान प्राप्त किया। मैं समस्त जयपुरवासियों को बधाई देती हूं और आग्रह करती हूं कि स्वच्छता को केवल जिम्मेदारी नहीं संस्कार बनाएं ताकि अगली बार हम सब मिलकर जयपुर को शीर्ष स्थान पर लाएं। रैंकिंग सुधारने के लिए हाल ही में नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज ने वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, कंस्ट्रक्शन वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट की शुरुआत की थी। निगम के अंकों में बढ़ोतरी के लिए अहम रहा। दोनों निगमों की टीमों ने इस बार काफी मेहनत की और सर्वेक्षण की तैयारियों और सर्वे का काम पूरा करवाया गया। इस कारण जयपुर ग्रेटर नगर निगम और जयपुर हैरिटेज नगर निगम ने रैंकिंग में एक लंबी छलांग लगाई।

कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं को मिलेगा वीआईपी अनुभव, सुरक्षा, फलाहार और आराम का पूरा ख्याल, सरकार ने की विशेष व्यवस्थाएँ

इंदौर  कांवड़ यात्रा करते-करते अगर आप थक जाएं और आपको आराम करने के साथ स्वादिष्ट व्यंजन चखने का मन करें, तो आपके लिए राज्य सरकार की ओर से तैयार किए गए कांवड़ कैंप में तमाम सुख सुविधाओं की व्यवस्था की गई है. जहां आपके रहने और खाने से लेकर तमाम व्यवस्था निशुल्क की गई है. उत्तर प्रदेश की राह पर एमपी मध्य प्रदेश में अब कावड़ यात्री सरकार के वीआईपी अतिथि होंगे, क्योंकि कांवड़ियों को मोहन यादव सरकार ने खाने पीने से लेकर रहने तक की सुविधा देने का फैसला किया है. जिसकी तैयारियां खंडवा इंदौर मार्ग पर हो गई हैं. दरअसल, श्रावण मास शुरू होते ही शिव के दर्शन के लिए कावड़ यात्रियों की बड़ी संख्या में उज्जैन और ओंकारेश्वर सहित शिव तीर्थों की ओर से यात्रा आरंभ हो चुकी है. लिहाजा उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर सीएम मोहन यादव ने भी यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. जिसके बाद इंदौर जिले में कांवड़ यात्रियों के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है. भोजन एवं फलाहार की विशेष व्यवस्था मुख्यमंत्री के निर्देश पर कावड़ यात्रियों के लिए राजोदा (सांवेर रोड) और बाईग्राम (खंडवा रोड, महू क्षेत्र) में ठहराव, भोजन और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई हैं. इसी प्रकार इंदौर-उज्जैन महाकालेश्वर मार्ग पर राजोदा ग्राम में रामा फास्फेट फैक्ट्री के सामने और इंदौर-ओंकारेश्वर मार्ग पर बाईग्राम में वाटरप्रूफ डोम बनाए गए हैं, जिनमें यात्रियों को शयन, भोजन, चाय, फलाहार और प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही है. भोजन की व्यवस्था प्रतिदिन 8 बजे से रात्रि 10 बजे तक रहेगी. उपवास वाले कांवड़ियों का खास ख्याल कांवड़ यात्रियों के साथ चलने वाले श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए कैंपों में चाय, रोटी, पूरी, सब्जी, दाल, चावल, खिचड़ी आदि भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. वहीं, उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया है. उनके लिए फलाहार में मोरधन की खिचड़ी, केले, ककड़ी तथा साबूदाने की खिचड़ी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उपवास वाले यात्री भी बिना कठिनाई के अपनी यात्रा पूरी कर सकें. खंडवा रोड पर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध श्रावण मास के अवसर पर इंदौर-खंडवा रोड में ट्रक भार वाहक वाहनों की आवाजाही सुबह 8 बजे से रात्रि 9 बजे तक (केवल श्रावण मास हेतु) प्रतिबंधित रहेगी. उक्त वाहन एबी रोड होते हुए सनावद की ओर जा सकेंगे. यह प्रतिबंध केवल भारी मालवाहक वाहनों पर लागू होगा. यात्री बस, कार, जीप, दोपहिया वाहन, दूध-वाहन, एलपीजी गैस सप्लाई, पानी टैंकर, एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहन आदि आवश्यक सेवाओं से संबंधित वाहन प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे. कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा, "कांवड़ यात्रा को देखते हुए इंदौर-खंडवा रोड में भारी वाहनों की आवाजाही को प्रतिबंधित किया गया है. इस साल से हम लोगों ने दो जगहों पर कांवड़ियों के लिए सुविधा केंद्र बनाने का फैसला किया है. जहां पर विभिन्न प्रकार की सुविधाएं दी जाएंगी."

