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कोरबा: ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम से कार्यालयों में अनुशासन और पारदर्शिता में सुधार, विभागों में समयपालन की आदत बनी

कोरबा ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था से बढ़ी कार्यालयीय अनुशासन और पारदर्शिता, सभी विभागों में समयपालन का दिख रहा असरऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था से बढ़ी कार्यालयीय अनुशासन और पारदर्शिता, सभी विभागों में समयपालन का दिख रहा असर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा एक जनवरी 2026 से समस्त शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आधार आधारित ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य किए जाने के बाद जिले के सभी कार्यालयों में उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। कलेक्ट्रेट कोरबा में स्वयं कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से पूर्व ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर कार्यालय पहुंच रहे हैं। कलेक्टर के समयपालन का प्रत्यक्ष प्रभाव अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी दिखाई दे रहा है और अब अधिकांश कर्मचारी समय से पूर्व कार्यालय पहुंचने लगे हैं। ऑनलाइन उपस्थिति सिस्टम के लागू होने के बाद विभागीय कार्यों में निर्धारित समय पर गति आने लगी है। अधिकारियों-कर्मचारियों को कार्यालय आने एवं जानेकृदोनों समय अपनी उपस्थिति मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से दर्ज करानी अनिवार्य कर दी गई है। कार्यालयों के निर्धारित लोकेशन को आधार बेस सिस्टम में फीड किया गया है, जिससे उपस्थिति केवल कार्यालय परिसर के आसपास रहते हुए ही लगाई जा सकती है। इससे अनाधिकृत अनुपस्थिति, देरी से आने तथा समय पूर्व कार्यालय छोड़ने जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है। शासन की इस पारदर्शी व्यवस्था की सर्वत्र सराहना हो रही है। आम नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों की यह प्रमुख शिकायत रहती थी कि कर्मचारी समय पर उपस्थित नहीं रहते और कई अधिकारी दौरे के नाम पर कार्यालय से अनुपस्थित पाए जाते हैं। ऑनलाइन अटेंडेंस के चलते अब ऐसी शिकायतों में भी स्पष्ट कमी आई है और कार्य संस्कृति में सकारात्मक सुधार देखा जा रहा है। शहर के आमनागरिक परमेश्वर यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बेहतरीन पहल की है। यह व्यवस्था बहुत पहले लागू हो जानी चाहिए थी। अस्पताल, तहसील और स्कूल सभी जगह स्थिति खराब होने की शिकायत रहती है। सरकारी अस्पताल में समय पर डॉक्टर नहीं आते हैं, नर्स भी नहीं रहती। तहसील में बाबू नहीं आया होता है और अन्य कार्यालयों में भी किसी काम से जाने पर मालूम होता है कि वे नहीं हैं। अब ऑनलाइन अटेंडेंस से व्यवस्था में सुधार होगा। उनकी मांग है कि सभी ऑफिस में सीसीटीवी भी लगानी चाहिए। इस संबंध में जिला जनसंपर्क अधिकारी श्री कमलज्योति ने बताया कि आधार बेस ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था न केवल समयपालन को बढ़ावा देती है, बल्कि विभागीय कार्यों की निरंतरता एवं पारदर्शिता को भी सुदृढ़ करती है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा नियुक्त अधिकारियों-कर्मचारियों का दायित्व है कि वे निर्धारित समयानुसार कार्यालय पहुंचे और आमजन से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करें। पीआरओ कमलज्योति ने यह भी कहा कि शासन की यह पहल अत्यंत सराहनीय है और इसे और अधिक कड़ाई से लागू किए जाने की आवश्यकता है। जो अधिकारी-कर्मचारी बिना ठोस कारण के समय पर उपस्थित नहीं होते, उनके प्रति विभागीय कार्रवाई तथा आवश्यक होने पर वेतन कटौती जैसे प्रावधान लागू किए जाने चाहिए। इससे समयपालन करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन मिलेगा और लापरवाह कर्मचारियों में भी जवाबदेही की भावना विकसित होगी। उन्होंने विशेष रूप से स्कूलों, अस्पतालों, तहसीलों तथा आमनागरिकों से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित सेवाओं वाले कार्यालयों में इस व्यवस्था को और अधिक कठोरता से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।

