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जल संरक्षण से सिंचाई विस्तार तक सरकार का फोकस: मंत्री श्री चौहान

भोपाल. अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री  नागर सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश सरकार जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य लेकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके। मंत्री  चौहान आलीराजपुर जिले के ग्राम मोरासा में हथनी बैराज परियोजना-02 के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  चौहान ने ग्राम मोरासा में हथनी बैराज परियोजना-02 के का भूमिपूजन किया। परियोजना की लागत 471.03 लाख रुपये है। इस परियोजना से ग्राम मोरासा के 324 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे आसपास के क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा।इस परियोजना से जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि होगी और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। मंत्री  चौहान ने कहा कि इस बैराज के निर्माण से आसपास के क्षेत्रों के कुएं, तालाब और बोरिंग का जलस्तर बेहतर होगा। इससे सिंचाई का रकबा बढ़ेगा और किसान वर्षा पर निर्भर नहीं रहेंगे। उन्होंने फाटा परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद अब किसान ग्रीष्म ऋतु में भी फसल ले पा रहे हैं, जबकि पूर्व में खेती केवल बरसात तक सीमित रहती थी। मंत्री  चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं ग्रामीण अंचलों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं और “लखपति दीदी” के रूप में पहचान बना रही हैं। किसानों को किसान सम्मान निधि की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में दी जा रही है। वहीं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए गरीब और पात्र परिवारों को नियमित रूप से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। मंत्री  चौहान ने युवाओं से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ग्रहण कर रोजगार प्राप्त करने का आह्वान किया। साथ ही जो युवा औपचारिक शिक्षा पूरी नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें खेती के साथ वैकल्पिक व्यवसाय अपनाने की सलाह दी। मोबाइल रिपेयरिंग, मोटर मैकेनिक, वेल्डिंग, कियोस्क संचालन, कंप्यूटर प्रशिक्षण जैसे कार्यों के माध्यम से जिले में ही रोजगार के अवसर सृजित करने पर उन्होंने विशेष जोर दिया। किसानों से खेती के साथ पशुपालन और बकरी पालन अपनाकर आय बढ़ाने की भी अपील की।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, जल संसाधन विभाग के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।  

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने किया विकास कार्यो का भूमिपूजन व लोकार्पण

