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नन्ही सृष्टि को गोद में उठाकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रच दिया अपनत्व और स्नेह का अविस्मरणीय पल

  सरलता, करुणा और जनसामान्य से जुड़ाव की मिसाल बने मुख्यमंत्री साय : किसान पिता बोले, जीवन भर रहेगा याद रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का नेतृत्व केवल जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास की दिशा में सशक्त पहल तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी सहजता, आत्मीयता और मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण व्यवहार ने उन्हें जन-जन के हृदय में विशेष स्थान दिलाया है। आज जांजगीर चांपा जिले में आगमन के दौरान हेलीपेड पर ऐसा ही एक क्षण सामने आया, जब मुख्यमंत्री ने नन्ही बच्ची सृष्टि को गोद में उठाकर स्नेह से दुलारा। किसान योगेंद्र पांडेय अपनी तीन वर्षीय पुत्री सुश्री सृष्टि पांडेय को लेकर ग्राम भणेसर से विशेष रूप से मुख्यमंत्री साय से मिलने पहुंचे थे। जब मुख्यमंत्री साय  की दृष्टि  मासूम बच्ची सृष्टि पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत आत्मीय मुस्कान के साथ निहारा और उसे स्नेह से अपनी गोद में उठा लिया।  मुख्यमंत्री से मिलकर नन्ही सृष्टि की आँखों में जो चमक थी, वह पूरे वातावरण को आत्मीयता से भर गई। सृष्टि के पिता योगेंद्र पांडेय ने भावुक होकर बताया कि मुख्यमंत्री जी के आने की खबर सुनकर मैंने तय किया कि अपनी बेटी को उनसे मिलवाऊँगा। जब मुख्यमंत्री जी ने उसे गोद में उठाया, तो हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मेरी बेटी और हम दोनों के लिए यह पल हमारे जीवन की सबसे अनमोल स्मृति बन गई है जो जीवन भर याद रहेगी। सुश्री सृष्टि, जो वर्तमान में नर्सरी कक्षा की छात्रा हैं, अपने पिता के साथ मुख्यमंत्री साय को देखने के लिए अत्यंत उत्साह के साथ पहुंची थीं। उनका परिवार एक साधारण किसान परिवार है, जिसमें माता-पिता, दादा-दादी और सृष्टि स्वयं शामिल हैं।  