जबलपुर हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, प्रोबेशन पीरियड के कर्मचारियों को मिलेगा पूरा वेतन

  जबलपुर जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट के द्वारा प्रोबेशन पीरियड में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन में कटौती को अवैध बताते हुए आदेश जारी किया है कि जिन कर्मचारियों का वेतन काटा गया है। उस राशि को एरियर सहित वापस किया जाए। GAD के सर्कुलर को रद्द किया हाईकोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के द्वारा 12 दिसंबर 2019 को जारी सर्कुलर को रद्द कर दिया है। GAD के द्वारा पहले नई भर्तियों में 70%, दूसरे वर्ष 80 प्रतिशत और तीसरे साल 90 प्रतिशत वेतन देने का प्रावधान किया गया था। दरअसल, गुरुवार को जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोट की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार के द्वारा जब कर्मचारियों से 100 प्रतिशत काम लिया जा रहा है, तो प्रोबेशन के नाम पर सैलरी में कटौती ठीक नहीं है। कोर्ट के द्वारा स्पष्ट किया गया कि प्रोबेशन पीरियड में समान रूप से काम के लिए समान वेतन का सिद्दांत है। जो कि पूरी तरह लागू होगा और काम पूरा करने पर पूरा वेतन देना अनिवार्य है। पैसा लौटाने के आदेश जारी कोर्ट की ओर से स्पष्ट किया गया कि प्रोबेशन पीरियड में वेतन की गई रिकवरी पूरी तरह अवैध है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों को इस अवधि में पूरा वेतन नहीं दिया गया। कर्मचारियों को शत-प्रतिशत वेतन का लाभ दिया जाएगा और कटी हुई राशि को एरियर के रूप में लौटाया जाएगा। 

उपभोक्ता संरक्षण क्षेत्र में काम करने वालों को मिलेगा सम्मान, 31 जनवरी तक कर सकते हैं आवेदन

उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले संगठन/व्यक्तियों को किया जायेगा पुरस्कृत 31 जनवरी तक कर सकते हैं आवेदन भोपाल  विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 15 मार्च 2026 के अवसर पर उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों /व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने के लिये राज्य एवं संभाग स्तरीय पुरस्कार दिये जायेंगे। आयुक्त, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण कर्मवीर शर्मा ने जानकारी दी है कि पुरस्कारों के लिये संगठनों/व्यक्तियों का चयन एक जनवरी से 31 दिसंबर 2025 तक की अवधि में की गई गतिविधियों के आधार पर किया जायेगा। राज्य स्तरीय तीन पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिये जायेंगे। प्रथम पुरस्कार 1,11,000 रूपये, द्वितीय पुरस्कार 51,000 रूपये और तृतीय पुरस्कार 25,000 रूपये का दिया जायेगा। संभागों में भी तीन पुरस्कार दिये जायेंगे। इसमें प्रथम पुरस्कार 21,000 रूपये, द्वितीय पुरस्कार 11,000 रूपये और तृतीय पुरस्कार 5000 रूपये का होगा। राज्य स्तरीय एवं संभाग स्तरीय आवेदन पृथक-पृथक स्वीकार किये जावेंगे। राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिये आवेदन के मुख्य पृष्ठ पर 'राज्य स्तरीय पुरस्कार वर्ष 2025-26 हेतु' एवं 'संभाग स्तरीय पुरस्कार वर्ष 2025-26 हेतु सुस्पष्ट रूप से लिखा जाये। आवेदन का प्रारूप 'क' खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की वेबसाईट www.food.mp.gov.in पर उपलब्ध है। आवेदन 31 जनवरी 2028 तक संबंधित कार्यालय जिला कलेक्टर (खाद्य) में स्वीकार किये जायेंगे। इस संबंध में अतिरिक्त जानकारी के लिये संबंधित कार्यालय जिला कलेक्टर (खाट्य) से संपर्क किया जा सकता है। विगत वर्ष राज्य स्तरीय प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार प्राप्त संस्थाओं के आवेदन पर चयन समिति द्वारा विचार नहीं किया जायेगा।  

