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तेजस मार्क-2 की उड़ान जून में, क्या भारत को अब राफेल की आवश्यकता नहीं रहेगी?

नई दिल्ली पिछले दिनों डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी कामत ने एक बड़ी घोषणा की. कामत ने कहा कि देसी एडवांस फाइटर जेट तेजस मार्क-2 की पहली उड़ान इस साल जून-जुलाई में की जाएगी. यह स्वदेसी फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है. रिपोर्ट के मुताबिक इसी मार्च तक इस फाइटर जेट का प्रोटोटाइप तैयार हो जाएगा. इसके बाद उड़ान से पहले के तमाम ट्रायल किए जाएंगे. अगर सब कुछ निर्धारित योजना के मुताबिक चलता रहा तो 2029 से इस फाइटर जेट का मास प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा. 2030 तक एयरफोर्स को इसकी डिलिवरी शुरू कर दी जाएगी. यानी 2030 तक भारत के पास अपना 4.5 जेन फाइटर जेट होगा. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भारत देसी फाइटर जेट के इतना करीब है तो फिर वह फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद क्यों करना चाहता है? जबकि ये दोनों विमान 4.5 पीढ़ी के बताए जा रहे हैं. राफेल खरीद की योजना अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय में फ्रांस से 114 राफेल खरीदने के प्रस्ताव पर अंतिम चरम का विचार-विमर्श चल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक कुछ ही दिनों के भीतर रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक होने वाली है. इसी बैठक में इस मेगा डील पर चर्चा होगी. इस डील की संभावित लागत 3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है. भारतीय वायु सेना के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय की मुहर लगने के बाद यह मामला कैबिनेट के समक्ष जाएगा. फिर वहां से अंतिम मंजूरी मिलेगी. डील में क्या-क्या होने की संभावना संभावित डील के बारे में कहा जा रहा है कि 12 से 18 विमान सीधे फ्रांस के फ्लाइ-वे कंडीशन में आएंगे. बाकी के विमानों की निर्माण भारत में किया जाएगा. इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन और भारतीय कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम के बीच संयुक्त उपक्रम बनने की संभावना है. अगर यह डील हो जाती है तो भारत के पास कुल 176 राफेल लड़ाकू विमान हो जाएंगे. भारत पहले ही राफेल के दो स्क्वाड्रन खरीद चुका है. नौसेना ने भी 26 मरीन राफेल खरीदने का सौदा किया है. अगर यह डील अगले कुछ महीनों के दौरान हो जाती है तो इसकी भी डिलिवरी 2029 तक शुरू हो जाएगी.     तेजस मार्क-2 तैयार तो राफेल डील क्यों?     अब आते हैं इसी सवाल पर. भारतीय वायु सेना लड़ाकू विमानों की भारी कमी से जूझ रही है. उसके पास कम से कम 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए लेकिन अभी वह करीब 30 स्क्वाड्रन से काम चला रही है. एक स्क्वाड्रन में 18 विमान होते हैं. आने वाले समय में एयरफोर्स के कुछ और स्क्वाड्रन रिटायर होंगे. ऐसे में देश को भारी संख्या में लड़ाकू विमानों की जरूरत है. ऐसे में भारत को लड़ाकू विमान तो खरीदने ही होंगे. सब यह है कि उसे कौन से लड़ाकू विमान खरीदने चाहिए. दरअसल, देश को अलग-अलग मोर्चे और अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से तरह-तरह के लड़ाकू विमान चाहिए. तेजस मार्क-2 निश्चित तौर पर 4.5 पीढ़ी का फाइटर जेट है. राफेल भी 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. लेकिन दोनों की क्षमताओं में जमीन आसमान का अंतर है. तेजस मार्क-2 एक हल्का जेट है जबकि राफेल की गिनती दुनिया के सबसे एडवांस जेट में होती है. वह कई मायने में पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स को टक्कर देता है. राफेल Vs तेजस मार्क-2 राफेल और तेजस मार्क-2 दोनों 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. लेकिन इनकी क्षमता, भूमिका और तकनीक में काफी अंतर है. इन पांच प्वाइंट्स से आप पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगे कि भारत क्यों राफेल खरीद रहा है. आखिर क्यों तेजस मार्क-2, राफेल की जगह नहीं ले सकता.     