रायपुर. उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन ने किया विकास कार्यो  का भूमिपूजन व लोकार्पण कोरबा नगर निगम के बालको जोन अंतर्गत वार्ड क्र. 47 एवं 39 को आज शनिवार को 02 करोड़ 17 लाख रूपए के विकास कार्यो  की सौगात मिली, जिसमें नवनिर्मित सामुदायिक भवन के लोकार्पण, विभिन्न वार्डों  के 08 स्थानों पर आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण सहित सड़क, नाली व पाईप लाईन विस्तार के नवीन कार्य शामिल हैं। प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन एवं महापौर मती संजूदेवी राजपूत ने इन विकास कार्यो  का भूमिपूजन व लोकार्पण किया। उन्होने पूरी गुणवत्ता के साथ कार्य करते हुए समयसीमा में कार्य को पूरा करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।  नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा वार्ड क्र. 47 शिवनगर बिरसामुन्डा मोहल्ला में 25 लाख रूपये की लागत से सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया है। इसी प्रकार निगम द्वारा वार्ड क्र. 47 अंतर्गत शिवनगर बिरसामुन्डा बस्ती में 30 लाख रूपये की लागत से आर.सी.सी.नाली एवं सी.सी. रोड का निर्माण, बालको जोन के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर 01 करोड़ 04 लाख रूपये की लागत से 08 नग आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण, वार्ड क्र. 39 अंतर्गत रिंग रोड से रोहित घर तक एवं रिंकी घर से विबल साहू घर तक 41 लाख 66 हजार रूपये की लागत से ओ.पी.व्ही.सी. पाईप बिछाने का कार्य एवं वार्ड क्र. 47 अंतर्गत पॉलिटेक्निक कालेज बस्ती 16 लाख 48 हजार रूपये की लागत से ओ.पी.व्ही.सी. पाईप बिछाने का कार्य कराया जाना हैं।  इस मौके पर उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन ने कहा कि वार्डवासियों व आमजन की मांग एवं आवश्यकता के अनुरूप वार्डों  में विकास कार्य किए जाएं, यह हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है, जनता जनार्दन की मांग को पूरा करना, मैं अपना प्रथम कर्तव्य समझता हू। उन्होने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान शिवनगर बिरसामुन्डा मोहल्ला के नागरिक बंधुओं एवं शिव फाउंडेशन के द्वारा सामुदायिक भवन निर्माण की मांग मेरे समक्ष रखी गई थी, उनकी मांग का सम्मान करते हुए 25 लाख रूपये की लागत से यह भवन बनाया गया है, आज यह भवन यहॉं की जनता जनार्दन की सेवा के लिए समर्पित किया गया, अब बस्ती के लोगों को अपने विभिन्न आयोजनों, कार्यक्रमों के लिए एक सुविधापूर्ण स्थान उपलब्ध हो चुका है। मंत्री  देवांगन ने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के आशीर्वाद एवं उप मुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन मंत्री  अरूण साव के मार्गदर्शन में कोरबा नगर निगम क्षेत्र के विकास के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं हो रही है, जो भी प्रस्ताव मेरे द्वारा या महापौर के द्वारा उनके समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं, उन पर शीघ्र स्वीकृति मिल रही है, जिसके कारण कोरबा में तेजी से विकास हो रहा है। उन्हेने आगे कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने देश में दर्जनों जनकल्याणकारी योजनाओं को संचालित कर लोगों के दुख दर्द को दूर किया है, तो वहीं देश के सर्वांगीण विकास की दिशा में भी ऐतिहासिक रूप से कार्य हो रहे है।  इस अवसर पर महापौर मती संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रदेश के उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन कोरबा के विकास के लिए सदैव समर्पित रहे हैं, उन्होने कोरबा के विकास के लिए, वार्ड बस्तियों में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य किया है। महापौर मती राजपूत ने उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुए आगे कहा कि अपने जिस आशा व विश्वास के साथ मुझे एवं उद्योग मंत्री  देवांगन को अपना आशीर्वाद दिया है, आपके उस विश्वास, आपकी उस उम्मीद को कभी खंडित नहीं होने दिया जाएगा तथा हम सदैव आपके सुख-दुख में आपके साथ खडे़ नजर आएंगे, मैं यह विश्वास दिलाती हूॅं। इस अवसर पर पार्षद नरेन्द्र देवांगन, सत्येन्द्र दुबे, वार्ड पार्षद सीमाबाई कंवर व चंदादेवी, पार्षद मुकुंद सिंह कंवर व जनकसिंह राजपूत, मनोज लहरे, प्रफुल्ल तिवारी, तुलसी ठाकुर, नारायण सिंह ठाकुर, ईश्वर साहू, हेतराम चन्द्रा, किशोर साहू, भूपेन्द्र साहू, धनबाई निर्मलकर सहित बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे। रविवार को होगा विकास कार्यो  का भूमिपूजन उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन एवं महापौर मती संजूदेवी राजपूत के द्वारा रविवार 08 फरवरी को नगर पालिक निगम कोरबा के टी.पी.नगर जोनांतर्गत एवं कोरबा जोनांतर्गत वार्ड क्र 09 में किए जाने वाले पेयजल व्यवस्था से जुड़े साढे़ 87 लाख रूपये के कार्यो  का भूमिपूजन किया जाएगा, भूमिपूजन का यह कार्यक्रम टी.पी.नगर स्थित टैगोर उद्यान में दोपहर 03 बजे से आयोजित किया गया है। 

केंद्रीय गृह मंत्रालय का आदेश, MP के दो IPS अफसरों को IB में असिस्टेंट डायरेक्टर पद पर पोस्टिंग

भोपाल   मध्य प्रदेश के दो IPS अफसरों को IB में पोस्टिंग मिली है। इसके बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय का आदेश जारी हो गया है। दोनों अधिकारी भोपाल से रिलीव कर दिए गए हैं । मध्य प्रदेश के 2 IPS अधिकारियों के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। केंद्रीय गृह विभाग ने मध्यप्रदेश कैडर के दो भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अफसरों को प्रतिनियुक्ति गृह विभाग की एजेंसी, इंटेलिजेंस ब्यूरों में तैनात किया है। इस संबंध में आदेश जारी करते हुए दोनों ही अफसरों को राजधानी भोपाल से केंद्र के लिए रिलीव कर दिया है। 2018 बैच के मृगांकी डेका और अभिनव चौक को बड़ी जिम्मेदारी आपको बता दें कि जिन दो IPS अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनयुक्ति मिली है, उनमें 2018 बैच के मृगांकी डेका और अभिनव चौक के नाम शामिल है।  अभिनव चौक राजधानी भोपाल के जोन-3 में पुलिस उपायुक्त के तौर पर सेवारत थे जबकि मृगांकी डेका के पास सहायक पुलिस निरीक्षक के रूप में पुलिस महानिदेशालय में तैनात थी। इससे पहले जारी हुई लिस्ट में 24 आईपीएस अफसरों का तबादला किया गया था। इस आदेश में करीब दर्जन भर जिलों के पुलिस अधीक्षकों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों का भी अन्यत्र जिलों में तबादला कर दिया गया था। लिहाजा ये इन हो IPS अफसरों के  लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 

