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कुपोषण पर योगी सरकार का बड़ा अभियान, 26 जिलों के 395 आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच

कुपोषण पर योगी सरकार का ‘संभव’ प्रहार, 26 जिलों में 395 आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग व यूनिसेफ की निगरानी से पोषण सेवाओं को मिल रही गति संभव 6.0 अभियान के जरिए कमियों को दूर करने पर फोकस, दस्तावेजीकरण, प्रशिक्षण को मिल रहा जोर 26 जिलों में विभागीय समन्वय की मजबूत तस्वीर, आगरा, एटा व फिरोजाबाद में भी टीम ने किया दौरा लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कुपोषण की रोकथाम और बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार के लिए योगी सरकार के संभव 6.0 अभियान को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने की कवायद तेज है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के साथ यूनिसेफ की राज्य एवं मंडलीय टीमें लगातार क्षेत्रीय अनुश्रवण (मॉनिटरिंग) कर अभियान की प्रगति, सेवाओं की गुणवत्ता और विभागीय समन्वय का जायजा ले रही हैं। अब तक 26 जनपदों के 395 आंगनबाड़ी केंद्रों का अनुश्रवण किया जा चुका है। 395 केंद्रों पर परखी गई पोषण सेवाओं की गुणवत्ता अनुश्रवण के दौरान बच्चों के वजन और लंबाई-ऊंचाई की माप, वृद्धि निगरानी, संभव 6.0 की गतिविधियों और माइक्रोप्लान के क्रियान्वयन को देखा गया। अधिकांश केंद्रों पर वृद्धि निगरानी के आवश्यक उपकरण उपलब्ध मिले और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मापन संबंधी व्यावहारिक दक्षता सामान्यतः अच्छी पाई गई। 26 जिलों में विभागीय समन्वय की मजबूत तस्वीर 26 जिलों में आकलन के दौरान अधिकांश जनपदों में आईसीडीएस, स्वास्थ्य और पंचायती राज विभाग के बीच समन्वय तथा अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी सकारात्मक मिली। जनपद स्तर पर माइक्रोप्लान तैयार कर नियमित समीक्षा बैठकों, प्रशिक्षण और अभिमुखीकरण के माध्यम से अभियान को गति दी जा रही है। आगरा, एटा और फिरोजाबाद में भी टीम ने किया दौरा यूनिसेफ की राज्य स्तरीय टीम के डॉ. सन्दीप सेठ ने हाल में आगरा, एटा और फिरोजाबाद में क्षेत्रीय अनुश्रवण किया। आंगनबाड़ी केंद्रों पर संभव 6.0 की गतिविधियों और वृद्धि निगरानी का जायजा लेने के साथ अधिकारियों व फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं से संवाद कर आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए गए। दस्तावेजीकरण, प्रशिक्षण को और मिलेगा जोर बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि अनुश्रवण में कुछ स्थानों पर गतिविधियों के बेहतर संचालन के बावजूद दस्तावेजीकरण मजबूत करने की जरूरत सामने आई। माइक्रोप्लान, बैठक कार्यवाही, फील्ड विजिट और एक्शन टेकन रिपोर्ट को व्यवस्थित रखने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की वृद्धि निगरानी उपकरण (जीएमडीएस), संभव 6.0 और गंभीर कुपोषण (एसएएम) की पहचान एवं प्रबंधन संबंधी तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

चंडीगढ़ में देशभर के मेयरों का जमावड़ा, 4 से 6 अक्टूबर तक चलेगा सम्मेलन

चंडीगढ़ देशभर के मेयरों का चंडीगढ़ में जमावड़ा होने जा रहा है। 4 से 6 अक्टूबर तक सेक्टर-10 स्थित होटल माउंटव्यू में ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ मेयर का 118वां महापौर सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें देशभर से महापौर और प्रतिनिधि शामिल होंगे। ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ मेयर की कार्यकारिणी के करीब 40-45 सदस्यों के सम्मेलन में पहुंचने की उम्मीद है। इनमें से 28 सदस्यों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 17 सदस्यों ने शामिल होने से मना कर दिया है। बाकी सदस्यों से बातचीत चल रही है। चंडीगढ़ इस बार सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। मेयरों के लिए क्या किए गए इंतजाम, जानिए…     गृह सचिव ने अधिकारियों के साथ की बैठक: सम्मेलन की तैयारियों को लेकर गृह सचिव एवं स्थानीय निकाय विभाग के सचिव मनदीप सिंह बराड़ ने अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें महापौर सौरभ जोशी, उपायुक्त निशांत कुमार यादव, नगर निगम आयुक्त अमित कुमार, पुलिस महानिरीक्षक पुष्पेंद्र कुमार, एसएसपी कंवरदीप कौर समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।     परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा: बैठक में बाहर से आने वाले महापौरों और प्रतिनिधियों के ठहरने, सुरक्षा, परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। गृह सचिव ने संबंधित विभागों को अपनी जिम्मेदारियां समय पर पूरी करने और आपसी समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।     5 को उद्घाटन और शहर भ्रमण: सम्मेलन की शुरुआत 4 अक्टूबर को अतिथियों के आगमन से होगी। 5 अक्टूबर को उद्घाटन सत्र आयोजित होगा। इसी दिन परिषद की बैठक के साथ चंडीगढ़ नगर निगम की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों से महापौरों और प्रतिनिधियों को परिचित कराने के लिए शहर का भ्रमण कराया जाएगा। 6 अक्टूबर को समापन सत्र होगा।     होटल माउंटव्यू में कमरों की बुकिंग: सम्मेलन में शामिल होने वाले सदस्यों के लिए होटल माउंटव्यू में कमरों की बुकिंग की जा रही है। शहर भ्रमण के लिए सीटीयू की दो बसों का इंतजाम किया गया है। दोनों बसें दो दिन तक सदस्यों के साथ रहेंगी। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस को और ठहरने व अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सिटको को दी गई है।     25 लाख का बजट मंजूर: मेयर सम्मेलन के लिए नगर निगम आयुक्त की ओर से 25 लाख रुपए का बजट मंजूर किया जा चुका है। हालांकि नगर निगम के कई पार्षदों का कहना है कि उन्हें सम्मेलन के आयोजन की जानकारी तक नहीं है। पार्षदों का कहना है कि निगम का पैसा खर्च होना है, लेकिन इसके लिए निगम हाउस या किसी कमेटी से बजट मंजूर नहीं कराया गया।     सदस्यों की पूरी सूची भी अभी निगम के पास नहीं: वहीं, सम्मेलन में शामिल होने वाले कार्यकारिणी सदस्यों की पूरी सूची भी अभी निगम के पास नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस अधिकारियों ने सूची मांगी थी। बताया गया है कि शनिवार को सूची कंफर्म होने के बाद इसे एसएसपी और एमडी सिटको को सौंपा जाएगा। इनका आना कंफर्म कार्यकारिणी की चेयरमैन रेनू बोला गुप्ता (मेयर, करनाल), नेशनल जनरल सेक्रेटरी आशुतोष वरशने (पूर्व मेयर, अलीगढ़), सीनियर वाइस चेयरमैन डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव (मेयर, गोरखपुर), वाइस चेयरमैन मरिगेन सारानिया (मेयर, गुवाहाटी), वाइस चेयरमैन पुष्यामित्रा भार्गव (मेयर, इंदौर), वाइस चेयरमैन मायाबेन धर्मेंद्राबाई मवानी (मेयर, सूरत) और सेक्रेटरी इंदरजीत कौर (मेयर, लुधियाना) का आना कंफर्म बताया गया है। इसके अलावा पूजा विडानी (बिलासपुर), शेरिंग पैडेन भूटिया (गंगटोक), मीनल चौबे (रायपुर), नीता राजेंद्रा ठाकरे (नागपुर), लिखा नारी तदार (इटानगर), जी उदयाकुमार (अवाडी), नेहल शुक्ला (राजकोट), राजीव जैन (सोनीपत), रूपरानी संग्राम सिंह निकल (कोल्हापुर), नंदलाल देवगन (बीरगांव), लक्ष्मी नारायण गुप्ता (छपरा), प्रवीण बतरा जोशी (फरीदाबाद), विनोद अग्रवाल (मुरादाबाद), कुरागायला उमा रानी (निजामाबाद), शंभु पासवान (ऋषिकेश), अनीता अग्रवाल (रूड़की), योगेश कुमार (सतना), विवेक नारायण (पूर्व मेयर, ग्वालियर), नवीन जैन (पूर्व मेयर, आगरा) और जगदीश राय पटेल (पूर्व मेयर, सूरत) के नाम भी शामिल हैं।

