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आज का राशिफल 3 नवंबर: महादेव की कृपा से चमकेगी इन 5 राशियों की किस्मत, जानें भविष्यफल

मेष राशि आज के दिन ऑफिस में अपने सीनियर्स को अपनी परफॉर्मेंस से खुश रखें। सही लाइफस्टाइल मेंटेन करने से हेल्दी रहें। आज धन लाभ होगा। रिश्ते को रोमांटिक बनाए रखें। आपका दिन अच्छा रहेगा। वृषभ राशि आज के दिन कुछ वृषभ राशि वाले एक नए रिश्ते में कदम रख सकते हैं। ऑफिस की पॉलिटिक्स से बचें। आगे बढ़ने के लिए प्रोफेशनल मौकों का इस्तेमाल करें। आज हो सकेगा कि सेहत और पैसा दोनों आपका साथ नहीं दें। मिथुन राशि आज के दिन एक नई लव लाइफ दिन का मुख्य आकर्षण है। ऑफिस में अपनी काबिलियत साबित करें, क्योंकि आपको नए मौके मिल सकते हैं। पैसा संभालते समय सावधान रहें। छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याएं रहेंगी। कर्क राशि आज के दिन प्यार में मशरूफ रहें। इससे आपको अच्छा महसूस होगा। आपकी प्रोफेशनल प्रोडक्टिविटी भी बेहतर होगी। कर्क राशि के कुछ जातकों को इन्वेस्टमेंट में सफलता मिलेगी। आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी। सिंह राशि आज के दिन काम में अपना बेस्ट देने की आपकी इच्छा आपके करियर ग्रोथ में मदद करेगी। धन और स्वास्थ्य के मामले में दिन खास रहेगा। कम्युनिकेशन को लेकर परेशानी हो सकती है। कन्या राशि आज के दिन आपकी ईमानदारी का आपके रोमांटिक रिश्ते पर गहरा असर पड़ेगा। काम की जगह पर चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें। आज सुरक्षित पैसों के निवेश को प्राथमिकता दें। तुला राशि आज के दिन सेहत से समझौता न करें। आपकी सेहत सामान्य है, लेकिन अपने खान-पान का ध्यान रखें। नौकरी में जरूरी काम हाथ में लें। रिलेशनशिप में अपने पार्टनर के साथ समय बिताना जारी रखें। वृश्चिक राशि आज के दिन रोमांस से जुड़े मामलों को संभालें। कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां लें। फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट में सावधान रहें। आज सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है। आज एक खुशहाल पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ का आनंद लें। धनु राशि आज के दिन रिलेशनशिप के मामले में कई दिक्कतें आ सकती है। ऑफिस में आपका रवैया बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। धन की कमी आज के दिन नहीं रहेगी। आपको ज्यादा से ज्यादा सेविंग्स करने के ऑप्शन दिखेंगे। मकर राशि आज के दिन अपने रिलेशन में पार्टनर के साथ असहमति को सुलझाएं और बेहतरीन प्रोफेशनल नतीजे देते रहें। आज के दिन पैसे को समझदारी से इन्वेस्ट करें। कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या भी आपको परेशान नहीं करेगी। कुंभ राशि आज के दिन रोमांस से जुड़े मामलों को संभालें। ऑफिस में आज के दिन नई जिम्मेदारियां लें। फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट के मामले में सावधान रहें। आज सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है। मीन राशि आज के दिन अपने रिलेशनशिप को रोमांचक और प्रोडक्टिव बनाए रखें। आज के दिन पॉजिटिव सोच के साथ काम के तनाव को दूर करें। समृद्धि होने से स्मार्ट इन्वेस्टमेंट की भी अनुमति मिल सकती है।

राज्योत्सव में बस्तर के स्वाद का जलवा, प्राकृतिक, पौष्टिक व स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों में लोगों की विशेष रूचि

