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जोखिम से राहत: भरथापुर गांव के विस्थापित परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्के घर

लखनऊ.  बहराइच जनपद के राजस्व ग्राम भरथापुर के आपदा प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई घोषणा के क्रम में गुरुवार को कैबिनेट ने ग्राम को विस्थापित कर 136 परिवारों के पुनर्वास की योजना को मंजूरी दे दी है। पुनर्वास के बाद बसाई जाने वाली नई बस्ती का नामकरण मुख्यमंत्री की अनुमति से किया जाएगा। यह गांव एक ओर गेरुआ नदी और दूसरी ओर कौड़ियाल नदी से घिरा हुआ है, जबकि उत्तर दिशा में वन्य जीव क्षेत्र और नेपाल सीमा है। गांव तक सड़क मार्ग न होने के कारण लोगों को केवल नाव के सहारे आवागमन करना पड़ता है, जिससे हर समय जान का खतरा बना रहता है। नाव दुर्घटना में गई थी 9 व्यक्तियों की जान 29 अक्टूबर 2025 को कौड़ियाल नदी में नाव पलटने से 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 नवंबर 2025 को गांव का हवाई सर्वेक्षण किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर बसाने की घोषणा की थी। अब कैबिनेट ने उस घोषणा पर औपचारिक मुहर लगा दी है। सेमरहना गांव में मिलेगा नया ठिकाना आपदा प्रभावित परिवारों को ग्राम पंचायत सेमरहना, तहसील मिहींपुरवा (मोतीपुर) में पुनर्वासित किया जाएगा। इसके लिए करीब 1.70 हेक्टेयर भूमि राजस्व विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जिलाधिकारी बहराइच द्वारा पूरी की जाएगी। हर परिवार को आवासीय प्लॉट और पक्का घर पुनर्वास के तहत विस्थापित 136 परिवारों को अलग-अलग प्लॉट आवंटित किए जाएंगे। इन परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना/प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके। नई बसाई जा रही बस्ती में सड़क, नाली, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग टाइल्स, ग्रीन बेल्ट, एलईडी स्ट्रीट लाइट और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन कार्यों को लोक निर्माण विभाग, ग्राम्य विकास विभाग और जल जीवन मिशन के माध्यम से कराया जाएगा। प्रत्येक परिवार को भूमि आवंटन की जिम्मेदारी उपजिलाधिकारी मिहींपुरवा (मोतीपुर) को दी गई है। सभी अवसंरचनात्मक सुविधाएं विकसित होने के बाद यह बस्ती ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दी जाएगी। वन विभाग के पैकेज के अतिरिक्त मिलेगा लाभ जो परिवार पहले से अपने पुराने स्थान को खाली कर वन विभाग या अन्य विभागों को भूमि सौंप चुके हैं, उन्हें वन विभाग से मिलने वाले पैकेज के अतिरिक्त यह पुनर्वास सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

मेयर चुनाव में बीजेपी का दांव सफल, सौरभ जोशी ने कड़े मुकाबले में मारी बाजी

चंडीगढ़ चंडीगढ़ मेयर चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बार फिर अपना परचम लहराया है। बीजेपी के उम्मीदवार सौरभ जोशी शहर के नए मेयर चुने गए हैं। उन्होंने त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के उम्मीदवारों को करारी शिकस्त दी। बीजेपी पार्षद सौरभ जोशी 18 वोट पाकर चंडीगढ़ के मेयर चुने गए हैं। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार गुरप्रीत सिंह गब्बी को 7 वोट मिले, जबकि AAP के योगेश ढींगरा को 11 वोट मिले। इसके अलावा, भाजपा के ही जसमनप्रीत सिंह सीनियर डिप्टी मेयर चुने गए हैं। दरअसल सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों के लिए मुकाबला भी दिलचस्प था। सीनियर डिप्टी मेयर के लिए बीजेपी ने जसमनप्रीत सिंह, AAP ने मुनव्वर खान और कांग्रेस ने सचिन गलाव को नॉमिनेट किया था। चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों के लिए वोटिंग सुबह 11 बजे शुरू हुई। बीजेपी ने सौरभ जोशी को, कांग्रेस ने गुरप्रीत सिंह गब्बी को और AAP ने योगेश ढींगरा को मैदान में उतारा था। सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए, तीनों पार्टियों के उम्मीदवारों के साथ-साथ एक निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में थे। BJP के पास 18 पार्षद हैं, AAP के पास 11 और कांग्रेस के पास 6 तथा सांसद (मनीष तिवारी) का एक अतिरिक्त वोट है। चुनाव हाथ उठाकर करवाया गया और अगर टाई बना रहता तो म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट के तहत टॉस का प्रावधान था। पिछले साल के विपरीत, इस बार कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मिलकर चुनाव नहीं लड़ा। दोनों पार्टियों के अलग-अलग उम्मीदवार उतारे। 2022 में मौजूदा सदन के गठन के बाद यह पहली बार है कि तीनों पार्टियां मेयर चुनाव में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा। नगर निगम में 35 चुने हुए पार्षद हैं और शहर के सांसद को भी वोट देने का अधिकार है, जिससे कुल वोटर्स की संख्या 36 हो जाती है। इस लिहाज से मेयर चुने जाने के लिए उम्मीदवार को 19 वोटों की जरूरत होती है।  

