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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, इस्तीफे से खाली पदों पर वेटिंग लिस्ट वालों का दावा नहीं

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वेटिंग लिस्ट उम्मीदवारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि इस्तीफे के कारण खाली हुई किसी पद को पुरानी वेटिंग लिस्ट से नहीं भरा जा सकता है। कोर्ट ने स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड में जूनियर इंजीनियर भर्ती से जुड़े एक मामले में यह बात कही है। जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए दो उम्मीदवारों द्वारा लगाई गई याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के खाली पद फ्रेश वैकेंसी माने जाते हैं। जिन्हें भरने के लिए नए सिरे से विज्ञापन जारी कर चयन प्रक्रिया को पूरा करना होगा। क्या है मामला दरअसल, मामला बिजली कंपनियों, स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड में जूनियर इंजीनियर के पदों से जुड़ा हुआ है। जूनियर इंजीनियर पद में भर्ती के लिए आवेदन जारी किया गया था। यह आवेदन ओबीसी वर्ग के तहत 15 सितंबर 2023 को जारी किए गए थे। अक्टूबर में चयन लिस्ट जारी की गई। जिसमें भूपेश वर्मा और विकास कुमार गुप्ता को सफलता नहीं मिली। उनका नाम वेटिंग लिस्ट में था। चयन लिस्ट जारी होने के बाद कई चयनित उम्मीदवारों ने ज्वाइन करने के बादअपने पदों से इस्तीफा दे दिया। जिससे कई पद खाली हो गए। जिसके बाद भूपेश वर्मा और विकास कुमार गुप्ता ने विभाग में आवेदन दिया कि वेटिंग लिस्ट वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति दी जाए। लेकिन विभाग ने उन दोनों के आवेदन पर कोई विचार नहीं किया। जिसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। कोर्ट ने दिया फैसला मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई चयनित उम्मीदवार ज्वाइन करने के बाद इस्तीफा दे देता है तो खाली हुआ पद फ्रेश वैकेंसी होती है। इसे पिछली चयन या प्रतीक्षा सूची को ऑपरेट करके नहीं भरा जा सकता है। बल्कि इस पद के लिए नए विज्ञापन के जरिए चयन प्रक्रिया करनी होगी।  

5 मौसम प्रणालियों का असर, इन राज्यों में तूफान-बारिश के आसार; पहाड़ों पर गिरेगी पहली बर्फ

 नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के उत्तरी पश्चिमी इलाके से भले ही मॉनसून की विदाई हो गई हो लेकिन रिमझिम फुहारों का सिलसिला जारी है। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि राजस्थान से बंगाल तक अभी कुछ दिन रिमझिम फुहारों और बारिश का मौसम बना रहेगा। IMD ने ताजा बुलेटिन में बताया है कि उत्तरी अंडमान सागर और उससे सटे म्यांमार तट पर बने एक 'डिप्रेशन' (कम दबाव के गहरे क्षेत्र) और उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) के प्रभाव से देश के कई हिस्सों में बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान और तेज़ हवाओं का दौर जारी रहेगा। मौसम विभाग ने कहा है कि 28-29 सितंबर के दौरान पूर्वी राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़-दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर आंधी-तूफान के साथ बारिश होने की संभावना है। IMD के मुताबिक, उत्तरी अंडमान सागर और म्यांमार तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र 28 सितंबर की सुबह 'डिप्रेशन' में बदल गया। इसके 28 सितंबर की शाम या रात तक और अधिक गहरा होकर 'डीप डिप्रेशन' में तब्दील होने और यांगून और क्याइकटो के बीच म्यांमार तट को पार करने की संभावना है। इसके प्रभाव से 28 और 29 सितंबर को अंडमान द्वीप समूह में भारी बारिश और 50 से 60 किमी/घंटा (झोंके 70 से 75 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से हवाएँ चलने का अनुमान है। समुद्र में स्थिति अत्यंत खराब रहने के कारण मछुआरों को 1 अक्टूबर तक अंडमान सागर, उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तथा म्यांमार और बांग्लादेश तटों के पास न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। निचले क्षोमंडल स्तर पर उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आस-पास के इलाकों के ऊपर ऊपर भी एक चक्रवाती सर्कुलेशन सक्रिय है। इसके अलावा मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में भी एक कम दबाव का क्षेत्र अभी भी बना हुआ है, हालांकि यह कमजोर हुआ है। उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश और मॉनसून की वापसी वहीं, पश्चिमी विक्षोभ के कारण 28 सितंबर को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में मध्यम से भारी बारिश तथा बिजली कड़कने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में 28 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। इस बीच दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी की रेखा गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर, डीसा और नलिया से होकर गुजर रही है। पहाड़ों पर पहली बर्फबारी स्काईमेट एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताहांत के दौरान पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पहाड़ों से होकर गुज़रा। हालांकि, इस सिस्टम का असर अभी भी इलाके पर बना हुआ है और इसके बाद ऊपरी हवाओं का एक और ट्रफ़ (upper-air trough) आ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मौसमी दशाओं के प्रभाव में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के मध्यम और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में इस सीज़न की पहली बर्फ़बारी हुई है। किन्नौर इलाके में, जहां की ऊंचाई 8,000 से 20,000 फ़ीट के बीच है, सीज़न की पहली बर्फ़ गिरी। तिब्बत सीमा के पास लगभग आखिरी गांव, कुनो-चिरांग में बर्फ़ की चादर बिछ गई। लाहौल और स्पीति घाटी, जिनकी ऊंचाई 12,000 से 14,000 फ़ीट के बीच है, सीज़न की पहली बर्फ़बारी से ढक गईं। डुम्टी जाने वाले रास्ते पर स्थित चितकुल में मौसम की शुरुआत में ही लगभग 3 इंच बर्फबारी हुई। पहाड़ों पर बादल छाए रहेंगे रिपोर्ट में कहा गया है कि इनकी वजह से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में मौसम की गतिविधियां जारी रहेंगी। पंजाब और हरियाणा के मैदानी इलाकों में, और खासकर उत्तराखंड के निचले पहाड़ी इलाकों और मध्यम से ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भी अगले 24 घंटों के दौरान बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं बारिश होगी। हालांकि, मंगलवार दिन के आखिर में मौसम बेहतर होने की संभावना जताई गई है। IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश भागों में 30 सितंबर से और मध्य भारत में 2 अक्टूबर 2026 से मौसम मुख्य रूप से शुष्क होने लगेगा। दिल्ली-एनसीआर से बिहार तक मौसम का हाल राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में 28 सितंबर को आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश के साथ 30-40 किमी/घंटा (झोंके 50 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से हवाएँ चलने का पूर्वानुमान है। दिल्ली में अधिकतम तापमान 28-30°C के बीच रहने की संभावना है। इसके बाद 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के दौरान आसमान मुख्य रूप से साफ रहने और तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज होने का अनुमान है। इसके अलावा मौसम विभाग ने कहा है कि 30 सितंबर से 4 अक्टूबर के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में; 28 सितंबर से 4 अक्टूबर के दौरान गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में; और 28 सितंबर से 1 अक्टूबर के दौरान बिहार में कहीं-कहीं छिटपुट बारिश होने और साथ में आंधी-तू़फान और बिजली गिरने की संभावना है।