पूर्व मंत्री बिना पात्रता के बंगलों में डटे, सरकार ने 13 जनवरी तक खाली करने का दिया नोटिस

भोपाल  मध्यप्रदेश में कई पूर्व मंत्री और अधिकारी सरकारी आवास खाली करने को तैयार नहीं हैं। इसे देखते हुए संपदा संचालनालय ने अब सख्ती शुरू कर दी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि नियम सबके लिए बराबर हैं, चाहे वे अपनी ही पार्टी के बड़े नेता क्यों न हों। बिना पात्रता के सरकारी बंगलों का आनंद ले रहे पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों और आईएएस अधिकारियों को अब 'बेदखली' का डर सताने लगा है। अब सरकार ने पात्रता खत्म होने के बावजूद सरकारी बंगलों में जमे पूर्व मंत्रियों और आईएएस अफसरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक बंगला खाली करने का आखिरी अल्टीमेटम दिया गया है, अन्यथा बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही 4 आईएएस और कई पूर्व मंत्रियों को भी नोटिस जारी कर भारी जुर्माने की चेतावनी दी गई है। पद नहीं लेकिन बंगला बरकरार पूर्व राजस्व मंत्री रामपाल सिंह, पूर्व गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा, पूर्व सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया 2023 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। इसके बावजूद वे बंगले में दो साल से डटे हुए हैं। वहीं, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया भी वर्तमान में विधायक न होने के बावजूद मंत्री रहते मिले बंगले को खाली नहीं कर रहीं हैं। ऐसी ही स्थिति भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की है। सांसद न होने के बाद भी वे सरकारी बंगले में डटी हुई हैं। संपदा संचालनालय से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रभात झा के परिवार को पहले ही 6 जनवरी को नोटिस दिया गया था, जबकि रामपाल को इससे पहले नोटिस दिया जा चुका है। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि पात्रता समाप्त होने के बाद किसी भी स्थिति में सरकारी आवास पर कब्जा नहीं रहने दिया जाएगा। मंत्रियों वाले बंगलों में रह रहे विधायक     डॉ. प्रभुराम चौधरी (विधायक सांची)     भूपेन्द्र सिंह(विधायक खुरई)     गोपाल भार्गव (विधायक रहली)     मीना सिंह (विधायक मानपुर) भारी-भरकम किराया वसूली होगी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा के बाद भी बंगला खाली नहीं किया गया तो भारी भरकम किराया वसूला जाएगा। नियमों के मुताबिक, पहले तीन महीने तक सामान्य किराया, इसके बाद अगले तीन महीनों के लिए 10 गुना किराया और इसके बाद भी आवास खाली नहीं होने पर 30 गुना तक किराया वसूलने का प्रावधान है। विधि विभाग ने इस तरह की वसूली को मंजूरी दे दी है।   सरकारी बंगलों से कब्जा हटाने के लिए एक्शन  राजधानी भोपाल के पॉश इलाकों में स्थित सरकारी बंगलों पर अवैध रूप से काबिज रसूखदारों के खिलाफ मोहन सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। 