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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ शक के आधार पर नहीं दी जा सकती सजा, सभी आरोपी बरी

बिलासपुर. जगदलपुर के ढाई दशक पुराने बहुचर्चित फर्जी वेतन आहरण और भ्रष्टाचार के मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में विफल रहा। केवल संदेह के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। मामला जगदलपुर स्थित स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 1979 से 1985 के बीच कथित रूप से फर्जी वेतन बिल बनाकर सरकारी राशि निकालने से जुड़ा था, जिसमें करीब 42 हजार रुपये के गबन का आरोप था। अभियोजन के अनुसार, तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सेन और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर आरोप था कि उन्होंने मिलकर तीन सफाई कर्मचारी जयसिंह, लालमणि और मयाराम के नाम पर फर्जी वेतन बिल तैयार किए। कहा गया कि ये कर्मचारी वास्तविक रूप से काम नहीं कर रहे थे, फिर भी उनके नाम पर वेतन निकालकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। आरोप यह भी था कि वेतन बिलों में फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लगाए गए। जगदलपुर की विशेष अदालत ने 28 जनवरी 2002 को इस मामले में आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) और 120-बी (साजिश) सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 2-2 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। मामले में गवाहों के बयान से यह सामने आया कि सभी कार्य तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. आरके सेन के निर्देश पर किए गए थे। कोर्ट ने माना कि अन्य आरोपी केवल अधीनस्थ कर्मचारी थे, जो अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन कर रहे थे। उनके खिलाफ कोई स्वतंत्र भूमिका या आपराधिक मंशा साबित नहीं हुई। उन्होंने केवल अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया, जिसे अपराध नहीं माना जा सकता। मामले में जिन कर्मचारियों के नाम पर वेतन निकाले जाने का आरोप था, उन्होंने भी स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि वे कब तक काम पर नहीं थे या उन्हें वेतन नहीं मिला। कई गवाहों ने कहा कि उन्हें काम के दौरान वेतन मिला और उन्होंने हस्ताक्षर कर भुगतान लिया। इससे अभियोजन का दावा कमजोर हो गया। हाईकोर्ट ने पूरे मामले की गहन समीक्षा के बाद पाया कि अभियोजन के पास आरोप साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। किसी भी आरोपी के खिलाफ यह साबित नहीं हुआ कि उसने फर्जी दस्तावेज तैयार किए या उनका उपयोग किया। हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान फर्जी होने का कोई विशेषज्ञ प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। कई दस्तावेज केवल कार्बन कॉपी थे, मूल रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप सिद्ध नहीं होते। हाईकोर्ट ने कहा कि संदेह कितना भी मजबूत क्यों न हो, वह कानूनी प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही जो आरोपी जमानत पर हैं, उनके जमानती बांड 6 महीने तक प्रभावी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

UP में अनोखा मामला: जिंदा शख्स ने करवाई अपनी तेरहवीं, 1900 मेहमानों को बुलाकर सबको चौंकाया

उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से आई यह कहानी हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती है। अकेलेपन और भविष्य की चिंता ने 65 वर्षीय राकेश यादव को ऐसा फैसला लेने पर मजबूर किया, जिसकी पूरे इलाके में चर्चा है। राकेश यादव ने जीते-जी अपनी ही तेरहवीं कर डाली। उन्होंने करीब 1900 लोगों को इस अनोखे भोज में आमंत्रित किया, ताकि उनके मरने के बाद होने वाले सभी संस्कारों का “झंझट” पहले ही खत्म हो जाए। निमंत्रण पत्र भी उतना ही भावुक था निमंत्रण पत्र भी उतना ही भावुक था। उसमें मशहूर डायलॉग लिखा था, 'मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी, जहां पानी कम था।' मानो यह लिखकर वो अपने जीवन की पीड़ा को बयान कर रहे हों।मुरादगंज चौकी क्षेत्र के लक्ष्मणपुर गांव में सोमवार दोपहर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। राकेश यादव तीन भाइयों में सबसे बड़े थे, लेकिन किसी ने शादी नहीं की। दो भाइयों की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। अब परिवार में सिर्फ उनकी एक विवाहित बहन ही बची हैं। मेरी तेरहवीं कौन कराएगा, इस चिंता ने मजबूर किया बुढ़ापे में सहारे की कमी और अपने अंतिम संस्कार को लेकर उठते सवालों ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। उनका कहना है, मेरे बाद मेरा अंतिम संस्कार कौन करेगा, मेरी तेरहवीं कौन कराएगा। इसी चिंता ने मुझे यह फैसला लेने पर मजबूर किया। पैतृक घर भी एक रिश्तेदार को दान कर दिया राकेश ने अपना पैतृक घर भी एक रिश्तेदार को दान कर दिया और अब वह एक साधारण मड़ैया में रह रहे हैं। उन्हें रिश्तेदारों पर भी भविष्य को लेकर भरोसा नहीं है। उन्होंने अपनी वृद्धावस्था पेंशन और वर्षों की मेहनत से बचाए पैसों से यह पूरा आयोजन कराया। करीब 150 कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें बर्तन भेंट किए भोज की शुरुआत कन्या पूजन से हुई, जिसमें करीब 150 कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें बर्तन भेंट किए गए। इसके बाद विशाल भंडारे में पूड़ी, सब्जी और बूंदी के लड्डू परोसे गए। रिश्तेदारों का भी खास ख्याल रखा गया। करीब 100 महिला रिश्तेदारों को साड़ियां और 90 पुरुष रिश्तेदारों को बर्तन भेंट किए गए। बहन भी पहुंचीं, जो पूरे दृश्य को देखकर भावुक हो उठीं इस अनोखे आयोजन में उनकी बहन कालिंद्री भी पहुंचीं, जो पूरे दृश्य को देखकर भावुक हो उठीं। यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि उस सच्चाई का आईना है जहां अकेलापन इंसान को जीते-जी अपने अंत की तैयारी करने पर मजबूर कर देता है।  

रतलाम में पोल्ट्री फार्म में मिली एमडी ड्रग फैक्ट्री, 100 किलो केमिकल जब्त, 3 आरोपी गिरफ्तार

रतलाम  पिपलौदा थाना क्षेत्र के ग्राम बोरखेड़ा में पुलिस ने सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे मुखबिर की सूचना पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक खाली पड़े पोल्ट्री फार्म में संचालित एमडी ड्रग फैक्ट्री का राजफाश किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से तीन से अधिक आरोपितों को एमडी ड्रग बनाते हुए पकड़ा है। फिलहाल पुलिस ने अधिकारिक रूप से आरोपितों की जानकारी और जब्त मशरूका का खुलासा नहीं किया है। दोपहर तीन बजे पुलिस मामले का खुलासा करेगी। जानकारी के अनुसार खेत में बने इस पोल्ट्री फार्म में अवैध रूप से एमडी ड्रग तैयार की जा रही थी। सूचना मिलने पर थाना पिपलौदा पुलिस, साइबर सेल जावरा एवं एसडीओपी संदीप मालवीय व थाना प्रभारी रमेश कोली के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने दबिश दी। सूत्रों के अनुसार छापे के दौरान पुलिस द्वारा करीब 600 ग्राम एमडी ड्रग और 100 किलो से अधिक संदिग्ध केमिकल बरामद करने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि इन केमिकल्स का उपयोग एमडी ड्रग बनाने में किया जा रहा था। पहले भी पकड़ी गया था अवैध माल     गौरतलब है कि इससे पहले 16 जनवरी को जावरा के कालूखेड़ा थाना क्षेत्र के चिकलाना में पुलिस ने एमडी ड्रग बनाने की एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। रात करीब 1 बजे मस्जिद के पीछे स्थित एक मकान पर दबिश देकर यह कार्रवाई की गई थी। मकान दिलावर खान पठान का बताया गया, जहां करीब एक वर्ष से अवैध गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आई थी। उस दौरान पुलिस ने मौके से 10 किलो से अधिक एमडी ड्रग, बड़ी मात्रा में केमिकल से भरे ड्रम, एमडी निर्माण में प्रयुक्त उपकरण, 12 बोर की बंदूक, 91 जिंदा कारतूस, दो मोर तथा चंदन की लकड़ियां बरामद की थीं। करीब ढाई माह के भीतर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे क्षेत्र में अवैध ड्रग निर्माण के नेटवर्क की गंभीरता उजागर हुई है। पुलिस जल्द ही पूरे गिरोह का करेगी खुलासा फिलहाल पुलिस ने बोरखेड़ा मामले में पकड़े गए आरोपितों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। समाचार लिखे जाने तक आरोपियों के नाम-पते और नेटवर्क का पूरा खुलासा नहीं किया गया था। पुलिस का कहना है कि मामले में विस्तृत जांच जारी है और जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा किया जाएगा।

बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट, धुरंधर 2 का हिंदी वर्जन 800 करोड़ पार, अब 2000 करोड़ पर नजर

रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 लगातार रिलीज के बाद से ही हर दिन कमाई के नए रिकॉर्ड बनाती आ रही थी. जनता में फिल्म का क्रेज ठंडा होने का नाम नहीं ले रहा. इस क्रेज के दम पर धुरंधर 2 ने पहला सोमवार बिना किसी रुकावट के पार कर लिया था. लेकिन बॉक्स ऑफिस पर दूसरा सोमवार धुरंधर 2 के लिए स्पीड ब्रेकर साबित हुआ है. इस सोमवार को कलेक्शन सिर्फ डाउन नहीं हुआ है, बल्कि ये गिरावट धुरंधर 2 के तूफान को ठंडा भी कर सकती है. धुरंधर 2 की घटी रफ्तार पहले हफ्ते में शानदार कमाई करने के बाद, दूसरे वीकेंड में भी धुरंधर 2 ने तगड़ी पावर दिखाई. इसने बॉलीवुड का सबसे बड़ा सेकंड वीकेंड कलेक्शन दर्ज किया. फिल्म का क्रेज देखते हुए उम्मीद थी कि दूसरे मंडे भी ये डटकर कमाई करेगी. सैकनिल्क का डेटा बताता है कि धुरंधर 2 ने 12वें दिन यानी इस सोमवार को 25.3 करोड़ का कलेक्शन किया है. नॉर्मल फिल्मों के हिसाब से देखें तो दूसरे सोमवार को आया ये आंकड़ा बहुत दमदार है. लेकिन धुरंधर 2 नॉर्मल फिल्म तो है नहीं! रिकॉर्डतोड़ रफ्तार से बॉक्स ऑफिस पर आगे बढ़ रही धुरंधर 2 का ये कलेक्शन इसके पिछले दिनों के मुकाबले काफी तेजी से गिरा है. धुरंधर 2 ने रविवार को 68 करोड़ से ज्यादा कलेक्शन किया था, उसके अगले ही दिन 25 करोड़ की रेंज में पहुंच जाना बड़ी गिरावट तो है ही. दमदार फिल्में पूरे हफ्ते कैसी भी चलें, लेकिन वीकेंड में तगड़ा जंप लेती हैं. कई बार ऐसी फिल्मों के वीकेंड कलेक्शन के मुकाबले वर्किंग डे के कलेक्शन में अंतर बड़ा नजर आता है. इसलिए मंडे कलेक्शन की तुलना अक्सर बीते शुक्रवार की कमाई से की जाती है. धुरंधर 2 ने बीते शुक्रवार 41.75 करोड़ से ज्यादा कलेक्शन किया था. इसके मुकाबले मंडे कलेक्शन की गिरावट 40% से कम ही है. यानी धुरंधर 2 का होल्ड इस सोमवार भी दमदार ही बना हुआ है. लेकिन इस फिल्म का होल्ड जैसा अभी है, ट्रेड पंडितों को उससे बेहतर रहने की उम्मीद थी, क्योंकि ये फिल्म ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर है. सेकंड मंडे को धुरंधर का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाई धुरंधर 2 दिसंबर में धुरंधर ने दूसरे सोमवार को 31.80 करोड़ नेट कलेक्शन किया था. इसके दूसरे सोमवार को आए 34.70 करोड़ के मुकाबले दूसरे मंडे का होल्ड अद्भुत था. रिकॉर्ड्स में धुरंधर 2 का सेकंड मंडे कलेक्शन 25.30 करोड़ धुरंधर के बाद ही लिखा जाएगा. लेकिन इसका होल्ड जिस तरह कमजोर पड़ा है, वो नजर रखने लायक चीज है. दूसरे मंडे के कलेक्शन से धुरंधर 2 का नेट इंडिया कलेक्शन 12 दिनों में 872 करोड़ हो चुका है. मंडे कलेक्शन से धुरंधर 2 के हिंदी वर्जन ने फाइनली 800 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है और इसका टोटल कलेक्शन 818 करोड़ हो गया है. धुरंधर 2 ने मंडे कलेक्शन के साथ 1400 करोड़ वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन का लैंडमार्क भी पार कर लिया है. इस फिल्म से ट्रेड को वर्ल्डवाइड 2000 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीदें हैं. इसमें बड़ा हिस्सा इंडिया कलेक्शन का ही रहेगा. इसलिए मंडे को इसकी रफ्तार जैसी स्लो पड़ी है, अगर आगे भी ऐसा हुआ तो धुरंधर 2 के लिए 2000 करोड़ का माइलस्टोन दूर होता जाएगा.

