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रायपुर में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने से पहले, इन तीन IPS अफसरों के नाम पर चर्चा तेज

रायपुर रायपुर का पहला कमिश्नर कौन होगा इस पर सस्पेंस बना हुआ है। 15 अगस्त 2025 को रायपुर में कमिश्नरी सिस्टल लागू होने की घोषणा के बाद संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही नाम तय हो जाएगा। बता दें कि 31 दिसंबर को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 23 जनवरी से कमिश्नरी सिस्टम लागू करने की घोषणा की है। Raipur Commissioner: चल रही कमिश्नर की तलाश सरकार का प्रयास है कि इससे पहले ही कमिश्नर के नाम पर मुहर लग जाए। इसके लिए 7 आईजी स्तर के अधिकारियों को प्रस्तावित सूची में रखा गया है। एक्ट में संशोधन करने 31 दिसंबर को कैबिनेट की बैठक के बाद कमिश्नर की तलाश चल रही है। साथ ही कमिश्नर को मजिस्ट्रियल पॉवर के साथ ही पुलिङ्क्षसग को लेकर महत्वपूर्ण अधिकार देने एक्ट में संशोधन किया गया है। ताकि शस्त्र लाइसेंस, धारा 144 लागू करने और जरूरत के अनुसार कफ्र्यू, आपात स्थिति में तुरंत आदेश जारी करने और सिस्टम में फेरबदल किया जा सके।  रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर के लिए बिलासपुर के आइजी संजीव शुक्ला के साथ दो और नाम सबसे प्रबल दावेदार के रूप में उभरकर सामने आए हैं। इनमें वरिष्ठ आइपीएस बद्री नारायण मीणा और दीपक कुमार झा शामिल हैं। बद्री नारायण मीणा पूर्व में रायपुर एसएसपी रह चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव के साथ सख्त कानून-व्यवस्था नियंत्रण के लिए जाने जाते हैं। वहीं दीपक कुमार झा भी फील्ड पोस्टिंग और अनुशासनात्मक कार्यशैली के लिए पहचाने जाते हैं। इससे पहले आइपीएस अजय यादव, सुंदरराज पी, अमरेश मिश्रा समेत अन्य नाम भी कमिश्नर की दौड़ में शामिल रहे हैं। सरकार क्या चाहती है पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक सरकार ऐसे अधिकारी को कमिश्नर बनाना चाहती है, जो नई व्यवस्था के शुरुआती दौर में इसे मजबूती से स्थापित कर सके। हालांकि यह भी चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ आइपीएस अधिकारियों ने रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। इसके पीछे मुख्य कारण पुलिस कमिश्नर के सीमित अधिकार क्षेत्र बताए जा रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत कमिश्नर का अधिकार केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित रहेगा, जिसमें करीब 22 पुलिस थाने शामिल होंगे, जबकि शेष ग्रामीण क्षेत्र के 11 थानों के लिए एसएसपी तैनात करने की अलग व्यवस्था होगी। एडिशनल कमिश्नर के लिए लाल उम्मेद बने पहली पसंद एडिशनल पुलिस कमिश्नर के पद के लिए रायपुर एसएसपी डा. लाल उम्मेद सिंह शासन की पहली पसंद माने जा रहे हैं। उन्हें पदोन्नत कर इस जिम्मेदारी पर बैठाया जा सकता है। माना जा रहा है कि कमिश्नरेट को सुचारु रूप से चलाने के लिए अनुभवी और मजबूत टीम बनाई जा रही है, जिसमें डा. सिंह की भूमिका अहम होगी। इनके नाम पर विचार कमिश्नर के लिए रायपुर आईजी अमरेश मिश्रा, बिलासपुर के संजीव शुक्ला, दुर्ग के रामगोपाल गर्ग, सरगुजा के दीपक झा और आईजी पीएचक्यू अजय यादव का नाम प्रमुखता के साथ चल रहा है। वहीं, ओपी पाल और आनंद छाबड़ा के नाम भी प्रस्तावित किए गए हैं। उक्त अधिकारियों में किसी एक को कमिश्नर बनाया जाएगा। इसके लिए उच्चस्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। 900 अतिरिक्त बल की तैनाती Raipur Commissioner: नए सिस्टम में आईजी को कमिश्नरी की कमान देने के साथ ही दो एसएसपी, 5 एएसपी, 18 डीएससी के साथ ही फील्ड में 800 से ज्यादा अतिरिक्त जवानों की पोस्टिंग होगी। वहीं, पुलिस थानों की संख्या में इजाफा कर 5 अतिरिक्त थाना और 3 पुलिस चौकी का गठन होगा। बता दें कि इस समय रायपुर शहर और ग्रामीण को मिलाकर 38 पुलिस थाने हैं। इसमें साइबर, ट्रैफिक और अजाक थाना भी शामिल है। दफ्तर और वाहन की व्यवस्था पुराने पीएचक्यू में दफ्तर और कमिश्नर के लिए कार की व्यवस्था राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा की गई है। वहीं, दफ्तर के लिए पुलिस महकमे के तमाम विभागों को कनेक्ट किया गया है। कमिश्नर के ज्वाइन करते ही ऑटो मोड में सिस्टम काम करने लगेगा। 23 जनवरी से लागू होगी व्यवस्था रायपुर में पुलिस कमिश्नरी की घोषणा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने करीब छह महीने पहले की थी। इसके लिए आइपीएस प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में गठित टीम ने ओडिशा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित छह राज्यों की व्यवस्था का अध्ययन किया था। तैयार ड्राफ्ट को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है और 23 जनवरी से रायपुर में नई व्यवस्था लागू होगी। इसी दिन कमिश्नर कार्यालय के उद्घाटन की भी संभावना है। कई जिलों में बदल सकते हैं एसपी-एसएसपी पुलिस कमिश्नर व्यवस्था लागू होने से पहले आइपीएस अफसरों के तबादलों को लेकर भी पीएचक्यू में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार कवर्धा में पदस्थ एसपी धर्मेंद्र सिंह चवाई को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर भेजे जाने की संभावना है। वहीं तमनार हिंसा के बाद सख्त कार्रवाई के लिए पहचाने जाने वाले शशि मोहन सिंह को रायगढ़ का नया एसएसपी बनाया जा सकता है। वहीं दुर्ग से कोरबा में विजय अग्रवाल, दुर्ग में डा. संतोष सिंह, मुंगेली में हरीश राठौर, बेमेतरा में भावना पांडेय, रामकृष्ण साहू को सूरजपुर, भोजराम पटेल को सारंगढ़-बिलागढ़ में तैनाती के संकेत हैं। प्रशांत ठाकुर और सिद्धार्थ तिवारी को पुलिस मुख्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।  