झारखंड में कोयले का भंडार घटने से कई पुरानी खदानें होंगी बंद

रांची. झारखंड में आने वाले 10 सालों में कोयले की कई पुरानी खदानें बंद हो जाएंगी. राज्य में करीब 44 हजार हेक्टेयर जमीन से कोयले की खुदाई बंद हो जाने की आशंका जताई गई है. यह ऐसी जमीन है, जिनसे क्षमता का 68% से भी कम कोयले की खुदाई हो रही है. कुछ जगह पर तो कंपनियों के लिए कोयले की खुदाई करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है. कोयले की पुरानी खदानों के बंद हो जाने की वजह से राज्य के लाखों कोल श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा. कोयले की खुदाई के लिए 62 हजार हेक्टेयर जमीन झारखंड में करीब 62 हजार हेक्टेयर जमीन कोयले की खुदाई के लिए आवंटित की गई थी. अभी करीब 50 हजार हेक्टेयर में कोयले की खुदाई की जा रही है. इसमें कोल इंडिया की कंपनियों के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियों के कैप्टिव माइंस हैं. इससे करीब 300 मिलियन मीट्रिक टन कोयला प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) निकल रहा है. इसमें 288 एमएमटीपीए कोयला ओपेन कॉस्ट और करीब 12 मिलियन टन अंडर ग्राउंड से निकल रहा है. इसमें प्रत्यक्ष तौर पर करीब 85 हजार से अधिक मजदूर लगे हुए हैं. बंद खदानों के पास पड़ी है 11 हजार हेक्टेयर जमीन राज्य में बंद खदानों के पास करीब 11185 हेक्टेयर जमीन पड़ी हुई है. इसमें ओपेन कास्ट की 4720 और अंडर ग्राउंड माइंस की करीब 6485 हेक्टेयर जमीन शामिल है. इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरमेंट, सस्टनेब्लिटी एंड टेक्नोलॉजी (आइ-फॉरेस्ट) ने झारखंड में ग्रीन ग्रोथ और ग्रीन जॉब्स की संभावना पर स्टडी कराया है. इसमें अगले 10 सालों में झारखंड में खदानों के बंद होने के बाद उपलब्ध जमीन को इसका सबसे बड़ा स्रोत बताया है. किसने तैयार की रिपोर्ट ह्यूस्टन, टेक्सास (यूनाइटेड स्टेट) की संस्था स्वनिति ग्लोबल ने भारत के कोयला प्रभावित जिलों में होनेवाले संभावित बदलाव पर रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की ”कोयला राजधानी” कहे जाने वाले झारखंड के लिए आने वाले दशक बड़े बदलाव के संकेत दे रहे हैं. झारखंड के 24 में से 18 जिले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोयला अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं. झारखंड में धनबाद, गिरिडीह, बोकारो और रामगढ़ जैसे पुराने कोयला जिलों में यह चुनौती सबसे गंभीर है. 2030 तक बंद हो जाएंगी धनबाद की आधी खदानें रिपोर्ट में कहा गया है कि धनबाद की करीब आधी कोयला खदानें इस समय चालू हैं या तो बंद हैं या निष्क्रिय हैं. अनुमान है कि 2030 तक इस क्षेत्र की 80% खदानें या तो समाप्त हो जाएंगी या आर्थिक तौर पर घाटे का सौदा हो जाएंगी. लाखों श्रमिकों की आजीविका पर खतरा धनबाद के कोयला खदानों के बंद हो जाने से न केवल राजस्व की हानि होगी, बल्कि लाखों श्रमिकों की आजीविका पर भी खतरा मंडरा रहा है. सीसीएल वाले इलाके में रामगढ़ जिला इस संक्रमण के दौर का महत्वपूर्ण केंद्र होगा. रामगढ़ को जलवायु परिवर्तन के जोखिमों के मामले में दूसरे जिलों के मुकाबले में कम संवेदनशील पाया गया है. लेकिन, यहां की कोयला निर्भरता अभी भी बड़ी चुनौती है. राज्य के चार जिलों में 73% कोयला खदानें झारखंड में करीब 85 ओपेन कॉस्ट हैं, जबकि 13 अंडर ग्राउंड माइंस चल रहे हैं. राज्य के 18 जिलों में कोयला खनन हो रहा है. इसमें 73% कोयला खदानें धनबाद, हजारीबाग, चतरा और बोकारो जिले में हैं. केंद्र ने पूरे देश में 147 कोयला खदानों को आनेवाले कुछ वर्षों में फेज आउट (खनन लायक नहीं पाने ) की संभावना जतायी है. झारखंड में 2.3 लाख ग्रीन जॉब्स की संभावना झारखंड में कोयला खदानों के बंद हो जाने से श्रमिकों के सामने आजीविका संकट खड़ा हो तो जाएगा, लेकिन अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में संभावनाएं भी काफी हैं. आई-फॉरेस्ट की निदेशक श्रेष्ठा बनर्जी ने कहा कि अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में झारखंड के पास 77 गीगावॉट की विशाल क्षमता है. जिसमें 59 गीगावॉट सौर, 15 गीगावॉट पवन और 2.8 गीगावॉट बायोमास ऊर्जा शामिल है. इस क्षमता का पूर्ण उपयोग करने से राज्य में लगभग 2.3 लाख पूर्णकालिक ग्रीन जॉब्स पैदा हो सकती है. इनमें से 68% के करीब नौकरियां सौर ऊर्जा क्षेत्र में होने की उम्मीद हैं. अगले कुछ वर्षों में बंद होनेवाली कोयला खदान एक संभावना लेकर आ सकती है. रोजगार के नये अवसर पैदा करने होंगे झारखंड जस्ट ट्रांजिशन टॉस्क फोर्स के अध्यक्ष एके रस्तोगी ने कहा कि खदानें बंद होने लगी हैं. सबसे पहले गिरिडीह में खदानें बंद होगी. यहां एक सामूहिक कोशिश की जरूरत है. इसमें कोल इंडिया, भारत सरकार और राज्य सरकार को मिलकर काम करना होगा. वहां रोजगार के नये अवसर पैदा करने होंगे. समय आ गया है कि जमीन पर योजनाओं को उतारा जाये. खाली जमीन रहने पर कब्जा होगा. जब काम होने लगेगा, तो लोगों को विश्वास होगा. कुछ सही होगा. कुछ गलत होगा. इससे आगे का रास्ता निकलेगा.  