क्लास और वेट: राफेल एक मीडियम श्रेणी का मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है. इसमें दो इंजन लगे हैं, जो इसे लंबी दूरी के मिशन और भारी हथियार ले जाने में समक्ष बनाते हैं. तेजस मार्क-2 एक मीडियम वेट फाइटर जेट है. लेकिन इसमें केवल एक इंजन है. यह तेजस मार्क-1ए से बड़ा है. इसको मिराज-2000 की जगह लेने के लिए डिजाइन किया गया है. यह राफेल से बहुत कम हथियार ले जा सकता है.     इंजन और ताकत: राफेल में दो स्नेकमा एम88 इंजन हैं. इनका कुल थ्रस्ट लगभग 150kN है. जबकि तेजस मार्क-2 में एक इंजन है और उसका थ्रस्ट 98kN है. राफेल में दो इंजन होने से उसकी सर्वाइवेलिटी भी तेजस मार्क-2 की तुलना में काफी अधिक है.     हथियार क्षमता: राफेल लगभग 9500 किलो का हथियार ले जा सकता है. इसमें बेहद एडवांस मिटिओर बीवीआर मिसाइल और स्कैल्प क्रूज मिसाइल है. यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. तेजस मार्क-2 में हथियार ले जाने की क्षमता 6500 किलो है. इसमें देसी अस्त्र मिसाइलें, ब्रह्मोस एनजी और तरह-तरह के स्मार्ट बम लगाए जाएंगे.     रडार और तकनीक: राफेल में दुश्मन की रडार से बचाने वाले RBE2 AESA रडार और स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट लगा है. जबकि तेजस मार्क-2 में उत्तम एईएसए रडार है. इसमें स्वदेसी वारफेयर सूट और आईआरएसटी सेंसर है.     कीमत: राफेल एक बहुत ही महंगा फाइटर जेट है. एक राफेल की अनुमानित कीमत 1600 से 2000 करोड़ रुपये के बीच है. जबकि तेजस मार्क-2 की कीमत 500 से 600 करोड़ रुपये है.  

चंबल से अरावली तक खनन माफिया का तांडव, राजस्थान और एमपी में लोग खौफ में, कानून नाकाम

श्योपुर/जयपुर देश में अवैध रेत खनन का जिन्न एक बार फिर पूरी ताकत से बाहर आ चुका है. राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में रेत माफिया का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब न सिर्फ आम लोग, बल्कि पुलिस और वन विभाग के अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं.  जांच में सामने आया है कि बीजेपी शासित दोनों राज्यों में रेत माफिया खुलेआम दिनदहाड़े अवैध खनन और परिवहन कर रहा है. हालात इतने गंभीर हैं कि बीते एक हफ्ते में दो लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक वनकर्मी ड्यूटी पर तैनात था. कई जिलों में अधिकारी कार्रवाई करने से डर रहे हैं और स्थानीय लोग पर्यावरण तबाही को लेकर दहशत में जी रहे हैं. राजस्थान के धौलपुर जिले से सबसे चौंकाने वाला मामला सामने आया. यहां चंबल नदी क्षेत्र में अवैध बजरी खनन रोकने गए वन रक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत को बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया. घटना 8 जनवरी की रात की है, जब वन विभाग की टीम चंबल वन्यजीव क्षेत्र में गश्त कर रही थी. ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक ने भागने के दौरान वनकर्मी को टक्कर मार दी. गंभीर हालत में उन्हें पहले करौली और फिर जयपुर रेफर किया गया, जहां पैर काटना पड़ा, लेकिन 10 जनवरी की रात उनकी मौत हो गई. वन विभाग के मुताबिक, आरोपी माफिया मौके से फरार हो गया था. बाद में पुलिस ने बजरी माफिया रामसेवक उर्फ चालू को गिरफ्तार किया. इसके बाद प्रशासन ने जेसीबी से अवैध रास्तों को खोदकर बंद किया, लेकिन सवाल यही है कि क्या ये कार्रवाई स्थायी है? अजमेर: अलर्ट मोड पर प्रशासन, सख्त चेतावनी धौलपुर की घटना के बाद अजमेर प्रशासन हरकत में आया. जिला कलेक्टर लोकबंधु ने अवैध खनन के खिलाफ विशेष अभियान शुरू करने के निर्देश दिए. खनिज, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बनाई गईं. पुष्कर, केकड़ी और सीमावर्ती इलाकों में नाकेबंदी की गई. कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जब्त