शेखावाटी में गोल्ड लोन घोटाले का मास्टरमाइंड निकला करोड़पति

झुंझुनूं. झुंझुनूं के नवलगढ़ स्थित पीएनबी बैंक शाखा में सामने आया घोटाला बैंकिंग सेक्टर के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया जा रहा है। 6.50 करोड़ रुपए के गोल्ड लोन घोटाले मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी बैंक के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक अमित जांगिड़ और बीसी संतोष सैनी गिरफ्तार कर लिया है। हैरान करने वाली बात यह है कि मास्टरमाइंड करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला, जिसने घोटाले की रकम से आलीशान मकान, जमीन और महंगी कारें खरीदी। गोल्ड लोन घोटाले के मास्टरमाइंड अमित जांगिड़ के पास अकूत संपत्ति के सबूत मिले हैं। अमित के पास सीकर के पॉश इलाके में 3 मंजिला निर्माणाधीन मकान, सीथल गांव में बड़ा डेयरी फार्म है। जिसमें 100 से अधिक देशी व विदेशी नस्ल की गाय पाल रखी हैं। उसके पास 2 महंगी कार, एक बुलेट मोटरसाइकिल और डेयरी में 2 पिकअप गाड़ी भी मिली। अमित जांगिड़ ने पत्नी के नाम गुढ़ा में जमीन खरीद रखी है। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अलावा अमित जांगिड़ के पास अन्य संपत्ति की जानकारी भी मिली। जिसमें उसने अपनी डेयरी वाली जमीन के पास 5 वर्ष पूर्व 15 बीघा जमीन खरीदी, गांव में ही एक दूसरी जगह 11 बीघा जमीन खरीदी और इस जमीन पर ट्यूबवैल भी बनवा रखा है। इसके अलावा सीथल में ही 2 साल पूर्व 7 बीघा जमीन और भी खरीदने की जानकारी मिली है। पुलिस इसकी भी जांच कर रही है। महिला मित्र को दिया सोना झुंझुनूं पुलिस अधीक्षक बृजेश ज्योति उपाध्याय ने बताया कि मुख्य आरोपी अमित जांगिड़ ने बीसी संतोष सैनी के जरिए लोगों के नाम फर्जी गोल्ड लोन खाते खोले। इसके लिए संतोष सैनी को मोटी रकम व गोल्ड का लालच दिया। अमित जांगिड़ ने अपनी महिला मित्र को बैंक में जमा सोना देकर अन्य बैंकों से गोल्ड लोन भी दिलवा रखा था। ऐसे पकड़ा गाया मुख्य आरोपी मुख्य आरोपी अमित पुलिस को मथुरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर पटरी के पास बैठा मिला। शक होने पर पूछताछ की तो उसने अपना नाम पवन जांगिड़ निवासी श्रीगंगानगर बताया। सख्ती से पूछताछ करने पर सही नाम पता बताया। उसने खुद का 4 करोड़ का बीमा करवा रखा था। वह रेल के आगे कूदकर आत्महत्या करने की योजना बना रहा था। गिरफ्तारी के समय अमित जांगिड़ के पास जहरीला पदार्थ भी मिला है। इससे पहले दिन वह वृ़ंदावन में था। पत्नी ने दर्ज करवाई थी गुमशुदगी की ​रिपोर्ट बताया जा रहा है कि आरोपी अमित को 28 जनवरी को मंडल कार्यालय हनुमानगढ़ में पेश होना था लेकिन वह वहां पहुंचा नहीं और फरार हो गया। इसके बाद अमित की पत्नी ने 30 जनवरी को गुढ़ा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

सफलता को राज्य स्तर पर मिली पहचान, जन भवन में राज्यपाल ने किया सम्मानित, अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा

अयोध्या जिले में एक प्रगतिशील किसान की सफलता की प्रेरणादायक कहानी ने सबका ध्यान खींचा है। तारुन विकासखंड के ग्राम सिहोरिया के निवासी राजित राम ने अपनी मेहनत, नई तकनीकों और योगी सरकार की किसान-समर्थक नीतियों के सहारे मात्र 4.09 हेक्टेयर भूमि पर अमरूद व शिमला मिर्च की खेती से पांच लाख रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ कमाया है। यह उपलब्धि न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सफल रही, बल्कि जिले के अन्य किसानों के लिए भी एक मिसाल बन गई है। जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि जनपद अयोध्या मे प्रगतिशील किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यान विभाग लगातार कार्य कर रहा है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वे पारंपरिक खेती से हटकर बागवानी और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर रुख करें। राजित राम जैसे किसान अब अन्य साथी किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। वे ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर अपनी तकनीक और अनुभव साझा कर रहे हैं। बता दें कि योगी सरकार ने पिछले वर्षों में किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और अन्य सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं पर सब्सिडी, बागवानी मिशन के तहत सहायता और बाजार उपलब्धता बढ़ाने के प्रयासों से किसानों की स्थिति पहले से काफी मजबूत हुई है।  3.40 लाख रुपये लागत, मुनाफे ने भरा उत्साह राजित राम ने बताया कि उन्होंने इस सीजन में 4.09 हेक्टेयर क्षेत्र में अमरूद व शिमला मिर्च की फसल लगाई। इसमें ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग, इंटरक्रॉपिंग और स्टेप क्रॉपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का भरपूर उपयोग किया गया। सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली (ड्रिप इरिगेशन) के कारण पानी की बचत हुई और फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी। कुल निवेश लगभग 3.40 लाख रुपये रहा, जबकि उत्पादन से कुल आय 8.50 लाख रुपये हुई। इससे शुद्ध लाभ 5.10 लाख रुपये प्राप्त हुआ। उत्पादन में 20 टन अमरूद व 14 टन शिमला मिर्च शामिल थी। उन्होंने स्थानीय मंडियों के साथ-साथ मंडलीय स्तर पर भी विपणन किया, जिससे फसल का अच्छा भाव मिला।  राज्यपाल ने थपथपाई पीठ राजित राम की इस सफलता को राज्य स्तर पर भी सराहा गया। जन भवन में शुक्रवार को आयोजित फल-फूल एवं शाकभाजी प्रदर्शनी में उन्होंने भाग लिया, जहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उनकी पीठ थपथपाई और उन्हें सम्मानित किया। यह सम्मान उनके नवाचारपूर्ण कार्य और किसानों की आय बढ़ाने में योगदान के लिए दिया गया। राज्यपाल ने कहा कि ऐसे किसान प्रदेश की प्रगति के प्रतीक हैं और सरकार किसानों की बेहतरी के लिए निरंतर प्रयासरत है। औद्यानिक फसलों से की थी राजित ने शुरुआत अयोध्या जैसे पवित्र स्थल में जहां राम मंदिर के कारण पर्यटन और आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं, वहां बागवानी फसलों की मांग भी बढ़ी है। अमरूद व शिमला मिर्च जैसी फसलें न केवल स्थानीय बाजार में अच्छा दाम पाती हैं, बल्कि आसपास के शहरों में भी निर्यात की जा रही हैं। राजित राम कहते हैं कि मैंने लघु कृषक के रूप में औद्यानिक फसलों से शुरुआत की थी। पहले आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन नवीन तकनीकों और सरकारी सहायता से आय कई गुना बढ़ गई। अब हमारी परिवार की स्थिति आशातीत रूप से बेहतर हो गई है। उनकी सफलता से सिहोरिया गांव और तारुन ब्लॉक के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।