2023 के विधानसभा चुनाव में हारने वाले पूर्व मंत्रियों और कार्यकाल पूरा कर चुके पूर्व सांसदों ने अभी तक अपने सरकारी आवास नहीं छोड़े हैं। अब सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय पर बंगले खाली नहीं हुए, तो पुलिस बल का प्रयोग कर सामान बाहर कर दिया जाएगा। प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक का अल्टीमेटम बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 74 बंगले स्थित बी-टाइप आवास खाली करने के लिए 13 जनवरी तक का समय दिया गया है। नोटिस में साफ कहा गया है कि इस तारीख के बाद प्रशासन 'बल प्रयोग' करेगा। हालांकि, उनके बेटे तुशमुल झा का कहना है कि वे खुद ही बंगला खाली करने की प्रक्रिया में हैं और यह एक सहज प्रक्रिया है। पूर्व मंत्री रामपाल सिंह को नोटिस इधर, पूर्व मंत्री रामपाल सिंह 2023 में चुनाव हार गए थे, लेकिन 2 साल बाद भी उन्होंने लिंक रोड-1 स्थित अपना सरकारी बंगला (C-15) खाली नहीं किया है। इस मामले में उनका कहना है कि उन्होंने सरकार से थोड़ा समय और मांगा है। पद नहीं फिर भी सरकारी आवास पर डेरा मध्यप्रदेश में नेताओं की कुर्सी तो चली गई, लेकिन नेता सरकारी बंगलों का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं। पूर्व राजस्व मंत्री रामपाल सिंह, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और पूर्व सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया जैसे दिग्गज नेता 2023 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं, लेकिन करीब दो साल बीत जाने के बाद भी इन्होंने सरकारी बंगलों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। यही हाल पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया का है, जो वर्तमान में विधायक भी नहीं हैं, फिर भी मंत्री रहते आवंटित हुए आवास में रह रही हैं। भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की स्थिति भी अलग नहीं है; संसद की सदस्यता खत्म होने के बाद भी उन्होंने सरकारी बंगला खाली नहीं किया है। सरकार सख्त, कब्जेदारों को नोटिस संपदा संचालनालय के मुताबिक, कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 6 जनवरी को ही नोटिस थमाया जा चुका है, वहीं रामपाल सिंह को भी पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है। मोहन सरकार ने अब कड़ा रुख अख्तियार करते हुए साफ कर दिया है कि पात्रता खत्म होने के बाद सरकारी आवास पर किसी भी तरह का 'अवैध कब्जा' बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियम स्पष्ट हैं—पद गया, तो बंगला भी छोड़ना होगा। 30 गुना तक किराया वसूलने को मंजूरी विधि विभाग ने सख्त नियम लागू करते हुए भारी-भरकम किराए की वसूली को मंजूरी दे दी है। नियमों के मुताबिक, पात्रता खत्म होने के शुरुआती तीन महीनों तक तो सामान्य किराया लगेगा, लेकिन इसके बाद भी बंगला खाली नहीं हुआ तो अगले तीन महीनों के लिए 10 गुना किराया वसूला जाएगा। जब छह महीने बाद भी कब्जा बरकरार रहा, ऐसी स्थिति में रसूखदारों को 30 गुना ज्यादा हर्जाना भरना होगा। सरकार के मकसद साफ है—या तो समय से बंगला खाली कर दें, वरना लाखों के जुर्माने के लिए तैयार रहें। IAS अफसरों पर भी गिरी गाज प्रशासन ने सुधीर कोचर, अदिति गर्ग, रत्नाकर झा और निधि सिंह समेत 4 आईएएस और 3 अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी बेदखली का नोटिस थमाया है। विधायक रह रहे मंत्रियों वाले बंगलों में सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी, भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव और मीना सिंह जैसे विधायक पात्रता से ऊपर की श्रेणी (B और C टाइप) के बंगलों में रह रहे हैं। 7 अफसरों को भी बंगला खाली करने … Read more

मध्य प्रदेश में कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक, एस्मा एक्ट लागू, 2 महीने तक अवकाश नहीं ले सकेंगे सरकारी कर्मचारी