आतंकी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई: छांगुर बाबा का भतीजा सब्रोज गिरफ्तार

बलरामपुर  उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में विवादों में घिरे जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के नजदीकी लोगों पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार शिकंजा कस रही हैं। गुरुवार देर रात 1 बजे स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने उनके भतीजे मोहम्मद सब्रोज को गिरफ्तार कर लिया। सब्रोज उतरौला थाना क्षेत्र के रेहरा माफी गांव का निवासी है, जहां छांगुर बाबा ने अपनी पत्नी को 2 बार चुनाव लड़वाया था। मिली जानकारी के मुताबिक, एसटीएफ की टीम गुरुवार रात लगभग 1 बजे उतरौला बस स्टॉप पर पहुंची, जहां सब्रोज मोटरसाइकिल पर खड़ा था। टीम ने उसे रोककर पूछताछ शुरू की और मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। मोहम्मद सब्रोज का नाम पहले से ही एटीएस की एफआईआर में दर्ज था। इस गिरफ्तारी के बाद छांगुर बाबा के नेटवर्क के अन्य सहयोगियों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। एसटीएफ पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। एटीएस गवाह पर हमला इससे पहले अवैध धर्मांतरण के मामले में बयान ना बदलने पर छांगुर बाबा के गुर्गों ने एटीएस के गवाह हरजीत कश्यप पर हमला किया था। हरजीत को बुरी तरह से पीटा गया और जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हरजीत कश्यप ग्राम रसूलाबाद के निवासी हैं और उन्होंने छांगुर पर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया था। हरजीत के अनुसार, छांगुर के गुर्गों रियाज, कमालुद्दीन और नव्वाब ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि रसूलाबाद गांव पाकिस्तान जैसा है, और यहां रहकर मुसलमानों से बगावत करने पर उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ ही धमकी दी कि योगी सरकार के बाद उनकी कार्रवाई की जाएगी। बयान देने के बाद हुई मारपीट हरजीत ने बताया कि उन्होंने 3 जुलाई को लखनऊ में छांगुर बाबा के खिलाफ जबरन धर्म परिवर्तन कराने के मामले में बयान दिया था। इसके बाद 7 जुलाई को वे दवा लेने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जा रहे थे, तभी उतरौला चौराहा के पास तीनों आरोपियों ने उन्हें रोककर पीटना शुरू कर दिया और 24 घंटे के अंदर लखनऊ जाकर बयान बदलने की धमकी दी। प्रभारी निरीक्षक उतरौला कोतवाली अवधेश राज सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।   छांगुर के करीबी की तलाश एटीएस की टीम बीते मंगलवार रात गोंडा के धानेपुर क्षेत्र के रेतवागाड़ा गांव में छांगुर बाबा के एक करीबी की तलाश में पहुंची। जांच के दौरान रमजान नाम के शख्स का नाम सामने आया। वह कव्वाली कार्यक्रमों में ढोलक बजाता था और इसी सिलसिले में उसकी मुलाकात छांगुर से हुई थी। कहा जाता है कि छांगुर ने रमजान को धर्म परिवर्तन के लिए लोगों को तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। ग्रामीणों के अनुसार रमजान की 2024 में मौत हो गई। एटीएस ने रमजान के नाम वाले एक अन्य व्यक्ति के बारे में भी जानकारी जुटाई है। प्रशासन इस पूरे मामले में सतर्क है और छांगुर बाबा के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रहा है।  

