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मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी में 31 मार्च को रखेंगे मध्यप्रदेश का ओडीओपी मॉडल

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और संकल्प से मध्यप्रदेश में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) को एक प्रभावी आर्थिक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, जो स्थानीय उत्पादों को पहचान से आगे बढ़ाकर उन्हें बाजार, निर्यात और रोजगार से जोड़ रहा है। इसी सशक्त और परिणामोन्मुख मॉडल को वाराणसी में 31 मार्च को आयोजित सहयोग सम्मेलन में साझा किया जयेगा और यूपी के नवाचारों से अवगत होंगे। ओडीओपी से स्थानीय उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल ओडीओपी के माध्यम से प्रत्येक जिले की विशिष्टता को चिन्हित कर उसे उत्पादन, प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता से जोड़ा गया है। मध्यप्रदेश में यह पहल केवल पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे एक समग्र वैल्यू चेन के रूप में विकसित किया गया है, जिससे कारीगरों, किसानों और सूक्ष्म उद्यमियों को स्थायी आर्थिक अवसर प्राप्त हो रहे हैं। सहयोग सम्मेलन में ओडीओपी से स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल साझा किया जायेगा। प्रदेश के हर जिले की विशिष्टता को मिला आर्थिक विस्तार श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, रतलाम का नमकीन, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, झाबुआ का कड़कनाथ, बुरहानपुर की जरी-जरदोजी, सीहोर का बासमती, बैतूल का सागौन, बालाघाट का चिन्नौर चावल, मंडला-डिंडोरी का कोदो-कुटकी, सतना का टमाटर, शहडोल की हल्दी जैसे विविध उत्पादों को ODOP के अंतर्गत संगठित कर बाजार से जोड़ा गया है। यह व्यापकता यह दर्शाती है कि प्रदेश के हर हिस्से की आर्थिक क्षमता को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के ओडीओपी को सिल्वर अवॉर्ड से राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता मध्यप्रदेश के इन समग्र प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। मध्यप्रेश के ओडीओपी मॉडल को अवॉर्ड-2024 में सिल्वर अवॉर्ड प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि प्रदेश के कारीगरों, किसानों और उद्यमियों की दक्षता और सरकार द्वारा विकसित सुदृढ़ इकोसिस्टम का परिणाम है। निर्यात, कौशल और बाजार को जोड़ता एकीकृत इकोसिस्टम प्रदेश में ओडीओपी को निर्यात संवर्धन, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ते हुए कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। ब्रांडिंग, पैकेजिंग, जीआई टैगिंग और ई-कॉमर्स के माध्यम से उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया जा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। एमपी यूपी सम्मेलन से उभरेंगे नए अवसर और समन्वय एमपी-यूपी सम्मेलन में दोनों राज्यों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और नीति-निर्माताओं की सहभागिता के साथ ओडीओपी के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की दिशा पर केंद्रित रहेगा। इस मंच के माध्यम से मध्यप्रदेश अपने अनुभवों को साझा करते हुए यह प्रदर्शित करेगा कि ओडीओपी को किस प्रकार व्यवहारिक, रोजगारोन्मुख और निर्यात-आधारित मॉडल के रूप में लागू किया जा सकता है। ‘लोकल टू ग्लोबल’ दृष्टि को मिलेगा ठोस विस्तार मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश सम्मेलन से ओडीपी उत्पादों के लिए नए बाजार अवसर विकसित होंगे, निर्यात को गति मिलेगी और कारीगरों तथा उद्यमियों को व्यापक प्लेटफॉर्म प्राप्त होगा। दोनों राज्यों के बीच सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान सुदृढ़ होगा, जिससे ओडीओपी को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त आर्थिक मॉडल के रूप में और मजबूती मिलेगी। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में ‘एक जिला एक उत्पाद’ के अंतर्गत प्रदेश के 50 से अधिक जिलों की विशिष्ट उत्पादकता को चिन्हित कर उसे एक सशक्त आर्थिक ढांचे से जोड़ा गया है। श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन टाइल्स, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, रतलाम का नमकीन, झाबुआ का कड़कनाथ, बुरहानपुर की जरी-जरदोजी, बड़वानी का केला, खरगोन की मिर्च, इंदौर का आलू, सागर के कृषि उपकरण, मंदसौर का लहसुन, नीमच का धनिया, आगर मालवा-राजगढ़-छिंदवाड़ा का संतरा, टीकमगढ़-निवाड़ी का अदरक, देवास-हरदा का बांस, बैतूल का सागौन, बालाघाट का चिन्नौर चावल, नरसिंहपुर की तुअर दाल, सिवनी का सीताफल, सीधी का कालीन, सतना का टमाटर, शहडोल की हल्दी तथा मंडला, डिंडोरी, सिंगरौली और अनूपपुर का कोदो-कुटकी जैसे विविध उत्पादों को वैल्यू चेन आधारित दृष्टिकोण के साथ विकसित किया जा रहा है। उत्पादन से लेकर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता तक एकीकृत समर्थन के माध्यम से यह पहल स्थानीय कारीगरों, किसानों और उद्यमियों को स्थायी आय, बेहतर बाजार और निर्यात के अवसर प्रदान कर रही है, जिससे प्रदेश में संतुलित और समावेशी आर्थिक विकास को नई गति मिल रही है।

