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आईटी, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और एआई जैसे आधुनिक कोर्स से छात्र होंगे सशक्त

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा और कौशल विकास को एकीकृत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा अब प्रदेश के 18 अटल आवासीय विद्यालयों में ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ लागू किया जाएगा, जिसके तहत 3447 विद्यार्थियों को आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।  यह कदम प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशन में बढ़ाया जा रहा है। प्रोजेक्ट प्रवीण के अंतर्गत विद्यार्थियों को आईटी, आईटीईएस, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। अब तक यह कार्यक्रम केवल सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में संचालित था, लेकिन अटल आवासीय विद्यालयों को जोड़ने से इसका दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर कराए गए सर्वे के आधार पर  विद्यालयों को चयनित किया गया है। सर्वे के अनुसार आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, आजमगढ़, बस्ती, बांदा, गोंडा, झांसी, कानपुर नगर, लखनऊ, बुलंदशहर, मिर्जापुर, प्रयागराज, गोरखपुर, मुजफ्फरनगर, वाराणसी, बरेली और मुरादाबाद स्थित 18 अटल आवासीय विद्यालयों के कुल 3447 छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण के लिए पात्र पाया गया है। विद्यार्थियों की विशेष रुचि आईटी, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और अपैरल सेक्टर में देखी गई है। अटल आवासीय विद्यालय प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत संचालित हो रहे हैं, जिनका उद्देश्य श्रमिकों, प्रवासी कामगारों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के प्रतिभावान बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा प्रदान करना है। कक्षा 6 से 12 तक संचालित इन विद्यालयों में अब आधुनिक कौशल प्रशिक्षण भी जोड़ा जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बल मिलेगा। मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ एक 210 घंटे का निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें आईटी, ब्यूटी, हेल्थकेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स और इंडस्ट्रियल विजिट भी शामिल हैं। अब इसमें ‘AI for All’ मॉड्यूल को भी जोड़ा गया है, जिससे विद्यार्थी तकनीकी रूप से सशक्त बन सकें। उन्होंने कहा कि अटल आवासीय विद्यालयों को इस परियोजना से जोड़ने से वंचित एवं दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी और “स्कूल से स्किल” मॉडल को मजबूती मिलेगी। इससे विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

भूपेश vs शाह बयानबाजी गरमाई, CM साय बोले- बस्तर में नक्सलवाद खत्म, अब विकास की रफ्तार

रायपुर. छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश से नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। वहीं इस मामले पर सियासत भी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को नक्सलवाद के मुद्दे पर बहस की चुनौती दी है। बघेल ने कहा है कि कांग्रेस की सरकार में नक्सल समस्या को खत्म करने केंद्र की भाजपा सरकार को पूरा सहयोग किया गया था, लेकिन अमित शाह ने संसद में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान यह झूठ कहा कि कोई सहयोग नहीं किया था। सच्चाई यो यह है कि मदद भी किया गया था। साथ नक्सल मोर्चे पर जोखिम लेकर हमारी सरकार ने विकास के अनेक कार्य किए थे। वहीं, नक्सलवाद को लेकर सीएम विष्णुदेव साय ने कहा है कि आज 31 मार्च का ये दिन प्रदेश के लिए ऐतिहासिक दिन है। हमारे जवानों के साहस से छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद समाप्त हुआ है। इसके लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री का बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं। नक्सलवाद छत्तीसगढ़ के विकास में बड़ा बाधक था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2024 में नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया था और उनका संकल्प पूरा हुआ है। अब बस्तर क्षेत्र बहुत तेजी से विकास करेगा। सीएम ने बताया, अमित शाह ने नक्सलवाद और कांग्रेस के आरोपों पर कहा है कि भूपेश बघेल ने जो कहा है वह असत्य है। अपनी कमजोरी को छुपाने के लिए उन्होंने ऐसा कहा है। दिसंबर 2023 में सरकार आने के बाद अगले ही महीने नक्सल प्रभावित प्रदेश की समीक्षा हुई और उसमें पता चला कि 75 फीसदी नक्सलवाद छत्तीसगढ़ में है। अपने 5 साल के कार्यकाल में तत्कालीन छत्तीसगढ़ सरकार माओवाद के साथ लड़ने में दृढ़ता प्रकट की होती, ठीक नियत से लड़ी होती तो ऐसा नहीं होता, लेकिन प्रदेश शासन का सहयोग केंद्र सरकार को नहीं मिला। वे सरासर झूठ बोल रहे हैं। झीरम के सबूत को लेकर सीएम साय ने कहा कि डॉ. रमन सिंह की जब सरकार थी तो वो नेता प्रतिपक्ष थे तो कहते थे झीरम घाटी का सबूत हमारे जेब में है। सरकार में ना तो वह झीरम घाटी की जांच करवा पाए न ही जेब वाला सबूत निकला। राहुल गाधी जब यात्रा किए, वामपंथियों से वह मिलते थे, इस सवाल पर सीएम ने कहा, देश जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल की अनेकों जगह नक्सलियों से मुलाकात हुई थी। कई जगहों पर उन्होंने मंच साझा किया। हिड़मा जब न्यूट्रलाइज हुआ तब इंडिया गेट के पास 'कितने हिड़मा मारोगे' का नारा लगाया गया और उसको राहुल गांधी ने ट्वीट किया था। यह क्या प्रमाणित करता है, देश जानती है किसके पीछे राहुल गांधी का क्या आशय है.