चंडीगढ़ में सब्जी दुकानदारों पर शिकंजा, 3 चालान के बाद 6 महीने लाइसेंस सस्पेंड

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में लगने वाली सब्जी मंडियों में वेंडरों की ओर से रंगीन लाइटों का प्रयोग करने पर एक्शन की तैयारी हो गई है। हरी, पीली या अन्य रंगों की लाइटें लगाने वाले वेंडरों के लाइसेंस तक कैंसिल किए जाएंगे। इस संबंध में निगम की कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया।  इस बार होने वाली हाउस की मीटिंग में यह एजेंडा लाया जाएगा। नगर निगम की समिति के मेंबर व पार्षद गुरप्रीत गाबी का कहना है कि लोग पैसे देकर फ्रेश और साफ-सुथरी सब्जियों के लिए आते हैं। लेकिन मार्केट में वेंडर रंग-बिरंगी लाइटें लगा देते हैं। वे सब्जियों पर हरी लाइट्स और फ्रूट पर येलो या रेड लाइट का प्रयोग करते हैं। इससे व्यक्ति मार्केट से सब्जी हरी समझकर खरीदकर ले आता है, लेकिन घर में आकर वह खराब या पीली निकलती है। यह धोखाधड़ी है। यह लोगों के खाने पर भी डाका है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसके अलावा वेंडर प्लास्टिक बैग और गंदगी फेंककर चले जाते हैं। चालान का सिस्टम भी किया तैयार गाबी ने बताया कि चालान का सिस्टम भी बनाया गया है। इसके तहत कानून तोड़ने वाले वेंडर का चालान होगा। तीन बार चालान होने पर छह महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंड कर दिया जाएगा। आईडी कार्ड में परिवार का ब्यौरा भी रहेगा। इसमें उसका पूरा एड्रेस रहेगा। किसानों को मंडी में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी इस कार्य का फायदा होगा कि उसे पूरी तरह से कवर किया जाएगा। लोकल किसानों को मंडी में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी। यह छूट मंडी फीस में मिलेगी। यह छूट उन किसानों को मिलेगी, जिनके पास उनकी जमीन की फर्द और आईकार्ड होगा। कमेटी के सभी सदस्य इलाके के पार्षद नगर निगम की मंडी से जुड़ी कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया है। इस कमेटी के सभी सदस्य इलाके के पार्षद हैं। अक्टूबर माह की मीटिंग में यह प्रस्ताव आएगा। अगर सब कुछ सही रहा तो निगम की मीटिंग के बाद प्रशासन की मंजूरी मिलने पर इसे लागू कर दिया जाएगा।

रतलाम में MP ट्रांसको ने स्थापित किया 200 MVA का नया ट्रांसफार्मर, रबी सीजन में मिलेगी बेहतर बिजली

