samacharsecretary.com

रक्षा उत्पादन में एमपी की बड़ी भूमिका, भारतीय सेना को मिलेंगे 10 ‘अजेय’ टैंक

जबलपुर भारतीय सेना के मुख्य युद्धक दो टी-72 टैंक की मैकेनिकल ओवरहालिंग का कार्य वीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में पूरा कर लिया गया है। अब इसे रोल-ऑन प्रक्रिया के लिए तैयार किया जा रहा है, जो सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी की जाएगी। इसके बाद टैंक को अंतिम परीक्षण के लिए हैवी व्हीकल फैक्ट्री, आवडी (चेन्नई) भेजा जाएगा। टेस्टिंग में सफलता मिलने पर वीएफजे को 10 टी-72 टैंकों (T-72 Tanks) की नई खेप मिलने की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी। 2023 के दौरान कार्य में हुई थी भारी कमी रक्षा कंपनी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड के अंतर्गत आने वाली वीएफजे में वर्ष 2023 के दौरान कार्य की भारी कमी हो गई थी। 1500 करोड़ रुपए तक उत्पादन क्षमता वाली फैक्ट्री के पास उस समय मात्र 500-600 करोड़ रुपए का कार्य शेष था। ऐसे में फैक्ट्री प्रबंधन भविष्य को ने देखते हुए टी-72 टैंक मेंटेनेंस, रिपेयरिंग एंड ओवरहालिंग (एमआरओ) परियोजना पर काम शुरू किया।   इस परियोजना के तहत कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण के लिए चेन्नई भेजा गया, जहां उन्होंने टी-72 टैंक की ओवरहालिंग की तकनीकी बारीकियां सीखी। अप्रैल 2025 में बीएफजे को दो टी-72 टैंक प्राप्त हुए थे थे, जिनकी मैकेनिकल ओवरहालिंग दिसंबर 2025 में पूरी कर ली गई है। दो चरणों में हो रहा ओवरहालिंग कार्य पहले चरण में टैंक के टरेट और हल की ओवरहालिंग की गई। टरेट टैंक का ऊपरी हिस्सा होता है, जिस पर गन माउंट रहती है और जो 360 डिग्री घूमने में सक्षम होती है। वहीं हल वह आधार होता है, जिस पर पूरा टैंक निर्भर रहता है। दूसरे चरण में टैंक के अंदरूनी और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की मरम्मत व बदलाव किया जाएगा।   टी-72 टैंक को सोवियत संघ में डिजाइन और निर्मित किया गया था। भारत ने 1970 के दशक में इसे आयात किया और बाद में हैवी व्हीकल फैक्ट्री, आवडी में इसका स्वदेशी निर्माण और उन्नयन शुरू हुआ। 'अजेय टैंक' के नाम से पहचाना जाने वाला टी-72 आज भी भारतीय सेना के टैंक बेड़े की रीढ़ है।   चेन्नई में होगा प्रशिक्षण- जनसंपर्क अधिकारी टी-72 टैंक की मैकेनिकल ओवरहालिंग का कार्य पूरा हो चुका है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से निरीक्षण के बाद इसे टेस्टिंग के लिए चेन्नई भेजा जाएगा। इसके पश्चात भविष्य में 10 नए टैंकों की खेप मिलने की उम्मीद है, जिनमें मैकेनिकल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की ओवरहालिंग भी की जाएगी। -हर्ष भटनागर, जनसंपर्क अधिकारी, वीएफजे

मध्यप्रदेश में 12,000 आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी की आशंका, जानें कब तक फैसला

