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भारत में बनेगा ताकतवर Su-57? पुतिन विज़िट से पहले रूस ने दिया बड़ा प्रस्ताव

दुबई  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा से पहले, रूस ने भारत को अपने अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान Su-57 के पूर्ण लाइसेंस प्राप्त उत्पादन की पेशकश दोहराई है। इस प्रस्ताव में बिना किसी प्रतिबंध के फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी शामिल है, जो भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने का प्रयास है। दुबई एयर शो के दौरान रूसी रक्षा निर्यातक रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने यह प्रस्ताव बेहद स्पष्ट शब्दों में सामने रखा। उन्होंने कहा- हम रूस में निर्मित Su-57 की सप्लाई करने और भारत में विमान के प्रोडक्शन को संगठित करने के लिए तैयार हैं, जिसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर शामिल है। अधिकारी के अनुसार पैकेज में फिफ्थ-जनरेशन टेक्नोलॉजी, इंजन और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम की ट्रेनिंग व ट्रांसफर शामिल है। भारत के लिए आकर्षण- पश्चिमी प्रतिबंधों के उलट पूर्ण विश्वसनीयता का वादा रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी प्रतिनिधि ने जोर दिया कि मॉस्को का सबसे बड़ा फायदा उनकी विश्वसनीयता और पूरी पारदर्शिता है, खासकर तकनीक साझा करने के मामले में। उनके अनुसार, पश्चिमी देशों की तुलना में रूस न तो अपग्रेड रोकेगा और न ही किसी भूराजनीतिक परिस्थिति के कारण पुर्जों की आपूर्ति पर रोक लगाएगा। उन्होंने कहा किSu-57 का निर्माण मतलब सभी महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स का निर्माण, वो भी बिना इस डर के कि किसी प्रतिबंध के कारण आपको कुछ नहीं मिलेगा। रूस के अनुसार उत्पादन का स्तर चरणबद्ध तरीके से भारत में बढ़ाया जाएगा और अंततः डीप लोकलाइजेशन तक पहुंचा जाएगा। यह प्रस्ताव भारत के 'मेक इन इंडिया' अभियान के अनुरूप है और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की नासिक सुविधा पर केंद्रित है, जहां पहले से ही Su-30MKI विमानों का उत्पादन हो रहा है। लंबे समय के लिए संयुक्त विकास का प्रस्ताव रूस ने सिर्फ लाइसेंस उत्पादन ही नहीं, बल्कि भविष्य में विमान के संयुक्त अपग्रेडेशन की पेशकश भी की है। अधिकारी के अनुसार, सॉफ्टवेयर अपग्रेड से लेकर अन्य तकनीकी सुधार तक दोनों देश मिलकर Su-57 का अगला वर्जन विकसित कर सकते हैं। उन्होंने इसे 1960 के दशक में शुरू हुई MiG-21 के संयुक्त उत्पादन से लेकर अब तक के छह दशकों के रक्षा सहयोग का अगला अध्याय बताया। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी और फ्रांसीसी रक्षा उत्पादों की ओर रुख बढ़ाया है, लेकिन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर पश्चिमी देशों की झिझक चिंता का विषय रही है। ऐसे में, नो-सैंक्शन रिस्क और अनलिमिटेड टेक ट्रांसफर का रूसी प्रस्ताव नई दिल्ली के लिए राजनीतिक और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बन सकता है। 24 घंटे में कूटनीतिक गतिविधियों की बाढ़ बीते 24 घंटे मॉस्को और दिल्ली दोनों जगह बेहद सक्रिय रहे: मॉस्को में- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से बातचीत की। SCO हेड ऑफ गवर्नमेंट समिट में हिस्सा लिया। दिल्ली में- रूस के राष्ट्रपति के प्रमुख सहयोगी और रूसी मैरीटाइम बोर्ड के चेयरमैन निकोलाई पात्रुशेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन के लिए अपने स्नेहपूर्ण शुभकामनाएं भेजीं और कहा कि वे अगले महीने भारत में पुतिन की मेजबानी करने के लिए उत्सुक हैं। बैठक में समुद्री सहयोग, कनेक्टिविटी, स्किल डेवलपमेंट, शिपबिल्डिंग और ब्लू इकोनॉमी में नई साझेदारी की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। पुतिन की यात्रा से पहले संदेश- मॉस्को दिल्ली के साथ अगला बड़ा रक्षा अध्याय खोलना चाहता है पुतिन की यात्रा से पहले आया यह प्रस्ताव दर्शाता है कि रूस चाहता है कि भारत उसके Su-57 प्रोग्राम का प्रमुख साझेदार बने। वहीं भारत के लिए यह फैसला उसकी वायुसेना की भविष्य की संरचना और रक्षा रणनीति पर एक दीर्घकालीन प्रभाव डाल सकता है। नई दिल्ली इस प्रस्ताव को कितनी गंभीरता से लेती है, यह आने वाले हफ्तों में साफ होगा- लेकिन इतना तय है कि रूस ने भारत के सामने आकर्षक और रणनीतिक रूप से संवेदनशील सौदा टेबल पर रख दिया है।