बड़वानी उत्कृष्ट विद्यालय में ‘अपात्र’ का चयन: नियमों को ताक पर रखकर कार्तिक को भेजा नागालैंड, जिला टॉपर शिवम बागुल का हक मारा!

 बड़वानी  बड़वानी -शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़वानी में 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' योजना के तहत छात्रों के चयन में एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। ताज़ा खुलासे ने विद्यालय प्रबंधन और चयन समिति की साख को पूरी तरह मटियामेट कर दिया है। आरोप है कि प्राचार्य और समिति ने जानबूझकर एक 'अपात्र' छात्र को उपकृत करने के लिए जिले के वास्तविक मेधावी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया है। ​नियमों की धज्जियां: 2024-25 की योजना में 2025-26 के छात्र का चयन कैसे? ​सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि नागालैंड भ्रमण की यह योजना सत्र 2024-25 के लिए निर्धारित थी। नियमानुसार, इस अवधि में विद्यालय में अध्ययनरत छात्र ही इसके पात्र थे। लेकिन चयन समिति ने कार्तिक शुक्ल का चयन किया, जो सत्र 2024-25 में इस विद्यालय का छात्र ही नहीं था, बल्कि एक निजी स्कूल में पढ़ाई कर रहा था। कार्तिक ने सत्र 2025-26 में उत्कृष्ट विद्यालय में प्रवेश लिया है। सवाल यह है कि जो छात्र योजना के समय स्कूल का हिस्सा ही नहीं था, उसे हवाई यात्रा और सरकारी भ्रमण का लाभ किस 'जादुई' प्रक्रिया के तहत दे दिया गया? ​मेधावी छात्र शिवम बागुल की अनदेखी क्यों? ​चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सबसे बड़ा प्रहार तब होता है जब हम कक्षा 10वीं के परिणामों को देखते हैं। सत्र 2024-25 में उत्कृष्ट विद्यालय के छात्र शिवम बागुल (पिता राजेश बागुल) ने अपनी मेहनत से जिला टॉपर का गौरव हासिल किया था। कायदे से, ऐसे राज्य स्तरीय सांस्कृतिक समन्वय कार्यक्रम के लिए पहला हक जिले के उस टॉपर छात्र का था जिसने विद्यालय का नाम रौशन किया। ​लेकिन, चयनकर्ताओं ने एक जिला टॉपर (शिवम बागुल) को दरकिनार कर एक ऐसे छात्र (कार्तिक शुक्ल) को चुन लिया जो उस वक्त स्कूल में था ही नहीं। यह सीधे तौर पर मेधावी छात्रों के मनोबल को तोड़ने वाली कार्रवाई है। ​चयन समिति पर उठते तीखे सवाल: ​क्या चयन समिति को यह जानकारी नहीं थी कि कार्तिक शुक्ल सत्र 2024-25 में विद्यालय का छात्र नहीं था? ​जिला टॉपर शिवम बागुल के नाम पर विचार क्यों नहीं किया गया? क्या उस पर किसी 'खास' का दबाव था? ​प्राचार्य अनिल मिश्रा इस स्पष्ट नियम विरुद्ध चयन पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? ​भ्रष्टाचार की बू और जांच की मांग ​यह मामला केवल एक चयन की गलती नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और पद के प्रभाव का स्पष्ट उदाहरण प्रतीत होता है। अभिभावकों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि इस चयन प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। ​शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की 'सेटिंग' और 'भाई-भतीजावाद' बड़वानी जिले की शिक्षा व्यवस्था पर एक काला धब्बा है। यदि जिला प्रशासन ने इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो मेधावी छात्रों का व्यवस्था से भरोसा उठना तय है।

देवरिया में नकली नोट गिरोह का भंडाफोड़: सपा नेता निकला ‘धुरंधर’, चार आरोपी पकड़े गए