WPL ओपनिंग मैच में RCB ने मुंबई इंडियंस को हराया, डिक्लर्क ने पलट दी बाजी

 नवी मुंबई महिला प्रीमियर लीग (WPL) 2026 का शुरुआती मुकाबला 9 जनवरी (शुक्रवार) को मुंबई इंडियंस (MI) और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के बीच खेला गया. नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स एकेडमी में आयोजित इस मैच में आरसीबी ने मुंबई इंडियंस पर 3 विकेट से जीत हासिल की. मुकाबले में आरसीबी को जीत के लिए 155 रनों का टारगेट मिला था, जिसे उसने मैच की आखिरी गेंद पर हासिल कर लिया. आरसीबी की जीत में साउथ अफ्रीकी ऑलराउंडर नादिन डिक्लर्क का अहम रोल रहा. डिक्लर्क ने आखिरी ओवर में जीत के लिए जरूरी 18 रन बना दिए. मैच का आखिरी ओवर नेट-साइवर ब्रंट ने फेंका. उस ओवर में पहली दो गेंद डॉट रहीं. फिर नादिन डिक्लर्क ने 6,4,6,4 रन जोड़कर टीम को मैच जिता दिया. डिक्लर्क ने 44 बॉल पर नाबाद 63 रन बनाए, जिसमें सात चौके और दो छक्के शामिल रहे. डिक्लर्क ने गेंद से भी दमदार प्रदर्शन करते हुए 4 विकेट लिए. डिक्लर्क प्लेयर ऑफ द मैच चुनी गईं. मुंबई इंडियंस दो बार की चैम्पियन है, जबकि आरसीबी ने एक बार डब्ल्यूपीएल जीता है. मुंबई इंडियंस तो मौजूदा चैम्पियन है और वो अपना टाइटल डिफेंड करने के उद्देश्य से इस सीजन में उतरी. ऐसी रही आरसीबी की पारी टारगेट का पीछा करते हुए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की शुरुआत तूफानी रही. कप्तान स्मृति मंधाना और ग्रेस हैरिस ने मिलकर 3.5 ओवरों में 40 रनों की साझेदारी की. शबनम इस्माइल ने स्मृति (18 रन) को आउट करके इस साझेदारी को ब्रेक किया. स्मृति के आउट होते ही आरसीबी दबाव में आ गई. स्मृति के बाद हैरिस को नेट-साइवर ब्रंट ने 25 रनों के निजी स्कोर पर चलता कर दिया. डी. हेमलता (7 रन), राधा यादव (6 रन) और ऋचा घोष (1 रन) तो दोहरे अंकों में भी नहीं पहुंच सकी. ऋचा घोष जब आउट हुईं, उस समय आरसीबी का स्कोर 65/5 था. पांच विकेट गिरने के बाद अरुंधति रेड्डी और नादिन डिक्लर्क के बीच छठे विकेट के लिए 52 रनों की साझेदारी हुई. निकोला कैरी ने पहले अरुंधति रेड्डी (20 रन) और फिर श्रेयंका पाटिल (1 रन) को चलता कर दिया. यहां से ऑलराउंडर नादिन डिक्लर्क ने अपने दम पर बाजी पलट दी. ऐसी रही मुंबई इंडियंस की पारी इससे पहले टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए मुंबई इंडियंस ने 6 विकेट पर 154 रन बनाए. मुंबई इंडियंस की शुरुआत अच्छी नहीं रही. 35 रनों के स्कोर तक उसने एमेलिया केर (4 रन) और नेट साइवर-ब्रंट (4 रन) के रूप में दो बिग विकेट खो दिए. केर को लॉरेन बेल और साइवर-ब्रंट को नादिन डिक्लर्क ने पवेलियन भेजा. क्रीज पर सेट हो चुकीं जी कमलिनी ने भी श्रेयंका की गेंद पर बोल्ड हो गईं. कमलिनी ने 28 गेंदों पर 34 रन बनाए, जिसमें 5 चौके शामिल रहे. कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी निराश किया और वो 20 रनों के निजी स्कोर डिक्लर्क का शिकार बनीं. यहां से सजीवन सजना और निकोला कैरी ने पांचवें विकेट के लिए 82 रन जोड़कर मुंबई इंडियंस को अच्छे स्कोर तक पहुंचाने में मदद की. सजना ने 7 चौके और एक छक्के की मदद से 25 बॉल पर 45 रन बनाए. वहीं डिक्लर्क ने 29 बॉल पर 40 रन बनाए, जिसमें चार चौके शामिल रहे. दोनों खिलाड़ियों को नादिन डिक्लर्क ने आउट किया. साउथ अफ्रीकी तेज गेंदबाज डिक्लर्क ने कुल मिलाकर इस मुकाबले में चार विकेट लिए.  मुकाबले के लिए आरसीबी ने अपनी प्लेइंग-11 में विदेशी प्लेयर्स के तौर पर लॉरेन बेल, ग्रेस हैरिस, नादिन डिक्लर्क और लिन्से स्मिथ को जगह दी. वहीं मुंबई इंडियंस की ओर से हेली स्मिथ बीमार होने के चलती इस मुकाबले में नहीं उतरीं. नेट साइवर-ब्रंट, एमेलिया केर, शबनम इस्माइल और निकोला कैरी मुंबई की प्लेइंग-11 में शामिल विदेशी खिलाड़ी रहीं. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की प्लेइंग इलेवन: स्मृति मंधाना (कप्तान), ग्रेस हैरिस, दयालन हेमलता, ऋचा घोष (विकेटकीपर), राधा यादव, नादिन डिक्लर्क, अरुंधति रेड्डी, श्रेयंका पाटिल, प्रेमा रावत, लिन्से स्मिथ और लॉरेन बेल. मुंबई इंडियंस की प्लेइंग इलेवन: नेट साइवर-ब्रंट, जी कमलिनी (विकेटकीपर), एमेलिया केर, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), अमनजोत कौर, निकोला कैरी, पूनम खेमनार, शबनम इस्माइल, संस्कृति गुप्ता, सजीवन सजना और सैका इशाक. WPL 2026 की शुरुआत ग्रैंड ओपनिंग सेरेमनी के साथ हुई है. इस दौरान यो यो हनी सिंह ने स्टेज पर लाइव परफॉर्म किया. अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज ने भी अपनी डांस परफॉर्मेंस से सबको झूमाया. इसके अलावा हरनाज संधू ने अपने परफॉर्मेंस से पूरे स्टेडियम में समां बांध दिया. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का स्क्वॉड: स्मृति मंधाना (कप्तान), जॉर्जिया वॉल, गौतमी नाइक, ग्रेस हैरिस, ऋचा घोष (विकेटकीपर), नादिन डिक्लर्क, पूजा वस्त्राकर, राधा यादव, श्रेयंका पाटिल, अरुंधति रेड्डी, लॉरेन बेल, कुमार प्रत्युषा, सयाली सतघरे, प्रेमा रावत, दयालन हेमलता और  लिन्से स्मिथ. मुंबई इंडियंस का स्क्वॉड: हेली मैथ्यूज, जी कमलिनी (विकेटकीपर), नेट साइवर-ब्रंट, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), एमेलिया केर, अमनजोत कौर, सजीवन सजना, पूनम खेमनार, संस्कृति गुप्ता, शबनम इस्माइल, त्रिवेणी वशिष्ठ, नल्ला रेड्डी, राहिला फिरदौस, मिली इलिंगवर्थ, सैका इशाक, निकोला कैरी.