जबलपुर मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों (Outsourced Employees) की नौकरी पर 31 मार्च के बाद संकट के बादल मंडरा सकते हैं। वर्तमान में कार्यरत एजेंसियों की टेंडर अवधि इसी तिथि को समाप्त हो रही है, लेकिन अब तक नए टेंडर की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इससे समय पर नई एजेंसी तय होने और कर्मचारियों को निरंतर काम मिलने की संभावना कमजोर नजर आ रही है। दस्तावेज अब तक तैयार नहीं सूत्रों के अनुसार ऊर्जा विभाग से टेंडर प्रक्रिया से जुड़े आवश्यक दस्तावेज अब तक तैयार नहीं हो पाए है। इसी कारण वितरण कंपनियां नई निविदा प्रक्रिया प्रारंभ नहीं कर पा रही है। इस देरी का सीधा असर जिले के 12 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो विभिन्न कार्यों में वर्षों से सेवाएं दे रहे है। बताया जाता है कि विद्युत वितरण कंपनियां अलग-अलग कार्यों के लिए आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं। यह पूरी प्रक्रिया टेंडर के जरिए होती है। हर वर्ष 31 मार्च को टेंडर अवधि समाप्त होती है। आमतौर पर एजेंसी बदलती है, लेकिन कर्मचारी उसी स्थान पर कार्यरत रहते हैं, केवल उनका नियोक्ता बदल जाता है।   जानकारों के मुताबिक नई निविदा प्रक्रिया सामान्यतः दो महीने पहले शुरू कर दी जाती है, क्योंकि टेंडर कई चरणों में पूरा होता है और इसमें पर्याप्त समय लगता है। हालांकि इस बार ऊर्जा विभाग द्वारा बीते करीब डेढ़ साल से एक नई संयुक्त टेंडर प्रणाली के दस्तावेज तैयार किए जा रहे है, जिसके तहत प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों में एक साथ आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी निविदा निकाली जानी है। ऊर्जा विभाग के आदेश का इंतजार मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी फिलहाल ऊर्जा विभाग के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। विभागीय स्वीकृति मिलते ही टेंडर जारी किए जाने की विद्युद् ब्रह्मेति बात कही जा रही है। इस संबंध में मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी के मानव संसाधन विभाग प्रमुख राजीव गुप्ता ने बताया कि ऊर्जा विभाग से आदेश प्राप्त होने के बाद ही नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

नर्मदा पर स्वास्थ्य सेवा की नई पहल: पानी पर तैरते अस्पताल बनेंगे, नदी एम्बुलेंस नेटवर्क होगा विस्तारित

भोपाल मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के घाटों पर फ्लोटिंग अस्पताल शुरू कर नदी एम्बुलेंस का विस्तार किया जाएगा। इससे घाट पर आने वाले तीर्थयात्रियों, परिक्रमावासियों, आगंतुकों और स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने में सुगमता होगी। राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। फिलहाल आलीराजपुर, धार और बड़वानी जिलों में नदी किनारे बसे लोगों को चिकित्सीय सुविधाएं देने के लिए नदी एम्बुलेंस शुरू की गई हैं, जो आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार व दवाएं उपलब्ध कराने में मददगार साबित होंगी।   आदिवासी इलाकों के लिए महत्वपूर्ण कदम खासकर बाढ़ प्रभावित और दूरदराज के आदिवासी इलाकों के लिए यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अलावा वेलनेस और योग टूरिज्म में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए घाटों पर योग, ध्यान केंद्र और पार्क निर्माण भी किए जाएंगे। नर्मदा के घाटों पर प्रतिदिन 2.5 लाख आते हैं श्रद्धालु नर्मदा नदी के 861 घाटों पर प्रतिदिन लगभग 2.5 लाख से अधिक पर्यटक, श्रद्धालु, तीर्थयात्री आते हैं। 396 सूक्ष्म आकार के घाटों पर एक लाख आठ हजार से अधिक, 338 मध्यम आकार के घाटों पर 95 हजार और 116 वृहद आकार के घाटों पर 65 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। डॉक्टर, नर्स सहित मेडिकल सुविधाओं से लैस होगा फ्लोटिंग अस्पताल यानी पानी पर तैरता हुआ अस्पताल, जो दूरदराज के इलाकों और द्वीपों पर रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएगा। यह चिकित्सा सेवाओं को नदी से लगे सड़क विहीन गांवों तक ले जाने में सक्षम होगा। डॉक्टर, नर्सिंग टीम व मेडिकल सुविधाओं से लैस ये अस्पताल आपातकालीन स्थितियों में भी मददगार होंगे। इनमें जरूरी दवाइयां भी उपलब्ध होंगी।

8th Pay Commission पर बवाल: 2.5 लाख कर्मचारियों को नहीं मिला लाभ, वित्त मंत्री को लिखा पत्र

