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मेक्सिको की जीत और इंटरनेट पर धमाका! जानिए कौन है हर मैच के बाद वायरल होने वाली ‘सेलिब्रेशन क्वीन’

नई दिल्ली मेजबान मेक्सिको ने इक्वाडोर को 2-0 से हराकर फीफा विश्व कप 2026 के प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली. यह 1986 के बाद पहली बार है जब मेक्सिको ने विश्व कप के नॉकआउट चरण में जीत दर्ज की. स्टेडियम में 80 हजार से ज्यादा दर्शकों का शोर गूंज रहा था, लेकिन मैच खत्म होने के बाद इंटरनेट पर सबसे ज्यादा चर्चा किसी खिलाड़ी की नहीं, बल्कि एक फैन की होने लगी।  वह हैं ओलिविया बेथल (Olivia Bethel), जिन्हें सोशल मीडिया पर H-Town Girl के नाम से जाना जाता है।  मेक्सिको के गोल के बाद ओलिविया ने अपना रिएक्शन वीडियो इंस्टाग्राम- @thehtowngirl) और X- @Htownliv पर पोस्ट किया. कुछ ही घंटों में यह वीडियो वायरल हो गया और लाखों व्यूज बटोरने लगा. मेक्सिको के दोनों गोल पर उनका उत्साह, चीखते हुए जश्न, डांस, कैमरे की तरफ मुस्कुराते हुए रिएक्शन और पूरे माहौल की ऊर्जा ने वीडियो को वायरल बना दिया।  दिलचस्प बात यह है कि यह कोई पहली बार नहीं हुआ. पूरे टूर्नामेंट में मेक्सिको की हर जीत के बाद ओलिविया का सेलिब्रेशन वीडियो सोशल मीडिया पर ट्रेंड करता रहा है. कई फैन्स तो उन्हें मजाक में मेक्सिको की 'लकी चार्म' भी कहने लगे हैं।  यह वीडियो किसी स्टेडियम का नहीं, बल्कि एक स्पोर्ट्स बार का है, जहां बड़ी स्क्रीन पर मुकाबला चल रहा था. जैसे ही मेक्सिको ने गोल किया, पूरा बार खुशी से झूम उठा और उसी दौरान कैमरे में कैद ओलिविया का जोशीला रिएक्शन इंटरनेट की नई सनसनी बन गया।  उधर, मैदान पर भी मेक्सिको ने इतिहास रच दिया. बारिश और आंधी की वजह से मैच एक घंटे देरी से शुरू हुआ, लेकिन इसका असर खिलाड़ियों पर नहीं दिखा. शुरुआत से ही मेक्सिको ने आक्रामक खेल दिखाया और 2-0 की जीत के साथ 1986 के बाद पहली नॉकआउट जीत दर्ज कर ली।  अब मेक्सिको प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुका है. टीम अगला मुकाबला खेलने उतरेगी, जबकि सोशल मीडिया पर फैन्स की नजर इस बात पर भी रहेगी कि क्या H-Town Girl का अगला वायरल सेलिब्रेशन फिर इंटरनेट पर धूम मचाएगा। 

Smartphone Battery Tips: 100% चार्ज करने की आदत पड़ सकती है भारी? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

