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लगभग 8 हजार से अधिक प्रकरणों को जनजातीय समुदाय ने आपसी विमर्श में सुलझाया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन में देश में अग्रणी पेसा अधिनियम बना जनजातीय समुदाय के लिए वरदान : चौपाल लगाकर सुलझा रहे हैं आपसी विवाद लगभग 8 हजार से अधिक प्रकरणों को जनजातीय समुदाय ने आपसी विमर्श में सुलझाया थाने में शिकायत किए बिना सुलझाए मामले भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के उत्थान के लिए लगातार कार्य कर रही है। जनजातीय समुदाय के लिये राज्य सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही है। प्रदेश के 88 ट्राइबल ब्लॉक्स में लागू पेसा अधिनियम जनजातीय समुदाय के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस अधिनियम के अंतर्गत जनजातीय समुदाय आपसी विवादों का समाधान थानों में शिकायत दर्ज कराए बिना ही चौपालों के माध्यम से कर रहे हैं। पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन में देश में मध्यप्रदेश न केवल अग्रणी है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। जनजातीय समुदाय ने अब तक लगभग 8 हजार से अधिक विवाद प्रकरणों का चौपाल के माध्यम से निराकरण कर मिसाल पेश की है। इन मामलों में पारिवारिक जमीन संबंधी विवाद शामिल है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा लागू किए गए पेसा एक्ट का उद्देश्य भी यही है कि जनजातीय समुदाय के लोगों को छोटे-छोटे विवाद में पुलिस थाना का चक्कर ना लगाना पड़े और आपस में बैठकर ही मामले की सुलह कर लें। साथ ही उनकी परंपरा, कला संस्कृति की भी रक्षा की जा सके। पेसा अधिनियम के अंतर्गत 3 प्रकार की समितियां कर रहीं हैं काम पेसा अधिनियम के तहत प्रदेश के 88 विकासखंडों में तीन प्रकार की समितियां काम रही है। इसमें शांति और विवाद निवारण समिति, सहयोगिनी मातृ समिति और वन संसाधन योजना एवं नियंत्रण समिति शामिल है। प्रदेश में शांति और विवाद निवारण समिति की संख्या 11 हजार 639 है। वन संसाधन योजना एवं नियंत्रण समिति की संख्या 11 हजार 331 है, जबकि सहयोगिनी मातृ निवारण समिति की संख्या 21 हजार 887 है। देश के 10 राज्य में हो रहा है पेसा एक्ट का क्रियान्वयन, मध्यप्रदेश है अग्रणी देश के 10 राज्यों में पेसा एक्ट का क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिसमें मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है। पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सफलता की कहानियों को लेकर एक पुस्तिका भी निकाली गई है जिसमें मध्यप्रदेश की दो कहानियों को शामिल किया गया है। इस वजह से मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। 5133 ग्राम पंचायतों में लागू है पेसा अधिनियम मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जनजातीय बाहुल्य वाले प्रदेश के 20 जिलों के 88 विकासखंड की 5133 ग्राम पंचायतों के 11 हजार 596 ग्रामों में पेसा एक्ट लागू किया गया है। वर्तमान में 4850 पेसा मोबलाइजर कार्य कर रहे हैं। पेसा कानून में सबसे महत्वपूर्ण विषय वित्तीय प्रबंधन है, जिसके तहत राज्य में अब तक 11 हजार 538 खाते खोले गये है।  

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नवांकुर सखी हरियाली यात्रा प्रशंसनीय पहल : सीएम डॉ. यादव