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने दी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई

रायपुर  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता के बीच आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर श्री शर्मा ने मुख्यमंत्री को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मिली इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई देते हुए पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि के नए युग की ओर अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद वर्षों तक प्रदेश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना रहा और विशेष रूप से बस्तर अंचल लंबे समय तक लाल आतंक के साये में रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और नक्सल प्रभावित सभी क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा मजबूत हो रही है। बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण तैयार हो रहा है, जिससे आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और प्रभावी रणनीति को दिया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भयमुक्त और सुरक्षित छत्तीसगढ़ का सपना आज साकार हो रहा है। मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी शहादत ने इस सफलता की नींव रखी है। उन्होंने सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके अथक प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलमुक्त वातावरण में अब छत्तीसगढ़ तेज गति से विकास के नए सोपान गढ़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत का सपना युवाओं की सक्रियता से होगा पूरा : उप सभापति राज्यसभा सिंह

भोपाल विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार हो सकता है, जब हमारे युवा विधायक अपने कर्तव्यों का निष्ठा और दूरदर्शिता के साथ पालन करें। इस तथ्य को रेखांकित करते हुए राष्ट्रकुल संसदीय संघ भारत क्षेत्र जोन-6) के समापन सत्र में युवा विधायकों ने पांच संकल्प लिए। विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर ने युवा विधायकों को संकल्प दिलाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी का विकसित भारत 2047 का विजन केवल सरकार का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का संकल्प है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। मध्यप्रदेश विधानसभा में आयोजित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन (राष्ट्रकुल संसदीय संघ भारत क्षेत्र जोन-6) के समापन सत्र में ये संकल्प लिए गए। सम्मेलन में लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी एवं विकसित भारत 2047 में विधायकों की भूमिका पर विचार व्यक्त किये गये। समापन सत्र में उप सभापति राज्यसभा  हरिवंश सिंह ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज गति से उभरती अर्थव्यवस्था है। भारत चुनौतियों से निपट कर नया इतिहास बना रहा है और आने वाली सदी भारत की होगी। इसके लिए सकारात्मक और दूरदर्शी सोच के साथ कार्य करना आवश्यक है। विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने के लिए युवा विधायकों को समसामयिक परिस्थितियों में देश के प्रति समर्पण भाव से कार्य करना होगा। नेतृत्व विकास के लिए सकारात्मक सोच और अनुशासन से कार्य करना होगा। मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि युवा विधायक चुनौतियों का समाधान कर अपनी नेतृत्व क्षमता का नवाचार में उपयोग करें। युवा नेतृत्व समाज की सोच में परिवर्तन ला सकता है। सुशासन के क्षेत्र में प्रयास हों और विकास को जनआंदोलन बनाया जाये। लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों का जागरूक होना अनिवार्य है।  