खराब मौसम और गीले मैदान ने रोकी चांडिल प्रखंड के अभ्यर्थियों की राह बदली गई भर्ती की तारीख

सरायकेला झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में बारिश के चलते होमगार्ड बहाली की प्रक्रिया पर असर पड़ा है. गीले मैदान और खराब मौसम के कारण निर्धारित तिथि पर होने वाली दौड़ को रद्द कर दिया गया है. अब अभ्यर्थियों के लिए यह दौड़ 8 अप्रैल को आयोजित की जाएगी, जिसमें वे शामिल होकर अपना प्रदर्शन करेंगे. कब होने वाली थी प्रक्रिया सरायकेला के बिरसा स्टेडियम में 28 मार्च 2026 (शनिवार) को होने वाली होमगार्ड बहाली प्रक्रिया बारिश के कारण प्रभावित हो गई. देर रात हुई भारी बारिश से मैदान पूरी तरह गीला हो गया, जिसके चलते अभ्यर्थियों की दौड़ कराना संभव नहीं हो सका. चांडिल प्रखंड के अभ्यर्थी नहीं दे सके दौड़ जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार ने बताया कि चांडिल प्रखंड के युवाओं की शारीरिक परीक्षा के तहत दौड़ आयोजित होनी थी, लेकिन खराब मौसम के कारण इसे स्थगित करना पड़ा. अब 8 अप्रैल को होगी दौड़ अधिकारियों ने बताया है कि अब यह दौड़ 8 अप्रैल को आयोजित की जाएगी. इस दिन सभी अभ्यर्थी बहाली प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे और निर्धारित नियमों के अनुसार चयन प्रक्रिया पूरी की जाएगी. अभ्यर्थियों के लिए बेहतर इंतजाम था भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ख्याल रखा गया. उनके लिए पेयजल, शौचालय, पंडाल सहित सभी जरूरी व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी. मौसम का ध्यान में रखते हुए छाया और बैठने की जगह भी थी जिससे किसी भी अभ्यर्थी को असुविधा न हो.

