samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री साय बोले – नौनिहालों के पोषण के साथ ही सुरक्षित और सुनहरा भविष्य देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

  बच्चों के समुचित विकास के लिए महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग समन्वय के साथ करें कार्य अगली कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में महिलाओं और बच्चों के लिए संचालित योजनाओं की होगी गहन समीक्षा बच्चों से जुड़ी योजनाओं का हो शत-प्रतिशत गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की जिला स्तर पर नियमित समीक्षा करें कलेक्टर रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि नौनिहालों के पोषण और उनको सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य प्रदान करने के लिए राज्य सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है। बच्चों के समुचित विकास हेतु महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग को आपसी समन्वय के साथ मिलकर कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री साय ने आज  मंत्रालय महानदी भवन में महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की प्रगति एवं क्रियान्वयन की उच्च स्तरीय समीक्षा की और अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों पर केंद्रित योजनाओं की जिलेवार नियमित मॉनिटरिंग सचिव स्तर से की जाए तथा आगामी कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में इसकी गहन समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की आधारभूत संरचना, बजट और संचालित योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि विभाग बच्चों, किशोरियों और महिलाओं के पोषण एवं सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे बच्चों की देखभाल और पोषण जितनी संवेदनशीलता और कुशलता से की जाएगी, उनका शारीरिक और मानसिक विकास उतना ही प्रभावी और सुदृढ़ होगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बच्चे हमारे देश के भविष्य की नींव हैं और इस नींव को मजबूत करने के लिए सभी की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने विभागीय अमले को जमीनी स्तर पर सक्रियता और स्वप्रेरणा के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि राज्य के प्रत्येक बच्चे को पूरक पोषण आहार और विभागीय योजनाओं का समुचित लाभ प्राप्त हो। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित किए जाने वाले पोषण आहार, गर्म भोजन, उसकी मात्रा, गुणवत्ता और कैलोरी मानकों सहित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की और वितरण की प्रक्रिया की निरंतर निगरानी की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री साय ने पीएम जनमन योजना अंतर्गत संचालित 197 आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन की जानकारी ली तथा विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) समुदाय के बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने बच्चों के पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण सूचकांकों की समीक्षा करते हुए अपेक्षित सुधार लाने हेतु ठोस प्रयास करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सूचकांकों के माध्यम से वास्तविक स्थिति का आंकलन संभव होता है, और जहां भी कमी दिखाई दे, वहां त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में बेहतर प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए  निर्देश दिए कि यह प्रगति इसी प्रकार सतत बनी रहे। उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक विकास पर छोटी-छोटी बातों और व्यवहार का गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संवेदनशीलता के साथ बच्चों से भावनात्मक जुड़ाव बनाएं। मुख्यमंत्री साय ने विभागीय अमले के नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा, ताकि वे तकनीकी रूप से दक्ष और अनुसंधानपरक दृष्टिकोण के साथ परिणामोन्मुखी कार्य कर सकें। बैठक में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, सखी वन स्टॉप सेंटर, शक्ति सदन, महिला एवं चाइल्ड हेल्पलाइन, महिला कोष, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मिशन वात्सल्य तथा अन्य योजनाओं की भी समीक्षा की गई। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, राहुल भगत, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव  शम्मी आबिदी, संचालक पी. एस. एल्मा सहित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

जंगल से आई मौत: 3 साल के बच्चे को पटका, तीन की गई जान

रायगढ़ छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के जंगलों में विचरण कर रहे हाथियों का उत्पात थमने में नाम नहीं ले रहा है। रोजाना हाथियों के द्वारा गांवों में पहुंच कर ग्रामीणों के फसलों और घरों को तोड़ा जा रहा है। बीती रात हाथी के हमले में तीन लोगों की मौत हो गई है। रायगढ़ जिले में बीती रात हाथी और उसके शावक ने जमकर उत्पात मचाया और एक ही रात में तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद पूंरे गांव में दहशत का माहौल है। वहीं, वन विभाग की टीम गांव पहुंची है और आगे की कार्रवाई में जुट गई है। मिली जानकारी के मुताबिक, बीती रात लैलूंगा के गोसाईडीह गांव में जहां हाथी ने तीन साल के सत्यम राउत को पटक कर मार डाला। वहीं, अंगेकेला गांव में भी एक महिला को खेत में कुचल कर मारने के बाद घर में सो रहे एक युवक के ऊपर दीवार गिराकर उसकी जान ले ली। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के करीब एक हाथी अपने शावक के साथ विचरण कर रहा था और रात होते ही उसी हाथी ने जमकर उत्पात मचाया है। आज सुबह हाथी के हमले से तीन लोगों की मौत की खबर के गांव के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है, वहीं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी गांव पहुंच कर आगे की कार्रवाई में जुट गए हैं।

ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान: अवैध धर्मांतरण को लेकर सरकार सख्त

लखनऊ उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्ट ने अवैध धर्मांतरण, चुनाव आयोग और क्यूआर कोड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव पर भी जमकर निशाना साधा है। साथ ही कहा कि बीजेपी कानून सम्मत कार्यवाही करती है तुष्टिकरण करने वालों को इससे दिक्कत होती है। योगी सरकार सभी को साथ लेकर चलती है डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि हमारी सरकार लगातार अवैध धर्मांतरण पर कार्रवाई कर रही है। ऐसे कृत्य बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। धर्मांतरण के आरोपियों पर सख्त कार्रवाई कर संदेश दिया गया है। योगी सरकार सभी को साथ लेकर चलती है। पूर्वी पाकिस्तान से जो लोग विस्थापित होकर आए थे। उनको सरकार उनका भू स्वामित्व दे रही है। यह दूसरी सरकारों ने नहीं किया। कांवड़ यात्रा मार्गों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मै स्वागत करता हूं। सभी होटल ढाबा रेस्टोरेंट संचालकों नेम प्लेट व क्यूअर कोड लगाना चाहिए। घुसपैठिया मतदाताओं का नाम हट रहा वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि चुनाव आयोग अच्छा काम कर रहा है। घुसपैठिया मतदाताओं का नाम हट रहा है जो विरोध कर रहे हैं वह घुसपैठियों का स्वागत करने वाले लोग है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत है। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार के फैसले को सही ठहराया। सपा का नारा है जो जमीन सरकारी है वह हमारी है। केशव प्रसाद ने अखिलेश पर बोला हमला सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को देश की सर्वोच्च अदालत की टिप्पणी पर बताना चाहिए कि जहां पर भी कोई माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है उन पर कार्यवाही होगी। समाजवादी पार्टी ऐसे लोगों को कावड़ियों के रूप में भेज कर माहौल खराब करती है। बीजेपी कानून सम्मत कार्यवाही करती है तुष्टिकरण करने वालों को इससे दिक्कत होती है।

भारतीय रंगमंच को बड़ा झटका, रतन थियम का 77 वर्ष की उम्र में निधन

मुंबई मनोरंजन जगत से एक के बाद एक बुरी खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में फिर एक दिल तोड़ने वाली खबर सामने आई है। भारत के सबसे प्रभावशाली रंगमंच निर्देशकों और नाटककारों में शुमार रतन थियम का आज निधन हो गया है। वह 77 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह गए हैं। रतन थियम अपने अंतिम दिनों में बीमार चल रहे थे औ उन्‍होंने रिम्‍स अस्‍पताल में जिंदगी की अंतिम सांस ली।  आधुनिक भारतीय रंगमंच की महान हस्‍ती और 'थिएटर ऑफ़ रूट्स' आंदोलन के एक प्रमुख स्‍तंभ माने जाने वाले थियम का नाट्य कलाओं में योगदान लगभग पांच दशकों तक रहा। उन्होंंने 1987 से 1989 तक राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के निदेशक और बाद में 2013 से 2017 तक इसके अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्होंने संगीत नाटक अकादमी के उपाध्यक्ष पद पर भी कार्य किया। श्री थियम को कई पुरस्कार भी मिले। उन्हें निर्देशन के लिए 1987 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और बाद में 2012 में प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी फ़ेलोशिप से सम्मानित किया गया। साल 1989 में, भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। उनकी अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धियों में इंडो-ग्रीक फ्रेंडशिप अवार्ड (1984), जॉन डी. रॉकफेलर अवार्ड (2008), और मेक्सिको तथा ग्रीस के समारोहों में प्राप्त सम्मान शामिल हैं।  