युवा शराब से क्यों बना रहे दूरी? 2022-24 के डेटा में गिरावट, बड़ी उम्र के लोगों में बढ़ा सेवन

नई दिल्ली शराब पीने को लेकर एक नया ट्रेंड सामने आया है,  पिछले कुछ सालों में 40 साल से कम उम्र के लोगों में शराब पीने का चलन कम हुआ है, वहीं 50 से 64 साल की उम्र के लोगों में शराब पीने वालों की संख्या बढ़ी है. इतना ही नहीं, इस उम्र के कुछ लोग पहले से ज्यादा शराब पीने लगे हैं।  नई स्टडी Annals of Internal Medicine में प्रकाशित हुई है. रिसर्च के मुताबिक, 2022 से 2024 के बीच अमेरिका में शराब पीने वाले युवाओं की संख्या अब कम हो रही है, युवा शराब से दूरी बन रहे हैं, कोरोना महामारी के बाद युवाओं में ये शराब पीने का ट्रेंड कम हो रहा है. रिसर्च में जो आंकड़े बताए गए हैं उनके मुताबिक, 2018 तक अमेरिका में 40 साल से कम उम्र वाले 66 % लोग शराब पीत थे, 2020 में ये आंकड़ा 69 % था, लेकिन 2024 में ये 67 % रह गया है. 40 साल से कम उम्र में जेन- जी यानी 26 से 30 साल की उम्र के युवा भी शामिल हैं. रिसर्च में ये भी बताया गया है कि 50 साल से अधिक उम्र में शराब पीने का ट्रेंड अब ज्यादा क्यों बढ़ा है।  50 की उम्र के बाद क्यों चिंता ज्यादा? डॉक्टरों के मुताबिक, 50 से 64 साल की उम्र में शराब का ज्यादा सेवन खास तौर पर चिंता का विषय है. इस उम्र में पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, लिवर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है, ज्यादा शराब इन जोखिमों को और बढ़ा सकती है।  स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता और लिवर विशेषज्ञ डॉ. ब्रायन पी. ली के मुताबिक, इस उम्र के लोग ज्यादा मानसिक तनाव में हैं, इस वजह से वह शराब का सहारा ले रहे हैं. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि 40 से कम उम्र वालों में मानसिक तनाव कम हो गया है, लेकिन 50 प्लस वाले इसको कम करने के लिए शराब ज्यादा पी रहे हैं।    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जो लोग कभी-कभी शराब पीते हैं, उनमें से 53 प्रतिशत लोग अब शराब की खपत कम करने की कोशिश कर रहे हैं. यह संख्या पांच साल पहले केवल 44 प्रतिशत थी. साथ ही, जिन लोगों ने कभी शराब नहीं पी, उनकी संख्या भी 2020 के बाद 3 प्रतिशत बढ़ गई है. हालांकि, वैश्विक स्तर पर शराब की बिक्री अभी भी बहुत बड़ी है. 2024 में दुनिया भर में शराब की कुल खपत 253 बिलियन लीटर तक पहुंच गई है. लेकिन इसके बावजूद, इसका विकास बहुत धीमा हो गया है।  वहीं रिपोर्ट के अनुसार, भारत में शराब की खपत 2024 से 2029 के बीच 357 मिलियन लीटर बढ़ने की संभावना है. इससे भारत दुनिया में तेजी से बढ़ने वाला शराब बाजार बन रहा है. हालांकि, यह बदलाव वैश्विक प्रवृत्ति के विपरीत है, जहां युवा वर्ग शराब से दूर हो रहे हैं. रिपोर्ट ने नॉन-अल्कोहल स्पिरिट्स की बढ़ती मांग पर भी प्रकाश डाला है. शराब की बिक्री में केवल 0.6 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई और इसका कुल बाजार मूल्य 1.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा, वहीं नॉन-अल्कोहल स्पिरिट्स की बिक्री 17 प्रतिशत बढ़ी. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 से 2029 तक यह बाजार 24 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है और 2029 तक यह 10.2 बिलियन लीटर से अधिक हो जाएगा।  मानसिक तनाव में शराब लेना बन सकता है आदत द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसिक तनाव के समय कुछ लोग शराब को राहत पाने का तरीका मान लेते हैं, लेकिन इससे समस्या खत्म नहीं होती. धीरे-धीरे शराब तनाव से निपटने की आदत बन सकती है और इसकी मात्रा भी बढ़ सकती है. इसलिए अगर कोई व्यक्ति 50 की उम्र के बाद  शराब पीता है या पहले से ज्यादा शराब लेने लगा है, तो इसे सिर्फ आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।  कौन सी शराब खरीदना पसंद कर रहे हैं युवा? आज की पीढ़ी केवल सस्ती शराब देखकर ही नहीं खरीद रही है, इसके अलावा भी उनकी कुछ पंसद है, जिस पर उनका फोकस ज्यादा रहता है जैसे…     ऐसी शराब जिसका टेस्ट अलग हो.     शराब की क्वालिटी भी अच्छी हो.     साथ ही कोई खास पहचान हो. शराब का बिजनेस आखिर कैसे बढ़ा? युवा ने शराब पीना भले ही कम कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद शराब कंपनियों के बिजनेस में तेजी देखने को मिल रही है, जिसकी वजह यह है कि युवा शराब को कम जरूर पी रहे हैं, लेकिन जब भी पी रहे हैं तो महंगी और क्वालिटी को देखते हुए ही पी रहे हैं. जिसकी वजह से शराब कंपनियों की कमाई आगे बढ़ी है. खास कर इस बदलाव का असर वोदका के अलग-अलग फ्लेवर की पसंद में भी दिख रहा है।  इन कंपनियों का प्रर्दशन रहा अच्छा युवा की बदलती मांग की वजह से ही रैडिको खेतान, यूनाइटेज स्पिरिट्स और यूनाइटेड ब्रुअरीज जैसी कंपनियां अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. यानी Gen Z अब कम शराब जरूर पी रहे हैं, लेकिन बेहतर क्वालिटी और अलग फ्लेवर की शराब पीना पसंद कर रहे हैं। 

