samacharsecretary.com

जयगांव के पश्चिम बंगाल निवासी: बिना वीजा और भारी फीस के भूटान की यात्रा, जिंदगी है शानदार

जयगांव Gateway Of Bhutan Jaigaon: भारत से सिर्फ नेपाल ही नहीं बल्कि भूटान जाना भी बेहद आसान है, यह जगह अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है. हजारों पर्यटक भूटान घूमने जाते हैं और भारत का पड़ोसी देश होने के नाते भारत से भी लोग यहां घूमने जाते रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पश्चिम बंगाल के एक छोटे से शहर से तो आप पैदल ही भूटान जा सकते हैं।  सीमाएं सिर्फ नक्शे पर दिखाई देती हैं, जमीन पर नहीं. ऐसा आपने सुना होगा. लेकिन भारत में ऐसी कई जगहें हैं, जहां यह बात सच साबित होती है. ऐसी ही एक खास जगह है पश्चिम बंगाल का छोटा-सा शहर जयगांव, जहां रहने वाले लोगों की जिंदगी सच में मजेदार है. क्योंकि यहां के लोग जब मन चाहे भूटान में बड़ी आसानी से एंट्री कर सकते हैं।  अच्छी बात यह है कि भूटान जाने के लिए आपको पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं है, आपको सिर्फ परमिट लेना होता है. यह परमिट भूटान सरकार का इमिग्रेशन डिपार्टमेंट देता है. हालांकि भूटान में आधार कार्ड नहीं चलता है इसलिए आप अपना पैनकार्ड और वोटर आईडी लेकर ही भूटान की यात्रा शुरू करें।  जयगांव के लोग भूटान में प्रति रात स्टे पर लगने वाली सस्टेनेबल डेवलेपमेंट फीस देने से बचने के लिए शाम होते ही भारत लौट आते हैं. बॉर्डर टाउन जयगांव के लोगों को भूटान में हर एंट्री के लिए 50-100 रुपये तक की फीस देनी पड़ती है. हालांकि, ये लोग केवल भूटान के शहर फुंशोलिंग तक ही जा सकते हैं. उसके आगे जाने के लिए भी परमिट लगता है।  भारत से पैदल जा सकते हैं भूटान जयगांव भारत-भूटान सीमा पर स्थित है और इसके ठीक सामने है फुंशोलिंग (फुएंत्शोलिंग). इन दोनों शहरों को जोड़ता है मशहूर भूटान गेट, जिसे पार करते ही आप एक अलग देश में पहुंच जाते हैं. भारतीयों के लिए भूटान जाना इतना आसान है कि वो अपने रोजाना के कामों के लिए आसानी से इधर-उधर जाते रहते हैं. पश्चिम बंगाल से सड़क मार्ग से भूटान जाने के लिए पर्यटकों को जयगांव वाले रास्ते से ही होकर गुजरना होता है।  जयगांव की गलियों में भारतीय बाजारों की चहल-पहल से भरा एक अलग ही माहौल देखने को मिलता है, जबकि गेट के उस पार फुंशोलिंग में साफ-सुथरी सड़कें, शांत माहौल और अलग संस्कृति नजर आती है. इस तरीके से एक ही दिन में टूरिस्ट दोनों ही देशों का मजा भी ले लेते हैं और यहां आकर उनको एक अलग ही अनुभव भी होता है।  जयगांव के पास फुंशोलिंग क्रॉस करके आप भूटान में एंट्री कर सकते हैं और खास बात यह है कि यहां पर भारत और भूटान दोनों ही देशों के पैसे चलते हैं. ऐसे में वहां लोगों को ज्यादा परेशानी भी नहीं होती है।  कई भूटानी तो जब जयगांव आते हैं तो इधर के गोलगप्पे, समोसे और रसुगुल्ले खाना नहीं भूलते हैं. वैसे ही भारतीय भी फुंशोलिंग जाकर वहां से शॉपिंग करके आ जाते हैं।  फुंशोलिंग में ही भूटान के परमिट का दफ्तर बना हुआ है, जो हर सुबह 9 बजे खुल जाता है. यहां से आप 15 दिनों का एंट्री परमिट ले सकते हैं, हालांकि यह सोमवार से शुक्रवार ही मिलता है. इसका कारण यह है कि भूटान में शनिवार और रविवार पूरे देश में छुट्टी घोषित की गई है, जिसकी वजह से परमिट ऑफिस बंद रहता है।  जयगांव घूमने की खास जगहें  जयगांव से सिर्फ भूटान नहीं लोग देखने नहीं जाते हैं, बल्कि जयगांव में भी कई ऐसी जगहें जिन्हें देखकर किसी भी मन खुश हो जाए।  बुक्सा टाइगर रिजर्व जयगांव में पहाड़ी इलाके में बसा बेहद सुंदर इलाका है, जहां कई घूमने की जगहें मौजूद हैं. अगर आप जयगांव जाते हैं तो आप वहां से 35 किलो दूर टाइगर रिजर्व जा सकते हैं. जो भूटान के दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र की बक्सा पहाड़ियों में स्थित है और करीब 760 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।  सिकियाझोरा जयगांव में घूमने के लिए सिकियाझोरा भी काफी मशहूर पहाड़ इलाका है, जहां पर तोर्षा नदी बहती है. इस नदी में रोजाना तमाम लोग बोटिंग करने के लिए आते हैं और आसपास के पहाड़ी नजारों का मजा लेते हैं।  हासिमारा तोर्षा नदी के किनारे बसे हासिमारा में आपको दिल को जीतने वाली खूबसूरती देखने को मिलेगी. इस पहाड़ी इलाके में टी-गार्डन देखने को मिलेंगे, इसके अलावा हासिमारा में आपको बंगाली और भूटानी परंपरा देखने को मिलेगी. इस जगह से भूटान की सीमा महज 17 किमी ही दूर है।  भूटान के लिए बेस्ट एंट्री पॉइंट जयगांव से भूटान की यात्रा शुरू करना इसलिए भी आसान है क्योंकि यहां से आगे जाने के लिए परमिट प्रोसेस भी काफी आसान होता है. अगर आप पहली बार भूटान जाने का प्लान बना रहे हैं, तो जयगांव आपके लिए सबसे आसान एंट्री पॉइंट साबित हो सकता है।      यहां पहुंचकर आप बिना ज्यादा भागदौड़ के फुंशोलिंग घूम सकते हैं और फिर आगे थिम्पू या पारो जैसी खूबसूरत जगहों का रुख कर सकते हैं।      एक परमिट पर 15 दिनों तक भूटान आप घूम सकते हैं, जो लोग काम के सिलसिले में भूटान जाते हैं उनको 6 महीने या 1 साल तक का परमिट दिया जाता है.     हालांकि जो लोग थिम्पू और पारो से आगे यात्रा करना चाहते हैं उन भारतीय पर्यटकों को थिम्पू में रूट परमिट लेना होता है।      अपनी कार से सफर करने वाले लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी के सारे पेपर्स रखना भी जरूरी है. बच्चों को जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल आईडी के आधार पर ही परमिट दिया जाता है।      इसके अलावा किसी भी भारतीय नागरिक को पानबांग में रात भर रुकने की इजाजत नहीं है, उन्हें सूर्यास्त से पहले भारतीय इलाके में लौटना होगा।   