मौलवी की मौजूदगी में नाम परिवर्तन, युवक ने पत्नी पर धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश का लगाया आरोप

कर्नाटक  कर्नाटक में धर्मांतरण के लिए मजबूर करने का एक मामला सामने आया है। खबर है कि यहां एक युवक के आरोप हैं कि उसकी पत्नी ने धर्म बदलने पर मजबूर किया है। साथ ही आरोप हैं कि ऐसा नहीं करने पर रेप का केस करने की धमकी देती थी। उन्होंने पत्नी के परिवार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने BNS यानी भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विशाल कुमार गोकावी नाम के शख्स ने बताया है कि वह तीन सालों से तहसीन हुस्मानी के साथ रिलेशन में हैं। उन्होंने बताया कि दोनों ने नवंबर 2024 में शादी को रजिस्टर करा लिया था। उनके आरोप हैं कि शादी के बाद हुस्मानी ने उसपर दोबारा मुस्लिम रीति रिवाज से शादी करने का दबाव बनाया। रिपोर्ट के अनुसार, शांति बनाए रखने के लिए विशाल ने सहमति दे दी और अप्रैल 2025 में मुस्लिम रीति रिवाज से शादी कर ली। अब विशाल का दावा है कि शादी समारोह के दौरान बगैर बताए उनका नाम बदल दिया गया। उन्होंने कहा है कि बगैर जाने एक मौलवी ने समारोह के दौरान धर्म परिवर्तन करा दिया। खबर है कि विवाह समारोह का वीडियो भी सामने आया है। विशाल ने कहा कि इसके बाद 5 जून को उनका परिवार हिंदू रीति रिवाजों से शादी की तैयारी कर रहा था, जिसपर हुस्मानी ने सहमति जता दी थी, लेकिन बाद में परिवार के दबाव में आकर इनकार कर दिया। उन्होंने दावा किया है कि पत्नी ने चेतावनी दी थी कि अगर धर्म नहीं बदला, तो वह उसके खिलाफ केस कर देगी। विशाल के आरोप हैं कि हुस्मानी ने मां बेगम बानो के साथ मिलकर उसे नमाज पढ़ने और जमात में जाने के लिए भी मजबूर किया।  

