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Punjab News: नशा तस्करों पर कसेगा शिकंजा, 6 IPS अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

चंडीगढ़. पंजाब की भगवंत मान सरकार ने नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर यह कदम उठाया है। राज्य सरकार की ओर से 21 अक्टूबर 2026 को राजपत्र में अधिसूचना जारी की गई। राज्यपाल की मंजूरी के बाद गृह विभाग ने यह आदेश जारी किया है। अधिसूचना के मुताबिक, इन अधिकारियों को Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1988 की धारा 3 की उपधारा (1) के तहत शक्तियां प्रदान की गई हैं। आदेश पर पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर के हस्ताक्षर हैं। इन छह वरिष्ठ IPS अधिकारियों को किया गया अधिकृत – पंजाब सरकार ने जिन छह वरिष्ठ IPS अधिकारियों को विशेष शक्तियों के इस्तेमाल के लिए अधिकृत किया है, उनमें ए. एस. राय, गौतम चीमा, शिव वर्मा, कौस्तुभ शर्मा, नौनिहाल सिंह और एस. भूपति शामिल हैं। – ए. एस. राय — स्पेशल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, ट्रैफिक, पंजाब। गौतम चीमा — एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस। शिव वर्मा — एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, इंटरनल सिक्योरिटी। कौस्तुभ शर्मा — एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, सिक्योरिटी। नौनिहाल सिंह — एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, इंटरनल विजिलेंस सेल। एस. भूपति — इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, प्रोविजनिंग। नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई मजबूत करने की कोशिश पंजाब में नशे का कारोबार लंबे समय से कानून-व्यवस्था और सामाजिक स्तर पर एक बड़ी चुनौती रहा है। सीमा पार से होने वाली तस्करी और सिंथेटिक ड्रग्स के नेटवर्क पर कार्रवाई को लेकर भी राज्य में लगातार चर्चा होती रही है। ऐसे में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को विशेष रूप से अधिकृत करने के फैसले को संबंधित कानून के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पंजाब में नशा तस्करी का मुद्दा सरकार की नीतियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस का हिस्सा भी रहा है। छह वरिष्ठ IPS अधिकारियों को विशेष शक्तियां देने का फैसला इसी पृष्ठभूमि में प्रशासनिक स्तर पर उठाया गया कदम है। अब इस अधिसूचना के बाद नशा तस्करी से जुड़े मामलों की जांच, कार्रवाई और तस्करी के नेटवर्क पर नियंत्रण के स्तर पर क्या बदलाव सामने आते हैं, इस पर नजर रहेगी।

मध्य प्रदेश में नशामुक्त विद्यालय अभियान शुरू, बड़े शिक्षण संस्थानों में गठित होंगी समितियां