सासाराम में बारात में नाचते समय विवाद में युवक की गोली मारकर हत्या

रोहतास. रोहतास जिले के सूर्यपुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ढोढनडीह गांव में शनिवार की सुबह एक शादी समारोह उस वक्त मातम में बदल गया, जब बारात में चल रहे नाच के दौरान गोली चलने से एक युवक की मंच पर ही मौत हो गई। घटना सुबह करीब पांच बजे की बताई जा रही है, जिससे पूरे गांव में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान, शादी समारोह में था शामिल मृतक की पहचान ढोढनडीह गांव निवासी 24 वर्षीय वीर बहादुर सिंह के रूप में की गई है। जानकारी के अनुसार, गांव निवासी मिथिलेश सिंह की पुत्री की शादी थी। शुक्रवार की शाम भोजपुर जिले के बिहिया थाना क्षेत्र के यादवपुर गांव से बारात आई थी और विवाह समारोह के तहत नाच का आयोजन किया गया था। नाच के दौरान मंच पर हुआ विवाद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाच के दौरान वीर बहादुर सिंह मंच पर नाचने वाली के साथ नाचने पहुंचे और उसे पैसे दे रहे थे। इसी दौरान उनका एक करीबी मित्र भी मंच पर चढ़ गया। वीर बहादुर ने उसे मना किया, जिसको लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। तीन गोलियां चलीं, मौके पर ही मौत विवाद के दौरान आरोपी ने अचानक रिवॉल्वर निकालकर ताबड़तोड़ तीन गोलियां चला दीं। गोली लगते ही वीर बहादुर सिंह मंच पर ही गिर पड़े और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद शादी स्थल पर अफरातफरी मच गई और समारोह की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं। मंच से नोट और मोबाइल बरामद घटना के बाद मंच के आसपास बिखरे हुए नोट और मृतक का मोबाइल फोन पुलिस ने बरामद किया है। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के थाना क्षेत्रों में हड़कंप मच गया। चार थानों की पुलिस मौके पर पहुंची सूचना पर सूर्यपुरा थाना, नटवार थाना, भानस ओपी और दावथ थाना की पुलिस इंस्पेक्टर शेर सिंह यादव और डीएसपी सिंधु शेखर सिंह के नेतृत्व में दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल सासाराम भेजा। एक खोखा बरामद, एफएसएल जांच में जुटी घटनास्थल से एक खोखा बरामद किया गया है। डीएसपी सिंधु शेखर सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह हत्या का मामला प्रतीत होता है। गोली चलाने वाला मृतक का करीबी मित्र बताया जा रहा है। एफएसएल टीम को भी साक्ष्य संकलन के लिए बुलाया गया है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी पुलिस सभी पहलुओं पर गहन जांच कर रही है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है। घटना के बाद से गांव में तनाव का माहौल है और पुलिस सतर्कता बरत रही है।

योगी सरकार ने गांव-गांव तक पहुंचाई बैंकिंग, ‘वन जीपी-वन बीसी सखी’ मॉडल ने लिखी सफलता की नई कहानी

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में ‘एक ग्राम पंचायत–एक बीसी सखी’ योजना ने सफलता की नई कहानी लिखी है। बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट सखी (बीसी सखी) के रूप में काम कर रही ग्रामीण महिलाओं ने अब तक करीब 40,000 करोड़ का बैंकिंग लेन-देन किया है, जिसके जरिए 106 करोड़ से ज्यादा का लाभांश भी मिला है। राज्य में इस योजना के तहत अब तक 40 हजार बीसी सखियां तैनात की जा चुकी हैं, जिनके जरिए बैंक अब लोगों के घर तक पहुंचा है। ग्रामीणों को भी रोजमर्रा के बैंक संबंधित कामों में काफी सहूलियत मिल रही है। योजना से राज्य की हजारों महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं और परिवार की जिम्मेदारी भी उठा रही हैं। गांव में ही मिल रही बैंक की सुविधाएं बीसी सखियां गांवों में लोगों की पैसे जमा करने और निकालने समेत खाते से लेन-देन, लोन के लिए आवेदन, मनी ट्रांसफर, आरडी व एफडी खुलवाने तक में मदद करती हैं। इससे ग्रामीणों को बैंक शाखा तक जाने की जरूरत नहीं पड़ रही। इस योजना की शुरुआत मई 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी। इसका मकसद था कि गांवों के लोगों को बैंक की सुविधाएं उनके घर के पास मिल जाएं और स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिलें। इस सुविधा के शुरू हो जाने के बाद से ग्रामीणों को शहरों के चक्कर काटने से राहत मिली है। सभी ग्राम पंचायतों तक विस्तार राज्य की 57,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों की तैनाती का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत अभी तक 50,225 बीसी सखियों को प्रशिक्षण देकर प्रमाणित किया जा चुका है। इनमें से लगभग 40,000 बीसी सखियां वर्तमान में गांवों में काम कर रही हैं। आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं बीसी सखियां बीसी सखी योजना ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। आज ये महिलाएं गांव में बैंकिंग की पहचान बन चुकी हैं और लोगों का भरोसा भी जीत रही हैं। योगी सरकार की यह योजना गांवों में बैंकिंग पहुंचाने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की मजबूत मिसाल बन रही है। इस योजना के तहत 106 करोड़ रुपये से ज्यादा का लाभांश भी अर्जित किया जा चुका है।