जालंधर में पेट्रोल डीजल की सप्लाई सामान्य और एडीसी अमनिंदर कौर की अपील

पंजाब खाड़ी देश देश में हो रहे युद्ध के कारण देश भर में लगातार अफवाह उड़ती जा रही है। इसका असर पंजाब में भी देखने को मिल रहा है। पंजाब में प्रशासन के अनुसार अभी गैस और पेट्रोल पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन लोगों ने यह अफवाह को और हवा दे दी है कि अब गैस के साथ पेट्रोल और डीजल की भी कमी होने वाली है।यही कारण है कि लोग इसके स्टोरेज में लगे है और इसका खामियाजा अन्य को झेलना पड़ रहा है। सप्लाई पूरी तरह सामान्य अब पंजाब में हालात बदलते पैट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच प्रशासन ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा है कि सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की कोई किल्लत नहीं है। अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) अमनिंदर कौर ने मीडिया को जानकारी दी है कि जालंधर जिले के लगभग 280 पैट्रोल पंपों और सभी गैस एजैंसियों पर पर्याप्त मात्रा में सप्लाई जारी है।  स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में उन्होंने कहा कि प्रशासनिक टीमें लगातार फील्ड में सक्रिय हैं। पेट्रोल पंपों व गैस एजैंसियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कहीं भी सप्लाई बाधित नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें किसी वास्तविक कमी के कारण नहीं, बल्कि अफवाहों के चलते लोगों द्वारा घबराहट में की गई अतिरिक्त खरीदारी का परिणाम थीं। शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस की आपूर्ति दी जा रही अमनिंदर कौर ने बताया कि जिले में रोजाना लगभग 460 किलोलीटर पेट्रोल और 600 किलोलीटर डीजल की खपत होती है, और इसके अनुसार पर्याप्त मात्रा में सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही सरकार के निर्देशों के अनुसार आवश्यक सेवाओं के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस की आपूर्ति दी जा रही है, वहीं होटल, रैस्टोरेंट और शादी समारोहों के लिए भी गैस की उपलब्धता बनाए रखी गई है। उन्होंने जिला वासियों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और अनावश्यक रूप से पैट्रोल-डीजल या गैस का भंडारण न करें। ऐसा करने से तुरंत प्रभाव से कमी पैदा होती है और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रशासन ने पेट्रोल पंप संचालकों और एसोसिएशनों को भी निर्देश दिए हैं कि पेट्रोल और डीजल केवल वाहनों में ही भरा जाए, न कि बोतलों या अन्य कंटेनरों में। इसके अलावा अधिकारियों द्वारा छुट्टियों के दिनों में भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है और सभी एजैंसियों से नियमित संपर्क बनाए रखा जा रहा है। कमेटी की है गठित इस पूरे मामले की निगरानी के लिए ए.डी.सी. (जनरल) की अध्यक्षता में उच्च अधिकारियों की एक जिला स्तरीय कमेटी गठित की जा चुकी है जोकि इस पूरे घटनाक्रम पर निगरानी रख रही है। यह कमेटी पैट्रोल-डीजल व गैस की सप्लाई, वितरण व्यवस्था और एजैंसियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप हैल्पलाइन नंबर 9646-222-555 जारी किया गया है, ताकि गैस सिलैंडरों की सुचारू सप्लाई सुनिश्चित बनाने के साथ-साथ कालाबाजारी पर निगरानी रखी जा सके।  

अमृतसर में पुलिस ने मारी बड़ी कामयाबी, नाकेबंदी में दो सब-मशीन गन पकड़ी, साजिश नाकाम

 अमृतसर  अमृतसर पुलिस कमिश्नर रेट में नाकाबंदी के दौरान रविवार की सुबह दो सब मशीन गन बरामद की है। पता चला है कि दो आरोपित पुलिस को गच्चा देकर नाकाबंदी से ही फरार हो गए। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कुख्यात गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह उर्फ गोल्डी के इशारे पर यह दो सब मशीन गन भारतीय हद में ड्रोन से गिराई गई थीl कुछ देर में पुलिस कमिश्नर इस बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। स्पष्ट है कि गैंगस्टर और आतंकी पंजाब में बड़ी खूनी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैl पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई इसके लिए गैंगस्टरों की सहायता से भारत में लगातार हथियारों की सप्लाई में जुटी है।

