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CM साय की जापान यात्रा का असर, JETRO ने छत्तीसगढ़ के औद्योगिक अवसरों को दी जगह

जापानी निवेशकों के रडार पर छत्तीसगढ़, JETRO ने अपनी वेबसाइट पर राज्य की निवेश संभावनाओं को दी जगह मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जापान यात्रा के बाद आर्थिक साझेदारी की दिशा में बढ़े कदम JETRO के नेटवर्क से जुड़ी जापानी कंपनियों तक पहुंचेगी छत्तीसगढ़ के औद्योगिक अवसरों की जानकारी रायपुर,  जापान के साथ छत्तीसगढ़ की आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JETRO) ने अपनी वेबसाइट पर छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं और औद्योगिक अवसरों से संबंधित जानकारी को स्थान दिया है। इससे भारत में निवेश की संभावनाएं तलाश रही जापानी कंपनियों के बीच छत्तीसगढ़ की पहुंच बढ़ेगी और उन्हें राज्य में उपलब्ध औद्योगिक अधोसंरचना, भूमि तथा निवेश प्रोत्साहनों की जानकारी मिल सकेगी। यह प्रगति मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अगस्त 2025 में जापान और दक्षिण कोरिया की निवेश यात्रा के दौरान स्थापित हुए संपर्कों और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री की यात्रा के दौरान राज्य सरकार ने JETRO के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने और जापानी कंपनियों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों से जोड़ने पर चर्चा की थी। इसी क्रम में JETRO के प्रतिनिधिमंडल ने 28 एवं 29 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ का दौरा कर राज्य के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र और निवेश संभावनाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। प्रतिनिधिमंडल ने नवा रायपुर में विकसित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों और वहां उपलब्ध आधुनिक अधोसंरचना की जानकारी ली। नवा रायपुर की औद्योगिक अधोसंरचना से रूबरू हुआ प्रतिनिधिमंडल JETRO प्रतिनिधिमंडल ने सेक्टर-22 स्थित 120 एकड़ में विकसित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर का भ्रमण किया। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) से अनुमोदित इस क्लस्टर में प्लग-एंड-प्ले फ्लैटेड फैक्ट्री जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रतिनिधिमंडल ने यहां संचालित Rezute Electronics, Arham Technologies, Amrit Meditech और Paripath Technologies जैसी इकाइयों के प्रतिनिधियों से भी चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने सेक्टर-22 स्थित फार्मास्युटिकल पार्क का भी भ्रमण किया, जिसे मध्य भारत के सबसे बड़े फार्मा पार्क के रूप में विकसित किया गया है। इसके अलावा सेक्टर-5 के रेडीमेड गारमेंट पार्क एवं मिक्स्ड-यूज इंडस्ट्रियल पार्क का अवलोकन किया गया। यहां प्रतिनिधिमंडल ने Aspire Pharma के प्रतिनिधियों से संवाद किया। सेक्टर-22 स्थित टेक्सटाइल पार्क में वस्त्र एवं परिधान निर्माण के लिए विकसित सुविधाओं की जानकारी भी ली गई। औद्योगिक सुविधाओं के साथ प्रतिनिधिमंडल ने नवा रायपुर में टाउनशिप विकास के लिए उपलब्ध आवासीय क्षेत्रों तथा स्वास्थ्य, रिटेल और सामाजिक अधोसंरचना का भी जायजा लिया। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और उनके कर्मचारियों के लिए उपलब्ध ये सुविधाएं निवेश संबंधी निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जापानी निवेश की संभावनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा JETRO प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार से मुलाकात की। बैठक में राज्य की औद्योगिक नीति, विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं तथा जापानी कंपनियों के निवेश को सुगम बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII), छत्तीसगढ़ चैप्टर के प्रतिनिधियों से भी संवाद कर राज्य के औद्योगिक परिदृश्य और स्थानीय उद्योग जगत के दृष्टिकोण को समझा। दौरे के बाद भी जारी रहा निरंतर संवाद JETRO प्रतिनिधिमंडल के दौरे के बाद वाणिज्य एवं उद्योग विभाग ने इस पहल को आगे बढ़ाते हुए वर्चुअल बैठकों और पत्राचार के माध्यम से लगातार संपर्क बनाए रखा। इस दौरान राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, निवेश के लिए उपलब्ध भूमि और नीतिगत प्रोत्साहनों से संबंधित विस्तृत जानकारी JETRO के साथ साझा की गई। इसी निरंतर संवाद के परिणामस्वरूप JETRO ने अपनी वेबसाइट पर छत्तीसगढ़ की निवेश प्रोफाइल और औद्योगिक अवसरों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई है। इससे JETRO के नेटवर्क से जुड़ी जापानी कंपनियों को छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं की जानकारी सीधे मिल सकेगी। राज्य सरकार अब JETRO के सहयोग से छत्तीसगढ़ में निवेश में रुचि रखने वाली जापानी कंपनियों को राज्य में उपलब्ध अवसरों से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ेगी। जापान के साथ बढ़ता यह आर्थिक संवाद छत्तीसगढ़ की वैश्विक निवेश पहुंच के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार वैश्विक स्तर पर स्थापित संपर्कों को निरंतर संवाद, निवेश सुविधा और प्रभावी फॉलो-अप के माध्यम से दीर्घकालीन औद्योगिक साझेदारी में बदलने की दिशा में कार्य कर रही है।