प्रयागराज जिले में नकली नोट का धुरंधर समाजवादी पार्टी का एक नेता निकला। वह अपने साथियों के साथ नकली नोट की फैक्ट्री देवरिया में चला रहा था। मामले में चार लोगों की गिरफ्तार किया गया है, जबकि सपा नेता विवेक यादव सहित दो फरार हैं। अभियुक्तों के कब्जे से एक लाख 18 हजार रुपये के नकली नोट, लैपटॉप, प्रिंटर सहित अन्य सामान बरामद हुआ है। इसी मामले में पूर्व में जेल जा चुका है धर्मेंद्र  डीसीपी गंगानगर कुलदीप गुनावत ने बताया गिरफ्तार अभियुक्त धर्मेंद्र कुमार से पूछताछ में यह तथ्य प्रकाश में आया कि अभियुक्त धर्मेंद्र कुमार जनपद देवरिया में रहा है। वह रामपुर करखाना से पूर्व में जेल भी इसी मामले में जेल जा चुका है। गैंग बनाकर कर रहे थे यह धंधा चारों अभियुक्तों विवेक यादव पुत्र अवध बिहारी यादव निवासी गौरी खुर्द थाना गौरी बाजार जनपद देवरिया के निर्देशन में गैंग बनाकर पैसे कमाने की उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से यह कार्य कर रहे थे। राहुल यादव व विवेक कुमार उपरोक्त पैसों के साथ यह लोगों से संपर्क करते थे और धर्मेंद्र, विवेक यादव और जो एक अन्य सहयोगी से मिलकर देवरिया स्थित कमरे पर नोट बनाकर, छापते थे व उसकी सप्लाई करते थे। बाजार में नकली नोट खपाने के लिए लाए थे ये सभी नकली भारतीय नोटों को बाजार में खपाने के उद्देश्य से लाये थे जिन्हें लोगों द्वारा छोटे ग्रामीण बाजारों में छोटे-छोटे मात्रा में (100-500/- रुपये) बजार में चलाया जाना था। अभियुक्त विवेक यादव पुत्र अवध बिहारी यादव निवासी गौरी खुर्द थाना गौरी बाजार जनपद देवरिया की गिरफ्तारी अभी शेष है, जिसके गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीमों का गठन किया गया था। जिपं चुनाव लड़ चुका है विवेक यादव पुलिस का कहना है कि देवरिया निवासी विवेक यादव जिला पंचायत का चुनाव लड़ चुका है। समाजवादी पार्टी से विधायक का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयागराज पुलिस ने देवरिया पुलिस से संपर्क साधा है। ये हैं गिरफ्तार अभियुक्त 1. राहुल यादव पुत्र राजकुमार यादव निवासी सरायकंसराय थाना दुर्गागंज जनपद भदोही, उम्र करीब 28 वर्ष। 2. विवेक कुमार यादव पुत्र राकेश यादव निवासी गोकलपट्टी थाना सुरीयावां जनपद भदोही, उम्र करीब 26 वर्ष 3. नरेन्द्र यादव उर्फ विराट पुत्र रामजी यादव निवासी बैतालपुर थाना गौरीबाजार जनपद देवरिया, उम्र करीब 26 वर्ष। 4. धर्मेन्द्र कुमार पुत्र राजाराम प्रसाद निवासी ग्राम महाराजगंज थाना रुद्रपुर जनपद देवरिया, उम्र करीब 22 वर्ष।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने हटाई सेना के जवानों की डिसेबिलिटी पेंशन पर रोक