रायपुर राजधानी नवा रायपुर में चल रहे राज्योत्सव 2026 में कमर्शियल हैंगर में लगा बस्तर फूड्स का स्टॉल लोगों को खूब पसंद आ रहा है। यहाँ प्राकृतिक, पौष्टिक व स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों में लोगों की विशेष रूचि देखने को मिल रही है। बस्तर का स्वाद घर ले जाएं थीम पर लगे इस स्टॉल पर बस्तर के जंगलों के शुद्ध आदिवासी उत्पादों की बिक्री हो रही है। कोंडागांव से आई स्टॉल की संचालिका  उर्मिला नायर ने बताया कि यहाँ महुआ से बने उत्पादों की सबसे ज्यादा मांग है। जिसमें महुआ कुकीज, महुआ लड्डू, महुआ चाय, मधुका निब्स, जंगली शहद, तीखुर पाउडर, ढेंकी चावल, ब्राउन राइस, ब्राउन राइस फ्लेक्स और मसालेदार गुड़ पाउडर शामिल हैं। इसके अलावा जवांफूल चावल, बासाभोग चावल, काला चावल, कांगनी मिलेट, कुटकी मिलेट, रागी फ्लेक्स और गेहूं फ्लेक्स जैसे मोटे अनाज भी उपलब्ध हैं। रायपुरा की कौशिल्या यादव ने की तारीफ स्टॉल पर पहुंची रायपुरा निवासी  कौशिल्या यादव ने उत्पादों का स्वाद लेकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि महुआ कुकीज और ब्राउन राइस का स्वाद बहुत ही अलग और प्राकृतिक है। आजकल बाजार में मिलावटी चीजें मिल रही हैं, लेकिन यहाँ सभी उत्पाद शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक हैं। बस्तर के आदिवासी उत्पादों को ऐसा मंच मिलना बहुत अच्छी बात है। उर्मिला नायर ने बताया कि ये सभी उत्पाद कोंडागांव के आदिवासी किसानों द्वारा तैयार किए जाते हैं और पूरी तरह से जैविक हैं।

‘चेंदरू द्वार’ से ‘संवरते छत्तीसगढ़’ तक : राज्योत्सव में वन प्रदर्शनी सुना रही हरियाली, विरासत और आजीविका की कहानी

रायपुर  छत्तीसगढ़ के 26वें स्थापना दिवस पर नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव स्थल में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ आदिवासी संस्कृति, ग्रामीण आजीविका और आत्मनिर्भरता की पहल एक साथ देखने को मिल रही हैं। प्रदर्शनी का मुख्य द्वार इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर के प्रसिद्ध चेंदरू द्वार की तर्ज पर बनाया गया है। इसमें बस्तर के आदिवासी युवक चेंदरू और बाघ की मित्रता को दर्शाया गया है, जो मानव और वन्यजीव के सह-अस्तित्व का प्रतीक है। ‘संवरता छत्तीसगढ़’ थीम के अंतर्गत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की उपलब्धियां प्रदर्शित की गई हैं। विभाग के अनुसार वर्ष 2024 में लक्ष्य से 140 प्रतिशत अधिक 3.50 करोड़ और वर्ष 2025 में लक्ष्य से 215 प्रतिशत अधिक 3.55 करोड़ पौधे रोपे गए। किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत 36,896 किसानों ने अपनी 62,441 एकड़ निजी भूमि पर 3.67 करोड़ पौधे लगाए हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने के अवसर भी बने हैं। ‘बदलता बस्तर’ पैनल में क्षेत्र में आए बदलाव और आजीविका संवर्धन के प्रयासों को दर्शाया गया है। इसके तहत 572 देवगुड़ियों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार किया गया है। मनरेगा के माध्यम से 21.67 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ है। वनोपज संग्रहण से ग्रामीणों को सीधा लाभ मिल रहा है। कांकेर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 35 जिप्सियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे लगभग 200 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। संयुक्त वन प्रबंधन एवं रोजगार स्टॉल पर बांस से बने घर, नाव, मछली, लालटेन, मंदिर, फूलदान और सजावटी उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। ये उत्पाद ग्रामीण कारीगरों की कला और कौशल को सामने लाते हैं। वन धन केंद्रों में तैयार शहद, आंवला और अन्य उत्पाद भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। औषधीय पादप बोर्ड की ‘घर की बाड़ी में औषधीय पौधों का रोपण’ योजना के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आय के अवसरों से जोड़ने की जानकारी दी जा रही है। बोर्ड के अनुसार बाड़ी में सिंगी और सतावर जैसे पौधे लगाकर महिलाएं सालाना 20 से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर सकती हैं और इसका लाभ 20 वर्षों तक मिल सकता है। धमतरी जिले के 27 गांवों में पायलट परियोजना के तहत 1.21 लाख पौधे लगाए गए हैं। छत्तीसगढ़ हर्बल्स स्टॉल पर सफेद मूसली चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, आंवलकी चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू, महाभृंगराज तेल और एलोवेरा साबुन जैसे उत्पाद प्रदर्शित हैं। कांगेर घाटी, तीरथगढ़ जलप्रपात और ग्रामीण तालाब के मॉडल भी दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। प्रदर्शनी देखने पहुंचे ग्राम मरोद के  त्रिवेंद्र साहू और  रवि निर्मलकर ने कहा कि वन विभाग की प्रदर्शनी देखकर लगा, जैसे पूरे छत्तीसगढ़ का जंगल एक ही जगह सिमट आया हो। बांस की कलाकृतियां, औषधीय पौधों की जानकारी और हर्बल उत्पाद बहुत उपयोगी हैं। उन्होंने जंगलों के संरक्षण के साथ ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने की पहल को सराहनीय बताया।