सोनी सब के कलाकारों ने रक्षाबंधन से जुड़ी अपनी सबसे खास यादें साझा की

मुंबई,  सोनी सब के कलाकारों ने रक्षाबंधन से जुड़ी अपनी सबसे खास यादें प्रशंसको के साथ साझा की है। रक्षाबंधन केवल एक धागा बांधने का त्योहार नहीं है। यह दिलों को जोड़ने, यादों को संजोने और भाई-बहन के रिश्ते की अनकही मजबूती को मनाने का अवसर है। जब देश इस पारंपरिक पर्व को एकजुट होकर मना रहा है, तब सोनी सब के लोकप्रिय चेहरे शब्बीर आह्लूवालिया, आशी सिंह, आन तिवारी और गरिमा परिहार अपने बचपन के रक्षाबंधन की रस्मों, शरारती झगड़ों और भावुक पलों को याद कर रहे हैं, जिन्होंने इस त्योहार को उनके लिए खास बना दिया। उनकी बातों में इस पर्व की मिठास झलकती है, जो स्क्रीन पर उनके सहज भावनात्मक जुड़ाव को और प्रामाणिक बनाती है। पुष्पा इम्पॉसिबल में दीप्ति का किरदार निभा रहीं गरिमा परिहार ने कहा, “मुझमे और मेरे भाई में 10 साल का अंतर है, लेकिन हमारा रिश्ता परिपक्वता और शरारत का बेहतरीन संतुलन है। हर रक्षाबंधन मुझे इसी खास जुड़ाव की याद दिलाता है। हम बड़े हो गए हैं, लेकिन आज भी जो राखी मैं उनकी कलाई पर बांधती हूं, उसमें वही बचपन वाला प्यार, सुरक्षा और यादें बसती हैं। वो मेरे लिए दूसरे पिता जैसे हैं, हमेशा संरक्षण देने वाले और हमेशा सहारा बनने वाले। उन्हें बस मुझे देखकर ही पता चल जाता है कि मैं ठीक हूं या नहीं। अब जब वो खुद पिता बन गए हैं, तो उनके छोटे बेटे को हमारे रक्षाबंधन के रीति-रिवाजों में शामिल होते देखना बहुत सुखद लगता है। हम आज भी एक-दूसरे की खिंचाई करते हैं, लेकिन दिन के अंत में हम सुनिश्चित करते हैं कि घर मुस्कानों से भरा रहे। रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि उनके उस सुकून भरे साथ का जश्न है, जो मेरी जिंदगी में हमेशा रहा है।” उफ़्फ़… ये लव है मुश्किल में कैरी शर्मा का किरदार निभा रहीं आशी सिंह ने कहा, “रक्षाबंधन हमेशा से मेरे लिए बहुत खास रहा है, सिर्फ मेरे भाई की वजह से ही नहीं, बल्कि इसलिए भी क्योंकि मेरी तीन शानदार बहनें भी हैं! हमारे घर में इस दिन का माहौल पूरी तरह जश्न में बदल जाता है – ढेर सारी खिंचाई, सजना-संवरना और चार भाई-बहनों के होने की वजह से होने वाला हंगामा! मेरा भाई इकलौता लड़का है, इसलिए उसे बराबर से दुलार और छेड़छाड़ दोनों मिलती है! इस साल मैंने पहले ही कह दिया है कि मुझे उससे खास तोहफा चाहिए, कोई बहाना नहीं चलेगा! हम बचपन से चॉकलेट से लेकर राज़ तक सबकुछ शेयर करते आए हैं, और रक्षाबंधन वह दिन है जब प्यार और खिंचाई दोनों कई गुना बढ़ जाते हैं। चाहे जिंदगी कितनी भी व्यस्त हो जाए, यह दिन हम सबको एक साथ लाता है और यही मुझे सबसे ज्यादा प्रिय है।” उफ़्फ़… ये लव है मुश्किल में युग का किरदार निभा रहे शब्बीर आह्लूवालिया ने कहा, “रक्षाबंधन हमेशा मेरे दिल के करीब रहा है क्योंकि यह केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि हमेशा एक-दूसरे के लिए मौजूद रहने का वादा है। मेरी बहन शेफाली और मैं भले ही अब अलग-अलग शहरों में रहते हों, लेकिन हमारा रिश्ता उतना ही मजबूत है, शायद पहले से भी ज्यादा। हम बचपन से एक-दूसरे के सबसे बड़े सपोर्टर रहे हैं और दूरी ने इसे बदला नहीं है। इस साल मैं उसे एक खास तोहफे से सरप्राइज करने की योजना बना रहा हूं, जो उसके चेहरे पर मुस्कान लाए क्योंकि वह इसकी हकदार है। भले ही हम रक्षाबंधन पर एक साथ न हों, लेकिन हमारे बीच का प्यार और जुड़ाव राखी से कहीं ज्यादा गहरा है।” वीर हनुमान में भगवान हनुमान का किरदार निभा रहे आन तिवारी ने कहा, “साची दीदी और मेरा रिश्ता प्यार, हंसी और ढेर सारे राज़ों से भरा है! मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं कि वह मेरी जिंदगी में हैं। वह मेरे लिए दूसरी मां जैसी हैं – हमेशा मार्गदर्शन करने वाली, सहारा देने वाली और सही रास्ता दिखाने वाली। और मैं? मैं उनका सबसे बड़ा चीयरलीडर और रक्षक हूं – उनके सामने कोई कुछ कह नहीं सकता! जब वह उदास होती हैं, तो मैं उन्हें सबसे बड़ा हग देता हूं और उन्हें हंसाने के लिए कुछ भी करता हूं। मेरे लिए यही रक्षाबंधन है, उस अटूट, बिना शर्त वाले प्यार का जश्न।”  

