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रामपुर कोर्ट सख्त, आजम खान की सजा 3 साल बढ़ी; अब्दुल्ला आजम पर जुर्माना भी बढ़ाया

रामपुर सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को अब फर्जी पैन कार्ड केस में 10-10 साल की सजा काटनी होगी। रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने शनिवार को दोनों की सजा को तीन-तीन साल के लिए बढ़ा दिया। पहले इस मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान को 7-7 साल की सजा मिली थी। मामले में दिसंबर 2025 में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सजा बढ़ाने के लिए अपील की गई थी। अपने फैसले में अदालत ने दोनों के ऊपर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की रकम पहले 50-50 हजार रुपये थी। आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान फिलहाल रामपुर की ही जेल में बंद हैं। दो पैन मामले में आजम की सजा 7 से 10 साल हुई, अब्दुल्ला पर जुर्माना बढ़ाया सपा के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को 17 नवंबर को अब्दुल्ला आजम के दो पैनकार्ड मामले में एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट से सात साल की सजा हुई थी। जिससे असंतुष्ट अभियोजन पक्ष ने एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई हुई और शनिवार को सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए सजा में बढ़ोतरी की है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सपा नेता आजम खां की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। विवादित बयान मामले में आजम को 2 साल की सजा आपको बता दें इससे पहले ये तनखइया हैं…इनसे मत डरियो…इंशा अल्लाह इनसे जूते साफ कराऊंगा…लोकसभा चुनाव के दौरान आजम खान के इस विवादित बयान पर एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आजम खां को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा से दंडित किया था। अदालत ने 20 हजार रुपयों का जुर्माना भी लगाया है। मालूम हो कि 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में आजम खान समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी थे। इस दौरान भोट थाना क्षेत्र में आयोजित रोड शो के दौरान आजम का एक विवादित बयान का वीडियो वायरल हुआ था। तत्कालीन रामपुर के डीएम को लेकर विवादित बयान दिया था जिसमें आजम खान तत्कालीन जिलाधिकारी पर निशाना साधते हुए कहते सुनाई दे रहे थे कि ये तनखइया हैं, इनसे मत डरियो, उन्हीं के साथ गठबंधन है जो जूते साफ करा लेती हैं, इंशा अल्लाह चुनाव बाद इनसे जूते साफ कराऊंगा….। आजम के इस वीडियो पर दिल्ली में चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया और राज्य निर्वाचन आयोग से रिपोर्ट तलब की थी। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जिस पर तत्कालीन जिलाधिकारी एवं वर्तमान में कमिश्नर मुरादाबाद आन्जनेय कुमार सिंह के आदेश पर तत्कालीन एसडीएम टांडा एवं चमरौआ विस क्षेत्र के एआरओ घनश्याम त्रिपाठी की ओर से भोट थाने में केस दर्ज कराया था। 12 जून को झूठे शपथ पत्र मामले में सुनवाई आजम खान के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम से जुड़े झूठे शपथ पत्र मामले की सुनवाई 12 जून को होगी। रामपुर की अदालत ने इस मामले में प्रशासन से अब्दुल्ला आजम की उम्र से संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं। अभियोजन पक्ष की दलील अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहीं अधिवक्ता सीमा राणा ने कोर्ट के फैसले को न्याय की जीत बताया. उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि फर्जीवाड़ा और संवैधानिक दस्तावेजों में हेरफेर एक गंभीर मामला है. इसमें कड़ी सजा की जरूरत है. कोर्ट ने सीमा राणा की दलील को स्वीकार करते हुए, आजम खान की सजा को तीन साल बढ़ा दिया और दोनों पर भारी जुर्माना भी लगाया।  क्या है मामला? बीजेपी नेता आकाश सक्सेना की तरफ से शिकायत की गई थी की. आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने अपने पिता के राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए दो अलग-अलग जन्म तिथि का पैन कार्ड बनवाया. इस फर्जीवाड़े के तहत आजम खान ने अब्दुल्ला का पासपोर्ट भी बनवाया और यूपी की स्वार सीट से चुनाव भी लड़वाया. इस मामले में हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला आजम का निर्वाचन रद्द कर दिया था। 

‘जूते साफ कराऊंगा’ बयान पड़ा भारी, Azam Khan दोषी करार; कोर्ट ने सुनाई 2 साल की सजा