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी शिक्षक अगले दो महीने तक छुट्टियां नहीं ले सकेंगे. मोहन यादव सरकार ने शासकीय शिक्षकों की छुट्टी पर अब रोक लगा दी है. सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर सरकारी स्कूलों में कार्यरत साढ़े तीन लाख से अधिक शिक्षकों पर अतिआवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) लागू कर दिया है. ऐसे में माध्यमिक शिक्षा मंडल के निर्देशों के तहत 7 फरवरी से 13 मार्च 2026 तक चलने वाली परीक्षाओं के दौरान शिक्षकों की छुट्टियों पर पूर्ण रोक रहेगी. इस अवधि में शिक्षक धरना-प्रदर्शन या किसी भी तरह के आंदोलन में भी शामिल नहीं हो सकेंगे. बोर्ड परीक्षा के दौरान इसलिए लगाई गई एस्मा माध्यमिक शिक्षा मंडल के रजिस्ट्रार मुकेश मालवीय ने बताया, '' हर बार की तरह इस बार भी बोर्ड परीक्षाओं के दौरान एस्मा के निर्देश जारी किए गए हैं. इस दौरान शिक्षकों की छुट्टियों पर रोक रहेगी. वहीं बोर्ड परीक्षा संपन्न होने तक शिक्षक धरना प्रदर्शन भी नहीं कर सकेंगे. हालांकि, स्वास्थ्य और आपातकालीन परिस्थितियों में शिक्षकों की छुट्टियों पर विचार किया जा सकेगा.'' उन्होंने आगे कहा, '' बोर्ड परीक्षा के दौरान सभी परीक्षा केंद्रों पर पर्यवेक्षक, केंद्राध्यक्ष, उप केंद्राध्यक्ष समेत स्टाफ की ड्यूटी रहेगी. ऐसे में अनावश्यक छुट्टियों और धरना प्रदर्शन के कारण परीक्षाएं प्रभावित न हों. इसके लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बोर्ड परीक्षाओं के दौरान एसेंशियल सर्विस मेंटेनेंस एक्ट यानी एस्मा लागू किया है.'' 25 फरवरी से शुरू होंगी एमपी बोर्ड की 10-12वीं परीक्षाएं मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 25 फरवरी 2026 से शुरू होंगी. इसके लिए प्रदेशभर में कुल 3,856 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. इस वर्ष दोनों ही परीक्षाओं में करीब 16 लाख परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे. माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपी बोर्ड) ने परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और अनुशासित बनाने के लिए केंद्रों की सूची पहले ही जारी कर दी है. बोर्ड ने परीक्षा संचालन में किसी भी तरह की लापरवाही रोकने के लिए नई तकनीक का सहारा भी लिया है. इसके तहत सभी परीक्षा केंद्रों की निगरानी मोबाइल एप के माध्यम से की जाएगी, जिससे रियल टाइम रिपोर्टिंग और तत्काल कार्रवाई संभव हो सकेगी. संवेदनशील केंद्रों पर कड़ी निगरानी, संख्या में आई कमी एमपी बोर्ड परीक्षा में इस बार 488 परीक्षा केंद्रों को संवेदनशील और अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया है, जहां विशेष निगरानी की जाएगी. पिछले वर्ष 562 केंद्र संवेदनशील श्रेणी में थे, जो इस बार घटकर 488 रह गए हैं. परीक्षा केंद्रों की संख्या भी पिछले साल के 3,887 से घटकर 3,856 हो गई है. बोर्ड का कहना है कि बेहतर प्रबंधन और सख्त निगरानी व्यवस्था के कारण संवेदनशील केंद्रों की संख्या में कमी आई है. इन केंद्रों पर अतिरिक्त निगरानी दल और प्रशासनिक सतर्कता सुनिश्चित की जाएगी.