3 अक्टूबर को विकासखंड और 4 अक्टूबर को नगरीय क्षेत्रों में लगेंगे ‘सरकार आपके द्वार’ शिविर

नागरिकों को त्वरित सेवाएं देने के लिए"सरकार आपके द्वार अभियान 3 अक्टूबर को विकासखंड और 4 अक्टूबर को नगरीय क्षेत्र में लगेंगे शिविर जन-विश्वास अभियान से जुड़ा सेवा सेतु भोपाल नागरिकों को पारदर्शी, संवेदनशील, उत्तरदायी एवं समयबद्ध लोक सेवाएँ सीधे उनके गाँव व वार्ड स्तर पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेशव्यापी ''सरकार आपके द्वार”अभियानके तहत 3 अक्टूबर शनिवार को विकासखण्ड स्तर तथा 4 अक्टूबर रविवार को नगरीय क्षेत्र में शिविरों का आयोजन किया जाएगा। यह अभियान प्रदेश में चल रहे व्यापक “सेवा संकल्प अभियान” 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं केंद्रीय घटक है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सभी कलेक्टर, कमिश्नर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, आयुक्त नगर पालिका / नगर निगम / नगर पालिका परिषद को निर्देश जारी किए है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केन्द्र एवं राज्य सरकार की समस्त फ्लैगशिप हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ नागरिकों, विशेषत: कृषकों, ग्रामीणजनों, श्रमिकों, महिलाओं, वंचितों और कमजोर वर्गों को पहुँचाना है। अभियान को “जन-विश्वास अभियान” के साथ भी संबद्ध किया गया है, जिससे जनता के बीच सुशासन, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही के विश्वास का सेतु स्थापित हो सके। विकासखंड और नगरीय क्षेत्र में आयोजित होंगे शिविर प्रत्येक जिले के समस्त विकासखण्डों में 3 अक्टूबर को शिविर आयोजित किए जाएंगे। नगरीय क्षेत्र में 4 अक्टूबर को नगर पालिका निगम में जोनवार, नगर पालिका तथा नगर परिषद में शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिविर स्थल का आयोजनसार्वजनिक एवं सुलभ स्थानों पर किया जाएगा।उत्कृष्ट विद्यालय प्रांगण, जनपद पंचायत परिसर, सामुदायिक भवन या खेल मैदानजहाँ पर्याप्त खुली जगह, पेयजल, छाया तथा आवागमन की सुगम सुविधा हो। शिविरों के लिए लोक सेवा प्रबंधन, नगरीय विकास एवं आवास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहयोगी विभाग होंगे। कलेक्टर जिला स्तर पर एक नोडल अधिकारी एवं सहायक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करेंगे जो जिला स्तर पर अभियान का समन्वय करेंगे। कैंप के प्रभारी अधिकारी की सहायता के लिये सहायक अधिकारी की नियुक्ति जिला स्तर से की जायेगी।विकासखण्ड स्तर पर कैम्प के लिए प्रभारी अधिकारी पदेन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत और नगर पंचायत/परिषद तथा नगर पालिका के लिए प्रभारी अधिकारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं नगर निगम जोनल कार्यालय के लिए जोनल अधिकारी नगर निगम होंगे। शिविरों के प्रमुख कार्य शिविर में पूर्व से योजना का लाभ प्राप्त किये जाने वाले हितग्राहियों की जानकारी का संकलन, शेष पात्र हितग्राहियों को सूचीबद्ध करना तथा शेष पात्र हितग्राहियों को शासन द्वारा दिये गए वार्षिक लक्ष्य अनुसार कैंप में ही लाभ देना सुनिश्चित किया जाएगा।लक्षित योजनाओं में वार्षिक लक्ष्य-प्राप्ति से शेष रहे हितग्राहियों को क्रमबद्ध तरीके से लाभ प्रदाय किया जायेगा। अभियान अंतर्गत कैंप में आने वाले हितग्राहियों का रजिस्ट्रेशन किया जायेगा। पंजीयन के लिए पृथक से 3 स्टॉल लगाये जाएंगे।स्टॉल पर अधिकारी/कर्मचारी की उपस्थिति रहेगी। कैंप प्रभारी यह सुनिश्चित करेंगे कि संबंधित विभाग के अधिकारी/कर्मचारी स्टॉल पर उपस्थित रहे। यदि ब्लॉक स्तर पर विभागीय अधिकारी पदस्थ नहीं है तब कलेक्टर अपने स्तर से अधिकारी को कैंप के लिए नियुक्त करेंगे। ऑन-स्पॉट डिलीवरी एवं स्वास्थय शिविर अंतर-विभागीय समन्वय एवं हितग्राहीमूलक योजनाओं की ऑन-स्पॉट डिलीवरी अंतर्गत शिविर में राज्य विभाग नोडल की भूमिका निभाते हुए अन्य प्रमुख विभागों के समन्वय से योजनाओं के लाभ मौके पर प्रदान कराएगा। स्वास्थ्य शिविर में होगी जाँच प्रत्येक शिविर स्थल पर स्वास्थ्य शिविर का आयोजन अनिवार्य रूप से किया जायेगा। स्थल पर प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जायेगा जिसमें केन्द्र एवं राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं को सम्मिलित किया जायेगा। विभिन्न विभागों की सेवा के लिए न्यूनतम 25 सुसज्जित एकरूप स्टॉल स्थापना, बैठक व्यवस्था, पेयजल, विद्युत, कम्प्यूटर तथा इंटरनेट की व्यवस्था, सेल्फी पाइंट्स एवं अन्य व्यवस्थायें स्थानीय निकायों यथा जनपद पंचायत, नगर निगम, नगर पालिका एवं नगर परिषद के द्वारा की जायेंगी। पोर्टल रिपोर्टिंग एवं सफलता की कहानियाँ दैनिक पोर्टल रिपोर्टिंगके अंतर्गतप्रत्येक शिविर में कुल प्राप्त आवेदन, मौके पर स्वीकृत आवेदन, लंबित आवेदन एवं वितरित हितलाभों की संख्यात्मक जानकारी अधिकृत राज्य पोर्टल पर प्रतिदिन शाम 6:00 बजे तक अनिवार्य रूप से प्रविष्ट की जाएगी। सफलता की कहानियाँ अंतर्गत शिविरों के माध्यम से यदि किसी पीड़ित, किसान अथवा निर्धन नागरिक की वर्षों पुरानी समस्या का मौके पर समाधान हुआ हो, तो उसके फोटोग्राफ, संक्षिप्त वीडियो एवं सफलता की कहानी www.modiat25.in⁠ पर अपलोड किए जाएंगे। शिविर की सूचना के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जायेगा।  

