samacharsecretary.com

झारखंड में ठंड का प्रकोप तेज: 11 जिलों के लिए जारी हुआ येलो अलर्ट

रांची  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को झारखंड के रांची समेत 11 जिलों के लिए 17 नवंबर तक शीतलहर(Cold Wave Alert) की चेतावनी जारी की। आईएमडी ने गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, खूंटी, रामगढ़, रांची और हजारीबाग के लिए 17 नवंबर सुबह 8:30 बजे तक ‘येलो अलर्ट' जारी किया। खूंटी सबसे ठंडा आईएमडी के रांची स्थित कार्यालय के उप-निदेशक और मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया, “इन 11 जिलों में अगले तीन दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में दो-तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने का अनुमान है, जिससे तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक नीचे जा सकता है।” उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में चतरा, लातेहार, पलामू और गढ़वा जैसे उत्तर-पश्चिमी भागों के कुछ जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। खूंटी में तापमान सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और इसके साथ ही राज्य का सबसे ठंडा स्थान रहा। घना कोहरा छाए रहने की संभावना,  दृश्यता होगी प्रभावित वहीं डाल्टनगंज में 9.3 डिग्री सेल्सियस और रांची में 9.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। बुलेटिन में बताया गया कि जमशेदपुर में 12.6 डिग्री सेल्सियस, लोहरदगा में 9.7 डिग्री सेल्सियस और चाईबासा में न्यूनतम तापमान 13.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। विभाग ने बताया कि सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने का अनुमान है, जिससे राज्य के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में दृश्यता प्रभावित होगी। आईएमडी ने साथ ही लोगों से सतर्क रहने का आग्रह किया।