कर्मचारियों के लिए पीएफ निकासी अब होगी आसान, UPI सुविधा से जल्द मिलेगा लाभ

नई दिल्ली कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि (पीएफ) से पैसा निकालने की प्रक्रिया जल्द ही और तेज व आसान होने जा रही है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अपने 30 करोड़ से अधिक सदस्यों को यूपीआई के जरिए पीएफ की रकम निकालने की सुविधा देने की तैयारी कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, अगले दो से तीन महीनों में यह सुविधा भीम ऐप के माध्यम से शुरू की जा सकती है। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य निर्धारित जरूरतों के लिए अग्रिम निकासी का अनुरोध किया जा सकेगा। दावा सबमिट होने के बाद ईपीएफओ की ओर से बैकएंड सत्यापन किया जाएगा और मंजूरी मिलते ही राशि सीधे यूपीआई से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। तुरंत ट्रांसफर की व्यवस्था ईपीएफओ ने इस नई प्रणाली के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के साथ साझेदारी की है। भीम ऐप पर सदस्य स्वास्थ्य, शिक्षा और विशेष परिस्थितियों के तहत निकासी के लिए रिक्वेस्ट भेज सकेंगे। सत्यापन के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से पैसा तुरंत खाते में पहुंच जाएगा। भविष्य में और ऐप्स तक विस्तार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में यह सुविधा केवल भीम ऐप तक सीमित रहेगी, लेकिन आगे चलकर इसे अन्य यूपीआई आधारित फिनटेक एप्लिकेशन तक भी बढ़ाया जा सकता है। शुरुआत में तय हो सकती है सीमा अधिकारियों का कहना है कि गलत इस्तेमाल से बचने के लिए शुरुआती चरण में निकासी की एक सीमा तय की जा सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा यूपीआई ट्रांजैक्शन पर निर्धारित सीमाओं के चलते, पूरी अनुमत राशि एक बार में निकालना संभव नहीं हो सकता। फिलहाल इस सीमा को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।  

आईपीएल 2026 में आरसीबी का नया होम ग्राउंड? बेंगलुरु की जगह रायपुर या इंदौर हो सकते हैं विकल्प