YouTube का नया धमाका! अब वीडियो को दे सकेंगे ‘Hype’ रिएक्शन

नई दिल्‍ली  यूट्यूब ने भारत में 'हाइप' (Hype) नाम का नया फीचर लॉन्च किया है। यह छोटे और मझोले कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अपनी पहुंच बढ़ाने और कमाई के अवसर पैदा करने का नया तरीका है। यह उन क्रिएटर्स पर केंद्रित है जिनके 500 से 5,00,000 सब्सक्राइबर हैं। यूट्यूब का हाइप फीचर एक तरह का इंगेजमेंट टूल है, जो दर्शकों को अपने पसंदीदा वीडियो को 'हाइप' करने की सुविधा देता है। यह 'लाइक', 'शेयर' और 'सब्सक्राइब' से परे जाकर क्रिएटर्स को समर्थन देने का नया तरीका है। छोटे कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अक्सर नए दर्शकों तक पहुंचना बड़ी चुनौती होती है। भले ही उनके पास एक समर्पित फैनबेस हो। एल्गोरिथम बड़े चैनलों को अधिक प्राथमिकता देता है। गेम चेंजर हो सकता है साब‍ित हाइप फीचर छोटे क्रिएटर्स को 'लेवल प्लेइंग फील्‍ड' प्रदान करता है। जब दर्शक किसी वीडियो को हाइप करते हैं तो उस वीडियो को पॉइंट्स मिलते हैं। कम सब्सक्राइबर वाले क्रिएटर्स के वीडियो को बोनस पॉइंट्स मिलते हैं। इससे उन्हें लीडरबोर्ड पर ऊपर आने में मदद मिलती है। बढ़ी हुई विजिबिलिटी का सीधा मतलब है ज्‍यादा व्यूज, ज्‍यादा सब्सक्राइबर और अंत में ज्‍यादा कमाई। जब कोई वीडियो 'एक्‍सप्‍लोर' सेक्शन के तहत टॉप 100 हाइप्ड वीडियो के लीडरबोर्ड में आता है या उसे यूट्यूब होम फीड में प्रमोट किया जाता है तो यह नए दर्शकों तक पहुंचता है, जिससे चैनल की ग्रोथ में तेजी आती है। ऑडियंस एनगेजमेंट की समस्‍या का समाधान दर्शक केवल यूजर होते हैं। उन्हें क्रिएटर्स का समर्थन करने के लिए सक्रिय तरीके कम मिलते हैं। Hype दर्शकों को अपने पसंदीदा क्रिएटर्स के विकास में सक्रिय रूप से भाग लेने की अनुमति देता है। यह 'पॉइंट्स' के रूप में सीधा फीडबैक देता है कि कौन सी सामग्री दर्शकों को सबसे ज्‍यादा पसंद आ रही है। मजबूत दर्शक जुड़ाव ब्रांड निष्ठा को बढ़ाता है। जब दर्शक महसूस करते हैं कि वे किसी चैनल की सफलता में योगदान दे रहे हैं तो वे अधिक लॉयल बनते हैं। यह भविष्य में मोनेटाइजेशन के नए अवसर पैदा कर सकता है, जैसे कि सशुल्क 'Hype' विकल्प या विशेष प्रशंसक लाभ। चूंकि Hype दर्शकों की ओर से दिया जाता है, यह सीधे तौर पर दर्शकों की पसंद और सामग्री की क्‍वालिटी को दर्शाता है। 'हाइप्ड वीडियो' को बैज भी मिल सकते हैं जो दर्शाते हैं कि वे दर्शकों के पसंदीदा हैं। जब गुणवत्ता वाली सामग्री को पहचान मिलती है तो यह क्रिएटर्स को बेहतर सामग्री बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह अंत में पूरे प्लेटफॉर्म पर सामग्री के समग्र स्तर को ऊपर उठाता है। इससे ज्‍यादा दर्शक आकर्षित होते हैं और विज्ञापन राजस्व बढ़ता है। छोटे क्रिएटर्स के पास अक्सर यह समझने के लिए पर्याप्त डेटा नहीं होता है कि कौन सी सामग्री सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रही है। हाइप्ड वीडियो और लीडरबोर्ड रैंकिंग क्रिएटर्स को यह समझने में मदद करेगी कि उनके दर्शक किस प्रकार की सामग्री के साथ सबसे अधिक 'वाइब' कर रहे हैं। बिजनेस पर सीधा इंपैक्ट यह डेटा क्रिएटर्स को अपनी कंटेंट स्‍ट्रैटेजी को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इससे वे ऐसी सामग्री बना सकें जो उनके दर्शकों के साथ अधिक प्रतिध्वनित हो। यह अंत में चैनल की निरंतर ग्रोथ और मोनेटाइजेशन के लिए महत्वपूर्ण है। तुर्की, ताइवान और ब्राजील में बीटा परीक्षण के शुरुआती चार हफ्तों में 50 लाख से से अधिक Hype और 50,000 से अधिक चैनलों की भागीदारी, भारत में इस फीचर की संभावित सफलता और व्यापार प्रभाव का एक मजबूत संकेत देती है।

मैनचेस्टर में बदल सकती है टीम की तस्वीर, करुण की जगह कौन लेगा?