प्रदेश में 1,950 बाढ़ परियोजनाओं से 3.72 करोड़ लोगों को मिला प्रत्यक्ष लाभ

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बाढ़ सुरक्षा और जल प्रबंधन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश में मॉडल स्टेट के तौर पर सामने आया है। वर्ष 2017-18 से लेकर 2025-26 तक हर साल बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं की संख्या, सुरक्षित क्षेत्र और लाभान्वित जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश के आठ प्रमुख रिवर बेसिन गंगा, यमुना, गण्डक, सरयू, रामगंगा, राप्ती-रोहिन, सोन और गोमती नदियों के डूब क्षेत्र में वर्ष 2017 से अब तक 1,950 बाढ़ परियोजनाओं को पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही 3869 किलोमीटर क्षेत्र में 523 तटबंधों का निर्माण किया गया है, जिससे प्रदेश की लगभग 3.72 करोड़ से अधिक आबादी प्रत्यक्ष तौर पर लाभान्वित हुई है, साथ ही प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को भी सुदृढ़ आधार प्राप्त हुआ है।   वर्ष 2017-18 से बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं में निरंतर वृद्धि सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से वर्ष 2017-18 में जहां 74 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाए संचालित की गई थीं, जिनकी संख्या वर्ष 2018-19 बढ़कर 111 हो गई। जिसके चलते प्रदेश में बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र 0.65 लाख हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 1.88 लाख हेक्टेयर पहुंच गया और इससे लाभान्वित जनसंख्या बढ़कर 22.03 लाख पहुंच गई। इसी क्रम में वर्ष 2019-20 में 151 और वर्ष 2020-21 में 196 परियोजनाओं के माध्यम से क्रमशः 2.88 और 5.01 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान की गई। वहीं वर्ष 2021-22 में 167 परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र दोगुना बढ़कर 10.90 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। जिसने प्रदेश के 46.26 लाख लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर राहत प्रदान की।  वर्ष 2023-24 में सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा बाढ़ सुरक्षा कार्य  प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को निरंतर प्रगति देते हुए वर्ष 2022-23 में 283 परियोजनाओं के जरिए 3.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ सुरक्षा प्रदान की गई। वर्ष 2023-24 में प्रदेश में बाढ़ सुरक्षा कार्यों ने अब तक का सर्वोच्च स्तर छुआ। इस वर्ष 362 परियोजनाओं ने 10.79 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सुरक्षा प्रदान की, जिससे 68.97 लाख लोगों को राहत मिली। वहीं वर्ष 2024-25 में 321 परियोजनाओं के संचालन से 4.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ सुरक्षा प्रदान की गई। इसी क्रम में वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 285 परियोजनाओं के माध्यम से बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र में  4.33 लाख हेक्टेयर वृद्धि की गई और 55.69 लाख आबादी को बाढ़ सुरक्षा प्रदान की गई है। विभाग की इन परियोजनाओं के सफल संचालन से प्रदेश में लगभग 3.72 करोड़ से अधिक आबादी प्रत्यक्षतौर पर लाभान्वित हुई है।  रिकार्ड संख्या में तटबंधों के निर्माण से हुआ प्रभावी बाढ़ नियंत्रण  प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण और रिवर बेसिन में रहने वाले लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग तटबंधों का भी निर्माण करता है। इस दिशा में वर्ष 2017 से अबतक 3,869 किलोमीटर की लंबाई के 523 तटबंधों का निर्माण किया गया है। इनमें 464.92 किमी लंबाई के 19 अतिसंवेदनशील और 241.58 किमी के 18 संवेदनशील तटबंध भी शामिल हैं। इस क्रम में बाढ़ से प्रभावित बलिया, देवरिया, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, बहराइच, कुशीनगर सहित अनेक जिलों में कटान-रोधी एवं तटबंध सुरक्षा कार्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अतिरिक्त विभाग प्रदेश में 60,047 किमी की लगभग 10,727 ड्रेनेज परियोजनाओं का भी संचालन करता है। जिनके विस्तार के लिए वर्ष 2025-26 में 74.32 करोड़ रुपये की लागत से गोंडा, बिजनौर, हापुड़, बहराइच और मिर्जापुर में नये ड्रेजिंग कार्यों को मंजूरी दी गई है। प्रदेश में बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र और लाभान्वित जनसंख्या में लगातार वृद्धि, योगी सरकार की जनकेंद्रित और जवाबदेह कार्यसंस्कृति का परिणाम है। राज्य सरकार की इन निरंतर पहलों ने उत्तर प्रदेश को जल प्रबंधन और बाढ़ सुरक्षा के क्षेत्र में देश के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित किया है।