जल संकट से राहत की ओर कदम: सालगांव बांध परियोजना को मिली स्वीकृति

सिरोही लंबे इंतजार के बाद हिल स्टेशन माउंटआबू में बहुप्रतीक्षित सालगांव बांध के निर्माण की राह प्रशस्त हो गई है। इस मामले में सांसद लुंबाराम चौधरी द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों के बाद वन विभाग लखनऊ से निर्माण को लेकर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। गौरतलब है कि 19 नवंबर 2024 को सांसद लुंबाराम चौधरी की अध्यक्षता में सिरोही सर्किट हाउस में माउंटआबू के बहुप्रतीक्षित सालगांव बांध परियोजना की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई थी। इसमें वन विभाग, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, सिरोही के अधिकारियों के साथ विचार विमर्श किया गया था। इस बैठक में संबंधित अधिकारियों का कहना था कि यह फाइल जयपुर में पेंडिंग। संबंधित जगह जहां यह बांध बनवाया जाना है वह वर्तमान में वन विभाग के नाम से है। जब तक यहां वाइल्ड लाइफ क्लीरेंस एवं फॉरेस्ट क्लीयरेंस के साथ भूमि अधिग्रहण की कारवाई जयपुर और लखनऊ से क्लियर नहीं हो जाती है। तब तक बांध का निर्माण कार्य चालू नहीं हो पाएगा। इस पर सांसद चौधरी ने तत्परता दिखाते हुए सालगांव बांध निर्माण के लिए 13 मार्च 2025 को लोकसभा में प्रश्न पूछा था। इसमें वन विभाग की कारवाई की जानकारी चाही थी। इसके बाद हरकत में आए वन विभाग द्वारा जयपुर से फाइल को लखनऊ कार्यालय में ट्रांसफर किया गया था। सांसद चौधरी ने लखनऊ अधिकारियों से संपर्क कर वाइल्ड लाइफ क्लियरेंस कारवाई को जल्द पूरा कर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का आग्रह किया था। इसके बाद यह अनपति प्रमाण पत्र जारी हुआ है। 1977 में बनाई गई थी सालगांव बांध परियोजना माउंट आबू में पीने के पानी की समस्या के समाधान को लेकर साल 1977 में सालगांव बांध परियोजना का निर्माण किया गया था। उस समय इस परियोजना की लगत 27 लाख रुपये थी। बार-बार आ रही रुकावटों के चलते परियोजना का प्रस्ताव मूर्तरूप नहीं ले सका। इससे अब इसकी लगत कई गुना बढ़ गई है। सालगांव बांध बनने से माउंट आबू की पीने के पानी की समस्या का समाधान हो जाएगा। इसमें 155.56 मिलियन घन फीट भराव क्षमता का बांध बनेगा। इसके साथ-साथ बांध से रिसने वाले पानी से काशतकार भूमि की सिंचाई कर पाएंगे। वहीं, वन्यजीव अभ्यारण में रहने वाले वन्यजीवों लिए भी यह बांध कारगर साबित होगा।

विजय शाह के खिलाफ कांग्रेस की दूसरी सुप्रीम कोर्ट याचिका, पद से हटाने की उठी मांग