जन्मदिन पर जीनत अमान की अपील: जलवायु संकट को हल्के में न लें

मुंबई बॉलीवुड की दिग्‍गज एक्‍ट्रेस जीनत अमान 19 नवंबर को 74 साल की हो गई हैं। एक मॉडल से एक्‍ट्रेस बनीं जीनत, अपने दौर की सुपरस्‍टार और सबसे महंगी एक्‍ट्रेस रही हैं। साल 1970 में फेमिना मिस इंडिया और मिस एशिया पैसिफिक इंटरनेशनल का ताज जीतने वाली जीनत इसी साल ओटीटी पर रिलीज वेब सीरीज 'द रॉयल्‍स' में नजर आई थीं। फिल्‍मों से इतर दिग्‍गज एक्‍ट्रेस पर्यावरण और जलवायु संकट जैसे मुद्दों पर भी अपनी बेबाक राय रखती हैं। वह कहती हैं कि आज भी कई लोग जलवायु परिवर्तन को गंभीरता से नहीं लेते या उसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अब ऐसा करने का समय नहीं बचा है। इसकी मार हमारी हवा, पानी और मौसम, हर जगह दिख रही है। बीते दिनों भारत मंडपम में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में 70 के दशक की प्रतिष्ठित अभिनेत्री जीनत अमान ने पर्यावरण के मुद्दे पर खुलकर बात की। वह मोबियस फाउंडेशन और वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी की 10-एपिसोड वाली डॉक्यूमेंटरी सीरीज 'Embers of Hope: The Fight for Our Future' की नैरेटर हैं। उनका कहना है कि यह सीरीज सिर्फ जानकारी देने वाली फिल्म नहीं, बल्कि सोच बदलने वाला आंदोलन है। 'जलवायु परिवर्तन अब अनदेखा नहीं' जीनत अमान ने कहा, 'जलवायु संकट कोई दूर की बात नहीं है। इसका असर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी- हवा, पानी, तापमान – सब पर दिख रहा है। हिमालय में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और तटीय शहरों को बड़ा खतरा है। गंगोत्री ग्लेशियर हर साल लगभग 18 मीटर पीछे हट रहा है, जबकि वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि 2040 तक मुंबई का करीब 10% हिस्सा समुद्र में डूब सकता है।' अब दर्शक नहीं, बदलाव में सहभागी बनना होगा युवाओं को संबोधित करते हुए जीनत आगे कहती हैं, 'सिर्फ देखने से कुछ नहीं होगा। अब वक्त है बदलाव का हिस्सा बनने का। छोटे-छोटे कदम भी बड़ा असर डाल सकते हैं। इसमें पेड़ लगाना, प्लास्टिक का उपयोग कम करना, ऊर्जा बचाना, पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपनाना जरूरी है। हमें यह सोचना होगा कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी दुनिया छोड़ रहे हैं।' अपनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर उन्होंने दोहराया कि यह सिर्फ जानकारी देने वाला प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि सोच और व्यवहार बदलने वाला आंदोलन है। कंपनियों की भी जिम्मेदारी जीनत अमान ने कहा कि सिर्फ आम लोगों नहीं, बल्कि कंपनियों को भी सस्‍टेनेबिलिटी को अपनी योजनाओं में शामिल करना चाहिए। इससे ब्रांड पर विश्वास बढ़ता है और नए अवसर भी मिलते हैं। वह कहती हैं, 'जागरूकता ही असली बदलाव ला सकती है। विजुअल मीडियम लोगों को ज्यादा तेजी से प्रभावित करता है, इसलिए ऐसी डॉक्यूमेंट्री जरूरी हैं ताकि हर उम्र के लोग जलवायु संकट की गंभीरता को समझ सकें।'

किसानों को बड़ी सौगात: पीएम किसान सम्मान निधि की नई किस्त जारी, लाखों परिवारों को मिलेगा लाभ