बेंगलुरु  रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के प्रशंसकों के लिए एक बुरी खबर है। टीम आईपीएल 2026 के मैच बेंगलुरु की जगह रायपुर या इंदौर में खेल सकती है। इसकी वजह पिछले साल चैंपियन बनने के बाद एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में सेलिब्रेशन के दौरान हुई भगदड़ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक आरसीबी के अगले सीजन के लिए एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में जाने की संभावना कम है। टीम अपने घरेलू मैच बेंगलुरु में नहीं कराना चाहती। आरसीबी ने अपने मैचों के आयोजन के लिए कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन से बातचीत नहीं की है। आईपीएल 2026 में आरसीबी के होम ग्राउंड के रूप में रायपुर और इंदौर के नाम पर विचार किया जा रहा है। रायपुर का नाम काफी आगे चल रहा है। आरसीबी आईपीएल 2025 की चैंपियन है। टीम का यह पहला खिताब है। जीत के बाद एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में जश्न मनाया जा रहा था। टीम के खिलाड़ी और मैनेजमेंट के साथ लाखों की संख्या में प्रशंसक स्टेडियम के अंदर और बाहर जमा थे। प्रशंसकों की संख्या उम्मीद से ज्यादा थी और इस वजह से भगदड़ मच गई। इस दौरान 11 लोगों की मौत हो गई थी। आरसीबी की सोशल मीडिया टीम को ट्रॉफी सेलिब्रेशन के दौरान इंस्टाग्राम लाइव स्ट्रीम के कमेंट सेक्शन में भगदड़ की जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। अधिकारियों और खिलाड़ियों तक प्रशंसकों की मौत की खबर पहुंचने के बाद जश्न के कार्यक्रम को छोटा किया गया। कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की थी और कई बड़े अधिकारियों को निलंबित भी किया गया था। आरसीबी ने बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से जान गंवाने वाले लोगों के परिवार को आर्थिक सहायता की घोषणा की थी। हाल में विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान दिल्ली और आंध्र प्रदेश का मैच एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाना था। विराट कोहली दिल्ली टीम का हिस्सा थे। कोहली की लोकप्रियता को देखते हुए स्थानीय प्रशंसकों के बड़ी संख्या में जुटने की संभावना थी। इसलिए बेंगलुरु पुलिस ने इस मैच के आयोजन की अनुमति नहीं दी थी। मैच बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस में कराया गया था। 

13 जनवरी को शुक्र का गोचर, इन 3 राशियों के लिए रह सकती है मुश्किलें, जानें क्या करें

 द्रिक पंचांग के अनुसार, जनवरी 2026 में शुक्र ग्रह अपना पहला बड़ा गोचर करने जा रहे हैं. 13 जनवरी को शुक्र धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. चूंकि शुक्र को धन, ऐश्वर्य, सुख-सुविधा और संबंधों का कारक माना जाता है, इसलिए उनका यह राशि परिवर्तन सभी राशियों के जीवन को प्रभावित करेगा. इस गोचर का असर हर किसी के लिए समान नहीं रहेगा. जहां कुछ लोगों को इससे सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं, वहीं तीन राशियों के जातकों के लिए यह समय आर्थिक दबाव बढ़ाने वाला साबित हो सकता है. इस दौरान अचानक खर्च बढ़ सकते हैं, पैसों की कमी महसूस हो सकती है और नौकरी या कारोबार में नुकसान की स्थिति भी बन सकती है. ऐसे में निवेश से जुड़े फैसलों और खर्चो को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी होगा. मेष राशि मेष राशि वालों के लिए शुक्र का गोचर सावधानी भरा समय लेकर आ सकता है. धन से जुड़े मामलों में रुकावटें महसूस हो सकती हैं. अचानक खर्च बढ़ने से बजट बिगड़ सकता है. निवेश या बड़े आर्थिक फैसले लेने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार जरूरी रहेगा. नौकरी या व्यापार में लाभ की गति धीमी रह सकती है, वहीं कुछ मामलों में नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है. पारिवारिक माहौल में भी तनाव की स्थिति बन सकती है, जिससे मानसिक दबाव बढ़ेगा. इस समय संयम बनाए रखना. जल्दबाजी से बचना फायदेमंद रहेगा. कन्या राशि कन्या राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह गोचर आर्थिक उतार-चढ़ाव लेकर आ सकता है. आय और खर्च के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो सकता है. कार्यक्षेत्र में देरी, रुकावट या विरोध का सामना करना पड़ सकता है, जिससे मन थोड़ा परेशान रह सकता है. रिश्तों में भी छोटी-छोटी गलतफहमियां उभर सकती हैं. इस दौरान फिजूलखर्ची पर रोक लगाना और नए निवेश से दूरी बनाए रखना बेहतर रहेगा. आत्मविश्वास बनाए रखें और भावनाओं में बहकर कोई निर्णय न लें. परिवार के वरिष्ठ सदस्यों या करीबी लोगों से सलाह लेना आपको सही दिशा दिखा सकता है. धनु राशि धनु राशि वालों के लिए यह गोचर आर्थिक और मानसिक दोनों स्तर पर सतर्क रहना होगा. अचानक पैसों की कमी हो सकती है. पहले से बनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ सकता है. नौकरी और व्यापार में अपेक्षित परिणाम न मिलने से निराशा हो सकती है, इसलिए धैर्य रखना बेहद जरूरी होगा. स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही न करें, खासकर तनाव और थकान से बचना जरूरी है. इस समय बड़े खर्च, उधार या नए निवेश से दूरी बनाए रखना समझदारी होगी.