36 हजार करोड़ की लागत से एमपी में बनेंगे 6 एक्सप्रेस-वे और प्रगतिपथ, 3368 किलोमीटर लंबी परियोजना

भोपाल   मध्यप्रदेश में आने वाले समय में छह प्रमुख एक्सप्रेस वे और प्रगतिपथ का निर्माण किया जाएगा। 36 हजार 483 करोड़ रुपए से इनका निर्माण किया जाएगा। इनके निर्माण से आने वाले समय में शहरों के बीच की दूरियां घटेंगी और आवागमन का समय कम हो जाएगा। बढ़ते यातायात से भी निजात मिलेगी। इन सभी परियोजनाओं का निर्माण जून 2028 तक किया जाएगा। प्रदेश में 3368 किलोमीटर लंबी इन विकास पथ और एक्सप्रेस वे का निर्माण किया जाएगा।     विंध्य में 676 किलोमीटर लंबा विंध्य एक्सप्रेस-वे बनाया जाएगा। इसके निर्माण पर 3809 करोड़ रुपए की लागत आएगी। यह एक्सप्रेस वे जून 2028 तक पूरा होगा।     नर्मदा प्रगतिपथ 867 किलोमीटर लंबाई में बनेगा। इसके निर्माण पर 5299 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। नर्मदा प्रगतिपथ को जून 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य दिया गया है।     मालवा-निमाड़ विकासपथ साढ़े चार सौ किलोमीटर लंबाई का होगा और इसके निर्माण पर 7972 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसे दिसंबर 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा।     अटल प्रगतिपथ 12 हजार 227 करोड़ रुपए खर्च कर 299 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में तैयार किया जाएगा। इसका काम शुरु हो गया है और इसे शीघ्रता से पूरा किया जाएगा।     बुंदेलखंड विकासपथ में 330 किलोमीटर लंबे मार्ग का निर्माण 3357 करोड़ से किया जाएगा। इसे जून 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।     मध्य भारत विकास पथ के निर्माण पर 3819 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें 746 किलोमीटर लंबी सड़क तैयार की जाएगी। इसका निर्माण जून 2028 तक पूरा होगा। कम होगा यातायात का दबाव इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश में तेज, सुरक्षित और आधुनिक कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी साथ ही औद्योगिक, कृषि और सामाजिक गतिविधियों को भी गति मिल सकेगी। लंबी-चौड़ी सड़कों के निर्माण से यातायात का दबाव कम होगा। कई गांव और शहरों को जोड़कर उनके बीच लगने वाली दूरियां कम की जाएंगी। सड़कों की कनेक्टिविटी से प्रदेश में औद्योगिक विकास तेजी से होगा। निवेशक रुचि लेंगे और नई औद्योगिक परियोजनाओं का भी इन एक्सप्रेस वे के आसपास शुरु किया जा सकेगा जिससे पर्याप्त मात्रा में रोजगार भी मिलेगा और निवेश भी बढ़ेगा।

खेलो एमपी यूथ गेम्स में इस बार लोकल खेलों का रंग, पिट्ठू से मलखंब तक के मुकाबले 12 जनवरी से छिंदवाड़ा में