राजगढ़ से लाड़लियों को सौगात: भाईदूज पर 1500 रुपए और हर साल बढ़ेगी राशि

राजगढ़ सीएम मोहन यादव ने आज राजगढ़ में घोषणा की है कि भाईदूज से लाड़ली बहनों को 1500 रुपए दिये जाएंगे। 2026 और 27 में भी राशि बढ़ाएंगे और 2028 तक 3 हजार प्रतिमाह की जाएगी। मोहन यादव यहां नरसिंहगढ़, जिला राजगढ़ में आयोजित बहनों के साथ 'रक्षाबंधन उत्सव' एवं 1.26 करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों को रक्षाबंधन का उपहार अंतरण में बोल रहे थे। इससे पहले एक वीडियो संदेश में उन्‍होंने कहा था कि, भाई- बहन के अटूट प्रेम और विश्वास के प्रतीक रक्षाबंधन पर्व की सभी प्रदेशवासियों को अग्रिम शुभकामनाएं। रक्षाबंधन से 2 दिन पूर्व, आज लाड़ली बहनों के खातों में 1500 रुपए आएंगे, जिसमें रक्षाबंधन की भेंट स्वरूप 250 रुपए सम्मिलित हैं। हमारी सरकार निरन्तर महिला सशक्तिकरण के लिए संकल्पित है।   1250 माह की राशि, 250 रक्षाबंधन का उपहार लाड़ली बहना योजना के तहत सीएम ने आज नरसिंहगढ़ से 1250 रुपये तो बहनों को हर माह मिलने वाली राशि ट्रांसफर की। जबकि 250 रुपये प्रति बहना को रक्षाबंधन के उपहार के रूप में ट्रांसफर किए जाएंगे। इस योजना से मप्र की करीब 1 करोड़ 26 लाख बहनों को लाभ मिलेगा, जबकि राजगढ जिले की 2 लाख 95 हजार महिलाएं लाभांवित होंगे, जिनके खातों में करीब 42 करोड रुपये ट्रांंसफर किए गए। दो साल में 12 हजार कम हो गई लाड़ली बहनें मप्र में लाड़ली बहना योजना के शुरू होने से लेकर अब तक राजगढ़ जिले में करीब 12 हजार लाड़ली बहनें कम हो गई है। दो साल के भीतर 12 हजार लाड़ली बहनों की संख्या घट गई, जबकि नए आवेदन को कोई प्राविधान नहीं है। इसी के बीच आज मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नरसिंहगढ़ से लाड़ली बहनाें के खातों में राशि डाली। इसमें राजगढ़ जिले की 2.95 लाख महिलाओं के खातों में भी 44 करोड़ राशि सिंगल क्लिक से ट्रांसफर की। लाड़ली बहना योजना अभी तक     मप्र विधानसभा चुनाव के ठीक पहले भाजपा सरकार द्वारा जनवरी 2023 में लाड़ली बहना योजना का एलान किया था।इसके बाद 10 जून 2023 को पहली किश्त के रूप में राशि ट्रांसफर की थी।     जब योजना शुरू हुई थी उस समय राजगढ़ जिले में लाडली बहनों की संख्या करीब 3 लाख 8 हजार थी, जबकि वर्तमान में यह संख्या घटकर 2 लाख 95 हजार पर आ गई है।     दो साल के भीतर करीब 8 से 12 हजार लाड़लियां जिले में कम हुई है। आज गुरुवार को मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के माध्यम से मप्र की लाडली बहनों के खातों में 27 वीं किश्त के रूप में राशि ट्रांसफर की।     हालांकि इस सबके बीच अधिकारियों का कहना है कि कुछ महिलाओं की आयु 60 वर्ष हो गई, जबकि कुछ ने योजना का लाभ लेने से मना कर दिया, इसलिए संख्या घट गई।

एमसीबी जिले के वनमंडला अधिकारी (DFO) मनीष कश्यप द्वारा जनप्रतिनिधियों के साथ की गई अभद्रता के खिलाफ नगरपालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षदों ने की डीएफओ मनीष कश्यप को हटाने की मांग