नवांकुर सखी हरियाली यात्रा सराहनीय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनमानस को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जाए जागरूक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नवांकुर सखी हरियाली यात्रा प्रशंसनीय पहल : सीएम डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यात्रा के पोस्टर का किया विमोचन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास में नवांकुर सखी हरियाली यात्रा के पोस्टर का विमोचन किया और कहा कि लोगों को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण संरक्षण के लिए जनचेतना बढ़ाने का कार्य आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हरियाली यात्रा से घर के आंगन, अपने गांव से लेकर शहर तक नागरिकों को पर्यावरण की रक्षा की प्रेरणा मिलेगी। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद 24 जुलाई से प्रदेश में पांच दिवसीय नवांकुर सखी हरियाली यात्रा का आयोजन कर रहा है। पोस्टर विमोचन के अवसर पर परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर उपस्थित थे। इस अवसर पर एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री एवं मप्र जन अभियान परिषद के अध्यक्ष डॉ. मोहन यादव ने परिषद के नवाचारी कार्यक्रम नवांकुर सखी-हरियाली यात्रा को सराहनीय बताते हुए कहा कि इस प्रदेशव्यापी अभियान में अधिक से अधिक नागरिकों को जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवांकुर सखियों को शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण में उनकी सतत और सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा की। अभियान का प्रमुख उद्देश्य नारी शक्ति के माध्यम से स्वैच्छिकता के आधार पर पर्यावरण संरक्षण करना है। उल्लेखनीय है कि मप्र जन अभियान परिषद द्वारा प्रदेश के 313 विकासखंडों के 1565 सेक्टरों में हरियाली अमावस्या 24 जुलाई से आगामी 05 दिन तक नवांकुर सखी-हरियाली यात्रा का आयोजन किया जाएगा। प्रत्येक सेक्टर में 100 महिलाएं नवांकुर सखी के रूप में पंजीकृत की गई हैं। ये नवांकुर सखियां 11 बीज रोपित एवं अंकुरित पौध रोपित थैलियों के माध्यम से अपने घर की बगिया में पौधे विकसित करेंगी। मप्र जन अभियान परिषद की इस नवाचारी पहल से प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में 5500 पौधे तैयार होंगे। अभियान के तहत प्रदेश में 1 लाख 56 हजार 500 नवांकुर सखियों द्वारा 17 लाख 21 हजार 500 पौधे तैयार किए जाएंगे। विकसित पौधों को रोपण लायक होने की स्थिति में एक पेड़ मां के नाम अभियान में शासकीय या निजी भूमि पर परिवार के महत्व के अवसरों पर रोपित किए जाएंगे। ये पौधे एक पेड़ मां के नाम अभियान में आगामी वर्षों में रोपित होंगे। पोस्टर विमोचन के अवसर पर परिषद एवं कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड़ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

भोपाल दुग्ध संघ का अनोखा संकल्प: किसानों की बेटियों की शादी में देगा आर्थिक सहारा

भोपाल भोपाल दुग्ध संघ अपने सदस्य दुग्ध उत्पादक किसानों की बेटियों का मामा बनने जा रहा है। अब संघ से जुड़े दुग्ध उत्पादक के परिवार की बेटी के विवाह में अधिकारियों का एक दल जाकर मामेरा देगा। इसके तहत 11 हजार रुपये नकद और साड़ी-कपड़ा भेंट किया जाना है। स्थानीय परंपरा में मामेरा, मामा की ओर से भांजी को विवाह का उपहार होता है। अधिकारियों ने बताया कि मामेरे की राशि के लिए खरीदे गए प्रति किलो दूध पर दो पैसे इकट्ठा किया जाएगा, उसमें उतनी ही रकम दुग्ध संघ भी डालेगा। कोष की निगरानी के लिए बनी टीम यह रकम एक विशेष कोष में जमा की। इसी कोष से मामेरा दिया जाएगा। इस कोष की निगरानी के लिए एक टीम बनी है, जिसमें भोपाल दुग्ध संघ के सीईओ, क्षेत्र संचालन शाखा के अधिकारी, जिले के नोडल अधिकारी और संस्था के प्रबंधक शामिल होंगे। इस टीम पांच से सात सदस्य होंगे जो पूरे कार्य की निगरानी और संचालन सुनिश्चित करेंगे। किसान परिवार में बेटी की शादी का निमंत्रण मिलने पर तय दिनांक को संघ के सात से 11 लोगों का दल नकदी और साड़ी-उपहार लेकर मामेरा देने जाएगा। इस साल से हो रही परंपरा की शुरुआत इस परंपरा की शुरुआत इस साल विवाह का मुहूर्त शुरू होने के साथ ही हो जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि अभी इसकी शुरुआत भोपाल दुग्ध संघ से हो रही है। जल्द ही मध्य प्रदेश दुग्ध संघ की सभी इकाइयों में यह परंपरा शुरू हो जाएगी। बता दें कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुए एम एमओयू के बाद राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने राज्य दुग्ध उत्पादन संघ का प्रबंधन संभाला है। उसके बाद से दुग्ध संघ में दुग्ध उत्पादकों को जोड़े रखने और उत्पादन बढ़ाने के लिए कई परियोजनाओं पर काम शुरू हुआ है। रोजाना तीन लाख लीटर दूध बेचते हैं किसान भोपाल दुग्ध संघ में अभी 68 हजार दुग्ध उत्पादक जुड़े हुए हैं। इनमें से 45 हजार से 48 हजार लोग प्रतिदिन दूध बेचते हैं। इन किसानों से रोजाना तीन लाख 14 हजार 700 लीटर दूध की आवक होती है जिन्हें प्रसंस्कृत कर सांची नाम से दूध, घी, मक्खन, पेड़े, श्रीखंड, लस्सी जैसे उत्पाद बाजार में उतारे जाते हैं। बाजार में कई सहकारी और निजी कंपनियां किसानों को अपने साथ जोड़ रही हैं। ये किसान सांची से जुड़े रहें, इसलिए कंपनी इसे भावनाओं से जोड़ रही है। किसानों से हमारा रिश्ता केवल व्यावसायिक नहीं बल्कि भावनात्मक भी है। दुग्ध संघ पूरा एक परिवार है इस लिए हम सभी एक दूसरे के दुख और सुख में खड़े रहेंगे। आने वाले दिनों में जब भी किसी सदस्य के परिवार में बेटी की शादी होगी वहां हमारी टीम पहुंचकर मामेरा देने का फर्ज निभाएगी। – प्रीतेश जोशी, सीईओ, भोपाल दुग्ध संघ।  