भोपाल  मध्यप्रदेश को मादक पदार्थों से मुक्त बनाने के लिए राज्य शासन के अनेक विभाग संयुक्त अभियान चलाये और शुरूआत में 500 से अधिक विद्यार्थी वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षक, पालक, विद्यार्थी, उच्च शिक्षा, सामाजिक न्याय विभाग तथा पुलिस को समाहित कर एंटी ड्रग समितियों का गठन किया जायेगा। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल मंत्रालय में पांचवी राज्य स्तरीय एनसीओआरडी बैठक में समीक्षा कर रहे थे। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित अनेक विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष नार्कोटिक्स और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे। मुख्य सचिव बर्णवाल ने बैठक में कहा कि जिस प्रकार प्रदेश में नक्सलवाद को समाप्त किया गया है। उसी प्रकार आगामी दो तीन वर्षों में अवैध मादक पदार्थों के संपूर्ण रैकेट को खत्म करने के लिए संबंधित विभाग गंम्भीरता पूर्वक ऐसा अभियान चलाए जिसका समाज के सभी वर्गों तक सपष्ट संदेश जाए। सभी विभाग त्रि-वर्षीय विशेष अभियान के लिए अपने आंतरिक लक्ष्य निर्धारित कर कार्य-योजना बनायेंगे। मुख्य सचिव ने ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सूचना तंत्र को सदृढ़ करने के साथ ही नार्कोटिक्स वर्टिकल, एसआईबी और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय करने के निर्देश दिए। ड्रग विनिष्टिकरण में मध्यप्रदेश पहले स्थान पर दो वर्ष में 2 लाख 74 हजार 405 किलो ड्रग विनिष्ट मुख्य सचिव बर्णवाल ने मध्यप्रदेश में ड्रग विनिष्टिकरण की कार्रवाई में देश में मध्यप्रदेश के पहले स्थान पर रहने पर संतोष व्यक्त किया। बैठक में बताया गया कि अफीम मॉर्फीन,कोडीन आदि के वर्ष 2025 में 2073 प्रकरणों में कुल 144025 किलोग्राम एवं वर्ष 2026 में 30 सितम्बर तक 2756 प्रकरणों में कुल 130380 किलोग्राम मादक पदार्थों का विनिष्टिकरण किया गया है। बैठक में बताया गया कि ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सभी संबंधित विभागों ने समन्वय कर इस वर्ष 30 सितम्बर तक एनडीपीएस के 2986 मामलों में 4091 आरोपियों से 50933 किलोग्राम मादक पदार्थं जब्त किया है। नशामुक्ति अभियान में देश में मध्यप्रदेश टॉप 2 में, नशामुक्त विद्यालय अभियान चलाया जाए मुख्य सचिव बर्णवाल ने नशामुक्ति अभियान में देश में मध्यप्रदेश के टॉप 2 में आने पर संतोष व्यक्त किया और सभी संबंधित विभागों की सराहना की। शासकीय और अशासकीय शिक्षण संस्थान में नशामुक्त विद्यालय अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि 500 से ज्यादा छात्र संख्या वाले संस्थानों में एंटी ड्रग समिति गठित करें और शिक्षक और विद्यार्थियों को जागरूक किया जाए। ऐसा सूचना तंत्र विकसित किया जाए जिसमें सूचना देने वाले विद्यार्थी और शिक्षक आदि की पहचान गोपनीय रखी जायेगी। इन समितियों का नोडल ऑफिसर स्थानीय पुलिस थाने के बीट इंचार्ज को बनाया जाएगा। उन्होंने मादक पदार्थों के संबंध में सूचना देने के लिए नार्कोटिक्स विभाग के हेल्पलाइन नंबर 1933 का व्यापाक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सामाजिक न्याय विभाग को निर्देश दिए कि ऐसे जिले जहाँ नशामुक्ति केंद्र नहीं है वहां से 31 तक अक्टूबर तक प्रस्ताव प्राप्त करें और यह सुनिश्चित करें कि प्रदेश के सभी जिलों में नशामुक्ति केंद्र स्थापित हो जाएं। वर्तमान में सामाजिक न्याय विभाग के 31 और स्वास्थ्य विभाग के 10 नशामुक्ति केंद्र संचालित है। 18 गुप्त मादक प्रयोग शालाएं ध्वस्त बैठक में बताया गया कि प्रदेश में एनसीबी का राष्ट्रीय नार्कोटिक्स का हेल्पलाइन मानस पोर्टल 1933 संचालित किया जा रहा है। जिस पर मादक पदार्थों से जुडी गुप्त सूचनाएं प्राप्त हो रही है। प्रदेश में वर्ष 2025-2026 में कुल 811 शिकायातें प्राप्त हुईं। मध्यप्रदेश पुलिस, एनसीबी, डीआरआई और सीबीएन ने इस दौरान प्रदेश में मादक पदार्थों की 18 मादक पदार्थों की गुप्त प्रयोग शालाओं पर प्रभावी कार्यवाही कर ध्वस्त किया है। एनडीपीएस के प्रकरणों में 446 करोड़ की संपत्ति अटैच बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश में मादक पदार्थं के अवैध कारोबार में सलंग्न व्यक्तियों के विरूध कठोर कार्यवाही की गयी है। एनडीपीएस के वर्ष 2025 में 54 प्रकरणों में 300 करोड़ और वर्ष 2026 में 38 प्रकरणों में 146 करोड़ रूपये की संपत्ति अटैच करने की कार्यवाही की गयी है। सितम्बर 2026 तक एनडीपीएस के 201 विशेष ट्रॉयल मामलों को मॉनीटिरिंग में लिया गया है। इसी अवधि में न्यायालयों में लंबित मामलों में 8 में दोष सिद्धी हुई है। मुख्य सचिव बर्णवाल ने मध्यपद्रेश में संचालित कैमिकल फैक्ट्रियों में उपयोग होने वाले प्रीकर्सर के डायवर्जन को रोकने के लिए उद्योग, श्रम, स्वास्थ्य एवं गृह विभाग को कार्य-योजना बनाकर निगरानी तंत्र या विशेष दस्ता बनाकर औद्योगिक क्लस्टर्स और एसोसिएशन की सूची आपस में साझा कर उल्लंघन करने पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कोडीन बेस्ड कफ शीरप जैसी दवाईयों की आपूर्ति एवं वितरण के लगातार परीक्षण एवं लायसेंस प्रक्रिया को समेकित करने के लिए कम्यूटाइरेजेन करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में बताया गया कि सामाजिक न्याय विभाग द्वारा घोषित किये नशामुक्त क्षेत्रों की जानकारी कलेक्टर और एसपी को साझा की जाए। मुख्य सचिव बर्णवाल ने एफएसएल को एनडीपीएस एक्ट के तहत भेजे गए सैंपल की जांच रिपोर्ट 15 दिवस में प्राप्त किए जाने के लिए कार्य-योजना निर्धारित करने को कहा है। मुख्य सचिव बर्णवाल ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को निर्देश दिए कि केंद्र सरकार से समन्वय कर कोडिन बेस्ड कप सीरप के उत्पादन और प्रदेश में वितरण के नेटवर्क की जानकारी प्राप्त करें और सतत् निगरानी करें।उन्होंने सूचना तंत्र को मजबूत बनाने और प्रोत्साहन राशि में वृद्धि और निक्षेप के अधिकार राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक विकेंद्रित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में मादक पदार्थों के सेवन नहीं करने के प्रति जन-जागरूकता के 30339 कार्यक्रम आयोजित किये गए जिसमें लगभग 2.58 करोड़ व्यक्तियों की सहभागिता रही है। नशे से दूरी है जरूरी अभियान में भी समाज की बेहतर सहभागिता रही है। सोशल मीडिया के माध्यम से 58 करोड़ से अधिक व्यूज प्राप्त हुए है। इस दौरान लगभग 10 हजार युवाओं को विभिन्न खेल गतिविधियों से भी जोड़ा गया है।