खामेनेई की सेना द्वारा तेहरान में मौत का मंजर: ईरानी डॉक्टर का दावा- 217 लोग मारे गए

तेहरान      ईरान में इस्लामी शासन के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों ने विकाराल रूप ले लिया है. ईरानी सरकार के निर्देश पर सुरक्षाबलों द्वारा कई जगहों पर गोलीबारी करने की बात सामने आ रही है. तेहरान के एक डॉक्टर ने पहचान नहीं उजागर करने की शर्त पर टाइम मैगजीन को बताया कि राजधानी तेहरान के सिर्फ छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से अधिकांश गोलीबारी में मारे गए हैं. हालांकि टाइम मैगजीन ने इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है. मौतों का यह आंकड़ा, यदि सही है तो ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के एक भयानक दमन की ओर इशारा करता है. प्रदर्शन शुरू होने के बाद से सरकार ने देश में इंटरनेट और फोन कनेक्शन लगभग पूरी तरह बंद कर दिए हैं. ये विरोध 28 दिसंबर से शुरू हुए थे, जो आर्थिक संकट के खिलाफ थे, लेकिन अब ये ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं और इस्लामी शासन को उखाड़ फेंकने की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी 'आजादी' और 'तानाशाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगा रहे हैं.  प्रदर्शनकारियों ने अल-रसूल मस्जिद में लगा दी आग ईरानी डॉक्टर ने टाइम मैगजीन से बातचीत में दावा किया, 'जैसे-जैसे प्रदर्शन तेज हुए, कई इलाकों में सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चला दीं. शुक्रवार को अस्पतालों से शवों को हटाया गया. मरने वालों में ज्यादातर युवा थे. उत्तरी तेहरान के एक पुलिस स्टेशन के बाहर मशीनगन से की गई फायरिंग में कई प्रदर्शनकारी मौके पर ही मारे गए. इस घटना में कम से कम 30 लोगों को गोली लगी.' अधिकतर रैलियां शांतिपूर्ण रहीं, लेकिन कुछ सरकारी इमारतों में तोड़फोड़ की खबरें भी आई हैं. ईरानी प्रदर्शनकारियों ने तेहरान की अल-रसूल मस्जिद में आग लगा दी. ईरान उपद्रवियों के सामने नहीं झुकेगा: अली खामेनेई मानवाधिकार संगठनों ने मौतों की संख्या डॉक्टर के दावे से कम बताई है. वॉशिंगटन स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी के अनुसार अब तक कम से कम 63 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 49 नागरिक शामिल हैं. हालांकि, ईरान में मीडिया के सरकारी नियंत्रण में होने और विदेशी समाचार एजेंसियों पर कड़े ​प्रतिबंधों के कारण मौतों के आंकड़ों में भिन्नता बताई जा रही है. इस बीच ईरानी नेतृत्व ने सख्त संदेश दिए हैं. सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने कहा कि 'इस्लामिक रिपब्लिक उपद्रवियों के सामने नहीं झुकेगा'.  माता-पिता से बच्चों को प्रदर्शन से दूर रखने की अपील तेहरान के प्रॉसिक्यूटर (सरकारी वकील) ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा तक दी जा सकती है. वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक अधिकारी ने अभिभावकों से अपने बच्चों को प्रदर्शनों से दूर रखने, वरना गोली लगने पर शिकायत न करने को कहा है. इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामी शासन को चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई तो परिणाम बहुत बुरे होंगे. ईरान में आर्थिक संकट, ईरानी रियाल के डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिरने, पानी की कमी और बिजली कटौती ने जनता को इस्लामी शासन के खिलाफ आक्रोशित किया है.   

रूस की घातक सबमरीन पर अमेरिका ने किया हमला, पुतिन चुप क्यों रहे – जानिए क्या हुआ?