उज्जैन बनेगा विकास और विरासत का प्रतीक: सीएम डॉ. यादव

बदलते दौर का उज्जैन विश्व में छोड़ेगा अनूठी छाप: मुख्यमंत्री डॉ. यादव वैश्विक मंच पर चमकेगा उज्जैन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विज़न आध्यात्मिक नगरी से स्मार्ट सिटी तक: उज्जैन का नया दौर उज्जैन बनेगा विकास और विरासत का प्रतीक: सीएम डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सौंपी गई स्वच्छता अवार्ड की ट्राफी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बदलते दौर का उज्जैन सिर्फ उज्जैन के लिए नहीं बल्कि भारत और पूरे विश्व के लिए महवपूर्ण छाप छोड़ने का कार्य करेगा। मेट्रोपॉलेटिन सिटी में शामिल होने के बाद इंदौर-उज्जैन वृहद महानगरीय क्षेत्र बन जाएगा। उज्जैन नगर निगम के महापौर, सभापति और अन्य पदाधिकारियों ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास के समत्व भवन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट कर उसे 10 लाख की आबादी श्रेणी में उज्जैन को सर्वश्रेष्ठ स्वच्छता आवार्ड की उपलब्धि से अवगत करवाकर उन्हें ट्राफी और प्रशस्ति पत्र सौंपा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन से आए जनप्रतिनिधि को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों ओर नागरिकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश को स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 पुरस्कारों में मध्यप्रदेश को कुल 8 अवार्ड मिले हैं, जो हर्ष और गर्व का विषय है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अभिनंदन के पात्र हैं, क्योंकि उन्होंने स्वच्छता पुरस्कारों के लिए अनेक श्रेणियां निर्धारित कीं जिससे अनेक नगरीय निकाय योग्य होने पर पुरस्कार से वंचित नहीं हुए। अवंतिका नगरी की पहचान कई तरह की है। बाबा महाकाल की नगरी होने के साथ ही उज्जैन साइंस सिटी और खगोल विज्ञान की नगरी है। उज्जैन का गौरवशाली इतिहास है और राष्ट्र प्रेम भी उज्जैन के नागरिकों के संस्कार में शामिल है। विश्व के सबसे बड़े मेले सिंहस्थ: 2028 को यादगार बनाना है: मुख्यमंत्री डॉ यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में सिंहस्थ:2028 को यादगार बनाना है। यह विश्व का सबसे बड़ा मेला होगा। भविष्य में ग्वालियर और जबलपुर महानगरीय क्षेत्र भी परस्पर कनेक्ट होंगे। इस तरह जुड़वा महानगरीय क्षेत्र प्रदेश की पहचान बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय था जब नागरिकों को सिंगल रोड से आना जाना होता था। आज देवास-इंदौर सिक्स लेन मार्ग है। अन्य अनेक फोर लेन और सिक्स लेन सड़कें आवागमन को आसान बना रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कर विरासत को सहेजने और विकास को तीव्र करने का कार्य हुआ है। उज्जैन में कोठी पैलेस में वीर भारत संग्रहालय, भारत के महापुरुषों और राष्ट्रभक्तों की गाथा बताने का कार्य करेगा। उज्जैन के महापौर श्री मुकेश टटवाल ने कहा कि 17 जुलाई को नई दिल्ली में विज्ञान भवन में हुए पुरस्कार समारोह में उज्जैन को 3 से 10 लाख आबादी की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ शहर का अवार्ड देते हुए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने तीन बार उज्जैन का विशेष उल्लेख किया। वे गत वर्ष सितम्बर माह में सफाई मित्रों के सम्मान कार्यक्रम में उज्जैन आई थीं तब उन्होंने महाकाल मंदिर परिसर को बुहारने का कार्य भी किया था। विधायक श्री अनिल जैन कालूखेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव कर्म में विश्वास रखते हैं। उन्होंने केन-बेतवा सहित अन्य अंतर्राज्जीय सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए दिन रात एक कर दिया। नगर निगम उज्जैन की अध्यक्ष श्रीमती कलावति यादव ने उज्जैन को प्राप्त उपलब्धि के लिए जनप्रतिधियों, नागरिकों, प्रशासनिक अमले और सफाई मित्रों की सक्रिय भूमिका की प्रशंसा की। श्री संजय अग्रवाल, श्री राजेंद्र भारती, अनेक पार्षदगण,उज्जैन नगर निगम के आयुक्त श्री आशीष पाठक भी कार्यक्रम में शामिल थे।  

