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आल फार्मेसिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुग्रीव साहू ने कई महत्वपूर्ण पदों पर सदस्यों को जिम्मेदारियां दी

भोपाल  आल फार्मेसिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुग्रीव साहू के नेतृत्व में आयोजित यूनियन की बैठक में नवीन नियुक्तियाँ की गई जिसमें राजेश रंगडाले को प्रदेश मीडिया प्रभारी, जीतू शर्मा को जिला अध्यक्ष भोपाल (शहरी), तपन शर्मा को जिला अध्यक्ष भोपाल (ग्रामीण), के.के. बाड़ोनिया को सागर प्रदेश कार्यकारिणी में विशेष आमंत्रित सदस्य, सुजल विश्वकर्मा को आई.टी. सेल, रोशनी रजक को जिला भोपाल का प्रभार दिया गया वही लाखन रूहेला भोपाल (युवा) का जिला अध्यक्ष एवं पाँच जिलों का प्रभार दिया गया। वही प्रदेश अध्यक्ष सुग्रीव साहू ने नव नियुक्तियों से यूनियन को और अधिक मज़बूती प्रदान करने तथा संचालित गतिविधियों में पारदर्शिता लाने की बात कही।

मोदी का डिप्लोमेसी डबल स्ट्राइक: यूके-मालदीव में वैश्विक मुद्दों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी यात्रा पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने विस्तार से जानकारी दी है। प्रधानमंत्री मोदी 23-24 जुलाई को यूनाइटेड किंगडम (यूके) के दो दिवसीय ​​दौरे पर रहेंगे। इसके बाद 25-26 जुलाई को उनकी मालदीव यात्रा तय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूके की आधिकारिक यात्रा पीएम कीर स्टारमर के निमंत्रण पर हो रही है। यह प्रधानमंत्री मोदी की यूके की चौथी यात्रा होगी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि यह यात्रा जरूर छोटी है, लेकिन दोनों नेताओं को द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक पहलुओं की समीक्षा करने, इसे और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा करने और क्षेत्रीय तथा वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विचार करने का अवसर देगी। विदेश सचिव ने मंगलवार को प्रेस वार्ता में कहा कि भारत-यूके साझेदारी को 2021 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में उन्नत किया गया था और तब से उच्च स्तरीय राजनीतिक संपर्क नियमित रूप से हो रहे हैं। दोनों पक्ष इस साझेदारी को और ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विक्रम मिस्री ने कहा, "ब्रिटेन के कई विश्वविद्यालय भी भारत में अपना कैंपस खोलने पर विचार कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण रिश्ते के कुछ और भी तथ्य और आंकड़े हैं। 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार 55 बिलियन डॉलर को पार कर गया। यूके भारत में छठा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसके पास कुल निवेश 36 बिलियन डॉलर का है।" खालिस्तान के विषय पर भी विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, "खालिस्तानी चरमपंथियों और उनसे जुड़े संगठनों की मौजूदगी का मुद्दा हम ब्रिटेन में अपने सहयोगियों के ध्यान में लगातार लाते रहे हैं और आगे भी लाते रहेंगे। यह न सिर्फ हमारे लिए चिंता का विषय है, बल्कि हमारे सहयोगियों के लिए भी चिंता का विषय होना चाहिए, क्योंकि यह उनके देशों में सामाजिक समरसता और सार्वजनिक व्यवस्था को भी प्रभावित करता है।" लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन टीआरएफ पर विदेश सचिव ने कहा, "अमेरिकी विदेश विभाग ने हाल ही में टीआरएफ को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया। यकीन है कि हमारे ब्रिटिश सहयोगियों को इस घटनाक्रम की जानकारी है, लेकिन इससे हमें सीमा पार आतंकवाद जैसे मुद्दों और ऐसी चुनौतियों का दृढ़ता से जवाब देने की जरूरत पर अपने विचार साझा करने का अवसर मिलेगा।" विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि प्रधानमंत्री की मालदीव यात्रा 25 और 26 जुलाई को होगी। वे मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के निमंत्रण पर इस दौरे पर जाएंगे। विक्रम मिस्री ने कहा, "प्रधानमंत्री का मालदीव दौरा निश्चित रूप से मालदीव के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय आधिकारिक बैठकों को भी शामिल करेगा। कुछ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया जाएगा।" उन्होंने यह भी कहा कि हम नई पहल के संबंध में भी कुछ घोषणाएं करेंगे, जिनका विवरण बाद में दिया जाएगा। विदेश सचिव ने कहा, "मालदीव हमारे पड़ोस में है और हमारा एक बहुत करीबी साझेदार है। यह भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और महासागर विजन का भी हिस्सा है, जो सुरक्षा और विकास के लिए क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है। संकट के समय, चाहे प्राकृतिक हो या मानवनिर्मित, हमने हमेशा मालदीव की जरूरतों का तुरंत समर्थन किया है। हमारे बीच मजबूत राजनीतिक संबंध रहे हैं, जो नियमित उच्च स्तरीय दौरों से और मजबूत होते रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "आर्थिक मोर्चे पर, भारत मालदीव का एक सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। द्विपक्षीय व्यापार लगभग 500 मिलियन डॉलर का है। भारतीय निवेशक मालदीव में पर्यटन और अन्य आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देश एक मुक्त व्यापार समझौते और एक निवेश संधि पर भी बातचीत कर रहे हैं।"