सपा-कांग्रेस सीट शेयरिंग में फंसा पेच, अखिलेश की ‘जीत’ और मजबूत दावेदार पर नजर

 लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस का गठबंधन तय माना जा रहा है, लेकिन सीट शेयरिंग का फॉर्मूला अभी तक पूरी तरह हल नहीं हो पाया है. सपा और कांग्रेस नेताओं के बीच जारी बयानबाजी के बीच नई दिल्ली में 'इंडिया गठबंधन' की बैठक बुलाई गई है. माना जा रहा है कि इस दौरान सपा-कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।  सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी ने गठबंधन की बैठक में सीट बंटवारे को लेकर अपना रुख मजबूती से रखने का प्लान बनाया है. बैठक में सपा, कांग्रेस से संभावित उम्मीदवारों के नामों के साथ-साथ पसंदीदा सीटों की सूची मांग सकती है।  बता दें कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच पहले भी उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं. आगामी बैठक में सपा प्रमुख अखिलेश यादव स्वयं मौजूद न रहकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भेज सकते हैं. इस दौरान सपा सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के सामने चार प्रमुख मांगें रख सकती है।  कांग्रेस के सामने सपा की चार अहम शर्तें सपा प्रमुख अखिलेश यादव सीट शेयरिंग पर लगातार एक ही बात कहते आ रहे हैं कि गठबंधन में सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जीत सबसे अहम होगी. जो प्रत्याशी जीत दर्ज कर सकता है, उसे ही सीट मिलनी चाहिए. 2024 के लोकसभा चुनाव की तर्ज पर ही 2027 के चुनाव के लिए भी सपा ने अपनी शर्तें रखी हैं।      मजबूत प्रत्याशी का नाम: कांग्रेस को यूपी की जिन विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ना है, उन पर अपने संभावित उम्मीदवारों के नाम स्पष्ट करने होंगे।      सीटों के नाम: सपा का साफ कहना है कि कांग्रेस जिन विशिष्ट सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, उनकी सूची दे।      क्षेत्रीय जनाधार: कांग्रेस जिन सीटों पर दावेदारी कर रही है, वहां उसका जनाधार और राजनीतिक आधार क्या है, यह स्पष्ट करना होगा।      जीत की संभावना: सपा की मांग है कि कांग्रेस उम्मीदवार की जीत की कितनी संभावना है, इसका आकलन किया जाए. अखिलेश यादव का मानना है कि प्रत्याशी के चयन से ही चुनावी नतीजे तय होते हैं. इंडिया ब्लॉक की बैठक में सपा की रणनीति बैठक में सपा सीटों की दावेदारी के साथ कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की जमीनी पकड़ का मुद्दा उठाएगी. सपा का मुख्य फोकस सीटों की संख्या के बजाय प्रत्याशी की जीतने की क्षमता पर रहेगा।  सपा का मानना है कि सिर्फ कागजी दावों या बयानबाजी के आधार पर सीटों की मांग करना गठबंधन के हित में नहीं है. सपा की ओर से यह बात प्रमुखता से रखी जाएगी कि गठबंधन का मुख्य लक्ष्य हर हाल में चुनाव जीतना है।  2027 चुनाव जीत के समीकरणों पर मंथन यूपी विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग के दौरान उम्मीदवारों के क्षेत्रीय समीकरण और जीत की क्षमता को ही मुख्य आधार बनाया जाएगा. अखिलेश यादव का पूरा ध्यान 2027 के चुनाव पर है, क्योंकि यह चुनाव पार्टी के राजनीतिक वजूद के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. इसीलिए सपा नेतृत्व किसी भी तरह की ढील नहीं देना चाहता है। 