भोपाल  कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह के खिला कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की है. जिसमें मंत्री को पद से हटाने की मांग गई है. नेता ने अपनी याचिका में कहा है कि मंत्री शाह का आचरण संविधान के अनुच्छेद 164 (3) के तहत ली गई शपथ का उल्लंघन करता है. जिसके आधार पर याचिकाकर्ता ने मंत्री के खिलाफ क्वो-वारंटो रिट जारी करने की मांग की है, ताकि उन्हें मंत्री पद से हटाया जा सके। कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा है कि डॉ. अंबेडकर नगर के रायकुंडा गांव में आयोजित एक समारोह के दौरान मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी. याचिका में कहा गया है कि ये टिप्पपणी किसी और के लिए नहीं बल्कि कर्नल सोफिया के लिए हो सकती है. कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा है कि डॉ. अंबेडकर नगर के रायकुंडा गांव में आयोजित एक समारोह के दौरान मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी. याचिका में कहागया है कि ये टिप्पपणी किसी और के लिए नहीं बल्कि कर्नल सोफिया के लिए हो सकती है. कार्यक्रम में दिया था विवादित बयान दरअसल मंत्री विजय शाह ने मध्य प्रदेश के मही में जलसंरक्षण कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक बयान दिया था. जिसको लेकर काफी हंगामा मचा था. देशभर में मंत्रीय के बयान की निंदा की गई थी उन्हें पद से हटाने की मांग की गई थी. कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने मंत्री शाह के बयान कको शर्मनाक बताया था और इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा था. हालांकि विवाद बढ़ने के बाद मंत्री ने अपने बयान पर माफी मांग ली थी. 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था ‘उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा.’ ऑपरेशन सिंदूर की दी थी जानकारी कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और विदेश विभाग के सचिव विक्रम मिसरी ने एक साथ मिलकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. जिसमें इस ऑपरेशन को लेकर तमाम तरह की जानकारियां दी थीं और बताया था कि किस तरह से भारतीय सैनिकों ने इस ऑपरेशन को अंजाम देकर पाकिस्तान की कमर तोड़ दी थी. कर्नल सोफिया कुरैशी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का चेहरा बन गई थीं. मंत्री के बयान पर मचा बवाल इधर मंत्री के बयान पर बवाल मच गया और मामला कोर्ट तक पहुंच गया. हाई कोर्ट ने उनकी टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर करते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले को लेकर 19 मई को सुनवाई की थी और मंत्री शाह को जमकर फटकार लगाई थी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले में SIT को जांच के निर्देश भी दिए थे. तीन सदस्यीय SIT का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 19 मई को देर शाम को ही तीन सदस्यीय SIT का गठन किया गया था. 20 मई से जांच शुरू की गई और इस मामले में 125 लोगों के बयान दर्ज किए गए थे. तीन सदस्यीय SIT टीम में सागर रेंज के तत्कालीन IG प्रमोद वर्मा के साथ तत्कालीन SAF DIG कल्याण चक्रवर्ती और डिंडोरी SP वाहिनी सिंह को शामिल किया गया था. 20 मई को SIT ने विजय शाह केस की जांच शुरू की. 21 मई को SIT टीम महू के रायकुंडा गांव भी पहुंची थी, जहां मंत्री ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी की थी. SIT ने 22 मई को बेस कैंप में लोगों के बयान दर्ज करना शुरू किए. कार्यक्रम में शामिल 125 से ज्यादा लोगों को बुलाया. ये सिलसिला 5 दिन तक चला. इसमें वीडियो बनाने वाले पत्रकार से लेकर पूर्व मंत्री और स्टूडेंट से लेकर कुलपति तक के बयान दर्ज किए गए थे. कार्यक्रम में दिया था विवादित बयान दरअसल मंत्री विजय शाह ने मध्य प्रदेश के मही में जलसंरक्षण कार्यक्रम के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक बयान दिया था. जिसको लेकर काफी हंगामा मचा था. देशभर में मंत्रीय के बयान की निंदा की गई थी उन्हें पद से हटाने की मांग की गई थी. कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने मंत्री शाह के बयान कको शर्मनाक बताया था और इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा था. हालांकि विवाद बढ़ने के बाद मंत्री ने अपने बयान पर माफी मांग ली थी. मंत्री विजय शाह ने क्या कहा था 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था ‘उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा.’ ऑपरेशन सिंदूर की दी थी जानकारी कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और विदेश विभाग के सचिव विक्रम मिसरी ने एक साथ मिलकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. जिसमें इस ऑपरेशन को लेकर तमाम तरह की जानकारियां दी थीं और बताया था कि किस तरह से भारतीय सैनिकों ने इस ऑपरेशन को अंजाम देकर पाकिस्तान की कमर तोड़ दी थी. कर्नल सोफिया कुरैशी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का चेहरा बन गई थीं. मंत्री के बयान पर मचा बवाल इधर मंत्री के बयान पर बवाल मच गया और मामला कोर्ट तक पहुंच गया. हाई कोर्ट ने उनकी टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर करते हुए उनके खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले को लेकर 19 मई को सुनवाई की थी और मंत्री शाह को जमकर फटकार लगाई थी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले में SIT को जांच के निर्देश भी दिए थे. तीन सदस्यीय SIT का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 19 मई को देर शाम को ही तीन सदस्यीय SIT का गठन किया गया था. … Read more