मानवीय संवेदना का निर्णय: 99 हिंदू बंगाली विस्थापित परिवारों को स्थायी पुनर्वासन की मंजूरी

लखनऊ. प्रदेश सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर उत्तर प्रदेश में रह रहे हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन को लेकर बड़ा एवं मानवीय फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जनपद मेरठ से जुड़े इस प्रकरण को मंजूरी दी गई। यह मामला जनपद मेरठ की तहसील मवाना के ग्राम नंगला गोसाई का है, जहां पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवार झील की भूमि पर लंबे समय से अवैध रूप से निवास कर रहे हैं। कैबिनेट के फैसले के अनुसार इन सभी 99 परिवारों का पुनर्वासन जनपद कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील में किया जाएगा। ग्राम भैंसाया में पुनर्वास विभाग के नाम दर्ज 11.1375 हेक्टेयर (27.5097 एकड़) भूमि पर 50 परिवारों को तथा ग्राम ताजपुर तरसौली में पुनर्वास विभाग के नाम अंकित 10.530 हेक्टेयर (26.009 एकड़) भूमि पर शेष 49 परिवारों को बसाया जाएगा। प्रत्येक परिवार को 0.50 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी। यह भूमि प्रीमियम अथवा लीज रेंट पर 30 वर्ष के पट्टे पर दी जाएगी, जिसे आगे 30-30 वर्ष के लिए नवीनीकृत किया जा सकेगा। इस प्रकार पट्टे की अधिकतम अवधि 90 वर्ष होगी। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विस्थापित परिवारों के सम्मानजनक और सुरक्षित पुनर्वासन को सुनिश्चित करेगा। लंबे समय से अस्थायी हालात में रह रहे इन परिवारों को अब स्थायी ठिकाना और भविष्य की सुरक्षा मिल सकेगी।

डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा: ई-ऑफिस में बेहतर कार्य करने वाले कर्मियों को मुख्य सचिव विकासशील का सम्मान