रामपुर  समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान डीएम और अन्य सरकारी अफसरों को लेकर विवादित बयान दिया था. उनका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. जिसके बाद इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था. इस मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट  ने आजम खान को दोषी ठहराया है. कोर्ट ने उन्हें दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुनाई है।  दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान आजम खान ने एक रैली में सरकारी अधिकारियों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया था. वीडियो में आजम खान कह रहे थे- “सब डटे रहो, ये कलेक्टर-पलेक्टर से मत डरियो… ये तनख्वाहिया हैं, तनख्वाहियों से नहीं डरते… देखे हैं मायावती जी के फोटो कैसे बड़े-बड़े अफसर रुमाल निकालकर जूते साफ कर रहे हैं. उन्हीं से है गठबंधन, उन्हीं के जूते साफ करवाऊंगा इनसे, अल्लाह ने चाहा तो…” आजम खान ने दिया था ये बयान यह मामला रामपुर के भोट थाना क्षेत्र में 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज किया गया था. आरोप था कि चुनाव प्रचार के दौरान आयोजित एक जनसभा में आजम खान ने तत्कालीन डीएम को लेकर अभद्र और विवादित टिप्पणी की थी. चुनावी सभा में उन्होंने कहा था, “सब डटे रहो, यह कलेक्टर-पलेक्टर से मत डरियो. यह तनखैया है और तनखैयों से नहीं डरते. देखे हैं कई मायावती के फोटो, कैसे बड़े-बड़े अफसर रूमाल निकालकर जूते साफ कर रहे हैं. उन्हीं से गठबंधन है, उन्हीं के जूते साफ कराऊंगा इनसे, अल्लाह ने चाहा।  आजम खान के इस बयान के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई थी. आरोप था कि चुनावी मंच से दिए गए बयान से प्रशासनिक गरिमा को ठेस पहुंची और चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हुआ. इसके बाद भोट थाने में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. पुलिस ने मामले की जांच करते हुए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में कई गवाह पेश किए और बयान दर्ज कराए।  क्या था पूरा मामला आजम खान के इस बयान को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए शिकायत दर्ज कराई गई थी. मामला रामपुर के एमपी/एमएलए कोर्ट में चल रहा है. पिछली सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. आज इस मामले में कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा. आजम खान वर्तमान में रामपुर जेल में बंद हैं. उनके वकील और अभियोजन पक्ष दोनों ही आज कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे. यह मामला सात साल पुराना है और लंबे समय से अदालती प्रक्रिया में चल रहा था. आजम खान पर कई अन्य मामलों में भी मुकदमे चल रहे हैं, लेकिन इस विवादित बयान वाला केस खासा चर्चित रहा था।  आजम खान किस-किस मामले में दोषी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान पर कई मुकदमे दर्ज रहे हैं. अब तक उनके खिलाफ दर्ज मामलों में कई में उन्हें दोषी करार दिए गए हैं. दो पैन कार्ड फ्रॉड मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को 7 साल की जेल और 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है. अपील में रामपुर सेशन कोर्ट ने अप्रैल 2026 में भी सजा बरकरार रखी. इसी वजह से आजम खान अभी भी जेल में हैं. 2016 के डूंगरपुर कॉलोनी में जबरन बेदखली और लूट के मामले उन्हें 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी. फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में आजम खान, पत्नी तजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला को 7 साल की जेल हुई थी. हेट स्पीच और भड़काऊ भाषण मामले में उन्हें 2-3 साल की सजा मिल चुकी है. फर्जी हथियार लाइसेंस, सरकारी काम में बाधा डालने आदि मामलों में भी छोटी-बड़ी सजाएं मिल चुकी हैं। 