मॉस्को  अटलांटिक महासागर में यूएस नेवी ने रूसी झंडे वाले जहाज मार‍िनेरा (Marinera) को अपने कब्जे में ले लिया. सबको लगा था क‍ि रूस जवाब देगा. हो सकता है क‍ि अमेर‍िकी नेवी पर अटैक हो जाए, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. डिफेंस एक्‍सपर्ट को एक बात सबसे ज्‍यादा परेशान कर रही है, वो है क‍ि रूस की घातक परमाणु पनडुब्‍बी (Nuclear Submarine) की खामोशी. इस सबमरीन को जहाज को बचाने के ल‍िए रूस ने भेजा था, फ‍िर ऐसा क्‍या आ क‍ि वह बचा नहीं पाई? उसकी नाक के नीचे से अमेर‍िका रूस का जहाज कैसे लेकर चला गया? रूसी राष्‍ट्रपत‍ि व्‍लादि‍मीर पुत‍िन खामोश क्‍यों रहे? कहा जा रहा क‍ि रूसी नेवी की सबसे घातक सबमरीन उस वक्त उसी क्षेत्र में मौजूद थी. उसके पास हाइपरसोनिक मिसाइलें थीं, गाइडेड टॉरपीडो थे, फिर भी वह एक ‘मूकदर्शक’ बनी रही और अमेरिकी नौसेना जहाज को खींचकर ले गई. आखिर दुनिया की सबसे ताकतवर पनडुब्बियों में से एक ने अपने ही देश के जहाज को क्यों नहीं बचाया? उसने टॉरपीडो क्यों नहीं दागा? क्या यह रूस की कमजोरी थी या कोई बहुत बड़ी रणनीति? टॉरपीडो दागना यानी थर्ड वर्ल्‍ड वॉर सबसे बड़ा और सीधा कारण है युद्ध की शुरुआत. ड‍िफेंस एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, मार‍िनेरा एक मर्चेंट वेसल यानी कार्गो जहाज था, न कि कोई वॉरश‍िप. अंतरराष्ट्रीय कानून और सैन्य प्रोटोकॉल के मुताबिक, अगर अमेरिकी नेवी किसी जहाज को रोकती है या जब्त करती है, तो यह पुलिस एक्शन या लॉ एनफोर्समेंट माना जाता है. लेकिन, अगर रूसी सबमरीन इसके जवाब में अमेरिकी जहाज पर टॉरपीडो दाग देती, तो वह सीधे तौर पर एक्ट ऑफ वॉर होता. पूर्व नौसेना अधिकारी और डिफेंस एनालिस्ट कहते हैं, एक कार्गो जहाज को बचाने के लिए कोई भी कमांडर परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच सीधा युद्ध शुरू नहीं कर सकता. अगर सबमरीन फायर करती, तो अमेरिका इसे अपने संप्रभु जहाज पर हमला मानता और नाटो आर्टिकल 5 लागू हो जाता. रूस एक जहाज के लिए दुनिया को परमाणु युद्ध में नहीं झोंक सकता. जैसे ही फायर करती, मारी जाती     पनडुब्बी का सबसे बड़ा हथियार उसकी मिसाइलें नहीं, बल्कि उसकी स्‍ट‍िल्‍थ पॉवर है. वह पानी के नीचे छिपी रहती है, इसलिए खतरनाक है. जिस वक्त मार‍िनेरा को जब्त किया जा रहा था, उस वक्त अमेरिकी नेवी के पी-8 पोसाइडन (P-8 Poseidon) एयरक्राफ्ट और एंटी-सबमरीन डिस्ट्रॉयर्स वहां मौजूद थे. सबमरीन जैसे ही टॉरपीडो लॉन्च करने के लिए अपना ट्यूब खोलती या फायर करती, उसकी ध्वनि अमेरिकी सोनार पर आ जाती.     फायरिंग करते ही सबमरीन की सटीक लोकेशन पता चल जाती. अमेरिकी जहाज और हेलीकॉप्टर तुरंत उस पर जवाबी हमला कर देते. एक मर्चेंट जहाज को बचाने के चक्कर में रूस अपनी अरबों डॉलर की अत्याधुनिक परमाणु पनडुब्बी और सैकड़ों नाविकों को खो देता. यह एक आत्मघाती कदम होता. मार‍िनेरा की कीमत vs सबमरीन की कीमत     म‍िल‍िट्री स्‍ट्रैटजी में कास्‍ट बेन‍िफ‍िट एनाल‍िस‍िस बहुत मायने रखता है. मार‍िनेरा एक कार्गो जहाज था. इसमें या तो तेल था, हथियार थे या कोई प्रतिबंधित सामान. इसकी कीमत कुछ मिलियन डॉलर हो सकती है. रूसी सबमरीन की कीमत लगभग 3 से 4 अरब डॉलर है. यह रूस का सबसे कीमती रणनीतिक हथियार है.     कोई भी समझदार नौसेना कमांडर एक मामूली जहाज को बचाने के लिए अपनी सबसे कीमती स्ट्रैटेजिक एसेट को खतरे में नहीं डालेगा. सबमरीन का काम सिर्फ जहाज बचाना नहीं, बल्कि अमेरिका के मेनलैंड पर न्‍यूक्‍ल‍ियर ड‍िटोरेंट बनाए रखना है. अमेरिका का एंटी-सबमरीन जाल अटलांटिक महासागर में अमेरिका का दबदबा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब अमेरिकी नेवी ने मार‍िनेरा को इंटरसेप्ट किया, तो उन्होंने पहले ही यह सुनिश्चित कर लिया होगा कि नीचे कोई रूसी सबमरीन उन्हें नुकसान न पहुंचा सके. अमेरिकी नेवी के पास साउंड सर्विलांस स‍िस्‍टम है, जो समुद्र के तल में लगे सेंसर का एक नेटवर्क है. संभावना है कि अमेरिकी नेवी को पहले से पता था कि रूसी सबमरीन कहां है. ऐसे में, अगर रूसी सबमरीन कोई भी हरकत करती, तो उसे तुरंत घेर लिया जाता. रूसी कमांडर यह जानते थे कि वे दुश्मन के घर में हैं और वे ‘घिरे हुए’ हैं. यह कब्जा था, हमला नहीं हमें यह समझना होगा कि अमेरिका ने जहाज को डुबोया नहीं, बल्कि जब्त किया है. अगर अमेरिका जहाज पर मिसाइल दागकर उसे डुबो रहा होता और रूसी क्रू की जान खतरे में होती, तो शायद सबमरीन कुछ आक्रामक कदम जैसे चेतावनी देना, उठा सकती थी. लेकिन यहां अमेरिका ने बोर्डिंग टीम भेजी और जहाज को अपने कंट्रोल में ले लिया. ऐसे में सबमरीन के पास करने के लिए कुछ नहीं था. वह पानी के नीचे से लाउडस्पीकर पर चेतावनी नहीं दे सकती और न ही टॉरपीडो दाग सकती है. पुतिन की खामोशी रणनीतिक रूसी सबमरीन का हमला न करना कमजोरी नहीं, बल्कि रणनीतिक संयम था. अगर रूसी सबमरीन टॉरपीडो दाग देती, तो दुनिया तीसरे विश्व युद्ध का सामना कर रही होती. रूस अब इसका जवाब कूटनीतिक तरीके से या किसी और मोर्चे जैसे यूक्रेन या साइबर अटैक पर देगा. समुद्र में उस वक्त खामोश रहना ही रूसी कमांडर के लिए एकमात्र विकल्प था. आसान शब्दों में कहें तो आप एक शतरंज के प्यादे को बचाने के लिए अपने वजीर की कुर्बानी नहीं देते, खासकर तब जब सामने वाला खिलाड़ी पूरी तैयारी के साथ बैठा हो.