 नई दिल्ली आज के समय में लगभग हर स्मार्टफोन में लिथियम-आयन (Lithium-ion) बैटरी दी जाती है. ऐसे में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या फोन को हमेशा 100% तक चार्ज करना सही है या फिर 80% पर ही चार्जिंग रोक देनी चाहिए? सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं. लेकिन आखिर सच क्या है? अगर आप चाहते हैं कि आपके फोन की बैटरी लंबे समय तक अच्छी हालत में रहे, तो सिर्फ चार्ज करने का तरीका ही नहीं बल्कि कुछ छोटी-छोटी आदतें भी काफी फर्क डालती हैं।  क्या 100% तक चार्ज करना गलत है? सीधा जवाब है- नहीं. फोन को 100% तक चार्ज करना गलत नहीं है और इससे बैटरी फटने या तुरंत खराब होने का खतरा नहीं होता. आज के लगभग सभी स्मार्टफोन में ऐसी तकनीक होती है जो बैटरी फुल होने के बाद चार्जिंग को कंट्रोल कर देती है. यानी फोन 100% दिखाने के बाद भी बैटरी को जरूरत से ज्यादा चार्ज नहीं करता।  हालांकि, अगर आप रोजाना कई घंटों तक फोन को 100% चार्ज पर ही लगाए रखते हैं, खासकर गर्म माहौल में, तो इससे बैटरी की उम्र धीरे-धीरे कम हो सकती है. इसकी वजह बैटरी पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव और गर्मी है।  80% तक चार्ज करने की सलाह क्यों दी जाती है? बैटरी एक्सपर्ट्स का मानना है कि लिथियम-आयन बैटरियां 20% से 80% के बीच सबसे आरामदायक स्थिति में काम करती हैं. इसी वजह से कई कंपनियां अब फोन में चार्ज लिमिट, बैटरी प्रोटेक्शन और ऑप्टिमाइज्ड चार्जिंग जैसे फीचर देने लगी हैं।  उदाहरण के तौर पर, Apple ने iPhone में 80% से 100% तक चार्जिंग लिमिट चुनने का ऑप्शन दिया है. कंपनी का कहना है कि इससे लंबे समय में बैटरी की लाइफ बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।  क्या हमेशा 80% तक ही चार्ज करना चाहिए? जरूरी नहीं. अगर आप हर दो-तीन साल में नया फोन खरीद लेते हैं, तो 100% तक चार्ज करने की ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर आप अपना फोन चार-पांच साल तक इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो 80% या 85% तक चार्ज रखने की आदत बैटरी हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकती है।  सबसे ज्यादा नुकसान किस चीज से होता है? बैटरी के लिए सबसे बड़ा दुश्मन गर्मी मानी जाती है. अगर फोन चार्जिंग के दौरान बहुत गर्म हो रहा है, धूप में रखा है या चार्जिंग के समय भारी गेम खेल रहे हैं, तो इससे बैटरी तेजी से खराब हो सकती है. फोन गिर रहा है या और बैटरी पर इंपैक्ट है तो भी बैटरी फटने का खतरा रहता है।  इसी तरह बैटरी को बार-बार पूरी तरह 0% तक खत्म करना भी अच्छी आदत नहीं मानी जाती. बेहतर होगा कि बैटरी 20% के आसपास पहुंचने पर फोन चार्ज कर दें।  रातभर चार्ज पर छोड़ना सही है? अगर आपका फोन नया है, तो आमतौर पर इसमें ऑप्टिमाइज्ड या एडेप्टिव चार्जिंग जैसे फीचर होते हैं. ये आपकी रोज की आदत को समझकर कुछ समय के लिए चार्जिंग रोक देते हैं और जरूरत पड़ने पर ही 100% तक पहुंचाते हैं. ऐसे में रातभर चार्जिंग पहले जितनी बड़ी चिंता की बात नहीं रही।  सबसे सही तरीका क्या है? अगर आपको पूरे दिन ज्यादा बैटरी चाहिए, तो फोन को 100% तक चार्ज करना बिल्कुल ठीक है. वहीं अगर आपकी प्रायॉरिटी बैटरी की लंबी लाइफ है और दिनभर 80% चार्ज आपके लिए काफी है, तो चार्ज लिमिट या बैटरी प्रोटेक्शन जैसे फीचर का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है।  यानी सबसे जरूरी बात यह नहीं है कि फोन 80% तक चार्ज करें या 100% तक, बल्कि यह है कि फोन को ज्यादा गर्म होने से बचाएं, अच्छी क्वॉलिटी का चार्जर इस्तेमाल करें और बैटरी को बार-बार पूरी तरह खत्म होने न दें. यही आदतें आपके स्मार्टफोन की बैटरी को लंबे समय तक बेहतर स्थिति में रखने में सबसे ज्यादा मदद करेंगी। 

10 साल तक पति से छुपाया सच! आकांक्षा चमोला के खुलासे से सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