कोयंबटूर (तमिलनाडु)  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को तमिलनाडु के कोयंबटूर में ‘दक्षिण भारत प्राकृतिक खेती शिखर सम्मेलन’ को संबोधित किया और पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी की। प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी की। इसके तहत देशभर के करीब 9 करोड़ से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में सीधे 18,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई। तमिलनाडु के लाखों किसानों को भी इस योजना का लाभ मिला। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 11 साल में देश के कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। कृषि निर्यात लगभग दोगुना हो चुका है। सरकार ने किसानों के लिए हर तरह की मदद के दरवाजे खोल दिए हैं, ताकि खेती को आधुनिक बनाया जा सके। उन्होंने भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा, “आने वाले समय में भारत प्राकृतिक खेती का विश्व केंद्र बनेगा। हमारी जैव विविधता नया रूप ले रही है। आज का युवा खेती को आधुनिक और बड़ा अवसर मान रहा है। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था को बहुत ताकत मिलेगी।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "कुछ समय पहले, हमने इसी मंच से पीएम-किसान सम्मान निधि की किस्त जारी की थी। देश के सभी कोनों में किसानों को 18,000 करोड़ रुपए हस्तांतरित किए गए। तमिलनाडु के लाखों किसानों को भी पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत उनके खातों में राशि प्राप्त हुई है।" उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपने दिल के बहुत करीब बताते हुए सम्मेलन के आयोजन और प्रदर्शनी की तारीफ की। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में कई युवा किसानों से उनकी मुलाकात हुई। कोई मैकेनिकल इंजीनियर है, कोई पीएचडी धारक है, तो कोई नासा छोड़कर खेती कर रहा है और दूसरों को प्रशिक्षण दे रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “अगर मैं आज इस कार्यक्रम में नहीं आया होता तो जिंदगी में बहुत कुछ मिस कर देता। यहां आकर मैंने बहुत कुछ सीखा है। मैं तमिलनाडु के किसानों के हौसले और बदलाव अपनाने की ताकत को सलाम करता हूं।” वहीं, मंच पर आते ही जब कुछ किसानों ने हवा में गमछा लहराया तो प्रधानमंत्री मुस्कुराते हुए बोले, “लग रहा है बिहार की हवा मुझसे पहले यहां पहुंच गई।” बता दें कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, युवा और कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने सभी को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और नई पीढ़ी को जोड़ने का आह्वान किया।

कर्ज़ से परेशान हैं? आज़माएँ गणेश जी के ये शक्तिशाली मंत्र

कई बार व्यक्ति के जीवन में ऐसा समय आता है कि जब उसे न चाहते हुए भी कर्ज लेना पड़ता है. एक बार कर्ज लेते ही यह बोझ रोजाना बढ़ता रहता है. अगर आप पर कर्ज पर कर्ज बढ़ता जा रहा है, तो आपको भगवान गणपति के शरण में आना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी ज्ञान, बुद्धि, सुख-समृद्धि और मुक्त करने वाले देवता भी माने गए हैं. धन-संपदा का आशीर्वाद देने वाले गणपति जी की पूजा बुधवार को करने के साथ ही अगर उनके चमत्कारिक ऋण नाशक गणेश मंत्रों का जाप कर लिया जाए, तो व्यक्ति को कर्ज से निजात मिल सकती है. कर्ज मुक्ति के लिए कौन सा गणेश मंत्र है? कर्ज मुक्ति के लिए गणेश मंत्रों में “ॐ श्रीं गं ऋण हर्ताये गं श्रीं ॐ गणपतये नमः” एक शक्तिशाली मंत्र हैं. इनके अलावा, ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र का पाठ और “ॐ गणेश ऋणं छिन्दि वरेण्यं हुं नम: फट्” मंत्र भी बहुत प्रभावशाली माने जाते हैं. ऋणहर्ता गणेश मंत्र: ॐ श्रीं गं ऋण हर्ताये गं श्रीं ॐ गणपतये नमः। ऋणमुक्ति गणेश मंत्र: ॐ गणेश ऋणं छिन्दि वरेण्यं हुं नम: फट्। वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र: “वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”। अन्य गणेश मंत्र: ॐ ऋणहत्रे नमः और ॐ ऋणमोचनाय नमः इन मंत्रों का जाप भी आप कर्ज से मुक्ति पाने के लिए हर रोज कर सकते हैं. मंत्र जाप करने की विधि कर्ज मुक्ति गणेश मंत्रों का जाप करने से पहले एक लोटा जल हाथ में लेकर विनियोग करें और फिर जल छोड़ दें. इसके बाद आप अपनी सुविधा के अनुसार इन मंत्रों का जप कर सकते हैं, खासकर बुधवार को ये बहुत लाभकारी माने गए हैं.