2026 से लागू होगा 8वां वेतन आयोग, करोड़ों सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ

नई दिल्ली  देशभर के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। 8th Pay Commission को लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार ने प्रारंभिक कदम बढ़ा दिए हैं। इसके लागू होने से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे। Finance Ministry ने केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के लिए प्रमुख मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों के साथ शुरुआती चर्चाएं शुरू कर दी हैं। यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एक लिखित उत्तर में साझा की है। वित्त राज्य मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय सहित विभिन्न राज्य सरकारों के साथ आठवें वेतन आयोग के संबंध में परामर्श शुरू कर दिए हैं। लोकसभा में अपने लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि सभी संबंधित पक्षों से इनपुट मांगे गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आयोग का औपचारिक नोटिफिकेशन जारी होने के बाद इसके अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। अभी तक किसी भी नाम की घोषणा नहीं की गई है। कब लागू होगा आठवां वेतन आयोग? 8वें वेतन आयोग की आधिकारिक सिफारिशें तैयार नहीं हुई हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इनका क्रियान्वयन पूर्व के वेतन आयोगों द्वारा निर्धारित पैटर्न के अनुसार ही किया जाएगा। गौरतलब है कि सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) का गठन फरवरी 2014 में हुआ था, लेकिन इसकी सिफारिशों को 1 जनवरी, 2016 से लागू किया गया था। इसी तर्ज पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2026 की शुरुआत से लागू की जा सकती हैं। पंकज चौधरी ने नए वेतन आयोग के लागू होने के सवाल पर आगे कहा कि आठवें केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा सिफारिशें किए जाने और सरकार द्वारा इन्हें स्वीकार किए जाने के बाद ही इनका कार्यान्वयन किया जाएगा।   50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनर्स को मिलेगा फायदा आठवें वेतन आयोग के लागू होने से देशभर के करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 65 लाख से ज़्यादा पेंशनर्स को सीधा लाभ मिलेगा। जब तक नया वेतन आयोग अपनी सिफारिशें प्रस्तुत नहीं कर देता और सरकार की ओर से इन्हें मंज़ूरी नहीं मिल जाती, तब तक कर्मचारियों की सैलरी या पेंशन स्ट्रक्चर में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं होगा। हर साल दो बार होने वाले DA में बढ़ोतरी का लाभ उन्हें मिलता रहेगा। महंगाई भत्ते में 4% तक की बढ़ोतरी की उम्मीद सरकार कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन को महंगाई भत्ते (DA) के ज़रिए संशोधित करती है, जिसका ऐलान हर 6 महीने में समीक्षा के बाद किया जाता है। डीए हाइक सीधे AICPI-IW  से जुड़ा होता है. महंगाई भत्ते में आमतौर पर हर साल जनवरी और जुलाई में संशोधन किया जाता है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि 8वां वेतन आयोग लागू होने पर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाला DA 60% तक पहुंच सकता है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2025 में AICPI-IW इंडेक्स 143 था, जो मई तक 144 पर पहुंच चुका है। ऐसे में DA और DR में 3 से 4 % तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जो 1 जुलाई से प्रभावी मानी जाएगी> इस संबंध में सरकार सितंबर या अक्टूबर में घोषणा कर सकती है>