नई दिल्ली  भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के शुरुआती तीन मैचों में भारत के ज्यादातर बल्लेबाजों ने बड़े रन बटोरे हैं लेकिन करुण नायर अच्छी शुरुआत मिलने के बावजूद उसे बड़ी पारी में नहीं बदल पा रहे हैं। क्रिकेट ने करुण नायर को दूसरा मौका दिया लेकिन इंग्लैंड दौरे पर वह इसका पूरा फायदा नहीं उठा पाए हैं और चौथे टेस्ट के लिए भारत की प्लेइंग इलेवन तय होने पर सिर्फ उन्हीं का नाम हट सकता है। आठ साल बाद अंतिम एकादश में वापसी करने वाले 33 वर्षीय खिलाड़ी को अपनी छह पारियों में से ज्यादातर में अच्छी शुरुआत मिली है लेकिन वह उसे बड़ी पारी में नहीं बदल पाए हैं। वह पिच पर अच्छी लय में दिखे, विशेषकर ड्राइव करते हुए लेकिन लेंथ से आती हुई उछाल लेती गेंदों ने उन्हें परेशान किया है। पूर्व भारतीय विकेटकीपर दीप दासगुप्ता का कहना है कि सुदर्शन को वापस लाने का समय आ गया है। लॉर्ड्स में दूसरी पारी में वह ब्रायडन कार्स की अंदर आती गेंद की लाइन एंव लेंथ का सही अनुमान नहीं लगा पाए और आउट हो गए। तीसरे नंबर पर भारत को नायर से मजबूती दिलाने की उम्मीद थी क्योंकि उन्होंने घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़ खड़ा करने के बाद राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई। भारत पांच मैचों की सीरीज में 1-2 से पीछे है और अगला मैच अभी एक हफ्ते दूर है, ऐसे में प्रबंधन को फैसला लेना होगा कि नायर के साथ बने रहें या फिर युवा साई सुदर्शन पर दांव लगाएं जिन्हें अपने पहले मैच के बाद अंतिम एकादश से बाहर कर दिया गया था। बाहर किए गए बाएं हाथ के इस शानदार बल्लेबाज कोई बड़ी गलती नहीं की और ऐसा आठवें नंबर पर एक अतिरिक्त बल्लेबाजी विकल्प को शामिल करने के लिए किया गया। भारत 23 जुलाई से शुरू होने वाले मैच में सीरीज बराबर करने की कोशिश करेगा, जिससे ओल्ड ट्रैफर्ड में एकमात्र बदलाव यही हो सकता है कि लगभग एक महीने बाद 23 वर्षीय सुदर्शन नायर की जगह टीम में चुने जाएं। इस सीरीज में कमेंटरी कर रहे पूर्व भारतीय विकेटकीपर दीप दासगुप्ता का कहना है कि सुदर्शन को वापस लाने का समय आ गया है। उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘‘आप अब भी सीरीज में बने हुए हैं क्योंकि लॉर्ड्स टेस्ट मैच भी बेहद करीबी था। नतीजा किसी भी तरफ जा सकता था। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मैं तीसरे नंबर को देख रहा हूं। क्या करुण नायर अब भी खेलते रहेंगे या आप साई सुदर्शन जैसे युवा खिलाड़ी को खिलाना चाहेंगे जो पहले टेस्ट मैच की आखिरी पारी में सहज दिखे थे? वह युवा हैं और भविष्य के लिए निवेश हैं। ’’ दासगुप्ता ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि करुण को उनके मौके मिल गए हैं। यह बात मौकों की नहीं है। इससे भी ज्यादा वह क्रीज पर कैसे दिखे। वह टुकड़ियों में सहज दिख रहे हैं लेकिन कुछ सवालों के जवाब अभी नहीं मिले हैं। और यही बात मुझे कुछ और सोचने पर मजबूर करती है। ’’ वह तीसरे नंबर के बल्लेबाज से स्थिरता की उम्मीद करते हैं जब सुदर्शन लीड्स में खेले थे तो नायर ने छठे नंबर पर बल्लेबाजी की थी। दासगुप्ता ने कहा, ‘‘तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी के लिए आपको उस दृढ़ता का अहसास होना जरूरी है। और कई बार, मुझे ऐसा नहीं लगा। ’’ शुभमन गिल की टीम घरेलू टीम के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रही है इसलिए सीरीज बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। बल्लेबाजी में एक बदलाव को छोड़कर भारत बड़े बदलाव नहीं चाहेगा। गेंदबाजी विभाग में कुलदीप यादव को और इंतजार करना होगा क्योंकि रविंद्र जडेजा और वाशिंगटन सुंदर अभी अपना काम बखूबी कर रहे हैं। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह बचे हुए दो टेस्ट में से सिर्फ एक में खेलेंगे जिससे उनके मैनचेस्टर में खेलने की उम्मीद है जिसमें भारत को जीतना जरूरी है। दासगुप्ता ने कहा, ‘‘बुमराह को खेलने के लिए तैयार रहना चाहिए। मैचों के बीच में उन्हें काफी आराम मिला है। भारत 1-2 से पीछे है तो आप उनसे खेलने की उम्मीद करेंगे। ’’