चंडीगढ़  भारतीय सेना के जवानों के हितों की रक्षा करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सशस्त्र बलों के सदस्यों को दी जाने वाली डिसेबिलिटी पेंशन (Disability Pension) को तकनीकी आधार पर नहीं रोका जा सकता। अदालत ने केंद्र सरकार और सैन्य अधिकारियों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया है कि सेवा के दौरान दिव्यांग हुए जवानों को उनका जायज हक तुरंत दिया जाए। यह फैसला उन हजारों पूर्व सैनिकों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया है जो लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। 1. कोर्ट का कड़ा रुख: "सेवा की परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं कर सकते" हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सेना की ड्यूटी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में होती है। यदि कोई जवान सेवा के दौरान किसी शारीरिक अक्षमता या बीमारी का शिकार होता है, तो यह माना जाना चाहिए कि वह 'Attributable to Military Service' (सैन्य सेवा के कारण) है। कोर्ट ने उन दलीलों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि जवान की बीमारी का ड्यूटी से सीधा संबंध नहीं है। 2. पेंशन रोकने के नियमों पर सवाल अदालत ने पाया कि कई मामलों में सैन्य अधिकारियों द्वारा पेंशन के दावों को यह कहकर खारिज कर दिया जाता है कि दिव्यांगता 'अग्रवेटेड' (Aggravated) नहीं है। हाई कोर्ट ने साफ किया कि अगर मेडिकल बोर्ड ने भर्ती के समय जवान को पूरी तरह फिट घोषित किया था, तो सेवा के दौरान पैदा हुई किसी भी अक्षमता के लिए विभाग ही जिम्मेदार है। 3. पूर्व सैनिकों को मिलेगी बड़ी राहत इस फैसले के बाद अब उन जवानों के लिए पेंशन का रास्ता साफ हो गया है जिन्हें 'डिस्चार्ज' के समय मेडिकल ग्राउंड पर अनफिट घोषित कर घर भेज दिया गया था। कोर्ट ने आदेश दिया है कि पिछले बकाया (Arrears) के साथ पेंशन का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाए। 4. सैन्य नियमों की व्याख्या में स्पष्टता हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कल्याणकारी नियमों की व्याख्या हमेशा लाभार्थी (जवान) के पक्ष में होनी चाहिए। प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए ऐसे मामलों में अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचना चाहिए।

पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: दुलारचंद मर्डर केस में अनंत सिंह के भतीजों को मिली अग्रिम जमानत

पटना  दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) से जेडीयू विधायक अनंत सिंह के भतीजे राजवीर सिंह और करमवीर सिंह को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली है। न्यायाधीश प्रभात कुमार सिंह की एकलपीठ ने वरीय अधिवक्ता नरेश दीक्षित और अधिवक्ता कुमार हर्षवर्दन को सुनते हुए उक्त आदेश पारित किया। इससे पहले, इसी मामले में 19 मार्च को अनंत सिंह को भी हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है। वह 2 नवंबर 2025 से बेऊर जेल में बंद थे और करीब साढ़े चार महीने बाद उन्हें राहत मिली थी। मामला 30 अक्टूबर 2025 का है। मोकामा के घोसवरी थाना क्षेत्र के बसावनचक गांव में चुनाव प्रचार के दौरान जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। राजवीर और कर्मवीर पर क्या आरोप हैं? राजवीर सिंह और कर्मवीर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने जबरदस्ती दुलारचन्द को गाड़ी से खींच लिया और अनंत सिंह ने जान मारने की नियत से उनके बाएं पैर पर चला दी थी, इसके पश्चात दुलारचंद की मृत्यु हो गई थी। प्राथमिकी में अनंत सिंह, उनके भतीजे राजवीर और करमवीर सिंह समेत अन्य को नामजद किया गया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि दोनों को राजनीतिक द्वेषवश फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपों की गंभीरता का हवाला दिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अदालत नेपी दोनों को अग्रिम जमानत दे दी। अदालत ने निर्देश दिया कि अभियुक्त जांच में सहयोग करेंगे।  