MP हाईकोर्ट में अवैध निर्माण पर याचिका, गृह निर्माण संस्था को भी बनाया पक्षकार

इंदौर भवन के अवैध हिस्से को नियमित करने के लिए शासन द्वारा शुरू की गई कंपाउंडिंग योजना को लेकर नया पेच सामने आ गया है। इस योजना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका में अब कालोनी बसाने वाली गृह निर्माण संस्था भी पक्षकार बनेगी। याचिका की सुनवाई के दौरान संस्था की ओर से प्रस्तुत हस्तक्षेप आवेदन को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। संस्था का कहना है कि भवन में हो रहे अवैध निर्माण की शिकायत उसी ने की थी, ऐसे में उसे सुने बिना फैसला दिया जाना गलत होगा। कोर्ट ने शासन और निगम को एक अक्टूबर से पहले जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट में इस मामले में दो जनहित याचिकाएं लंबित हैं, जो कल्पना सेतपाल और वर्षा गुरनानी ने दायर की हैं। दोनों याचिकाओं में राज्य शासन द्वारा भवनों के अवैध हिस्से को नियमित करने के लिए लाए गए कंपाउंडिंग नियमों को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2022 में शासन द्वारा लाए गए नियमों में भवन के ऊपरी हिस्से में किए गए निर्माण को कंपाउंडिंग में शामिल नहीं किया गया, जो गलत है। गृह निर्माण संस्था ने हस्तक्षेप आवेदन दिया एक याचिका केसरबाग रोड स्थित नेमानगर में बन रहे भवन को लेकर स्वामी कल्पना सेतपाल ने दायर की है। इस पर नेमानगर गृह निर्माण संस्था ने हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत किया है। आवेदन में कोर्ट को बताया गया है कि भवन की शिकायत संस्था द्वारा ही की गई थी, इसलिए उसे भी सुना जाना चाहिए। संस्था ने कहा है कि कंपाउंडिंग के नियम को चुनौती देना ही गलत है।  

वोट बंटवारे से बचने की तैयारी, चंडीगढ़ चुनाव में कांग्रेस-AAP गठबंधन की चर्चा

चंडीगढ़  दिसंबर में प्रस्तावित चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच एक बार फिर गठबंधन की संभावना बनती दिखाई दे रही है। रविवार को कांग्रेस की प्रदेश चुनाव समिति और पाॅलिटिकल अफेयर्स कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक हुई। प्रदेश चुनाव समिति में नगर निगम चुनाव के लिए आप के साथ गठबंधन के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। बैठक में पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल, सांसद मनीष तिवारी सहित चुनाव समिति के सदस्य मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में सदस्यों से सीधे पूछा गया कि क्या कांग्रेस को नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए। चर्चा के दौरान अधिकांश सदस्यों ने गठबंधन के प्रस्ताव पर सहमति जताई। अब चुनाव समिति के सदस्यों की राय के बाद प्रस्ताव को पार्टी हाईकमान के समक्ष रखा जाएगा। अंतिम फैसला हाईकमान ही करेगा। मालूम हो कि पंजाब विधानसभा से पहले चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव होने हैं। साल 2024 का लोकसभा चुनाव भी चंडीगढ़ में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने गठबंधन के तहत ही लड़ा था जिस कारण कांग्रेस उम्मीदवार मनीष तिवारी भाजपा को काफी कम मार्जन से हराने में कामयाब हुए थे। जबकि पंजाब में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। पिछले दो मेयर चुनाव भी कांग्रेस और आप एक साथ मिलकर लड़ चुके हैं ।ऐसे में अब फिर से गठबंधन होने पर भाजपा की राह मुश्किल हो जाएगी। कांग्रेस के भीतर गठबंधन को लेकर मंथन की बड़ी वजह वर्ष 2021 का नगर निगम चुनाव है। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पहली बार चंडीगढ़ में नगर निगम चुनाव लड़ा था और 35 में से 14 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। कांग्रेस को आठ सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा ने 12 और शिरोमणि अकाली दल ने एक सीट जीती थी ।कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि 2021 में भाजपा और कांग्रेस के बीच परंपरागत मुकाबला आप के मैदान में उतरने के बाद त्रिकोणीय हो गया था। आप को मिले वोटों का एक हिस्सा ऐसा था, जो विपक्षी वोट के रूप में कांग्रेस के खाते में जा सकता था। कांग्रेस का मानना है कि इस बार तीनों दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने पर फिर से विपक्षी वोटों का बंटवारा हो सकता है। इस बैठक में पार्टी के प्रमुख रजनी पाटिल, सांसद मनीष तिवारी समेत चुनाव समिति के अन्य प्रमुख सदस्य उपस्थित थे। यह स्पष्ट हुआ कि एकसाथ खड़े होने से ना केवल वोटों का उलझन भंग होगा बल्कि भाजपा की सत्ता-धारण की राह पर भी गहरा असर पड़ेगा। पिछले 2021 के नगर निगम चुनाव की याद ताजा करते हुए यह कहा जा सकता है कि तब भी आम आदमी पार्टी ने पहली बार नगर निगम में भाग लेकर 14 वार्ड जीत कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। कांग्रेस को मात्र आठ सीटें मिलीं और भाजपा एवं शिरोमणि अकाली दल ने क्रमशः बारह और एक-एक सीट जीती। उस समय यह स्पष्ट था कि विपक्षी दलों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण वोट शेयरों का बंटवारा भड़कर हुआ था। उसी तर्क को आज के दौर में उभारा गया है कि यदि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग चुनाव लड़ती हैं तो फिर से वोटों का विखंडन हो सकता है और परिणामस्वरूप भाजपा आसान जीत का दावा कर सकती है। विगत वार्षिक चुनावों में देखा गया कि जब दोनों दल एक साथ खड़े हुए थे, या कुछ प्रमुख वार्ड्स में गठबंधन के बाद हों थे, तो उन्हें काफी मजबूती मिली। 2021 के चुनाव में कुल 29. 79 प्रतिशत वोट कांग्रेस को मिले, इसके बाद भाजपा के 29.30 प्रतिशत व आम आदमी पार्टी के 27.08 प्रतिशत वोट थे। इसके अतिरिक्त निर्दलीय उम्मीदवारों को 7.10 प्रतिशत और अन्य दलों को 6.26 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस वफादार चेहरे अब इस गठबंधन के तहत नई टिकट रणनीति अपनाने को तैयार हैं और अपने दल बदलों के अनुभव से सबक लेकर विजयी मार्ग पर अग्रसर हैं। अतीत में दिखे संघर्षों के बावजूद, अब दोनों दल यह समझते हैं कि सिर्फ़ ट्रिक-टैको पर टिके रहकर नहीं जीत सकते; बल्कि एक मजबूत और तालमेलपूर्ण गठबंधन योजना बनानी पड़ेगी ताकि विपक्षी दलों के बीच समन्वय हो सके और मतदाताओं के बीच मतभेद को दूर किया जा सके। इसके अलावा, पंजाब विधानसभा चुनाव के बावजूद भी चंडीगढ़ में नगर निगम चुनाव पूर्व होना अनिवार्य है और इस बार भी दोनों दलों के बीच एकजुट होकर कार्य करने की संभावना तेज़ी से बढ़ रही है। कांग्रेस के अंदर भी यह सर्वसम्मति स्पष्ट हो रही है कि 2024 के लोकसभा तथा 2025 के नगर निगम चुनाव में भी दो प्रमुख दलों के बीच एक फ्यूजन की आकांक्षा है। यह मतदाताओं के बीच उम्मीद जगाती है कि दोगली चुनाव लड़ने की बजाए एक सशक्त, संयुक्त मोर्चा प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रकार, चंडीगढ़ में आगामी नगर निगम चुनाव के परिदृश्य में दोनों दलों के बीच गठबंधन संभवतः आने वाले दिनों में एक महत्वपूर्ण खबर बनकर सामने आ सकता है। कांग्रेस को मिले थे 29 प्रतिशत वोट साल 2021 के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को आप और भाजपा के मुकाबले कम सीटें मिली थी ।लेकिन सबसे ज्यादा वोट हासिल करने वाली पार्टी कांग्रेस बनी है। निगम चुनाव में कांग्रेस को 29.79 फीसद वोट पड़े हैं। दूसरे नंबर पर भाजपा को 29.30 फीसद और तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी को 27.08 फीसद वोट पड़े हैं। निर्दलीय उम्मीदवार को 7.10 फीसद और अन्य को 6.26 फीसद वोट पड़ी हैं।मालूम हाे कि पंजाब में दोनो दल के नेता एक दूसरे का खुलकर विरोध करते हैं ।  