40वी इंदिरा मैराथन में प्रदीप सिंह चौहान व रीनू ने प्रथम स्थान पर मारी बाजी

प्रयागराज 40वीं इंदिरा मैराथन में बुधवार को 42.195 किलोमीटर की दौड़ पूरी करते हुए पुरुष वर्ग में उत्तराखंड के धावक प्रदीप सिंह चौहान और महिला वर्ग में हरियाणा की रीनू ने प्रथम स्थान पर बाजी मारी। इसी तरह पुरुष वर्ग में द्वितीय स्थान पर उप्र के प्रतापगढ़ जिले के ज्ञान बाबू ने दौड़ पूरी किया। तीसरे स्थान पर प्रयागराज के रोहित सरोज ने दौड़ पूरी किया। महिला वर्ग में द्वितीय स्थान पर महाराष्ट्र की अश्विनी मदान जादव और महाराष्ट्र की ज्योति शंकर गवते पहुंची है।  पहली बार मैराथन में 21 वर्ष से कम उम्र के एथलीटों (न्यूनतम 18 वर्ष तक) को दौड़ने का मौका दिया गया है। जो सीने पर इलेक्ट्रॉनिक चिप युक्त विब लगाकर दौड़े हैं। इस बार भी सर्वाधिक संख्या सेना व पैरामिलिट्री के धावकों की है। जबकि देश के दक्षिणी हिस्से से सर्वाधिक एथलीटों का प्रयागराज में जमावड़ा हुआ है। 40वीं इंदिरा मैराथन का शुभारम्भ उप्र खेल निदेशक डा.आर.पी.सिंह, जिलाधिकारी प्रयागराज मनीष कुमार वर्मा, उप्र एथलेटिक्स संघ के सचिव नरेन्द्र कुमार और अध्यक्ष आशुतोष भल्ला, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी प्रयागराज प्रेम कुमार और मण्डलायुक्त प्रयागराज सौम्या अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित करके किया।   

यूपी पीईटी की फाइनल आंसर-की रिलीज़, कुछ प्रश्नों को ग्रेस मार्क्स

  लखनऊ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) की फाइनल आंसर-की जारी की जा चुकी है। अभ्यर्थी आयोग की वेबसाइट upsssc.gov.in पर शिफ्ट वाइज फाइनल आंसर-की देख सकते हैं। 6 सितंबर को सेकेंड शिफ्ट के पेपर में एक प्रश्न, 7 सितंबर को पहली शिफ्ट के लिए एक प्रश्न, 7 सितंबर सेकेंड शिफ्ट के दो प्रश्नों के लिए फुल मार्क्स मिलेंगे। यूपी पीईटी 6 व 7 सितंबर को आयोजित हुई थी। अब किसी भी समय रिजल्ट आ सकता है। बता दें कि दो दिन की परीक्षा में 1941993 अभ्यर्थी शामिल हुए हैं। यूपीएसएसएससी पीईटी 2025 के लिए 25,31,996 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। पीईटी स्कोर 3 साल के लिए वैलिड रहेगा। इस भर्ती परीक्षा के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में खाली पड़े ग्रुप सी लेवल के हजारों पदों को भरा जाएगा। सबसे पहले प्रारंभिक अर्हता परीक्षा ( पीईटी ) होगी और इसके बाद भर्तियों के संबंध में विज्ञापन निकाल कर आयोग आवेदन लेगा। पीईटी स्कोर के आधार पर अलग-अलग भर्तियों में अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा/स्किल टेस्ट/शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। यूपी पीईटी रिजल्ट के बाद होंगी 44000 पदों पर भर्तियां उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को 44778 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव मिल चुका है। प्रारंभिक अर्हता परीक्षा-2025 पीईटी का परिणाम ( UPSSSC PET Result 2025 ) जारी होने के बाद इन्हें भरने के लिए आवेदन लिए जाएंगे। राज्य सरकार ने समूह ‘ग’ तक के पदों को भरने का अधिकार उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को दे रखा है। आयोग द्वारा शासन को उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक उसे 868 भर्तियों के प्रस्ताव मिले हैं। इनमें कुल 44778 पद हैं। इस बार लेखपालों की भर्ती के लिए सर्वाधिक प्रस्ताव इस बार सर्वाधिक लेखपाल भर्ती के लिए प्रस्ताव हैं। लेखपाल के 7994, तकनीकी सेवा के 5431, कनिष्ठ सहायक के 4582 अधिशासी अधिकारी के 320 पदों के प्रस्ताव आयोग को मिल चुके हैं। मत्स्य अधिकारी के 105, होम्योपैथिक फार्मासिस्ट के 397, बीजीसी तकनीशियन के 255, कंपाउंडर 560, आबकारी सिपाही 564, सहायक विकास अधिकारी 545, सहायक बोरिंग तकनीशियन 419 पद हैं। मानचित्रकार, स्पर्श दृष्टिबाधित प्रशिक्षण स्नातक अध्यापक, अधीक्षक कार्यशाला, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी-मत्स्य निरीक्षक के प्रस्ताव आयोग को मिले हैं।  

सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में मंत्री सारंग ने ग्रामीण विकास योजनाओं पर की चर्चा