आज़म ख़ान को बड़ी राहत: सेना टिप्पणी केस में MP-MLA कोर्ट ने किया दोषमुक्त

लखनऊ  सेना पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में रामपुर एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने गुरुवार को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को बरी कर दिया। यह फैसला करीब 8 साल बाद आया है। बता दें कि यह मामला भाजपा विधायक आकाश सक्सेना की ओर से 30 जून 2017 को दर्ज कराया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आजम खान ने सेना के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। भाजपा विधायक ने कहा था कि 2017 में आजम खान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के दौरान सेना का मनोबल गिराने और समुदाय आधारित बयान दिया था, जिसके बाद रामपुर के थाना सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसी मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने गवाहों की गवाही और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद फैसला सुनाते हुए आजम खान को दोषमुक्त करार दिया है। आजम खान के अधिवक्ता मुरसलीन ने बताया कि इस मामले में कोर्ट में ट्रायल चला, लेकिन वादी पक्ष अपना आरोप साबित नहीं कर पाया। साक्ष्यों के अभाव में आजम खान को दोषी नहीं पाया गया और उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया। रामपुर स्पेशल कोर्ट से आए इस फैसले के बाद आजम खान को बड़ी राहत मिली। वहीं, सुबह से ही आजम खान पर फैसले को देखते हुए कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। कोर्ट परिसर में पुलिस बल तैनात था और सभी संबंधित पक्षों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। पुलिस लगातार पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए थी। वहीं, आजम खान इस समय दो पैन कार्ड मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद रामपुर जेल में बंद हैं। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम भी इसी मामले में सजा काट रहे हैं। वहीं, 2019 में नगर विधायक रहे आकाश कुमार सक्सेना ने मुकदमा दर्ज कराया था और अब्दुल्ला आजम पर दो पैन कार्ड रखने का आरोप लगाया था। इसके बाद मामले में अब्दुल्ला आजम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का भी रुख किया था, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए इस मामले में ट्रायल की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। पक्षों को सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा। इसके बाद जुलाई में याचिका को खारिज कर दिया था।

जेल में बंद आज़म ख़ान को न्यायालय से राहत, अमर सिंह मामला हुआ खत्म

रामपुर  समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह के परिवार पर अमर्यादित बयान देने के आरोप में फंसे समाजवादी के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद आजम खान को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। उधर, कोर्ट का निर्णय सुनते ही आजम खान ने अदालत का शुक्रिया अदा किया। मालूम हो कि आजम खान ने एक निजी चैनल को इंटरव्यू के दौरान राज्यसभा सदस्य रहे अमर सिंह की बेटियों को लेकर विवादित टिप्पणी कर दी थी। इस मामले में अमर सिंह ने नोएडा से लखनऊ तक रैली निकाली और डीजीपी के आदेश पर लखनऊ में मुकदमा दर्ज कराया था। चूंकि, इंटरव्यू जौहर विवि में दिया गया था, लिहाजा लखनऊ से केस रामपुर के अजीमनगर थाने में ट्रांसफर हो गया था। पुलिस ने बाद विवेचना आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया था। जिसका ट्रायल एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रहा है। मंगलवार को इस केस में अंतिम बहस पूरी हो गई थी। अदालत ने निर्णय के लिए 28 नवंबर की तारीख मुकर्रर की थी। इस मामले में जेल में बंद आजम खान को कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। शुक्रवार को जब सुनवाई शुरू हुई तो आजम खां को जेल प्रशासन पेशी पर लाने लगा। बताया जाता है कि आजम खान ने कैदियों को पेशी पर लाने वाली जेल की बड़ी गाड़ी में बैठने से इंकार कर दिया, जिस पर वीसी के जरिए आजम की पेशी हुई। जहां अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आजम को बरी कर दिया। कोर्ट में आजम ने जेल प्रशासन की शिकायत की। साथ ही अदालत का शुक्रिया अदा किया।  

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: आजम खान को रामपुर जेल में विशेष सुविधा, मेडिकल और क्लास अपग्रेड