पर्यटन के नक्शे पर चमका जशपुर, ‘ट्रिप्पी हिल्स’ को मिला बड़ा सम्मान

पर्यटन के नक्शे पर जशपुर की नई पहचान, ‘ट्रिप्पी हिल्स’ को सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड 2026 विश्व पर्यटन दिवस पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया सम्मानित जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता, एडवेंचर गतिविधियों और सामुदायिक पर्यटन को मिली राज्यस्तरीय पहचान रायपुर विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर जशपुर जिले के पर्यटन क्षेत्र को महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय पहचान मिली है। जशपुर की संस्था ‘ट्रिप्पी हिल्स’ को वर्ष 2026 का ‘सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड’ प्रदान किया गया। 27 सितंबर को रायपुर में आयोजित विश्व पर्यटन दिवस समारोह में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने ट्रिप्पी हिल्स को यह सम्मान प्रदान किया। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड एवं छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन (सीजीटीटीए) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले संस्थानों एवं पर्यटन हितधारकों को सम्मानित किया गया। राज्य पर्यटन पुरस्कारों में एडवेंचर टूरिज्म सहित पर्यटन क्षेत्र की विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता दी गई। ट्रिप्पी हिल्स द्वारा वर्ष 2019 से जशपुर की प्राकृतिक एवं साहसिक पर्यटन संभावनाओं को पर्यटकों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जा रहा है। संस्था ने जिले के प्राकृतिक स्थलों, जलप्रपातों, गुफाओं, जंगलों और पर्वतीय क्षेत्रों को एडवेंचर पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में पहल की है। ट्रेकिंग, रॉक क्लाइंबिंग, केव एक्सप्लोरेशन, वाटर एक्टिविटीज और कैंपिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से पर्यटकों को जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता से परिचित कराने का प्रयास किया गया है। स्थानीय युवाओं और समुदायों की भागीदारी को भी संस्था की गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को गाइड के रूप में प्रशिक्षण देने तथा स्थानीय होमस्टे एवं पारंपरिक खान-पान को पर्यटन से जोड़ने से स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिला है। पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन को ध्यान में रखते हुए पर्यटन गतिविधियों को विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। जिला प्रशासन के सहयोग से ‘जशपुर जंबूरी’ जैसे एडवेंचर आधारित आयोजनों ने भी जिले की पर्यटन संभावनाओं को व्यापक मंच प्रदान किया है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से जशपुर की प्राकृतिक और साहसिक पर्यटन क्षमता को प्रदेश के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।  यह सम्मान जशपुर जिले में पर्यटन के क्षेत्र में कार्य कर रहे स्थानीय युवाओं, पर्यटन उद्यमियों, गाइड्स, होमस्टे संचालकों और स्थानीय समुदायों के प्रयासों को भी प्रोत्साहन प्रदान करता है। इससे जिले की एडवेंचर, इको और सामुदायिक पर्यटन संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। यह सम्मान जशपुर की माटी और हमारे लोगों का है अवॉर्ड प्राप्त करने के बाद ट्रिप्पी हिल्स के फाउंडर एवं डायरेक्टर सौरभ सिंह ने कहा कि संस्था की शुरुआत जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता को देश-दुनिया के सामने लाने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान संस्था की जमीनी स्तर पर की गई मेहनत के साथ-साथ जशपुर के स्थानीय युवाओं, गाइड्स, होमस्टे संचालकों और जिले के लोगों के प्रयासों की पहचान है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा जिला प्रशासन के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं ट्रिप्पी हिल्स के को-फाउंडर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि विश्व पर्यटन दिवस पर मिला यह राज्यस्तरीय सम्मान संस्था के वर्षों के प्रयासों को नई दिशा और प्रोत्साहन देता है। उन्होंने कहा कि संस्था का प्रयास जशपुर की प्राकृतिक संपदा, स्थानीय संस्कृति और समुदाय आधारित पर्यटन को आगे बढ़ाना है। उन्होंने स्थानीय युवाओं, गाइड्स और होमस्टे संचालकों के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया। विश्व पर्यटन दिवस 2026 पर मिला यह सम्मान जशपुर की प्राकृतिक एवं साहसिक पर्यटन संभावनाओं को मिली महत्वपूर्ण पहचान है। इससे जिले में एडवेंचर टूरिज्म के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी वाले पर्यटन को बढ़ावा देने और जशपुर को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, इस्तीफे से खाली पदों पर वेटिंग लिस्ट वालों का दावा नहीं