मानसून होगा फिर सक्रिय, मौसम विभाग ने दी भारी बारिश की चेतावनी

जयपुर राजस्थान में मानसून की बारिश का दौर फिलहाल धीमा हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने गुरुवार को प्रदेश के 6 जिलों में सामान्य बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार वर्तमान में बंगाल की खाड़ी में एक परिसंचरण तंत्र बना हुआ है। इसके प्रभाव से 24 जुलाई के आसपास एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से पूर्वी राजस्थान में 27 से 30 जुाई के दौरान भारी बारिश की गतिविधियों में फिर से बढ़ोतरी होने के आसार हैं। मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि वर्तमान में बंगाल की खाड़ी में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम बना है। यह सिस्टम अगले 24 से 36 घंटे में और तीव्र होकर लो-प्रेशर सिस्टम में तब्दील हो सकता है। यह सिस्टम धीरे-धीरे पूर्वी भारत की तरफ आगे बढ़ेगा। इस सिस्टम के असर से राजस्थान में 27 से 30 जुलाई के दौरान भारी बारिश की गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। इस दौरान कोटा संभाग में कहीं-कहीं अतिभारी बारिश और भरतपुर, जयपुर, उदयपुर संभाग में भारी बारिश होने की संभावना है। बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में सामान्य वर्षा रिकॉर्ड की गई है। मंगलवार को भरतपुर, अलवर, सवाई माधोपुर, करौली समेत कई जिलों में 2 इंच तक बरसात हुई। जयपुर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में भी बारिश हुई। अलवर के बहादुरगढ़ में 70MM से ज्यादा पानी बरसा पिछले 24 घंटे के दौरान करौली में 25, उदयपुर में 35, अलवर के बहादुरगढ़ में 70, खैरथल में 63, मुंडावर में 51 और अलवर शहर में 64.2MM पानी बरसा। हनुमानगढ़ के भादरा में 25, भरतपुर के डीग में 60, रूपवास में 22, सवाई माधोपुर के खंडार में 64 और चूरू के सादुलशहर में 14MM बरसात दर्ज हुई। जयपुर के आंधी में 16 और तूंगा में 18MM बारिश दर्ज हुई। सवाई माधोपुर में रेल यातायात प्रभावित बारिश में जल भराव के चलते सवाईमाधोपुर-सपोटरा-करौली और हाड़ौती-सपोटरा मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया। भूरी पहाड़ी के पास बह रही बनास नदी की पुलिया तेज बहाव के चलते टूट गई। वहीं वर्षा जनित हादसों में प्रदेश में अब तक 30 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। मंगलवार को अजमेर के अरांई क्षेत्र में दो बच्चों की पौंड में डूबने से मौत हो गई। बालोतरा के डडांली गांव के पास लूणी नदी में मंगलवार सुबह तेज बहाव के बीच मिनी बस फंस गई। बायतु से करना भूखा भगत सिंह रूट पर जा रही बस में 6 से ज्यादा यात्री सवार थे। क्रेन से बस को सुरक्षित निकाला गया।