मुंबई  टीवी स्टार गौरव खन्ना से अपने तलाक की खबर से सबको चौंकाने वाली एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला अब एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार उनकी निजी जिंदगी का एक बड़ा 'सीक्रेट' शो के भीतर ही लीक हो गया है, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. शो की कंटेस्टेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रेया कालरा ने कुछ ऐसा कह दिया, जिसने सनसनी मचा दी है।  आकांक्षा चमोला उभयलिंगी हैं, लॉक अप 2, लॉक अप 2 अपडेट, श्रेया कालरा ने आकांक्षा चमोला के बारे में चौंकाने वाला दावा किया, आकांक्षा चमोला का गौरव खन्ना से तलाक, लॉक अप 2 की प्रतियोगी श्रेया कालरा नई दिल्ली. 'लॉक अप 2' में हर गुजरते एपिसोड के साथ रिश्तों, राज और रणनीतियों का खेल और दिलचस्प होता जा रहा है. शो में अब एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने घर के अंदर से लेकर सोशल मीडिया तक बहस छेड़ दी है. हाल ही में अपने तलाक की जानकारी देकर सुर्खियों में आईं टीवी एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला को लेकर अब शो की कंटेस्टेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रेया कालरा ने कैमरे के सामने कुछ ऐसा कह दिया. जो सुर्खियों में छा गया।   शो की कंटेस्टेंट और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर श्रेया कालरा ने दावा किया कि एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला बायसेक्शुअल हैं. उन्होंने ये खुलासा तब हुआ जब आकांक्षा ने गेम के नियमों के तहत श्रेया के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी थी, जिससे नाराज होकर श्रेया ने बदला लेने के लिए आकांक्षा की पर्सनल बात को गेम में उछाल दिया।   शो के दौरान इन्फ्लुएंसर सूफी मोतीवाला से बात करते हुए श्रेया कालरा ने आकांक्षा के इस राज को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया. श्रेया ने सूफी से पूछा, 'अगर मैं इस बात का खुलासा कर दूं, तो क्या मैं एक बुरी इंसान बन जाऊंगी?" इस पर सूफी ने गेम का पक्ष लेते हुए कहा, 'नहीं, यही तो गेम है। इसके तुरंत बाद श्रेया ने दावा किया, 'वह बायसेक्सुअल है.' यह सुनते ही कैमरे का रुख तुरंत आकांक्षा चमोला की तरफ मुड़ गया. हालांकि, सूफी ने इसे निजी रखने का सुझाव भी दिया, लेकिन श्रेया सहमत नहीं हुईं. श्रेया ने कहा, 'अब सीक्रेट का इस्तेमाल हो चुका है. उसने मुझे यह बात भरोसे से बताई थी और हमने इसे शो पर उजागर कर दिया है. अब उसकी दो लाइफलाइन खत्म हो चुकी हैं और सिर्फ एक बची है। आकांक्षा चमोला का गौरव खन्ना से तलाक, लॉक अप 2 की प्रतियोगी श्रेया कालरा आपको बता दें कि 'लॉक अप 2' के ग्रैंड प्रीमियर एपिसोड में ही आकांक्षा चमोला ने अपनी शादी टूटने की खबर देकर होस्ट फराह खान, रितेश देशमुख और दर्शकों को हैरान कर दिया था।  आकांक्षा ने बताया था कि वह और उनके पति और एक्टर गौरव खन्ना पिछले एक साल से अलग रह रहे हैं और अब तलाक लेने जा रहे हैं. उन्होंने यह भी साफ किया था कि दोनों के बीच कोई कड़वाहट नहीं है, बल्कि भविष्य को लेकर दोनों की सोच अलग है। 

WhatsApp Username Feature बना चिंता का कारण, बढ़ते साइबर फ्रॉड के डर से सरकार करेगी समीक्षा