तोमर ने बताया कि युवा विधायकों ने टेक्नोलॉजी, स्वच्छता, सोलर एनर्जी, शिक्षा गुणवत्ता, अधोसंरचना, जनसंवाद और जनकल्याण पर विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने युवा विधायकों को सीख दी कि अध्ययन का विशेष महत्व होता है और विद्यार्थी भाव सदैव बना रहना चाहिए। डॉ. राहुल कराड़ ने बताया एआई का महत्व कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसेासिएशन इंडिया रीजन के डॉ. राहुल कराड़ ने कहा कि हर विधानसभा में इस तरह के सम्मेलन किये जाना चाहिए। समाज का रूख बदलने में विधायकों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। विधायक अपने-अपने क्षेत्र के ब्रांड एम्बेसेडर होते है। उन्होंने ट्रेनिंग और एजुकेशन के साथ एआई के महत्व को भी बताया। सम्मेलन में विधानसभा के सात दशक पर केन्द्रित विधायिनी पत्रिका का विमोचन हुआ। विधायक सर्व डॉ. अभिलाष पाण्डेय, संतोष वरवडे, सु रामसिया भारती, छत्तीसगढ़ से मती विद्यावती सिदार, राजस्थान से  थावर चंद सहित अन्य विधायकों ने विचार व्यक्त किये। दो दिवसीय सम्मेलन में तीन राज्यों के लगभग 40 विधायकों ने सम्मेलन में दिए गए विषयों पर अपने वक्तव्य दिए। कार्यक्रम में संसदीय कार्य मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल, पूर्व मंत्री  अजय विश्नोई, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  सीताशरण शर्मा, महापौर मती मालती राय सहित अन्य पदाधिकारी एवं युवा विधायक मौजूद थे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंत में विधानसभा के सचिव  अरविन्द शर्मा ने आभार व्यक्त किया। युवा विधायकों के पांच संकल्प संकल्‍प – 1 हम, युवा विधायक सम्‍मेलन में यह दृढ संकल्‍प लेते है कि लोकतंत्र की सशक्तता का मूल आधार नागरिकों की सक्रिय भागीदारी है। अत: एक मजबूत और समावेशी लोकतंत्र के निर्माण में हम युवा विधायक महत्‍वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे। संकल्‍प – 2 हम, युवा विधायक समाज की नई ऊर्जा, नवाचार और परिवर्तन की सोच का प्रतिनिधित्व करते हुये नागरिकों और शासन के बीच सेतु का कार्य करेगे, हम जनसरोकारों को समझकर आम जनता की समस्याओं को विधानसभा तक पहुँचायेंगे तथा पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी नीतियों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभायेंगे ताकि लोकतांत्रिक संस्‍थायें जनता के प्रति उत्‍तरदायी हो सके। संकल्‍प – 3 हम, नागरिकों को जागरूक और सशक्त बनाने हेतु सतत्/सार्थक प्रयास करेंगे ताकि वे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लें. तकनीक और नवाचार का उपयोग कर शासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दीर्घकालिक नीतियाँ बनाने एवं युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों की आवाज़ को सशक्त बनाने हेतु सक्रिय भूमिका निभायेंगे जिससे जनता और उनकी विधायिकाओं के बीच प्रभावी संपर्क स्‍थापित हो सके तथा सार्थक सहभागी शासन सुनिश्चित किया जा सके। संकल्‍प – 4 हम युवा विधायक, राजनीतिक दबाव, संसाधनों की कमी, सामाजिक असमानताएँ और बदलती वैश्विक परिस्थितियों का सामना करते हुये ईमानदारी, प्रतिबद्धता और दूरदर्शिता के साथ कार्य करने के लिये दृढ संकल्पित रहेंगे, ताकि हमारे राष्‍ट्र की लोकतांत्रिक परम्‍परायें और मूल्‍य और अधिक गहरे तथा सशक्‍त बन सके। संकल्‍प – 5 हम यह भी संकल्प लेते हैं कि हम स्वयं भी एक जागरूक नागरिक बनेंगे, विधायिकाओं में होने वाली बहसों और चर्चाओं में जनप्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु शोध एवं अनुसंधान सहायता को सुदृढ करेंगे. लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी निभाएँगे और ऐसे नेतृत्व का समर्थन करेंगे जो देश को विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ाए।  