भारतीय यात्रियों के लिए खुशखबरी: वीज़ा फ्री देशों की संख्या बढ़कर 59 हुई

नई दिल्ली अगर आप भी विदेश घूमने का सपना देख रहे हैं, तो अब वो हकीकत में बदल सकता हैं। साल 2025 में भारतीय पासपोर्ट की ताकत में और भी बढ़ोतरी हुई है। Henley Passport Index 2025 के अनुसार, अब भारतीय पासपोर्ट धारक 59 देशों में बिना वीज़ा या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं। इस साल भारत की रैंकिंग 85वें स्थान से बढ़कर 77वें स्थान पर पहुँच गई है, जो काफी बड़ी छलांग मानी जा रही है। इसका मतलब है कि भारतीय नागरिकों के लिए अब ज़्यादा देशों में यात्रा करना आसान हो गया है। मलेशिया, थाईलैंड, मालदीव, मॉरीशस जैसे कई लोकप्रिय देश अब भारतीय नागरिकों को वीज़ा-फ्री एंट्री दे रहे हैं। वहीं, श्रीलंका, कतर और म्यांमार जैसे देशों में वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा मिल रही है। यानी अब आपको लंबी वीज़ा प्रक्रिया से गुज़रने की ज़रूरत नहीं है। वीज़ा-फ्री और वीज़ा-ऑन-अराइवल: क्या है अंतर? विदेश यात्रा की योजना बनाने से पहले इन दोनों में अंतर समझना ज़रूरी है: वीज़ा-फ्री देश: इन देशों में घूमने के लिए भारतीय पासपोर्ट धारकों को पहले से वीज़ा लेने की ज़रूरत नहीं होती। आप सीधे फ्लाइट बुक करके वहाँ जा सकते हैं। हालाँकि, हर देश के अपने नियम होते हैं जैसे कितने दिनों तक रुक सकते हैं या किन उद्देश्यों के लिए जा सकते हैं। वीज़ा-ऑन-अराइवल : इसका मतलब है कि आप जिस देश में जा रहे हैं, वहाँ एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वीज़ा ले सकते हैं। इसके लिए वहाँ के वीज़ा काउंटर पर एक फॉर्म भरना, ज़रूरी दस्तावेज़ देना और निर्धारित फीस चुकानी होती है। भारतीय अब इन 59 देशों में कर सकते हैं यात्रा भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा-फ्री या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा देने वाले देशों की पूरी सूची इस प्रकार है: वीज़ा-फ्री देश (कुल 30): अंगोला, बारबाडोस, भूटान, ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह, कुक द्वीप समूह, डोमिनिका, फिजी, ग्रेनाडा, हैती, ईरान, जमैका, कज़ाकिस्तान, केन्या, किरिबाती, मकाओ, मेडागास्कर, मलेशिया, मॉरीशस, माइक्रोनेशिया, मोंटसेराट, नेपाल, नियू, फिलीपींस, रवांडा, सेनेगल, सेंट किट्स और नेविस, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, थाईलैंड, त्रिनिदाद और टोबैगो, वानुअतु वीज़ा-ऑन-अराइवल देश (कुल 27): 31. बोलीविया 32. बुरुंडी 33. कंबोडिया 34. केप वर्डे द्वीप समूह 35. कोमरो द्वीप समूह 36. जिबूती 37. इथियोपिया 38. गिनी-बिसाऊ 39. इंडोनेशिया 40. जॉर्डन 41. लाओस 42. मालदीव 43. मार्शल द्वीप समूह 44. मंगोलिया 45. मोज़ाम्बिक 46. म्यांमार 47. नामीबिया 48. पलाऊ द्वीप समूह 49. कतर 50. समोआ 51. सिएरा लियोन 52. सोमालिया 53. श्रीलंका 54. सेंट लूसिया 55. तंजानिया 56. तिमोर-लेस्ते 57. तुवालु इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल अथॉरिटी वाले देश (2): 58. ज़िम्बाब्वे 59. सेशेल्स (ETA एक डिजिटल परमिट होता है जो यात्रा से पहले ऑनलाइन ही मिल जाता है।) यात्रा से पहले ज़रूरी जानकारी हर देश के अपने नियम होते हैं, जैसे रुकने की समय सीमा, ज़रूरी दस्तावेज़ या एंट्री की शर्तें। इसलिए, यात्रा की योजना बनाने से पहले संबंधित देश की आधिकारिक वेबसाइट या दूतावास से पूरी जानकारी ज़रूर ले लें।