एमसीबी/मनेंद्रगढ़ छत्तीसगढ़ मनेंद्रगढ़ जिले में वन विभाग और स्थानीय निकाय के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। डीएफओ मनीष कश्यप के खिलाफ नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिमा यादव, उपाध्यक्ष धर्मेंद्र पटवा, विधायक प्रतिनिधि सरजू यादव और दोनों दलों के पार्षदगण ने वन मंडलाधिकारी कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन किया। धरने पर बैठे जनप्रतिनिधि “डीएफओ हटाओ”, “तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाते रहे। इस बीच धरने को समर्थन देने भाजपा जिलाध्यक्ष चंपादेवी पावले भी पहुंची मुद्दा था भालुओं का आतंक, जवाब मिला अपमान से ! नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिमा यादव ने बताया कि वे भालू के लगातार विचरण से आतंकित वार्डों के समाधान के लिए ज्ञापन देने पहुंचे थे, लेकिन डीएफओ मनीष कश्यप ने जनप्रतिनिधियों से अभद्र भाषा में बात की और मिलने से इनकार कर दिया‌उन्होंने कहा, “हम वार्डवासियों की समस्या लेकर पहुंचे थे, लेकिन डीएफओ ने कहा कि वो सबसे नहीं मिलेंगे। जब फोन उठाने की बात की गई तो जवाब मिला – ‘मेरा मन’। यह सरासर तानाशाही और जनप्रतिनिधियों का अपमान है नगरपालिका के पक्ष एवं विपक्ष दोनों दलों के पार्षद एक मंच पर इस मामले ने राजनीतिक सरहदें भी तोड़ दी हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के पार्षद नपाध्यक्ष के समर्थन में डीएफओ कार्यालय के सामने जमीन पर बैठ गए और एक सुर में कहा – “जनता की आवाज उठाना अगर अपराध है तो हम हर दिन अपराधी बनेंगे पहले भी विवादों में रहे हैं डीएफओ मनीष कश्यप यह पहली बार नहीं है जब डीएफओ मनीष कश्यप पर जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्रता और मनमानी का आरोप लगा हो। पूर्व में भी कई सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने उनके व्यवहार और कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। साल 2023 में एक महिला सामाजिक कार्यकर्ता ने भी उन पर दफ्तर में बदसलूकी और जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया था। वन विभाग के कर्मचारियों के साथ भी उनके विवाद की खबरें आती रही हैं। विधायक प्रतिनिधि सरजू यादव का बड़ा बयान विधायक प्रतिनिधि सरजू यादव ने कहा, “मनीष कश्यप जैसे अधिकारी को जनता और जनप्रतिनिधियों की भावनाओं से कोई मतलब नहीं। ऐसे तानाशाही रवैये वाले अफसर को जिले में रहने का हक नहीं है भालू से परेशान जनता, अधिकारी कर रहे राजनीति ? शहर के कई वार्डों में भालू के खुले विचरण की वजह से स्कूल जाने वाले बच्चों, महिलाओं और वृद्धजनों में दहशत है लोग रात में बाहर निकलने से डरते हैं, लेकिन वन विभाग इस पर किसी ठोस कार्रवाई से दूर नजर आ रहा है जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि समस्या का समाधान करने की बजाय, डीएफओ जनसेवकों को ही अपमानित कर रहे हैं।