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वेटिंग लिस्ट उम्मीदवारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि इस्तीफे के कारण खाली हुई किसी पद को पुरानी वेटिंग लिस्ट से नहीं भरा जा सकता है। कोर्ट ने स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड में जूनियर इंजीनियर भर्ती से जुड़े एक मामले में यह बात कही है। जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए दो उम्मीदवारों द्वारा लगाई गई याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के खाली पद फ्रेश वैकेंसी माने जाते हैं। जिन्हें भरने के लिए नए सिरे से विज्ञापन जारी कर चयन प्रक्रिया को पूरा करना होगा। क्या है मामला दरअसल, मामला बिजली कंपनियों, स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड में जूनियर इंजीनियर के पदों से जुड़ा हुआ है। जूनियर इंजीनियर पद में भर्ती के लिए आवेदन जारी किया गया था। यह आवेदन ओबीसी वर्ग के तहत 15 सितंबर 2023 को जारी किए गए थे। अक्टूबर में चयन लिस्ट जारी की गई। जिसमें भूपेश वर्मा और विकास कुमार गुप्ता को सफलता नहीं मिली। उनका नाम वेटिंग लिस्ट में था। चयन लिस्ट जारी होने के बाद कई चयनित उम्मीदवारों ने ज्वाइन करने के बादअपने पदों से इस्तीफा दे दिया। जिससे कई पद खाली हो गए। जिसके बाद भूपेश वर्मा और विकास कुमार गुप्ता ने विभाग में आवेदन दिया कि वेटिंग लिस्ट वाले उम्मीदवारों को नियुक्ति दी जाए। लेकिन विभाग ने उन दोनों के आवेदन पर कोई विचार नहीं किया। जिसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। कोर्ट ने दिया फैसला मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई चयनित उम्मीदवार ज्वाइन करने के बाद इस्तीफा दे देता है तो खाली हुआ पद फ्रेश वैकेंसी होती है। इसे पिछली चयन या प्रतीक्षा सूची को ऑपरेट करके नहीं भरा जा सकता है। बल्कि इस पद के लिए नए विज्ञापन के जरिए चयन प्रक्रिया करनी होगी।  

5 मौसम प्रणालियों का असर, इन राज्यों में तूफान-बारिश के आसार; पहाड़ों पर गिरेगी पहली बर्फ

 नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के उत्तरी पश्चिमी इलाके से भले ही मॉनसून की विदाई हो गई हो लेकिन रिमझिम फुहारों का सिलसिला जारी है। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि राजस्थान से बंगाल तक अभी कुछ दिन रिमझिम फुहारों और बारिश का मौसम बना रहेगा। IMD ने ताजा बुलेटिन में बताया है कि उत्तरी अंडमान सागर और उससे सटे म्यांमार तट पर बने एक 'डिप्रेशन' (कम दबाव के गहरे क्षेत्र) और उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) के प्रभाव से देश के कई हिस्सों में बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान और तेज़ हवाओं का दौर जारी रहेगा। मौसम विभाग ने कहा है कि 28-29 सितंबर के दौरान पूर्वी राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़-दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर आंधी-तूफान के साथ बारिश होने की संभावना है। IMD के मुताबिक, उत्तरी अंडमान सागर और म्यांमार तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र 28 सितंबर की सुबह 'डिप्रेशन' में बदल गया। इसके 28 सितंबर की शाम या रात तक और अधिक गहरा होकर 'डीप डिप्रेशन' में तब्दील होने और यांगून और क्याइकटो के बीच म्यांमार तट को पार करने की संभावना है। इसके प्रभाव से 28 और 29 सितंबर को अंडमान द्वीप समूह में भारी बारिश और 50 से 60 किमी/घंटा (झोंके 70 से 75 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से हवाएँ चलने का अनुमान है। समुद्र में स्थिति अत्यंत खराब रहने के कारण मछुआरों को 1 अक्टूबर तक अंडमान सागर, उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तथा म्यांमार और बांग्लादेश तटों के पास न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। निचले क्षोमंडल स्तर पर उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आस-पास के इलाकों के ऊपर ऊपर भी एक चक्रवाती सर्कुलेशन सक्रिय है। इसके अलावा मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में भी एक कम दबाव का क्षेत्र अभी भी बना हुआ है, हालांकि यह कमजोर हुआ है। उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश और मॉनसून की वापसी वहीं, पश्चिमी विक्षोभ के कारण 28 सितंबर को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में मध्यम से भारी बारिश तथा बिजली कड़कने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में 28 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। इस बीच दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी की रेखा गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर, डीसा और नलिया से होकर गुजर रही है। पहाड़ों पर पहली बर्फबारी स्काईमेट एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताहांत के दौरान पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पहाड़ों से होकर गुज़रा। हालांकि, इस सिस्टम का असर अभी भी इलाके पर बना हुआ है और इसके बाद ऊपरी हवाओं का एक और ट्रफ़ (upper-air trough) आ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मौसमी दशाओं के प्रभाव में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के मध्यम और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में इस सीज़न की पहली बर्फ़बारी हुई है। किन्नौर इलाके में, जहां की ऊंचाई 8,000 से 20,000 फ़ीट के बीच है, सीज़न की पहली बर्फ़ गिरी। तिब्बत सीमा के पास लगभग आखिरी गांव, कुनो-चिरांग में बर्फ़ की चादर बिछ गई। लाहौल और स्पीति घाटी, जिनकी ऊंचाई 12,000 से 14,000 फ़ीट के बीच है, सीज़न की पहली बर्फ़बारी से ढक गईं। डुम्टी जाने वाले रास्ते पर स्थित चितकुल में मौसम की शुरुआत में ही लगभग 3 इंच बर्फबारी हुई। पहाड़ों पर बादल छाए रहेंगे रिपोर्ट में कहा गया है कि इनकी वजह से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में मौसम की गतिविधियां जारी रहेंगी। पंजाब और हरियाणा के मैदानी इलाकों में, और खासकर उत्तराखंड के निचले पहाड़ी इलाकों और मध्यम से ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भी अगले 24 घंटों के दौरान बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं बारिश होगी। हालांकि, मंगलवार दिन के आखिर में मौसम बेहतर होने की संभावना जताई गई है। IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश भागों में 30 सितंबर से और मध्य भारत में 2 अक्टूबर 2026 से मौसम मुख्य रूप से शुष्क होने लगेगा। दिल्ली-एनसीआर से बिहार तक मौसम का हाल राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में 28 सितंबर को आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश के साथ 30-40 किमी/घंटा (झोंके 50 किमी/घंटा तक) की रफ्तार से हवाएँ चलने का पूर्वानुमान है। दिल्ली में अधिकतम तापमान 28-30°C के बीच रहने की संभावना है। इसके बाद 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के दौरान आसमान मुख्य रूप से साफ रहने और तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज होने का अनुमान है। इसके अलावा मौसम विभाग ने कहा है कि 30 सितंबर से 4 अक्टूबर के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में; 28 सितंबर से 4 अक्टूबर के दौरान गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में; और 28 सितंबर से 1 अक्टूबर के दौरान बिहार में कहीं-कहीं छिटपुट बारिश होने और साथ में आंधी-तू़फान और बिजली गिरने की संभावना है।

