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आज़म ख़ान को बड़ी राहत: सेना टिप्पणी केस में MP-MLA कोर्ट ने किया दोषमुक्त

लखनऊ  सेना पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में रामपुर एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने गुरुवार को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को बरी कर दिया। यह फैसला करीब 8 साल बाद आया है। बता दें कि यह मामला भाजपा विधायक आकाश सक्सेना की ओर से 30 जून 2017 को दर्ज कराया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आजम खान ने सेना के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। भाजपा विधायक ने कहा था कि 2017 में आजम खान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के दौरान सेना का मनोबल गिराने और समुदाय आधारित बयान दिया था, जिसके बाद रामपुर के थाना सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसी मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने गवाहों की गवाही और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद फैसला सुनाते हुए आजम खान को दोषमुक्त करार दिया है। आजम खान के अधिवक्ता मुरसलीन ने बताया कि इस मामले में कोर्ट में ट्रायल चला, लेकिन वादी पक्ष अपना आरोप साबित नहीं कर पाया। साक्ष्यों के अभाव में आजम खान को दोषी नहीं पाया गया और उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया। रामपुर स्पेशल कोर्ट से आए इस फैसले के बाद आजम खान को बड़ी राहत मिली। वहीं, सुबह से ही आजम खान पर फैसले को देखते हुए कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। कोर्ट परिसर में पुलिस बल तैनात था और सभी संबंधित पक्षों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। पुलिस लगातार पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए थी। वहीं, आजम खान इस समय दो पैन कार्ड मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद रामपुर जेल में बंद हैं। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम भी इसी मामले में सजा काट रहे हैं। वहीं, 2019 में नगर विधायक रहे आकाश कुमार सक्सेना ने मुकदमा दर्ज कराया था और अब्दुल्ला आजम पर दो पैन कार्ड रखने का आरोप लगाया था। इसके बाद मामले में अब्दुल्ला आजम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का भी रुख किया था, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए इस मामले में ट्रायल की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। पक्षों को सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा। इसके बाद जुलाई में याचिका को खारिज कर दिया था।