रायपुर. मुख्य सचिव  विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्य सचिव ने मंत्रालय सहित राज्य शासन के सभी कार्यालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अनिवार्य रूप से निर्धारित समय में बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए है।उन्होंने ऐसा नहीं करने वालों को सचेत करते हुए कार्यालय में निर्धारित समय पर बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने कहा है।    मुख्य सचिव ने कहा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नही करना स्वीकार नही होगा। मुख्य सचिव ने राज्य शासन के सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस से ही फाईल संचालन  करने कहा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएग। मुख्य सचिव ने कहा है कि राज्य शासन के सभी अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस में ऑनबोर्ड हो जायें। मुख्य सचिव ने कहा कि आगामी वर्ष से अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश आवेदन ई-ऑफिस प्रणाली से ही स्वीकार किए जायेंगे। उन्होंने कहा कि अचल सम्पत्ति का विवरण और एसीआर भी प्रतिवर्ष ई-ऑफिस से ही दर्ज किया जाएगा। मुख्य सचिव ने अधिकारी-कर्मचारियों से कहा है कि टीम भावना से कार्य करें और पूरे देश में छत्तीसगढ़ प्रदेश का नाम उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रदेश के रूप में दर्ज करायें। मुख्य सचिव ने सामान्य प्रशासन विभाग एवं राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों को विभागवार ई-ऑफिस का डेटा तैयार करने के निर्देश दिए। विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को उनके कार्यों की स्थिति की जानकारी एसएमएस द्वारा दी जायें।      मुख्य सचिव ने सभी से ई-ऑफिस में दक्षता से कार्य करने की अपेक्षा की है। उन्होंने आवश्यक निर्देश दिए कि अधिकारी-कर्मचारियों को ई-ऑफिस प्रणाली का प्रशिक्षण देने कहा है। मंत्रालय में आयोजित ई-ऑफिस सम्मान समारोह में जिन अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है उनमें ई-ऑफिस से फाईल वर्क करने के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की संयुक्त सचिव मती जयश्री जैन, आदिवासी विकास विभाग के संयुक्त सचिव  भूपेन्द्र कुमार राजपुत और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त सचिव  प्रणय मिश्रा को प्रशंसा पत्र प्रदान किया गया है। उप सचिव श्रेणी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उप सचिव  दुरदेशी राम संतापर, सीएम सचिवालय के उप सचिव  तीरथ प्रसाद लाड़िया और सामान्य प्रशासन विभाग-1 के उप सचिव  किशोर कुमार भूआर्य को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया। अवर सचिव श्रेणी में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अवर सचिव स्वर्गीय रणबहादुर ग्वाली, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अवर सचिव  अरूण कुमार मिश्रा और गृह विभाग के अवर सचिव  पूरनलाल साहू को ई फाईल के लिए प्रशंसा पत्र दिया गया। अनुभाग अधिकारियों में गृह विभाग के अनुभाग अधिकारी  पी.नागराजन, सामान्य प्रशासन विभाग के अनुभाग अधिकारी  नंदकुमार मेश्राम और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुभाग अधिकारी  भोलेनाथ सारथी को प्रशंसा पत्र दिया गया। इसी तरह से ई-फाईल में अच्छा कार्य करने के लिए खनिज संसाधन विभाग के कनिष्ठ सहायक  प्रदीप कुमार, सामान्य प्रशासन विभाग-3 के कनिष्ठ सहायक  दीनानाथ साहू और सामान्य प्रशासन विभाग-7 के कनिष्ठ सहायक  प्रदीप कुमार राय को प्रशंसा पत्र देकर ई-ऑफिस में ई-फाईल कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया।    मंत्रालय में आयोजित ई-ऑफिस सम्मान समारोह में मुख्य सचिव ने समय पर उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मंत्रालयीन अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया है। इसमें प्रथम 10 में प्रथम स्थान करने वालों में अवर सचिव  राजेन्द्र प्रसाद त्रिपाठी, संयुक्त सचिव  भूपेन्द्र कुमार राजपूत, स्टेनोग्राफर  नवीन नाग, सहायक अनुभाग अधिकारी  योगेन्द्र कुर्रे, अतिरिक्त सचिव  चंद्रकुमार कश्यप, संयुक्त सचिव  अनुपम त्रिवेद्वी, अवर सचिव  मनोज कुमार जायसवाल, सहायक अनुभाग अधिकारी  पवन कुमार साहू, स्टेनोटायपिस्ट भावना यादव और अतिरिक्त सचिव  भूपेन्द्र कुमार वासनिकर को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है। 