जसमत ग्राम के ग्रामीणों ने जनसुनवाई में उठाई अतिक्रमण हटाने की मांग

विधायक की जनसुनवाई में पहुचे जसमत ग्राम के ग्रामीण,हनुमान मंदिर के सामने किये अतिक्रमण को हटवाने की मांग की, जनसुनवाई में आये नागरिको की विधायक ने सुनी समस्याएं,जनसुनवाई में आये 48 आवेदन आष्टा मध्य प्रदेश के आष्टा जनपद पंचायत के ग्राम जसमत में स्तिथ हनुमान मंदिर के सामने दान की गई जमीन पर ग्राम के कुछ लोगो ने अतिक्रमण कर लिया है,उक्त अतिक्रमण को हटाने की मांग को लेकर आज ग्राम जसमत के ग्रामीण विधायक की जनसुनवाई में पहुचे ओर उक्त स्थल से अतिक्रमण हटाने की मांग का आवेदन सौपा । आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर द्वारा प्रति बुधवार को आम जन की समस्याओं को सुनने आयोजित जन सुनवाई में पहुचे जसमत के ग्रामीणों ने विधायक को अपनी समस्या से अवगत कराते हुए कहा कि ग्राम जसमत में हनुमान मंदिर स्तिथ है,इस मंदिर को दान में मिली जमीन पर कुछ लोगो ने अतिक्रमण कर लिया है उसे हटवाया जाये । आज जनसुनवाई में कई ग्रामो से ग्रामीण विधायक कार्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई में  पहुचे । आज जनसुनवाई में करीब 48 आवेदन ग्रामीणों की ओर से दिये गये है । स्मरण रहे प्रत्येक बुधवार को आष्टा विधायक अपने कार्यालय में सुबाह 10 बजे से जनता की समस्याओं को सुनने,उनेह हल करवाने के लिये जनसुनवाई करते है । आज बुधवार को प्रातः 10 बजे से कार्यालय में उपस्तिथ रह कर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने जनता की समस्याओं को सुना एवं उनकी समस्याओं को हल करने के सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिये । आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर जो की हर बुधवार को अपने कार्यालय में जन सुनवाई कार्यक्रम के तहत उपस्तिथ रहते है । आज भी बड़ी संख्या में क्षेत्र से नागरिक जनसुनवाई में पहुचे एवं अपनी अपनी पीड़ा से विधायक को अवगत कराया एवं आवेदन दिये। जनता से प्राप्त आवेदनों पर विधायक ने कहा की आपका जन सेवक होने के नाते आपकी समस्याओं को सुनना, हल करना मेरा धर्म है। आज आये आवेदनों को तत्काल सम्बंधित विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर ग्रामीणों की समस्याओं का समय सीमा में तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिये । विधायक ने जनसुनवाई में पहुचे मीडिया के साथियों से चर्चा में कहा की जनसुनवाई में जो भी आवेदन चाहे वे किसी मांग के हो या समस्या के निराकरण के हो उसकी हम साप्ताहिक समीक्षा करते है,जिन विभागों को आये आवेदन भेजे जाते है,उनसे भी कार्यवाही की जानकारी ली जाती है तथा जब विभागीय समीक्षा बैठक होती है उसमें भी भेजे गये आवेदनों पर की गई कार्यवाही की जानकारी ली जाती है । आज जनसुनवाई में कई विभागों के  आवेदन प्राप्त हुए उन्हें निराकरण हेतु भेजे गये । विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने कार्यालय आये सभी नागरिको को भरोसा दिया कि आपकी समस्याओं का जल्द निराकरण होगा। विधायक कार्यालय से जानकारी देते हुए बताया की आज जनसुनवाई में सांदीपनि विद्यालय में प्रवेश दिलाने, पारिवारिक विवाद,रोजगार दिलाने, रास्ते से अतिक्रमण हटवाने,नगर पालिका द्वारा पुश्तैनी मकान का अन्य रिश्तेदार के नाम नामांतरण कर देने की शिकायत,परोलिया पार मैं मांगलिक भवन निर्माण,प्रधानमंत्री आवास योजना की तृतीय क़िस्त प्रदाय कराने,खेत सड़क मार्ग निर्माण बमुलिया खिंची में करवाने, स्वीकृत कॉलोनी के रास्ते के निर्माण पर आपत्ति लगाना,सास बहू का पारिवारिक विवाद हल करवाने, आर्थिक सहायता दिलाने, प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रथम क़िस्त प्रदाय कराने,ग्राम किल्लोद में ग्रेवल रोड निर्माण कराने, ग्राम कादूखेड़ी में लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क निर्माण कराने, सोयाबीन फसल खराब होने पर मुआवजा राशि दिलाने,सड़क पर नाली निर्माण को रुकवाने सहित अन्य 48 आवेदन प्राप्त हुए। सभी आई शिकायतों एवं आवेदनों को सम्बंधित विभागों को निराकरण हेतु निर्देश दिये है । विभागों की आई समस्याओं को लेकर मौके से ही सम्बंधित विभाग के अधिकारियों को आई समस्याओं के निराकरण करने के निर्देश दिये,कुछ आवेदन निराकरण हेतु सम्बंधित विभागों को भेजे गये ।