12 से 29 दिसंबर तक पूरे प्रदेश में होगा किसान पाठशाला का आयोजन

शुक्रवार को बाराबंकी में पद्मश्री रामशरण वर्मा के गांव से होगा शुभारंभ  किसानों के लिए मॉडल बन चुके हैं पद्मश्री रामशरण वर्मा  लखनऊ योगी सरकार 12 से 29 दिसंबर तक उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में किसान पाठशाला का आयोजन करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को रबी मौसम की किसान पाठशाला का शुभारंभ पद्मश्री किसान रामशरण वर्मा के गांव दौलतपुर के खेत से करेंगे। मुख्यमंत्री प्रगति किसान सम्मेलन के जरिए किसानों से संवाद करेंगे। साथ ही प्रगतिशील किसानों का सम्मान और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी किसानों को चेक व स्वीकृति पत्र वितरित करेंगे। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख भी रहेंगे। सरकार “किसान की बात किसान के द्वार” की संकल्पना पर किसानों को प्रोत्साहित करेगी। 1.90 करोड़ किसानों को किया जा चुका प्रशिक्षित  कृषि विभाग ने किसानों ने अनुरोध किया है कि अपने जनपद की किसान पाठशाला में प्रतिभाग कर योगी सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजना (60 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पम्प, 40 से 50 प्रतिशत पर कृषि यंत्र आदि) के जरिए खेती की नई तकनीक, नवीन प्रजाति, पशुपालन, बागवानी, रेशम पालन एवं मधुमक्खी पालन की जानकारी प्राप्त कर कृषि उत्पादन एवं आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं। किसान पाठशाला के माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों में अब तक लगभग 1.90 करोड़ किसानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।  किसानों के उत्पादन व लाभ में वृद्धि के लिए प्रयासरत है योगी सरकार     गठन के साथ ही योगी सरकार किसानों के प्रति अपना संकल्प निभाती आ रही है। सरकार द्वारा प्रदेश के किसानों को 25423 करोड़ का ऋण मोचन, 90669 करोड़ का पी0एम0 किसान सम्मान निधि का लाभ प्रत्यक्ष तौर पर उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके साथ ही मृदा सुधार, मृदा परीक्षण, कृषि यंत्र, उर्वरक, कृषि रक्षा रसायन सहित कृषि उत्पादन के प्रसंस्करण एवं विपणन आदि के लिए योगी सरकार प्रत्येक स्तर पर किसानों को सहयोग कर उनके कृषि उत्पादन एवं लाभ में वृद्धि एवं आत्मसम्मान दिलाने के लिए प्रयासरत है।  किसानों के लिए मॉडल बन चुके हैं पद्मश्री रामशरण वर्मा  कृषि क्षेत्र में धरातल पर दिख रहे परिवर्तन का सबसे बड़ा उदाहरण बाराबंकी के पद्मश्री रामशरण वर्मा जैसे प्रगतिशील किसान बने हैं। उन्होंने योगी सरकार की नीतियों को किसानों के उत्थान की असली धुरी बताया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की कृषि नीतियों ने किसानों की आय बढ़ाने के नए रास्तों का निर्माण किया है। किसानों की सुविधा, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर साढ़े आठ वर्षों में राज्य सरकार ने कई योजनाएं लागू कीं। इनके जरिए खेती अब लाभकारी तथा तकनीकी रूप से उन्नत होने की दिशा में बढ़ चुकी है। किसान सम्मान निधि से लेकर टिश्यू कल्चर आधारित उन्नत खेती के प्रोत्साहन, बीज छूट, कृषि यंत्रों पर रियायत और फसलों के मूल्य का डीबीटी के माध्यम से त्वरित भुगतान आदि कदमों ने प्रदेश में नई कृषि क्रांति की शुरुआत की है।  नवाचार आधारित खेती से बढ़ी किसानों की आय पद्मश्री रामशरण वर्मा द्वारा 32 वर्ष पहले 6 एकड़ से शुरू हुई खेती आज सहकारिता आधारित बटाई मॉडल पर 275 एकड़ तक पहुंच चुकी है। केला, टमाटर, आलू, मेंथा, तरबूज, खरबूजा और गेहूं जैसी विविध फसलों के चक्र पर आधारित खेती से उत्पादन और लाभ में बढ़ोतरी हुई है। वर्मा के मुताबिक योगी सरकार के प्रोत्साहन से टिश्यू कल्चर केले के उत्पादन ने किसानों को नई दिशा दी है। वे बताते हैं कि टमाटर में 60 हजार रुपये की लागत पर दो से ढाई लाख रुपये तक का लाभ संभव हो रहा है। टमाटर उत्पादन को मिले सरकारी प्रोत्साहन ने 50 प्रतिशत की वृद्धि सुनिश्चित की है। छोटे किसान जो पहले 20-25 हजार कमाते थे, वे अब डेढ़ से दो लाख रुपये वार्षिक आय कर रहे हैं।  रामशरण वर्मा ने हजारों किसानों को उन्नत खेती से जोड़ा  रामशरण वर्मा ने बताया कि 32 वर्षों से खेती करते हैं। साथ ही उन्होंने हजारों किसानों को उन्नत खेती से जोड़ा है। योगी सरकार किसानों की तरक्की के लिए दिनरात प्रयास कर रही है। उनकी नीतियां किसानों की उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। विकसित होने की ओर बढ़ते उत्तर प्रदेश के विकास की यह गति किसानों के उत्थान से और तेज हुई है। श्री वर्मा के मुताबिक वे 30 हजार से अधिक लोगों को साल में रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। अपने गांव व आसपास के लोगों को रोजगार देने में सक्षम हैं तो इसका सबसे बड़ा श्रेय योगी सरकार को जाता है। बीज और बाजार उपलब्ध कराने का जो कार्य योगी सरकार ने किया है, वह प्रदेश की कृषि उन्नति और किसानों की खुशहाली का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

बाघ अभ्यारण्यों से ही जंगल बचे रहे हैं, बाघों के साथ जल, जंगल और ज़मीन बचाने के हों प्रयास- राज्यपाल