पंजाब में बारिश ने बढ़ाई चिंता, 38 फीसदी कम बरसे बदरा; भूजल संकट गहराया

पटियाला पंजाब में इस बार मानसून की विदाई के साथ बारिश के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। जून से सितंबर 2026 तक प्रदेश में सामान्य से 38 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। यह 2000 के बाद तीसरा सबसे कम बारिश वाला साल रहा है। इस अवधि में केवल 272.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 439.8 मिलीमीटर है। इससे पहले 2014 में 50 फीसदी और 2012 में 47 फीसदी कम बारिश हुई थी। पिछले साल 2025 में 620.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य से 41 फीसदी अधिक थी। इस साल यह आंकड़ा घटकर 272.8 मिलीमीटर रह गया है। सिर्फ एक साल में मानसूनी बारिश में भारी गिरावट आई है। 2024 में भी 317.3 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य से 28 फीसदी कम थी। पंजाब ने लगातार दो साल कमजोर मानसून का सामना किया है। भूजल पर बढ़ता दबाव 2026 में जून और सितंबर में सिर्फ 29.5-29.5 मिलीमीटर बारिश हुई। जुलाई में 119.3 मिमी और अगस्त में 94.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। यह बारिश जून और सितंबर की भारी कमी की भरपाई नहीं कर पाई। पंजाब की खेती भूजल पर बहुत निर्भर है, जिससे सिंचाई के लिए दबाव बढ़ेगा। मानसून की कमजोरी से भूजल का प्राकृतिक रिचार्ज भी प्रभावित हुआ है।  साल–कितनी बारिश हुई-प्रतिशत 2026: 272.8 मिमी  38% कम 2025: 620.9 मिमी  41% ज्यादा 2024: 314.6 मिमी  28% कम 2014: 243.9 मिमी  50% कम 2012: 262.2 मिमी  47% कम पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी लुधियाना से जलवायु परिवर्तन एवं कृषि मौसम विभाग से डा. पवनीत कौर किंगरा का कहना है कि इस बार का मानसून अल नीनो के प्रभाव तले था, जिससे पहले ही अनुमान था कि सामान्य से कम बारिश होगी। पंजाब तक पर्याप्त मानसूनी सिस्टम नहीं पहुंचे। बारिश लाने वाले लो प्रेशर सिस्टम और मानसूनी गतिविधियां इस बार पंजाब के बजाय अन्य हिस्सों में ज्यादा सक्रिय रहीं। जुलाई के मध्य तक पंजाब में बारिश सामान्य से 24 फीसदी कम दर्ज की गई थी। इसके बाद भी मानसून की गतिविधि लगातार कमजोर बनी रही। सितंबर में भी कमी पूरी नहीं हो सकी। 