टेक की दुनिया में भारत की धमक: टिम कुक का 9 लाख करोड़ रुपए का मेगा प्लान

नई दिल्ली जब टेक दिग्गज एप्पल के सीईओ टिम कुक व्हाइट हाउस पहुंचे, तो वे सिर्फ़ एक औपचारिक मुलाकात के लिए नहीं आए थे. वे अमेरिका को एक “नया निवेश वचन” और 24 कैरेट सोने पर टिकी एक प्रतीकात्मक सौगात देने आए थे. कुक ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की और 100 बिलियन डॉलर यानी लगभग 9 लाख करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा कर दी. इस मुलाकात को खास बना दिया उस तोहफे ने, जो कुक ने ट्रंप को दिया: एक गोल गोरिल्ला ग्लास डिस्क, वही मैटेरियल जिससे iPhone का स्क्रीन बनता है. इसके केंद्र में चमकता हुआ एप्पल का लोगो और ऊपर लिखा था, “Made in USA 2025”. डिस्क को थामे 24 कैरेट गोल्ड प्लेटेड स्टैंड. यह तोहफा केवल तकनीक का नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश था, कि एप्पल अब अमेरिका में बनेगा और अमेरिका के लिए बनेगा. भारत से निकली लहर, जो अमेरिका तक जा पहुंची जहां एक ओर अमेरिका में एप्पल अपने निवेश का विस्तार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसकी मैन्युफैक्चरिंग रीढ़ अब चीन से हटकर भारत पर टिक गई है. 2025 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में भारत में बने iPhones की संख्या 2.39 करोड़ पार कर गई, जो पिछले साल की तुलना में 53% अधिक है. इतना ही नहीं, भारत से iPhone का निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है. 22.88 मिलियन यूनिट्स विदेश भेजे गए, जिनका कुल मूल्य ₹1.94 लाख करोड़ रहा. पिछले वर्ष यह आंकड़ा 1.26 लाख करोड़ रुपए था, यानी 52% की जबरदस्त छलांग. भारत ने अमेरिका में चीन को पछाड़ा सबसे बड़ी खबर यह है कि अप्रैल 2025 में भारत से अमेरिका भेजे गए 33 लाख iPhones ने चीन से आए केवल 9 लाख यूनिट्स को बहुत पीछे छोड़ दिया. आज अमेरिका में बिकने वाले 78% iPhones भारत में बन रहे हैं, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा सिर्फ 53% था. क्या एप्पल एक नई ग्लोबल री-शेपिंग की शुरुआत कर रहा है? एक तरफ अमेरिका को मिल रहा है बड़ा निवेश और राष्ट्रवाद की चमकदार गूंज, दूसरी तरफ भारत बन रहा है एप्पल की मैन्युफैक्चरिंग सुपरपावर. यह महज एक कंपनी की रणनीति नहीं, बल्कि एक नई टेक्नोलॉजिकल पॉलिटिक्स की कहानी है, जहां वैश्विक सप्लाई चेन अब केवल लागत नहीं, बल्कि सियासत और भरोसे के आधार पर तय हो रही है. टिम कुक का यह ‘गोल्डन डिस्क’ ट्रंप के लिए भले ही एक गिफ्ट हो, लेकिन दुनिया के लिए यह एक साफ संदेश है, एप्पल अब वैश्विक राजनीति का एक सक्रिय खिलाड़ी बन चुका है. निवेश, उत्पादन और रणनीति, सब कुछ अब दो शब्दों में गूंज रहा है: “Made in India, Powered by America.”