जयपुर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि बप्पा रावल के नाम पर ही रावल पिंडी बना हुआ है। वह मेवाड़ के ऐसे पराक्रमी योद्धा थे जिन्होंने अरब से आए मीर कासिम को ईरान तक खदेड़ा। उन्होंने राजस्थान को वीरों की धरती बताते हुए कहा कि यहां सर्वाधिक बाघ अभ्यारण्य होने के साथ ही, प्रकृति संरक्षण परंपराएं भी जीवंत हैं। उन्होंने बाघों के साथ जल, जंगल और ज़मीन बचाने के लिए भी सबको मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। श्री बागडे गुरुवार को जवाहर कला केंद्र में जयपुर टाइगर फेस्टिवल के शुभारंभ के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बाघ उत्सव में आयोजित फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और वन, वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य करने वाले विशिष्टजनों को सम्मानित किया। राज्यपाल श्री बागडे ने कहा कि बाघों के होने से ही पारिस्थितिकी संतुलन बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि बढ़ती मनुष्य आबादी के साथ ही बाघों के प्राकृतिक आवास तेजी से संकुचित हो रहे हैं। उन्होंने बाघ संरक्षण के लिए जागरूकता का प्रसार किए जाने का आह्वान किया। उन्होंने  कहा कि बाघ अंब्रेला स्पेसिस है। वह रहेगा तभी जंगल और जंगली जीव सुरक्षित रह सकते हैं। इसी से पर्यावरण संरक्षण बना रहेगा। उन्होंने कहा कि देश में बाघ अभ्यारण्य बनने से ही जंगल बचे रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान भक्ति और शक्ति का ही प्रदेश नहीं है, गौ पालन का भी सबसे बड़ा स्थान है। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन में राजस्थान देशभर में दूसरे स्थान पर है। गौ पूजा, गौशाला स्थापना में राजस्थान अग्रणी है। उन्होंने बाघ को विश्व का बहुत सुंदर और शक्तिशाली जीव बताते हुए कहा कि विश्व के 75 प्रतिशत बाघों की संख्या अकेले हमारे देश में हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के रणथम्भौर नेशनल पार्क, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व व सरिस्का टाइगर रिजर्व को अच्छी श्रेणी का टाइगर रिजर्व माना गया है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में कुल 160 बाघ हैं, जिनमें 144 जंगली और 16 कैप्टिविटी में हैं। रणथंभौर में सबसे ज़्यादा 71 बाघ हैं। राज्यपाल ने कहा कि स्वच्छ जल, भूमि उर्वरता में सुधार आदि के साथ ही जैव विविधता का संरक्षण बाघों की आबादी पर ही निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि बाघ संरक्षण के साथ पर्यटन का विकास भी इस तरह से हो कि वन्य जीवों को किसी तरह की हानि नहीं पहुंचे। उन्होंने प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के लिए जन चेतना का प्रसार करने का आह्वान किया।

हरियाणा HKRN स्टाफ ध्यान दें! तय समय में नहीं किया ये काम तो बढ़ सकती है परेशानी

हरियाणा  हरियाणा में HKRN कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर आई है। बताया जा रहा है कि HKRN कर्मचारी अपनी फैमिली ID अपडेट नहीं करवा रहे हैं। जिस कारण उन्हें दूसरे लाभ भी मिल रहे हैं जिनके वह पात्र नहीं है, जिसको लेकर अब चीफ सेक्रेटरी ने सभी विभागों को पत्र लिखकर डेटा अपडेट करवाने के बारे में निर्देश दिए हैं। हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी ने सभी विभागाध्यक्ष को पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने कहा है कि HKRN के तहत नौकरी कर रहे कर्मचारी अपनी इनकम को अपडेट नहीं कर रहे हैं। खासकर 17 अगस्त 2019 से 31 दिसंबर 2021 के बीच विभिन्न विभागों में शामिल हुए लोगों ने ऐसा किया है। जिन्होंने HKRN के माध्यम से मजदूरी प्राप्त करने के बावजूद अपनी पारिवारिक आय की स्थिति को परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) पोर्टल पर बदलाव नहीं करवाया है। कर्मचारियों को 20 दिनों के अंदर पीपीपी पोर्टल पर अपडेट किए जाने के निर्देश दिए हैं।

तकनीक, परामर्श व बाजार तक सीधी पहुंच हुई सुनिश्चित, गांव-गांव मजबूत हो रहा कृषि इकोसिस्टम