पंजाब में नशा तस्करी पर कार्रवाई, फिरोजपुर में 10 पैकेट हेरोइन मिली; दो दिन में 21 किलो बरामद

फिरोजपुर फिरोजपुर में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक नशा तस्करी की एक और घटना सामने आई है। फिरोजपुर पुलिस और सीमा सुरक्षा बल ने संयुक्त ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भेजी गई हेरोइन के 10 पैकेट बरामद किए हैं। बताया जा रहा है कि ड्रोन सीमा से करीब 10 किलोमीटर दूर फिरोजपुर शहर के नजदीक हेरोइन की खेप गिराकर गया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शहर में सक्रिय भारतीय तस्करों ने पाकिस्तान से हेरोइन की यह खेप मंगवाई थी। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने बरामद हेरोइन को अपने कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही, खेप मंगवाने और इसे आगे सप्लाई करने में शामिल संदिग्धों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है। विज्ञापन गौरतलब है कि रविवार को भी पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के माध्यम से करीब 11 किलो हेरोइन गिराई गई थी, जिसे बीएसएफ और पुलिस ने बरामद कर लिया था। लगातार दो दिनों में फिरोजपुर के शहरी इलाके में करीब 21 किलो हेरोइन की बरामदगी से सीमा पार से नशा तस्करी की चुनौती एक बार फिर सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े लोगों का पता लगाने में जुटी हैं। 

ड्रग तस्करों पर और कसेगा शिकंजा, राजस्थान में 3 साल की नई नारकोटिक्स रणनीति तैयार