हत्यारों की पार्टी थी सपा-कांग्रेस? CM योगी ने संभल में लगाए गंभीर आरोप

संभल मुख्यमंत्री योगी आदित्यना ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस संभल में सामूहिक हत्याएं करवाती थी और समाजवादी पार्टी उसके चेले के रूप में उनके पाप कर्मों पर पर्दा डालने का काम करती थी, हत्यारों को बचाने का काम करती थी। दंगाइयों के ऊपर महाकाल का अब वास्तविक असर दिखाई पड़ रहा है,अब दंगाई दुर्गति को प्राप्त हो रहे हैं। संभल आस्था का केंद्र- CM इस दौरान संभल में मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि इस जिले को फोर लेन सड़क की सुविधा दी जाएगी, क्योंकि संभल आस्था का केंद्र है। विष्णु पुराण और श्रीमदभागवत पुराण में उल्लेख है कि भगवान कल्कि का अवतार संभल में होगा।यहां 68 तीर्थ और 29 कूप थे, लेकिन इनको अपवित्र किया गया। अहिल्याबाई जी ने इन तीर्थों का उद्धार किया था. अब हमारी सरकार इनका जीर्णोद्धार कर रही है।  

एक अंगदान, तीन शहर – सिवनी, भोपाल और गुजरात के बीच ज़िंदगी की जीत

जबलपुर नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में एक ब्रेन डेड मरीज के अंगदान ने कई लोगों को नया जीवन देने का प्रयास किया है। महत्वपूर्ण है कि घंसौर में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद 34 साल के युवक सत्येंद्र यादव को मेडिकल कॉलेज लाया गया था, जहां बुधवार रात डॉक्टर ने ब्रेनडेड घोषित कर दिया था। ग्रीन कॉरिडोर बनाने की प्रक्रिया गुरुवार सुबह शुरू हो चुकी थी। हालांकि दो बार समय में संशोधन के बाद सबसे पहले ह्दय ग्रीन कॉरिडोर बनाकर दोपहर बाद 3:40 पर डुमना विमानतल के लिए रवाना हुआ, जहां से एयर एंबुलेंस की मदद से अहमदाबाद स्थित सिम्स अस्पताल भेजा गया।   दूसरा कॉरिडोर शाम 4:18 बजे लिवर डुमना विमानतल के लिए बनाया गया। लीवर लेकर सिद्धांता सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भोपाल के लिए एयर एंबुलेंस ने उड़ान भरी। मरीज के अंगों को सुरक्षित निकालने के बाद उन्हें राजधानी भोपाल और अहमदाबाद भेजने की प्रक्रिया सुबह से मेडिकल कॉलेज परिसर में जारी थी। एक व्यक्ति के अंगों से तीन लोगों को मिलेगी जिंदगी मरीज सत्येंद्र यादव का ब्रेनडेड हो गया था, मेडिकल डॉक्टरों ने मरीज के स्वजन से बात की और अंगदान के बारे में जानकारी दी। जिसके बाद मरीज के स्वजन तैयार हुए और अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। अंगदान करने वाले सत्येंद्र का ह्दय, लीवर और किडनी दान किया गया है। मरीज का दिल गुजरात के अहमदाबाद में एक जरूरतमंद मरीज के लिए भेजा जा गया है। लीवर को भोपाल भेज रहे हैं, जहां के एक मरीज को यह नया जीवन देगा। एक किडनी जबलपुर में ही किसी जरूरतमंद मरीज को ट्रांसप्लांट की जाएगी, जबकि दूसरी किडनी को भी सुरक्षित रखा गया है। ग्रीन कॉरिडोर से कम समय में पहुंचे अंग अंगों को समय पर उनके गंतव्य तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होती है। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन के सहयोग से मेडिकल अस्पताल से लेकर डुमना एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इस कॉरिडोर के जरिए एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के एयरपोर्ट तक पहुंचाने विशेष इंतजाम किए गए थे। ताकि अंगों को तुरंत एयर एंबुलेंस से भेजा जा सके। ग्रीन कारिडोर को कैसे समझें दोपहर बाद दो ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया और मेडिकल से एंबुलेंस के माध्यम से लिवर व ह्दय डुमना के लिए रवाना हुए, जिसके लिए एंबुलेंस मेडिकल कॉलेज से निकलकर बरगी हिल्स रामपुर का रूट होते हुए सीएमएम, सिविल लाइन से डुमना पहुंची। ट्रैफिक को देखते हुए शहर के अंदर के रूट को छोड़कर बाहर से रूट तैयार किया गया था। मैं मरीज के स्वजन को धन्यवाद देना चाहूंगा, जिनकी सहमति से हम दो मरीजों को जीवन दान देने के प्रयास में सहयोगी बन सके। किडनी को अभी सुपर स्पेशियलिटी में सुरक्षित रखा गया है, जो कि जरूरतमंद को लगाई जा सकेगी- डॉक्टर नवनीत सक्सेना, डीन एनएससीबी मेडिकल कालेज जबलपुर।