छिन्दवाड़ा   खेलो एमपी यूथ गेम्स में पहली बार बचपन में खेले जाने वाले खेलों के मुकाबले देखने मिलेंगे. छिंदवाड़ा जिले में 12 जनवरी से शुरू हो रहे यूथ गेम्स में पहली बार पिट्ठू और रस्साकसी जैसे पारंपरिक खेलों को शामिल किया गया है. आयोजन की तैयारियों की जिम्मेदारी देने के लिए गुरुवार को कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने कलेक्टर कार्यालय सभा कक्ष में अधिकारी कर्मचारियों की बैठक ली, जिसमें यूथ गेम्स से जुड़े आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए. 21 खेलों को किया गया शामिल,पिट्ठू-रस्साकसी भी शामिल कलेक्टर हरेन्द्र नारायण ने बैठक में बताया गया कि म.प्र.शासन खेल और युवा कल्याण विभाग के निर्देशानुसार छिंदवाड़ा में "खेलो एमपी यूथ गेम्स" का आयोजन किया जा रहा है. इसके तहत ब्लॉक स्तरीय चयन प्रक्रिया व जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा. खेलो एमपी यूथ गेम्स के अंतर्गत 21 खेल – एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, बैडमिन्टन, बॉक्सिग, पिट्ठू, क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, जूडो, कबड्डी, खो-खो, मलखम्ब, तैराकी, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, टेबिल टेनिस, योगासन, वॉलीबॉल, लॉन टेनिस, रस्साकसी व शतंरज के मुकाबलों का आयोजन किया जाएगा. इसके साथ 7 खेल – ताईक्वांडो, फेंसिंग, रोइंग, क्याकिंग-कैनोइंग, शूटिंग, आर्चरी, थ्रो बॉल के लिए खिलाड़ी सीधे राज्य स्तर के लिए चयनित होंगे. 12 जनवरी से होगी यूथ गेम्स की शुरुआत खेलो एम.पी. यूथ गेम्स के तहत जिले में ब्लॉक स्तरीय चयन प्रतियोगिता का आयोजन 12 से 15 जनवरी तक और जिला स्तरीय आयोजन 16 से 20 जनवरी तक किया जाएगा. जिला खेल अधिकारी केके चौरसिया ने बताया, '' सभी विकासखंडो में खेलो एमपी यूथ गेम्स के तहत 21 खेलों में चयन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी और जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता में सभी ब्लाकों से चयनित गाइड लाइन के अनुसार जिला खेल संघों से रजिस्टर्ड खिलाड़ी भाग लेंगे. खिलाड़ी ऑनलाइन,ऑफलाइन रजिट्रेशन कर संबंधित ब्लॉक युवा समन्वयक से सम्पर्क कर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. कलेक्टर ने दी जिम्मेदारी डेट की गई फिक्स बैठक में सभी खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए स्थान और तारीखों का चयन किया गया और आयोजन के लिए सभी पीटीआई व खेल शिक्षकों की ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए गए. कलेक्टर ने कहा, '' प्रतियोगिताओं के आयोजन के दौरान खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए. आयोजन स्थल पर साफ पीने के पानी एवं समुचित स्वच्छता सुनिश्चित की जाए. एम्बुलेंस व फर्स्ट ऐड किट भी तैयार रहे.'' वहीं, पुलिस अधीक्षक अजय पांडे ने कहा, '' विभिन्न स्तर पर खिलाड़ियों के चयन में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती जाएगी.''

IRCTC E-Catering: अब ट्रेन में ही मिलेगा नामी ब्रांड का खाना, वेस्ट जोन का है बड़ा योगदान