श्रावण अष्टमी पर 10 दिवसीय मेला: माता चिंतपूर्णी में भक्ति और परंपरा का संगम

ऊना उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर में 25 जुलाई से 3 अगस्त तक श्रावण अष्टमी मेले का आयोजन किया जाएगा। एसडीएम अंब सचिन शर्मा ने इसे लेकर शुक्रवार को माईदास सदन चिंतपूर्णी में संबंधित अधिकारियों की बैठक ली और मेले के सफल आयोजन को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने जानकारी दी कि श्रावण अष्टमी मेले के दौरान एडीसी ऊना मेला अधिकारी, एसडीएम अंब सहायक मेला अधिकारी जबकि एएसपी ऊना को पुलिस मेला अधिकारी तथा डीएसपी अंब को सहायक पुलिस मेला अधिकारी नियुक्त किया गया है।  सचिन शर्मा ने कहा कि मेले के दौरान माता श्री चिंतपूर्णी का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए चौबीसों घंटे खुला रहेगा। साफ-सफाई के लिए रात्रि के दौरान मंदिर को केवल एक घंटे के लिए बंद किया जाएगा। दोपहर को मां के श्रृंगार व भोग इत्यादि के लिए भी मंदिर कुछ समय के लिए बंद रहेगा।   लंगर लगाने की लेनी होगी अनुमति एसडीएम ने बताया कि श्रावण अष्टमी मेले के दौरान लंगर लगाने की अनुमति लेना अनिवार्य रहेगा। आयोजक को लंगर की समाप्ति के बाद साफ-सफाई भी सुनिश्चित करनी होगी। इसके अलावा मेले के दौरान डीएफएससी ऊना खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर नियमित रूप से निरीक्षण करेंगे। नियमों की अवहेलना करने पर होगी कार्रवाई एसडीएम ने कहा कि मेले के दौरान ढोल नगाड़े, चिमटा, लाउडस्पीकर इत्यादि बजाने और प्लास्टिक व थर्मोकोल के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा मालवाहक वाहनों के माध्यम से माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर आने पर पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।   दस सेक्टरों में बांटा जाएगा क्षेत्र मेले के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेला क्षेत्र को दस सेक्टरों में बांटा जाएगा। सुरक्षा के दृष्टिगत पर्याप्त मात्रा में पुलिस व होमगार्ड के जवानों सहित त्वरित कार्य बल की टीमें तैनात रहेंगी। सभी सेक्टरों की निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तमाम इंतजाम एसडीएम सचिन शर्मा ने बताया कि मेले के दौरान सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए जगह-जगह अस्थाई शौचालय बनाए जाएंगे तथा ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए रिकवरी वैन तैनात की जाएगी। भिक्षावृत्ति पर भी पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा तथा इसे लेकर जिला बाल संरक्षण अधिकारी की टीमों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाएगा। मेले में श्रद्धालुओं को चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने के लिए विभिन्न स्थानों पर एलोपैथिक तथा आयुर्वेदिक कैंप स्थापित किए जाएंगे। किसी भी आपदा अथवा आग इत्यादि की घटना से निपटने के लिए अग्निशमन वाहन तैनात रहेंगे। साथ ही मेलावधि के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की उचित सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को मेला शुरू होने से पूर्व सड़कों की व्यवस्था को भी दुरूस्त करने के भी निर्देश दिए। एसडीएम ने निजी सराय प्रबंधकों को सरायों में अग्निशमन उपकरण लगाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन इनकी जांच भी करवाएगा। उन्होंने विद्युत विभाग को मेलावधि के दौरान विद्युत आपूर्ति सुचारू रखने के लिए विद्युत लाइनों का आवश्यक रखरखाव करना सुनिश्चित करने को कहा ताकि मेले के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके अलावा मेले के दौरान अस्थाई रूप से अतिरिक्त स्ट्रीट लाईटें भी लगाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि मेले के दौरान पीने के पानी के लिए प्याऊ भी लगाए जाएंगे। उन्होंने जल शक्ति विभाग को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए जल भंडारण टैंकों का क्लोरिनेशन करना भी सुनिश्चित करें। बैठक में एएसपी ऊना संजीव भाटिया, सीएमओ डॉ संजीव वर्मा, प्रधान ग्राम पंचायत छपरोह शशि कालिया, प्रधान नारी पंचायत अल्का, गंगोट की प्रधान एश्वर्या, डूहल भंगवाल की प्रधान प्रतिभा और अप्पर लोहारा की प्रधान संगीता वाला सहित अन्य मौजूद रहे। 

खाद्य सुरक्षा पर सवाल: आलू, प्याज और रोटी अब नहीं रहे सुरक्षित – इंटरनेशनल स्टडी का दावा

नई दिल्ली  जलवायु परिवर्तन देखते-देखते हमारी थाली और जेब तक पहुंचने लगा है. शोधकर्ताओं ने बताया कि क्लाइमेट चेंज के कारण कहीं रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो रही है तो कहीं बाढ़ तो वहीं कुछ जगहें भीषण सूखा या अकाल का सामना कर रही हैं. इसका सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ रहा है.  खेती कैसे हो रही है प्रभावित? जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर दुनिया भर में होने वाली खेती पर काफी बुरे तरीके से पड़ रहा है. खेती कम होने के कारण अनाज, फल और सब्जियों के दाम को बढ़ाया जा रहा है. अगर इसी तरह से मौसम बिगड़ता रहा तो आने वाले समय में गरीब देश कुपोषण, राजनीतिक समस्या और समाज में अशांति की समस्या से जूझ रहे होंगे. किन-किन चीजों के दाम में आया उछाल? ब्रिटेन की एनर्जी एंड क्लाइमेट इंटेलीजेंस यूनिट, European Central Bank, फूड फाउंडेशन और पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इमपैक्ट के संयुक्त अध्ययन में 2022 और 2024 के बीच 18 देशों के मौसम का डाटा लिया गया जिसमें पाया गया कि खाने वाली चीजों के दाम में बढ़ोतरी का कनेक्शन गर्मी, सूखा और बारिश से था. शोध से पता चला कि बीते साल ब्रिटेन में आलू, साउथ कोरिया में पत्तागोभी और घाना में कोको के दाम में तेजी से उछाल आया. इनकी वजह असामान्य मौसम था. खेती करने में क्या आ रही है मुश्किल? Climate Change ने खेती को चुनौतीपूर्ण बना दिया है. लंबे समय तक सूखा पड़ने से फसलें बर्बाद हो जाती हैं. तेज बहाव के साथ आने वाली बाढ़ ऊपजाऊ मिट्टी को अपने साथ बहा ले जाती है. इसके बाद उस जगह पर सिर्फ ऐसी जमीन रह जाती है जिस पर खेती करना बहुत मुश्किल काम हो जाता है. इसके बाद अनाज की कमी और मंहगाई की वजह से परिवारों को बुनियादी पोषण का खर्च उठाना भी मुश्किल हो जाता है.  आलू-प्याज पर भी खतरा? इसी शोध में ये भी पाया गया कि साल 2022 के मुकाबले भारत में जून 2024 तक प्याज और आलू के दाम 89 फीसदी तक बढ़े थे. यहीं हाल बाकी देशों का भी है. बता दें कि मोजाम्बिक में जब ब्रेड की कीमत बढ़ी थी तो लोग सड़कों पर उतर आए थे. शोधकर्ता मैक्सिमिलियन कोट्ज ने कहा कि, जब खाने की चीजें महंगी होती हैं तो गरीबों को कम पोषण मिलता है जिसका असर स्वास्थ्य पर पड़ता है. 