चंडीगढ़ में सब्जी दुकानदारों पर शिकंजा, 3 चालान के बाद 6 महीने लाइसेंस सस्पेंड

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में लगने वाली सब्जी मंडियों में वेंडरों की ओर से रंगीन लाइटों का प्रयोग करने पर एक्शन की तैयारी हो गई है। हरी, पीली या अन्य रंगों की लाइटें लगाने वाले वेंडरों के लाइसेंस तक कैंसिल किए जाएंगे। इस संबंध में निगम की कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया।  इस बार होने वाली हाउस की मीटिंग में यह एजेंडा लाया जाएगा। नगर निगम की समिति के मेंबर व पार्षद गुरप्रीत गाबी का कहना है कि लोग पैसे देकर फ्रेश और साफ-सुथरी सब्जियों के लिए आते हैं। लेकिन मार्केट में वेंडर रंग-बिरंगी लाइटें लगा देते हैं। वे सब्जियों पर हरी लाइट्स और फ्रूट पर येलो या रेड लाइट का प्रयोग करते हैं। इससे व्यक्ति मार्केट से सब्जी हरी समझकर खरीदकर ले आता है, लेकिन घर में आकर वह खराब या पीली निकलती है। यह धोखाधड़ी है। यह लोगों के खाने पर भी डाका है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसके अलावा वेंडर प्लास्टिक बैग और गंदगी फेंककर चले जाते हैं। चालान का सिस्टम भी किया तैयार गाबी ने बताया कि चालान का सिस्टम भी बनाया गया है। इसके तहत कानून तोड़ने वाले वेंडर का चालान होगा। तीन बार चालान होने पर छह महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंड कर दिया जाएगा। आईडी कार्ड में परिवार का ब्यौरा भी रहेगा। इसमें उसका पूरा एड्रेस रहेगा। किसानों को मंडी में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी इस कार्य का फायदा होगा कि उसे पूरी तरह से कवर किया जाएगा। लोकल किसानों को मंडी में 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी। यह छूट मंडी फीस में मिलेगी। यह छूट उन किसानों को मिलेगी, जिनके पास उनकी जमीन की फर्द और आईकार्ड होगा। कमेटी के सभी सदस्य इलाके के पार्षद नगर निगम की मंडी से जुड़ी कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया है। इस कमेटी के सभी सदस्य इलाके के पार्षद हैं। अक्टूबर माह की मीटिंग में यह प्रस्ताव आएगा। अगर सब कुछ सही रहा तो निगम की मीटिंग के बाद प्रशासन की मंजूरी मिलने पर इसे लागू कर दिया जाएगा।

रतलाम में MP ट्रांसको ने स्थापित किया 200 MVA का नया ट्रांसफार्मर, रबी सीजन में मिलेगी बेहतर बिजली

एमपी ट्रांसको ने रतलाम में स्थापित किया 200 एमवीए का नया ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री तोमर रबी सीजन में मिलेगी बेहतर विद्युत व्यवस्था रतलाम  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने उत्तरी मालवा क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए रतलाम के 220 केवी सबस्टेशन की क्षमता में वृद्धि की है। रतलाम सबस्टेशन में वर्ष 1988 में स्थापित सेकंड जेनरेशन के 160 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर नये थर्ड जेनरेशन तकनीक आधारित 220/132 केवी वोल्टेज स्तर का 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। रतलाम जिले का पहला 200 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया कि रतलाम जिले में पहली बार इतनी उच्च क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। इससे क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी तथा आगामी रबी सीजन के दौरान किसानों और अन्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। मालवा क्षेत्र का 5 वां और प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर एमपी ट्रांसको रतलाम -मंदसौर के अधीक्षण अभियंता वाय आर मांडलेकर ने बताया कि रतलाम में ऊर्जीकृत हुआ यह पावर ट्रांसफार्मर प्रदेश का 19 वां 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर है। मालवा क्षेत्र में इस क्षमता का यह पांचवां पावर ट्रांसफार्मर है। इसके स्थापित होने से रतलाम 220 केवी सबस्टेशन की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 520 एमवीए हो गई है। जिले का 28 वां पावर ट्रांसफार्मर यह रतलाम जिले का 28वां पावर ट्रांसफार्मर है। एमपी ट्रांसको जिले में अपने 10 सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण व्यवस्था का संचालन कर रही है। इनमें 220 केवी के रतलाम, जावरा एवं सैलाना सबस्टेशन तथा 132 केवी के रतलाम, सैलाना, शिवगढ़, ताल, आलोट और बिलपांक सबस्टेशन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नगरा में एक स्विचिंग सबस्टेशन भी संचालित है। नए पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने के साथ ही रतलाम जिले की कुल ट्रांसफार्मेशन क्षमता बढ़कर 2165 एमवीए की हो गई है।  