राजस्थान में ग्राम विकास अधिकारी भर्ती 2025 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 25 जुलाई

जयपुर राजस्थान में ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती 2025 के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। उम्मीदवार इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट rssb.rajasthan.gov.in पर जाकर 25 जुलाई 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।  बोर्ड द्वारा ग्राम विकास अधिकारी पद पर चयनित उम्मीदवारों को प्रारंभिक नियुक्ति के दौरान निश्चित मासिक वेतन दिया जाता है। हालांकि, स्थायी नियुक्ति मिलने के बाद न केवल सैलरी में बढ़ोतरी होती है, बल्कि उन्हें कई सरकारी सुविधाएं और भत्ते भी मिलते हैं। ऐसे में आइए जानें ग्राम विकास अधिकारी की सैलरी से जुड़ी पूरी जानकारी और स्थायी नियुक्ति के बाद मिलने वाले लाभों का विस्तृत विवरण। प्रारंभिक वेतनमान और पे स्केल राज्य सरकार द्वारा ग्राम विकास अधिकारी (VDO) पद के लिए सातवें वेतन आयोग के अनुरूप पे मैट्रिक्स लेवल-6 में वेतन निर्धारित किया गया है। इस स्तर पर वेतन 35,400 रुपये से शुरू होकर 1,12,400 रुपये तक जाता है। हालांकि, चयनित अभ्यर्थियों को शुरुआत में सीधे इस वेतनमान का लाभ नहीं मिलता, बल्कि उन्हें परिवीक्षा अवधि पूरी करने के बाद ही इसका लाभ मिल पाता है। फिक्स सैलरी का प्रावधान नियमानुसार, सभी चयनित उम्मीदवारों को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि (Probation Period) के अंतर्गत नियुक्त किया जाता है। इस अवधि में वेतन श्रृंखला के स्थान पर केवल राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियत पारिश्रमिक (Fixed Remuneration) प्रदान किया जाता है। यह राशि आमतौर पर 18,000 रुपये से 23,700 रुपये के बीच होती है। इस दौरान उन्हें किसी भी प्रकार का अतिरिक्त भत्ता (DA, HRA, आदि) नहीं दिया जाता। चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्ति प्रक्रिया चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, चयनित अभ्यर्थियों की सूची राजस्थान ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को भेजी जाती है। वहां से जिलेवार मेरिट लिस्ट तैयार कर प्रोबेशनर ट्रेनी के रूप में अभ्यर्थियों को नियुक्त किया जाता है। यह प्रक्रिया विभागीय स्तर पर तय दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित होती है। स्थायी नियुक्ति की शर्तें और मिलने वाले लाभ परिवीक्षा अवधि के दौरान प्रशिक्षण, मूल्यांकन और परीक्षा पास करना जरूरी होता है। सफलतापूर्वक स्थायी नियुक्ति मिलने पर अभ्यर्थी को वेतनमान, DA, HRA, चिकित्सा सुविधा, और अन्य सरकारी भत्तों का लाभ मिलता है। इसके अलावा, प्रमोशन और वार्षिक वेतन वृद्धि भी निर्धारित नियमों के अनुसार दी जाती है।  

Reels का जादू या जाल? सेहत पर पड़ रहा है खतरनाक असर

नई दिल्ली सोशल मीडिया पर रील्स देखना आजकल युवाओं के लिए दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। खासकर रात में सोने से पहले रील्स या शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करना एक सामान्य आदत बन गई है, लेकिन ये आदत मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, रात को लगातार रील्स देखने से डिजिटल एंजायटी यानी इंटरनेट से जुड़ी मानसिक बेचैनी तेजी से बढ़ रही है। ग्वालियर के जेएएच अस्पताल में मानसिक रोग विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बीते एक साल में 18 से 30 वर्ष के युवाओं में मानसिक परामर्श लेने वालों की संख्या में 40% तक बढ़ोतरी हुई है। इनमें ज़्यादातर छात्र, नौकरीपेशा लोग या सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर हैं, जो दिनभर की थकान मिटाने के लिए रात को मोबाइल पर रील्स देखते हैं। लेकिन यह आदत उन्हें राहत देने की बजाय और ज्यादा बेचैन कर रही है। नींद का पैटर्न हो रहा गड़बड़ मनोचिकित्सक डॉ. अतर सिंह के अनुसार, रील्स की लत धीरे-धीरे 'डूम स्क्रॉलिंग' में बदल जाती है। व्यक्ति घंटों तक मोबाइल पर स्क्रॉल करता रहता है, लेकिन उसे संतोष नहीं मिलता। इससे नींद पूरी नहीं हो पाती और अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की कमी महसूस होती है। यह आदत धीरे-धीरे डिप्रेशन और सोशल आइसोलेशन का कारण भी बन सकती है। डोपामिन हिट्स से बढ़ रही बेचैनी रील्स की तेजी से बदलती क्लिप्स दिमाग को लगातार डोपामिन हिट्स देती हैं। इससे दिमाग बार-बार उसी खुशी की तलाश करता है। जब ये हिट कम होने लगती है, तो व्यक्ति बेचैन और असहज महसूस करने लगता है, जिसे विशेषज्ञ 'डिजिटल एंजायटी' कहते हैं। बचाव के उपाय मनोचिकित्सक डॉ. अमन किशोर का सुझाव है कि सोशल मीडिया के उपयोग पर एक समय-सीमा तय करनी चाहिए। सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल बंद कर देना चाहिए। उसकी जगह किताब पढ़ें, धीमा संगीत सुनें या मेडिटेशन करें। अगर लगातार बेचैनी, नींद न आना या चिड़चिड़ापन महसूस हो, तो तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।