जांच में चौंकाने वाला खुलासा: फ्यूल सप्लाई खुद पायलट ने रोकी, उठे कई सवाल

अहमदाबाद  12 जून को अहमदाबाद से लंदन रवाना हुआ एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान, टेकऑफ के कुछ ही पलों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा बवाल खड़ा कर दिया है, लेकिन विवाद का केंद्र अब तकनीकी खराबी या मानवीय भूल नहीं, बल्कि अमेरिकी मीडिया की भूमिका बनता जा रहा है। क्या बोइंग को बचाने भारतीय पायलट को फंसाया जा रहा है? अमेरिका के प्रमुख अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने एएआईबी (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) की शुरुआती रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि क्रैश से पहले फ्यूल कंट्रोल स्विच को फ्लाइट के कप्तान ने खुद बंद किया था। लेकिन भारत की रिपोर्ट में ऐसी कोई बात दर्ज नहीं है। यह दावा भारतीय एविएशन एक्सपर्ट्स, पायलट संगठनों और रिपोर्टिंग एजेंसियों के लिए चौंकाने वाला है। भारत की AAIB रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि स्विच को बंद किसने किया या कैसे हुआ, लेकिन अमेरिकी मीडिया इस दिशा में उंगली उठाकर बोइंग की छवि को बचाने का प्रयास करता दिख रहा है। उस दिन क्या हुआ था? एयर इंडिया का ड्रीमलाइनर AI171, 12 जून को अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुआ था। टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद, विमान की स्पीड और थ्रस्ट अचानक गिरने लगी। कॉकपिट में सीनियर कैप्टन सुमीत सभरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर मौजूद थे। सभरवाल ने कुंदर से पूछा – “फ्यूल स्विच कटऑफ में क्यों है?” जवाब मिला – “मैंने नहीं किया।” इसी से यह सवाल खड़ा हुआ कि क्या तकनीकी खामी की वजह से स्विच ऑफ हो गया? क्या कहती है प्रारंभिक जांच? दोनों इंजनों को फ्यूल सप्लाई मिलनी बंद हो गई, जिससे विमान को पावर नहीं मिली और वह तेजी से नीचे गिरा। हादसे के बाद जब मलबा जांचा गया, तो दोनों फ्यूल स्विच कट पोजिशन में थे। इससे ऐसा लगता है कि शायद इंजनों को रीस्टार्ट करने की कोशिश की गई थी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। प्लेन के टेकऑफ के तुरंत बाद रैम एयर टरबाइन (RAM) बाहर निकल आया था, जो दिखाता है कि विमान की मुख्य पावर पूरी तरह से फेल हो चुकी थी।   अमेरिकी मीडिया का पक्षपात? भारतीय एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में बोइंग कंपनी की पहले से ही साख पर सवाल खड़े हो चुके हैं – खासकर 737 MAX हादसों के बाद। अब 787 ड्रीमलाइनर की ये घटना बोइंग के लिए और भी बड़ा झटका बन सकती थी, इसलिए जिम्मेदारी से बचने के लिए पायलटों को जिम्मेदार ठहराने की रणनीति अपनाई जा रही है।  पायलट संघ ने जताई कड़ी नाराजगी भारत के फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने इस पर कड़ा बयान जारी करते हुए कहा: “बिना जांच पूरी हुए, किसी पायलट पर दोष मढ़ना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। इससे न केवल पायलट की छवि को नुकसान होता है, बल्कि उनके परिवारों को भी मानसिक आघात पहुंचता है।” FIP ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाए और मीडिया को संयम बरतना चाहिए।