रायगढ़ में उद्योगों में तीन सालों में 55 मजदूरों की मौत, 63 घायल – सुरक्षा मानकों की कमी बनी बड़ी वजह

रायगढ़  छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में उद्योगों में लगातार हादसे हो रहे हैं। औद्योगिक सुरक्षा विभाग ने एक आंकड़ा जारी किया है जिसके मुताबिक, पिछले 3 साल में अलग-अलग उद्योगों में हुए हादसे में काम करने वाले 55 लोगों की जान जा चुकी है, वहीं 63 लोग घायल हुए हैं। जहां घटनाएं हुई उनमें एनआर इस्पात, रायगढ़ इस्पात, एमएसपी स्टील एंड पवार लिमिटेड, एनआरवीएश स्पंज प्लांट, जिंदल स्टील एंड पावर प्लांट, सिंघल स्पंज प्लांट, बीएस स्पंज प्राइवेट लिमिटेड, नवदुर्गा फ्युल प्राइवेट लिमिटेड, शारदा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड समेत कई प्लांट शामिल हैं। ज्यादातर मामलों में सुरक्षा मानकों में कमी के कारण हादसा उजागर हुआ है। 3 साल में 55 मजदूरों की मौत औद्योगिक सुरक्षा विभाग के मुताबिक, साल 2023 में 9 प्लांटों में हादसों के मामले सामने आए। जिसमें 9 मजदूरों की मौत हो गई और 6 गंभीर व 6 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके बाद आकड़ों का ग्राफ भी बढ़ते गया। साल 2024 में उद्योगों में 22 हादसे हुए और इसमें 23 मजदूरों की मौत हो गई। जबकि 14 गंभीर और 18 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके अलावा साल 2025 में भी 22 हादसों में 23 लोगों की जान चले गई और 9 गंभीर व 10 सामान्य रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे। सुरक्षा मानकों की कमी के कारण घटनाएं विभागीय जानकारों ने बताया कि उद्योगों में हादसे अक्सर सुरक्षा मानकों की कमी के कारण हो रहे हैं। जिसमें मजदूरों को बिना सुरक्षा व मनमाने तरीके से काम कराया जाता है। पिछले कुछ सालों में देखा गया कि अधिक हादसे बॉयलर फटने या कन्वेयर बेल्ट और मशीन की चपेट में आने से हुई है। उत्पादन बढ़ाने के दबाव में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और पुराने पड़ चुके उपकरणों का रखरखाव न होना भी मौतों की मुख्य वजह बतायी जा रही है। 3 महीने में 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज औद्योगिक स्वास्थ्य व सुरक्षा विभाग के उप संचालक राहुल पटेल ने बताया कि कारखानों में लगातार हादसों को देखते हुए नियमित रूप से जांच की जा रही है। पूर्व में हुए हादसों में निरीक्षण में कई कमियां पाई गई। ऐसे में पिछले 3 माह में उद्योगों के खिलाफ 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है। इसके अलावा जांच के दौरान जिन-जिन प्लांटों में सुरक्षा को लेकर कमियां मिलती हैं, उन्हें नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं। औद्योगिक सुरक्षा विभाग के मुताबिक, साल 2023 में 9 प्लांटों में हादसों के मामले सामने आए। जिसमें 9 मजदूरों की मौत हो गई और 6 गंभीर व 6 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके बाद आकड़ों का ग्राफ भी बढ़ते गया। साल 2024 में उद्योगों में 22 हादसे हुए और इसमें 23 मजदूरों की मौत हो गई। जबकि 14 गंभीर और 18 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके अलावा साल 2025 में भी 22 हादसों में 23 लोगों की जान चले गई और 9 गंभीर व 10 सामान्य रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे। सुरक्षा मानकों की कमी के कारण घटनाएं विभागीय जानकारों ने बताया कि उद्योगों में हादसे अक्सर सुरक्षा मानकों की कमी के कारण हो रहे हैं। जिसमें मजदूरों को बिना सुरक्षा व मनमाने तरीके से काम कराया जाता है। पिछले कुछ सालों में देखा गया कि अधिक हादसे बॉयलर फटने या कन्वेयर बेल्ट और मशीन की चपेट में आने से हुई है। उत्पादन बढ़ाने के दबाव में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और पुराने पड़ चुके उपकरणों का रखरखाव न होना भी मौतों की मुख्य वजह बतायी जा रही है। 3 महीने में 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज औद्योगिक स्वास्थ्य व सुरक्षा विभाग के उप संचालक राहुल पटेल ने बताया कि कारखानों में लगातार हादसों को देखते हुए नियमित रूप से जांच की जा रही है। पूर्व में हुए हादसों में निरीक्षण में कई कमियां पाई गई। ऐसे में पिछले 3 माह में उद्योगों के खिलाफ 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है। इसके अलावा जांच के दौरान जिन-जिन प्लांटों में सुरक्षा को लेकर कमियां मिलती हैं, उन्हें नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।

बिलासपुर के कोनी-मोपका बाइपास के लिए 83 करोड़ की योजना, अब टू-लेन नहीं, बनेगा फोरलेन