जमशेदपुर में 24 अवैध बिल्डिंग ध्वस्त करने का हाई कोर्ट ने दिया आदेश

रांची. झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में जमशेदपुर में अवैध निर्माण मामले कोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल कई याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी की याचिका खारिज करते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि अगर अवैध निर्माण करने वाला कोई भी व्यक्ति कोर्ट में याचिका दाखिल करता है तो उसपर जुर्माना लगाया जाएगा। अदालत ने कहा कि किसी ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है, जिससे यह पता चल सके कि उन्होंने नियमानुसार निर्माण किया है। अवैध निर्माण को बचाने का अधिकार क्यों चाहिए? इनके चलते किसी को पानी और किसी को सूर्य की रोशन नहीं मिली रही है। ईमानदार लोगों का जीवन बर्बाद हो रहा है। कोर्ट इन्हें राहत नहीं दे सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि पूर्व का आदेश हाई कोर्ट की बनाई अधिवक्ताओं की कमेटी, प्रार्थी और प्रतिवादियों का पक्ष सुनने के बाद ही दिया गया है। वकीलों की कमेटी ने कहा है कि शहर में हुए अवैध निर्माण को तोड़ना ही एक मात्र विकल्प है। जेएनएसी की सांठगांठ पर फटकार कोर्ट ने एक बार फिर कहा कि ऐसा करने के लिए जेएनएसी की भरपूर सांठगांठ रही है। अदालत ने कहा कि नौ मार्च तक जेएनएसी 24 अवैध निर्माण को ध्वस्त कर शपथ पत्र दाखिल करे। अगली सुनवाई नौ मार्च को होगी। आदेश के खिलाफ 10 भवन मालिकों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जमशेदपुर में अवैध निर्माण हटाने की मांग को लेकर राकेश कुमार झा की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। उनकी ओर से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) के क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माण एक माह में ध्वस्त करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए जेएनएसी को हर संभव सहयोग प्रदान करे। कोर्ट ने नगर विकास सचिव, जमशेदपुर के उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक को जेएनएसी को सहयोग देने में किसी भी प्रकार की कमी के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है। अवैध निर्माणों के प्रति किसी प्रकार की दया नहीं खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर यह कहा है कि अब अवैध निर्माणों के प्रति किसी भी प्रकार की दया दिखाने का समय नहीं है। इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण संबंधित वैधानिक प्राधिकरणों की मिलीभगत या कम से कम उनकी घोर निष्क्रियता के बिना संभव नहीं हैं। कुछ निर्णयों में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों में उन नगर निकायों या प्राधिकरणों के विरुद्ध भी आदेश पारित किए जाने चाहिए, जिन्हें इस तरह के अवैध निर्माणों को रोकने का दायित्व सौंपा गया है। इस मामले में हाई कोर्ट ने जांच के लिए तीन अधिवक्ताओं की एक समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि निजी प्रतिवादियों द्वारा किए गए निर्माण कानून के अनुरूप नहीं हैं। समिति ने यह भी पाया कि भवन उपनियमों का पालन नहीं होना और संबंधित अधिकारियों की प्रभावी निगरानी नहीं होना ही इस स्थिति के मुख्य कारण हैं, जिसके चलते ईमानदार और कानून का पालन करने वाले नागरिक पीड़ित हो रहे हैं।