स्कूलों में जंक फूड पर लगाम: CBSE ने तय किए तेल-चीनी के नए नियम

ग्वालियर अब छात्रों को स्कूल में मिलने वाले समोसे, पेस्ट्री, जूस या चाय के साथ यह जानकारी भी मिलेगी कि उनमें कितना तेल और शक्कर मिला है। CBSE ने एक नया सर्कुलर जारी किया है, जिसमें सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि कैंटीन, मेस या कैफेटेरिया में मिलने वाले खाद्य पदार्थों में प्रयुक्त ऑयल और शुगर की मात्रा बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखी जाए। यह निर्णय बच्चों में बढ़ती मोटापा, डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए लिया गया है। CBSE का मानना है कि यदि छात्र खुद यह जानेंगे कि वे क्या खा रहे हैं और उसमें कितनी कैलोरी, शुगर और फैट है, तो वे अपने खानपान को लेकर ज्यादा जागरूक होंगे। ग्वालियर के स्कूलों में भी लागू होंगे नियम ग्वालियर के सभी CBSE स्कूलों में अब कैंटीन के बाहर ऐसे बोर्ड लगाए जाएंगे, जिन पर हर स्नैक की पोषण जानकारी दी जाएगी। उदाहरण के लिए, यदि किसी समोसे का वजन 100 ग्राम है तो उसमें लगभग 28 ग्राम तेल होता है, जिससे लगभग 362 कैलोरी ऊर्जा मिलती है। इसी तरह एक 300ml कोल्ड ड्रिंक में 32 ग्राम शक्कर और 132 कैलोरी पाई जाती है। सेहत के लिए फायदेमंद पहल रिटायर्ड बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ए.पी.एस. जादौन का कहना है कि यह कदम खासतौर पर किशोरावस्था के छात्रों के लिए बेहद जरूरी है। इस उम्र में अनहेल्दी डाइट भविष्य में मोटापा, हृदय रोग और डायबिटीज जैसी बीमारियों का कारण बन सकती है। इस तरह की पहल छात्रों को फूड अवेयरनेस के प्रति सजग बनाएगी। स्कूल प्रिंसिपल और शहरवासी भी हुए सहमत एक निजी स्कूल के प्राचार्य विनय झलानी ने CBSE की इस पहल को सराहा और कहा कि अब समय आ गया है कि हम बच्चों को पोषण से जुड़ा ज्ञान भी दें। स्कूल प्रशासन के मुताबिक वे जल्द ही इन न्यूट्रिशन बोर्ड्स को स्कूल में लगाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। वायरल अफवाह ने मचाई थी हलचल कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हुई थी जिसमें दावा किया गया था कि अब हलवाई और होटल संचालकों को भी जलेबी, समोसे और अन्य पारंपरिक व्यंजनों में प्रयुक्त तेल और शक्कर की मात्रा बतानी होगी। हालांकि यह खबर अफवाह निकली, लेकिन इसने आमजन में हलचल जरूर मचा दी। ग्वालियर के स्थानीय मिष्ठान विक्रेता दीपू गुप्ता ने बताया कि जलेबी और समोसे में आमतौर पर सरसों का तेल ही उपयोग होता है और किसी प्रकार की मिलावट नहीं की जाती। लेकिन हर चीज में तेल और शक्कर का प्रतिशत बताना तकनीकी रूप से जटिल है।