जयपुर-पचपदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को मंजूरी

जयपुर. राजस्थान के औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में बड़ा बदलाव जयपुर से पचपदरा तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे से होने जा रहा है। लगभग 350 से 400 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे से पचपदरा रिफाइनरी को प्रदेश की राजधानी से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे पश्चिमी राजस्थान में यात्रा सुगम होगी और लॉजिस्टिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत आधार मिलेगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 11,492 करोड़ रुपए है। यह एक्सप्रेस-वे जयपुर से शुरू होकर किशनगढ़ (अजमेर), पाली और जोधपुर होते हुए बालोतरा जिले के पचपदरा तक पहुंचेगा। परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है तथा डीपीआर तैयार की जा रही है। संभावना है कि यह मार्ग जोधपुर-पाली क्षेत्र से होकर निकलेगा, जिससे रोहट में प्रस्तावित दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) के पश्चिमी राजस्थान हिस्से को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल हब को सीधा लाभ इस एक्सप्रेस-वे का सबसे बड़ा लाभ पचपदरा रिफाइनरी और प्रस्तावित पेट्रोकेमिकल हब को मिलेगा। रिफाइनरी को कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों के परिवहन के लिए सीधा व सुरक्षित कॉरिडोर मिलेगा, जिससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे से भी जुड़ेगा, जिससे राजस्थान की औद्योगिक कनेक्टिविटी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी। एक्सपोर्ट की राह होगी आसान इस मार्ग के बनने से जयपुर-जोधपुर-बालोतरा की यात्रा समय में लगभग दो से तीन घंटे की कमी आने की संभावना है। हालांकि, सबसे बड़ा लाभ निर्यात क्षेत्र को होगा। एक्सप्रेस-वे को जामनगर-अमृतसर भारतमाला कॉरिडोर से जोड़े जाने के बाद सड़क और कंटेनर रेल मार्ग से भी तेज और आसान तरीके से कांडला पोर्ट तक पहुंच सकेंगे। डीएमआईसी जोधपुर-पाली रोड से जुड़ाव के कारण आगामी औद्योगिक विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। जोधपुर में प्रस्तावित नई रिंग रोड के समीप से एक्सप्रेस-वे गुजरने से ट्रांसपोर्टेशन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। बेहतर लॉजिस्टिक मॉडल, कनेक्टिविटी बढ़ेगी उत्पादों की ट्रांसपोर्टेशन सुगम होगी इस परियोजना से एक्सपोर्ट योग्य उत्पादों की ट्रांसपोर्टेशन सुगम होगी और गुजरात तक की रफ्तार बढ़ेगी। नए औद्योगिक क्षेत्र और रिंग रोड के साथ यह एक्सप्रेस-वे रोजगार के नए द्वार भी खोलेगा। -कुशल प्रजापत, सिविल इंजीनियर फैक्ट फाइल… 350 से 400 किलोमीटर लगभग कुल लंबाई 11,492 करोड़ रुपए लगभग अनुमानित लागत 05 जिले जुड़ेंगे 2 से 3 घंटे की यात्रा समय में कमी

अमित शाह के दौरे से पहले बड़ा घटनाक्रम: 103 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, शीर्ष रैंक के कैडर शामिल