पैक्स एवं स्व-सहायता समूह साझेदारी से खुलेगा ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय मंत्री  सारंग ने ली सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को मंत्रालय में सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक ली। बैठक में सीपीपीपी अंतर्गत जीआईएस-2025 के दौरान हुए एमओयू की प्रगति, नवाचार प्रकोष्ठ की गतिविधियों तथा सहकारिता तंत्र को मजबूत बनाने से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री  सारंग ने कहा कि पैक्स और स्व-सहायता समूहों के बीच सहयोगात्मक ढांचा तैयार कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने निर्देशित किया कि पैक्स–स्व सहायता समूह के बीच साझेदारी का स्पष्ट एवं क्रियाशील रोडमैप तैयार किया जाए। जिससे ग्रामीण स्तर पर नए रोजगार व उद्यमों को बढ़ावा दिया जा सके। मंत्री  सारंग ने कहा कि सहकारिता ही वह सशक्त नेटवर्क है जो हर घर तक आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को पहुँचा सकता है। हमें स्थानीय आवश्यकताओं और संसाधनों को पहचानकर योजनाओं को धरातल पर उतारना होगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि CPPP (Co-operative Public Private Partnership) नवाचार की सक्सेस स्टोरी तैयार की जाए। इस नवाचार को दस्तावेज़ रूप में भी संकलित किया जाए। मंत्री  सारंग ने कहा कि जिला स्तर पर सहकारी बैंकों के सीईओ के माध्यम से किसानों, सहकारी समितियों के प्रबंधकों तथा अन्य संबंधित हितधारकों से सुझाव एकत्र किए जाएं। जिससे मुख्यालय से आवश्यक सुधार करते हुए योजनाओं का प्रभावी कियान्वयन किया जा सके। बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता  डी.पी. आहूजा, आयुक्त सहकारिता  मनोज पुष्प, प्रबंध संचालक (उपभोक्ता संघ)  ऋतुराज रंजन, प्रबंध संचालक (बीज संघ)  महेंद्र दीक्षित, प्रबंध संचालक (अपेक्स बैंक)  मनोज गुप्ता सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ में बड़ी सफलता: शीर्ष नक्सली कमांडर समेत 50 माओवादी पकड़े गए

बस्तर/आंध्र प्रदेश  कुख्यात नक्सली कमांडर माडवी हिडमा के खात्मे के बाद बुधवार को नक्सलवाद के खिलाफ पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। बस्तर-आंध्र बॉर्डर पर चलाए गए संयुक्त अभियान में आंध्रप्रदेश पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 50 नक्सलियों को गिरफ्तार किया है। इस ऑपरेशन ने चार दशक से बस्तर में मजबूत पकड़ बनाए बैठे माओवादी नेटवर्क को गहरा झटका दिया है। बड़े स्तर के माओवादी गिरफ्तार गिरफ्तार किए गए माओवादियों में संगठन के शीर्ष स्तर के भी कई बड़े चेहरे शामिल है। 