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सिर्फ 50 किलोमीटर दूर होने के कारण बड़ी संख्या में अमेरिका और यूरोप से आ सकेंगे विदेशी पर्यटक

लखनऊ अलीगढ़ का ऐतिहासिक ताला उद्योग अब वैश्विक पहचान बनने जा रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अलीगढ़ में देश का पहला ‘लॉक म्यूजियम’ स्थापित करने का निर्णय लिया गया है, जो इस पारंपरिक उद्योग को संरक्षित करने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और नवाचार से जोड़ने का काम करेगा। इस पहल से ताला उद्योग का सालाना कारोबार 10 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंचने की संभावनाएं भी मजबूत हो गई हैं। सबसे खास बात यह है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से महज 50 किलोमीटर दूर होने के कारण बड़ी संख्या में अमेरिका और यूरोप से विदेशी पर्यटक यहां आ सकेंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर तैयार की जा रही इस योजना का उद्देश्य अलीगढ़ के ताला उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। यह म्यूजियम न केवल एक प्रदर्शनी स्थल होगा, बल्कि एक व्यापक औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां पारंपरिक हस्तनिर्मित तालों से लेकर आधुनिक हाई-टेक सुरक्षा प्रणालियों तक की विकास यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां इस उद्योग की तकनीकी, सामाजिक और आर्थिक यात्रा को समझ सकेंगी। म्यूजियम में प्रशिक्षण, शोध और तकनीकी विकास से जुड़े कार्यक्रम होंगे नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह पहल अलीगढ़ को उत्तर प्रदेश की वैश्विक औद्योगिक पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी। म्यूजियम के माध्यम से युवाओं में कौशल विकास, डिजाइन, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे उद्योग को नई दिशा प्राप्त होगी। साथ ही शिक्षा, शोध एवं तकनीकी जागरूकता के जरिए यह क्षेत्र नई आर्थिक ऊंचाइयों को छुएगा। सीएम योगी के निर्देश पर म्यूजियम को एक स्थायी ज्ञान केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा, जहां प्रशिक्षण, शोध और तकनीकी विकास से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे।  निर्यात और बाजार विस्तार को नई गति मिलेगी म्यूजियम बनने से पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के साथ-साथ उनकी उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार होगा। वहीं ताला बनाने वाली एमएसएमई इकाइयों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा, जिससे निर्यात और बाजार विस्तार को नई गति मिलेगी। बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे यह परियोजना पर्यटन, अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। लॉक म्यूजियम के विकसित होने से देश-विदेश के पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा, जिससे स्थानीय व्यापार और सेवाओं को मजबूती मिलेगी। साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे युवाओं को नई संभावनाएं मिलेंगी। उत्तर प्रदेश की औद्योगिक छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होगी सशक्त नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह पहल अलीगढ़ के ताला उद्योग को पारंपरिक पहचान से आगे बढ़ाकर आधुनिक और वैश्विक स्वरूप प्रदान करेगी। यह न केवल एक ऐतिहासिक उद्योग को संरक्षित करेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक छवि को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सशक्त बनाएगी।

क्यों रहते हैं परेशान? जानें वो 5 बातें जिन्हें अपनाकर हर दिन लगेगा ‘तोहफा’