सीकर राजस्थान में नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए अब तीन साल की नई रणनीति तैयार होगी। अफीम, डोडा-पोस्त और एमडी की जब्ती में देश में पहले स्थान पर पहुंचे प्रदेश में सरकार नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29 तैयार कर रही है। नारकोटिक्स विभाग का पूरा ध्यान मादक पदार्थ पकड़ने और तस्करों को गिरफ्तार करने तक नहीं रहेगा, विभाग की ओर से सिंथेटिक ड्रग के निर्माण, उसकी सप्लाई चेन, ड्रग की मांग कम करने और नशे की चपेट में आए लोगों को इलाज व पुनर्वास से जोड़ने पर भी रहेगा। प्रदेश में एक साल में अब तक करीब 730 करोड़ रुपए के मादक पदार्थ जब्त हो चुके हैं। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 93 ड्रग किंगपिन ( अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के बड़े नेटवर्क और संगठनों का मालिक या संचालक) गिरफ्तार किए हैं और एमडी ड्रग बनाने वाली 34 फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया है। 5,626 केस दर्ज, अब दोहराने वाले अपराधियों पर भी नजर मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत अब तक 5,626 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। बार-बार अपराध करने वाले आरोपियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ पीआईटी एनडीपीएस एक्ट ( प्रिवेंशन ऑफ इललिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट 1988 ) के तहत कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश में 73 करोड़ 64 लाख 64 हजार 948 रुपए की चल-अचल संपत्तियां कुर्क, फ्रीज और सीज की गई हैं। कार्रवाई में मकान, दुकान, कृषि भूमि, आवासीय भूखंड और कार, पिकअप, ट्रैक्टर व मोटरसाइकिल सहित विभिन्न संपत्तियां शामिल हैं। चित्तौड़गढ़ में 20.35 करोड़, बारां में 18.48 करोड़, झालावाड़ में 12.65 करोड़ और प्रतापगढ़ में 8.24 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर कार्रवाई हुई है। नागौर, जोधपुर ग्रामीण व हनुमानगढ़ में भी 3.05 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की गई हैं। चार मोर्चों पर चलेगा अभियान नए विजन में ड्रग के खिलाफ कार्रवाई को चार प्रमुख हिस्सों में रखा जाएगा। इसमें प्रवर्तन, आसूचना एवं अभियान, प्रिकर्सर व सिंथेटिक ड्रग नियंत्रण, मांग एवं हानि न्यूनीकरण,क्षमता निर्माण, समन्वय एवं निगरानी शामिल हैं। खासतौर पर एमडी (मेथिलीन डाइऑक्सी मेथैम्फेटामाइन) जैसी सिंथेटिक ड्रग के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रिकर्सर पदार्थों की निगरानी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए प्रदेश के 12 सर्वाधिक संवेदनशील जिलों को विशेष निगरानी में रखा गया है। इन जिलों में नशामुक्ति शिविर लगाए जा रहे हैं और ड्रग हॉटस्पॉट पर निगरानी मजबूत की जा रही है। वहीं, शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ड्रग-फ्री बनाने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है। ड्रग पकड़ने के बाद वैज्ञानिक जांच जरूरी मादक पदार्थों के मामलों में फॉरेंसिक जांच को भी मजबूत किया जाएगा। ड्रग की पहचान, उसके स्रोत और नेटवर्क तक पहुंचने में वैज्ञानिक जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य और जिला स्तर पर नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनकार्ड) की नियमित बैठकें कर पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग सहित संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाया जाएगा। इनका कहना है पुलिस की कार्रवाई केवल एक मामले में गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, ड्रग के कारोबार में लगातार सक्रिय रहने वालों पर लंबी अवधि तक शिकंजा कसा जाएगा।नशे का कारोबार करने वाले मुख्य सप्लायर और तस्करी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभियान चलाकर नशे का उपभोग करने वालों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरुक किया जाएगा।

चंडीगढ़ में ड्रग्स के खिलाफ पुलिस का शिकंजा, 16 FIR में नशा बरामद; 82 आरोपी जेल भेजे