03 SZCM (सब जोनल कमेटी मेंबर) : लखमा, मदन्ना और सोढ़ी मनीला 05 DVCM (डिविजनल कमेटी मेंबर) 19 ACM (एरिया कमेटी मेंबर) 23 PM (पार्टी मेंबर) यह कार्रवाई आंध्रप्रदेश के 5 जिलों में एक साथ की गई, जिससे कई जिलों में फैला माओवादी नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। छत्तीसगढ़ से जुड़े माओवादी गिरफ्तार कार्रवाई में पकड़े गए माओवादियों में छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से जुड़े कई माओवादी भी शामिल हैं, जानिए किस जिले से कितने माओवादी गिरफ्तार हुए। बीजापुर जिला – 28 सुकमा जिला – 21 नारायणपुर जिला – 1 हथियारों का जखीरा और नगदी जब्त गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने माओवादियों के पास से 25 लाख रुपये नगद, AK-47 राइफल, दो अन्य राइफलें, एक पिस्टल और बड़े पैमाने पर विस्फोटक सामग्री बरामद की है। यह पूरी कार्रवाई इस बात का संकेत है कि माओवादी संगठन अब अपनी सबसे कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है। शीर्ष कमांडरों की गिरफ्तारी और भारी मात्रा में हथियार–नगदी जब्ती ने संगठन की वर्षों पुरानी जड़ों को हिलाकर रख दिया है। बस्तर और आंध्रप्रदेश की इस संयुक्त कार्रवाई ने माओवादियों पर अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक प्रहार किया है। जिलेवार गिरफ्तार माओवादियों की सूची – कृष्णा जिला से 28 माओवादी गिरफ्तार हुए हैं।     उद्दे रघु – SZCM (BNPC बैटेलियन हेडक्वार्टर कंपनी)     मड़कम दिवाकर @ मिट्टू – ACM     वेत्ती नांदे – ACM (पामेड AC)     ओयम संबत्ती / समिता – ACM     कोरसा सोमली /परमिला – ACM (PPCM)     कुंजम राम्बू – PM (पार्टी मेंबर)     डोडी नीलेश – PM     मड़कम गंगी – PM     हेमला रामे – PM     मड़कम हाइमा – PM     सोड़ी अर्जुन / संजू – PM     करताम बांदी – PM     मड़कम बुज्जी /मंगली – PM     मड़कम नव्या / उंगी – PM     मांडवी लक्ष्मी – PM     मड़कम पोज्जे / रितिका – PM     हेमला हिड़मे / निर्मला – PM (डॉक्टर टीम)     पुनेम इस्नू / सरीना – PM     मड़कम हुंगा /रोहन – PM     पुल्सू लक्ष्मण – PM     मड़वी जोगी – PM     टाटी लक्ष्मी – PM     नुप्पो कोसी – PM     ओयम ज्योति – PM     कोरसा शांति – PM     कुंजम भीमे – PM     मड़वी जोगी (दूसरा) – PM     मड़वी महीनी – PM एलुरु जिला से 15 माओवादी गिरफ्तार किये गए हैं।     सोड़े लाचू / गोपाल – SZCM (साउथ बस्तर DVC)     सोड़े लक्मा / भीमा – DVCM (जगरगुंडा AC)     गंगी लक्ष्मी/ माड़े – DVCM (केरलापाल AC)     वेत्ती वेंकट – ACM     मड़कम वागा – ACM (प्रेस कमिटी इंचार्ज)     कश्यप भीमा / योगेश – ACM     पोडियम आनंद / दन्नू – ACM     मड़कम लक्ष्मण / कोसा – ACM (PPCM)     कुंजुम बुज्जी – ACM     टाटी कमला – ACM     डुडी अदमा / मल्लश – ACM     मड़वी जोगा – ACM     मड़वी सुनीता – ACM     कुंजुम नंदिनी – ACM     बडिसा राजू – ACM एनटीआर विजयवाड़ा से 4 गिरफ्तार     पोडियम रेंगू – SZCM (BNPC बैटेलियन हेडक्वार्टर कंपनी)     सोड़ी मनीला – DVCM (पामेड AC इंचार्ज)     मड़कम मदन /मधन्ना/ जग्गू / लखमा – DVCM (जगरगुंडा AC इंचार्ज)     सोड़ी मांगी – ACM (PPCM) काकिनाडा जिला से 2 गिरफ्तार     पोट्टम कांति – ACM (PPCM)     मड़वी कोसी – ACM (PPCM) डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिला से 1 गिरफ्तार     मड़वी हंधा – DVCM (संचार टीम, SBT DVC)  