नई दिल्ली केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में घोषित कंपोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज (CSAP) को लेकर विवाद गहरा गया है। ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन ने इस योजना से केंद्र शासित प्रदेशों और स्वायत्त निकायों (Autonomous Bodies) के कर्मचारियों को बाहर रखने पर कड़ी आपत्ति जताई है। फेडरेशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर इस 'नाइंसाफी' को दूर करने की मांग की है। 2.5 लाख कर्मचारियों के साथ भेदभाव का आरोप फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने वित्त मंत्री को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि देश की करीब 5,000 सेंट्रल ऑटोनोमस बॉडीज में लगभग 2.5 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। ये कर्मचारी केंद्र सरकार के ही नियमों के तहत सेवाएं देते हैं, फिर भी उन्हें इस महत्वपूर्ण वेलफेयर बूस्टर से वंचित रखा गया है।   इसमें दिल्ली सरकार (GNCTD) और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी भी शामिल हैं, जो व्यावहारिक रूप से केंद्र के ही अधीन काम करते हैं। क्या है कंपोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज? केंद्र सरकार ने 16 जनवरी को केंद्रीय कर्मचारियों के लिए इस विशेष पैकेज की घोषणा की थी। इसे आठवें वेतन आयोग के लागू होने से पहले एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इस योजना के मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:     बैंकिंग सुविधाएं: एक ही खाते के माध्यम से सभी वित्तीय लेनदेन।     बीमा कवर: कर्मचारियों को बेहतर बीमा सुरक्षा का प्रावधान।     ऋण और कार्ड: आसान लोन प्रक्रिया और विशेष कार्ड सुविधाएं।     वित्तीय सुरक्षा: बैंकिंग जरूरतों को एक ही स्थान पर एकीकृत कर सामाजिक सुरक्षा मजबूत करना। फेडरेशन की प्रमुख मांगें फेडरेशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि प्रधानमंत्री के 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के विजन को ध्यान में रखते हुए समानता सुनिश्चित की जाए। पत्र के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:     समानता का अधिकार: सभी केंद्र शासित प्रदेशों और ऑटोनोमस बॉडीज के कर्मचारियों को तुरंत इस पैकेज में शामिल किया जाए।     सामाजिक न्याय: वित्तीय सुरक्षा के इस लाभ को केवल मंत्रालयों तक सीमित न रखा जाए।     वित्तीय समावेश: 2.5 लाख वंचित कर्मचारियों को भी बैंकिंग और बीमा के ये विशेष लाभ दिए जाएं।

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पर्यटन क्षेत्र में निवेश पर केंद्रित सत्र को संबोधित करेंगे मुख्यमंत्री

भोपाल देश का हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में नए आत्मविश्वास, नई ऊर्जा और दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना चुका है। प्रदेश, प्रकृति की अनुपम सुंदरता, समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, गहन आध्यात्मिक आस्था और विविध वन्य जीवों का अद्भुत संगम है। इन्हीं विशेषताओं और निवेश संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 जनवरी को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पर्यटन क्षेत्र में निवेश पर केंद्रित सत्र को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के दूरदर्शी दृष्टिकोण से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश ने पर्यटन को समावेशी और सतत विकास के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया है। इसके परिणामस्वरूप हाल के वर्षों में प्रदेश में 13.30 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया है, जो मध्यप्रदेश के प्रति बढ़ते राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय विश्वास को दर्शाता है। आध्यात्मिक पर्यटन मध्यप्रदेश की प्रमुख पहचान के रूप में स्थापित हुआ है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 6.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन हो चुका है। इसके साथ ही खजुराहो, सांची, ओरछा, महेश्वर, अमरकंटक और चित्रकूट जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल देश-विदेश के पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण केंद्र बने हुए हैं। राज्य सरकार द्वारा पर्यटन नीति-2025 एवं फिल्म पर्यटन नीति-2025 के माध्यम से निवेश प्रोत्साहन, रोजगार सृजन और सतत पर्यटन विकास को नई दिशा दी गई है। फिल्म पर्यटन नीति-2025 के अंतर्गत मध्यप्रदेश राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म निर्माण के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है, जिससे स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। ग्रामीण पर्यटन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के 81 गांवों में 370 से अधिक होमस्टे विकसित किए गए हैं, जिन्हें 1000 तक विस्तारित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष आय और रोजगार उपलब्ध करा रही है। पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा के अंतर्गत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा, सिंगरौली और खजुराहो को हवाई संपर्क से जोड़ा गया है। साथ ही पीएमश्री पर्यटन हेली सेवा के माध्यम से पर्यटकों को तेज़, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। “बेस्ट टूरिज्म स्टेट ऑफ द ईयर” सहित 18 राष्ट्रीय पुरस्कार, यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में प्रदेश के 4 धरोहर स्थलों का शामिल होना और देश की 69 यूनेस्को धरोहरों में से 15 का मध्यप्रदेश में स्थित होना प्रदेश की वैश्विक पर्यटन क्षमता और प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करता है। मध्यप्रदेश आज पर्यटन, परंपरा और प्रगति के संगम के साथ वैश्विक निवेशकों और पर्यटकों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है।