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। शहर में घोड़ों से गश्त के साथ थाना प्रभारी और एरिया डीएसपी रात को भी फील्ड में उतर रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई के वीडियो बनाकर मीडिया तक पहुंचाए जा रहे हैं। जंगल एरिया, खंडहरों और श्मशान घाट के पास बनाए गए नशेड़ियों के अड्डों पर माउंटेड पुलिस की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया गया। जंगल क्षेत्र से लोगों को पकड़ा गया, जिनके पास से 10 रुपए के नोट, फॉइल पर लगा चिट्टा, लाइटर और गर्म करने वाले चम्मच बरामद हुए। पुलिस ने छापेमारी के दौरान सरकारी कैमरामैन और पुलिसकर्मियों के मोबाइल से हर गतिविधि की वीडियोग्राफी की, ताकि कोर्ट में केस साबित हो सके। 82 लोगों के खिलाफ प्रिवेंटिव एक्शन चंडीगढ़ पुलिस ने 82 लोगों के खिलाफ प्रिवेंटिव एक्शन लेते हुए उन्हें जेल भेजा है। वहीं, NDPS एक्ट के तहत 16 FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें ड्रग्स की रिकवरी भी हुई है। पुलिस ने ग्राउंड लेवल पर आक्रामक अभियान शुरू कर दिया है। इस मुहिम में केवल थाना प्रभारी और एरिया DSP ही नहीं, बल्कि CRPF की टीम भी साथ है। ड्रग सप्लायरों और पैडलरों की सूची तैयार CID विंग को भी पूरी तरह एक्टिव किया गया है। CID की टीम कॉलोनियों में अपने मुखबिरों के जरिए ड्रग सप्लायरों और पैडलरों की सूची तैयार कर रही है। एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स के साथ-साथ अब स्थानीय पुलिस CRPF के हथियारबंद जवानों को साथ लेकर अलसुबह और देर रात सरप्राइज चेकिंग व रेड कर रही है। शहर में सप्लाई चेन को ध्वस्त करने के लिए दो या उससे अधिक NDPS केस वाले अपराधियों को PIT-NDPS के तहत एक साल के लिए डिटेन करने की रूपरेखा तैयार की गई है। प्रशासक बोले- पुलिस एक्शन ले तो नशा खत्म होगा चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया बीते वीरवार को नगर निगम के कार्यक्रम नशा मुक्त चंडीगढ़ में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा था कि पुलिस एक्शन ले तो नशा खत्म हो सकता है। उन्होंने एरिया पार्षदों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में नशे को रोकने के लिए आगे आने को कहा था। पार्षद ने पुलिस के सामने खोली नशे की पोल इसके बाद सिर्फ एक पार्षद जो नगर निगम की डिप्टी मेयर भी हैं, सुमन देवी ने पुलिस को पब्लिक मीटिंग में बताया था कि उनके एरिया में नशा बिक रहा है। उस दौरान डीएसपी और आईटी पार्क थाना प्रभारी मीनी भारद्वाज भी वहीं मौजूद थीं। सुमन देवी ने तीन अलग-अलग वीडियो भी दिखाए थे, जिनमें तीन युवक नशे की हालत में झूम रहे थे। समीर को 5 युवकों ने चाकू मारे दो दिन पहले ही न्यू इंदिरा कॉलोनी निवासी समीर को पार्क में पांच युवकों ने चाकू मारे थे। समीर के पिता ने आरोप लगाया कि सभी युवक नशा करते हैं। उन्होंने पुलिस को कई बार बताया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके भाई पवन, जिसकी थार से टक्कर मारकर हत्या कर दी गई थी, उसकी मौत भी नशे के मुद्दे से जुड़ी थी। उन्होंने नशे के खिलाफ आवाज उठाई थी, ताकि युवा पीढ़ी को बचाया जा सके। ऑटो ड्राइवर राजकुमार पर फायरिंग सेक्टर-49 में ऑटो ड्राइवर राजकुमार पर फायरिंग मामले में भी राजकुमार ने आरोप लगाया था कि उनके एरिया में नशा बिकता है। उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद उन पर फायरिंग कर दी गई।