सफेद, रंगीन, पीला मैसूर कोसा सहित रेशम के विभिन्न प्रकार बने आकर्षण का केंद्र

रायपुर राज्योत्सव परिसर स्थित शिल्पग्राम में ग्रामोद्योग विकास विभाग के स्टॉल पर रेशम कीटपालन की प्रक्रिया समझने बड़ी संख्या में किसान एवं आम नागरिक पहुंच रहे हैं। प्राकृतिक रेशम कीड़ों को देखने के लिए भी लोगों में खासा उत्साह दिख रहा है। स्टॉल में रेशम के विभिन्न प्रकारों और उनसे तैयार होने वाले धागों को प्रदर्शित किया गया है। इनमें मलबरी सफेद कोया, मलबरी रंगीन कोया, मलबरी पीला मैसूर, मलबरी सफेद रिल्ड, टसर स्पन धागा, टसर बाना धागा, डाबा पालित कोसा और रैली साबू बीज प्रमुख हैं। इन धागों का उपयोग कोसा सिल्क, मलबरी सिल्क के साथ-साथ बनारसी एवं कांजीवरम जैसी पारंपरिक साड़ियों के निर्माण में किया जाता है। लोग रेशम के प्रकारों, उसके उत्पादन और वस्त्र निर्माण की प्रक्रिया को करीब से जान-समझ रहे हैं। स्टॉल में टसर धागा विक्रय केंद्र भी है, जहां प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशेष सिल्क उत्पाद रखे गए हैं। इनमें सारंगढ़ से समलेश्वरी मलबरी सिल्क एवं समलेश्वरी टसर सिल्क, सरगुजा से महामाया सिल्क, जगदलपुर से दंतेश्वरी सिल्क, कांकेर से अरण्य सिल्क, महासमुंद से खल्लारी सिल्क, रायगढ़ से फॉरेस्ट गोल्ड सिल्क, गरियाबंद से गंडेश्वर सिल्क और जांजगीर-चांपा से प्रसिद्ध चांपा सिल्क के रेशम धागे और अन्य सामग्री शामिल हैं। साथ ही टसर बीजागर और स्पिनिंग मशीन के जरिए धागाकरण की प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन भी किया जा रहा है। किसानों को ग्रामोद्योग विकास विभाग की योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है। इसी क्रम में लोग निजी क्षेत्र में शहतूत की खेती और रेशम कीटपालन को बढ़ावा देने के लिए संचालित नवीन शहतूत रेशम बाड़ी योजना के बारे में जान रहे हैं। इसके तहत निजी भूमि पर एक एकड़ में शहतूत पौधरोपण एवं कीटपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना में पौधरोपण एवं संधारण, कीटपालन भवन एवं उपकरण व सिंचाई सुविधाओं के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। साथ ही पौधरोपण के बाद किसानों को शहतूत की खेती और रेशम कीटपालन की तकनीकी जानकारी देने के लिए एक माह का निःशुल्क प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। इस योजना का उद्देश्य लघु एवं सीमांत किसानों को शहतूत रेशम उत्पादन से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार के अवसर विकसित करना है। गौरतलब है कि शहतूत रेशम कीटपालन कृषि आधारित कुटीर उद्योग है, जिसका अंतिम उत्पाद रेशम है। इसे खेती-किसानी के साथ आसानी से अपनाया जा सकता है। श्रम आधारित होने के कारण इसमें विभिन्न स्तरों पर रोजगार का सृजन होता है। परिवार आधारित उद्योग होने से यह ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का भरोसेमंद साधन के साथ ही कृषि क्षेत्र की प्रमुख नगदी फसलों में शामिल है, जो मात्र एक माह में ही नगद आमदनी उपलब्ध कराती है।

अपने हुनर से कारीगरों ने बुने हैं खुबसूरत वस्त्र..