DPDP Rule 2025: भारतीय यूजर्स के डेटा प्रोटेक्शन से जुड़ी पूरी जानकारी

नई दिल्ली इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) नियम 2025 को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। इसके साथ ही, अब DPDP 2023 एक्ट पूरी तरह से लागू हो गया है। ये नए नियम यूजर्स को कंपनियों द्वारा इक्ट्ठा और संसाधित किए जा रहे उनके व्यक्तिगत डेटा की पूरी जानकारी देगें। साथ ही, इन नियमों से यूजर्स को यह भी पता चलेगा कि कंपनियां उनके डेटा का उपयोग कैसे करेंगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 11 अगस्त, 2023 को संसद में DPDP एक्ट पास हुआ था। यह बताता है कि भारत में लोगों का डिजिटल डाटा कैसे सुरक्षित और सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए। सरकार नए DPDP 2025 नियमों को चरणबद्ध तरीके से रोलआउट करेगी। इसके लिए सरकार ने एक रूपरेखा तैयार की है। इनका उद्देश्य नागरिकों को उनके डेटा पर अधिक कंट्रोल देना और डिजिटल स्पेस में उनकी प्राइवेसी की सुरक्षित करना है। आइये, इन नियमों के बारे में डिटेल में जानते हैं। डेटा प्रिंसिपल और डेटा फिड्यूशियरी का क्या है काम? DPDP नियम 2025, डेटा प्रिंसिपल और डेटा फिड्यूशियरी की भूमिकाओं को बताता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डेटा प्रिंसिपल उस व्यक्ति को कहा जाता है, जिसका डेटा इकट्ठा होता है। वहीं, डेटा फिड्यूशियरी कोई भी कंपनी, संगठन या व्यक्ति होता है, जो व्यक्तिगत डेटा को इकट्ठा और संसाधित करता है और साधनों का निर्णय लेता है। नए नियम में यूजर्स को अपने डेटा पर मिलेगा ज्यादा कंट्रोल DPDP नियम 2025 बताते हैं कि सरकार और कोई निजी संस्था को व्यक्ति के व्यक्तिगत डेटा को कैसे इक्ट्ठा किया जाना चाहिए, कैसे संसाधित, संरक्षित और संभालना चाहिए। नए नियमों के तहत यूजर्स का पर्सनल डेटा सेव करने वाली सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सभी कंपनियां को बताना होगा कि वे यूजर्स का कौन-कौन सा डेटा सेव कर रही हैं और वह उनका कैसे इस्तेमाल करेंगी। नए नियम लागू होने से भारतीय यूजर्स को अपने डेटा पर ज्यादा कंट्रोल मिलेगा और उनकी प्राइवेसी सुरक्षित रहेगी। डेटा उल्लंघनों के लिए करने होंगे उपाय नियमों के अनुसार, डेटा को इकट्ठा और संसाधित करने वाली कंपनियों को डेटा उल्लंघनों को रोकने के लिए उचित सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे। इसमें व्यक्तिगत डेटा का एन्क्रिप्शन, मास्किंग, ऑबफस्केशन या टोकनाइजेशन शामिल हैं। यूजर्स को तुरंत देनी होगी चेतावनी उल्लंघन की स्थिति में, डेटा फिड्यूशियरी को प्रभावित हुए यूजर्स को तुरंत सूचित करना होगा कि क्या हुआ, संभावित जोखिम क्या हैं, क्या कदम उठाए गए हैं और किससे संपर्क करना है। उन्हें 72 घंटे के भीतर डेटा संरक्षण बोर्ड को भी सूचित करना होगा। बच्चों के डेटा के लिए चाहिए होगी माता-पिता की परमिशन 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के डेटा को संसाधित करने के लिए माता-पिता की सहमति होना जरूरी है। नए DPDP 2025 नियमों के अनुसार, डेटा फिड्यूशियरी को किसी भी बच्चे के डेटा को इकट्ठा करने या संसाधित करने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि इसके लिए उनके माता-पिता की परमिशन हो। माता-पिता का होगा वेरिफिकेशन संस्था को यह वेरिफाई करना होगा कि सहमति देने वाला व्यक्ति वास्तव में माता-पिता या अभिभावक हैं। इसके लिए वेरिफाइड वर्चुअल टोकन का उपयोग करना होगा। नए नियम से अब कंपनियां माता-पिता की पहचान और उम्र को कन्फर्म किए बिना बच्चे के डेटा को संसाधित नहीं कर सकती हैं। सभी प्रावधान अभी नहीं होंगे लागू बता दें कि सरकार ने DPDP 2025 नियमों को जारी तो कर दिया है, लेकिन सभी प्रावधान अभी से प्रभावी नहीं होंगे। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, अधिनियम की धारा 1 के उप-धारा (2), धारा 2, धारा 18 से 26, धारा 35, 38, 39, 40, 41, 42, 43, और धारा 44 की उप-धारा (1) और (3) तुरंत लागू हो गई हैं। वहीं, धारा 6 की उप-धारा (9) और धारा 27 की उप-धारा (1) का खंड (d) एक साल बाद लागू होंगे। धारा 3 से 5, धारा 6 की उप-धारा (1) से (8) और (10), धारा 7 से 10, धारा 11 से 17, धारा 27 (धारा 27 की उप-धारा (1) के खंड (d) को छोड़कर), धारा 28 से 34, 36, 37 और धारा 44 की उप-धारा (2) 18 महीने बाद लागू होंगे DPDP Rule 2025 (1) यह नया नियम भारतीय नागरिकों को उनके डिजिटल फुटप्रिंट पर अधिक कंट्रोल देता है। अब कंपनियां आपके डेटा का उपयोग कैसे करेंगी, इसके बारे में आपको पूरी जानकारी दी जाएगी। बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों के डेटा के लिए माता-पिता की सहमति जरूरी होगी।