नशा तस्करी के खिलाफ चंडीगढ़ में बड़ा एक्शन, 58 हॉटस्पॉट पर होगी सख्त कार्रवाई

चंडीगढ़. चंडीगढ़ में अब ड्रग तस्करों की खैर नहीं। नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस की निगरानी और कार्रवाई दोनों को और सख्त किया जाएगा। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने नशा तस्करों पर सख्ती बरतने के आदेश दिए हैं। चंडीगढ़ पुलिस मुख्यालय में नशे की रोकथाम को लेकर हुई बैठक में प्रशासक ने शहर में नशे की सप्लाई और बिक्री रोकने को पहली प्राथमिकता बनाने के आदेश दिए। बैठक में पुलिस अफसरों की ओर से बताया गया कि शहर में नशे की बिक्री या इस्तेमाल की शिकायत वाले 58 हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इन स्थानों पर पुलिस की नजर है। इसके अलावा पहले नशे से जुड़े मामलों में शामिल रहे आरोपितों की गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जा रही है। कई चिह्नित नशा तस्करों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई चल रही है और कई न्यायिक हिरासत में हैं। सप्लाई चेन तोड़ने पर फोकस प्रशासक ने पुलिस को नशे की सप्लाई करने वालों, पेडलरों और नशा बेचने या इस्तेमाल होने वाले स्थानों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने को कहा। बैठक में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसमें अतिरिक्त पुलिसकर्मियों के साथ साइबर विशेषज्ञ, कानूनी विशेषज्ञ और अनुभवी अधिकारियों को शामिल करने की बात कही गई। बीट सिस्टम मजबूत होगा, लापरवाही पर कार्रवाई कटारिया ने थानों के बीट सिस्टम को मजबूत करने के निर्देश दिए। संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त और अचानक निरीक्षण बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा तस्करों पर कार्रवाई में किसी तरह की लापरवाही मिलने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। मेडिकल स्टोरों की भी होगी निगरानी नशे की रोकथाम के लिए मेडिकल स्टोरों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। ऐसी दवाओं की बिक्री पर विशेष नजर रखने को कहा गया है, जिनमें नशे की लत लगाने वाले या नियंत्रित पदार्थ होते हैं और जो बिना उचित प्रिस्क्रिप्शन के बेची जा सकती हैं। जनता बनेगी पुलिस की ‘आंख और कान’ बैठक में नशे से जुड़ी सूचनाएं पुलिस तक पहुंचाने के लिए गोपनीय और प्रभावी व्यवस्था तैयार करने पर भी चर्चा हुई। डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने बताया कि एनडीपीएस कानून के तहत ऐसा सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिससे लोग नशे की बिक्री या संदिग्ध नशा तस्करों की सूचना पुलिस को दे सकें। इसका उद्देश्य जनता को पुलिस की ‘आंख और कान’ के रूप में जोड़ना है। नशामुक्ति के लिए परिवार और समाज की भागीदारी जरूरी प्रशासक ने कहा कि चंडीगढ़ को नशामुक्त बनाने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई के साथ नशे की लत से जूझ रहे लोगों के पुनर्वास तथा परिवार और समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने सभी विभागों और एजेंसियों को समन्वय के साथ लगातार प्रयास करने के निर्देश दिए।

फरीदकोट में नशे के खिलाफ बड़ी सफलता, 12 किलो से ज्यादा हेरोइन के साथ दो आरोपी दबोचे

फरीदकोट  फरीदकोट में सीआईए स्टाफ ने नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 12 किलो 221 ग्राम हेरोइन के साथ बाइक सवार दो युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान गांव करमूंवाला, जिला तरनतारन निवासी सुदागर सिंह उर्फ घुल्ला और कवलजीत खान उर्फ कम्मू के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ थाना सदर फरीदकोट में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।  गांव चंदबाजा के पास पुलिस ने की थी नाकाबंदी पुलिस के अनुसार, एसएसपी गुरबंस सिंह बैंस के दिशा-निर्देशों पर सीआईए स्टाफ प्रभारी एसआई हाकम सिंह के नेतृत्व में पुलिस पार्टी ने गरुवार रात अमृतसर-बठिंडा नेशनल हाईवे-54 पर गांव चंदबाजा के पास नाकाबंदी की हुई थी।   इस दौरान तलवंडी की तरफ से तेज रफ्तार बाइक पर आए दोनों युवकों ने पुलिस को देखकर बाइक पीछे मोड़कर भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें काबू कर लिया। तलाशी के दौरान कवलजीत खान के कंधे पर लटके किट बैग से छह पैकेट हेरोइन बरामद हुई। मौके पर पहुंचे डीएसपी (डी) अवतार सिंह राजपाल की निगरानी में कार्रवाई की गई। पुलिस ने हेरोइन और बाइक कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। 

पिज्जा रेस्टोरेंट की आड़ में चल रहा था ड्रग सिंडिकेट! अमेरिका में पंजाबी युवक गिरफ्तार, 40 किलो कोकीन जब्त