रायपुर भारतीय हथकरघा की बहुमूल्य धरोहर मोहकता एवं वैभव लिए हुए अभिव्यक्त हो रही है। जिसकी एक बानगी राज्योत्सव मैदान नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव में दिखाई दे रही है। अपने हुनर से कारीगरों ने बुने हैं खूबसूरत वस्त्र, जिनके उम्दा रंग संयोजन, गुणवत्ता के नागरिक कायल हो रहे हैं। कपड़ों की बुनाई की निपुणता एवं विविधता देखते ही बन रही है। यहाँ वस्त्रों का स्टॉल जनमानस के आकर्षण का केन्द्र है। राज्योत्सव में इन कारीगरों को अपने हुनर और कौशल के लिए एक बेहतरीन अवसर मिला है। यहाँ असम, मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश एवं अन्य राज्यों से कारीगर अपने बुने वस्त्र लेकर पहुँचे है।  राज्योत्सव के वस्त्रों के स्टॉल में देश के विभिन्न प्रान्तों की लोकप्रिय साड़ियां बिक्री के लिए उपलब्ध है। जिनमें माहेश्वरी, चंदेरी तो वहीं मूगा कॉटन, काथा वर्क, मूगा सिल्क, मसलिन प्योर कॉटन की खूबसूरत साड़ियां उपलब्ध हैं। मधुबनी प्रिंट से सुसज्जित साड़ियों का सौंदर्य देखते ही बन रहा है। इसके साथ ही बनारसी, पोचमपल्ली, कोसा, प्रिंट सिल्क, बटिक सिल्क, भागलपुरी एवं विविध प्रकार की साड़ियां उपलब्ध हैं। सुंदर वस्त्रों में इंद्रधनुषी छटा बिखरी दिखाई दे रही है। फैबरिक्स में साड़ी, दुपट्टा, स्कार्फ जैसे वस्त्र किफायती कीमतों पर यहाँ बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। मध्यप्रदेश, खंडवा से आए  तेज बहादुर सिंह ने बताया कि वे प्रतिवर्ष राज्योत्सव आते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आने पर बहुत अच्छा लगता है। उनके उत्पादों को यहाँ अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। उनके स्टॉल में माहेश्वरी, चंदेरी, मधुबनी प्रिंट की साड़ियां उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि शासन हथकरघा कारीगरों को प्रोत्साहित कर रही है। कुछ दिनों पहले वे मार्बल प्रिंट का प्रशिक्षण लेने पांडिचेरी गए थे। मधुबनी प्रिंट सीखने के लिए वे नेपाल गए थे। डोली, शहनाई से सजी धजी मधुबनी, मिथला आर्ट से बनी बेहतरीन साड़ियों का संग्रहण उनके स्टाल में है। वहीं खूबसूरत दुपट्टे भी उपलब्ध हैं। पश्चिम बंगाल, कलकत्ता, वर्धमान से आए हसीबुल ने बताया कि उनके उत्पादों की अच्छी बिक्री हो रही है। उनके स्टॉल में काथा वर्क, असम का मूगा सिल्क, मूगा कॉटन, लिनन कॉटन की साड़ियां उपलब्ध हैं। बिहार से आए मिथलेश कुमार ने बताया कि उनके यहाँ मधुबनी प्रिंट के साथ ही केला रेशम, कॉटन सिल्क वर्ली प्रिंट, बैम्बू सिल्क की साड़ियां वेरायटी में उपलब्ध हैं। पश्चिम बंगाल, कलकत्ता से आए शादिर अंसारी ने बताया कि यहाँ छत्तीसगढ़ में बहुत अच्छा लग रहा है। यहाँ काथा वर्क, जामदानी, पेंच वर्क, असम सिल्क, डांडिया जैसी साड़ियां उपलब्ध हैं। बुनकरों के लिए बुनकारी आजीविका का साधन है। कुटीर उद्योग के तौर पर बुनकरों को शासन द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है। परंपरागत कारीगरी के संरक्षण के साथ ही उनके लिए मार्केट उपलब्ध कराने के लिए कार्य किए जा रहे हैं।

बनाना हमारा संकल्प – राज्यपाल रमेन डेका छत्तीसगढ़ ने विकास के 26 वर्षों की यात्रा पूरी कर जिम्मेदारियों और नई संभावनाओं के दौर में किया प्रवेश- राज्यपाल