एमपी ट्रांसको ने रतलाम में स्थापित किया 200 एमवीए का नया ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री तोमर रबी सीजन में मिलेगी बेहतर विद्युत व्यवस्था रतलाम  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने उत्तरी मालवा क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए रतलाम के 220 केवी सबस्टेशन की क्षमता में वृद्धि की है। रतलाम सबस्टेशन में वर्ष 1988 में स्थापित सेकंड जेनरेशन के 160 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर नये थर्ड जेनरेशन तकनीक आधारित 220/132 केवी वोल्टेज स्तर का 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। रतलाम जिले का पहला 200 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया कि रतलाम जिले में पहली बार इतनी उच्च क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। इससे क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी तथा आगामी रबी सीजन के दौरान किसानों और अन्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। मालवा क्षेत्र का 5 वां और प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर एमपी ट्रांसको रतलाम -मंदसौर के अधीक्षण अभियंता वाय आर मांडलेकर ने बताया कि रतलाम में ऊर्जीकृत हुआ यह पावर ट्रांसफार्मर प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर है। मालवा क्षेत्र में इस क्षमता का यह पांचवां पावर ट्रांसफार्मर है। इसके स्थापित होने से रतलाम 220 केवी सबस्टेशन की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 520 एमवीए हो गई है। जिले का 28 वां पावर ट्रांसफार्मर यह रतलाम जिले का 28वां पावर ट्रांसफार्मर है। एमपी ट्रांसको जिले में अपने 10 सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण व्यवस्था का संचालन कर रही है। इनमें 220 केवी के रतलाम, जावरा एवं सैलाना सबस्टेशन तथा 132 केवी के रतलाम, सैलाना, शिवगढ़, ताल, आलोट और बिलपांक सबस्टेशन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नगरा में एक स्विचिंग सबस्टेशन भी संचालित है। नए पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने के साथ ही रतलाम जिले की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 2165 एमवीए की हो गई है।  

CBSE Three Language Policy में बदलाव, कक्षा 6 के बच्चों को सुप्रीम कोर्ट से राहत

नईदिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने तीन भाषा नीति को लेकर क्लास 6 के छात्रों को इस साल छूट देने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने अंतरिम आदेश में सीबीएसई से कहा कि क्लास 6 के मौजूदा छात्रों को एक बार की छूट दी जाए। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत तीन भाषा नीति के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। ये याचिकाएं पहले क्लास 9 और बाद में क्लास 6 के लिए नीति लागू करने के फैसले को चुनौती देती हैं। मुख्य मुद्दे पर अब छह हफ्ते बाद सुनवाई होगी। उसमें इस सवाल पर भी बात होगी कि अंग्रेजी को विदेशी भाषा माना जाए या नहीं। सुनवाई के दौरान सीबीएसई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुए। उन्होंने बताया कि अदालत के सुझाव पर बोर्ड ने विचार किया और क्लास 6 में इसी साल से नीति लागू करने का फैसला लिया है। मेहता के मुताबिक देश के करीब 28,000 सीबीएसई स्कूलों में से लगभग 99 फीसदी ने नीति अपना ली है। उनके पास किताबें और शिक्षक दोनों हैं। सिर्फ 1.2 फीसदी स्कूल दिक्कत में हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि एनईपी 2020 और एनसीएफ-एसई 2023 में क्लास 6 को ही शुरुआती पड़ाव माना गया है। अगर यह बैच छूट गया, तो बच्चे सीधे क्लास 7 और 8 में उस सीख के बिना पहुंचेंगे, जो नए ढांचे में सोची गई थी। सीबीएसई की दलील पर बेंच ने नहीं दिखाई सहमति बेंच इससे सहमत नहीं दिखी। उसने कहा कि अप्रैल में सत्र शुरू हुए महीनों बीत चुके हैं, इसलिए नीति अप्रैल 2027 से लागू की जाए। तब तक किताबें और शिक्षक भी पूरी तरह मिल जाएंगे। अदालत ने यह भी साफ किया कि वह सीबीएसई की योजना पर रोक नहीं लगा रही। यह बस एक "सॉफ्ट लॉन्च" है, ताकि बच्चे बदलाव से तालमेल बिठा सकें। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन और आनंद ग्रोवर ने कहा कि मामला ज्यादा लंबा नहीं खिंचना चाहिए, क्योंकि बच्चों में घबराहट है। उनके मुताबिक करीब तीन लाख छात्र इससे जुड़े हैं और पहले से मानसिक दबाव झेल रहे हैं। बीच सत्र में कुछ नया थोपना उन पर और बोझ डालेगा। ग्रोवर ने यह भी बताया कि कुछ भारतीय भाषाओं की किताबें अब तक उपलब्ध नहीं हैं। क्लास 9 की कुछ किताबें सिर्फ ऑनलाइन हैं और छपी कॉपी का इंतजार है। इससे ग्रामीण इलाकों के बच्चों को खासी परेशानी होगी। इस पर बेंच ने याद दिलाया कि कोविड के दौर में बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई के आदी हो चुके हैं और मोबाइल पर काम संभाल सकते हैं। उसने याचिकाकर्ताओं को बेहतर वजहें ढूंढने के लिए टोका भी। अदालत ने दिक्कत झेल रहे स्कूलों तक पहुंचने के लिए विशेषज्ञ अफसरों की एक समिति बनाने का सुझाव भी दिया। सीबीएसई ने भी कोर्ट में दिए आंकड़े सीबीएसई ने कोर्ट को आंकड़े भी दिए। क्लास 6 की तीसरी भाषा की किताबें सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में एनसीईआरटी की वेबसाइट पर मौजूद हैं। इनसे 98 फीसदी से ज्यादा स्कूलों की पसंद पूरी हो जाती है। बाकी भाषाओं के लिए एससीईआरटी की किताबें और संसाधन काम आएंगे। शिक्षकों के मामले में 20,777 स्कूलों के आंकड़े देखें तो 19,386 यानी करीब 93.3 फीसदी स्कूलों में कम से कम दो भारतीय भाषाओं के शिक्षक हैं। इनमें से 3,523 स्कूलों में तीन या उससे ज्यादा भाषाओं के शिक्षक हैं। बोर्ड ने यह भी बताया कि 16 सितंबर को पांच सदस्यीय समिति बनी है, जो क्लास 6 से 10 तक इस ढांचे को लागू करने में मदद करेगी और निगरानी भी रखेगी। इसके प्रमुख शिक्षा मंत्रालय के निदेशक भगवती प्रसाद कलाल हैं। समिति में एनसीईआरटी सचिव राजीव कुमार, सीबीएसई की अकादमिक निदेशक प्रज्ञा एम. सिंह, केवीएस की अतिरिक्त आयुक्त चंदना मंडल और एनवीएस के उपायुक्त सोमवीर पूनिया शामिल हैं। नए नियम में तीन में से कम से कम दो भाषाओं का भारतीय होना जरूरी है। क्लास 7, 8 और 9 के जो बच्चे दो गैर-भारतीय भाषाएं पढ़ रहे थे, उन्हें सीबीएसई पहले ही राहत दे चुका है। वे अपना मौजूदा कॉम्बिनेशन रख सकते हैं और एक भारतीय भाषा अलग से जोड़ेंगे। इस अतिरिक्त भाषा का आकलन स्कूल स्तर पर होगा, क्लास 10 की बोर्ड परीक्षा में नहीं। गौरतलब है कि कुछ याचिकाकर्ताओं को डर था कि क्लास 10 के स्कूल-स्तर के आकलन में भी रिजल्ट रोके जा सकते हैं। बेंच ने इसे खारिज करते हुए कहा कि वह देखना चाहेगी कि कौन सा स्कूल इंटरनल असेसमेंट के आधार पर किसी बच्चे को रोकता है।