 नई दिल्ली WhatsApp ने हाल ही में अपना नया यूजरनेम फीचर लॉन्च किया है. इस फीचर की मदद से अब लोग अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी किसी दूसरे यूजर से बात कर सकेंगे।  कंपनी का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी. लेकिन भारत सरकार इस फीचर को लेकर सतर्क हो गई है. सरकार को आशंका है कि अगर इसका गलत इस्तेमाल हुआ तो ऑनलाइन फ्रॉड और फर्जी पहचान वाले मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।  WhatsApp का यूजरनेम फीचर स्कैमर्स के लिए फायदेमंद तो नहीं? सरकारी सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार वॉट्सऐप नए यूजरनेम फीचर के गोपनीयता और सुरक्षा पहलुओं की जांच करने की तैयारी में है. सरकार यह समझना चाहती है कि कहीं यह फीचर साइबर अपराधियों के लिए नई सुविधा तो नहीं बन जाएगा।  अगर जांच में कोई गंभीर खामी या सुरक्षा से जुड़ी समस्या सामने आती है, तो वॉट्सऐप की पेरेंट कंपनी मेटा को नोटिस भी भेजा जा सकता है। वॉट्सऐप का यह फीचर टेलीग्राम की तरह काम करता है. पहले किसी नए शख्स से वॉट्सऐप पर बात करने के लिए मोबाइल नंबर जरूरी होता था. अब यूजर सिर्फ अपने यूजरनेम के जरिए भी बातचीत शुरू कर सकता है।  इसका फायदा यह होगा कि आपका मोबाइल नंबर सामने वाले व्यक्ति को नहीं दिखेगा. कंपनी का कहना है कि इससे प्राइवेसी बेहतर होगी और अनजान लोगों के साथ नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।  किसी के नाम से यूजरनेम बना कर लोगों के साथ हो सकती है ठगी हालांकि सरकार की चिंता दूसरी भी है. अधिकारियों का मानना है कि अगर कोई शख्स किसी दूसरे के नाम जैसा यूजरनेम बना ले या अपनी असली पहचान छिपाकर लोगों से संपर्क करे, तो ऑनलाइन ठगी के नए तरीके सामने आ सकते हैं।  टेलीग्राम पर पहले भी फर्जी यूजरनेम और नकली प्रोफाइल के जरिए लोगों को धोखा देने के कई मामले सामने आ चुके हैं. इसी वजह से सरकार वॉट्सऐप के नए फीचर को लेकर एक्स्ट्रा सावधानी बरत रही है।  सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने भी इस फीचर को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि प्राइवेसी बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन अगर पहचान छिपाना आसान हो गया तो स्कैमर्स इसका फायदा उठा सकते हैं. खासकर ऐसे यूजरनेम जो किसी कंपनी, सेलिब्रिटी या दूसरे व्यक्ति से मिलते-जुलते हों, वे लोगों को आसानी से भ्रमित कर सकते हैं।  वॉट्सऐप अपनी ओर से कुछ सुरक्षा उपाय भी दिए हैं. कंपनी का कहना है कि हर यूजरनेम यूनिक होगा और कुछ हाई-प्रोफाइल नाम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि उनकी नकल न की जा सके।  इसके अलावा वॉट्सऐप किसी तरह की पब्लिक यूजरनेम डायरेक्टरी भी नहीं बना रहा है. यानी किसी व्यक्ति का यूजरनेम तभी इस्तेमाल किया जा सकेगा, जब वह आपको पहले से पता हो। 

Tech Layoffs: Microsoft में एक और जॉब कट की आशंका, 5,000 कर्मचारियों पर लटक रही तलवार