किसान बगीचा लगाएं और उद्यानिकी विभाग उपलब्ध कराये पौधे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कम खर्च में ज्यादा फायदा देने वाले फलदार और छायादार पौधों का बहुतायत में करें रोपण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव निजी सेक्टर और किसानों को भी जोड़ें पौधरोपण से किसान बगीचा लगाएं और उद्यानिकी विभाग उपलब्ध कराये पौधे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान हो या आमजन, खरीदकर पौधे लगाने और उन्हें बड़ा करने में लागत अधिक आती है, इसलिए सबको नर्सरी और बगीचा लगाने के लिए प्रेरित तो करें, परंतु उन्हें पौधे उद्यानिकी विभाग उपलब्ध कराये। कम खर्च में ज्यादा फायदा देने वाले फलदार और छायादार पौधों का बहुतायत में रोपण कराया जाये। पौधरोपण के कार्य में निजी सेक्टर और किसानों को भी जोड़ा जाये। अधिक लाभ देने वाली पौध प्रजाति का चयन किया जाये, जिससे भविष्य में इनकी मांग के अनुरूप आपूर्ति (पौध उत्पादन) भी तैयार की जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की बैठक में समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों और निजी क्षेत्रों को भी 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से जोड़ा जाए। सभी विभाग लक्ष्य की पूर्ति के लिए पौधरोपण में तेजी लाएं और रोपे गए पौधों की मॉनिटिरिंग भी बेहतर तरीके से करें। उद्यानिकी विभाग किसानों को फलदार वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित करे, जिससे निकट भविष्य में फलों को बेचकर उनकी आय में वृद्धि हो सके। 'एक बगिया मां के नाम' के माध्यम से राज्य सरकार स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए भी संकल्पित है। फलों की बगिया विकसित करने के लिए उन्हें तीन साल तक आर्थिक मदद दी जाएगी। वन विभाग ने लगाए हैं अब तक 5 करोड़ 38 लाख से अधिक पौधे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर प्रदेशभर में गत 5 जून से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान चलाया जा रहा है, जो 30 सितंबर तक चलेगा। प्रमुख सचिव पर्यावरण ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस से प्रारंभ 'एक पेड़ मां के नाम अभियान' की मॉनीटरिंग के लिए मेरी लाइफ पोर्टल तैयार किया गया है। गत 5 जून से अब तक प्रदेश के विभिन्न विभागों और जिलों में करीब 5 करोड़ 54 लाख से अधिक पौधरोपण कर पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया है। इस अभियान में अकेले वन विभाग ने ही वर्ष 2025-26 में 3.40 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य के विरूद्ध 22 जुलाई तक 5 करोड़ 38 लाख से अधिक पौधों का रोपण कर दिया गया है। कुल पौधरोपण की 95 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि वन विभाग ने हासिल की है। वन विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की थी, जिसमें पौधरोपण क्षेत्रों को अभियान से जोड़ने, शासन के निर्देशानुसार पौधरोपण की तैयारियां, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की सक्रिय भागीदारी, प्लांटेशन मॉनिटरिंग सिस्टम से पौधों की निगरानी और “मेरी लाइफ” पोर्टल पर पौधरोपण की नियमित जानकारी अपलोड करना भी शामिल है। अभियान की अब तक की प्रगति 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान में उच्च शिक्षा विभाग ने 1.60 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। अब तक प्रदेश के सभी शासकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालय परिसरों में 1 लाख से अधिक देशी फलदार पौधे लगाए जा चुके हैं। इसी प्रकार नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 1 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य रखा है। लक्ष्य के विरूद्ध प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में 4.15 लाख छायादार और औषधीय पौधे लगाए जा चुके हैं। यह अभियान नगरीय क्षेत्र में अर्बन फॉरेस्ट (ग्रीन कवर) तैयार करने में बेहद सहायक सिद्ध होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने बड़े पैमाने पर स्व-सहायता समूह की महिलाओं को पौधरोपण अभियान से जोड़ा है। अब तक 7 हजार से अधिक महिलाओं को पौधरोपण स्थल का भ्रमण कराया गया है। विभाग की योजना रोपित किए गए सभी पौधों के रख-रखाव की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपने की है। करीब 50 हजार पौधे रोजाना लगा रहा स्कूल शिक्षा विभाग अभियान के तहत स्कूल शिक्षा विभाग ने 86 लाख 27 हजार से अधिक पौधरोपण का लक्ष्य तय किया है। प्रदेश के सभी स्कूलों और खुले मैदान में अब तक 5 लाख 37 हजार 625 आम, अमरूद, नीम, पीपल, बरगद, सागौन एवं शीशम जैसे फलदार एवं छायादार पौधे लगाए जा चुके हैं। बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल ने बताया कि विभाग ने स्कूली बच्चों को इस अभियान से सक्रियता से जोड़ा है। विभाग प्रतिदिन बच्चों से पौधरोपण कराकर बच्चों की माता के साथ फोटो खिंचवाकर इन्हें मेरी लाइफ पोर्टल पर दर्ज कर रहा है। उन्होंने बताया कि सबके सामूहिक सहयोग एवं प्रयासों से विभाग द्वारा रोजाना 50 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। अगले दो से तीन माह में विभाग अपना लक्ष्य पूर्ण कर लेगा। उद्यानिकी विभाग ने लगाए 9.34 लाख से अधिक पौधे उद्यानिकी विभाग ने 4862 हेक्टेयर क्षेत्र में 21 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। प्रदेशभर में खेत, नदियों से सटे क्षेत्र तथा जलाशयों व नालों के आसपास अब तक 9.34 लाख से अधिक पौधरोपण किया जा चुका है। इनमें आम, अमरूद, संतरा, नीबू जैसे विभिन्न फलदार पौधे शामिल हैं। इसी प्रकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 15 अगस्त से 15 सितंबर तक प्रदेश में “एक बगिया मां के नाम” अभियान प्रारंभ कर पौधरोपण का लक्ष्य हासिल करने की योजना बनाई है। विभाग द्वारा विगत 15 जुलाई से गंगोत्री हरित परियोजना, मां नर्मदा परिक्रमा पथ पर पौधरोपण की शुरुआत कर दी गई है। पर्यावरण विभाग ने ईको क्लब से माध्यम से लगभग 37 हजार स्कूल परिसरों में अब तक 2 लाख 76 से अधिक पौधरोपण किया है। बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव पर्यावरण नवनीत मोहन कोठारी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक असीम श्रीवास्तव, आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास संकेत भोंडवे, संचालक सह आयुक्त एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास छोटे सिंह, आयुक्त उद्यानिकी श्रीमती प्रीति मैथिल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