खेती होगी और बेहतर: 5 रुपए में मिट्टी जांच योजना से किसानों को फायदा

झालावाड़. झालावाड़ जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब मात्र 5 रुपए खर्च कर खेत की मिट्टी की सेहत की जांच करवाई जा सकती है। सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में किसानों को जागरुक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत किसान मिट्टी का नमूना लेकर नजदीकी कृषि प्रयोगशाला में जमा करवा सकते हैं। जांच के बाद उन्हें एक मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जाएगा, जिसमें मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म तत्वों की स्थिति का पूरा विवरण होगा। ऐसे लें नमूना खेत के चारों ओर कोने की मेड़ से एक मीटर जगह छोड़कर 9 इंच गहराई का गहरा गड्ढा खोदकर बीच की मिट्टी को निकाले एवं एक गड्ढा खेत के मध्य से वी आकार का खोदे और मिट्टी निकाले। इसके बाद खुरपी की सहायता से वी आकार के गड्ढे से मिट्टी को बारीक कूटकर पीस लें, महीन बना लें एवं बराबर चार भागों में बांटे। अपने सामने के हिस्सों को छोड़ दें एवं दो हिस्से लेकर पुन: चार भागों में बांटकर एक हिस्सा 500 ग्राम का लेकर बायोडिग्रेडबल थैली में भरें। उसके ऊपर एक लेबल लगाएं। जिस पर कृषक का नाम, मय पिता का नाम, खेत का नाप, खसरा, सिंचित, असिंचित का उल्लेख कौनसी फसल जांच से पूर्व ली तथा आगामी फसल जो लेनी है उसका उल्लेख करें एवं एक लेबल थैली के अंदर रखें। ये मिलेगा फायदा मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिलने के बाद किसान यह जान पाएंगे कि उनकी जमीन में किस पोषक तत्व की कमी या अधिकता है। इसके आधार पर वे सही मात्रा में उर्वरकों का उपयोग कर सकेंगे। इससे फसल उत्पादन बढ़ेगा और लागत भी कम होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जांच के अंधाधुंध खाद डालने से मिट्टी की उर्वरता घट रही है, जिसे यह योजना सुधारने में मददगार साबित होगी। खाद एवं उर्वरकों की संतुलित उपयोग सिफारिश अनुसार उर्वरक उपयोग करने से उर्वरक एवं लागत में कमी तथा उत्पादन में वृद्धि होगी। समस्या ग्रसित जमीनों की पहचान होने पर भूमि सुधार किया जाना आसान होगा। भौगोलिक रासायनिक एवं जैविक गुण धर्मों का सम्भावित प्रभाव जो कि मृदा की उर्वरकता एवं उत्पादकता से परिलक्षित होता है। भौतिक रसायनिक एवं जैविक स्थितियां अनुकुल हो, इसकी जांच भी मृदा जांच से मिलती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे हर दो से तीन साल में अपनी मिट्टी की जांच जरुर कराएं। इससे जमीन की सेहत बनी रहेगी और खेती लंबे समय तक टिकाऊ व लाभदायक बनी रहेगी। मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में जमा कराएं किसान फसलों में संतुलित खाद एवं उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर मिट्टी की जांच करा सकते हैं। इसके लिए जिन किसानों ने विगत 3 वर्षों में मिट्टी की जांच नहीं कराई है वे अपने खेत से मिट्टी का नमूना लेकर 5 रुपए शुल्क के साथ अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक को अथवा तबेला हाउस स्थित मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में जमा करा सकते हैं। – चौथमल शर्मा, कृषि अधिकारी झालावाड़

माँ कर्मा के आदर्श हमें एकजुट, संगठित और सशक्त बनने की प्रेरणा देते हैं – मुख्यमंत्री साय