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले साढ़े आठ वर्षों में कृषि क्षेत्र में बुनियादी बदलाव आया है। प्रदेश सरकार ने खेती को उन्नत बनाने के साथ ही ज्ञान, तकनीक, परामर्श व मार्केट एक्सेस से जोड़कर गांव-गांव तक इसका लाभ पहुंचाया है। फसल प्रबंधन, बीज चयन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक खेती, ड्रोन स्प्रे और आधुनिक सिंचाई जैसे क्षेत्रों में डिजिटल व वैज्ञानिक नवाचारों ने खेती को न केवल सुरक्षित बनाया बल्कि किसानों की लागत घटाकर उत्पादन व आय को भी बढ़ाया है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के इस उत्तम मॉडल को विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा भी सराह चुके हैं। उन्होंने प्रदेश के योगी आदित्यनाथ की सरकार की इस कृषि-परिवर्तन यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने कृषि को आधुनिकता से जोड़ते हुए विश्व स्तर का मॉडल प्रस्तुत किया है। तकनीक, नवाचार व फसलों तक सरकार की पहुंच प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने किसानों को वैज्ञानिक व स्मार्ट खेती की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए व्यापक प्रशिक्षण अभियान चलाया है, जिसमें युवा किसान और महिला किसान उत्पादक समूह विशेष रूप से शामिल रहे। हर गांव में कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय विशेषज्ञों के साथ परामर्श प्रणाली स्थापित की गई, जिससे फसलों की बीमारी, पानी, उर्वरक व बाजार से जुड़े प्रश्नों का समाधान इम्पैक्ट आधारित तरीके से सीधे खेत पर ही उपलब्ध हो रहा है। ड्रोन-स्प्रे, स्वचालित सिंचाई प्रणाली, मिट्टी के पोषक तत्वों की डिजिटल निगरानी तथा खेतों की डिजिटल सर्वेक्षण प्रणाली ने कृषि सेक्टर को आधुनिक उद्योग जैसी दक्षता प्रदान की है। फसल बीमा के दावों का त्वरित निपटारा, ऑनलाइन मंडियों और ई-नाम जैसी पहल ने किसानों को सही दाम और व्यापक बाजार उपलब्ध कराया है। रिकॉर्ड भुगतान, एथेनॉल क्रांति का आधार बनी मजबूत कृषि अवसंरचना गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान, नई चीनी मिलों की स्थापना, क्षमता बढ़ोतरी और एथेनॉल उत्पादन में यूपी का देश में शीर्ष स्थान, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की किसान-केंद्रित सोच को दर्शाता है। सिंचाई परियोजनाओं, “हर खेत तक पानी” मिशन, बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक और हर घर नल से जल जैसे अभियानों ने खरीफ और रबी दोनों सीजनों में फसलों की सिंचाई व पेयजल आपूर्ति को मजबूती दी है। इसी कड़ी में ग्रामीण सड़कों, स्टोरेज, मंडियों व कोल्ड चेन नेटवर्क के विस्तार ने कृषि को उद्योग की शक्ति प्रदान की है। वहीं एफपीओ, एग्री-ड्रोन ऑपरेटरों और जैविक खेती को प्रोत्साहन देकर किसानों को “उत्पादक से उद्यमी” बनाने की दिशा में भी सरकार ने निर्णायक कदम उठाए हैं जो धरातल पर अपना असर दिखा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में विश्व बैंक और प्रदेश सरकार ने मिलकर ‘यूपी एग्रीज’ परियोजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य राज्य में कृषि प्रणाली को तकनीकी और वित्तीय रूप से मजबूत बनाना है। इस परियोजना से लगभग 10 लाख छोटे और सीमांत किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। विश्व बैंक के अजय बंगा, अध्यक्ष ने बताया उत्तर प्रदेश का कृषि मॉडल छोटे किसानों समेत सभी के लिए बहुत अच्छा है। यह केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है जिसे मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है।  

आकाश चोपड़ा का बड़ा खुलासा: ये खिलाड़ी IPL 2026 नीलामी में बनाएंगे मोटी कमाई!