 रामपुर समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद आजम खान को अदालत से बड़ी राहत मिली है. अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम को रामपुर जेल भेज दिया गया था. पूर्व में भी आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम दो बार जेल जा चुके हैं. पहली बार 27 महीने तक दोनों सीतापुर जेल में रहे और उसके बाद जब 23 महीने जेल में रहे तो दोनों को अलग-अलग रखा गया. आजम खान सीतापुर जेल में और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम हरदोई जेल में रहे. इस बार 17 नवंबर 2025 को सजा सुनाए जाने के बाद आजम खान ने वकीलों द्वारा अदालत में अर्जी लगाई थी कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है और उनके विरुद्ध 100 से अधिक मामले दर्ज हैं, 45 मुकदमे उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम खान के खिलाफ हैं, जिनमें से अधिकतर की सुनवाई रामपुर जिला अदालत में हो रही है. ऐसे में उन्हें रामपुर जिला जेल में ही रखा जाए और उनके साथ में उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम को भी रखा जाए, क्योंकि स्वास्थ्य खराब होने के चलते उन्हें एक मददगार की जरूरत है. आजम खान की दरखास्त का अभियोजन पक्ष ने विरोध किया. उनका कहना था कि अभियुक्त ने जानबूझकर अलग-अलग केस में अलग-अलग बीमारियां बताईं, उसका कोई प्रमाण भी पेश नहीं किया. जेल से ट्रांसफर प्रशासनिक व्यवस्था है. ऐसे में न्यायालय में उनकी यह दरखास्त चलने योग्य नहीं है. रामपुर एमपी एमएलए विशेष न्यायाधीश शोभित बंसल ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए रामपुर जेल अधीक्षक को आदेश दिया कि आजम खान के विरुद्ध अनेकों मामलों की सुनवाई रामपुर में होनी है. इसलिए आजम खान को और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम खान को रामपुर जेल में ही रखा जाए.  कोर्ट ने कहा कि बिना न्यायालय की अनुमति के उनको रामपुर से बाहर दूसरे जिले की जेल में नहीं ट्रांसफर किया जाए, साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि आजम खान को सुपीरियर क्लास जेल उपलब्ध कराई जाए, यानी क्लास वन की सुविधाएं दी जाएं. स्वास्थ्य को देखते हुए समुचित मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए. अदालत का आदेश आजम खान के लिए राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि रामपुर जेल उनके घर से नजदीक है.

आजम खान और बेटे पर पैन कार्ड केस में सजा का खतरा, कोर्ट ने दोनों को दोषी माना

लखनऊ रामपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है. पैन कार्ड मामले में सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को अदालत ने दोषी करार दिया है. अब्दुल्ला आजम खान पर आरोप था कि उन्होंने चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु पूरी न होने के बावजूद विधायक बनने के लिए कूटरचना की.  क्या हैं आरोप? आरोपों के मुताबिक उन्होंने अपनी उम्र अधिक दिखाने के लिए दूसरा पैन कार्ड बनवाया, जिसके पीछे आजम खान पर भी साजिश रचने का आरोप लगा. अदालत ने सभी पहलुओं की सुनवाई के बाद दोनों- आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान- को इस मामले में दोषी ठहराया है.  SC ने खारिज कर दी थी FIR रद्द करने की याचिका इससे पहले 6 दिसंबर को अब्दुल्ला आजम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा था. अदालत ने पासपोर्ट बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और दो पैन कार्ड रखने के आरोप में दर्ज एफआईआर रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी. बेंच ने कहा कि एफआईआर रद्द करने के लिए कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है और न ही कानूनी प्रक्रिया में दखल देने की कोई वजह दिखाई देती है. आरोप है कि अब्दुल्ला आजम ने पासपोर्ट के लिए गलत जन्मतिथि और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया. मुश्किल में आजम खान इसी मामले में राहत पाने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था. अब अदालत ने अब्दुल्ला आजम के साथ उनके पिता आजम खान को भी दोषी ठहराया है, जो हाल ही में जेल से बाहर आए हैं.  

जेल से लौटे आजम खान की पहली राजनीतिक चाल! अखिलेश से मिलकर बोले– ‘मेरा मुकाबला जंगलराज से’