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सूरजपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय भक्त माता कर्मा जयंती महोत्सव 2026 में शामिल हुए और भक्त माता कर्मा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री साय ने सूरजपुर रिंग रोड स्थित भक्त माता कर्मा चौक पहुँचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और माँ कर्मा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि माँ कर्मा का जीवन त्याग, सेवा और समर्पण का प्रेरक उदाहरण है, जो समाज को एकजुटता और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देता है।   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में साहू समाज को एक गौरवशाली, संस्कारित और विकासोन्मुख समाज बताते हुए कहा कि भक्त माता कर्मा, माता राजिम दाई और दानवीर भामाशाह जैसी महान विभूतियाँ इसी समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में साहू समाज की हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका रही है और आगे भी यह समाज प्रदेश को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में सहभागी बनेगा। मुख्यमंत्री साय ने नक्सलवाद के मुद्दे पर अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र, जो लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा, अब विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सड़कों, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ 400 से अधिक गांवों को मुख्यधारा में लाया गया है और आने वाले समय में बस्तर विकास की नई ऊँचाइयों को छुएगा। मुख्यमंत्री साय ने वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और ऊर्जा संकट के बावजूद भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बेहतर स्थिति में है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचें और प्रशासन पर भरोसा बनाए रखें। मुख्यमंत्री साय ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को छत्तीसगढ़ में प्राथमिकता के साथ पूरा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि होली से पहले 25 लाख से अधिक किसानों को 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अंतर राशि का भुगतान किया गया है, वहीं महतारी वंदन योजना के अंतर्गत लगभग 70 लाख महिलाओं को 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है, जिससे उनकी आजीविका को मजबूती मिली है। इसके साथ ही रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को तीर्थ दर्शन का अवसर प्रदान किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज के लिए सामाजिक भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपये तथा बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए 25 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह सहयोग समाज के संगठनात्मक सशक्तिकरण और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने अपने संबोधन में कहा कि साहू समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है और समाज ने अपने परिश्रम एवं समर्पण से देश और प्रदेश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने समाज के विकास के लिए शिक्षा, संगठन और सामाजिक अनुशासन को आवश्यक बताते हुए कहा कि इन्हीं मूल्यों के आधार पर एक सशक्त और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण संभव है। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: छत्तीसगढ़ की रिशिका कश्यप ने जीता रजत

रायपुर. खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत 86 किलोग्राम भारोत्तोलन प्रतियोगिता महिला वर्ग में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का उत्साह बढ़ाया। इस स्पर्धा में महाराष्ट्र की साक्षी बंडू बुरकुले ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक कब्जा किया। यह प्रतिस्पर्धा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर की खेल मैदान में आयोजित की जा रही है। साक्षी बुरकुले ने स्नैच में 68 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 82 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 150 किलोग्राम के साथ पहला स्थान हासिल की, उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में सबसे मजबूत रहा। छत्तीसगढ़ की रिशिका कश्यप ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल की। उन्होंने कुल 121 किलोग्राम (स्नैच 55 किलोग्राम, क्लीन एंड जर्क 71 किलोग्राम) वजन उठाया। वहीं असम की बिटुपुना देओरी ने 118 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। प्रतियोगिता में असम की लिंडा  114 किलोग्राम के साथ चौथे स्थान पर रहीं, जबकि त्रिपुरा की सुमी मोग (77 किलोग्राम) और आंध्र प्रदेश की जेसी रानी (61 किलोग्राम) क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर रहीं। इस स्पर्धा में खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जहां हर प्रतिभागी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास किया। दर्शकों ने प्रत्येक खिलाड़ियों की हौंसला अफजाई करते हुए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन कर इस पूरे आयोजन को जीवंत बनाए रखा।