अयोध्या में भव्य ध्वजारोहण: वनवासी क्षेत्रों के संत समाज को मिलेगा खास सम्मान

अयोध्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने बताया है कि मंगलवार, 25 नवंबर का दिन, अयोध्या में भगवान राम के विवाह का पारंपरिक पवित्र दिन है। इस दिन, राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण होगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल होंगे। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर में करीब 12 बजे होगी और फिर ध्वजारोहण किया जाएगा। कार्यक्रम दोपहर लगभग दो बजे संपन्न होगा। कार्यक्रम में आने वाले मेहमानों को लेकर चंपत राय ने बताया कि इस बार सिर्फ पूर्वी उत्तर प्रदेश के बंधु-बांधवों को बुलाया गया है। कुल छह हजार लोग आमंत्रित किए गए हैं, जिनमें अयोध्या जनपद से ही तीन हजार लोगों की संख्या हैं। अयोध्या के सभी संत कार्यक्रम में आएंगे, जिनमें जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों के संत भी होंगे। अनुमान है कि लगभग एक हजार संत-महात्मा इस कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। बाकी संपूर्ण पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को आमंत्रित किया गया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव ने बताया कि खासतौर पर वनवासी क्षेत्रों में रहने वाले संत समाज को बुलाया गया है। हमारी दृष्टि इस बार उस समाज पर है, जो सुदूर जंगलों, वनवासी क्षेत्रों, पर्वतों और समुद्र किनारे के गांवों में निवास करता है। उत्तर में समुद्र नहीं है, लेकिन गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियां हैं। उनके किनारे जीवन यापन करने वाले समाज में से लोगों का चयन किया गया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री समेत सभी प्रमुख व्यक्तियों के अयोध्या जिले से दोपहर लगभग 2 बजे या उससे थोड़ा पहले प्रस्थान करने की संभावना है। प्रशासन और हम सभी इस उत्सव के महत्व और इसके व्यस्त कार्यक्रम से अवगत हैं। इससे जनता को कोई असुविधा नहीं होगी। यह हमारी समारोह संबंधी तैयारियों का हिस्सा है।  

स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति: हर CHC में होंगे Gynecologist और Pediatrician, वेतन पैकेज चौंकाने वाला

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने राज्य की सभी कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) पर स्त्री एवं बाल रोग विशेषज्ञों की अनिवार्य नियुक्ति का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य सुविधाओं को गांव स्तर तक मजबूत करने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है। इन नियुक्तियों को नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के माध्यम से किया जाएगा और सभी जिला सिविल सर्जनों को पदों के विज्ञापन जारी करने के निर्देश दे दिए गए हैं। सरकार ने विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए मानदेय भी निर्धारित कर दिया है। एमबीबीएस व डिप्लोमा धारक डॉक्टरों को प्रति माह 1 लाख रुपये, जबकि एमबीबीएस के साथ एमडी या डीएनबी योग्यता रखने वालों को 1.5 लाख रुपये वेतन के रूप में देने की योजना है। वर्तमान में हरियाणा में सीनियर डॉक्टरों के 425 और मेडिकल ऑफिसरों के करीब 550 पद खाली हैं, जिसके कारण कई सीएचसी और सिविल अस्पतालों में कामकाज प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों की कमी से ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों, को उपचार के लिए बड़े अस्पतालों की ओर जाना पड़ता है। स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने बताया कि सरकार का उद्देश्य नागरिकों को उनके नजदीक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पहले चरण में प्रत्येक CHC पर एक स्त्री रोग और एक बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति का लक्ष्य तय किया गया है। 