रायपुर  राज्यपाल  रमेन डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज विकास के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़ा है। छत्तीसगढ़ राज्य ने अपने गठन के 26 वर्षों की यात्रा पूरी कर ली है और अब नई जिम्मेदारियों, संभावनाओं तथा संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को सुशासन में आदर्श, अर्थव्यवस्था में सशक्त और सामाजिक समरसता में अग्रणी राज्य बनाने के लिए सभी नागरिकों की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के युवाओं, महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और जनजातीय समाज के सामूहिक प्रयासों से छत्तीसगढ़ विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।        राज्यपाल  डेका आज नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव-2026 के द्वितीय दिवस समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह अवसर छत्तीसगढ़ की गौरवशाली विकास यात्रा का स्मरण करने के साथ भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का भी है। राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का सपना देखने वाले सभी पुरखों को नमन करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न  अटल बिहारी वाजपेयी का विशेष स्मरण किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ का गठन अनेक आशाओं और चुनौतियों के बीच हुआ था। पिछले ढाई दशकों में प्रदेश ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और अधोसंरचना सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकास का मजबूत आधार तैयार किया है। बस्तर में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण राज्यपाल  डेका ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास की पहली आवश्यकता शांति और सुरक्षा है। छत्तीसगढ़ में विशेष रूप से बस्तर अंचल में शांति स्थापना और विकास के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। कभी हिंसा और कठिन परिस्थितियों से प्रभावित रहे क्षेत्रों में आज सड़क, बिजली, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है, स्कूल खुल रहे हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित हो रही हैं और आजीविका मिशन के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आधुनिक सुविधाओं का लाभ अब उन क्षेत्रों तक पहुंच रहा है, जहां पहले सामान्य नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती थी।          राज्यपाल ने सुरक्षा बलों के साहस, समर्पण और बलिदान को नमन करते हुए हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और विकास का वातावरण मजबूत होने से स्थानीय नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। इस परिवर्तन को स्थायी बनाने के लिए सुरक्षा के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के अवसरों का निरंतर विस्तार आवश्यक है। जल, जंगल और खनिज संपदा का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी राज्यपाल  डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां की वन संपदा, नदियां, जलस्रोत और खनिज संसाधन प्रदेश की बड़ी ताकत हैं। विकास की गति बढ़ाने के साथ इन संसाधनों का संरक्षण करना भी हमारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने विशेष रूप से जल संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आने वाले समय में जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इसलिए प्रदेश में जल संरक्षण को जनभागीदारी आधारित अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। नदियों, तालाबों, आर्द्रभूमियों और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और सतत विकास की अवधारणा अपनाकर ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है। शिक्षा, तकनीक और कौशल विकास से तैयार होगी नई पीढ़ी राज्यपाल ने कहा कि किसी भी परिवार और राज्य का भविष्य उसके बच्चों और युवाओं पर निर्भर करता है। इसलिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीक और कौशल विकास में निवेश करना अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ और जगरगुंडा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में शैक्षिक नगर विकसित करने की योजना राज्य के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल है। जिन क्षेत्रों में कभी विद्यालय तक पहुंचना कठिन था, वहां आधुनिक शिक्षा की सुविधाएं विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसरों से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था राज्यपाल  डेका ने कहा कि आजीविका किसी भी परिवार की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में किए जा रहे प्रयास छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में सेमीकंडक्टर इकाई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डाटा सेंटर पार्क जैसी परियोजनाएं आधुनिक औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। राज्यपाल ने कहा कि रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ युवाओं तक पहुंचाया जा रहा है। मुद्रा योजना, स्टार्टअप और कौशल विकास से संबंधित कार्यक्रम युवाओं को उद्यमशीलता की ओर प्रोत्साहित कर रहे हैं। प्रदेश में स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों के विकास से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि शासन का मूल दायित्व नागरिकों को सुरक्षा, शांति, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार इन क्षेत्रों में निरंतर कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ को विकास के उच्च स्तर तक पहुंचाने के लिए सभी क्षेत्रों में समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। छत्तीसगढ़ की असली ताकत किसान, श्रमिक और जनजातीय समाज राज्यपाल  डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की समृद्ध संस्कृति, मेहनतकश नागरिकों और प्राकृतिक संपदा से है। प्रदेश के किसान, मजदूर और जनजातीय समाज ने अपने परिश्रम, परंपराओं और जीवन मूल्यों से राज्य की विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि विकास का वास्तविक उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में ग्रामीण क्षेत्रों, दूरस्थ अंचलों और वंचित समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है। छोटे-छोटे प्रयासों से आएगा समाज में बड़ा परिवर्तन राज्यपाल  डेका ने प्रदेशवासियों से विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में ऐसा कोई न कोई कार्य अवश्य … Read more

मिट्टी की कलाकृतियों में झलक रही छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और प्राचीन परंपरा