लखनऊ   समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान ने शुक्रवार को लखनऊ में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात करीब 45 मिनट तक चली, जिसमें आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम भी मौजूद थे। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में आजम खान ने बिहार विधानसभा चुनाव और अपने निजी अनुभवों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह अब भी 'जिंदा और मजबूत' हैं, लेकिन 'जंगलराज' में नहीं जाना चाहते। 'मैं जंगलराज में नहीं जाना चाहता' – बिहार चुनाव पर आजम का बयान बिहार चुनाव में प्रचार को लेकर पूछे गए सवाल पर आजम खान ने कहा कि जाना चाहता हूं, पर असुरक्षित नहीं जाना चाहता। जंगलराज में नहीं जाना चाहता। उन्होंने आगे कहा कि बिहार में बादशाह से लेकर वजीर तक कह रहे हैं कि वहां जंगलराज है। जंगल में इंसान नहीं रहते। अगर मैं वहां अकेला चला गया तो शायद लौट न सकूं। मैं जबरदस्ती रेल की पटरी पर सिर नहीं रखूंगा। आजम खान ने यह भी कहा कि लोगों का कहना है बिहार में बदलाव आने वाला है — 'लोग कहते हैं तो ठीक ही कहते होंगे।' 'हमारे समाज का हाल वही है, मेरा वादा अब भी कायम है' आजम खान ने अपने जीवन के हालात बताते हुए कहा कि मेरे घर में कल भी जनरेटर नहीं था, आज भी नहीं है। और जब तक मेरे समाज के हर व्यक्ति के घर में जनरेटर नहीं होगा, मैं अपने घर में नहीं रखूंगा। उन्होंने कहा कि 50 साल की राजनीति के बाद भी वह अपनी सादगी नहीं छोड़ेंगे। मैं बस यह बताने आया था कि आज भी इस धरती पर कुछ लोग जिंदा हैं, जिनकी सहनशक्ति किसी पत्थर या पहाड़ से कम नहीं। 'अगर मैं लिखने बैठ गया तो कोई पढ़ नहीं पाएगा' – जेल के अनुभव पर आजम जेल में बीते समय पर सवाल पूछे जाने पर आजम खान ने कहा कि अगर मुझे वक्त मिला कि मैं कुछ लिख सकूं, तो दावे से कहता हूं — आप पढ़ नहीं पाएंगे। अखिलेश यादव से दूरी के सवाल पर उन्होंने भावुक होकर कहा कि अब दिल ही कहां रह गया है… कई लोग मुझसे मिलने के बाद रोए हैं। अब हम बिना दिल के काम कर रहे हैं।   'तनखइया' से लेकर 'मुर्गी चोरी' तक का तंज आजम खान ने अपने ऊपर दर्ज मामलों पर तंज कसते हुए कहा कि अगर तनखइया कहने पर मेरी सदस्यता जा सकती है, अगर मुर्गी चोरी के आरोप में 21 साल की सजा और 30 लाख का जुर्माना हो सकता है, तो दूसरे लोग क्यों माहौल खराब कर रहे हैं?  

अखिलेश से मिले आजम खान: बोले– मुलाकात में क्या बात हुई, खुद बताई पूरी कहानी

लखनऊ समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लखनऊ में मुलाकात की। मुलाकात के बाद आजम खां ने खुद बताया कि अखिलेश यादव से उनकी किन मुद्दों पर बात हुई। आजम खां 23 महीने बाद 23 सितंबर को सीतापुर जेल से रिहा हुए थे। इसके बाद अखिलेश यादव ने रामपुर जाकर बंद कमरे में आजम से मुलाकात की थी। दो घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद आजम खां ने तब कुछ भी नहीं कहा था। अब जेल से निकलने के 44 दिन बाद उन्होंने लखनऊ में अखिलेश यादव से मुलाकात की। मुलाकात के बाद आजम खां ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज की हमारी मुलाकात का मकसद ये साबित करना था कि इतनी ऐतिहासिक नाइंसाफी के बाद भी कुछ लोग ऐसे हैं जो ये साबित कर सकें कि आज के दौर में भी कुछ लोग ऐसे हैं जिनकी बर्दाश्त करने की क्षमता किसी पत्थर और पहाड़ से कहीं ज्यादा है। मैं यहां पर मेरे साथ, मेरे परिवार के साथ और मेरे शहर के साथ जो कुछ हुआ उसकी दास्तान लेकर आया था। हमारे कई और साथी अभी भी जेलों में हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम जब भी आपस में मिलते हैं तो उन दर्द भरे लम्हों को गवाह बनाते हैं जिन्हें आने वाली पीढ़ियां याद रखें कि किसी के साथ ऐसा भी हुआ था। उन्होंने कहा कि जो मेरे साथ हुआ उससे मीडिया के द्वारा बनाई गई मेरी छवि में भी शायद बदलाव आया है और आप लोग शायद मुझे समझ पा रहे हैं। वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मुलाकात की तस्वीर एक्स पर पोस्ट की। इस तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा कि न जाने कितनी यादें संग ले आए। जब वो आज हमारे घर पर आए! ये जो मेलमिलाप है यही हमारी साझा विरासत है। इसके पहले आजम खां ने गुरुवार को सपा के कई अन्य नेताओं से भी मुलाकात की थी और कई मुद्दों पर चर्चा की।

अरविंद राजभर का बड़ा बयान: आज़म खान को सुभासपा में शामिल होने का ऑफर, कहा– उनका सम्मान नहीं हुआ