रतलाम में अंतर्राज्यीय ड्रग नेटवर्क पर करारा प्रहार, कई गिरफ्तार

रतलाम में अंतर्राज्यीय ड्रग नेटवर्क पर करारा प्रहार एमडीएमए निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़, 500 ग्राम एमडी व ब्राउन शुगर सहित आरोपी गिरफ्तार लगभग 80 लाख रुपये से अधिक का मादक पदार्थ व वाहन जप्त रतलाम पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध सख्त एवं सतत कार्यवाही जारी है। इसी क्रम में रतलाम जिले में विगत दो दिनों में पुलिस द्वारा एक के बाद एक प्रभावी कार्रवाई करते हुए न केवल ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया, बल्कि एक संगठित सिंथेटिक ड्रग निर्माण नेटवर्क का भी भंडाफोड़ किया गया है, जो प्रदेश में मादक पदार्थों के विरुद्ध चल रही मुहिम की बड़ी सफलता है। यह कार्यवाही पुलिस अधीक्षक रतलाम अमित कुमार के निर्देशन में थाना रिंगनोद पुलिस तथा थाना पिपलोदा पुलिस द्वारा की गई हैं। 31 मार्च को थाना पिपलोदा क्षेत्र के ग्राम बोरखेड़ा में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध एमडी (MDMA) सिंथेटिक ड्रग निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। एक पोल्ट्री फार्म की आड़ में संचालित इस अवैध लैब पर दबिश देकर पुलिस ने लगभग 175 किलोग्राम रासायनिक पदार्थ, 200 ग्राम तैयार एमडीएमए, गैस सिलेंडर, हीट गन, स्टोव एवं अन्य ड्रग निर्माण सहित 24 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है। इस कार्रवाई में मुख्य सरगना जमशेद खान उर्फ “जमशेद लाला” उर्फ “जमशेद सेठ” को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी जमशेद लाला एक अंतर्राज्यीय ड्रग नेटवर्क का प्रमुख संचालक है, जिसके विरुद्ध विभिन्न राज्यों में आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। पूछताछ में यह भी ज्ञात हुआ है कि ड्रग निर्माण हेतु रसायनों की आपूर्ति राजस्थान के प्रतापगढ़ क्षेत्र से की जा रही थी तथा घटना से पूर्व बड़ी मात्रा में एमडी की सप्लाई भी की जा चुकी थी। इसी प्रकार 29 मार्च को पुलिस चौकी माननखेड़ा थाना रिंगनोद द्वारा मुखबिर सूचना के आधार पर फोरलेन रोड पर घेराबंदी कर बोलेरो पिकअप वाहन से 500 ग्राम एमडी ड्रग्स (कीमत लगभग 50 लाख रुपये) जब्‍त करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। साथ ही घटना में प्रयुक्त बोलेरो वाहन (कीमत लगभग 5 लाख रुपये) भी जप्त किया गया। इस प्रकार पुलिस ने लगभग 55 लाख रुपये की संपत्ति जप्त की है। इसी दिन एक अन्‍य कार्यवाही में थाना रिंगनोद पुलिस द्वारा 100 ग्राम ब्राउन शुगर (कीमत लगभग 1 लाख रुपये) साथ एक आरोपी को मोटरसाइकिल सहित गिरफ्तार किया है। आरोपी से कुल 1 लाख 50 हजार रुपये की संपत्ति  जप्त की गई। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी रतलाम जिले में एमडीएमए निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में संगठित ड्रग नेटवर्क सक्रिय रहा है, जिस पर मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। पुलिस द्वारा मादक पदार्थों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए संपूर्ण सप्लाई चेन को ध्वस्त करने, नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी तथा अवैध संपत्ति के विरुद्ध कार्रवाई हेतु विस्तृत विवेचना की जा रही है। यह कार्रवाई प्रदेश में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस की दृढ़ प्रतिबद्धता एवं प्रभावी रणनीति को दर्शाती है।  

रेल यात्रियों को राहत: गया-सासाराम से सीधे बक्सर पहुंचेंगी ट्रेनें, बनेगा नया डीडीयू बाईपास लिंक