रायपुर राज्योत्सव 2026 के शिल्प ग्राम में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला, पारंपरिक शिल्प और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक देखने को मिल रही है। यहां मिट्टी से बनी कलाकृतियां, पारंपरिक बर्तन, आकर्षक मूर्तियां और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुएं लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। शिल्प ग्राम में पहुंचने वाले लोग इन कलाकृतियों को न केवल उत्सुकता से देख रहे हैं, बल्कि इनके निर्माण की परंपरा और पुराने समय में इनके उपयोग के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं। शिल्प ग्राम में प्रदर्शित मिट्टी के पारंपरिक बर्तन लोगों को उस दौर की याद दिला रहे हैं, जब मिट्टी से बने घड़े, सुराही, मटके, कुल्हड़, हांडी और अन्य घरेलू वस्तुएं दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हुआ करती थीं। आधुनिक सुविधाओं और नए जमाने के बर्तनों के बीच इन पारंपरिक वस्तुओं को देखकर नई पीढ़ी भी यह जानने के लिए उत्सुक नजर आ रही है कि पहले के समय में लोग किस तरह मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करते थे। इन कलाकृतियों के माध्यम से लोग हमारी पुरानी जीवनशैली, स्थानीय कारीगरों के हुनर और पारंपरिक ज्ञान से रूबरू हो रहे हैं। आगामी दीपावली पर्व को देखते हुए शिल्प ग्राम में मिट्टी के दीयों और कलात्मक मूर्तियों का विशेष आकर्षण है। पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ ही विभिन्न आकारों और आकर्षक रूपों में तैयार की गई मूर्तियां लोगों मुग्ध कर रही हैं। पर्यावरण के अनुकूल और स्थानीय कारीगरों के हाथों से तैयार इन वस्तुओं के प्रति लोगों की रूचि यह जाहिर करती है कि आधुनिकता के दौर में भी पारंपरिक उत्पादों का महत्व कम नहीं हुआ है। दीपावली पर घरों को मिट्टी के दीयों से रोशन करने और मिट्टी की कलात्मक मूर्तियों से सजाने की परंपरा आज भी लोगों के मन में विशेष स्थान रखती है। शिल्प ग्राम में प्राचीन कलाकृतियों का प्रदर्शन केवल खरीदारी और मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। यहां आने वाले लोग पारंपरिक शिल्पकला को करीब से समझ रहे हैं और कारीगरों की मेहनत, रचनात्मकता तथा पीढ़ियों से चली आ रही कला परंपरा की सराहना कर रहे हैं।  शासन द्वारा शिल्पकारों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। राज्योत्सव का शिल्प ग्राम इस तरह हमारी प्राचीन विरासत और आधुनिक जीवन के बीच एक सुंदर सेतु बनकर उभरा है। मिट्टी की इन कलाकृतियों में केवल शिल्पकारों का कौशल ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन की आत्मीय झलक भी समाहित है। साथ ही, इन पारंपरिक उत्पादों के प्रति बढ़ता आकर्षण स्थानीय कुम्हारों और हस्तशिल्प कलाकारों को प्रोत्साहन देने तथा उनकी कला को नई पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उप मुख्यमंत्री ने बिलासपुर में राज्योत्सव का किया शुभारंभ, प्रदेशवासियों को दी राज्य स्थापना दिवस की बधाई