हाईकोर्ट की सख़्ती से बढ़ी परेशानी: 600 परिवारों पर बेदखली का साया, वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट पहुँचा

नई दिल्ली  केरल वक्फ संरक्षण वेधि ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा मुनंबम की विवादित जमीन को लेकर एक जांच आयोग गठित करने के फैसले को सही ठहराया गया था। 10 अक्टूबर को केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एकल-न्यायाधीश के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें सरकार द्वारा सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सी.एन. रामचंद्रन नायर की अध्यक्षता में स्थापित किए गए जांच आयोग को अवैध ठहराया गया था। एकल-न्यायाधीश ने मार्च में आयोग के गठन को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामले वक्फ ऐक्ट, 1995 के अधीन वक्फ बोर्ड व ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और सरकार के पास समानांतर जांच कराने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। हालांकि डिवीजन बेंच ने फैसला उलटते हुए कहा कि केरल वक्फ बोर्ड (KWB) का 2019 में जमीन को वक्फ घोषित करना कानूनन गलत था। बेंच ने यह भी कहा कि 1950 में जमीन का जो हस्तांतरण हुआ था, वह वक्फ नहीं बल्कि एक उपहार (गिफ्ट डीड) था, और भूमि को वक्फ घोषित करने की प्रक्रिया जमीन हथियाने का प्रयास प्रतीत होती है। पूरा विवाद समझ लीजिए बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मुनंबम की यह जमीन मूल रूप से 404.76 एकड़ थी, जो समुद्री कटाव की वजह से घटकर 135.11 एकड़ रह गई है। 1950 में सिद्धीक सैत नामक व्यक्ति ने यह जमीन फारूक कॉलेज को दान में दी थी। लेकिन तब तक यहां कई परिवार बस चुके थे, जो जमीन का उपयोग करते रहे। वक्फ बोर्ड का दावा है कि यह जमीन वक्फ से संबंधित थी, लेकिन कॉलेज द्वारा बाद के वर्षों में जो भूमि बिक्री स्थानीय निवासियों को की गई, उनमें कहीं भी वक्फ का उल्लेख नहीं था। 2019 में केरल वक्फ बोर्ड ने औपचारिक रूप से भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत किया। इससे पहले हुए सभी बिक्री सौदे अवैध माने गए और लगभग 600 परिवारों पर बेदखली का खतरा मंडराने लगा। इस निर्णय के खिलाफ अपील कोझिकोड के वक्फ ट्रिब्यूनल में लंबित है। राज्य सरकार की कार्रवाई और विरोध परिवारों के विरोध को देखते हुए केरल सरकार ने नवंबर 2024 में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रामचंद्रन नायर की अध्यक्षता में एक जांच आयोग गठित किया था, ताकि विवाद का समाधान सुझाया जा सके। इसी आयोग को चुनौती देते हुए वक्फ संरक्षण समिति ने हाईकोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट में दायर SLP में क्या कहा गया? केरल वक्फ संरक्षण वेधि ने अपनी याचिका में कहा है कि:     डिवीजन बेंच ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया, जबकि मामला वक्फ ट्रिब्यूनल में लंबित है।     हाईकोर्ट ने विवादित संपत्ति की प्रकृति (वक्फ है या नहीं) पर टिप्पणी की, जबकि यह मुद्दा उसकी सुनवाई का हिस्सा ही नहीं था।     जांच आयोग को सही ठहराकर हाईकोर्ट ने कार्यपालिका के अवैधानिक हस्तक्षेप को वैधता दे दी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।     यह निर्णय वैधानिक अंतिमता के सिद्धांत का उल्लंघन है, क्योंकि वक्फ मामलों पर अंतिम निर्णय ट्रिब्यूनल का होता है, न कि राज्य सरकार का। याचिका अधिवक्ता अब्दुल्ला नसीह वीटी के माध्यम से दायर की गई है। अब आगे क्या? सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि:     क्या राज्य सरकार वक्फ विवादों में जांच आयोग गठित कर सकती है?     क्या हाईकोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर भूमि की प्रकृति पर टिप्पणी की?     और क्या यह निर्णय वक्फ बोर्ड व ट्रिब्यूनल की शक्तियों का हस्तक्षेप है?     मामले पर शीर्ष अदालत की सुनवाई के बाद आगे की दिशा तय होगी। मुनंबम भूमि को वक्फ के रूप में अधिसूचित करना केरल वक्फ बोर्ड की ‘जमीन हड़पने का हथकंडा’: अदालत इसी साल 10 अक्टूबर को केरल उच्च न्यायालय ने कहा था कि मुनंबम भूमि को वक्फ के रूप में अधिसूचित करना केरल वक्फ बोर्ड की भूमि हड़पने का हथकंडा था। इसी के साथ अदालत ने विवादित भूमि के स्वामित्व का पता लगाने के लिए एक जांच आयोग नियुक्त करने के सरकारी आदेश को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी एम की पीठ ने कहा कि अनिवार्य प्रक्रिया और वक्फ अधिनियम 1954 और 1955 के प्रावधानों के अनुपालन के अभाव में संबंधित संपत्ति को कभी भी वक्फ संपत्ति के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता था। इसने कहा कि विवादित भूमि को वक्फ के रूप में अधिसूचित करना वक्फ अधिनियम 1954 और 1995 के प्रावधानों के विरुद्ध है और ‘केरल वक्फ बोर्ड (केडब्ल्यूबी) की भूमि हड़पने के हथकंडे से कम नहीं है।’ पीठ ने कहा कि इस कदम से उन सैकड़ों परिवारों और वास्तविक निवासियों की आजीविका प्रभावित हुई है, जिन्होंने वक्फ संपत्ति की अधिसूचना जारी होने से दशकों पहले भूखंड खरीदे थे। पीठ ने 17 मार्च के एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील स्वीकार करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में, राज्य सरकार को जांच आयोग (आईसी) गठित करने और रिपोर्ट पेश करने से नहीं रोका जा सकता था। एकल न्यायाधीश ने अपने फैसले में जांच आयोग की नियुक्ति को रद्द कर दिया था। जांच आयोग की नियुक्ति को बरकरार रखते हुए, पीठ ने कहा कि राज्य सरकार कानून के अनुसार समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए स्वतंत्र है।  