नई शिक्षा नीति में बड़ा बदलाव, 2030 तक B.Ed कॉलेज होंगे बंद, सरकार के अल्टीमेटम से बढ़ी टेंशन

भोपाल  शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनईपी) की नई गाइडलाइन के मुताबिक 2030 तक सभी स्टैंडअलोन बीएड कॉलेजों (B.Ed Colleges) को मल्टीडिसिप्लिनरी संस्थानों में बदलना अनिवार्य होगा। यानी अब सिर्फ बीएड या एमएड पढ़ाने वाले कॉलेजों को बीए, बीकॉम, बीएससी जैसे कोर्स भी शुरू करने होंगे। इसके साथ ही 4-वर्षीय इंटीग्रेटेड टोचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) को प्राथमिकता दी जा रही है। गाइडलाइन के बाद बीयू ने ऐसे कॉलेजों की पहचान शुरू कर दी है, जहां केवल बीएड और एमएड कोर्स संचालित हो रहे है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि नए कोर्स शुरू करने से पहले इन संस्थानों का निरीक्षण किया जाएगा और उनकी आधारभूत सुविधाओं का मूल्यांकन होगा। 40 प्रतिशत कॉलेजों पर सीधा असर मध्य प्रदेश में करीब 650 बीएड कॉलेज हैं। जिनमें लगभग 40 प्रतिशत केवल शिक्षक प्रशिक्षण पर आधारित हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ये कॉलेज अकेले बीएड कोर्स नहीं चला सकेंगे। उन्हें या तो पास के मल्टीडिसिप्लिनरी कॉलेज में 3 से 10 किलोमीटर के दायरे में मर्ज होना पड़ेगा या फिर बंद होने की नौबत आ सकती है। जगह और संसाधनों की बड़ी चुनौती निजी कॉलेज संचालकों का कहना है कि वे गाइडलाइन का पालन करेंगे, लेकिन सबसे बड़ी समस्या इंफ्रास्ट्रक्चर की है। नए कोर्स शुरू करने के लिए अतिरिक्त क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी और फैकल्टी की जरूरत होगी। खासतौर पर शहरों के बीच स्थित छोटे कैंपस वाले कॉलेजों के लिए यह चुनौती और कठिन है। 15 करोड़ से 200 छात्रों को आवासीय सुविधा भोपाल. राजधानी के आयुर्वेद व होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालयों के छात्रों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। लंबे समय से छात्रावास की मांग कर रहे विद्यार्थियों के लिए आयुष विभाग ने 15 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए है, जिससे 200 छात्रों को रहने की सुविधा मिलेगी। लंबे समय से थी मांग महाविद्यालयों में सीटें बढ़ीं, लेकिन छात्रावास नहीं बने। छात्र छात्राएं पिछले 3 साल से लगातार मांग कर रहे थे। पिछले वर्ष राशि नहीं मिलने से योजना अटक गई थी। बॉयज हॉस्टल नहीं होने से छात्रों को मिसरौद में किराये के भवन में रखा गया है। आवागमन के लिए बस चलाई जा रही है, जिस पर हर महीने 4 लाख रुपए खर्च हो रहे है। दोनो महाविद्यालयों में बनेंगे छात्रावास आयुष विभाग द्वारा संचालित, पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद संस्थान व शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल में 100-100 सीट के छात्रावास बनाए जाएंगे। महाविद्यालय के प्राचार्य डा. एसके मिश्रा ने बताया, जमीन का चयन व नक्शा तैयार हो चुका है। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई द्वारा किया जाएगा। नई शिक्षा नीति का बड़ा कदम बीयू के रजिस्ट्रार एसबी सिंह का कहना है कि नई गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत किया जा रहा है. जिसका उद्देश्य शिक्षक शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, समग्र और गुणवत्तापूर्ण बनाना है।