फ्लाइट से राखी पहुंचाना हुआ महंगा, ग्वालियर से बड़े शहरों की टिकट में तीन गुना उछाल

 ग्वालियर  रक्षा बंधन पर विमान कंपनियां भी मौके का फायदा उठाकर लोगों की जेब हल्की करने की तैयार में हैं। रक्षा बंधन (Raksha Bandhan 2025) के आसपास हवाई सफर महंगा हो गया है । ग्वालियर से दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के लिए महंगे किराये (Flight Fare Expensive)के बावजूद फ्लाइट को अच्छी बुकिंग मिल रही है, जो फेयर रक्षा बंधन से पहले कम है, वह त्योहार के सीजन में दो से तीन गुना तक हो गए हैं। महंगा किराया रक्षा बंधन के दो दिन बाद भी रहेगा। 15-16 और 17 अगस्त तीन दिन भी फ्लाइट किराया बढ़ने की उम्मीद इस त्योहार के छह दिन बाद ही 15 अगस्त की छुट्टी भी लोगों को मिलने वाली है। इस बार 15 अगस्त शुक्रवार की है 16 को जन्माष्टमी और 17 को रविवार है। ऐसे में ये तीन दिन भी छुट्टी के रहेंगे, इन दिनों में भी फ्लाइट का किराया बढ़ा रहने की उम्मीद है। अहमदाबाद की हवाई सेवा भी बंद सप्ताह में एक दिन चलने वाली अहमदाबाद की फ्लाइट पिछले महीने से बंद है। ऐसे में अब लोगों को अहमदाबाद के लिए ट्रेन का ही सहारा है। इससे कुछ दिन पहले भी हैदराबाद के साथ कोलकाता की फ्लाइट बंद हो गई थी। ट्रेनों में मिल रहा नो रूम रक्षा बंधन पर ट्रेनों में भी बुरा हाल है। मुंबई, बेंगलुरू, सहित लंबी दूरी की ट्रेनों में भी यात्रियों को टिकट नहीं मिल रहे है। इससे परेशान होकर यात्री दूसरे शहरों से ट्रेनें छोड़कर अब फ्लाइट से जाने का प्लान भी बनाने लगे हैं। यहां जानें कितना किराया देना होगा शहर           – पहले        – अब नई दिल्ली – 3071 रुपए – 10303 रुपए मुंबई – 4354 रुपए – 9179 रुपए बेंगलुरू- 5271 रुपए – 9226 रुपए 24 हजार से ज्यादा मिलते हैं यात्री ग्वालियर से हर महीने दूसरे शहरों के आने जाने वाले यात्रियों की संख्या 24 हजार के पार है। इसमें मुंबई और दिल्ली के यात्री सबसे ज्यादा होते है। लेकिन पिछले महीने जून में मुंबई के बाद दूसरे नंबर पर बेंगलुरु के यात्री थे।

‘लूट लो शेयर’! ब्रोकरेज की राय से उछला भरोसा, रिलायंस के शेयरहोल्डर्स के लिए सुनहरा मौका