लुधियाना के लोगों के लिए खुशखबरी! शुरू होने जा रही यह बड़ी सुविधा

लुधियाना महानगरी में बहादरके रोड स्थित होलसेल सब्जी मंडी के अंदर पड़ते पालक बाजार की 2609 गज जमीन पर 27 करोड़ रुपए की लागत से पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन द्वारा 66 के.वी. का नया बिजली घर स्थापित किया जा रहा है जिसके लिए पावरकॉम विभाग के अधिकारियों द्वारा सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। पावरकॉम विभाग द्वारा सब्जी मंडी में स्थापित किए जा रहे नए बिजली घर के लिए साढ़े 7 करोड़ रुपए में खरीदी गई जमीन का दौरा करने पहुंचे पावरकॉम विभाग की सुंदर नगर डिवीजन में तैनात एक्सियन जगमोहन सिंह जन्डू द्वारा चेयरमैन मार्कीट कमेटी गुरजीत सिंह गिल और सचिव हरिंदर सिंह गिल ने मौके का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि इलाके में नया बिजली घर स्थापित होने से पावरकॉम विभाग की सिटी वैस्ट डिवीजन और सुंदर नगर डिवीजन के 24 के करीब फीडरों की सप्लाई में बिजली घर में ट्रांसफर की जाएगी, जिससे डेढ़ दर्जन के करीब इलाकों में बसे 3000 के करीब परिवारों को बिजली संबंधी समस्याओं से बड़ी राहत नसीब होगी, जिसमें मुख्य तौर पर विजय नगर, सेखेवाल, काली सड़क, फरीद नगर, मास्टर कॉलोनी, शिवपुरी, जालंधर बाईपास, विष्णुपुरी, प्रीतमपुरी, आजाद नगर, नंदपुरी, नूरेवाल, बहादुर के रोड इंडस्ट्री, अनाज मंडी, सब्जी मंडी और आजाद नगर के इलाके मुख्य तौर पर शामिल हैं।   उन्होंने कहा कि सरकार की इस पहलकदमी से उक्त सभी इलाकों में न केवल बिजली की वोल्टेज, ट्रिपिंग का समाधान होगा बल्कि इलाका निवासियों विशेष कर इंडस्ट्री को 24 घंटे निर्विघ्न बिजली और पानी की सप्लाई भी मुहैया करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार और पावरकॉम विभाग के सांझा प्रयास से बहादुरके रोड, सेखेवाल, काली सड़क, नूरवाला आदि में औद्योगिक इकाइयां चलाने वाले व्यापारी वर्ग का कारोबार भी बड़े स्तर पर प्रफुल्लित होगा। इस मौके पर चेयरमैन मार्कीट कमेटी गुरजीत सिंह गिल और सचिव हरिंदर सिंह गिल मुख्य तौर पर उपस्थित रहे। 

मध्यप्रदेश में बढ़ी विधायक निधि: अब 5 करोड़ रुपये वार्षिक, विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार

भोपाल पुल, पुलिया, आंगनवाड़ी, पंचायत, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल भवन या फिर अन्य अधोसंरचना से जुड़े छोटे-मोटे कामों के लिए विधायकों को सरकार का मुंह नहीं देखना होगा। वे विधानसभा क्षेत्र निर्वाचन निधि (विधायक निधि) से ही यह काम करा सकेंगे। सरकार विधायक निधि दोगुनी करने की तैयारी में है। इसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों की तरह 5 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष किया जा सकता है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भाजपा विधायक दल की बैठक में परामर्श के बाद यह निर्णय लिया जाएगा। विधायक निधि बढ़ाने की हुई थी मांग प्रदेश में विधायकों को अभी क्षेत्र विकास के लिए ढाई करोड़ की निधि मिलती है। 75 लाख रुपये स्वेच्छानुदान के अलग से दिए जाते हैं। क्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से यह राशि अपर्याप्त है। ऐसे में विधायकों ने निधि को पांच करोड़ और स्वेच्छानुदान को बढ़ाकर एक करोड़ रुपये करने की मांग की है। विधानसभा के मानसून सत्र में भी उन्होंने विधायक निधि बढ़ाने की मांग की थी, जिस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समिति बनाकर विचार करने का आश्वासन दिया था। संसदीय कार्य विभाग ने समिति को अन्य राज्यों में विकास निधि संबंधी रिपोर्ट दी है, जिसका अध्ययन करने के बाद सदस्यों से राय ली जाएगी।   पूंजीगत निवेश को बढ़ावा देने की प्राथमिकता सूत्रों का कहना है कि राशि पांच करोड़ रुपये प्रतिवर्ष करने पर समिति में सहमति बनी है। विधायक से पूछकर क्षेत्र में 15 करोड़ रुपये के काम सरकार ने निर्वाचन क्षेत्र विकास के लिए विधायक को 15 करोड़ रुपये तक के काम कराने का अवसर दिया है। इसके लिए विजन डाक्टूमेंट तैयार कराए गए हैं। इस आधार पर विकास कार्यों को हरी झंडी दी जा रही है। दरअसल, सरकार की प्राथमिकता पूंजीगत निवेश को बढ़ावा देने की है। विजन डाक्टूमेंट में भी अधोसंरचना विकास के काम पर जोर अधिक है। 