नई दिल्ली  पूर्व भारतीय क्रिकेटर और क्रिकेट एक्सपर्ट आकाश चोपड़ा ने आईपीएल 2026 मिनी ऑक्शन को लेकर बड़ा प्रिडिक्शन किया है। आकाश चोपड़ा ने बताया है कि कौन से विदेशी खिलाड़ियों को आईपीएल के आने ऑक्शन में मोटी रकम मिल सकती है। आकाश चोपड़ा ने टॉप 5 प्रिडिक्शन किए हैं, लेकिन हर स्लॉट के लिए एक से ज्यादा खिलाड़ियों को रखा है। 16 दिसंबर को अबू धाबी के एतिहाड एरेना में आईपीएल 2026 ऑक्शन होने वाला है। क्रिकेटर से कमेंटेटर बने आकाश चोपड़ा ने आईपीएल 2026 ऑक्शन में सबसे ज्यादा कीमत पर बिकने वाली विदेशी खिलाड़ियों में टॉप 5 में तीन खिलाड़ियों को रखा है। इनमें साउथ अफ्रीका के डेविड मिलर और एनरिक नोर्खिया हैं, जबकि तीसरे खिलाड़ी श्रीलंका के मथीशा पथिराना हैं। एक्स पर पोस्ट किए गए क्लिप में आकाश चोपड़ा ने कहा, “अभी साउथ अफ्रीका सीरीज चल रही है, इसलिए कुछ रीसेंसी बायस तो होगा ही। मैंने मथीशा पथिराना, डेविड मिलर और एनरिक नॉर्किया को नंबर 5 पर रखा है। अगर नॉर्किया और मिलर भारत के खिलाफ अच्छा परफॉर्म करते हैं, तो उन्हें बहुत ज्यादा पैसे मिलेंगे।” आकाश चोपड़ा ने स्पिन-बॉलिंग ऑलराउंडर माइकल ब्रेसवेल (न्यूजीलैंड) और कूपर कॉनोली (ऑस्ट्रेलिया) को चौथे स्थान पर रखा। उन्होंने आगे कहा, "माइकल ब्रेसवेल में काफी दिलचस्पी होनी चाहिए, लेकिन बदकिस्मती से ऐसा नहीं है। CSK, आपको एक ऑफी (ऑफ स्पिनर) की जरूरत है, वह अच्छी बैटिंग भी करता है। इसलिए CSK को उसके बारे में सोचना चाहिए। रिकी पोंटिंग के पास अब एक ओवरसीज स्लॉट खाली है, इसलिए कॉनली वहां एक ऑप्शन हो सकते हैं।" दूसरे और तीसरे नंबर की बात करते हुए आकाश चोपड़ा ने कहा, "लियाम लिविंगस्टोन ने अच्छा परफॉर्म नहीं किया है, उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, चाहे वह पंजाब के लिए हो या RCB के लिए, लेकिन अब सब कुछ सप्लाई और डिमांड पर निर्भर करता है, कोई विस्फोटक मिडिल-ऑर्डर प्लेयर ऑक्शन में नहीं है, यहां तक ​​कि मैक्सी (मैक्सवेल) भी अब नहीं हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि लिविंगस्टोन इस बार भी पैसे कमाएंगे।" बेयरेस्टो और ग्रीन पर नजरें पूर्व क्रिकेटर ने आगे कहा, "मैंने जॉनी बेयरस्टो को नंबर 2 पर रखा है। उन्होंने काफी रन बनाए हैं और पिछले सीजन में मुंबई इंडियंस के लिए कुछ मैच भी खेले हैं। कई टीमें उन पर बोली लगा सकती हैं। KKR को एक विकेटकीपर बल्लेबाज की जरूरत है और DC को टॉप ऑर्डर में एक विस्फोटक बल्लेबाज की जरूरत है, इसलिए मुझे लगता है कि उनके लिए काफी दिलचस्पी होगी।" कैमरोन ग्रीन को आकाश चोपड़ा ने टॉप पर रखा और कहा, “कैमरोन ग्रीन नंबर 1 पर होंगे, उनके आस-पास कोई नहीं है। फाइनल कीमत कितनी भी हो, उन्हें सिर्फ 18 करोड़ रुपये की मैक्सिमम कैप ही मिलेगी, लेकिन यह एक जबरदस्त बिडिंग वॉर हो सकती है। KKR होगी और CSK होगी और कोई दूसरी टीम भी होगी जो CSK से पहले कूद पड़ेगी, असल में उनके लिए यह 25 से 28 करोड़ रुपये तक हो सकता है।”  