कर लाखों का जुर्माना लगाया गया और दोबारा पकड़े जाने वालों पर एफआईआर दर्ज की गई. प्रशासन का कहना है कि अब किसी भी कीमत पर अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे उलट नजर आती है. अलवर: अरावली की पहाड़ियां हो रहीं खत्म अलवर जिले में अरावली की पहाड़ियों को रेत और पत्थर माफिया खोखला कर रहे हैं. राजगढ़ क्षेत्र के मूनपुर गांव में बालाजी मंदिर के पास खुलेआम पत्थर खनन चल रहा है. आजतक की टीम ने देखा कि सुबह होते ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खनन में जुट जाती हैं. भारी वाहन सड़कों से गुजरते हैं, लेकिन न पुलिस रोकती है और न वन विभाग. जब पुलिस ने पीछा किया तो माफिया ने एक घर की नींव तक तोड़ दी, जिससे तीन बकरियों की मौत हो गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि माफिया को कानून का कोई डर नहीं है और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है. बारां: अवैध बजरी मंडी पर छापा बारां शहर में पुलिस ने अंबेडकर सर्किल के पास अवैध बजरी बाजार पर बड़ी कार्रवाई की. 12 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पकड़ी गईं, जिनमें से 8 अवैध पाई गईं. हालांकि चार बिना रजिस्ट्रेशन वाली ट्रॉलियों को जांच के बाद छोड़ दिया गया, जिस पर सवाल उठ रहे हैं. गांव वालों का आरोप है कि खनन बस्ती से महज 100 मीटर दूर हो रहा है, ब्लास्टिंग से घरों में दरारें आ गई हैं और शिकायतों के बावजूद प्रशासन चुप है. मध्य प्रदेश: रेत माफिया बनाम कानून श्योपुर: वन विभाग पर पथराव, मां-बेटे को कुचला राजस्थान के बाद अब मध्यप्रदेश की बात करते हैं, जहां श्योपुर जिले में चंबल अभयारण्य की टीम ने एक अवैध रेत से भरा डंपर पकड़ा. डंपर जब्त कर ले जाते वक्त माफिया ने पथराव कर दिया और वाहन छुड़ाने की कोशिश की. पांच लोगों पर केस दर्ज हुआ. इसी जिले के विजयपुर इलाके में तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने बाइक सवार बेटे को कुचल दिया, मां गंभीर रूप से घायल हो गई. आरोपी चालक फरार है और खबर लिखे जाने तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. रतलाम: पुलिस पर हमला, बीजेपी पार्षद गिरफ्तार रतलाम में अवैध परिवहन की सूचना पर पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली रोकी. तभी 15 से ज्यादा बदमाश पहुंचे और पथराव शुरू कर दिया. ट्रॉली पलटने से एक पुलिसकर्मी दब गया. इस मामले में बीजेपी पार्षद जगदीश प्रजापत को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. बाकी आरोपी फरार हैं और खबर लिखे जाने तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. मुरैना: चंबल में चौबीसों घंटे खनन मुरैना और भिंड चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन का सबसे बड़ा गढ़ बने हुए हैं. दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियां चंबल नदी से रेत निकालकर बेच रही हैं. खनिज विभाग की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है. अधिकारी कहते हैं कि शिकायत मिलने पर जांच होती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है. जबलपुर: अफसरों को कुचलने की धमकी जबलपुर में अवैध खनन की जांच करने पहुंचे तहसीलदार और खनिज विभाग की टीम को माफिया ने ट्रक से कुचलने की धमकी दी. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. खनन कारोबारी रोहित जैन को गिरफ्तार किया गया, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे लोग इतने बेखौफ कैसे हैं. सवाल वही: माफिया इतना ताकतवर क्यों? आजतक की इस जांच में साफ है कि अवैध रेत खनन अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था का बड़ा संकट बन चुका है. जब अफसरों की जान सुरक्षित नहीं, तो आम लोग कैसे सुरक्षित रहेंगे. सरकारें कार्रवाई के दावे कर रही हैं, लेकिन जब तक माफिया पर स्थायी और सख्त शिकंजा नहीं कसा जाता, तब तक चंबल, अरावली और नर्मदा यूं ही लुटती रहेंगी.