मुंबई   भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने हाल ही में अपने तिमाही नतीजों से निवेशकों को थोड़ा निराश किया। नतीजे उम्मीद से कम रहे जिसके कारण सोमवार को कंपनी के शेयरों में गिरावट आई। मार्च के निचले स्तर से कंपनी के शेयर 25% तक बढ़ गए थे लेकिन उसके बाद बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हालांकि, कई बड़े ब्रोकरेज हाउस अभी भी रिलायंस को लेकर आशावादी हैं। उनका मानना है कि कंपनी में विकास की अपार संभावनाएं हैं जो आने वाले महीनों में कंपनी के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती हैं। शेयर बाजार में RIL के नतीजों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कोटक इक्विटीज ने RIL के शेयर को 'buy' से घटाकर 'add' कर दिया। वहीं, जेपी मॉर्गन और जेफरीज जैसे ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस ने कंपनी के टारगेट प्राइस को क्रमशः 8% और 5% तक बढ़ा दिया है। इससे पता चलता है कि इन ब्रोकरेज हाउस को RIL की तरक्की पर पूरा भरोसा है। यह कंपनी के 48 लाख शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर है। यहां हम उन 3 मुख्य कारणों के बारे में बता रहे हैं, जो RIL के शेयरों में तेजी ला सकते हैं: 1) जियो की ARPU में बढ़ोतरी: जियो ने पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है और उसका ARPU (एवरेज रेवेन्यू पर यूजर) बढ़कर ₹208.8 प्रति महीना हो गया है। यह पिछले तिमाही के मुकाबले 1.3% ज्यादा है। बर्नस्टीन के अनुसार, जियो ने मार्जिन के मामले में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन अभी और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। जेफरीज के विश्लेषकों का अनुमान है कि जियो का ARPU FY25-28 के दौरान 11% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़कर ₹273 तक पहुंच सकता है। उनका मानना है कि जियो टैरिफ में तीन बार 10% की बढ़ोतरी करेगा, जिससे ARPU में वृद्धि होगी। इसके अलावा होम ब्रॉडबैंड यूजर्स की संख्या में वृद्धि भी ARPU को बढ़ाने में मदद करेगी। जियो ने 498.1 मिलियन नए सब्सक्राइबर्स जोड़े हैं, जो तिमाही-दर-तिमाही 1.7% की वृद्धि है। कंपनी का EBITDA मार्जिन 51.8% तक पहुंच गया है, जो तिमाही-दर-तिमाही 170bps की वृद्धि है। जियो का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹410.5 बिलियन रहा, जो साल-दर-साल 18.8% की वृद्धि है। रिलायंस को नतीजे में मिला दमदार मुनाफा, लेकिन BSE में 3% क्यों गिर गए शेयर? 2) नया ऊर्जा कारोबार: RIL नए ऊर्जा कारोबार में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि अगले चार से छह तिमाहियों में गीगा फैक्ट्रियां और नई ऊर्जा परियोजनाएं (पॉलीसिलिकॉन, वेफर, सेल, मॉड्यूल, बैटरी) पूरी हो जाएं। बर्नस्टीन के अनुसार रिलायंस का गीगा कॉम्प्लेक्स टेस्ला की गीगा फैक्ट्री से 4 गुना बड़ा होगा। कंपनी की योजना है कि अगले साल मार्च तक सोलर सेल की क्षमता को चालू कर दिया जाए। कंपनी का कच्छ स्थित 7,000 एकड़ का साइट 125GW बिजली पैदा करने की क्षमता रखता है। नुवामा के विश्लेषण से पता चलता है कि RIL के नए ऊर्जा कारोबार में बहुत अधिक वैल्यू है। अगर RIL के मॉड्यूल बिजनेस (20GW क्षमता) को 15x EV/EBITDA दिया जाए, तो इसका EV $20 बिलियन होगा। इससे RIL के स्टॉक प्राइस में तेजी आ सकती है, जैसा कि 2017 में जियो के लॉन्च के बाद देखने को मिला था। नुवामा का मानना है कि नया ऊर्जा कारोबार RIL के PAT में 50% से अधिक का योगदान कर सकता है। इसके अलावा यह O2C बिजनेस के वैल्यूएशन को भी बढ़ा सकता है, क्योंकि कंपनी का लक्ष्य 2035 तक नेट जीरो-कार्बन उत्सर्जन हासिल करना है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का बिजनस मॉडल बदल रहा है। पहले कंपनी की कमाई या तो नए रिफाइनिंग/केमिकल कैपेसिटी से होती थी या मार्जिन साइकिल से। लेकिन अब रिलायंस रिटेल और टेलीकॉम का कंपनी के कंसोलिडेटेड EBITDA में लगभग 54% का योगदान है। मुकेश अंबानी की इस कंपनी पर ब्रोकरेज फर्मों ने भर कर लुटाया प्यार, बोल रहे हैं लूट लो 3) जियो IPO: जियो का IPO लंबे समय से प्रतीक्षित है। हालांकि, इसे 2025 के बाद के लिए टाल दिया गया है, लेकिन यह रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए शेयरहोल्डर वैल्यू को अनलॉक करने का एक बड़ा अवसर है। जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि रिलायंस रिटेल का वैल्यूएशन $121 बिलियन है, जो FY27E EBITDA के ~32x पर ट्रेड कर रहा है। यह DMART के 42x मल्टीपल से काफी कम है। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का कहना है कि रिलायंस रिटेल के वैल्यूएशन में किसी भी तरह की वृद्धि, चाहे वह IPO के माध्यम से हो या स्टेक सेल्स के माध्यम से रिलायंस के स्टॉक में और तेजी ला सकती है। सीएलएसए को पूरा भरोसा है कि जियो और रिटेल के बढ़ते शेयर के कारण रिलायंस का कंसोलिडेटेड Ebitda आने वाले समय में काफी बेहतर होगा। सीएलएसए का मानना है कि RIL का वैल्यूएशन अभी भी कम है, इसलिए यह भारतीय बाजार में निवेश के लिए एक अच्छा विकल्प है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि RIL का वैल्यूएशन अभी भी उचित है, जबकि बाजार में ज्यादातर स्टॉक ऐतिहासिक वैल्यूएशन से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। उम्मीद है कि RIL पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो देगा और उसका EBITDA लगभग $20 बिलियन प्रति वर्ष होगा। आने वाले हैं अच्छे दिन नोमुरा का भी मानना है कि RIL के शेयर में तेजी आएगी। नोमुरा का कहना है कि RIL का स्टॉक वर्तमान में 12.1x और 23.3x FY27F EV/EBITDA और P/E पर ट्रेड कर रहा है। नोमुरा ने RIL के लिए 'खरीदें' रेटिंग को दोहराया है। निवेशकों की नजर अब आने वाले कंपनी की AGM पर होगी। वे FMCG (फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स) में विकास योजनाओं, नई ऊर्जा सुविधाओं के विस्तार, मीडिया बिजनेस के विस्तार, रिटेल में तेजी, जियो के सब्सक्राइबर एडिशन और मोनेटाइजेशन और जियो के IPO पर घोषणाओं की उम्मीद कर रहे हैं। RIL का लक्ष्य है कि वह अपने जियो और रिटेल बिजनेस को दोगुना करे और नए ऊर्जा कारोबार को अपने O2C बिजनस के आकार तक पहुंचाए। कंपनी का लक्ष्य है कि वह FY30 के अंत तक रिलायंस के आकार को दोगुना कर दे। ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि यह लक्ष्य अब हासिल किया जा सकता है। RIL के 48 लाख शेयरधारकों के लिए अभी … Read more