भोपाल से अयोध्या-शारजाह, इंदौर से बैंकॉक फ्लाइट की तैयारी; MP के यात्रियों को मिलेगा बड़ा फायदा

भोपाल  मध्य प्रदेश के हवाई नेटवर्क के विस्तार की दिशा में तीन नई विमान सेवाएं शुरू करने की तैयारी है। भोपाल से अयोध्या और शारजाह के लिए सीधी उड़ान शुरू करने की योजना पर काम चल रहा है। वहीं, इंदौर से बैंकॉक के लिए भी विमान सेवा शुरू करने की तैयारी है। फिलहाल इन तीनों शहरों के लिए मध्य प्रदेश से सीधी विमान सेवा उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दुबई दौरे के दौरान भोपाल से अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा शुरू करने को लेकर निजी निवेशकों से चर्चा हुई थी। इसके बाद एक निजी विमानन कंपनी के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर विमान सेवा के क्षेत्र में निवेश का प्रस्ताव रखा। अब राज्य शासन ने इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले उड़ान शुरू करने की तैयारी नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के निर्धारित मानकों के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद भोपाल और इंदौर से प्रस्तावित उड़ानें शुरू करने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य इन्हें ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले शुरू करने का है। नई विमान सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य की विमानन नीति के तहत संबंधित निजी विमानन कंपनी को अनुदान भी दिया जाएगा। इससे नई उड़ानों के संचालन को आर्थिक सहयोग मिलने की उम्मीद है। भोपाल को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा भोपाल से शारजाह के लिए सीधी उड़ान शुरू होने के बाद राजा भोज विमानतल अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन वाले हवाई अड्डों की सूची में शामिल हो जाएगा। इसके साथ ही भोपाल से विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को दूसरे शहरों के एयरपोर्ट पर निर्भरता कम हो सकती है। ई-गेट से होगी यात्रियों की क्लीयरेंस अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एयरपोर्ट पर यात्रियों की क्लीयरेंस प्रक्रिया ई-गेट के माध्यम से पूरी करने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए इमीग्रेशन और कस्टम विभाग के कर्मचारियों की तैनाती भी की जाएगी। एयरपोर्ट को कस्टम दर्जा मिलने के बाद लाउंज के पास नया इंटरनेशनल विंग तैयार किया गया है। इस विंग में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच, क्लीयरेंस और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के लिए आठ काउंटर स्थापित किए गए हैं। अयोध्या, शारजाह और बैंकॉक से बढ़ेगी कनेक्टिविटी भोपाल से अयोध्या और शारजाह तथा इंदौर से बैंकॉक की सीधी उड़ान शुरू होने पर प्रदेश की धार्मिक, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को विस्तार मिलेगा। खासतौर पर भोपाल से शारजाह और इंदौर से बैंकॉक की उड़ानें प्रदेश के यात्रियों को विदेश यात्रा के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराएंगी।  