700 KM का सफर होगा यादगार, पहाड़-झरनों के बीच दौड़ेगी वंदे भारत; 13 घंटे लगेंगे

बेंगलुरु    बेंगलुरु से गोवा जाना हो तो आपके पास आमतौर पर दो विकल्प होते हैं- जल्दी पहुंचना है तो फ्लाइट और कम खर्च में जाना है तो बस या ट्रेन. लेकिन अगर मंजिल के साथ रास्ते का मजा भी लेना हो, तो बेंगलुरु-गोवा वंदे भारत का सफर अलग अनुभव दे सकता है. रेलवे मंगलुरु-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस को बेंगलुरु तक बढ़ाने जा रहा है. इसके बाद गोवा और बेंगलुरु के बीच रेल कनेक्टिविटी को एक प्रीमियम ट्रेन का नया विकल्प मिल जाएगा।  करीब 13 घंटे की यह यात्रा शहर की भागदौड़ से निकलकर पश्चिमी घाट की हरियाली, पहाड़ी रास्तों और तटीय कर्नाटक के खूबसूरत नजारों के बीच से गुजरती है. इस सफर में रास्ते के नजारे भी यात्रा का हिस्सा बन जाते हैं. इसमें वंदे भारत जैसी नए जमाने की ट्रेन का साथ मिल जाए तो फिर क्या ही कहने. अभी बेंगलुरु और गोवा के बीच चलने वाली पारंपरिक ट्रेनों को सफर पूरा करने में करीब 15 घंटे लगते हैं।  मंगलुरु के रास्ते गोवा पहुंचेगी ट्रेन रेलवे मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक मौजूदा मंगलुरु सेंट्रल-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस को यशवंतपुर जंक्शन तक बढ़ाया जाएगा. यानी ट्रेन बेंगलुरु से चलकर मंगलुरु होते हुए गोवा के मडगांव तक जाएगी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसी महीने की शुरुआत में सांसद बृजेश चौटा और विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी को लिखे पत्र में इसकी जानकारी दी थी. अभी यह ट्रेन मंगलुरु सेंट्रल और मडगांव के बीच सप्ताह में छह दिन चलती है. गुरुवार को इसकी सेवा नहीं होती. मंगलुरु से मडगांव के बीच एक तरफ का सफर 6 घंटे से थोड़ा कम समय में पूरा होता है।  करीब 13 घंटे में पूरा होगा सफर बेंगलुरु के यशवंतपुर से गोवा के मडगांव रेलवे स्टेशनों के बीच वंदे भारत का यह सफर करीब 13 घंटे का होगा. बेंगलुरु से गोवा की दूरी करीब 700 किलोमीटर के आसपास है और इस रूट पर ट्रेन को कई पहाड़ी और घुमावदार हिस्सों से होकर गुजरना पड़ता है. अगर आपकी प्राथमिकता सिर्फ जल्दी पहुंचना है, तो फ्लाइट अब भी काफी कम समय लेती है. वहीं रात की बस से सफर करने में करीब 12 से 14 घंटे लग सकते हैं. वंदे भारत ट्रेन इन दोनों के बीच एक ऐसा विकल्प साबित होगी, जिसमें पूरा सफर दिन के समय करते हुए प्राकृतिक सुंदरता से भरे इस पूरे रास्ते को देखने का मौका मिलेगा।  वेस्टर्न घाट की खूबसूरती के दीदीर इस रूट पर सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड के बीच करीब 55 किलोमीटर का घाट सेक्शन आता है. पश्चिमी घाट का यह इलाका रेल यात्रा के सबसे खूबसूरत हिस्सों में गिना जाता है. ट्रेन यहां पहाड़ियों, हरियाली और घाटियों के बीच से गुजरती है. इलेक्ट्रिफिकेशन और रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे में सुधार के बाद इस सेक्शन पर रेल ऑपरेशन पहले से बेहतर हुआ है, लेकिन पहाड़ी रास्ता होने की वजह से यहां ट्रेन की रफ्तार मैदानी हिस्सों जैसी नहीं रहती. यही वजह है कि बेंगलुरु से गोवा की पूरी यात्रा में इस हिस्से का असर सफर के समय पर भी पड़ता है।  किन जगहों से होकर गुजरती है ट्रेन? यशवंतपुर से निकलने के बाद ट्रेन हासन, सकलेशपुर, सुब्रह्मण्य रोड और मंगलुरु क्षेत्र से होते हुए तटीय कर्नाटक की ओर बढ़ती है. इसके बाद गोवा के मडगांव तक पहुंचती है. यात्रा के दौरान रास्ता लगातार बदलता रहता है. बेंगलुरु के शहरी इलाके से निकलने के बाद हरियाली बढ़ती जाती है और पश्चिमी घाट के पहाड़ी हिस्से शुरू हो जाते हैं. इसके बाद तटीय कर्नाटक का इलाका आता है और आखिर में गोवा।  वंदे भारत से और मजेदार होगी यात्रा वंदे भारत में चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार की सुविधा मिलती है. एग्जीक्यूटिव क्लास में रोटेट होने वाली सीटें और बड़ी खिड़कियां सफर के दौरान बाहर के नजारों को देखने में मदद करेंगी. वंदे भारत एक सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रेनसेट है. इसमें अलग से इंजन नहीं लगा होता बल्कि हर कोच इंजन की तरह काम करता है. इसके चलते सफर के दौरान शोर और झटके पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में कम महसूस होते हैं. करीब 13 घंटे के दिन के सफर में यह सुविधा खासतौर पर काम आएगी, क्योंकि यात्री रास्ते के नजारों का आनंद लेते हुए आराम भी कर सकेंगे।  ट्रेन में खाने-पीने की सुविधा उपलब्ध लंबे सफर को ध्यान में रखते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों के लिए भोजन और नाश्ते की व्यवस्था रहती है. यात्रा के अलग-अलग हिस्सों में नाश्ता, भोजन और चाय जैसे विकल्प मिलते हैं. ट्रेन में बायो-वैक्यूम टॉयलेट जैसी सुविधाएं भी हैं. करीब 13 घंटे की इस यात्रा में वंदे भारत की साफ-सफाई और बैठने की सुविधा, पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में यात्रियों के लिए एक अलग अनुभव लेकर आएगी।  फ्लाइट, बस और वंदे भारत में फर्क अगर आपका मकसद बेंगलुरु से गोवा सबसे कम समय में पहुंचना है, तो फ्लाइट का मुकाबला करना वंदे भारत के लिए मुश्किल है. उड़ान का समय करीब डेढ़ घंटे हो सकता है, हालांकि एयरपोर्ट तक पहुंचने, चेक-इन और सुरक्षा जांच में लगने वाला समय अलग है. बस से सफर में करीब 12 से 14 घंटे लग सकते हैं. रात को बस से सफर करने पर पहाड़ी और घुमावदार सड़कों की वजह से कुछ यात्रियों को परेशानी भी हो सकती है. वंदे भारत का फायदा यह है कि सफर आरामदायक तरीके से दिन में पूरा होगा. साथ ही वेस्टर्न घाट और कोस्टल कर्नाटक की प्राकृतिक सुंदरता को देखने का मौका मिलेगा।  फ्लाइट के मुकाबले किराए में अंतर इस रूट पर यात्रा के लिए अलग-अलग साधनों का खर्च भी अलग है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वंदे भारत चेयर कार का किराया करीब ₹1,500 से ₹1,800 और एग्जीक्यूटिव क्लास का करीब ₹2,800 से ₹3,200 के आसपास हो सकता है. फ्लाइट का किराया तारीख और बुकिंग के समय के हिसाब से करीब ₹4,500 से ₹8,000 या उससे ज्यादा भी हो सकता है. बस का किराया करीब ₹1,200 से ₹2,500 के बीच रह सकता है. हालांकि बस और फ्लाइट का किराया यात्रा की तारीख, सीट और बुकिंग के समय के अनुसार बदल सकता है।  किसके लिए सही है ट्रेन का सफर? अगर आपके पास समय कम है और गोवा पहुंचकर ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहते हैं, तो फ्लाइट ज्यादा सुविधाजनक विकल्प हो सकती … Read more

