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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अध्यक्ष नितिन नबीन से की सौजन्य भेंट

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली में मंगलवार को सांसद एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नबीन से सौजन्य भेंट की। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव और  नितिन नवीन के बीच समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने  नबीन को मध्यप्रदेश में संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति और गतिविधियों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के विभिन्न विभागों द्वारा प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने के लिए किए जा रहे नवाचारों और प्रयासों से भी  नबीन को अवगत कराया।  

नौनिहालों की सेहत को योगी सरकार का पोषण कवच, आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिल रहा पौष्टिक आहार

लखनऊ प्रदेश में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और मजबूत पोषण की दिशा में योगी सरकार की ओर से लगातार किए जा रहे प्रयासों का असर आंगनबाड़ी केंद्रों पर दिखाई दे रहा है। सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण-2.0 की गाइडलाइन के तहत संचालित हॉट कुक्ड मील योजना के जरिए 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को नियमित रूप से ताजा, गर्म और पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यूपी में करीब 1.45 लाख को-लोकेटेड और 0.44 लाख नॉन को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले लगभग 32.88 लाख बच्चे नियमित लाभान्वित हो रहे हैं। साप्ताहिक मेन्यू में पौष्टिक व विविध भोजन बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार, बच्चों को अलग-अलग दिनों में रोटी-सब्जी, चावल-दाल, मौसमी सब्जियों से तैयार तहरी और अन्य पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। योगी सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छोटे बच्चों को नियमित गर्म भोजन उपलब्ध कराकर सरकार एक ओर उनके पोषण स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर कम उम्र से ही संतुलित आहार की आदत विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। भोजन की गुणवत्ता पर खास नजर, स्वच्छता के मानकों का पालन अनिवार्य योगी सरकार ने बच्चों के भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट मानक तय किए हैं। कोटेदार से मिलने वाला खा‌द्यान्न उत्तम गुणवत्ता का होना अनिवार्य है। भोजन तैयार करने से पहले अनाज की अच्छी तरह सफाई और हरी सब्जियों को दो से तीन बार पानी से धोने की व्यवस्था है। इससे बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। परोसने से पहले दो वयस्क करते हैं भोजन की जांच भोजन बच्चों को परोसने से पहले कम से कम दो वयस्क व्यक्तियों जैसे शिक्षक, रसोइया या माता समिति के सदस्य द्वारा रोस्टर के आधार पर भोजन की जांच की जाती है। इसमें भोजन के स्वाद और गुणवत्ता को परखा जाता है। विभागीय व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बर्चा तक पहुंचने वाला भोजन पौष्टिक होने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित भी हो। 32.88 लाख बच्चों को मिल रहा पौष्टिक आहार अपर मुख्य सचिव (महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग) लीना जौहरी ने बताया कि इसके जरिए नियमित 32.88 लाख बच्चों को गर्म और पौष्टिक आहार मिल रहा है। प्रत्येक बच्चे को प्रतिदिन 70 ग्राम खा‌द्यान्न से तैयार भोजन दिया जाता है। को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित पीएम पोषण योजना की रसोई और संसाधनों का उपयोग कर तैयार किया जाता है। वहीं नॉन-को-लोकेटेड केंद्रों पर स्थानीय निकार्यों या ग्राम पंचायतों की ओर से उपलब्ध कराए गए बर्तनों, गैस चूल्हे आदि की मदद से भोजन तैयार कराया जाता है।

हरियाणा के लिए बड़ी सौगात! 177 KM लंबे हाईवे पर नहीं देना होगा टोल टैक्स

अंबाला. साल 2027 में हरियाणा के लोगों को एक नई सौगात मिलेगी। अंबाला से शामली तक छह लाइन का हाइवे बनाया जा रहा है। इसका काम तकरीबन 70 फीसदी पूरा भी हो चुका है। इस राजमार्ग से बन जाने से पश्चिमी यूपी का सफर आसान हो जाएगा। वहीं, इस रूट का फायदा हरियाणावासियों को भी खूब मिलेगा। हरियाणा से वेस्ट यूपी तक बन रहा यह हाइवे मार्च, 2027 तक पूरा हो जाएगा। 4900 करोड़ की लागत से हो रहा निर्माण हरियाणा के अंबाला से लेकर उत्तर प्रदेश के बीच बन रहा 122 किलोमीटर लंबा यह हाइवे की लागत 4800 करोड़ रुपये है। जिसके पूरा होने का लक्ष्य मार्च, 2027 रखा है। इस हाइवे को भारतमाला परियोजना के तहत किया जा रहा है। यह साल 2024 में शुरू हुआ था। हरियाणा के किन जिलों को फायदा? करनाल पानीपत कुरुक्षेत्र यमुनानगर अंबाला कैथल जींद रोहतक कहां से लेकर कहां तक बना रहा यह हाईवे? इस हाइवे का निर्माण अंबाला से शामली के बीच हो रहा है। इस बीच यह छह जिलों से होकर गुजरेगा। हरियाणा के अंबाला के अंतर्गत सोदापुर गांव से इसकी शुरुआत होगी। इसके बाद कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर से होते हुए यह यूपी के सहारनपुर से होकर शामली को जोड़ेगा। खास बात है कि इस पूरे हाइवे पर कोई टोल प्लाजा नहीं होगा।  हाइवे से जुड़ी खास बातें… हाइवे पर कई स्थानों पर दिल्ली-देहरादून इकोनामिक काॉरिडोर की तर्ज पर रेस्ट एरिया बनाया जाएगा। पेट्रोल, सीएनजी पंप, रेस्टोरेंट और शौचालय आदि की सुविधा सुलभ कराई जाएगी।  NHAI बागपत डिवीजन द्वारा शामली से सहारनपुर तक 45 किमी हाइवे का निर्माण कराया जा रहा है। इस हाइवे का 77 किमी का दरमियां अंबाला डिवीजन के अंतर्गत आता है। हाइवे का लगभग 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। मार्च-2027 तक निर्माण कार्य पूरा करा लिया जाएगा।

राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा और समृद्ध लोक संस्कृति की विद्यार्थियों ने छोड़ी अमिट छाप

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु से भेंट कर लौटे छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सौजन्य मुलाकात की। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री  साय को राष्ट्रपति भवन की अपनी यादगार यात्रा और राष्ट्रपति महोदया के साथ हुए आत्मीय संवाद के अनुभव सुनाए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को इस विशेष अवसर के लिए बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में गौरव की बात है। प्रदेश के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी यात्रा के संबंध में जानकारी ली। विद्यार्थियों ने बताया कि राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु से मिलना उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव रहा। राष्ट्रपति महोदया ने उनसे सहजता और आत्मीयता के साथ बातचीत की तथा उनकी शिक्षा, रुचियों और भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में जाना। विद्यार्थियों ने राष्ट्रपति भवन के भ्रमण और वहां बिताए क्षणों से जुड़े अपने अनुभव भी मुख्यमंत्री के साथ साझा किए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारे बच्चों में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। उन्हें सही अवसर, प्रोत्साहन और मंच मिले तो वे हर क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर सकते हैं। ऐसे अवसर विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उनके सपनों को नई ऊंचाई देते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी लगन और मेहनत के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखने तथा जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उल्लेखनीय है कि रक्षाबंधन के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु से भेंट और संवाद का विशेष अवसर प्राप्त हुआ था। इस अवसर पर राष्ट्रपति महोदया ने विद्यार्थियों से आत्मीयतापूर्वक बातचीत की। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। राष्ट्रपति भवन में इस मुलाकात का एक अत्यंत भावुक और यादगार क्षण उस समय आया, जब राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने CWSN (Children with Special Needs) विद्यार्थी नुकेश कुमार वर्मा को स्वयं राखी बांधी। राष्ट्रपति महोदया का यह आत्मीय स्नेह नुकेश के साथ ही वहां उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए भी जीवनभर संजोकर रखने वाली स्मृति बन गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति की सुंदर झलक भी राष्ट्रपति भवन में देखने को मिली। छात्राओं ने प्रदेश के पारंपरिक सुवा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा, गीत-संगीत और सांस्कृतिक सौंदर्य से सजी इस प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु ने प्रस्तुति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की सराहना की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह विशेष रूप से प्रसन्नता की बात है कि प्रदेश के बच्चों ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा से जुड़े राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा के साथ उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी सुंदर परिचय दिया। उन्होंने कहा कि हमारी लोक संस्कृति हमारी पहचान और हमारी अमूल्य धरोहर है। नई पीढ़ी जब इसे आत्मसात कर देश के प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुत करती है, तो हमारी परंपराओं को नई ऊर्जा और व्यापक पहचान मिलती है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि राष्ट्रपति महोदया से प्राप्त प्रोत्साहन और इस यात्रा से मिले अनुभव को वे अपने जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाएं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे अपने सपनों को बड़ा रखें, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और अपनी उपलब्धियों से परिवार, प्रदेश और देश को गौरवान्वित करें। राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु से भेंट करने वाले विद्यार्थियों में नारायणपुर जिले की राजवती पोयाम, सुकमा जिले के हिमांशु ठाकुर, दुर्ग जिले की पायल राजानी, महासमुंद जिले की रागनी साहू, रायपुर जिले के नुकेश कुमार वर्मा तथा महासमुंद जिले के दुर्गेश साहू एवं डिगेश सेन शामिल थे। इस अवसर पर डॉ. मुक्ति बैस, राज्य नोडल अधिकारी, समग्र शिक्षा, रायपुर तथा  चंद्रशेखर मिथलेश, व्याख्याता (भौतिकी), शासकीय आशी बाई गोलछा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद भी उपस्थित थे।  