पश्चिम एशिया संकट के बीच नेवी कॉन्फ्रेंस, AI और ड्रोन तकनीक पर हुआ महामंथन

नई दिल्ली नई दिल्ली में भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडर्स तीन दिनों तक देश की समुद्री सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर गहन मंथन करेंगे. इसके लिए नौसेना कमांडर्स कांफ्रेंस 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक नौसेना भवन में आयोजित की जाएगा. नौसेना का यह सर्वोच्च स्तर का सम्मेलन है. यह केवल नियमित समीक्षा का मंच नहीं है, बल्कि सैन्य और रणनीतिक स्तर पर नौसेना की तैयारियों का व्यापक आकलन करने का महत्वपूर्ण अवसर भी है।  कांफ्रेंस में नौसेना के शीर्ष नेतृत्व के साथ ऑपरेशनल तैनाती पर कार्यरत व एरिया कमांडर शामिल होंगे. इनके जरिए समुद्री अभियानों की तैयारियों, चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों पर व्यापक चर्चा होगी. साथ ही, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ भी संस्थागत संवाद किया जाएगा. यह वर्ष 2026 में आयोजित होने वाले नौसेना के द्विवार्षिक कमांडर्स कांफ्रेंस का दूसरा संस्करण है. इस बार सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी हैं और समुद्री मार्गों तथा ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा का महत्व और बढ़ गया है. ऐसे में यहां भारतीय नौसेना की भूमिका सम्मेलन के प्रमुख विषयों में रह सकती है।  नौसेना के अनुसार, देश के समुद्री हितों की सुरक्षा में उसकी भूमिका लगातार मजबूत हुई है. खास तौर पर ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ के दौरान नौसेना ने जिस तरह समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े हितों की रक्षा के लिए अभियान चलाया है, उसने हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे एक भरोसेमंद समुद्री सुरक्षा साझेदार के रूप में उसकी भूमिका को और मजबूत किया है. भारतीय नौसेना लगातार हाई ऑपरेशनल स्तर पर काम कर रही है. ऐसे में सम्मेलन के दौरान यह भी देखा जाएगा कि बदलते समुद्री सुरक्षा वातावरण में नौसेना अपनी युद्धक क्षमता और परिचालन तैयारियों को किस तरह और मजबूत कर सकती है।  सम्मेलन के पहले दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह नौसेना के कमांडरों को संबोधित करेंगे. वह राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जुड़े व्यापक दृष्टिकोण और भारतीय नौसेना से देश की अपेक्षाओं पर अपनी बात रखेंगे. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और थल सेनाध्यक्ष भी नौसेना कमांडरों के साथ संवाद करेंगे. इस पहल का उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, संयुक्त अभियानों और सैन्य एकीकरण को और मजबूत करना है।  सम्मेलन के अगले दो दिनों में नौसेना प्रमुख और नौसेना के कमांडर-इन-चीफ कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की समीक्षा करेंगे. इनमें अभियान, सैन्य सामग्री, रसद, मानव संसाधन और प्रशिक्षण जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं. इसके साथ ही युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए नई तकनीकों को तेजी से अपनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. एआई, बड़े आंकड़ों का विश्लेषण, स्वायत्त और बिना चालक वाली प्रणालियां तथा साइबर अभियान जैसे क्षेत्र चर्चा के केंद्र में रहेंगे।  नौसेना का जोर अत्याधुनिक तकनीकों को केवल शामिल करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें वास्तविक सैन्य अभियानों में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित करने पर भी रहेगा. इसके लिए आधुनिक युद्ध की नई अवधारणाओं को अपनाने और तकनीकी क्षमता को तेजी से सैन्य ताकत में बदलने की जरूरत पर जोर दिया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया का आधार नौसेना के तीन प्रमुख स्तंभ होंगे. इनमें संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार हैं. इन्हीं के जरिए सरकार के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप नौसेना की भविष्य की क्षमता को आकार देने पर जोर रहेगा। 