‘लूट लो शेयर’! ब्रोकरेज की राय से उछला भरोसा, रिलायंस के शेयरहोल्डर्स के लिए सुनहरा मौका

मुंबई   भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने हाल ही में अपने तिमाही नतीजों से निवेशकों को थोड़ा निराश किया। नतीजे उम्मीद से कम रहे जिसके कारण सोमवार को कंपनी के शेयरों में गिरावट आई। मार्च के निचले स्तर से कंपनी के शेयर 25% तक बढ़ गए थे लेकिन उसके बाद बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हालांकि, कई बड़े ब्रोकरेज हाउस अभी भी रिलायंस को लेकर आशावादी हैं। उनका मानना है कि कंपनी में विकास की अपार संभावनाएं हैं जो आने वाले महीनों में कंपनी के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती हैं। शेयर बाजार में RIL के नतीजों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कोटक इक्विटीज ने RIL के शेयर को 'buy' से घटाकर 'add' कर दिया। वहीं, जेपी मॉर्गन और जेफरीज जैसे ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस ने कंपनी के टारगेट प्राइस को क्रमशः 8% और 5% तक बढ़ा दिया है। इससे पता चलता है कि इन ब्रोकरेज हाउस को RIL की तरक्की पर पूरा भरोसा है। यह कंपनी के 48 लाख शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर है। यहां हम उन 3 मुख्य कारणों के बारे में बता रहे हैं, जो RIL के शेयरों में तेजी ला सकते हैं: 1) जियो की ARPU में बढ़ोतरी: जियो ने पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है और उसका ARPU (एवरेज रेवेन्यू पर यूजर) बढ़कर ₹208.8 प्रति महीना हो गया है। यह पिछले तिमाही के मुकाबले 1.3% ज्यादा है। बर्नस्टीन के अनुसार, जियो ने मार्जिन के मामले में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन अभी और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। जेफरीज के विश्लेषकों का अनुमान है कि जियो का ARPU FY25-28 के दौरान 11% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़कर ₹273 तक पहुंच सकता है। उनका मानना है कि जियो टैरिफ में तीन बार 10% की बढ़ोतरी करेगा, जिससे ARPU में वृद्धि होगी। इसके अलावा होम ब्रॉडबैंड यूजर्स की संख्या में वृद्धि भी ARPU को बढ़ाने में मदद करेगी। जियो ने 498.1 मिलियन नए सब्सक्राइबर्स जोड़े हैं, जो तिमाही-दर-तिमाही 1.7% की वृद्धि है। कंपनी का EBITDA मार्जिन 51.8% तक पहुंच गया है, जो तिमाही-दर-तिमाही 170bps की वृद्धि है। जियो का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹410.5 बिलियन रहा, जो साल-दर-साल 18.8% की वृद्धि है। रिलायंस को नतीजे में मिला दमदार मुनाफा, लेकिन BSE में 3% क्यों गिर गए शेयर? 2) नया ऊर्जा कारोबार: RIL नए ऊर्जा कारोबार में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि अगले चार से छह तिमाहियों में गीगा फैक्ट्रियां और नई ऊर्जा परियोजनाएं (पॉलीसिलिकॉन, वेफर, सेल, मॉड्यूल, बैटरी) पूरी हो जाएं। बर्नस्टीन के अनुसार रिलायंस का गीगा कॉम्प्लेक्स टेस्ला की गीगा फैक्ट्री से 4 गुना बड़ा होगा। कंपनी की योजना है कि अगले साल मार्च तक सोलर सेल की क्षमता को चालू कर दिया जाए। कंपनी का कच्छ स्थित 7,000 एकड़ का साइट 125GW बिजली पैदा करने की क्षमता रखता है। नुवामा के विश्लेषण से पता चलता है कि RIL के नए ऊर्जा कारोबार में बहुत