रायपुर   उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने आज बिलासपुर के पुलिस परेड मैदान में जिला स्तरीय राज्योत्सव का शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि  साव ने प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि सशक्त नारियों और हुनरमंद युवाओं की भागीदारी से विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प साकार होगा। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार जनकल्याण, अधोसंरचना विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए तेजी से काम कर रही है।  उप मुख्यमंत्री  साव ने छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय  अटल बिहारी वाजपेयी को नमन किया। उन्होंने कहा कि अटल जी ने छत्तीसगढ़ के लोगों की भावनाओं और कठिनाइयों को समझकर पृथक राज्य की सौगात दी। धन-धान्य, वन और खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ को अलग पहचान दिलाने वाले अटल जी सदैव यहां के लोगों के हृदय में बसे रहेंगे। उनके सपनों के अनुरूप समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।  साव ने कहा कि राज्योत्सव की थीम ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ सरकार की प्राथमिकताओं को अभिव्यक्त करती है। महतारी वंदन योजना और बिहान के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। युवाओं की शिक्षा और कौशल विकास के लिए नए संस्थान प्रारंभ किए जा रहे हैं। फैशन डिजाइनिंग जैसे क्षेत्रों में भी अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। प्रत्येक जिले में नालंदा परिसर के निर्माण से युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने की पहल की गई है। यहां के युवा अपनी प्रतिभा से राष्ट्रीय स्तर पर परचम लहरा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। खेल अलंकरण सम्मान पुनः शुरू किया गया है। पहली बार आयोजित छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में सुदूर गांवों के बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। उन्होंने मैनपाट की टीम के कक्षा ग्यारहवीं के खिलाड़ी मोहित के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी अपनी प्रतिभा से टीम को जीत दिला रहे हैं। बहतराई खेल प्रशिक्षण केंद्र की दो बेटियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी लगातार प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं और सरकार उन्हें आगे बढ़ने के लिए सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।  साव ने कहा कि सरकार मोदी की गारंटियों को पूरा करते हुए विकास कार्यों को गति दे रही है। बिलासपुर में बड़ी संख्या में सड़कों की स्वीकृति मिली है और अधोसंरचना का विस्तार हो रहा है। प्रदेश की बेहतर औद्योगिक नीति के कारण देश-दुनिया के निवेशक छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए रुचि दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ की चर्चा नक्सलवाद के कारण होती थी। अब नक्सलवाद के विरुद्ध मिल रही सफलता से विकास के नए रास्ते खुल रहे हैं। छत्तीसगढ़ और अधिक खुशहाल तथा समृद्ध बनेगा। महापौर मती पूजा विधानी ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री  अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ को पृथक राज्य और विशिष्ट पहचान दी। राज्य गठन के बाद छत्तीसगढ़ ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकास कार्यों को गति मिली है और प्रदेश विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। उप मुख्यमंत्री  साव ने व्यसनमुक्ति और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए स्वाति दीदी को सम्मानित किया। उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए विकास प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन कर योजनाओं, उपलब्धियों और नवाचारों की जानकारी भी ली। समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिनका दर्शकों ने देर रात तक आनंद उठाया। इस अवसर पर विधायक  सुशांत शुक्ला, जिला पंचायत के अध्यक्ष  राजेश सूर्यवंशी, पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष  राजा पाण्डेय, सहकारी बैंक के अध्यक्ष  रजनीश सिंह, संभागायुक्त  सुनील जैन, पुलिस महानिरीक्षक  रामगोपाल गर्ग, मुख्य वन संरक्षक  मनोज पांडे, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, नगर निगम के सभापति  विनोद सोनी,  दीपक सिंह ठाकुर और  मोहित जायसवाल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं नागरिक उपस्थित थे।

राज्योत्सव 2026 में जेल विभाग की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र, बंदियों की रचनात्मक प्रतिभा और सुधारात्मक पहल की दिखी अनूठी झलक