भोपाल Master Plan-2047 में बड़े बदलाव, 27% हरित क्षेत्र; आवासीय इलाकों में सख्ती

भोपाल  राजधानी भोपाल को वर्ष 2047 तक आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और व्यवस्थित महानगर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने भोपाल विकास योजना-2047 (मास्टर प्लान) का मसौदा जारी कर दिया है। करीब 21 साल की देरी से आए इस प्रारूप में शहर की 45 लाख की संभावित आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास का खाका तैयार किया गया है। नए मास्टर प्लान में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। अब आवासीय इलाकों में शोरूम और शॉपिंग मॉल जैसी गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। वहीं, शहर में हरित क्षेत्र को मौजूदा 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।भोपाल के मास्टर प्लान 2047 का प्रारूप आखिरकार जारी हो गया है। पिछला मास्टर प्लान 1995 में बना था और उसकी योजना अवधि 2005 तक थी। इसके बाद नया प्लान लागू नहीं हो सका। यानी कानूनी तौर पर तय ही नहीं था कि शहर के किस हिस्से में क्या बन सकता है।  विकास योग्य प्रस्तावित क्षेत्रफल भी बढ़ाकर 61,017.02 हेक्टेयर कर दिया गया है। वर्ष 2005 की विकास योजना में यह क्षेत्रफल 25,351 हेक्टेयर प्रस्तावित था। यानी नए प्रारूप में विकास योग्य क्षेत्र करीब ढाई गुना हो गया है। 1016 वर्ग किमी में फैलेगा निवेश क्षेत्र, 254 गांव होंगे शामिल मास्टर प्लान के नए प्रारूप में निवेश क्षेत्र का बड़ा विस्तार किया गया है। इसे बढ़ाकर 1016.90 वर्ग किलोमीटर तक करने का प्रस्ताव है, जिसमें 254 गांव शामिल होंगे। इसके साथ ही शहर के विकास को गति देने के लिए 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर और असीमित एफएआर का प्रावधान भी किया गया है। मास्टर प्लान के मसौदे पर अगले 30 दिनों तक आम नागरिकों और संबंधित पक्षों से दावे-आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इन पर विचार के बाद अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा। 21 साल की देरी से बढ़ी थीं विकास संबंधी जटिलताएं भोपाल का मास्टर प्लान लंबे समय से लंबित था। इस देरी के कारण शहर में निर्माण, भूमि उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर कई तरह की जटिलताएं पैदा हुईं। इस मुद्दे को लेकर दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन 'नईदुनिया' ने अभियान चलाकर जनता और सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू की तो विवाद बढ़ गया। 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मास्टर प्लान लाने की बात कही थी। अब मसौदा जारी होने के बाद शहर के विकास को लेकर नई दिशा तय होने की उम्मीद है। सड़क की चौड़ाई तय करेगी व्यावसायिक गतिविधियां     – 12 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियां नहीं की जा सकेंगी। ऐसे क्षेत्र में केवल डाक्टर, वकील, सीए, आर्किटेक्ट, इंजीनियर, मैनेजमेंट प्रोफेशनल जैसी पेशेवर गतिविधियां ही सिर्फ एक मंजिल तक चलाई जा सकेंगी।     – 12 से 18 मीटर चौड़ी सड़क पर भी शोरूम, होटल-कैफे नहीं खुलेंगे। यहां सिर्फ बैंक एटीएम, स्टेशनरी, मेडिकल आदि संचालित किए जा सकेंगे।     – 18 से 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर नर्सिंग होम, सीमित क्षमता वाले रेस्टोरेंट, होटल-कैफे, कोचिंग संस्थान और शोरूम का संचालन किया जा सके।     – 30 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क पर शापिंग काम्प्लेक्स संचालित किया जा सकेगा। हरित क्षेत्र बढ़ाने पर जोर, व्यवस्थित विकास की तैयारी भोपाल विकास योजना-2047 में शहर के पर्यावरण संरक्षण और नियोजित विस्तार को प्रमुखता दी गई है। हरित क्षेत्र को 12 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव इसी दिशा में अहम माना जा रहा है। निवेश क्षेत्र के विस्तार, नए ग्रोथ कॉरिडोर और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए सड़क की चौड़ाई के आधार पर नियम तय होने से शहर के विकास को व्यवस्थित स्वरूप देने की योजना है। मसौदे पर दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मास्टर प्लान सामने आएगा। इसके बाद ही प्रस्तावित प्रावधानों के अंतिम स्वरूप और उनके क्रियान्वयन की दिशा स्पष्ट होगी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए बड़ा बदलाव 51 किलोमीटर के 'ग्रोथ कॉरिडोर' से आएगा, जो शहर को एयरपोर्ट और बाहरी इलाकों से जोड़ेगा।     इस पर BRT यानी सिर्फ बसों के लिए रिजर्व लेन बनेगी, ताकि बसें जाम में न फंसें।     भविष्य में इसे मेट्रो जैसी सेवा में भी बदला जा सकता है।     इसके इर्द-गिर्द 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (TOD) का कॉन्सेप्ट लगेगा यानी जहां बस या मेट्रो जैसी सुविधा होगी, वहीं आसपास घर, दफ्तर और बाकी जरूरी सुविधाएं भी पास-पास बसाई जाएंगी।     यह सिर्फ आने-जाने की सड़क नहीं होगी, इसके आसपास होटल, अस्पताल, IT-AI-डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, थोक बाजार, मॉल, कॉरपोरेट ऑफिस और शिक्षा संस्थान भी विकसित होंगे।     पूरे शहर की निगरानी के लिए 'डिजिटल ट्विन सिटी' सिस्टम भी बनेगा, यानी शहर का डिजिटल नक्शा बनाकर अवैध निर्माण या जाम जैसी समस्याएं समय रहते पकड़ी जा सकेंगी। 18 मीटर या ज्यादा चौड़ी है, तो गाड़ी रिपेयर शॉप, शोरूम, ऑडिटोरियम (100 सीट तक), कॉल सेंटर जैसी बड़ी गतिविधियां भी शुरू हो सकती हैं। यानी अगर आपका घर संकरी गली में है, तो आसपास सीमित सुविधाएं ही आएंगी। चौड़ी सड़क पर है, तो रोजमर्रा की जरूरत की हर चीज घर के पास मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। नए आवासीय इलाकों को शुरू से ही इसी सोच के साथ बसाने का प्रस्ताव है, ताकि स्कूल, दुकान, स्वास्थ्य सुविधा और पार्किंग घर के पास ही मिले। अगर आप पुराने शहर में रहते हैं और ऊंचाई-सीमा के चलते नई मंजिल नहीं जोड़ पा रहे, तो सरकार आपको 'हेरिटेज TDR' नाम का एक प्रमाणपत्र देगी। यह असल में एक निर्माण करने का हक है, जिसे आप बेच सकते हैं। अगर आप किसी पुरानी अपार्टमेंट सोसाइटी में रहते हैं और 70% पड़ोसी पुनर्विकास के लिए राजी हों, तो पूरी बिल्डिंग तोड़कर नई बनवाना अब कानूनी तौर पर आसान होगा। यह समृद्ध, सुगम, सुरक्षित और विकसित भोपाल का रोडमैप     राजधानी की यह विकास योजना (मास्टर प्लान) भोपाल की प्राकृतिक धरोहर- भोजताल, वन क्षेत्रों एवं बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के साथ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं, सुगम मोबिलिटी और आर्थिक विकास के अवसर उपलब्ध कराने की दृष्टि से तैयार की गई है। इसमें हरित टीडीआर … Read more