नीलकमल सिंह और सनी लियोनी ‘चेहरा तेरा’ के लिए फिर हुए एक साथ

मुंबई, भोजपुरी म्यूज़िक सेंसेशन नीलकमल सिंह एक बार फिर बॉलीवुड की ग्लैमर आइकन सनी लियोनी के साथ अपने बहुप्रतीक्षित नए सिंगल ‘चेहरा तेरा’ में नज़र आ रहे हैं। नीलकमल सिंह और सनी लियोनी की धमाकेदार कोलैबोरेशन ‘लड़की दीवानी’, जिसने 100 मिलियन से ज़्यादा व्यूज़ हासिल किए थे, के बाद यह पावरहाउस जोड़ी एक बार फिर स्क्रीन पर आग लगाने के लिए लौट आई है। टी-सीरीज़ द्वारा प्रस्तुत, ‘चेहरा तेरा’ साल का सबसे ज़्यादा एडिक्टिव डांस ट्रैक बनने का वादा करता है, जिसमें धड़कते हुए रिदम्स, शानदार विज़ुअल्स और नज़रअंदाज़ न की जा सकने वाली केमिस्ट्री का जबरदस्त संगम है। एक हाई-एनर्जी डांस नंबर, जिसमें बेहद कैची हुक है, ‘चेहरा तेरा’ को अशुतोष तिवारी ने लिखा है और इसका संगीत आर. जे. कांग ने तैयार किया है। यह गाना देशभर की प्लेलिस्ट्स और खचाखच भरे डांस फ्लोर्स पर छाने के लिए खास तौर पर तैयार किया गया है। राहुल शेट्टी द्वारा निर्देशित यह विज़ुअली स्टनिंग म्यूज़िक वीडियो नीलकमल के ट्रांसफॉर्मेशन को दर्शाता है – एक नर्डी, आम शख्सियत से लेकर एक कॉन्फिडेंट पार्टी किंग बनने तक का सफ़र, जो रंग-बिरंगे और एनर्जेटिक सीक्वेंसेज़ की बैकड्रॉप में दिखाया गया है। सनी लियोनी अपनी सिग्नेचर ग्लैमर और इलेक्ट्रिफ़ाइंग डांस मूव्स के साथ स्क्रीन पर पूरी तरह छा जाती हैं, जिससे यह ट्रैक ब्लॉकबस्टर स्टेटस तक पहुँच जाता है। नीलकमल ने कहा,“‘चेहरा तेरा’ सीधे दिल से निकला हुआ गाना है! यह पूरी तरह एनर्जी है, पूरी तरह मज़ा – उन सभी लोगों के लिए बना है जो बस डांस करना चाहते हैं और बाकी सब कुछ भूल जाना चाहते हैं। मुझ पर हमेशा भरोसा करने और मुझे इतना शानदार प्लेटफॉर्म देने के लिए टी-सीरीज़ फैमिली को ढेर सारा प्यार। सनी लियोनी की वाइब नेक्स्ट लेवल है! जिस तरह वह परफॉर्म करती हैं, जो एनर्जी वह लेकर आती हैं – वह हर चीज़ को और भी बेहतर बना देती है। उनके मैजिक के बिना यह गाना वैसा नहीं होता।” सनी लियोनी ने साझा किया,“जब मैंने पहली बार ‘चेहरा तेरा’ सुना, तो मुझे तुरंत इस गाने से एक कनेक्शन महसूस हुआ। यह इतना फील-गुड ट्रैक है कि आप खुद को इस पर थिरकने से रोक ही नहीं सकते। नीलकमल के साथ शूटिंग करना हमेशा मज़ेदार होता है – वह बहुत फन हैं और सेट पर इतनी पॉज़िटिव एनर्जी लेकर आते हैं। टी-सीरीज़ के साथ मिलकर अपने फैन्स के लिए इसे बनाते हुए हमने शानदार समय बिताया, और मुझे सच में उम्मीद है कि लोग इसे उतना ही पसंद करेंगे जितना हमने इसे बनाते हुए एंजॉय किया!” ‘चेहरा तेरा’ अब सभी प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर स्ट्रीम हो रहा है, जबकि इसका म्यूज़िक वीडियो एक्सक्लूसिव तौर पर टी-सीरीज़ के यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है।  