यकीन मानिए खुश रहना इतना भी मुश्किल नहीं है। बस जरूरत है तो कुछ चीजों को जानने की और उन्हें एक्सेप्ट करने की। आइए जानते हैं जिंदगी के कुछ कड़वे सच, जिन्हें जितनी जल्दी जान लेंगे उतना खुश रहेंगे। हर किसी को जानने चाहिए जीवन के 5 कड़वे सच, हमेशा खुश रहेंगे और खुलकर जीएंगे हर इंसान अपनी लाइफ में खुश रहना चाहता है, लेकिन फिर भी कई बार दुख, परेशानी और तनाव हमें घेर ही लेते हैं। दरअसल, ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि हम जीवन के कुछ बेहद सरल लेकिन गहरे सच को नजरअंदाज कर देते हैं। जो व्यक्ति इन बातों को समझ लेता है, वो छोटी-छोटी बातों में उलझता नहीं और हर हाल में खुश रहना सीख जाता है। जबकि जो इंसान इन सच्चाइयों को नजरअंदाज करके बेवजह की उम्मीद लगाए बैठा रहता है, उसे दुख और परेशानी के सिवा कुछ नहीं मिलता है। यकीन मानिए खुश रहना इतना भी मुश्किल नहीं है। बस जरूरत है तो कुछ चीजों को जानने की और उन्हें एक्सेप्ट करने की। आइए जानते हैं जीवन से जुड़े इसी सच को। हर चीज पर हमारा कंट्रोल नहीं हो सकता हम अक्सर सोचते हैं कि सब कुछ हमारे हिसाब से हो, हर परिस्थिति वैसी बने जैसी हम चाहें। लेकिन सच्चाई तो यही है कि जीवन में बहुत सी चीजें हमारे हाथ में नहीं होतीं, जैसे-पूरी मेहनत के बाद भी फल ना मिलना, किसी दूसरे का आपके साथ बुरा व्यवहार करना या अचानक कोई मुश्किल खड़ी हो जाना। जब हम ये मान लेते हैं कि हर चीज को नियंत्रित करना नामुमकिन है, तो मन को शांति मिलने लगती है। नियंत्रण की जरूरत कम हो जाती है और हम चीजों को स्वीकार करना सीख जाते हैं। यही बात हमारी चिंता को घटाकर खुश रहने की राह खोलती है। परिवर्तन संसार का नियम है कहने को तो ये बात बेहद छोटी है, लेकिन इसमें एक गहरी सच्चाई छुपी हुई है। लोग ये बात सुन तो लेते हैं लेकिन मानने को तैयार नहीं होते कि समय के साथ चीजें बदल जाती हैं। अच्छे दिन आते हैं और चले भी जाते हैं, वैसे ही बुरे वक्त भी हमेशा के लिए नहीं होते। अगर हम इन बातों को समझ लें कि हर चीज बदलने वाली है, तो हम दुख के समय टूटते नहीं और सुख के समय घमंड नहीं करते। परिवर्तन को जीवन का हिस्सा मानना हमें संतुलित बनाए रखता है और लाइफ के इस बैलेंस में ही सच्चा सुख छिपा हुआ है। तुलना करना दुख की सबसे बड़ी जड़ है इंसान के दुख की सबसे बड़ी वजह है कि वह दूसरों से अपनी तुलना करता है। किसी और की जिंदगी को देखकर, खुद को कम आंकने लगता है। आजकल सोशल मीडिया के दौर में तो ये चीजें और भी बढ़ गई हैं। अगर सुखी जीवन जीना है तो दूसरों से तुलना करना बंद करना होगा। हर इंसान को यह समझना चाहिए कि हर इंसान की जिंदगी का सफर अलग-अलग होता है। जब दो लोगों के चेहरे एक से नहीं होते तो भला दो इंसानों की जिंदगी एक जैसी कैसे हो सकती है। बस ये छोटी सी बात जो समझ जाता है, उसका जीवन बहुत आसान और सुलझा हुआ हो जाता है। सब कुछ हमेशा परफेक्ट नहीं होता जीवन में सब कुछ ठीक हो, हर काम बिना रुकावट के पूरा हो, ऐसी उम्मीद करना भी दुख का एक कारण है। असल जिंदगी में अधूरे काम, अधूरे सपने और उलझने हमेशा रहेंगी। कई बार परफेक्शन का पीछा करना ही दुख का कारण बन जाता है। जब हम लाइफ की इसी अनसर्टेनिटी को अपनाते हैं, तो हम प्रेजेंट में जीना सीखते हैं और यही प्रेजेंट हमें खुश रहने का रास्ता दिखाता है। हर नया दिन ईश्वर का दिया हुआ एक तोहफा है हम अक्सर भविष्य की चिंता में या बीते कल के पछतावे में खो जाते हैं, जो हमारे दुख का एक बड़ा कारण बन जाता है। लेकिन हर किसी को समझना चाहिए कि हर नया दिन, जीवन की नई शुरुआत है। ईश्वर हमें एक नया दिन जीने का मौका दे रहे हैं, इसके लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहिए और उसे भगवान का एक खूबसूरत तोहफा समझकर नई एनर्जी के साथ जीना चाहिए। जो इंसान हर नए दिन को नई शुरुआत मानकर जीना शुरु कर देता है, उसके जीवन के दुख खुद ब खुद कम हो जाते हैं।