किसान, श्रमिक, महिला और युवाओं तक पहुंचेगी योजनाएं, ‘सरकार आपके द्वार’ शिविरों पर जोर

सरकार आपके द्वार शिविरों में किसान, श्रमिक, महिला और युवा सहित सभी वर्गों पर फोकस सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का मिलेगा लाभ भोपाल सेवा सेतु अभियान- ''सरकार आपके द्वार'' कार्यक्रम के तहत विकासखंड और नगरीय क्षेत्रों में 3 और 4 अक्टूबर को आयोजित होने वाले शिविरों में हितग्राहियों को विभागवार योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ देने के लिए निर्देश दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देश अनुसार ''सरकार आपके द्वार'' कार्यक्रम में राजस्व विभाग की स्वामित्व योजना – स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026, सभी पात्र किसानों की फार्मर आई.डी. निर्माण, अविवादित नामांतरण/ बंटवारा/ सीमांकन, समाधान एक दिवसीय योजना – आय प्रमाण पत्र/ स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र/ खसरा/ नक्शा आदि, बी.पी.एल, C.M. Helpline अंतर्गत शिकायतों का मौके पर निराकरण, प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना एवं मुख्यमंत्री किसान सम्मान योजना का लाभ दिया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), रोजगार पंजीकरण / जॉब कार्ड और रोजगार की मांग एवं प्रधानमंत्री पोषण अभियान शामिल है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन होगा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi) – रेहड़ी-पटरी वालों (स्ट्रीट वेंडर्स) के लिए ऋण/आवेदन में सहायता एवं अन्य योजनायें भी लाभ शामिल है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) – राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी/ई-केवाईसी/स्थिति से संबंधित सहायता एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना शामिल है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग की मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना का लाभ भी शामिल है। कृषि और किसान कल्याण विभाग की पीएम प्रणाम (PM PRANAM), नैनो उर्वरक एवं किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना का लाभ शामिल है। मत्स्य पालन विभाग की किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) शामिल है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की जल जीवन मिशन (मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल योजना / नल-जल योजना) शामिल है वित्त विभाग की जन धन योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, सुरक्षा बीमा योजना एवं अटल पेंशन योजना का लाभ शामिल है। शिविरों में श्रम विभाग की ई-श्रम-यूएएन (UAN) / ई-श्रम कार्ड पंजीकरण, प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन (PM-SYM) – पेंशन पंजीकरण, संबल योजना एवं भवन संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के हितग्राहियों का सत्यापन एवं पंजीयन शामिल है। कौशल विकास और उद्यमिता विभाग की पीएमकेवीवाई (PMKVY) / स्किल इंडिया- कौशल प्रशिक्षण के लिए स्वैच्छिक पंजीकरण एवं नेशनल करियर सर्विस (NCS) जॉब सीकर पंजीकरण / जॉब मैचिंग शामिल है। कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना एवं उर्जा विभाग/उर्जा विकास निगम की पीएम सूर्य घरः मुफ्त बिजली योजना आवेदन में सहायता शामिल है। महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) एवं सी.एम. हेल्पलाइन शामिल है। सामाजिक न्याय विभाग की मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना, वृद्धावस्था पेंशन, कल्याणी पेंशन, दिव्यांग पेंशन एवं दिव्यांग प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, नशामुक्ति अभियान एवं अन्य योजनाऐं शामिल है। स्कूल शिक्षा विभाग की मुख्यमंत्री स्कूटी योजना (फ्री ई-स्कूटी योजना), विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्ति योजनाएं एवं अन्य योजनाऐं शामिल है। उच्च शिक्षा विभाग की गांव की बेटी योजना, सहकारिता विभाग की KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) शामिल है। आदिवासी जिलों के लिए अतिरिक्त फोकस योजनाएं अंतर्गत सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में नामांकन, छात्रवृत्ति योजनाएं, वन अधिकार स्वामित्वः व्यक्तिगत और सामुदायिक भूमि एवं वन धन विकास केंद्र : स्व-सहायता समूहों का संगठन का लाभ शामिल है।  