सर्जियो रामोस की नई मंज़िल? मोंटेरे छोड़ते ही मैनचेस्टर यूनाइटेड ने बढ़ाया हाथ

लंदन  सर्जियो रामोस ने मंगलवार को मोंटेरे के साथ अपने करियर को विराम दे दिया। मोंटेरे को अलविदा कहने के साथ ही सर्जियो को मैनचेस्टर यूनाइटेड से प्रस्ताव मिला है। सर्जियो रामोस के माध्यम से मैनचेस्टर यूनाइटेड अपनी बैकलाइन को मजबूत करना चाहता है। रिपोर्ट के मुताबिक मैनचेस्टर यूनाइटेड ने सर्जियो रामोस को प्रस्ताव दिया और उनकी तरफ से जवाब का इंतजार कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर सर्जियो रामोस ने मैक्सिकन क्लब और उसके फैंस के लिए भावुक संदेश लिखा। उन्होंने लिखा, "अलविदा कहना कभी आसान नहीं होता। एक चैप्टर खत्म हो रहा है जो फरवरी में उम्मीदों से भरा शुरू हुआ था और जिसने मुझे एक देश, एक शहर, और एक फुटबॉल को जानने का मौका दिया। इससे मुझे कई नए अनुभव हुए और सबसे बढ़कर, कई दोस्त मिले।" सर्जियो रामोस ने लिखा, "मुझे हमेशा गर्व महसूस होगा कि मैंने रायडोस कैप्टन का आर्मबैंड पहना था, टीम को उसके नए फॉर्मेट में पहले क्लब विश्व कप में लीड किया था, और क्लॉसुरा, एपर्टुरा, लीग्स कप, और सीओएनसीएसीएएफ चैंपियंस कप में मुकाबला किया था।" रामोस ने लिखा, "क्लब को, मेरे प्यारे साथियों को, कोचिंग स्टाफ को, सभी को, धन्यवाद। सबसे बढ़कर, धन्यवाद फैंस, जिन्होंने शहर में कदम रखते ही अपना प्यार और अपनापन मुझ तक पहुंचाया। मैं अपने करियर के इस पड़ाव को हमेशा पुरानी यादों के साथ याद रखूंगा और मैं हमेशा गर्व से कहूंगा, 'अप विद मॉन्टेरी'।" शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व कप विजेता फरवरी में फ्री ट्रांसफर पर मॉन्टेरी में शामिल हुए। उन्होंने मॉन्टेरी के लिए सभी प्रतियोगिताओं में 32 मैच खेले और सात गोल किए, जिसमें चार गेम और अमेरिका में फीफा क्लब विश्व कप के एक्सटेंडेड एडिशन में एक गोल शामिल है। सर्जियो रामोस गार्सिया एक स्पेनिश पेशेवर फुटबॉलर हैं जो सेंटर-बैक के तौर पर खेलते हैं। उन्हें अब तक के सबसे महान डिफेंडर में से एक माना जाता है। रियल मैड्रिड के लिए वह 100 से ज्यादा गोल कर चुके हैं।