Singapore-India Growth Forum में छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाएं रखेंगे CM साय

विदेश मंत्रालय द्वारा सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ फोरम 2026 के लिए छत्तीसगढ़ का चयन; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे राज्य प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व 3 से 6 अक्टूबर तक सिंगापुर प्रवास पर रहेंगे मुख्यमंत्री श्री साय, SING फोरम 2026 में रखेंगे छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाएं एमएसएमई, स्टार्टअप और रोजगारपरक क्षेत्रों में निवेश के अवसरों को वैश्विक मंच पर करेगा छत्तीसगढ़ प्रस्तुत कौशल विकास, वन्यजीव संरक्षण, उद्यानिकी और हरित विकास में सहयोग की संभावनाओं पर भी होगी चर्चा रायपुर विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के नामांकन पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय 3 से 6 अक्टूबर 2026 तक सिंगापुर जाने वाले छत्तीसगढ़ के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर में आयोजित होने वाले सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में भाग लेगा। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ को अपनी उपलब्धियों, विकास की संभावनाओं और निवेश के अवसरों को प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही सिंगापुर के व्यापार जगत, उद्यमियों और निवेशकों के साथ भविष्य के सहयोग के लिए नए संबंध स्थापित करने की दिशा में भी पहल होगी। SING फोरम 2026 का यह पहला संस्करण है, जिसका आयोजन सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन द्वारा किया जा रहा है। फोरम में सिंगापुर और भारत के वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधि, उद्योग जगत के प्रमुख और निवेशक एक मंच पर आएंगे। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करना तथा व्यापार और निवेश के नए अवसरों को प्रोत्साहित करना है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय फोरम में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य में एमएसएमई, स्टार्टअप और रोजगारपरक क्षेत्रों में उपलब्ध व्यापक निवेश संभावनाओं को प्रस्तुत करेंगे। राज्य प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और उद्यमियों के समक्ष रखने के साथ ही दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर संवाद किया जाएगा। कौशल विकास और हरित विकास में सहयोग पर रहेगा फोकस सिंगापुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल स्किल सेंटर, मंडई वाइल्डलाइफ रिजर्व और गार्डन्स बाय द बे के साथ भी बैठकें करेगा। इन बैठकों में कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग के साथ वन्यजीव संरक्षण, उद्यानिकी और हरित विकास से जुड़े अनुभवों एवं संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि यह यात्रा छत्तीसगढ़ को वैश्विक साझेदारों से जोड़ने और राज्य के विकास के नए रास्ते खोलने का महत्वपूर्ण अवसर है। राज्य सरकार का प्रयास है कि वैश्विक स्तर पर उपलब्ध विशेषज्ञता, निवेश और नवाचार की संभावनाओं से छत्तीसगढ़ को जोड़कर विकास और रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएं। उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल मुख्यमंत्री साय के साथ राज्य प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक विश्वेश कुमार तथा मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी)  उमेश अग्रवाल शामिल रहेंगे।