थाने में धमाके के बाद सनसनी, वायरल पोस्ट में खालिस्तानी संगठन का दावा

अमृतसर. बीते दिनों अमृतसर ग्रामीण के थाना भिंडीसैदां में हुए धमाके के मामले से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार भिंडीसैदां पुलिस स्टेशन में हुए धमाके की एक देश विरोधी संगठन द्वारा ली गई है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है। वायरल पोस्ट में खालिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा इसकी जिम्मेदारी ली गई है पर इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वायरल पोस्ट में लिखा गया है कि अमृतसर खालिस्तान लिबरेशन आर्मी के हाई कमांड ने 30 मार्च 2026 को ऑपरेशन खालसा नया सवेरा के तहत अजनाला, अमृतसर के भिंडीसैदां पुलिस स्टेशन पर 2 ग्रेनेड हमले किए, जिससे तीन पुलिसवाले गंभीर रूप से घायल हो गए। इसकी जिम्मेदारी हम, KLA, स्वीकार करते हैं। ये हमले निर्दोष रणजीत सिंह (गुरदासपुर के गांव अधियां) के खून का बदला लेने के लिए किए गए हैं, साथ ही उन पीड़ित सिखों के लिए भी, जो झूठे मामलों में फंसाए गए और बाद में झूठे एनकाउंटर में मारे गए। ये कार्रवाई आगे भी जारी रहेंगी और इन्हें और तेज किया जाएगा। डीआईजी संदीप गोयल को चेतावनी! हम तुम्हारे पीछे आ रहे हैं। इसके साथ ही खालिस्तान जिंदाबाद भी लिखा गया।  