हवाई कनेक्टिविटी में बड़ा कदम, अंबिकापुर से दिल्ली और कोलकाता उड़ानें शुरू

रायपुर.  उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के लिए 30 मार्च 2026 का दिन ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज होने जा रहा है। माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा (अम्बिकापुर) से देश के प्रमुख महानगरों दिल्ली एवं कोलकाता के लिए नियमित विमान सेवा शुरू होगी। इस पहल से क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने के साथ ही विकास के नए आयाम स्थापित होंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 30 मार्च को प्रातः 10 बजे रायपुर से वर्चुअल माध्यम से विमान सेवा का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर अंबिकापुर के पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम में विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें सांसद, विधायकगण एवं जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं आम नागरिकों उपस्थित रहेंगे।  नई हवाई सेवा के अंतर्गत एलायंस एयर द्वारा 72-सीटर एटीआर विमान संचालित किया जाएगा। अंबिकापुर से दिल्ली के लिए फ्लाइट हफ्ते में दो दिन सोमवार और बुधवार को चलेगी। सोमवार को फ्लाइट सुबह 7.50 बजे दिल्ली से उड़ान भरकर 10.25 बजे बिलासपुर पहुंचेगी, वहां से 10.50 बजे रवाना होकर 11.35 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी। इसके बाद यही फ्लाइट दोपहर 12.05 बजे अंबिकापुर से उड़ान भरकर 2.35 बजे दिल्ली पहुंचेगी। बुधवार को सुबह 7.50 बजे दिल्ली से सीधी फ्लाइट उड़कर 10.25 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी, फिर 10.50 बजे अंबिकापुर से निकलकर 11.35 बजे बिलासपुर पहुंचेगी और वहां से 12.00 बजे उड़कर 2.40 बजे दिल्ली पहुंचेगी। अंबिकापुर से कोलकाता के लिए भी हफ्ते में दो दिन फ्लाइट चलेगी। शनिवार को सुबह 7.05 बजे कोलकाता से फ्लाइट उड़ान भरकर 8.55 बजे बिलासपुर पहुंचेगी, फिर 9.20 बजे वहां से रवाना होकर 10.00 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी। इसके बाद 10.25 बजे अंबिकापुर से उड़कर 12.15 बजे कोलकाता पहुंच जाएगी। वहीं गुरुवार को सुबह 7.05 बजे कोलकाता से सीधी फ्लाइट उड़कर 8.50 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी, फिर 9.15 बजे अंबिकापुर से निकलकर 9.55 बजे बिलासपुर पहुंचेगी और वहां से 10.20 बजे उड़कर 12.05 बजे कोलकाता पहुंचेगी। निर्धारित शेड्यूल के तहत यात्रियों को आने-जाने दोनों दिशाओं में सुविधा उपलब्ध होगी तथा बिलासपुर क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी सुदृढ़ होगी। कोलकाता के लिए भी विमान सेवा प्रारंभ होने से पूर्वी भारत के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र से सीधा संपर्क स्थापित होगा, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नया विस्तार मिलेगा। अम्बिकापुर सरगुजा संभाग का मुख्यालय होने के साथ उत्तर छत्तीसगढ़ का प्रमुख प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं वाणिज्यिक केंद्र है। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, वन संपदा एवं खनिज भंडार से समृद्ध है। साथ ही मैनपाट, तातापानी एवं विविध जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों के कारण यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। हवाई सेवा के प्रारंभ होने से सरगुजा संभाग सीधे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एवं पूर्वी भारत के प्रमुख शहर कोलकाता से जुड़ जाएगा। इससे व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होगा। पर्यटन क्षेत्र में भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से देश-विदेश के पर्यटकों का आगमन बढ़ेगा, जिससे होटल, परिवहन एवं अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी लाभ होगा, जिससे गंभीर मरीजों को महानगरों में शीघ्र उपचार उपलब्ध हो सकेगा। गौरतलब है कि माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा का विकास केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना (उड़ान) के अंतर्गत किया गया है। वर्ष 1950 में निर्मित इस हवाई पट्टी का विस्तार कर रनवे को 1500 मीटर से बढ़ाकर 1800 मीटर किया गया, जिससे अब एटीआर जैसे बड़े विमान यहां संचालित हो सकते हैं। माँ महामाया एयरपोर्ट दरिमा, अम्बिकापुर लगभग 365 एकड़ में फैला हुआ है, एयरपोर्ट के सिविल एवं विद्युतीकरण कार्य हेतु राशि रू. 48.25 करोड़ की स्वीकृति दी गई थी, जिससे इस एयरपोर्ट में सभी कार्य डीजीसीए मानक अनुरूप कराया गया है। मां महामाया एयरपोर्ट टर्मिनल भवन का उन्नयन 72 यात्रियों के अनुरूप कराया गया। हवाई अड्डे में लगभग 100 वाहन की पार्किंग की व्यवस्था के साथ टर्मिनल भवन तक फोरलेन सड़क का निर्माण कराया गया।