Delhi PUC Enforcement: 1 अक्टूबर से सख्ती, इन वाहनों पर होगी सरकार की नजर

नई दिल्ली दिल्ली में गाड़ी चलाते हैं तो 1 अक्टूबर की तारीख याद रख लीजिए. क्योंकि अब सिर्फ गाड़ी का इंजन, ब्रेक और हॉर्न ही नहीं, आपकी जेब में रखा PUC सर्टिफिकेट भी सरकार की नजर में होगा. PUC वैलिड नहीं है तो मुश्किल बढ़ सकती है. दिल्ली सरकार ने साफ कर दिया है कि 1 अक्टूबर से इनवैलिड या एक्सपायर्ड PUC सर्टिफिकेट वाले वाहनों के लिए इंफोर्समेंट ड्राइव (Enforcement Drive) शुरू होगी. यानी सड़क पर निकलने से पहले यह देख लेना जरूरी होगा कि आपकी गाड़ी प्रदूषण जांच में पास है या नहीं।  दरअसल, सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्ली की हवा खराब होने लगती है. और इस बार सरकार पहले से ही कड़ी तैयारी में है. दिल्ली ही हवा को साफ रखने के लिए सरकार ने बुराड़ी में ऐसा ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) भी शुरू किया है, जहां सालाना 1 लाख वाहनों की जांच हो सकेगी. मतलब दिल्ली की सड़कों पर अब प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की पहचान और कार्रवाई, दोनों पर निगरानी बढ़ने वाली है।  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के लॉन्च के मौके पर कहा कि, "दिल्ली में 1 अक्टूबर से वैलिड पीयूसी सर्टिफिकेट से जुड़ा इंफोर्समेंट सिस्टम लागू किया जाएगा. इसके तहत वाहनों के PUC certificate की वैधता की जांच की जाएगी. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार पूरे साल वायु प्रदूषण कम करने के लिए अलग-अलग कदम उठा रही है और यह उसी दिशा में एक और पहल है।  सरकार PUC सेंटर्स की निगरानी और उनके काम करने के तरीके को भी ज्यादा इफेक्टिव और भरोसेमंद बनाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए तकनिकियों में बदलाव किया जाएगा और इसे और भी एडवांस बनाया जाएगा. ताकि PUC सर्टिफिकेट जारी करने के प्रोसेस और उसकी मॉनिटरिंग पर बेहतर नजर रखी जा सके।  कैमरों से निगरानी मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली के सभी PUC सेंटर्स पर कैमरा लगाए जा रहे हैं. इन कैमरों की मदद से यह निगरानी की जाएगी कि PUC सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया सही तरीके से हो रही है या नहीं. सरकार का फोकस PUC सिस्टम को ज्यादा ट्रांसपैरेंट और भरोसेमंद बनाने पर है. इससे उन वाहनों पर भी नजर रखने में मदद मिल सकती है, जिनके प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता खत्म हो चुकी है या जो तय प्रदूषण मानकों पर खरे नहीं उतरते।  10,000 का चालान बिना वैलिड पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट के वाहन चलाते हुए पकड़े जाने की स्थिति में वाहन चालक को मोटी चपत लग सकती है. अधिकारियों का कहना है कि, PUC नियमों का उल्लंघन करने के लिए 10,000 रुपये तक का चालान काटा जा सकता है. इसलिए वाहन मालिकों को तत्काल अपने वाहनों के पीयूसी की जांच करनी चाहिए और यदि वैलिडिटी खत्म हो गई है या आने वाले दिनों में समाप्त होने वाली है तो समय से पहले PUC जांच करवा कर सर्टिफिकेट प्राप्त करना जरूरी है।  बुराड़ी में देश का सबसे बड़ा ATS रेखा गुप्ता ने बुराड़ी में जिस ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन किया है, उसे उन्होंने देश का सबसे बड़ा ATS बताया है. इस स्टेशन के जरिए बड़ी संख्या में कमर्शियल व्हीकल्स की फिटनेस और पॉल्यूशन से जुड़ी जांच की जाएगी. सरकार के मुताबिक, इससे दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले ज्यादातर कमर्शियल वाहनों की आसानी से जांच की जा सकेगी. बुराड़ी ATS में हर साल 40,000 हैवी मोटर व्हीकल्स और 60,000 लाइट मोटर व्हीकल्स की जांच करने की क्षमता होगी. यानी यह स्टेशन सालाना कुल 1 लाख वाहनों की टेस्टिंग कर सकेगा।  ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर पंकज सिंह ने बताया कि बुराड़ी ATS में वाहनों की फिटनेस टेस्टिंग पूरी तरह ऑटोमेटेड प्रोसेस के जरिए होगी. इस टेस्टिंग के दौरान ब्रेकिंग इफिसिएन्सी, सस्पेंशन परफॉर्मेंस, हेडलाइट कंडिशन, साइड-स्लिप और इमिशन लेवल जैसे पैरामीटर्स की जांच की जाएगी. इसके अलावा वाहनों के अंडरसाइड की भी जांच की जाएगी. इस ऑटोमेटेड टेस्टिंग सिस्टम के जरिए यह तय हो सकेगा कि, उक्त वाहन शहर में चलने लायक है या नहीं।  दिल्ली सरकार के मुताबिक, बुराड़ी से पहले 3 सितंबर को तेहखंड में भी एक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का उद्घाटन किया गया था. इस ATS में हर साल करीब 72,000 वाहनों की जांच करने की क्षमता है. सरकार अब दिल्ली में ATS और PUC सेंटर्स के नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है. एक तरफ ऑटोमेटेड टेस्टिंग के जरिए वाहनों की फिटनेस और इमिशन की जांच की जाएगी, वहीं दूसरी तरफ PUC सेंटर्स पर कैमरा और टेक्नोलॉजी के जरिए निगरानी बढ़ाई जाएगी।