दिल्ली दौरे के बाद बढ़ी चर्चाएं, क्या यूपी कैबिनेट में होगा बदलाव?

लखनऊ उत्तर प्रदेश भाजपा इस वक़्त सत्ता में है। जबकि सन्गठन और सरकार के प्रमुख लोग इस समय दिल्ली की खूब यात्रा कर रहे है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य भी सबने दिल्ली के दौरे पर जा चुके है। लेकिन आज यूपी भाजपा के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी दिल्ली के लिए रवाना हुए है। जिसके बाद यूपी बीजेपी और मंत्रिमंडल में फेरबदल के संकेत मिलने लगे है। यूपी बीजेपी अध्यक्ष दिल्ली में ही रहेंगे साथ ही यूपी बीजेपी अध्यक्ष के चयन को लेकर प्रक्रिया तेज होने की भी संभावना है। सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी दिल्ली के दौरे कर चुके है और अपनी स्थिति की जानकारी केंद्र सन्गठन के साथ साझा कर चुके है। भाजपा उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी अभी दिल्ली में ही रहेंगे। इसके साथ ही सूत्र बताते है कि यूपी बीजेपी संगठन में बदलाव के साथ ही मंत्रिमंडल में भी विस्तार किया जा सकता है। आपको बता दें कि,यूपी सरकार के मंत्रिमंडल में 6 मंत्रियों के पद रिक्त है। जिसको की पंचायत चुनाव से पहले भरने की उम्मीद की जा रही है।