सोयाबीन किसानों के लिए बड़ी खबर, 3 अक्टूबर से पंजीयन; खाते में भेजे जाएंगे ₹1

भोपाल   मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसानों के लिए जरूरी खबर सामने आई है। MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 के तहत खरीफ वर्ष 2026 यानी विपणन वर्ष 2026-27 में सोयाबीन फसल के लिए किसानों का पंजीयन 3 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। किसान 17 अक्टूबर 2026 तक अपना पंजीयन करा सकेंगे। पंजीयन की प्रक्रिया ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से निर्धारित नियमों के अनुसार की जाएगी। भावांतर योजना के तहत सोयाबीन किसानों को उनकी उपज के भाव में अंतर की भरपाई के लिए भुगतान किया जाना है। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को निर्धारित समय सीमा में पंजीयन कराना जरूरी होगा। किसानों की सुविधा के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पंजीयन केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 के तहत सोयाबीन किसानों का पंजीयन 3 अक्टूबर से शुरू होकर 17 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। यानी किसानों के पास पंजीयन पूरा करने के लिए करीब दो सप्ताह का समय रहेगा। प्रशासन की ओर से किसानों से अपील की गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते अपना पंजीयन करा लें। पंजीयन के लिए किसानों को ई-उपार्जन पोर्टल पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसके अलावा राज्य में बनाए गए पंजीयन केंद्रों पर जाकर भी किसान आवश्यक दस्तावेजों के साथ रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। MP Soybean Registration 2026 कहां कराया जा सकता है? MP Soybean Registration 2026 के लिए किसानों को कई विकल्प दिए गए हैं। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों पर किसान निःशुल्क पंजीयन करा सकेंगे। इसके अलावा सहकारी समितियों और सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों पर भी किसानों के लिए मुफ्त रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को अपने नजदीकी केंद्र पर पंजीयन कराने में सुविधा मिलेगी। किसान चाहें तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आधिकारिक ई-उपार्जन पोर्टल पर किसान पंजीयन और उपार्जन से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध हैं। निजी केंद्रों पर पंजीयन के लिए कितना शुल्क लगेगा? MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 के तहत किसान एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC, लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे से भी पंजीयन करा सकते हैं। इन केंद्रों पर प्रति पंजीयन अधिकतम 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालय और निर्धारित सहकारी केंद्रों पर पंजीयन निःशुल्क कराया जा सकेगा। किसानों को पंजीयन कराने से पहले यह जरूर देख लेना चाहिए कि केंद्र पर निर्धारित शुल्क से अधिक राशि तो नहीं ली जा रही है। MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 पंजीयन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं? MP Soybean Registration 2026 के दौरान किसानों के भूमि संबंधी दस्तावेज, आधार कार्ड और अन्य फोटो पहचान पत्रों का सत्यापन किया जाएगा। इसलिए किसान पंजीयन केंद्र पर जाने से पहले अपने जरूरी दस्तावेज तैयार रखें। भूमि रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और आधार कार्ड की जानकारी सही होना जरूरी है। नाम या अन्य जानकारी में अंतर होने पर पंजीयन प्रक्रिया में परेशानी आ सकती है। किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि वे अपना मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी पहले से जांच लें, ताकि पंजीयन के दौरान गलत जानकारी दर्ज न हो। 7.10 लाख किसानों ने कराया था पंजीयन, 1476 करोड़ का भुगतान वर्ष 2025-26 में भावांतर योजना के तहत 7.10 लाख किसानों ने पंजीयन कराया था। इनमें से 16.95 लाख टन सोयाबीन खरीदा गया और 1476 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। इस साल 7 से 10 लाख किसानों के पंजीयन और करीब 20 लाख टन सोयाबीन खरीदी का अनुमान है। पंजीयन ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालयों के सुविधा केंद्र और सहकारी समितियों व विपणन संस्थाओं के केंद्रों पर निशुल्क होगा। एमपी ऑनलाइन, सीएससी कियोस्क, लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे से अधिकतम 50 रुपए शुल्क देकर भी पंजीयन कराया जा सकेगा। सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों का पंजीयन केवल सहकारी समितियों में होगा। इनका राजस्व विभाग 100% सत्यापन करेगा। पंजीयन से पहले बैंक खाते और दस्तावेजों की कराएं जांच सोयाबीन के भावांतर पंजीयन से पहले किसान बैंक खाते को आधार और एक्टिव मोबाइल नंबर से लिंक करा लें। मोबाइल नंबर या बायोमेट्रिक अपडेट के लिए जिला/तहसील या डाकघर के आधार केंद्र पर जाएं। पंजीयन के दौरान भूमि संबंधी दस्तावेज, आधार कार्ड और आईएफएससी कोड सही दर्ज कराएं। आधार वेरिफिकेशन होगा अनिवार्य MP Soybean Bhavantar Yojana 2026 में पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का सत्यापन जरूरी होगा। आधार का वेरिफिकेशन आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आने वाले OTP या बायोमेट्रिक डिवाइस के माध्यम से किया जा सकता है। पंजीयन तभी मान्य होगा जब किसान के भू-अभिलेख और खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। यदि दोनों जगह नाम में अंतर पाया जाता है तो किसान को तहसील कार्यालय से सत्यापन कराना होगा। सत्यापन के बाद ही पंजीयन को मान्य किया जाएगा। इसलिए किसानों को पंजीयन कराने से पहले अपने आधार और भूमि रिकॉर्ड में दर्ज नाम की जांच कर लेना चाहिए। बैंक खाते की जानकारी भी सही रखें मध्य प्रदेश सोयाबीन भावांतर योजना 2026 के तहत भुगतान के लिए किसान के आधार लिंक बैंक खाते को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि आधार लिंक खाते में भुगतान करने में किसी तरह की परेशानी आती है तो पंजीयन के दौरान उपलब्ध कराए गए बैंक खाते में भुगतान किया जा सकता है। पंजीयन के समय किसान को अपना बैंक खाता नंबर और IFSC कोड देना होगा। बैंक खाता सक्रिय होना चाहिए और उसकी जानकारी सही दर्ज होनी चाहिए। अक्रियाशील बैंक खाते और संयुक्त बैंक खाते स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा Fino, Airtel और Paytm Bank के खाते भी पंजीयन के लिए मान्य नहीं होंगे। आधार लिंक बैंक खाते का होगा सत्यापन पंजीयन के दौरान किसान के आधार लिंक बैंक खाते की जांच के लिए मध्य प्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/JIT पोर्टल के माध्यम से 1 रुपये का ट्रांजेक्शन किया जाएगा। इसका उद्देश्य बैंक खाते की जानकारी का सत्यापन करना है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने बैंक खाते और मोबाइल नंबर को आधार से लिंक रखें। यदि आधार में मोबाइल नंबर … Read more