23 जनवरी को भोजशाला में वसंत पंचमी बनाम जुमे की नमाज़: कैलाश विजयवर्गीय ने कहा– बातचीत से निकलेगा समाधान

धार ऐतिहासिक भोजशाला में आगामी 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार) को जुमे की नमाज वाला दिन होने और उसी दिन वसंत पंचमी का उत्सव मनाए जाने के कारण प्रशासन के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। वजह यह है कि वसंत पंचमी मनाने की वजह के कारण हिंदू समाज की ओर से उस दिन नमाज की अनुमति न दिए जाने की मांग की जा रही है। हालांकि इस पर अभी प्रशासन ने कोई निर्णय नहीं लिया है, लेकिन इसको लेकर अनिश्चय की स्थिति के बीच इस बारे में शनिवार को धार पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि हमारी सरकार सभी की आस्था का सम्मान करती है, इसलिए निर्णय भी सभी पक्षों से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।   किसी को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। समस्या के समाधान के लिए सभी लोग मिलकर चर्चा करेंगे और सौहार्दपूर्ण निर्णय लेंगे। मीडियाकर्मियों ने वर्ष 2006 की स्थिति का हवाला देते हुए विजयवर्गीय से यह भी पूछा कि तब भी वह प्रभारी मंत्री थे और शुक्रवार तथा बसंत पंचमी एक साथ आई थी। अब जबकि केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार है, ऐसे में भोजशाला से जुड़े मुद्दे का समाधान क्यों नहीं हो पाया? इस पर मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि ऐसी समस्याओं का निराकरण एक दिन में नहीं होता। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लंदन प्रवास के दौरान भी इस मुद्दे पर चर्चा की थी। मुझे विश्वास है कि एक दिन समस्या का निराकरण होगा। गौरतलब है कि 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन आ रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआइ) के आदेशानुसार, सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदू समाज को भोजशाला में पूजन और हवन की अनुमति रहती है। वहीं, हर शुक्रवार की तरह मुस्लिम समुदाय जुमे की नमाज़ अदा करता है। ऐसे में एक ही दिन पूजा और नमाज़ दोनों होने के कारण स्थिति को लेकर चर्चा का दौर शुरू हो गया है। इधर, 18 नवंबर को सकल हिंदू समाज बसंत पंचमी के अवसर पर अखंड पूजन की अनुमति को लेकर ज्ञापन सौंपेगा। 

MP में मौसम बदलने के संकेत, कुछ शहरों को मिलेगी ठंड से राहत

भोपाल वर्तमान में कोई प्रभावी मौसम प्रणाली सक्रिय नहीं है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर पर बना पश्चिमी विक्षोभ भी आगे बढ़ गया है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, हवा के रुख में कुछ बदलाव होने से शनिवार से ठंड से मामूली राहत मिलना शुरू हो सकती है। हालांकि कुछ शहरों में शीतलहर का प्रभाव अभी बना रह सकता है। तीन दिन बाद रात के तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है। उधर, शुक्रवार को भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, रीवा, शहडोल, जबलपुर, नौगांव एवं शिवपुरी में शीतलहर का और इंदौर में तीव्र शीतलहर का प्रभाव रहा। रात का सबसे कम आठ डिग्री सेल्सियस तापमान शिवपुरी में रिकॉर्ड किया गया। दिन का सबसे अधिक 30.8 तापमान नर्मदापुरम में दर्ज किया गया।   तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी एचएस पांडे के मुताबिक, अभी तीन दिन तक मौसम का मिजाज इसी तरह बना रह सकता है। उसके बाद रात के तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है। मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि मौसम पूरी तरह शुष्क बना हुआ है। हालांकि राजस्थान पर एक प्रति चक्रवात बना हुआ है। इस वजह से हवाओं का रुख उत्तरी होने के साथ ही बीच-बीच में पूर्वी भी होने लगा है। इसके चलते शनिवार से कड़ाके की ठंड से कुछ राहत मिलने लगेगी। दो दिन बाद हवाओं का रुख पूर्वी होने की भी संभावना है। इसके चलते रात के तापमान में बढ़ोतरी होने लगेगी।