छात्रों के लिए सुनहरा अवसर, CBSE देगा प्रदर्शन सुधारने का दूसरा मौका

जमशेदपुर. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं के विद्यार्थियों को अपने प्रदर्शन में सुधार का एक अतिरिक्त अवसर प्रदान किया है। यदि किसी छात्र को अपने परिणाम को लेकर थोड़ी भी शंका है, तो वह सेकंड बोर्ड परीक्षा (विशेष परीक्षा) के लिए आवेदन कर सकता है।  बोर्ड की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार, इस परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक छात्रों को अपने-अपने स्कूलों के माध्यम से आवेदन करना होगा। इसके लिए अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की गई है। ईमेल के जरिए बोर्ड को भेजें सूची सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे इच्छुक विद्यार्थियों की सूची 31 मार्च की शाम पांच बजे तक ईमेल के माध्यम से बोर्ड को भेज दें। यह विशेष परीक्षा मई माह में आयोजित होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि इस प्रकार की परीक्षा का आयोजन सीबीएसई पहली बार कर रहा है। अब तक सप्लीमेंट्री परीक्षा के तहत छात्र केवल एक ही विषय में परीक्षा दे सकते थे, लेकिन इस नई व्यवस्था के तहत छात्र अधिकतम तीन विषयों में दोबारा परीक्षा देकर अपने अंकों में सुधार कर सकेंगे। इच्छुक छात्र निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करें डीएवी बिष्टुपुर की प्रिंसिपल प्रज्ञा सिंह और जेपीएस बारीडीह की प्रिंसिपल नमिता अग्रवाल ने बताया कि इस संबंध में विद्यार्थियों को सूचित कर दिया गया है और इच्छुक छात्र निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर रहे हैं। यह विशेष परीक्षा केवल उन्हीं विद्यार्थियों के लिए होगी, जिन्होंने पहली बोर्ड परीक्षा दी है। स्कूलों द्वारा ही छात्रों की सूची (List of Candidates – LOC) तैयार कर बोर्ड को भेजी जाएगी। इसके माध्यम से बोर्ड को पहले से यह जानकारी मिल सकेगी कि कितने छात्र और किन-किन विषयों में परीक्षा देना चाहते हैं।  शेड्यूल की मुख्य बातें सीबीएसई द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण के मुख्य परिणाम घोषित होने के अगले दिन से पांच दिनों तक छात्रों को परीक्षा शुल्क जमा करना होगा। इसी अवधि में स्कूलों को छात्रों की सूची (LOC) और शुल्क बोर्ड को भेजना होगा।  यदि कोई स्कूल निर्धारित समयसीमा में यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाता है, तो परिणाम घोषित होने के सातवें दिन से अगले दो दिनों तक विलंब शुल्क के साथ यह कार्य किया जा सकेगा। सीबीएसई के प्रमुख निर्देश सभी पास और योग्य छात्र अपने प्रदर्शन को सुधारने के लिए साइंस, मैथ्स, सोशल साइंस और भाषाओं में से अधिकतम तीन विषयों में सेकंड बोर्ड परीक्षा दे सकते हैं। जिन छात्रों ने पहली परीक्षा में तीन या अधिक विषयों में भाग नहीं लिया है, वे इस विशेष परीक्षा के लिए पात्र नहीं होंगे। ऐसे छात्र केवल अगले वर्ष फरवरी में आयोजित मुख्य परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।  जिन छात्रों का परिणाम कंपार्टमेंट आया है, वे सेकंड परीक्षा में कंपार्टमेंट श्रेणी के तहत शामिल हो सकते हैं। सेकंड परीक्षा के लिए LOC में नए नाम जोड़े नहीं जा सकते। विषय परिवर्तन केवल बोर्ड की निर्धारित नीति (विशेषकर गणित विषय के मामले में) के अनुसार ही संभव होगा। छात्र की व्यक्तिगत जानकारी में कोई बदलाव सेकंड परीक्षा के दौरान स्वीकार नहीं किया जाएगा। सीबीएसई की यह पहल छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है, जिससे वे बिना एक साल गंवाए अपने अंकों में सुधार कर सकेंगे।