जालंधर अमेरिका के कैलिफोर्निया (California) में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट (Drug Syndicate) का पर्दाफाश करने का दावा किया है।पुलिस के अनुसार, पंजाब (Punjab) निवासी कवंलप्रीत पिज्जा रेस्टोरेंट (Pizza) की आड़ में कथित तौर पर कोकीन और अन्य नशीले पदार्थों की सप्लाई का नेटवर्क चला रहा था। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पिज्जा डिलीवरी की आड़ में ड्रग्स का कारोबार जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी पिज्जा बिजनेस और डिलीवरी नेटवर्क का इस्तेमाल कथित तौर पर ड्रग्स की सप्लाई के लिए करता था। पुलिस का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए स्थानीय स्तर पर कोकीन और मेथ जैसे नशीले पदार्थ पहुंचाए जाते थे। बताया जा रहा है कि आरोपी ने धीरे-धीरे एक बड़ा सप्लाई नेटवर्क तैयार कर लिया था और इससे भारी रकम कमाता था। रेड में 40 किलो कोकीन, पिस्तौल और कैश बरामद गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने आरोपी के घर और उससे जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान करीब 40 किलो कोकीन, कई पिस्तौलें और बड़ी मात्रा में अमेरिकी डॉलर बरामद किए गए। हथियारों की बरामदगी ने जांच को और गंभीर बना दिया है। अधिकारियों को आशंका है कि ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग भी इस अवैध गतिविधि में शामिल हो सकते हैं। अवैध तरीके से अमेरिका में रहने का भी आरोप जांच में आरोपी के अमेरिका (US) में अवैध तरीके से रहने की बात भी सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस अब उसके इमिग्रेशन रिकॉर्ड के साथ-साथ कथित ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। उम्रकैद तक की सजा का सामना कर सकता है आरोपी इतनी बड़ी मात्रा में कोकीन, हथियारों की बरामदगी और कथित ड्रग तस्करी के आरोपों के चलते आरोपी को अमेरिकी कानून के तहत गंभीर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। दोष सिद्ध होने पर उसे लंबी जेल की सजा, यहां तक कि उम्रकैद, और भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अंतिम सजा अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी। पुलिस अब कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने के लिए जांच और छापेमारी आगे बढ़ा रही है।

अमेरिका में भारतीय नागरिक पर ड्रग्स बेचने का आरोप, घर और पिज्जा आउटलेट से नशीला पदार्थ बरामद

कैलिफोर्निया अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक भारतीय नागरिक पर  पिज्जा आउटलेट की आड़ में ड्रग्स का कारोबार करने का मामला सामने आया है. U.S. Department of Justice के मुताबिक, 50 साल के कवल प्रीत सिंह पर बड़ी मात्रा में मेथामफेटामाइन बेचने और ड्रग्स की तस्करी में अवैध हथियार रखने के आरोप हैं।  जांच के दौरान अधिकारियों ने उसके घर और कारोबार की तलाशी ली. इस दौरान 40 पाउंड से ज्यादा मेथामफेटामाइन, तीन हथियार और 10 हजार डॉलर से ज्यादा नकद बरामद हुआ. कवल प्रीत सिंह कैलिफोर्निया के दिनुबा शहर में Round Table Pizza रेस्तरां चलाता था। कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक, आरोप है कि वह इसी रेस्तरां से बड़ी मात्रा में मेथामफेटामाइन बेचता था. उस पर ड्रग्स की तस्करी से जुड़े अवैध हथियार रखने का भी आरोप है।  अमेरिकी अधिकारियों ने 18 अगस्त को सिंह के घर और उसके कारोबार की तलाशी ली. इस दौरान बड़ी मात्रा में ड्रग्स के खेप के साथ तीन बंदूकें और नकदी मिली. इस मामले की जांच FBI और Homeland Security Investigations ने की है।  अगर कवल प्रीत सिंह को दोषी ठहराया जाता है तो ड्रग्स की तस्करी के मामले में उसे कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा हो सकती है. इसके अलावा उस पर 1 करोड़ डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं, ड्रग्स की तस्करी के दौरान हथियार रखने के आरोप में उसे कम से कम 5 साल की अतिरिक्त सजा हो सकती है।  हालांकि, अभी ये सिर्फ आरोप हैं. अदालत में दोष साबित होने तक सिंह को कानून के तहत निर्दोष माना जाएगा. अंतिम सजा अदालत संबंधित कानून और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए तय करेगी।  क्या है मेथामफेटामाइन? मेथामफेटामाइन एक बेहद नशीला और खतरनाक सिंथेटिक ड्रग है, जो दिमाग और शरीर पर तेज असर डालता है. इसके इस्तेमाल से गंभीर स्वास्थ्य नुकसान और लत लग सकती है. अमेरिका में बड़ी मात्रा में इसकी बिक्री और तस्करी करना गंभीर अपराध है। 