भोपाल अब ट्रेन यात्रा सिर्फ मंजिल तक पहुंचने का सफर नहीं रही, बल्कि स्वाद और सुविधा का नया अनुभव बन चुकी है। पहले लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों, खासकर युवाओं को सफर के दौरान अच्छे और मनपसंद खाने की तलाश रहती थी, लेकिन उनके पास ट्रेन का तयशुदा खाना ही एकमात्र विकल्प होता था, लेकिन भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम लिमिटेड (आईआरसीटीसी) की ई-कैटरिंग सेवा ने आनबोर्ड खानपान के अनुभव को पूरी तरह बदल दिया है। अब यात्रियों को स्टेशन के स्टाल्स पर भीड़ लगाने या सीमित विकल्पों से समझौता करने की जरूरत नहीं पड़ती। वे अपनी सीट पर बैठे-बैठे विश्वसनीय ब्रांडों और अधिकृत रेस्तरां से अपनी पसंद का भोजन आर्डर कर सकते हैं। अब यह मजबूरी खत्म हो चुकी है। भोपाल मंडल में यह सेवा तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जहां शहर के 12 वेंडरों को भी ई-कैटरिंग सेवा से जोड़ा गया है। पहले आर्डर एसएमएस और कॉल सेंटर से लिए जाते थे आइआरसीटीसी ई-कैटरिंग सेवा की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी। पहले आर्डर एसएमएस और काल सेंटर से लिए जाते थे, लेकिन अब यह एक पूरी तरह डिजिटल प्लेटफार्म बन चुकी है। यात्री वेबसाइट, फूड आन ट्रैक ऐप, टोल-फ्री नंबर 1323 और व्हाट्सएप के जरिए आर्डर कर सकते हैं। प्री-पेड और कैश आन डिलीवरी दोनों विकल्प हैं। ओटीपी सिस्टम से भोजन सुरक्षित रूप से सीट तक पहुंचाया जाता है। देशभर के 300 से अधिक स्टेशनों पर उपलब्ध है ई-कैटरिंग सेवाएं वर्तमान में आइआरसीटीसी की ई-कैटरिंग सेवाएं देशभर के 300 से अधिक स्टेशनों पर उपलब्ध हैं। भोपाल से गुजरने वाले प्रमुख रूट्स पर यात्रियों को भारतीय, दक्षिण भारतीय, चीनी, कान्टिनेंटल और बिरयानी जैसे लोकप्रिय व्यंजनों के कई विकल्प मिल रहे हैं। आईआरसीटीसी ने देश के 11 नामी फूड ब्रांडों और अग्रणी एग्रीगेटर्स के साथ साझेदारी की है। इसके अलावा 15 या उससे अधिक यात्रियों के लिए बल्क आर्डर सुविधा भी है, जिसमें कस्टमाइज्ड मेनू और किफायती दरों पर सीट तक डिलीवरी की जाती है। रोज 1.20 लाख भोजन हो रहे बुक देशभर में रोज करीब 1.20 लाख भोजन आईआरसीटीसी ई-कैटरिंग से बुक हो रहे हैं। इसमें वेस्ट जोन का बड़ा योगदान है, जहां से लगभग 35,000 मील रोजाना आर्डर होते हैं। भोपाल जैसे शहरों में यात्रियों को अब सीट से उठे बिना साफ और अच्छा खाना मिल जाता है, जिससे यात्रा ज्यादा आरामदायक बन गई है। आर्डर न मिलने पर मिलता है रिफंड आईआरसीटीसी की ई-कैटरिंग सेवा में यात्रियों की शिकायतों का समाधान बहुत आसान है। अगर खाना गलत आ जाए या डिलीवरी में देरी हो, तो यात्री 1323 हेल्पलाइन, मोबाइल ऐप या वॉट्सएप नंबर 91-8750001323 पर तुरंत शिकायत दर्ज कर सकते हैं। आईआरसीटीसी टीम जांच कर जल्दी समाधान करती है और जरूरत पड़ने पर रिफंड या सही आर्डर उपलब्ध कराती है। स्टेशन पर उतरकर खाना ढूंढना पड़ता था     मैं ज्यादातर सफर ट्रेन से करती हूं। मैंने देखा है कि पहले ट्रेन में साफ और पसंद का खाना मिलना मुश्किल होता था। स्टेशन पर उतरकर भीड़ में खाना ढूंढना पड़ता था। अब आईआरसीटीसी ई-कैटरिंग से सीट पर ही गर्म, ताजा और भरोसेमंद भोजन मिल जाता है, जिससे यात्रा काफी आसान और आरामदायक हो गई है। – निशा कश्यप, छात्रा     खाना सीधे सीट तक दिया जाता है     आईआरसीटीसी ई-कैटरिंग में यात्रियों की सेहत और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। सभी वेंडर्स के पास एफएसएसएआई लाइसेंस होता है और साफ-सफाई के नियमों का पालन किया जाता है। आईआरसीटीसी नियमित जांच करता है, ताकि खाना ताजा, सुरक्षित और समय पर पहुंचे। ओटीपी सिस्टम से खाना सीधे सीट तक दिया जाता है, जिससे भरोसा बना रहता है। – एके सिंह, पीआरओ, आईआरसीटीसी, रेलवे