नक्सल पीड़ित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए बन रहे तीन हजार पीएम आवास

 दुर्गम क्षेत्र और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मात्र तीन महीनों में पूर्ण हुआ सोडी हुंगी और दशरी बाई का मकान विशेष परियोजना के तहत इस साल मार्च में स्वीकृति के बाद मई में शुरू हुआ था काम छत्तीसगढ़ सरकार के आग्रह पर केंद्र सरकार ने विशेष परियोजना के तहत मंजूर किए हैं 15 हजार आवास छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास, विकास और पुनर्वास की नीति पर कर रही है कार्य: सरकार सभी पात्र हितग्राहियों को पक्का घर देने के लिए संकल्पित : मुख्यमंत्री साय रायपुर. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दूरस्थ वनांचलों के हर परिवार को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने सरकार लगातार पहल कर रही है। राज्य में नक्सल पीड़ित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए विशेष परियोजना के तहत करीब तीन हजार आवास बन रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार से विशेष आग्रह कर आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए जो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता की शर्तों में नहीं आ पा रहे थे, उनके लिए विशेष परियोजना के तहत 15 हजार आवास स्वीकृत कराया है। विशेष परियोजना के तहत राज्य में अब तक पात्र पाए गए पांच हजार परिवारों में से तीन हजार परिवारों के लिए आवास स्वीकृत कर 2111 परिवारों को आवास निर्माण के लिए पहली किस्त और 128 परिवारों को दूसरी किस्त भी जारी की जा चुकी है। सुदूर वनांचलों में रहने वाले इन परिवारों के आवास तेजी से बन रहे हैं। नक्सल हिंसा से प्रभावित सुकमा की सोडी हुंगी और कांकेर की दशरी बाई का विशेष परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत पीएम आवास दुर्गम क्षेत्र और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मात्र तीन महीनों में ही बनकर तैयार हो गया है। इस साल मार्च में स्वीकृति के बाद मई में इनके आवासों का निर्माण प्रारंभ हुआ था।   बस्तर में नक्सल हिंसा से प्रभावित और आत्मसमर्पित नक्सलियों के परिवारों में खुशियों ने फिर से दस्तक देना शुरू कर दिया है। विशेष परियोजना के तहत स्वीकृत उनके पक्के आवास तेजी से आकार ले रहे हैं। दूरस्थ और कठिन भौगोलिक क्षेत्र होने के बावजूद इन परिवारों के हौसले और शासन-प्रशासन की मदद से उनके सपनों के आशियाने मूर्त रूप ले रहे हैं। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में यह विशेष परियोजना न केवल एक ठोस कदम है, बल्कि पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में मील का पत्थर भी है। दुर्गम क्षेत्र और विपरीत हालातों के बीच भी तीन महीने में निर्माण पूरा कांकेर जिला मुख्यालय से लगभग 200 किलोमीटर दूर कोयलीबेड़ा विकासखण्ड के उलिया ग्राम पंचायत में रहने वाली श्रीमती दसरी बाई नुरूटी के पति दोगे नुरूटी की विधानसभा चुनाव के दौरान माओवादी घटना में मृत्यु हो गई थी। पीएम आवास योजना में नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए विशेष परियोजना के तहत इस साल मार्च में उसका आवास स्वीकृत किया गया था। मई में उसके आवास का निर्माण शुरू हुआ था। अब मात्र तीन महीनों की अल्प अवधि में ही उसके आवास का निर्माण पूर्ण हो गया है। दसरी बाई के हौसले के कारण कठिन परिस्थितियों के बावजूद बहुत कम समय में आवास तैयार हुआ और उसके परिवार को पक्का मकान मिला। श्रीमती दसरी बाई बताती हैं कि वनांचल और दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण आवास के निर्माण में कई व्यावहारिक दिक्कतें आईं। विकासखंड मुख्यालय से बहुत दूर होने के कारण चारपहिया वाहनों के लिए कोई मार्ग नहीं है। इस कारण से निर्माण सामग्री लाने में बहुत कठिनाइयां आईं। बारिश होने पर दोपहिया वाहन से भी पहुंचना अत्यंत मुश्किल होता था, जिसके चलते राजमिस्त्री और श्रमिक समय पर पहुंचने से मना कर देते थे। अंदरूनी क्षेत्र होने से निर्माण सामग्रियों को लाना सामान्य क्षेत्र के मुकाबले महंगा पड़ता था। श्रीमती दसरी बाई कहती हैं कि आवास का काम तेजी से पूरा करने में कांकेर जिला प्रशासन, ग्राम पंचायत और प्रधानमंत्री आवास योजना के अधिकारियों का बहुत सहयोग मिला। निर्माण सामग्रियां पहुंचाने तथा राजमिस्त्रियों और श्रमिकों की व्यवस्था में ग्राम पंचायत एवं आवास टोली ने बहुत सहायता की। वह कहती हैं कि नक्सल पीड़ितों और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए सरकार ने संवेदनशील और प्रभावी नीति बनाई है। शासन-प्रशासन के लगातार सहयोग से बहुत कम समय में उसका पक्का आवास बन गया है। बरसों टपकती छत वाले कच्चे मकान में रहने वाली सोडी हुंगी अब परिवार के साथ अपने नए पक्के घर में सुकमा जिले के गादीरास ग्राम पंचायत के आश्रित गांव ओईरास की श्रीमती सोडी हुंगी ने भी अपना पक्का आवास तीन महीने में बना लिया है। वर्ष 2005 में उसके पति मासा सोडी की नक्सलियों ने मुखबिरी के संदेह में हत्या कर दी थी। उसका परिवार गरीबी में वर्षों तक कच्चे घर में रहने को मजबूर था, जहां बरसात में टपकती छत और जहरीले कीड़े-मकोड़ों से जान का खतरा बना रहता था। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में विशेष परियोजना के तहत आवास स्वीकृत होने पर सोडी हुंगी को चरणबद्ध रूप से तीन किस्तों में कुल एक लाख 35 हजार रुपए मिले। ग्राम पंचायत के तकनीकी मार्गदर्शन और समय-समय पर निगरानी के चलते इस साल जुलाई में उसके आवास का निर्माण पूरा हुआ। अब वह परिवार के साथ अपने पक्के नए घर में रहती है। विशेष परियोजना में सुकमा में सर्वाधिक 984 परिवारों को आवास स्वीकृत, बीजापुर के 761 और नारायणपुर के 376 परिवार शामिल प्रधानमंत्री आवास योजना में विशेष परियोजना के तहत अब तक करीब तीन हजार आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों के लिए आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें सर्वाधिक 984 परिवार सुकमा जिले के हैं। बीजापुर जिले में ऐसे 761 परिवारों, नारायणपुर में 376, दंतेवाड़ा में 251, बस्तर में 214, कोंडागांव में 166, कांकेर में 146, गरियाबंद में 27, बलरामपुर-रामानुजगंज में 25 और मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी में 23 परिवारों के आवास मंजूर किए गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास, विकास और पुनर्वास की रणनीति पर कार्य कर रही है। आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने हेतु राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत विशेष परियोजना के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध कर 15 हजार आवास स्वीकृत कराए हैं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना सिर्फ ईंट और सीमेंट का निर्माण … Read more