चना, सरसों और मसूर की खरीद 2 अप्रैल से शुरू, सीधे बैंक खाते में आएगा पैसा

लखनऊ यूपी की योगी सरकार ने किसानों को सौगात देते हुए रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा कर दी है। चना, मसूर, सरसों और अरहर की खरीद के लिए रेट भी पिछली बार से बढ़ाकर घोषित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए दलहनी और तिलहनी फसलों की सरकारी खरीद की कार्ययोजना जारी कर दी है। मंगलवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खरीद लक्ष्यों का खुलासा किया। सरकार ने इस बार दालों और तिलहन के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिसे किसानों के लिए एक 'सुरक्षा कवच' बताया गया है। कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से इस वर्ष एमएसपी दरों में वृद्धि की गई है। चने का समर्थन मूल्य 5875 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 225 रुपये अधिक है। इसी तरह मसूर पर 300 रुपये की वृद्धि के साथ 7000 रुपये प्रति क्विंटल और सरसों पर 250 रुपये की वृद्धि के साथ 6200 रुपये प्रति क्विंटल का भाव निर्धारित किया गया है। अरहर के लिए किसानों को 8000 रुपये प्रति क्विंटल का लाभकारी मूल्य मिलेगा। खरीद लक्ष्य और अवधि प्रदेश में इस वर्ष रबी फसलों की खरीद 2 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक यानी कुल 90 दिनों तक चलेगी। सरकार ने इस बार खरीद के बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं।मसूर: 6.77 लाख मीट्रिक टन यानी कुल उत्पादन का 100% खरीदी होगी। सरसों 5.30 लाख मीट्रिक टन, चना 2.24 लाख मीट्रिक टन और अरहर 1.14 लाख मीट्रिक टन खरीद होगी। पारदर्शिता के लिए 'आधार इनेबल्ड' व्यवस्था सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि पिछली सरकारों में दलहन-तिलहन की खरीद पर ध्यान नहीं दिया जाता था, लेकिन योगी सरकार ने इसे प्राथमिकता दी है। वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित करने और बिचौलियों को बाहर रखने के लिए प्रत्येक क्रय केंद्र पर आधार-सक्षम पीओएस (PoS) मशीनें लगाई गई हैं। किसानों को उनकी उपज का भुगतान सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से किया जाएगा। 6 एजेंसियां और 190 से अधिक क्रय केंद्र खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए 02 केंद्रीय एजेंसियां (नैफेड और एनसीसीएफ) और 04 राज्य स्तरीय एजेंसियां (यूपीपीसीयू, यूपीपीसीएफ, जैफेड और यूपीएसएस) तैनात की गई हैं। इस वर्ष नैफेड और एनसीसीएफ द्वारा सीधी खरीद के लिए 190 केंद्र खोलने का प्रस्ताव है, जबकि राज्य एजेंसियां भी अपने केंद्र संचालित करेंगी। पिछले वर्ष इस योजना से 20 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हुए थे, जिसे इस वर्ष और बढ़ाने का प्रयास है।

राजस्थान सरकार पर बरसे पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत, पंचायती राज चुनाव में देरी को लेकर पीएम मोदी और अमित शाह से की अपील

 जयपुर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज सुबह जब जयपुर हवाई अड्डे पहुंचे, तो उनके तेवर काफी तल्ख नजर आए। त्रिवेंद्रम रवाना होने से पहले उन्होंने मीडिया से बात करते हुए वर्तमान सरकार पर जनहित के कामों को रोकने का सीधा आरोप लगाया। गहलोत ने साफ कहा कि उनकी इंतजार शास्त्र सीरीज का सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। बेटे वैभव को लेकर किया खुलासा खबरों के बीच सबसे चौंकाने वाली बात तब आई जब गहलोत ने अपने परिवार पर हो रहे निजी हमलों का जवाब दिया। उन्होंने मीडिया में बयान देते हुए कहा कि राजनीति में परिवार को घसीटना गलत है। जब मैं मुख्यमंत्री था, तब मेरा बेटा वैभव सीएम आवास में नहीं बल्कि किराए के मकान में रहता था। आरसीए (RCA) चुनाव में भी वैभव को कोई सरकारी फायदा नहीं दिया गया। जोधपुर से चुनाव लड़ने का मौका पार्टी ने दिया था, मैंने उसे आउट ऑफ टर्म कोई लाभ नहीं पहुंचाया। पंचायत चुनाव पर मोदी-शाह से अपील गहलोत ने पंचायती राज चुनाव में हो रही देरी को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लपेटे में लिया। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है, जो कि संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने दिल्ली दरबार से अपील की है कि राजस्थान के इस मामले में तुरंत दखल दें। राजस्थान दिवस पर भी खिंची तलवारें गहलोत ने कहा कि राजस्थान दिवस हमेशा से एक तय तारीख पर मनाया जाता रहा है और खुद प्रधानमंत्री भी इसी दिन बधाई देते रहे हैं। लेकिन अब परंपराओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