तीन महीने बाद गंगा की लहरों पर लौटा रो-पैक्स क्रूज अब 250 रुपये में उठाएं सफर का लुत्फ

पटना शहर के निवासियों और पर्यटकों के लिए एक शानदार खबर है। गंगा नदी की गोद में सुकून के पल बिताने का इंतजार अब खत्म हो गया है। तकनीकी मरम्मत और रखरखाव के कारण पिछले तीन महीनों से बंद पड़ा रो-पैक्स क्रूज आज से एक बार फिर अपनी यात्रा शुरू करने जा रहा है। दीघा के जनार्दन घाट से शुरू होने वाली यह सेवा नए उत्साह और कुछ बदलावों के साथ पर्यटकों का स्वागत करने के लिए तैयार है। ​ किराये में कटौती, समय में थोड़ा बदलाव ​पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस बार प्रबंधन ने किराये में राहत दी है। अब प्रति व्यक्ति सफर के लिए आपको 300 रुपये के बजाय केवल 250 रुपये खर्च करने होंगे। हालांकि, सैर की अवधि को 45 मिनट से घटाकर 40 मिनट कर दिया गया है। यह निर्णय पर्यटकों की भारी भीड़ और परिचालन की सुगमता को देखते हुए लिया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इस सेवा का आनंद ले सकें। ​ विस्तार की योजना: अब गांधी घाट तक होगा सफर ​वर्तमान में यह क्रूज दीघा के जनार्दन घाट के आसपास ही संचालित होता है, लेकिन जल्द ही इसकी सीमाओं को बढ़ाने की तैयारी है। संचालक टीम इसे गांधी घाट तक ले जाने की योजना बना रही है, जिससे सैलानी गंगा में लगभग 15 किलोमीटर की लंबी सैर कर सकेंगे। इसके लिए अप्रैल माह में पर्यटन निगम और जिला प्रशासन को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा। ​ गंगा की लहरों पर मनाएं खुशियों का जश्न ​यह क्रूज केवल सैर-सपाटे तक सीमित नहीं है। इसमें निजी कार्यक्रमों जैसे बर्थडे पार्टी, शादी की सालगिरह और सगाई के लिए एडवांस बुकिंग की विशेष सुविधा दी गई है।     ​क्षमता: एक बार में 300 पर्यटक सवार हो सकते हैं।     ​पैकेज: 1 घंटे से लेकर 8 घंटे तक के विशेष पैकेज उपलब्ध हैं।     ​शुल्क: इन आयोजनों के लिए 40 हजार रुपये से लेकर 2.20 लाख रुपये तक का शुल्क निर्धारित किया गया है।     ​पटना की गंगा आरती और रिवर फ्रंट के दृश्यों को इस क्रूज से देखना वाकई एक यादगार अनुभव साबित होगा।