अधिक वैल्यू है। अगर RIL के मॉड्यूल बिजनेस (20GW क्षमता) को 15x EV/EBITDA दिया जाए, तो इसका EV $20 बिलियन होगा। इससे RIL के स्टॉक प्राइस में तेजी आ सकती है, जैसा कि 2017 में जियो के लॉन्च के बाद देखने को मिला था। नुवामा का मानना है कि नया ऊर्जा कारोबार RIL के PAT में 50% से अधिक का योगदान कर सकता है। इसके अलावा यह O2C बिजनेस के वैल्यूएशन को भी बढ़ा सकता है, क्योंकि कंपनी का लक्ष्य 2035 तक नेट जीरो-कार्बन उत्सर्जन हासिल करना है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का बिजनस मॉडल बदल रहा है। पहले कंपनी की कमाई या तो नए रिफाइनिंग/केमिकल कैपेसिटी से होती थी या मार्जिन साइकिल से। लेकिन अब रिलायंस रिटेल और टेलीकॉम का कंपनी के कंसोलिडेटेड EBITDA में लगभग 54% का योगदान है। मुकेश अंबानी की इस कंपनी पर ब्रोकरेज फर्मों ने भर कर लुटाया प्यार, बोल रहे हैं लूट लो 3) जियो IPO: जियो का IPO लंबे समय से प्रतीक्षित है। हालांकि, इसे 2025 के बाद के लिए टाल दिया गया है, लेकिन यह रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए शेयरहोल्डर वैल्यू को अनलॉक करने का एक बड़ा अवसर है। जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि रिलायंस रिटेल का वैल्यूएशन $121 बिलियन है, जो FY27E EBITDA के ~32x पर ट्रेड कर रहा है। यह DMART के 42x मल्टीपल से काफी कम है। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का कहना है कि रिलायंस रिटेल के वैल्यूएशन में किसी भी तरह की वृद्धि, चाहे वह IPO के माध्यम से हो या स्टेक सेल्स के माध्यम से रिलायंस के स्टॉक में और तेजी ला सकती है। सीएलएसए को पूरा भरोसा है कि जियो और रिटेल के बढ़ते शेयर के कारण रिलायंस का कंसोलिडेटेड Ebitda आने वाले समय में काफी बेहतर होगा। सीएलएसए का मानना है कि RIL का वैल्यूएशन अभी भी कम है, इसलिए यह भारतीय बाजार में निवेश के लिए एक अच्छा विकल्प है। जेपी मॉर्गन का कहना है कि RIL का वैल्यूएशन अभी भी उचित है, जबकि बाजार में ज्यादातर स्टॉक ऐतिहासिक वैल्यूएशन से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। उम्मीद है कि RIL पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो देगा और उसका EBITDA लगभग $20 बिलियन प्रति वर्ष होगा। आने वाले हैं अच्छे दिन नोमुरा का भी मानना है कि RIL के शेयर में तेजी आएगी। नोमुरा का कहना है कि RIL का स्टॉक वर्तमान में 12.1x और 23.3x FY27F EV/EBITDA और P/E पर ट्रेड कर रहा है। नोमुरा ने RIL के लिए 'खरीदें' रेटिंग को दोहराया है। निवेशकों की नजर अब आने वाले कंपनी की AGM पर होगी। वे FMCG (फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स) में विकास योजनाओं, नई ऊर्जा सुविधाओं के विस्तार, मीडिया बिजनेस के विस्तार, रिटेल में तेजी, जियो के सब्सक्राइबर एडिशन और मोनेटाइजेशन और जियो के IPO पर घोषणाओं की उम्मीद कर रहे हैं। RIL का लक्ष्य है कि वह अपने जियो और रिटेल बिजनेस को दोगुना करे और नए ऊर्जा कारोबार को अपने O2C बिजनस के आकार तक पहुंचाए। कंपनी का लक्ष्य है कि वह FY30 के अंत तक रिलायंस के आकार को दोगुना कर दे। ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि यह लक्ष्य अब हासिल किया जा सकता है। RIL के 48 लाख शेयरधारकों के लिए अभी … Read more