म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग को देगा 400 ईव्हीएम

राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री श्रीवास्तव की उपस्थिति में हुआ एमओयू भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी के तहत किराये पर सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग को 400 ईव्हीएम उपलब्ध करायेगा। इस संबंध में गुरुवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव की उपस्थिति में सचिव मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह और सचिव सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग सुश्री ग्लोरिया नामचू ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये। राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री श्रीवास्तव ने कहा कि ईव्हीएम शेयरिंग के मामले में मध्यप्रदेश पॉयनियर स्टेट है। उन्होंने बताया कि ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी के तहत छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग को ईव्हीएम किराये पर दी जा चुकी हैं। इसी तरह जम्मू-कश्मीर एवं महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन को भी ईव्हीएम किराये पर देने के लिये एमओयू हो चुका है। अन्य राज्यों के साथ भी एमओयू की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी को-ऑपरेटिव फेडरेलिजम का बेहतर उदाहरण है। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि मध्यप्रदेश में स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज के एमओयू से सिक्किम और मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के बीच संबंध और सुदृढ़ होंगे। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2014-15 में स्थानीय निर्वाचन में ईव्हीएम का उपयोग शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि ईव्हीएम के माध्यम से चुनाव कराने में सहूलियत होने के साथ ही पारदर्शिता भी बनी रहती है। श्री सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ को 2 हजार ईव्हीएम और महाराष्ट्र को 25 हजार कंट्रोल यूनिट और एक लाख बेलेट यूनिट किराये पर दी गयी हैं। सचिव सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग सुश्री नामचू ने इस एमओयू पर कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी सिक्किम जैसे छोटे राज्यों के लिये बहुत उपयोगी है। सुश्री नामचू ने कहा कि इससे राज्यों का आर्थिक बोझ कम होगा और सरलता से स्थानीय चुनाव कराये जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उपयोग की जा रहीं निर्वाचन की अन्य नवीनतम तकनीकों के बारे में भी जानकारी मिलेगी, जिसका उपयोग सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग करेगा। ईव्हीएम को किराये पर देने के लिये प्रति कंट्रोल यूनिट 400 एवं प्रति बीयू 200 रुपये की दर निर्धारित है। किराये की राशि अग्रिम रूप से ली जाती है। ईव्हीएम के परिवहन का पूरा व्यय राज्य निर्वाचन आयोग सिक्किम वहन करेगा। ईव्हीएम मशीन आवश्यक सुरक्षा के साथ ले जानी होगी एवं निर्वाचन के बाद स्वयं ही मध्यप्रदेश के संबंधित जिलों में जमा करानी होगी। इस दौरान सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव श्री राजेन राय और उप संचालक श्री टी.टी. लेपचा, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव श्री मनोज मालवीय, श्री सुतेश शाक्य, सुश्री संजू कुमारी, श्री मुकुल गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

एम.पी. ट्रांसको चलाएगी ‘रोको-टोको‘ अभियान

इंदौर की ट्रांसमिशन लाइनों में चायनीज मांझा फँसने से दो वर्षों में 13 बार बिजली बाधित भोपाल  मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने इंदौर शहर में ट्रांसमिशन लाइनों के नजदीक चायनीज मांझे से पतंग उड़ाने के कारण उत्पन्न होने वाली संभावित दुर्घटनाओं और विद्युत व्यवधानों पर अंकुश लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सतर्क व सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कंपनी इंदौर में विशेष ‘‘रोको-टोको ‘‘ अभियान चलाएगी। एम.पी. ट्रांसको की कार्यपालन अभियंता श्रीमती नमृता जैन ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में इंदौर क्षेत्र में 13 बार ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब पतंग के साथ चायनीज मांझा ट्रांसमिशन लाइन के संपर्क में आया, जिससे न केवल बिजली आपूर्ति बाधित हुई, बल्कि ट्रांसमिशन लाइनें क्षतिग्रस्त भी हुईं। चलाया जायेगा जागरूकता अभियान रोको-टोको अभियान के तहत, एम.पी. ट्रांसको ने इंदौर के उन क्षेत्रों को चिन्हित किया है जहाँ बहुतायत में पतंग उड़ाई जाती हैं। इन संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिकों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, व्यापक जागरूकता फैलाने के लिए पोस्टर, बैनर और पी.ए. सिस्टम के माध्यम से भी लोगों को सचेत और सतर्क किया जाएगा, ताकि जान-माल की हानि रोकी जा सके और उपभोक्ताओं को व्यापक क्षेत्र में बिजली के अनावश्यक लंबे व्यवधान का सामना न करना पड़े। क्यों घातक है चायनीज मांझा दरअसल, चायनीज मांझा, जो कि सामान्य सूती धागे से अलग होता है, विद्युत का सुचालक होने के कारण बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों के संपर्क में आने पर यह न केवल बिजली आपूर्ति में व्यवधान डालता है, बल्कि जान-माल की हानि का कारण भी बन सकता है। जब यह मांझा बिजली के तारों से टकराता है, तो इसमें मौजूद सामग्री के कारण करंट प्रवाहित हो सकता है, जिससे पतंग उड़ाने वाले और आसपास के लोगों को गंभीर खतरा होता है। इंदौर में ये क्षेत्र है संवेदनशील इंदौर में जिन क्षेत्रों को चायनीज मांझा के साथ पतंग उड़ाने के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील माना गया है, उनमें मुख्य रूप से लिम्बोदी, मूसाखेड़ी, खजराना, महालक्ष्मी नगर, सुखलिया, गौरीनगर, बाणगंगा, तेजाजी नगर और नेमावर रोड शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अभियान पर विशेष जोर रहेगा। 