नई दिल्ली Microsoft एक बार फिर बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी कर रही है. रॉयटर्स ने बिजनेस इंसाइडर की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि कंपनी अगले कुछ दिनों में हजारों कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर सकती है।  हालांकि इस बार छंटनी का असर कंपनी के कुल कर्मचारियों के 2.5 प्रतिशत से कम लोगों पर पड़ने की उम्मीद है. माइक्रोसॉफ्ट के दुनियाभर में करीब 2.2 लाख कर्मचारी हैं. ऐसे में यह संख्या करीब 5 हजार या उससे कम हो सकती है।  रिपोर्ट्स के अनुसार इस बार सबसे ज्यादा असर सेल्स, कंसल्टिंग और Xbox गेमिंग डिविजन पर पड़ सकता है. कंपनी की तरफ से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कई क्रेडिबल रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नए फाइनांशियल ईयर की शुरुआत के साथ यह फैसला लिया जा सकता है।  आखिर Microsoft फिर कर्मचारियों की छंटनी क्यों कर रही है? पिछले कुछ सालों में माइक्रोसॉफ्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर रिकॉर्ड निवेश किया है. कंपनी OpenAI के साथ साझेदारी बढ़ा रही है, नए AI डेटा सेंटर बना रही है और Copilot जैसे AI प्रोडक्ट्स पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है. ऐसे में दूसरी तरफ ऑपरेटिंग खर्च कम करने के लिए कंपनी लगातार अपने कर्मचारियों की संख्या घटा रही है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि माइक्रोसॉफ्ट लागत कम करने के साथ-साथ अपने बिजनेस को AI के हिसाब से दोबारा तैयार करना चाहती है. यही वजह है कि जिन टीमों में ऑटोमेशन या AI की मदद से काम हो सकता है, वहां कर्मचारियों की संख्या कम की जा रही है।  Xbox टीम पर भी असर पड़ सकता है माइक्रोसॉफ्ट के गेमिंग बिजनेस यानी Xbox में भी बदलाव की तैयारी चल रही है. पिछले कुछ समय से Xbox के अंदर बड़े स्तर पर रीस्ट्रक्चरिंग की चर्चा है. नई लीडरशिप के आने के बाद बिजनेस को रीसेट करने की योजना बनाई जा रही है. इसी वजह से गेमिंग डिविजन में भी कई पद खत्म किए जा सकते हैं और कुछ टीमों का पुनर्गठन हो सकता है।  पहले भी हो चुकी है बड़ी छंटनी यह पहली बार नहीं है जब माइक्रोसॉफ्ट कर्मचारियों की संख्या घटा रही है. पिछले साल भी कंपनी ने अलग-अलग चरणों में हजारों कर्मचारियों की छंटनी की थी. उस समय भी कंपनी ने AI में निवेश बढ़ाने और खर्च कम करने को इसकी बड़ी वजह बताया था।  माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है. 2026 में मेटा, ऐमेजॉन, ओरैकल, लिंक्डइन, कॉइनबेस, गूपऑन और कई दूसरी बड़ी टेक कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या कम कर चुकी हैं या इसकी घोषणा कर चुकी हैं. कई कंपनियां खुलकर कह चुकी हैं कि AI की वजह से काम करने का तरीका बदल रहा है और फ्यूचर में कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम किया जाएगा। 

18% आबादी, लेकिन सिर्फ 4% जल संसाधन! क्या बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है भारत?

 नई दिल्ली भारत इस समय दुनिया के सबसे बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है. आबादी और पानी के संसाधनों के बीच का असंतुलन देश के भविष्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है. दुनिया की लगभग 18% आबादी भारत में रहती है, लेकिन हमारे पास दुनिया के कुल पीने वाले पानी का सिर्फ 4% हिस्सा ही मौजूद है।  तेजी से हो रहे शहरीकरण, औद्योगीकरण और जलवायु परिवर्तन के दबाव के कारण मौजूदा संसाधनों पर बोझ बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बढ़ रहा है, जिसके लिए आने वाले दशक में भारी निवेश की ज़रूरत होगी।  PL Capital की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में लगभग ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है।  आर्थिक उतार-चढ़ाव के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, पानी की सुरक्षा में निवेश मुख्य रूप से स्ट्रक्चरल कारणों से बढ़ रहा है. बढ़ती आबादी, शहरों का विस्तार, औद्योगिक विकास, भूजल में कमी और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं।  PL Capital में एडवाइजरी के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसात ने कहा, "भारत में पानी एक अहम रणनीतिक संसाधन बनता जा रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दूसरे ट्रेंड्स, जो आर्थिक चक्रों से जुड़े हो सकते हैं, उनके उलट पानी की सुरक्षा में निवेश स्ट्रक्चरल और पॉलिसी पर आधारित होता है और टिकाऊ विकास के लिए ज़रूरी है।  सीवेज को ट्रीट करने की क्षमता कम  भारत में अभी हर दिन 72,000 मिलियन लीटर से ज़्यादा सीवेज पैदा होता है, लेकिन इसे ट्रीट करने की क्षमता काफी नहीं है. इस वजह से बड़ी मात्रा में बिना ट्रीट किया हुआ वेस्टवॉटर नदियों और दूसरे जल स्रोतों में बहा दिया जाता है. आने वाले सालों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग सुविधाओं का विस्तार इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च का एक बड़ा हिस्सा बनने की उम्मीद है।  रिपोर्ट में पानी की ज्यादा खपत वाले कई उद्योगों के उभरने की ओर भी इशारा किया गया है, जिनसे अच्छी क्वालिटी वाले इंडस्ट्रियल पानी की मांग बढ़ने की उम्मीद है. डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन, ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट और स्पेशलिटी केमिकल्स इन सभी में बहुत ज़्यादा शुद्ध पानी की ज़रूरत होती है. इससे पानी को शुद्ध करने और रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों के लिए नए मौके बन रहे हैं।  PL Capital की एक नई थीम-बेस्ड रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध सप्लाई से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है।  इकोनॉमिक साइकल के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, वॉटर सिक्योरिटी में निवेश अब स्ट्रक्चरल वजहों से बढ़ रहा है. आबादी का बढ़ना, शहरों का विस्तार, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, ग्राउंडवॉटर का कम होना और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। 