देश के लिए मिसाल : कचरे को रिसाइकिल कर बनाया अनोखा संविधान पार्क

लखनऊ. संविधान को समझना अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा। बागपत के बड़ौत नगर पालिका परिसर में ऐसा अनोखा संविधान पार्क विकसित किया गया है, जहां बच्चे खेल-खेल में संविधान के मूल्यों को सीखेंगे, युवा नागरिक कर्तव्यों से जुड़ेंगे और आमजन स्वस्थ जीवन के साथ जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा पाएंगे। कचरे को रिसाइकिल कर बनाए गए इस पार्क ने “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को जमीन पर उतारते हुए देश के लिए एक नई मिसाल पेश की है। सहजता से जुड़ सकेगा हर आयु वर्ग का व्यक्ति यह पार्क सिर्फ हरियाली या टहलने की जगह नहीं, बल्कि एक ओपन क्लासरूम और स्ट्रीट लाइब्रेरी के रूप में विकसित किया गया है। न्याय, समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे संविधान के मूल आदर्शों को प्रतीकों, बोर्डों और संरचनाओं के माध्यम से इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि हर आयु वर्ग का व्यक्ति सहजता से उनसे जुड़ सके। बच्चों के लिए यह पार्क सीखने का आनंददायक माध्यम बन गया है, जहां पढ़ाई बोझ नहीं, अनुभव बन जाती है। संविधान पार्क की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित 600 किलोग्राम की संविधान की किताब की विराट प्रतिकृति है। 11 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ी यह प्रतिकृति न केवल आकार में भव्य है, बल्कि अपने संदेश में भी अत्यंत प्रभावशाली है। संविधान की मूल प्रस्तावना की प्रतिकृति बड़ौत नगर पालिका में स्थापित की गई है। इसका लोकार्पण राज्य मंत्री केपी मलिक और जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने किया है। आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी आंदोलन की भावना को जीवंत करता राष्ट्रपिता का चरखा पूरी तरह रिसाइकल्ड मटीरियल से निर्मित यह प्रतिकृति पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार विकास का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह दिखाती है कि कचरा भी नवाचार और संदेश का माध्यम बन सकता है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि पार्क में स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चरखा आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी आंदोलन की भावना को जीवंत करता है। वहीं बागपत के प्राचीन नाम ‘व्याघप्रस्थ’ की थीम पर विकसित वाटर कियोस्क स्थानीय संस्कृति और इतिहास से जुड़ाव को दर्शाता है। बदलते शहरी परिवेश में भी अपनी जड़ों से जुड़े रहने का यह संदेश पार्क को खास बनाता है। शारीरिक मजबूती के साथ मानसिक और बौद्धिक समृद्धि संविधान पार्क में अधिकारों और कर्तव्यों से जुड़े बोर्ड, बुक प्वाइंट, लाइब्रेरी और स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों की व्यवस्था की गई है। यहां आने वाला व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से सक्रिय होता है, बल्कि मानसिक और बौद्धिक रूप से भी समृद्ध होता है। यही कारण है कि यह पार्क युवाओं के साथ-साथ बच्चों और बुजुर्गों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। देश के लिए प्रेरक मॉडल बनकर उभरा संविधान पार्क जिलाधिकारी अस्मिता लाल के अनुसार, बागपत का संविधान पार्क बेहतर सेहत के साथ-साथ नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों की समझ देता है। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें विकास के साथ संस्कार, आधुनिकता के साथ संविधान और सेहत के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को जोड़ा गया है। संविधान पार्क आज केवल बागपत की पहचान नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है।

राजस्थान में ED ने ठगी की 15.97 करोड़ रुपए की संपत्ति की कुर्क

जयपुर. बहुचर्चित अपेक्षा समूह चिटफंड घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जयपुर आंचलिक कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत 15.97 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। कुर्क की गई संपत्तियों में कुल 37 अचल संपत्तियां और 1.50 करोड़ रुपए की एक चल संपत्ति शामिल है। कुर्क की गई 37 अचल संपत्तियां कृषि और आवासीय भूमि के रूप में हैं, जो बूंदी, बारां और कोटा जिलों में स्थित हैं। ये संपत्तियां मुरली मनोहर नामदेव, दुर्गाशंकर मेरोठा, अनिल कुमार, गिरिराज नायक, शोभा रानी सहित अन्य आरोपियों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं। इसके अलावा समूह से संबंधित 1.50 करोड़ रुपए के बैंक खाते को भी कुर्क किया गया है। यह कार्रवाई 22 जनवरी को की गई। ये था पूरा मामला यह पूरा मामला वर्ष 2012 से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया कि अपेक्षा समूह ने वर्ष 2012 से 2020 के बीच निवेशकों को असाधारण और अव्यावहारिक लाभ का लालच देकर करीब 194.76 करोड़ रुपए की राशि एकत्र की। समूह का मुख्य संचालन कोटा से किया जा रहा था और इसकी गतिविधियां राजस्थान के कई जिलों तक फैली हुई थीं। पुलिस की ओर से मुरली मनोहर नामदेव और अन्य आरोपियों के खिलाफ विभिन्न थानों में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने इस प्रकरण में जांच शुरू की। ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने आपराधिक और दुर्भावनापूर्ण इरादे से ऐसी योजनाएं तैयार कीं, जिनका उद्देश्य केवल भोले-भाले और आर्थिक रूप से कमजोर निवेशकों को फंसाना था। निवेश पर भारी मुनाफे का कोई वैध आधार या वित्तीय तंत्र मौजूद नहीं था। लाभ देकर पुन: करवाया निवेश जांच में यह भी सामने आया कि शुरुआती वर्षों में निवेशकों को नाममात्र का लाभ देकर भरोसा बनाया गया। यह राशि या तो नए निवेशकों से जुटाए गए पैसों से दी जाती थी या पुराने निवेशकों को मिले लाभ को दोबारा निवेश कराने के लिए प्रेरित किया जाता था। इससे योजनाओं के सफल होने का भ्रम पैदा किया गया, लेकिन वास्तविकता में यह पूरी व्यवस्था अस्थिर थी और इसका विफल होना तय था। कोविड-19 महामारी के दौरान स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई, जब बड़ी संख्या में निवेशकों ने अपनी जमा राशि और लाभ लौटाने की मांग की। उस समय समूह इन मांगों को पूरा करने में असमर्थ रहा और योजनाएं पूरी तरह ध्वस्त हो गईं। इसके बाद निवेशकों ने ठगी की शिकायतें दर्ज करानी शुरू कीं। आरोपी हो चुके है गिरफ्तार पुलिस जांच में अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्य आरोपी मुरली मनोहर नामदेव को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा संजय कश्यप को हरियाणा से गिरफ्तार किया गया था, जिसके पास से लैपटॉप, बड़ी संख्या में चेक और नकद राशि बरामद हुई। अन्य सहयोगियों दुर्गा शंकर मेरोठा, अनिल कुमार और गिरिराज नायक की भूमिका भी जांच में सामने आई है। कोटा पुलिस ने इस मामले में 50 से अधिक मुकदमे दर्ज किए हैं और अब तक 2300 से ज्यादा पीड़ित सामने आ चुके हैं। मामले की फैक्ट फाइल जांच की शुरुआत : 2019 में, कोटा और बूंदी जिलों में। पहली कार्रवाई : मुरली मनोहर नामदेव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज। मामले का खुलासा : एसआइटी और कोटा पुलिस ने निवेशकों से शिकायत मिलने के बाद शुरू किया। इतने वर्षों तक हुई चालित : 2012 से 2020 तक – मुख्यालय: कोटा प्रभावित जिले: कोटा, बूंदी, बारां कुर्क की गई संपत्तियां: 37 अचल संपत्तियां (कृषि और आवासीय भूमि) चल संपत्ति: समूह का बैंक खाता 1.50 करोड़ रुपए के साथ निवेशकों की संख्या: 2300 से अधिक पीड़ित सामने आए पुलिस और ईडी की कार्रवाई – 12 कंपनियों का रिकॉर्ड रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) जयपुर से प्राप्त 20 बैंक खातों को सीज लैपटॉप और 250 चेक बरामद 50 से अधिक मुकदमे दर्ज जांच जारी : अन्य डायरेक्टर और निवेशकों के बैंक खाते व संपत्ति नेटवर्क की पड़ताल