भोपाल में तैयार हो रहा MP BJP का नया मुख्यालय, 3 ब्लॉक में दिखेगा हाईटेक अंदाज

भोपाल  मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जल्द ही अपना नया और अत्याधुनिक प्रदेश मुख्यालय मिलने वाला है। भोपाल के दीनदयाल परिसर में बन रही इस बहुमंजिला इमारत का काम अब अपने अंतिम चरण में है। इंटीरियर और फिनिशिंग का काम पूरा होने में करीब चार महीने का समय और लगेगा। माना जा रहा है कि पार्टी फरवरी 2027 में इस भव्य भवन में आधिकारिक रूप से गृह प्रवेश कर लेगी। इसके साथ ही, नए संगठन महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी के रहने के लिए दीपावली तक एक फ्लोर पूरी तरह से तैयार कर लिया जाएगा। समर्पण दिवस पर हो सकता है गृह प्रवेश     पुराने दफ्तर की तरह ही यह नया कार्यालय भी जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय को समर्पित होगा। सूत्रों की मानें तो 11 फरवरी को पंडित जी की पुण्यतिथि होती है, जिसे भाजपा 'समर्पण दिवस' के रूप में मनाती है (इस दिन कार्यकर्ता पार्टी फंड में अपना योगदान देते हैं)। पूरी संभावना है कि इसी दिन या इसके एक-दो दिन पहले नए दफ्तर का लोकार्पण किया जाए। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी कुछ दिन पहले हुई एक समीक्षा बैठक में दीपावली तक कम से कम दो फ्लोर रहने और काम करने लायक तैयार करने के निर्देश दिए हैं।  तीन खास हिस्सों में बंटा होगा पूरा परिसर यह विशाल कार्यालय मुख्य रूप से तीन अलग-अलग ब्लॉकों में विभाजित किया गया है, जिनके नाम 'संकल्प', 'समर्पण' और 'सहयोग' रखे गए हैं…     संकल्प (मुख्य कार्यालय): यह 11 से 12 मंजिला मुख्य प्रशासनिक इमारत होगी, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष का कक्ष होगा। इसके अलावा यहां मीडिया और सोशल मीडिया का वार रूम तथा उच्च स्तरीय बैठकों के लिए कक्ष बनाए जा रहे हैं।     समर्पण (पदाधिकारी निवास): चार मंजिला यह ब्लॉक प्रदेश और केंद्रीय नेताओं के ठहरने के लिए होगा। इसमें अतिथियों के लिए योग और अध्ययन कक्ष की भी सुविधा होगी।     सहयोग (प्रशासनिक ब्लॉक): सात मंजिला इस हिस्से का उपयोग कर्मचारियों के कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था के संचालन के लिए किया जाएगा। हाई-टेक सुविधाओं और ग्रीन एनर्जी से लैस होगा नया दफ्तर     लगभग 1.5 एकड़ (65,000 वर्ग फुट) जमीन पर बन रहे इस नए प्रदेश मुख्यालय का कुल बिल्ट-अप एरिया 1.15 लाख से 1.25 लाख वर्ग फुट के बीच होगा। इसे पूरी तरह से भारतीय वास्तु शास्त्र और 'ग्रीन एनर्जी' के कॉन्सेप्ट को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।  

मिठाई खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, UP में खुली मिठाइयों पर होगी एक्सपायरी डेट

सहारनपुर  पितृ पक्ष समाप्त होते ही त्योहारी सीजन शुरू होने जा रहा है। नवरात्र के बाद करवाचौथ, अहोई अष्टमी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाईदूज जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में मिठाइयों की गुणवत्ता और उनकी सुरक्षित उपयोग अवधि को लेकर अब व्यवस्था और सख्त की जा रही है। 15 अक्तूबर से खुली मिठाइयों पर भी निर्माण तिथि (मैन्युफैक्चरिंग डेट) और उपयोग की अंतिम तिथि (यूज बाय डेट) अंकित करना अनिवार्य होगा। खुली मिठाइयों पर भी लिखनी होगी एक्सपायरी डेट अभी तक शहर की बड़ी से लेकर छोटी मिठाई की दुकानों पर अधिकांश मिठाइयां खुले में रखकर बेची जाती हैं। ग्राहक जिस मिठाई की जितनी मात्रा मांगता है, उसे उसी समय तौलकर डिब्बे में पैक कर दिया जाता है। इस तरह की मिठाइयों के पैकेट या डिब्बे पर आमतौर पर निर्माण और उपयोग की तारीख दर्ज नहीं होती। इसके कारण ग्राहक को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि मिठाई कब तैयार की गई थी और उसे कितने समय तक सुरक्षित रूप से खाया जा सकता है। त्योहारी सीजन में यह व्यवस्था और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि इस दौरान दुकानों पर मिठाइयों की बिक्री बढ़ने के साथ बड़ी मात्रा में मिठाइयों का उत्पादन भी होता है। नई व्यवस्था के तहत दुकानदारों को खुली मिठाइयों के संबंध में भी निर्माण और उपयोग की तिथि की जानकारी प्रदर्शित करनी होगी। इससे ग्राहकों को मिठाई खरीदते समय उसकी ताजगी और उपयोग की अवधि के बारे में जानकारी मिल सकेगी। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज कुमार गुप्ता ने बताया कि त्योहारी सीजन में मिठाई की दुकानों पर निगरानी बढ़ाई जाती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद दुकानदारों के लिए तारीख संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। इसका उद्देश्य मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना और ग्राहकों को जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि नवरात्र के बाद लगातार त्योहार होने के कारण मिठाई कारोबारियों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। दीपावली और भाईदूज के आसपास मिठाइयों की बिक्री सबसे अधिक बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में दुकानदारों को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयारी करनी होगी। वहीं ग्राहकों को भी मिठाई खरीदते समय निर्माण और उपयोग की तिथि की जानकारी अवश्य देखनी चाहिए।