मध्य प्रदेश में CM हेल्पलाइन का हाल बेहाल, 1.77 लाख शिकायतें तीन माह से ज्यादा समय से अटकीं

भोपाल  प्रदेश में आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए बनाई गई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन खुद धीमी पड़ती नजर आ रही है। सरकारी समीक्षा में सामने आया है कि एक लाख 77 हजार से अधिक शिकायतें ऐसी हैं, जिनका तीन माह से अधिक समय बीतने के बाद भी निपटारा नहीं हो सका। सबसे ज्यादा लंबित मामले राजस्व, गृह और नगरीय विकास एवं आवास विभाग से जुड़े हैं। इन विभागों से संबंधित शिकायतें महीनों तक अटकी रहने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। यहीं नहीं 200 से ज्यादा शिकायतों को तो अटेंड भी नहीं किया गया। यही वजह है कि सीएम हेल्पलाइन में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।    सबसे ज्यादा दबाव राजस्व विभाग पर लंबित शिकायतों के मामले में राजस्व विभाग सबसे ऊपर है। विभाग में 1.02 लाख से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं, जबकि इनमें 30 हजार से अधिक मामले ऐसे हैं, जिन्हें 100 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। भूमि सीमांकन, नामांतरण, खसरा सुधार और अवैध कब्जे जैसे मामलों में लोगों को सबसे ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। अकेले अवैध कब्जे से जुड़ी हजारों शिकायतें अब भी लंबित हैं।  पुलिस से जुड़ी शिकायतों में भी नहीं मिल रही राहत गृह विभाग में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। यहां 54 हजार से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं और इनमें करीब 16 हजार मामले 100 दिन की सीमा पार कर चुके हैं। सबसे अधिक शिकायतें एफआईआर दर्ज नहीं होने, पुलिस जांच में देरी और गिरफ्तारी नहीं किए जाने से जुड़ी हैं। इससे कानून व्यवस्था से संबंधित शिकायतों के निराकरण पर सवाल उठ रहे हैं। शहरों की बुनियादी सुविधाओं के मामले भी अटके नगरीय विकास एवं आवास विभाग में भी हजारों शिकायतों का समाधान तय समय में नहीं हो पाया है। साफ-सफाई, सीवेज, पेयजल, प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़कों की मरम्मत और अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों में लोग लंबे समय से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।  शिकायतें बढ़ीं, समाधान की रफ्तार घटी इस वर्ष जनवरी से अब तक सीएम हेल्पलाइन में 81 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी है जो अभी तक संबंधित स्तर पर लंबित है। वहीं एल-3 और एल-4 स्तर पर भी करीब 1.92 लाख शिकायतें तय समय सीमा के बाद भी निपटारे का इंतजार कर रही हैं। वहीं, राजस्व विभाग के  अधिकारी का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों की नियमित समीक्षा की जाती है और उनका निदान किया जाता है। कुछ शिकायतें नीतिगत होने के कारण उनमें समय लगता हैं।  