राज्य में 21000 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप इनमे से लगभग 22-25% ग्रामीण या छोटे कस्बों से

75 जिलों में ओडीओपी और स्टार्टअप मॉडल ने लोकल प्रोडक्ट्स को बाजार, ब्रांडिंग और डिजिटल पहुंच दिया लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले साढे आठ सालों में प्रदेश सरकार ने ग्रामीण नवाचार को प्रोत्साहित करने को लेकर कई विशेष कदम उठाए हैं। जिनका सकारात्मक प्रभाव अब धरातल पर दिखने लगा है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 21,000 स्टार्टअप सक्रिय हैं, जिनमें से 22 से 25 प्रतिशत स्टार्टअप ग्रामीण और छोटे कस्बों से उभर रहे हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि अब ग्रामीण युवा भी तकनीक आधारित रोजगार के नए अवसर को प्राप्त कर रहे हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण समाज में उद्यमशीलता की नई भावना पैदा कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप क्रांति अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही रही। अब यह छोटे गांवों और कस्बों में भी इनका प्रभाव देखने को मिल रहा है।  प्रदेश सरकार की ओर से जिस प्रकार से कदम उठाए जा रहे हैं, उससे यह स्पष्ट हो चुका है कि वर्ष 2047 तक विकसित उत्तर प्रदेश का स्वप्न ग्रामीण नवाचार और उद्यमिता से ही साकार होगा। गांवों से निकलते ये स्टार्टअप न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को दिशा दे रहे हैं बल्कि एक नए आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत का आधार भी तैयार कर रहे हैं। सीड फंडिंग और मेंटरशिप से मिली नई दिशा… ग्रामीण उद्यमिता को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने सीड फंडिंग, मेंटरशिप, इन्क्यूबेशन और मार्केट लिंकेज जैसे सभी महत्वपूर्ण तत्वों को एक साथ जोड़कर एक प्रभावी प्रणाली तैयार की है। इससे युवा केवल स्टार्टअप की शुरुआत ही नहीं कर रहे बल्कि उसे टिकाऊ और बाज़ार योग्य बनाने में भी सफल हो रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न इन्क्यूबेशन सेंटरों में ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों और ग्रामीण उत्पादकों के लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित हो रहे हैं, जिनमें स्मार्ट खेती, डिजिटल मार्केटिंग और उत्पाद गुणवत्ता सुधार जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण नवाचार को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया जाए जिससे गांवों में आर्थिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव रखी जा सके। ओडीओपी प्लस स्टार्टअप मॉडल ने बढ़ाया ग्रामीण उत्पादों का मूल्य… प्रदेश के 75 जिलों में लागू किया गया ओडीओपी प्लस स्टार्टअप मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई पहचान दे रहा है। यह मॉडल स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार, ब्रांडिंग और डिजिटल पहुंच प्रदान कर रहा है। पहले जहां छोटे गांवों के उत्पाद सीमित बाजारों तक ही पहुंच पाते थे वहीं अब ईकॉमर्स और लॉजिस्टिक्स आधारित समाधान ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा दिया है। इससे न केवल बिक्री बढ़ी है बल्कि ग्रामीण उत्पादों की पहचान और मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह मॉडल राज्य में आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरा है। एग्रो टेक और ग्रामीण ई-कॉमर्स में युवाओं की बढ़ती भूमिका… उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में एफपीओ, फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, मिट्टी के स्वास्थ्य और डिजिटल खेती जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में तकनीक आधारित स्टार्टअप तेजी से बढ़ रहे हैं। ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स एड टेक और एग्रो टेक जैसे सेक्टर ग्रामीण युवाओं को नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। खासतौर पर कृषि आधारित स्टार्टअप ने किसानों को सीधे बाजार से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने में मददगार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि उत्तर प्रदेश का विकास तभी संभव है जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को अपने गांव में ही रोजगार और उद्यमिता के अवसर मिलेंगे। ग्रामीण स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के साधन विकसित होने से ग्रामीण स्तर पर पलायन भी कम हुआ है।