किसानों के हाईवे जाम से थमे पहिए, पंजाब समेत पांच राज्यों के वाहन चालक हुए परेशान

मोहाली. खेती की मोटरों के लिए पर्याप्त बिजली न मिलने से नाराज पंजाब के किसानों ने मंगलवार को लालडू में अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर जाम लगाया। इससे पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ समेत हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के वाहन चालकों को परेशानी हुई। किसानों ने भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के नेतृत्व में पावरकाम के एक्सईएन कार्यालय लालड़ू के बाहर धरना दिया। प्रदर्शन की अगुआई संगठन के जिला प्रधान लखविंदर सिंह हैप्पी मलकपुर ने की। किसानों ने पंजाब सरकार और पावरकाॅम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग उठाई। आरोप था कि खेती की मोटरों को जरूरत के मुताबिक बिजली नहीं मिलने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धरने के दौरान एक्सईएन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर किसानों का रोष बढ़ गया और उन्होंने अंबाला-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया। इससे मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। करीब एक घंटे तक चले जाम के बाद पुलिस प्रशासन और पावरकाम अधिकारियों ने किसान नेताओं के साथ बैठक की। बातचीत के दौरान पावरकाॅम अधिकारियों ने किसानों को लिखित आश्वासन दिया कि आगे से खेती की मोटरों के लिए 20 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। लिखित आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग से जाम हटा लिया और धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी।

मुख्यमंत्री योगी से मिले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में नवचयनित 40 अधिकारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में समूह ‘ख’ के अधिकारियों की नियमित भर्ती पूरी होने के बाद नवचयनित 40 अधिकारियों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की। मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि लंबे अंतराल के बाद हुई इस भर्ती से बोर्ड की कार्यक्षमता मजबूत होगी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सरकारी सेवाओं में ऐसी चयन व्यवस्था को मजबूत करना है, जिसमें पारदर्शिता के साथ योग्यता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में लागू की गई नई भर्ती प्रक्रिया इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी सीधे प्रदेश के पर्यावरण और लोगों के स्वस्थ जीवन से जुड़ी है। ऐसे में नवचयनित अधिकारी अपनी तकनीकी दक्षता का इस्तेमाल पूरी जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ करें। उन्होंने अधिकारियों को प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने और विभागीय कार्यप्रणाली के साथ मैदानी स्तर की चुनौतियों को समझने के निर्देश दिए।  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में समूह ‘ख’ के 26 सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 सहायक वैज्ञानिक अधिकारी, कुल 40 अधिकारियों का चयन किया गया है। चयनित अधिकारियों में 21 विभिन्न आईआईटी से शिक्षित हैं, जबकि अन्य अधिकारियों ने देश और प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। चयनित अधिकारियों में 8 महिलाएं भी शामिल हैं। इस भर्ती की खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री के निर्देश और सिद्धांतों के अनुरूप चयन प्रक्रिया में बदलाव किया गया। पहले बोर्ड में समूह ‘ख’ के अधिकारियों की भर्ती मुख्य रूप से केवल साक्षात्कार के आधार पर की जाती थी। पुरानी विनियमावली, 1995 में संशोधन कर चयन प्रक्रिया को लिखित परीक्षा और साक्षात्कार आधारित द्विस्तरीय व्यवस्था में बदला गया। नई व्यवस्था में लिखित परीक्षा को 85 प्रतिशत और साक्षात्कार को 15 प्रतिशत अंक का वेटेज दिया गया। इससे चयन में शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता को प्रमुख आधार बनाया गया। संशोधित विनियमावली के बाद 27 फरवरी, 2026 को 26 सहायक पर्यावरण अभियंता और 14 सहायक वैज्ञानिक अधिकारी पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया। 27 अप्रैल को प्रदेश के विभिन्न शहरों में एक साथ लिखित परीक्षा आयोजित हुई, जिसका आयोजन आईआईटी कानपुर के माध्यम से कराया गया। लिखित परीक्षा का परिणाम 8 जून को घोषित किया गया। इसके बाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में चार साक्षात्कार पैनल गठित किए गए । पैनल में विभिन्न आईआईटी और विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया। 4 जुलाई को साक्षात्कार पूरा हुआ और 8 जुलाई को अंतिम परिणाम घोषित किया गया। इस बार नवचयनित अधिकारियों को सीधे क्षेत्र में तैनाती देने के बजाय प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार अधिकारियों के लिए एक माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण के तहत एक सप्ताह का कार्यक्रम आईआईएम, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारियों की नियमित भर्ती और उन्हें प्रशिक्षण देने से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी, पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और मैदानी कार्यों की प्रभावशीलता में सुधार होगा।