लाड़ली बहनों को राखी पर सौगात: सीएम ने बांधी राखी, दिए 250 रुपए शगुन, 1859 करोड़ हुए ट्रांसफर

नरसिंहगढ़ मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि भाईदूज से हर महीने 1500 रुपए बहनों के खाते में आने शुरू हो जाएंगे। गुरुवार को मुख्यमंत्री लाड़ली बहनों से राखी बंधवाने राजगढ़ के नरसिंहगढ़ पहुंचे। उन्होंने फूलों का तारों का सबका कहना है…गाने के बीच बहनों पर फूलों की बरसात की। बहनों ने मंच पर ही सीएम को राखी बांधी। सत्ता से टकराने की हिम्मत बहनों से आती है इस मौके पर डॉ. मोहन यादव ने कहा- भाई-बहन के रिश्ते से ज्यादा पवित्र रिश्ता कोई दूसरा नहीं होता। रक्षाबंधन पर अगर बहन-बेटियां घर आ जाएं, तो लगता है जैसे दिवाली आ गई। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मेरी प्रदेश में साढ़े 4 करोड़ बहने हैं। वे जब राखी बांधती हैं, तो आनंद आ जाता है। उन्होंने कहा कि हजारों साल से बड़ी से बड़ी सत्ता से टकराने की हिम्मत अगर कहीं से आती है तो वो बहनों की राखी और आशीर्वाद से ही आती है। बहनें भी बड़े से बड़े संकट में सबसे पहले भाई को ही याद करती हैं और भाई भी दौड़े चले आते हैं। इस बार का रक्षाबंधन ऑपरेशन सिंदूर के नाम सीएम ने कहा कि इस बार का रक्षाबंधन ऑपरेशन सिंदूर के नाम रहने वाला है। मोदी सरकार आई तबसे आतंकी घटनाएं बंद हो गई थीं। लेकिन, आतंकियों ने गलती से हमारी बहनों के सुहाग को उजाड़ा तो हमारी सेना ने उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया। बहनें ससुराल और मायका दोनों का ध्यान रखती हैं सीएम ने कहा- पत्नी तो हमारा ध्यान रखती है, लेकिन बेटी के बराबर सुख पिता को कोई नहीं दे सकता है। पिता की चिंता जितना बेटी करती है, कोई नहीं कर सकता है। हमारी बहनें ससुराल और मायका दोनों का ध्यान रखती हैं। जिस घर में कन्या नहीं हो, वह घर अधूरा रहता है। जिस घर में भाई-बहन हो वह घर स्वर्ग के समान हो जाता है। आज चारों ओर का माहौल अलग दौर से गुजर रहा है, तब रिश्तों का महत्व और बढ़ जाता है। अंग्रेजी में छोटे-छोटे शब्द हैं, अंकल-आंटी में सब कुछ निपट जाते हैं। रेशम के ये दो प्रेम के धागे भाई को हिम्मत और ताकत देते हैं। ये दुनिया की सारी ताकतों से बढ़कर है। बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें मुख्यमंत्री को सुनने पहुंचीं। बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें मुख्यमंत्री को सुनने पहुंचीं भगवान कृष्ण और द्रौपदी का किस्सा सुनाया सीएम ने कहा- लोग कहते हैं रक्षाबंधन की प्राचीन परंपरा कहां से आई। इसमें एक कहानी बहुत महत्व की है। जब भगवान कृष्ण ने अपनी बुआ को शिशुपाल की 100 गलती माफ करने का वचन दे दिया। उन्होंने कहा था इसके बाद भूल जाऊंगा कि ये मेरा भांजा है। शिशुपाल ने 100 से ज्यादा गलती की, भगवान के सुदर्शन चक्र ने उसका सिर अलग कर दिया। भगवान की उंगली में सुदर्शन चक्र से चोट आ गई। उंगली से खून निकलता देख द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़ा और भगवान की उंगली पर बांध दिया। उन्होंने उसी पल्लू से भगवान को राखी भी बांधी। भगवान ने द्रौपदी पर जब भी कष्ट आया, रक्षा की। जिस दरवाजे गया, बहनें सब भूलकर राखी बांधने लगीं सीएम ने कहा- सड़क से गुजरता हूं तो बहनें रोकती हैं, लोग सोचते हैं कोई समस्या लेकर आई होगी, उन्हें नहीं पता कि वो तो आरती की थाली लेकर आई हैं। अभी हम बाढ़ प्रभावित क्षेत्र गुना गए। वहां कई बहनों के घर डूबे हुए थे। उनके घर का राशन खराब हो चुका है। भारी परेशानी थी। यह सोचकर गया था कि ऐसी-वैसी बात भी सुननी पड़ेगी, लेकिन बहन-भाई का संबंध वाकई अद्भुत है। जिस दरवाजे गया, बहनें सब भूलकर राखी बांधने लगीं। वे अपने सारे कष्ट भूल गईं। सरकार के माध्यम से उनके कष्ट भी दूर करेंगे। परसों राखी है, जब आप अपने भाई को राखीं बांधना और गठान लगाना तो मानना की आप मेरी कलाई में भी राखी बांध रही हैं।

टी-सीरीज़ प्रस्तुत ‘ऐसी जन्नत’ रिलीज

मुंबई, भूषण कुमार और टी-सीरीज़ प्रस्तुत गाना ‘ऐसी जन्नत’ रिलीज हो गया है। गाना ऐसी जन्नत को लक्षय कपूर ने गाया है। गाने का संगीत मीत ब्रदर्स ने दिया है और इसके बोल यंगवीर ने लिखे हैं ।इस वीडियो में सोनल चौहान नजर आ रही हैं, जिन्हें उनकी डेब्यू फिल्म जन्नत के लिए आज भी याद किया जाता है। इस बार वह लक्षय कपूर के साथ एक नई और प्यारी केमिस्ट्री साझा करती नज़र आती हैं। दोनों कलाकार इस गीत की भावनाओं को मासूम और सादे प्यार के पलों के ज़रिए जीवंत करते हैं। सोनल चौहान ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा,जब मैंने पहली बार ‘ऐसी जन्नत’ सुना, तो इसकी मेलोडी और सच्चाई से मैं तुरंत जुड़ गई। लक्षय के साथ काम करना बहुत अच्छा अनुभव था।उनकी आवाज़ में गहराई और भावना है। टी-सीरीज़ के साथ दोबारा काम करना भी बहुत अच्छा लगा, जो हमेशा संगीत को खूबसूरती से पेश करते हैं। लक्षय कपूर ने कहा,‘ऐसी जन्नत’ मेरे दिल के बेहद करीब है। यह गाना पुराने ज़माने के सच्चे प्यार की बात करता है। सोनल के साथ काम करना बहुत आसान और प्यारा रहा, और मैं भूषण कुमार सर और टी-सीरीज़ का आभारी हूं कि उन्होंने मुझ पर और इस गाने पर विश्वास किया। ‘ऐसी जन्नत’ अब टी-सीरीज़ के यूट्यूब चैनल पर और सभी प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है।