CBSE Three Language Policy में बदलाव, कक्षा 6 के बच्चों को सुप्रीम कोर्ट से राहत

नईदिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने तीन भाषा नीति को लेकर क्लास 6 के छात्रों को इस साल छूट देने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने अंतरिम आदेश में सीबीएसई से कहा कि क्लास 6 के मौजूदा छात्रों को एक बार की छूट दी जाए। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत तीन भाषा नीति के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। ये याचिकाएं पहले क्लास 9 और बाद में क्लास 6 के लिए नीति लागू करने के फैसले को चुनौती देती हैं। मुख्य मुद्दे पर अब छह हफ्ते बाद सुनवाई होगी। उसमें इस सवाल पर भी बात होगी कि अंग्रेजी को विदेशी भाषा माना जाए या नहीं। सुनवाई के दौरान सीबीएसई की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुए। उन्होंने बताया कि अदालत के सुझाव पर बोर्ड ने विचार किया और क्लास 6 में इसी साल से नीति लागू करने का फैसला लिया है। मेहता के मुताबिक देश के करीब 28,000 सीबीएसई स्कूलों में से लगभग 99 फीसदी ने नीति अपना ली है। उनके पास किताबें और शिक्षक दोनों हैं। सिर्फ 1.2 फीसदी स्कूल दिक्कत में हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि एनईपी 2020 और एनसीएफ-एसई 2023 में क्लास 6 को ही शुरुआती पड़ाव माना गया है। अगर यह बैच छूट गया, तो बच्चे सीधे क्लास 7 और 8 में उस सीख के बिना पहुंचेंगे, जो नए ढांचे में सोची गई थी। सीबीएसई की दलील पर बेंच ने नहीं दिखाई सहमति बेंच इससे सहमत नहीं दिखी। उसने कहा कि अप्रैल में सत्र शुरू हुए महीनों बीत चुके हैं, इसलिए नीति अप्रैल 2027 से लागू की जाए। तब तक किताबें और शिक्षक भी पूरी तरह मिल जाएंगे। अदालत ने यह भी साफ किया कि वह सीबीएसई की योजना पर रोक नहीं लगा रही। यह बस एक "सॉफ्ट लॉन्च" है, ताकि बच्चे बदलाव से तालमेल बिठा सकें। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन और आनंद ग्रोवर ने कहा कि मामला ज्यादा लंबा नहीं खिंचना चाहिए, क्योंकि बच्चों में घबराहट है। उनके मुताबिक करीब तीन लाख छात्र इससे जुड़े हैं और पहले से मानसिक दबाव झेल रहे हैं। बीच सत्र में कुछ नया थोपना उन पर और बोझ डालेगा। ग्रोवर ने यह भी बताया कि कुछ भारतीय भाषाओं की किताबें अब तक उपलब्ध नहीं हैं। क्लास 9 की कुछ किताबें सिर्फ ऑनलाइन हैं और छपी कॉपी का इंतजार है। इससे ग्रामीण इलाकों के बच्चों को खासी परेशानी होगी। इस पर बेंच ने याद दिलाया कि कोविड के दौर में बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई के आदी हो चुके हैं और मोबाइल पर काम संभाल सकते हैं। उसने याचिकाकर्ताओं को बेहतर वजहें ढूंढने के लिए टोका भी। अदालत ने दिक्कत झेल रहे स्कूलों तक पहुंचने के लिए विशेषज्ञ अफसरों की एक समिति बनाने का सुझाव भी दिया। सीबीएसई ने भी कोर्ट में दिए आंकड़े सीबीएसई ने कोर्ट को आंकड़े भी दिए। क्लास 6 की तीसरी भाषा की किताबें सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में एनसीईआरटी की वेबसाइट पर मौजूद हैं। इनसे 98 फीसदी से ज्यादा स्कूलों की पसंद पूरी हो जाती है। बाकी भाषाओं के लिए एससीईआरटी की किताबें और संसाधन काम आएंगे। शिक्षकों के मामले में 20,777 स्कूलों के आंकड़े देखें तो 19,386 यानी करीब 93.3 फीसदी स्कूलों में कम से कम दो भारतीय भाषाओं के शिक्षक हैं। इनमें से 3,523 स्कूलों में तीन या उससे ज्यादा भाषाओं के शिक्षक हैं। बोर्ड ने यह भी बताया कि 16 सितंबर को पांच सदस्यीय समिति बनी है, जो क्लास 6 से 10 तक इस ढांचे को लागू करने में मदद करेगी और निगरानी भी रखेगी। इसके प्रमुख शिक्षा मंत्रालय के निदेशक भगवती प्रसाद कलाल हैं। समिति में एनसीईआरटी सचिव राजीव कुमार, सीबीएसई की अकादमिक निदेशक प्रज्ञा एम. सिंह, केवीएस की अतिरिक्त आयुक्त चंदना मंडल और एनवीएस के उपायुक्त सोमवीर पूनिया शामिल हैं। नए नियम में तीन में से कम से कम दो भाषाओं का भारतीय होना जरूरी है। क्लास 7, 8 और 9 के जो बच्चे दो गैर-भारतीय भाषाएं पढ़ रहे थे, उन्हें सीबीएसई पहले ही राहत दे चुका है। वे अपना मौजूदा कॉम्बिनेशन रख सकते हैं और एक भारतीय भाषा अलग से जोड़ेंगे। इस अतिरिक्त भाषा का आकलन स्कूल स्तर पर होगा, क्लास 10 की बोर्ड परीक्षा में नहीं। गौरतलब है कि कुछ याचिकाकर्ताओं को डर था कि क्लास 10 के स्कूल-स्तर के आकलन में भी रिजल्ट रोके जा सकते हैं। बेंच ने इसे खारिज करते हुए कहा कि वह देखना चाहेगी कि कौन सा स्कूल इंटरनल असेसमेंट के आधार पर किसी बच्चे को रोकता है।