शहरों में हरियाली बढ़ाने की तैयारी तेज, निकायों को मिला पौध-रोपण का टास्क

भोपाल  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को वर्ष 2026 में किये जाने वाले व्यापक पौध-रोपण अभियान की तैयारी और इससे जुड़ी कार्य-योजना बनाने के निर्देश दिये हैं। इस संबंध में आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास ने निकायों से कार्य-योजना दिसम्बर-2025 तक पूर्ण करने के लिये भी कहा है। प्रदेश में वर्ष 2025 में प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में नगरीय निकायों द्वारा करीब 36 लाख पौधों का रोपण किया गया है। निकायों को लगाये गये पौधों की सुरक्षा में सजगता बरतने को भी कहा गया है। नगरीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि नगरीय निकाय अपने क्षेत्रों में हितधारकों की बैठक और कार्यशाला आयोजित कर वर्ष 2026 के पौध-रोपण लक्ष्यों का पहले आकलन करें और उसके अनुसार रणनीति बनायें। निकायों को यह भी सुनिश्चित करने के लिये कहा गया है कि कुल लक्ष्य में से शेष पौध-रोपण का कार्य निकायों द्वारा अपने संसाधनों से करना होगा। निकाय सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, वाटर ट्रीटमेंट प्लान, ओवरहेड टैंक के आसपास की भूमि, सड़कों के दोनों ओर, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल एवं शासकीय परिसरों की बाउण्ड्रीयुक्त भूमि, नदियों, नालों, तालाबों, डैम एवं नहरों के किनारों के साथ मुक्तिधाम और खेल मैदानों के आसपास का क्षेत्र चिन्हित करने के लिये कहा गया है। शहरी क्षेत्र में पौधों की उपलब्धता के लिये उद्यानिकी एवं वन विभाग की नजदीकी नर्सरियों से अभी से सम्पर्क किया जाये। पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और पौधों के क्रय के लिये बजट के इंतजाम का प्रस्ताव जल्द तैयार किया जाये। नगरीय क्षेत्र में अधिकतम हरियाली बढ़ाने के लिये जामुन, अर्जुन, देशी बबूल, बड़े वृक्षों जैसे पीपल, बरगद, आम, महुआ, इमली आदि प्रजातियों के पौधे को प्राथमिकता दी जाये। बीज छिड़काव के लिये उत्तम व्यवस्था की जाये। संचालनालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि वर्ष 2026 के पौध-रोपण कार्य की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नवम्बर माह से ही साप्ताहिक समीक्षा की जायेगी। निर्देश में यह भी कहा गया है कि शहरी क्षेत्र के कुछ भवनों में बाउण्ड्री-वॉल नहीं होती है, वहाँ मेहंदी की बाउण्ड्री-वॉल सुरक्षा के हिसाब से लगाने के प्रस्ताव भी तैयार किये जायें। इससे परिसर में सुरक्षा के साथ हरियाली का भी विस्तार होगा। जल संरक्षण को बढ़ावा देना नगरीय निकायों से कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों में वर्ष 2026 के पौध-रोपण के साथ जल संरक्षण से संबंधित प्रस्ताव भी तैयार किये जायें। इन दोनों उपायों से शहरी क्षेत्रों में जल संरक्षण के साथ पर्यावरण सुधार में बेहतर कार्य हो सकेगा।