छतीसगढ़  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बस्तर दौरे से ठीक 2 दिन पहले बीजापुर जिले में 103 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इनमें 49 नक्सलियों पर कुल 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपए का इनाम घोषित है। सरेंडर नक्सलियों में डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM), प्लाटून पार्टी कमेटी जानकारी के मुताबिक सिर्फ बीजापुर जिले में ही 1 जनवरी 2025 से अब तक 421 नक्सली गिरफ्तार हुए हैं। 410 माओवादियों ने हथियार छोड़ दिया है। वहीं अलग-अलग मुठभेड़ में कुल 137 माओवादी मारे गए हैं। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 50-50 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी गई है। बीजापुर जिले में गुरुवार को 103 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। कैडर सरेंडर नक्सलियों की संख्या DVCM    1 PPCM    4 ACM    4 प्लाटून पार्टी सदस्य    1 DKAMS अध्यक्ष    3 CNM अध्यक्ष    4 KAMS अध्यक्ष    2 एरिया कमेटी पार्टी सदस्य    5 मिलिशिया कमांडर, डिप्टी कमांडर    5 जनताना सरकार अध्यक्ष    4 PLGA सदस्य    1 CNM सदस्य    12 जनताना सरकार उपाध्यक्ष    4 DAKMS उपाध्यक्ष    1 जनताना सरकार सदस्य    22 मिलिशिया प्लाटून सदस्य    23 जीपीसी    2 DAKMS सदस्य    4 भूमकाल मिलिशिया सदस्य    1 बीजापुर SP जितेंद्र यादव ने कहा कि अंदरूनी क्षेत्रों में कैंप की स्थापना के साथ सड़कों का विस्तार, परिवहन की सुविधा, पानी, बिजली और शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजना ग्रामीणों तक पहुंचने लगी है। सुरक्षा बलों का ग्रामीणों के साथ सकारात्मक संवाद हो रहा है। सामुदायिक पुलिसिंग के तहत जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर और कई माओवादी नेताओं के मारे जाने या उनके आत्मसमर्पण करने के बाद इन लोगों ने वामपंथी उग्रवादी आंदोलन छोड़ने का फैसला किया। SP ने बताया कि माओवादियों के एक डिवीजनल कमेटी सदस्य लच्छू पुनेम उर्फ ​​संतोष (36), गुड्डू फरसा (30), भीमा सोढ़ी (45), हिड़मे फरसा (26) और सुखमती ओयम (27), सभी प्लाटून पार्टी कमेटी के सदस्य हैं। प्रत्येक पर 8 लाख रुपए का इनाम था। इसके अलावा 4 नक्सलियों पर 5-5 लाख रुपए का इनाम था। 15 कैडरों पर 2-2 लाख रुपए का इनाम था। 10 पर 1-1 लाख रुपए का इनाम था। 12 कैडरों पर 50-50 हजार रुपए का इनाम था और 3 पर 10-10 लाख रुपए का इनाम था। SP के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में माओवादियों के आरपीसी (क्रांतिकारी पार्टी समिति) सदस्यों की संख्या ज्यादा है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 50-50 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी गई है। 4 अक्टूबर को आ रहे शाह 4 अक्टूबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर दौरे पर आएंगे। वे जगदलपुर में बस्तर दशहरा की मुरिया दरबार रस्म और लाल बाग मैदान में आयोजित स्वदेशी मेला में शामिल होंगे। अमित शाह के दौरे को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। पहले 71 नक्सलियों ने किया था सरेंडर बता दें कि इससे पहले दंतेवाड़ा जिले में लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर कुल 71 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। इनमें 21 महिला और 50 पुरुष नक्सली शामिल थे। 30 नक्सलियों पर 64 लाख रुपए का इनाम घोषित था। सरेंडर करने वालों में डिवीजन कमेटी मेंबर (DVCM) और एरिया कमेटी मेंबर (ACM) रैंक के नक्सली हैं। कई नक्सली ऐसे थे, जो कई बड़ी मुठभेड़ों में भी शामिल रहे हैं। क्या है लोन वर्राटू अभियान लोन वर्राटू का मतलब होता है घर वापस आइए। इस अभियान के तहत दंतेवाड़ा पुलिस अपने जिलों के ऐसे युवाओं को पुनर्वास करने और समाज की मुख्य धारा में लौटने का संदेश देती है, जो नक्सलियों के साथ हो गए हैं। पुलिस की इस योजना के तहत गांवों में उस इलाके के नक्सलियों की सूची लगाई जाती है। उनसे घर वापस लौटने की अपील की जाती है। उन्हें पुनर्वास योजना के तहत कृषि उपकरण, वाहन और आजीविका के दूसरे साधन दिए जाते हैं, जिससे वे नक्सल विचारधारा को छोड़कर जीवन यापन कर सकें। शाह की डेडलाइन, 2026 तक करेंगे नक्सलवाद का खात्मा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अगस्त 2024 और दिसंबर 2024 में छत्तीसगढ़ के रायपुर और जगदलपुर आए थे। वे यहां अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग मंचों से नक्सलियों को चेताते हुए कहा था कि हथियार डाल दें। हिंसा करोगे तो हमारे जवान निपटेंगे। वहीं उन्होंने एक डेडलाइन भी जारी की थी कि 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा। शाह के डेडलाइन जारी करने के बाद से बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन काफी तेज हो गए हैं। लगातार बड़े नक्सली लीडर मारे जा रहे इससे पहले 21 मई को हुई मुठभेड़ में 27 नक्सली मारे गए। इसमें 1.5 करोड़ का इनामी बसवा राजू भी था। 21 मई की मुठभेड़ से 7 दिन पहले पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर्रेगुट्टा ऑपरेशन की भी जानकारी दी थी। इसमें 31 नक्सलियों को मार गिराया था।छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर स्थित कर्रेगुट्टा के पहाड़ों पर सुरक्षाबलों ने 24 दिनों तक ऑपरेशन चलाया था।