लखनऊ  आजम खान उत्तर प्रदेश की सियासी सुर्खियों में लगातार बने हुए हैं। भविष्य में उनकी राजनीति किस दिशा में जाएगी इसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। इस बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर ने उन्हें अपनी पार्टी जॉइन करने का ऑफर देकर एक नई हलचल मचा दी है। अरविंद राजभर ने कहा है कि आजम खान जन नेता हैं और उनके जैसे जन नेता की उत्तर प्रदेश को जरूरत है। हम चाहते हैं कि बाबूजी (ओमप्रकाश राजभर) के पूरी तरह स्वस्थ होते ही रामपुर जाकर उनसे (आजम खान) से मुलाकात करेंगे। अरविंद राजभर ने यह भी जोड़ा कि यदि आजम खान सुभासपा में आना चाहेंगे तो उन्हें बहुत बड़ा सम्मान दिया जाएगा। अरविंद राजभर ने कहा कि बाबूजी (ओमप्रकाश राजभर) ठीक हो जाएं तो हम खुद ही उन्हें लेकर रामपुर जाएंगे और आजम खान साहब से भेंट करेंगे। ऐसे नेताओं का बायकॉट नहीं करना चाहिए। ऐसे नेताओं से संवाद जारी रहना चाहिए। अरविंद ने कहा कि आजम खान जेल के अंदर थे तब तक अखिलेश यादव को चिंता नहीं थी। वह जब सीतापुर जेल में थे तो अखिलेश यादव उन्हें सिरदर्द मानते थे। वह उन्हें साइड करना चाहते थे। सिर्फ मुस्लिम वोट बैंक की चिंता में अखिलेश यादव आजम खान के घर गए थे। सुभासपा नेता और पार्टी प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर ने कहा कि आजम खान का समाजवादी पार्टी से मन भर गया है। समाजवादी पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं है। आजम खान स्वतंत्र हैं। निर्णय उन्हें ही लेना है। अरविंद राजभर ने बिहार चुनाव पर कहा कि हम लोग यूपी में एनडीए के सहयोगी हैं। बिहार में भी सहयोग करना चाहते हैं लेकिन यदि वहां सीट नहीं मिलेगी तो सुभासपा वहां अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी। जिन लोगों को सुभासपा के बारे में भ्रम है उन्हें जवाब दिया जाएगा।  

आजम खां से मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने खोला राजनैतिक मंथन, कहा- ‘सब कुछ हो सकता है’

लखनऊ अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य के शनिवार को रामपुर पहुंचने पर राजनीतिक गलियारे में खलबली मच गई। रामपुर में उन्होंने समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में प्रमुख रहे आजम खां से उनके आवास पर भेंट की। मुलाकात के संबंध में स्वामी प्रसाद मौर्य ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया। आजम खां से मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने आजम के खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष भावना वाला बताने के साथ सरकार बनने पर कार्रवाई करने वाले को परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। उन्होंने कहा कि आजम खां पर राजनीतिक द्वेष भावना से कार्रवाई की गई है। स्वामी प्रसाद ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर भी तंज कसा और कहा कि इस सरकार में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। बेरोजगारी तो चरम सीमा पर है। सरकार का प्राइमरी स्कूल बंद करने का फैसला बहुत ही निंदनीय है। उन्होंने बरेली में बीते दिनों हुए बवाल के बारे में कहा कि भाजपा के इशारे पर तो यह सारा उपद्रव सोची-समझी साजिश के तहत कराया गया था। स्वामी प्रसाद ने कहा कि भाजपा तो हिंदू और मुस्लिम की राजनीति करती है। योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में ‍उत्तर प्रदेश में मुसलमान को लगातार टारगेट किया जा रहा है। यहां पर तो मस्जिदों को बुलडोजर से ध्वस्त किया जा रहा है। अखिलेश और आजम खां की मुलाकात पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव बेहद अवसरवादी हैं और आजम साहब से भेंट करने के बाद उनका संवेदनशील होना को घड़ियाली आंसू जैसा है। इससे पहले स्वामी प्रसाद मौर्य का आजम खां के आवास के बाहर पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खां ने स्वागत किया। स्वामी प्रसाद दोपहर एक बजकर 15 मिनट पर आजम खान के आवास टंकी नंबर पांच, घेर मीर बाज खान पहुंचे। सपा, बसपा और भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ आजम खां ने घर के अंदर अकेले में मुलाकात की।