Electric Vehicle News: EV चार्जिंग के लिए सुरक्षित नहीं 45% भारतीय घर, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

 नई दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिए जाने के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. भारत के लगभग 45% घरों को सुरक्षित रूप से EV चार्ज करने के लिए अपने इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की सख्त जरूरत है।  यह जानकारी 'द नेट-ज़ीरो ट्रांज़िशन स्टार्ट्स एट होम: इनेबलिंग EV-रेडी रेजिडेंसेस इन इंडिया' नाम की एक नई रिपोर्ट से मिली है. यह रिपोर्ट भारत के टियर-1, टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले लोगों के अनुभवों पर आधारित है, इसके लिए स्वतंत्र घरों, अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स, झुग्गी-बस्तियों और किराए के मकानों में लगे 80,000 से अधिक घरेलू EV चार्जर्स के डेटा का अध्ययन किया गया है।  ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब सरकारें EV को अपनाने के लिए कड़े कदम उठा रही हैं, जैसे दिल्ली सरकार ने जनवरी 2027 से नए पेट्रोल-सीएनजी तिपहिया वाहनों और अप्रैल 2028 से पेट्रोल दोपहिया वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने का फैसला किया है।  रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में केवल 55 प्रतिशत संभावित EV खरीदारों के पास ही घरेलू चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है, जबकि आवासीय चार्जिंग ही इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने का सबसे प्राथमिक माध्यम है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि देश में EV से जुड़ी बिजली की खपत साल 2024 में कुल राष्ट्रीय मांग के महज 0.2 प्रतिशत से बढ़कर साल 2035 तक लगभग 6 प्रतिशत हो जाएगी।    पिछले एक दशक में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है, लेकिन घरों में चार्जिंग की सुविधा अभी भी बेहद असमान है. रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षित और भरोसेमंद चार्जिंग के लिए हर घर को एक न्यूनतम मानक पूरा करना जरूरी है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण लोग सामान्य पावर सॉकेट, अस्थायी एक्सटेंशन केबल और साझा बिजली कनेक्शन जैसे असुरक्षित तरीकों पर निर्भर हैं।  असुरक्षित चार्जिंग से जुड़े बड़े खतरे शोधकर्ताओं ने कड़ी चेतावनी दी है कि घरेलू स्तर पर किए जाने वाले इस तरह के अनौपचारिक या जुगाड़ू चार्जिंग इंतजामों से आग लगने का भारी खतरा रहता है, साथ ही इलेक्ट्रिकल फॉल्ट और महंगे उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है. जब इन सामान्य सर्किट्स पर अत्यधिक लोड पड़ता है, तो इससे वोल्टेज में भारी उतार-चढ़ाव, तारों का जरूरत से ज्यादा गर्म होना , ट्रांसफार्मर का खराब होना और स्थानीय इलाकों में बिजली गुल होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसके अलावा, असुरक्षित तरीके से की जाने वाली चार्जिंग से न सिर्फ वाहन के चार्ज होने की निरंतरता प्रभावित होती है, बल्कि गाड़ी की बैटरी भी समय से पहले तेजी से खराब हो सकती है। 

मध्य प्रदेश के मोहम्मद कोनैन दाद का भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम में चयन, प्रदेश में खुशी की लहर

भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम में मध्यप्रदेश के मोहम्मद कोनैन दाद का चयन 5 से 18 जुलाई तक बेल्जियम दौरे में करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मंच पर मध्यप्रदेश की प्रतिभा दिखाएगी अपना दमखम भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य हॉकी अकादमी, भोपाल के प्रतिभाशाली खिलाड़ी मोहम्मद कोनैन दाद का चयन 5 से 18 जुलाई तक होने वाले भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के बेल्जियम दौरे के लिए भारतीय टीम में हुआ है। इस दौरे के दौरान भारतीय जूनियर टीम बेल्जियम में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों में भाग लेते हुए अपनी तैयारियों को और मजबूत करेगी। मोहम्मद कोनैन डैड फॉरवर्ड खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की सशक्त उपस्थिति मोहम्मद कोनैन दाद का भारतीय जूनियर टीम में चयन मध्यप्रदेश राज्य हॉकी अकादमी में खिलाड़ियों को दिए जा रहे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, वैज्ञानिक खेल सुविधाओं एवं उत्कृष्ट कोचिंग व्यवस्था का परिणाम है। यह उपलब्धि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं के निरंतर उभरते स्तर को दर्शाती है तथा मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मानचित्र पर नई पहचान दिला रही है। मेहनत, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन का मिला प्रतिफल मोहम्मद कोनैन दाद ने विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन, तेज़ खेल कौशल एवं निरंतर मेहनत के बल पर भारतीय जूनियर टीम में स्थान बनाया है। उनका चयन उनके समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रतिफल है। बेल्जियम दौरे के दौरान वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत और मध्यप्रदेश की प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। प्रदेश के युवा हॉकी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा मोहम्मद कोनैन दाद की यह उपलब्धि प्रदेश के उभरते हॉकी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और दृढ़ संकल्प के साथ खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकते हैं। उनकी सफलता प्रदेश में हॉकी के प्रति युवाओं के उत्साह को और अधिक प्रोत्साहित करेगी। खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी शुभकामनाएँ खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मोहम्मद कोनैन दाद को भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम में चयनित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मोहम्मद कोनैन डैड बेल्जियम दौरे में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगे।  

मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसान हितैषी योजनाओं का हो रहा प्रभावी क्रियान्वयन

रायपुर  मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर खेती-किसानी को मजबूती देने का सशक्त माध्यम बन रही है। योजना के माध्यम से मिलने वाली राशि किसानों को समय पर बीज, उर्वरक तथा अन्य कृषि आदानों की व्यवस्था करने में सहायक सिद्ध हो रही है, जिससे खेती की लागत का दबाव कम होने के साथ कृषि कार्य भी निर्धारित समय पर पूरे हो रहे हैं। गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले की ग्राम पंचायत सारबहरा के किसानएवन सिंह इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त की राशि प्राप्त हुई, जिसका उपयोग उन्होंने बीज, उर्वरक तथा अन्य आवश्यक कृषि कार्यों में किया।एवन सिंह का कहना है कि समय पर मिलने वाली आर्थिक सहायता ने खेती की तैयारियों को आसान बनाया है। इससे कृषि कार्यों में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होती और खेती की उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायता मिलती है। इसी ग्राम पंचायत के किसाननरेश यादव, जो लगभग चार एकड़ भूमि में खेती करते हैं, भी योजना का नियमित लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना छोटे एवं मध्यम किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हुई है। योजना से प्राप्त राशि के माध्यम से कृषि कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री खरीदना आसान हुआ है, जिससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिलने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। उनका मानना है कि समय पर मिलने वाली सहायता किसानों को बेहतर योजना बनाकर खेती करने के लिए प्रेरित करती है और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में किसान हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया जा रहा है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि पात्र किसानों तक केंद्र सरकार की सभी कृषि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पहुंचे। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना इसी दिशा में किसानों के लिए एक भरोसेमंद आर्थिक सहारा बनकर उभरी है। योजना का सफल क्रियान्वयन किसानों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। समय पर मिलने वाली सहायता से किसान खेती की बेहतर तैयारी कर रहे हैं, आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के प्रति उत्साहित हो रहे हैं तथा उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिक आत्मविश्वास के साथ कार्य कर रहे हैं। प्रदेश सरकार का मानना है कि किसानों की समृद्धि ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का आधार है। इसी सोच के अनुरूप किसान कल्याण, कृषि विकास और ग्रामीण समृद्धि को गति देने के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन निरंतर जारी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी किसानों की सफलता की कहानियां इस बात का प्रमाण हैं कि समय पर मिलने वाला आर्थिक सहयोग खेती को नई ऊर्जा देने के साथ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रहा है।