कम उम्र में हाई ब्लड प्रेशर के मामले बढ़े: डॉक्टर से समझें वजह और रोकथाम

इस सदी की शुरुआत से अब तक बच्चों में उच्च रक्तचाप की समस्या दोगुणी हो चुकी है। कई बच्चों में इसका स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता, जिससे यह परेशानी धीरे-धीरे विकराल रूप ले लेती है। युवा अवस्था में प्रवेश से पहले ही वे हार्ट, किडनी और स्ट्रोक जैसी बेहद गंभीर बीमारियों के संभावित शिकार हो जाते हैं। खराब आहार, निष्क्रियता भरी दिनचर्या और बढ़ता मोटापा बच्चों को उच्च रक्तचाप की मुसीबत में धकेल रहे हैं। लांसेट की हालिया रिपोर्ट की मानें तो दुनियाभर में 11.4 करोड़ बच्चे हाइपरटेंशन की गिरफ्त में आ चुके हैं। जिस तेजी से बच्चों में हाइपरटेंशन बढ़ा है, उससे अभिभावकों और स्वास्थ्य देखभाल तंत्र को तुरंत चेतने की जरूरत है। विशेषज्ञ बताते हैं कि शुरुआत में कुछ बच्चों में रक्तचाप का स्तर तेजी से बढ़ता है, लगभग 14 साल की उम्र में, खासकर लड़कों में, यह चरम स्थिति में होता है। इन दौरान नियमित जांच कराने की जरूरत होती है। इस परेशानी के पीछे मुख्य कारण बचपन में बढ़ता मोटापा है, जबकि थोड़े से प्रयास से इसे रोका जा सकता है। रिपोर्ट की मानें तो मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज के साथ-साथ इस उम्र में अब अस्थमा और मानसिक सेहत से जुड़ी समस्याओं का भी जोखिम बढ़ता जा रहा है। हमें समझना होगा कि स्वस्थ बच्चे ही एक स्वस्थ युवा के रूप में विकसित होंगे, ऐसे में आहार, व्यायाम जैसी आदतों का विकास बचपन में ही करने की जरूरत है। जिन परिवारों में हाइपरटेंशन की हिस्ट्री रही है, उन्हें बच्चों की सेहत को लेकर विशेष रूप से गंभीर रहने की जरूरत है। बच्चे की हो बीपी व बीएमआइ की जांच साल 2000 तक उच्च रक्तचाप सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन बीते दो दशकों में बच्चे – किशोर भी इसकी गिरफ्त में आए हैं। समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो बच्चे युवावस्था में हाइ ब्लड प्रेशर के कारण हृदय और किडनी रोग की चपेट में आ जाएंगे। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन मोटापा और जेनेटिक प्रमुख हैं। मोटापे से ग्रस्त लगभग हर पांचवां बच्चा हाई बीपी से पीड़ित है। इनमें से 50 प्रतिशत को पता ही नहीं होता कि उन्हें बीपी की समस्या है। शहरों में रहने वाले बच्चों में 20 प्रतिशत मोटापे की गिरफ्त में हैं। क्या हैं वजहें देर तक मोबाइल टीवी देखना पढ़ाई का अतिरिक्त दबाव, नींद पूरी न करना, फल एवं सब्जियां कम खाना, मीठे पदार्थ, खेलकूद से दूरी और फास्ट- फूड का अधिक सेवन बच्चों में इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैटी लिवर की समस्या बढ़ाता है। क्रोनिक किडनी डिजीज, रिफ्लक्स नेफ्रोपैथी, पालिसिस्टिक किडनी डिजीज, हाइपरथायराइडिज्म, कुशिंग सिंड्रोम और जन्मजात एड्रेनल हाइपरप्लासिया भी बच्चों में उच्च रक्तचाप के जोखिम को बढ़ाते हैं । हार्ट डिजीज जैसे को आर्कटेशन आफ आर्टा के साथ स्टेरायड, गर्भनिरोधक गोलियां, नशीली दवाएं और स्लीप एप्निया से भी बच्चे बीपी रोग की चपेट में आ रहे हैं।     मोटापा और अधिक वजन     खराब दिनचर्या, खराब आहार, नमक का अधिक सेवन     किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन और जांच का अभाव कैसे करें बचाव प्रतिवर्ष बच्चों की बीपी और बीएमआई की जांच आवश्यक है, उन्हें संतुलित व पौष्टिक आहार दें, बच्चे को किसी एक आउटडोर एक्टिविटी से जोड़ें। तनाव से बचाने के लिए काउंसलिंग और मेडिटेशन कराएं। जंक फूड और मीठे पदार्थों से उन्हें दूर रखें। पढ़ाई के लिए अतिरिक्त दबाव न डालें, स्क्रीन टाइम अधिकतम एक घंटा हो, भोजन में नमक कम करें, ताजे फल-सब्जियां खिलाएं, आठ घंटे नींद की आदत डालें। बच्चों को अनावश्यक स्टेरायड न दें। ध्यान रखें कि यदि आपका बच्चा मोटापे की चपेट में है तो युवावस्था में उसे हाइपरटेंशन, टाइप-2 डायबिटीज, दिल का दौरा, स्ट्रोक, खराब कोलेस्ट्राल, फैटी लिवर, स्लीप एपनिया, किडनी रोग और कुछ तरह के कैंसर का खतरा तीन-चार गुणा तक अधिक रहता है।