कॉर्पोरेट पहचान में बदलाव: जिंदल स्टील एंड पावर अब बनी जिंदल स्टील लिमिटेड

रायपुर  जिन्दल स्टील एंड पावर लिमिटेड का नाम अधिकृत रूप से बदलकर जिन्दल स्टील लिमिटेड कर दिया गया है। यह नाम परिवर्तन भारत सरकार के कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से अनुमोदन के बाद कल प्रभावी हुआ है। जिन्दल स्टील एंड पावर लिमिटेड का नाम बदलकर जिन्दल स्टील लिमिटेड करने की मुख्य वजह यह है कि कंपनी सिर्फ अपने मुख्य काम, यानी स्टील उत्पादन पर अधिक ध्यान देने और भविष्य में एक मज़बूत स्टील कंपनी के रूप में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इस नए नाम से कंपनी को देश और विदेश, दोनों जगह अपनी पहचान साफ़ तौर पर स्थापित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, कंपनी अपनी पुरानी पहचान और मूल्यों को भी बनाए रखेगी। यह परिवर्तन कंपनी (इनकॉरपोरेशन) नियम-2014 के नियम-29 के अनुसार किया गया है । इसकी पुष्टि के लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज द्वारा नए नाम को दर्शाने वाला इनकॉरपोरेशन प्रमाणपत्र जारी किया गया है। कंपनी की कॉरपोरेट पहचान संख्या (CIN: L27105HR1979PLC009913) या इसके पंजीकृत कार्यालय के पते में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पंजीकृत कार्यालय का पता जिन्दल स्टील लिमिटेड, ओ.पी. जिन्दल मार्ग, हिसार – 125005, हरियाणा (भारत) ही रहेगा । जिन्दल स्टील का नाम भले ही बदल गया हो, लेकिन यह पहले की तरह ही एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी रहेगी, जिसके शेयरों की खरीद-बिक्री लोग कर सकेंगे । कंपनी के जितने भी पुराने अधिकार, जिम्मेदारियां, लेन-देन और करार हैं, वे सब वैसे के वैसे रहेंगे और पूरी तरह से लागू होंगे । इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। कंपनी ने इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से समस्त शेयरधारकों, भागीदारों और आम नागरिकों का ध्यान आकर्षित किया है। कंपनी ने जानकारी दी है कि नाम परिवर्तन के सिलसिले में सभी स्टॉक एक्सचेंजों और अन्य वैधानिक प्राधिकरणों को अवगत कराया गया है। जिन्दल स्टील के बारे में जिन्दल स्टील एक बड़ी औद्योगिक कंपनी है, जो स्टील उत्पादन, खनन और इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण कार्य कर रही है। इस कंपनी ने पूरी दुनिया में 12 अरब डॉलर (लगभग 1 लाख करोड़ रुपये) का निवेश किया है । यह लगातार अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ा रही है और बेहतरीन व विश्वसनीय ढंग से काम करके मजबूती से आगे बढ़ रही है ताकि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में निरंतर योगदान कर सके। एक अग्रणी स्टील निर्माता के रूप में, जिन्दल स्टील औद्योगिक विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करने के उद्देश्य से कार्बन फुटप्रिंट घटाने और कामकाज के आधुनिक तौर-तरीके अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें: कुलदीप सिंह, +919899692981; kuldeep.singh@jindalsteel.com जिन्दल स्टील लिमिटेड (पूर्व में जिन्दल स्टील एंड पावर लिमिटेड)

नारी सम्मान पर सवाल? IG ने DIG का विवादित निर्देश किया निरस्त

गोरखपुर  यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा 2023 में चयनित महिला सिपाहियों की ट्रेनिंग इन दिनों पीटीएस में चल रही है। डीआईजी ने सभी महिला प्रशिक्षु के गर्भधारण जांच कराने का फरमान जारी किया था। जिसमें अविवाहित महिला प्रशिक्षु भी शामिल थी। यह आदेश जैसे ही सामने आया विवाद खड़ा हो गया। इस आदेश कहा गया था कि यदि कोई आरक्षी गर्भवती है तो उससे शपथ पत्र लेकर अगले बैच में भेजा जाए। विवाद के बाद आदेश निरस्त सीएमओ को पत्र भेजकर पीटीएस के डीआईजी ने महिला रिक्रूट्स की प्रेग्नेंसी जांच कराने के लिए कह दिया था। यह मामला जैसे ही पुलिस मुख्यालय पहुंचा तो आनन-फानन में इस पत्र निरस्त करने स्पष्ट निर्देश दिए गए। जिसमें कहा गया है कि जांच अनिवार्य नहीं है। गोरखपुर में महिला सिपाहियों के लिए पुलिस लाइन, पीएसी और पीटीएस में आरटीसी बनाई गई है। बता दें कि प्रशिक्षण को लेकर स्पष्ट निर्देश दिया था कि अगर कोई महिला रिक्रूट गर्भवती है तो उससे शपथ पत्र लेकर उसका प्रशिक्षण अगले बैच में कराया जाए। असल में डीआईजी रोहन पी ने गर्भवती महिला प्रशिक्षु को ट्रेनिंग से अलग करने की सरकारी नीति के तहत सभी 513 महिला प्रशिक्षुओं के गर्भधारण जांच का आदेश दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी चंद्र प्रकाश ने तुरंत कार्रवाई की और आदेश निरस्त कर दिया।