कूनो नेशनल पार्क में बारिश से बिगड़े हालात, चीतों के फंसने का खतरा गहरा

 ग्वालियर  कूनो नेशनल पार्क में लगातार हो रही भारी वर्षा ने एक बार फिर चीतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मादा चीता 'आशा' और उसके तीन शावक रविवार को पार्क की सीमा पार कर बागचा क्षेत्र की ओर निकल गए। इस समय जंगल में चारों ओर जलभराव और दलदल जैसी स्थिति है, जिससे ट्रैकिंग में भारी बाधा आ रही है। जंगल के बाहर पहुंचना जोखिम भरा पार्क की सीमा पार कर चुके चीतों के सामने नहर में डूबने और गड्ढों में फंसने का खतरा बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल चीता 'पवन' की मौत पानी से भरे एक गड्ढे में गिरने से हो चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए, वन विभाग की टीम विशेष सतर्कता बरत रही है, लेकिन वर्षा और रास्तों के बाधित होने के कारण ट्रैकिंग बेहद मुश्किल हो गई है। गार्ड्स और ट्रैकर्स की सीमाएं हालांकि सभी चीतों के गले में कालर आइडी लगे हुए हैं, फिर भी ट्रैकिंग टीमें बारिश के चलते मौके पर जल्दी नहीं पहुंच पा रहीं। पानी से भरे रास्तों और कीचड़ के कारण न तो गाड़ियों से पहुँचना संभव है और न ही पैदल ट्रैकिंग आसान रह गई है। इसी कारण, ट्रैकर्स और वनरक्षकों ने एक प्रस्ताव प्रबंधन के सामने रखा है कि मानसून खत्म होने तक चीतों को सुरक्षित बाड़ों में रखा जाए। संक्रमण से बचाव के उपाय कूनो डीएफओ थिरूकुरल आर ने बताया कि सभी चीतों को संक्रमण से बचाने के लिए एंटी एक्टो परजीवी दवा दी जा चुकी है। साथ ही लगातार निगरानी जारी है। कूनो नेशनल पार्क में इस समय कुल 26 चीते हैं, जिनमें 9 वयस्क (6 मादा, 3 नर) और 17 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं। इनमें से 16 चीते अब खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं। शावकों के लिए स्थिति ज्यादा संवेदनशील मादा चीतों के साथ मौजूद शावकों के लिए बारिश के मौसम में खुले जंगल में रहना और भी खतरनाक है। पानी भरे गड्ढों और दलदली जमीन में उनके फिसलने या फंसने का खतरा लगातार बना हुआ है। ट्रैकिंग रूट्स में पानी भरने से निगरानी टीमों की गतिविधि सीमित हो गई है, जो किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता में बाधा बन सकती है।

उर्दू शिक्षा को लेकर हाईकोर्ट सख्त, कहा- बिना छात्र वाले स्कूल में टीचर की पोस्टिंग नहीं

जबलपुर  मध्यप्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) ने उर्दू शिक्षक स्थानांतरण विवाद (Teacher Transfer Dispute) पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि उर्दू विषय पढ़ाने वाले शिक्षक को वहीं कार्य करने दिया जाए, जहां उर्दू शिक्षक का पद स्वीकृत है और विद्यार्थी उपलब्ध हैं। साथ ही, ट्रांसफर आदेश के खिलाफ दिए गए रिप्रेजेंटेशन का 30 दिन के भीतर निपटारा करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। यह आदेश हाई कोर्ट की एकलपीठ के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी ने आजाद चौक, कटनी निवासी इलियास अहमद की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शंकर प्रसाद सिंह और पद्मावती जायसवाल ने पक्ष रखा। क्या है मामला? याचिकाकर्ता इलियास अहमद की नियुक्ति उर्दू विषय के शिक्षक के रूप में शासकीय माध्यमिक शाला, खमरिया नंबर-दो में हुई थी। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी, कटनी ने उनका ट्रांसफर शासकीय प्राथमिक शाला कोठी, ढीमरखेड़ा में कर दिया। यहीं विवाद शुरू हुआ क्योंकि जहां उनका स्थानांतरण हुआ वहां उर्दू विषय का न तो कोई पद स्वीकृत है और न ही छात्र हैं। इलियास अहमद ने इस अन्याय के खिलाफ डीईओ कटनी, कलेक्टर कटनी और लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल को अभ्यावेदन दिया, जिसमें स्थानांतरण रद्द करने की मांग की गई। साथ ही, यह भी कहा गया कि मप्र शासन के सर्कुलर के अनुसार मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी होने के नाते उन्हें स्थानांतरण में छूट मिलनी चाहिए। लेकिन, लगातार आवेदन देने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई, जिससे विवश होकर उन्हें हाई कोर्ट का रुख करना पड़ा। हाई कोर्ट का फैसला कोर्ट ने माना कि शिक्षक की नियुक्ति विशिष्ट विषय उर्दू के लिए हुई थी। ऐसे में उस स्कूल में भेजना जहां न तो उर्दू पढ़ने वाले छात्र हैं और न ही पद स्वीकृत है, न केवल व्यावहारिक रूप से गलत है बल्कि यह शैक्षिक हितों के भी खिलाफ है। इसलिए कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को उसी मौजूदा स्कूल में कार्य करने दिया जाए, जहां उर्दू के विद्यार्थी और पद दोनों मौजूद हैं। स्थानांतरण के विरुद्ध प्रस्तुत अभ्यावेदन का निराकरण 30 दिन के भीतर किया जाए।