बक्सर. पूर्व मध्य रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) जंक्शन पर ट्रेनों के बढ़ते दबाव को कम करने और परिचालन को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। डीडीयू बाईपास लाइन को सुदृढ़ करने के लिए डीडीयू-दानापुर रेलखंड के ईस्ट आउटर केबिन (ईओसी) से डीडीयू-गया लाइन के फ्लाईओवर केबिन (एफओसी) तक नई ब्राड गेज (बीजी) रेल लाइन निर्माण के लिए ई-टेंडर जारी कर दिया गया है। यह परियोजना बक्सर से भभुआ रोड और सासाराम के रास्ते गया तक निर्बाध रेल संपर्कता प्रदान करेगी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बक्सर ताप बिजली घर को सुगम परिवहन के माध्यम से कोयले की आपूर्ति करना है। इसके जरिए गढ़वा या गया की तरफ से आने वाली मालगाड़ियां बिना डीडीयू जंक्शन के यार्ड में प्रवेश किए बाहर से ही बक्सर की तरफ निकल सकेंगी। इससे इंजन रिवर्सल की समस्या भी नहीं रहेगी। ट्रेन गंज ख्वाजा स्टेशन से सीधे कुछमन पहुंचेगी। परियोजना की मुख्य विशेषताएं और लागत रेलवे द्वारा जारी टेंडर के अनुसार, इस नई रेल लाइन की कुल लंबाई 2.666 किलोमीटर होगी। इस महत्वपूर्ण परियोजना की अनुमानित लागत 11.58 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। चयनित एजेंसी को काम शुरू होने के छह महीने के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत व्यापक स्तर पर तकनीकी कार्य किए जाएंगे, जिनमें भारी पैमाने पर मिट्टी भराई (अर्थवर्क), पुलों के सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर का निर्माण, रेल ट्रैक बिछाना, बैलास्टिंग और वेल्डिंग, सीमेंट, स्टील की आपूर्ति और ट्रैक फिटिंग शामिल है। बक्सर थर्मल पावर प्लांट को होगा सीधा लाभ इस बाईपास लाइन के निर्माण का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ बक्सर (चौसा) स्थित थर्मल पावर प्लांट को मिलेगा। धनबाद की ओर से आने वाली कोयला लदी मालगाड़ियों को अब डीडीयू जंक्शन के मुख्य यार्ड में आने की आवश्यकता नहीं होगी। ये ट्रेनें बाईपास के जरिए सीधे डीडीयू-पटना रेलखंड पर चौसा के पास स्थित पावर प्लांट तक पहुंच सकेंगी, जिससे कोयला आपूर्ति की प्रक्रिया तेज और निर्बाध हो जाएगी। आपको बता दें कि बक्सर ताप बिजली घर को निर्बाध कोयला आपूर्ति के लिए एक ऐसी ही व्यवस्था आरा जंक्शन के पास डीडीयू-पटना रेलखंड के जगजीवन हाल्ट और आरा-सासाराम रेलखंड के उदवंतनगर के बीच भी की जा रही है। वहां भी बाईपास लाइन के जरिए ऐसी व्यवस्था की जा रही है, जिससे सासाराम से आने वाली ट्रेन बिना आरा जंक्शन जाए और बिना इंजन रिवर्स किए बक्सर की तरफ जा सके। परिचालन में सुधार और दबाव में कमी वर्तमान में डीडीयू जंक्शन पर प्रतिदिन लगभग 175 यात्री ट्रेनों और 150 मालगाड़ियों का आवागमन होता है। इस नई लाइन के शुरू होने से डीडीयू जंक्शन परिसर की मुख्य लाइन पर दबाव कम होगा। इससे एक वैकल्पिक मार्ग विकसित होगा और किसी भी आपात स्थिति में ट्रेनों को बाईपास के जरिए पटना और गया रेलखंड की ओर मोड़ा जा सकेगा। बिजली घर की तीसरी यूनिट जल्दी ही शुरू होने की उम्मीद बक्सर ताप बिजली घर 1320 मेगावाट की कोयला आधारित बिजली परियोजना है। यहां 660-660 मेगावाट की दो बिजली उत्पादन यूनिट की स्थापना होनी है। इनमें से एक यूनिट बीते नवंबर महीने में औपचारिक रूप से कार्यशील हो चुकी है। इसका उद्घाटन बीते 22 अगस्त को ही गयाजी में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। परियोजना की दूसरी यूनिट का निर्माण भी लगभग पूरा हो चला है। जल्दी ही इससे भी उत्पादन शुरू करने की तैयारी है। इसे कार्यशील करने के लिए निर्बाध तरीके से कोयले की आपूर्ति आवश्यक होगी। इसमें प्रतिदिन दो रैक कोयले की खपत का अनुमान है। बक्सर-सासाराम-गया-बिहटा-आरा-बक्सर ट्रेन की बनेगी गुंजाइश यह नई बाईपास रेल लाइन परियोजना शाहाबाद और मगध क्षेत्र के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है। फिलहाल बक्सर और आरा जिले के लोगों के लिए जहानाबाद, गया की सीधी ट्रेन सेवा नहीं है। बक्सर के लिए तो सासाराम और कैमूर की भी सीधी ट्रेन सेवा नहीं है। डीडीयू बाईपास और बिहटा-दनियांवा रेल लाइन के माध्यम से यह समस्या दूर हो सकती है। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. महेंद्र प्रसाद, शिक्षाविद निर्मल सिंह, सरोज सिंह आदि का कहना है कि बक्सर-कुछमन-चंदौली-सासाराम-गया-जहानाबाद-जट डुमरी-बिहटा-आरा-बक्सर होते हुए इस क्षेत्र में लोकल ट्रेनें चलाना संभव हो सकेगा। इससे सात से आठ जिले को लोगों को लाभ मिल सकेगा।