पंजाब में नशे पर सरकार का बड़ा सर्वे, 55 लाख परिवारों से जुटाई जा रही जानकारी

चंडीगढ़. पंजाब में नशे की स्थिति और इससे प्रभावित परिवारों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का पता लगाने के लिए शुरू किया गया पहला ड्रग एंड सोशल-इकोनामिक सेंसस लगभग पूरा हो गया है। सरकार ने 30 अगस्त तक 55.61 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 55.36 लाख परिवारों का सर्वे कर लिया है। इस तरह लक्ष्य का 99.56 प्रतिशत हिस्सा कवर किया जा चुका है। हालांकि, 3,48,692 परिवारों ने सर्वे में सहयोग नहीं किया या सर्वे से इन्कार कर दिया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 55.36 लाख परिवारों को कवर करने के दौरान 51.88 लाख सर्वे ऐसे रहे, जिन्हें गुणवत्ता जांच के लिए एआइ आधारित प्रणाली के माध्यम से परखा गया। इनमें से 44.63 लाख सर्वे एआइ प्रणाली ने स्वीकार कर लिए, जबकि 7.24 लाख सर्वे को एआइ ने अस्वीकार करते हुए मैनुअल गुणवत्ता जांच के लिए भेजा। यह कुल जांचे गए सर्वे का 13.96 प्रतिशत था। मैनुअल जांच में अधिकांश सर्वे हुए स्वीकार सरकारी सूत्र के अनुसार मैनुअल जांच के लिए भेजे गए 7.24 लाख मामलों में से 7.23 लाख की जांच पूरी हो चुकी है। इनमें 6.77 लाख सर्वे संपादन के बाद स्वीकार कर लिए गए। मैनुअल जांच के बाद केवल 19,432 सर्वे ऐसे बचे, जिन्हें अस्वीकार श्रेणी में रखा गया। यह गुणवत्ता जांच के लिए पात्र कुल सर्वे का महज 0.37 प्रतिशत है। अमृतसर सबसे आगे, फरीदकोट पीछे जिलेवार आंकड़ों में अमृतसर ने निर्धारित लक्ष्य को पार कर लिया है। यहां 4,75,079 के लक्ष्य के मुकाबले 4,80,030 सर्वे किए गए, जो 101.04 प्रतिशत है। मानसा, तरनतारन, संगरूर और फिरोजपुर ने भी 100 प्रतिशत से अधिक कवरेज हासिल किया। फाजिल्का, मोगा और पठानकोट ने अपना निर्धारित लक्ष्य पूरा कर लिया। सबसे कम कवरेज फरीदकोट में 95.32 प्रतिशत रही। इसके बाद एसएएस नगर 98.04, रूपनगर 98.13 और लुधियाना 98.15 प्रतिशत पर रहा। हालांकि संख्या के लिहाज से सबसे बड़ा अंतर लुधियाना में रहा, जहां लक्ष्य 6,58,844 के मुकाबले 6,46,634 सर्वे हुए। यहां 12,210 परिवार लक्ष्य से कम रहे। परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी जानी अप्रैल में शुरू किए गए इस सर्वे में करीब 28 हजार सरकारी कर्मचारियों को लगाया गया था। इसका उद्देश्य सिर्फ नशा करने वालों की पहचान करना नहीं था, बल्कि नशे की प्रकृति, लत की अवधि, उपचार की स्थिति और नशामुक्ति केंद्र तक पहुंच जैसी जानकारी जुटाना भी था। परिवार में शिक्षा, रोजगार, मासिक आय, जमीन, कर्ज, पलायन और विदेश जाने से जुड़ी जानकारी भी ली गई। सर्वे में जाति और उपजाति तथा सरकारी सेवाओं, स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, धार्मिक स्थलों और पानी के स्रोतों तक पहुंच के दौरान भेदभाव से जुड़े सवाल भी शामिल थे। विपक्ष ने इतने व्यापक सवालों को लेकर सरकार पर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और जनभावना से जुड़ा डाटा जुटाने का आरोप लगाया था। अब सरकार सर्वे के आंकड़ों को एकत्र कर उनका विश्लेषण करेगी। मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है, जिसमें संबंधित विभागों के सचिव शामिल हैं। समिति आंकड़ों के आधार पर नशे की स्थिति, प्रभावित क्षेत्रों, नशे के प्रकार और प्रभावित परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अध्ययन कर नई योजनाओं और नीतियों के लिए सुझाव तैयार करेगी।