सावधान! बिना सिम के नहीं चलेगा WhatsApp, सरकार बढ़ा सकती है सख्त नियम की डेडलाइन

भारत सरकार मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए लागू किए जा रहे SIM-बाइंडिंग नियम की समयसीमा को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है. तकनीकी दिक्कतों के चलते कंपनियों ने अतिरिक्त समय मांगा है जिसके बाद अब नई डेडलाइन दिसंबर 2026 तक बढ़ाई जा सकती है. क्या है SIM-बाइंडिंग नियम? सरकार ने नवंबर 2025 में एक नया नियम लागू किया था जिसके तहत WhatsApp, Telegram और Arattai जैसे ऐप्स को यूजर के मोबाइल नंबर को उसी SIM कार्ड से जोड़ना अनिवार्य किया गया था जो फोन में मौजूद हो. इसका मतलब साफ है अगर आपके फोन में रजिस्टर्ड SIM नहीं है तो आप उस ऐप का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. इस कदम का मकसद फर्जी अकाउंट्स और साइबर फ्रॉड पर रोक लगाना है खासकर उन मामलों में जहां विदेशी नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है. वेब वर्जन पर भी सख्ती सरकार ने सिर्फ मोबाइल ऐप तक ही नहीं बल्कि वेब वर्जन पर भी नियम लागू करने की बात कही थी. उदाहरण के तौर पर, WhatsApp Web जैसे प्लेटफॉर्म्स पर यूजर को हर 6 घंटे में लॉगआउट किया जा सकता है. फिर से लॉगिन करने के लिए दोबारा वेरिफिकेशन करना जरूरी होगा जिससे अकाउंट की सुरक्षा और मजबूत हो सके. क्यों बढ़ सकती है डेडलाइन? रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई कंपनियों ने सरकार को बताया कि इस सिस्टम को लागू करना इतना आसान नहीं है. टेक्निकल टेस्टिंग, ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट और अलग-अलग डिवाइस पर काम करने जैसी चुनौतियों के कारण कंपनियां तय समयसीमा में इस नियम को लागू नहीं कर पाईं. इसी वजह से सरकार अब इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बना रही है. Android और iOS में अलग-अलग चुनौती बताया जा रहा है कि सबसे पहले Android डिवाइस पर यह फीचर लागू किया जाएगा. वहीं, iPhone यानी iOS प्लेटफॉर्म पर कुछ तकनीकी बाधाएं हैं जिन्हें दूर करने पर काम जारी है. Apple और अन्य कंपनियां मिलकर इस सिस्टम को सुचारू बनाने की कोशिश कर रही हैं. WhatsApp और अन्य कंपनियों की तैयारी WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta इस दिशा में सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है. फिलहाल Android यूजर्स के लिए SIM-बाइंडिंग फीचर बीटा टेस्टिंग में है. वहीं, भारतीय ऐप Arattai भी जल्द जरूरी अपडेट लाने की तैयारी में है ताकि वह इस नियम का पालन कर सके. क्यों जरूरी है यह नियम? सरकार का मानना है कि SIM-बाइंडिंग से साइबर अपराधों पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2024 में साइबर फ्रॉड से देश को 22,800 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ था. ऐसे में KYC-वेरीफाइड SIM को सीधे डिवाइस से जोड़ने से अकाउंट की पहचान पुख्ता होगी और धोखाधड़ी के मामलों को ट्रैक करना आसान बनेगा. यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर? अगर यह नियम पूरी तरह लागू होता है तो यूजर्स को अपने मैसेजिंग ऐप्स इस्तेमाल करने के लिए उसी SIM का इस्तेमाल करना होगा जिससे अकाउंट बनाया गया है. हालांकि, डेडलाइन बढ़ने से फिलहाल यूजर्स और कंपनियों दोनों को राहत मिल सकती है.