बिलासपुर  मोपका-सेंदरी बाइपास की जर्जर सड़क की किस्मत बदलने वाली है। शासन से पहले ही 58 करोड़ की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन अब इस प्रोजेक्ट को भविष्य की जरूरतों और बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए फोरलेन बनाने का निर्णय लिया गया है। लोक निर्माण विभाग ने 83 करोड़ रुपये का नया संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा है, जो शहर की यातायात व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा। सड़क मरम्मत और चौड़ीकरण का प्रस्ताव मोपका-सेंदरी बाइपास को लेकर पूर्व में केवल सड़क मरम्मत और चौड़ीकरण का प्रस्ताव था। लेकिन बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए इसमें बड़े बदलाव का सुझाव दिया। विधायक की पहल पर अब इसे कंक्रीट फोरलेन सड़क के रूप में विकसित किया जाएगा। यह मार्ग मोपका से चिल्हाटी होते हुए सीधे एनएच-49 से जुड़ जाएगा, जिससे बिलासपुर एक बड़े रिंग रोड नेटवर्क का हिस्सा बन जाएगा। प्रोजेक्ट को फोरलेन बनाने के पीछे सबसे बड़ा तर्क बिलासपुर-सीपत फोरलेन का निर्माण है। राज्य शासन ने बिलासपुर-सीपत फोरलेन को आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है और इसका काम जल्द शुरू होने वाला है। चूंकि सीपत रोड से भारी ट्रैफिक का दबाव रहेगा, ऐसे में सेंदरी-मोपका बाइपास का भी फोरलेन होना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से अनिवार्य हो गया है। इन दोनों सड़कों के आपस में जुड़ने से पूरे क्षेत्र का विकास तेजी से होगा। फोरलेन बनने से बढ़ेगी सुविधा, हजारों राहगीरों को होगा सीधा लाभ बाइपास के फोरलेन होने और एनएच-49 से सीधे जुड़ाव के कारण रायगढ़, जांजगीर, अकलतरा और पड़ोसी राज्य ओडिशा जाने वाले वाहनों को बिलासपुर शहर के भीतर घुसने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा बैमा नगोई, खमतराई, बिरकोना, सेलर व अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से भारी वाहन सीधे चिल्हाटी मार्ग से निकल सकेंगे, जिससे नेहरू चौक से गोल बाजार होते हुए गांधी चौक तक लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी और यात्रा के समय में कम से कम 30 से 40 मिनट की बचत होगी। कनेक्टिविटी का नया हब बनेगा चिल्हाटी नए प्रस्ताव के तहत सड़क को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह एनएच-130 को मोपका के जरिए एनएच-49 से जोड़ देगा। इससे बिलासपुर के चारों ओर एक मजबूत ट्रांसपोर्ट कारिडोर तैयार होगा। कांक्रीट रोड होने के कारण भारी वाहनों के दबाव से सड़क जल्दी खराब नहीं होगी और धूल व प्रदूषण से स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी। बिलासपुर-सीपत मार्ग भी होगा फोरलेन राज्य शासन ने बिलासपुर से सीपत तक के लगभग 19 किलोमीटर लंबे मार्ग को फोरलेन बनाने की बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करते हुए मंजूरी दे दी है। सीपत में एनटीपीसी का बड़ा संयंत्र होने और आगे कोरबा जिले की सीमा को जोड़ने के कारण इस मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव लगातार बना रहता है। वर्तमान में यह सड़क टू लेन होने के कारण दुर्घटनाओं का केंद्र बनी रहती है। मार्ग के फोरलेन बनने से न केवल औद्योगिक यातायात को सुगमता मिलेगी, बल्कि सेंदरी-मोपका बाइपास के साथ मिलकर यह पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को बदल देगा।

महिलाओं की सुरक्षा के मामले में बेंगलुरु और चेन्नई सबसे आगे, देखें टॉप 10 शहरों की पूरी लिस्ट

नई दिल्ली महिलाओं की सुरक्षा और करियर के बेहतर अवसरों के मामले में बेंगलुरु और चेन्नई सबसे आगे निकलकर सामने आए हैं। यह जानकारी वर्कप्लेस कल्चर कंसल्टिंग फर्म अवतार ग्रुप की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है। ‘टॉप सिटीज फॉर वीमेन इन इंडिया (TCWI)’ के चौथे संस्करण में देश के 125 शहरों की महिलाओं को शामिल किया गया। इस अध्ययन में महिलाओं से उनकी सुरक्षा, कार्यस्थल के माहौल और करियर में आगे बढ़ने के अवसरों को लेकर सवाल किए गए। इन्हीं मानकों के आधार पर शहरों को रैंकिंग दी गई। यह रिपोर्ट एक लॉन्गिट्यूडिनल इन्क्लूजन इंडेक्स के रूप में तैयार की गई है, जो यह आंकलन करती है कि कौन-से शहर महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और प्रोफेशनल ग्रोथ को लगातार बेहतर बना रहे हैं। बेंगलुरु फिर बना नंबर-1 रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु ने 53.29 CIS स्कोर के साथ पहला स्थान हासिल किया है। यहां महिलाओं को करियर ग्रोथ के बेहतर मौके, मजबूत इंडस्ट्री सपोर्ट और अपेक्षाकृत सुरक्षित माहौल मिलता है। यही वजह है कि यह शहर लगातार दूसरे साल भी इस सूची में शीर्ष पर बना हुआ है। चेन्नई दूसरे स्थान पर कायम महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से चेन्नई ने दूसरा स्थान बरकरार रखा है। यह शहर साल 2024 में भी दूसरे नंबर पर था और 2025 में भी अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा। टॉप 10 में ये शहर शामिल रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरे स्थान पर पुणे और चौथे पर हैदराबाद रहा। मुंबई, जो 2024 में तीसरे स्थान पर थी, 2025 में फिसलकर पांचवें नंबर पर पहुंच गई। टॉप 10 सुरक्षित शहरों की सूची में इसके बाद गुरुग्राम, कोलकाता, अहमदाबाद, त्रिवेंद्रम और कोयंबटूर शामिल है।