आर्थिक परेशानियों से राहत पाने का समय: जनवरी का अंतिम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. जनवरी 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत कल यानी 30 जनवरी को रखा जाएगा. शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा. मान्यता है कि शुक्र प्रदोष का व्रत रखने से न केवल सुख-समृद्धि आती है, बल्कि आर्थिक तंगी से भी मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं इस व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व. प्रदोष व्रत 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग की गणना के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का विवरण इस प्रकार है.     त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 30 जनवरी 2026, 11:09 बजे से.     त्रयोदशी तिथि समाप्त: 31 जनवरी 2026, सुबह 08:25 बजे तक. व्रत की तिथि: चूंकि प्रदोष काल में शिव पूजा का महत्व है, इसलिए यह व्रत 30 जनवरी 2026, शुक्रवार को ही रखा जाएगा. पूजा का सबसे शुभ समय: भगवान शिव की पूजा के लिए शाम को 05:59 PM से रात 08:37 PM तक का समय सर्वश्रेष्ठ है. भक्तों के पास महादेव की आराधना के लिए लगभग ढाई घंटे का शुभ समय रहेगा. शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सप्ताह के अलग-अलग दिनों में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का फल भी अलग होता है. शुक्र प्रदोष व्रत विशेष रूप से सौभाग्य, वैवाहिक सुख और धन-संपदा के लिए किया जाता है. प्रदोष काल वह समय होता है जब भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं. इस समय की गई पूजा से भोलेनाथ जल्द प्रसन्न होकर भक्तों के संकट दूर करते हैं. प्रदोष व्रत की पूजा विधि अगर आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं या जीवन में सुख शांति चाहते हैं, तो इस विधि से पूजा करें. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र (संभव हो तो सफेद) धारण करें. हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें. प्रदोष काल में दोबारा स्नान करें या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ हो जाएं. शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें. भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा सफेद फूल और मिठाई अर्पित करें. पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का निरंतर जाप करें. शुक्र प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और अंत में शिव जी की आरती करें.शुक्र प्रदोष के दिन शिवलिंग पर सफेद चंदन का लेप लगाएं और खीर का भोग लगाएं. इससे शुक्र ग्रह मजबूत होता है और घर में सुख-सुविधाओं की वृद्धि होती है.