रायपुर जेल की चारदीवारी के भीतर भी प्रतिभा पनप सकती है, हुनर निखर सकता है और शिक्षा के माध्यम से जीवन को नई दिशा दी जा सकती है। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में जेल एवं सुधारात्मक सेवाएँ विभाग की प्रदर्शनी इसी सकारात्मक बदलाव की प्रेरक तस्वीर प्रस्तुत कर रही है। यहां बंदियों की कलात्मक प्रतिभा, कौशल विकास, शिक्षा और पुनर्वास से जुड़ी गतिविधियां दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। प्रदर्शनी यह संदेश दे रही है कि जेलें केवल दंड के लिए नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक वापसी का अवसर प्रदान करने वाली संस्थाएं भी हैं।  राज्योत्सव में जेल एवं सुधारात्मक सेवाएँ विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल में प्रदेश की विभिन्न जेलों में संचालित सुधारात्मक गतिविधियों को आकर्षक फोटो प्रदर्शनी एवं बंदियों द्वारा तैयार उत्पादों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यहां बंदियों के हुनर, रचनात्मकता और आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों की झलक देखने को मिल रही है। बंदियों के हुनर को नई पहचान दे रहा निश्चय कार्यक्रम प्रदर्शनी में युवा बंदियों को स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित श्निश्चय कार्यक्रमश् की गतिविधियों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत बंदियों को फास्ट फूड निर्माण, खाद्य सामग्री तैयार करने तथा अन्य रोजगारोन्मुखी गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिला बंदियों द्वारा अचार निर्माण तथा बंदियों द्वारा भगवान  गणेश एवं माँ दुर्गा की आकर्षक प्रतिमाओं का निर्माण उनके कौशल और रचनात्मकता को दर्शाता है। इन गतिविधियों का उद्देश्य बंदियों को ऐसे व्यावसायिक कौशल से जोड़ना है, जो जेल से रिहाई के बाद उन्हें आजीविका और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत करने में सहायक बन सकें। बंदियों के हाथों से बने उत्पादों ने बिखेरी रचनात्मकता की छटा  जेल विभाग के स्टॉल में बंदियों द्वारा बनाई गई चित्रकलाएं, जूट उत्पाद, अचार, सरसों तेल, नमकीन और एलईडी उत्पाद प्रदर्शन के लिए रखे गए हैं। ये उत्पाद बंदियों की मेहनत, लगन और प्रशिक्षण के माध्यम से विकसित कौशल को प्रदर्शित कर रहे हैं। प्रदर्शनी में मैनपाट महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय द्वारा बंदियों के हस्तनिर्मित कलात्मक उत्पादों के अवलोकन की तस्वीर भी लगाई गई है। यह तस्वीर बंदियों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहन देने और उनके पुनर्वास के प्रयासों को दर्शाती है। स्मार्ट क्लास और डिजिटल शिक्षा से बंदियों के जीवन में ज्ञान का उजियारा प्रदेश की जेलों में बंदियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए संचालित स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से उपलब्ध अध्ययन सुविधाओं को भी प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया है। जेलों में शिक्षा के इन प्रयासों का उद्देश्य बंदियों को ज्ञान और कौशल से सशक्त बनाना तथा उनके व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करना है। शिक्षा के माध्यम से बंदियों को सकारात्मक सोच विकसित करने और भविष्य में बेहतर जीवन की संभावनाओं से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। युवा बंदी वासुदेव चौहान की अनूठी उपलब्धि बनी प्रेरणा प्रदर्शनी में केंद्रीय जेल रायपुर के युवा बंदी  वासुदेव चौहान की उल्लेखनीय उपलब्धि को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने मद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्यायों के 700 श्लोक कंठस्थ किए हैं। उनकी यह उपलब्धि एकाग्रता, अनुशासन, अध्ययन और आत्मविकास की प्रेरक मिसाल है। यह दर्शाती है कि सकारात्मक वातावरण और सीखने के अवसर मिलने पर व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकता है। हाथकरघा का चलित मॉडल बना दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण  जेल विभाग की प्रदर्शनी में बंदियों को दिए जा रहे कौशल विकास एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण की जानकारी देने के लिए हाथकरघा का चलित मॉडल भी प्रदर्शित किया गया है। यह मॉडल दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण और कौतूहल का विषय बना हुआ है। प्रदर्शनी में खुली जेल की व्यवस्था और बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों की भी जानकारी दी जा रही है। इसके माध्यम से बंदियों के सामाजिक पुनर्वास, व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन और आत्मनिर्भर जीवन की संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। सुधार, पुनर्वास और नई शुरुआत का संदेश दे रही प्रदर्शनी      राज्योत्सव में जेल एवं सुधारात्मक सेवाएँ विभाग की यह प्रदर्शनी प्रदेश की जेलों में संचालित मानवीय और सुधारात्मक गतिविधियों को समाज के सामने ला रही है। बंदियों के हाथों से तैयार उत्पाद, उनके शैक्षणिक प्रयास और कौशल विकास की गतिविधियां यह संदेश दे रही हैं कि उचित प्रशिक्षण, शिक्षा और अवसरों के माध्यम से बंदियों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।      जेल विभाग की यह पहल बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ ही सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की उस भावना को भी साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को सुधार और सम्मानजनक नई शुरुआत का अवसर मिले।

भारतीय ऐसा करता तो… इमरान खान पर बॉम्बे हाई कोर्ट सख्त, विदेशी नागरिकों के मामले में कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट ने अमेरिकी नागरिक और अभिनेता इमरान खान को राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में तबियत से लताड़ा है। कोर्ट ने इमरान खान को फटकार लगाते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन का मौलिक अधिकार भारतीय नागरिकों को प्राप्त है, ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्डधारकों को नहीं। अदालत की तल्ख टिप्पणियों के बाद अभिनेता को बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी। उनके वकील ने भविष्य में किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होने और न ही किसी को इसके लिए उकसाने का आश्वासन भी दिया है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल उन्हें राहत देते हुए भारत छोड़ने के नोटिस पर लगी रोक सात दिसंबर तक बढ़ा दी है। विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर उठाए सवाल मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इमरान खान बचपन से भारत में रह रहे हैं। उन्होंने यहीं काम किया और इसी देश की वजह से उन्हें पहचान मिली। इसके बावजूद वह भारतीय नागरिकों को मिलने वाले अधिकारों का दावा नहीं कर सकते। पीठ ने सवाल किया कि खान को भारतीय नागरिकों से जुड़े चुनावी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का क्या अधिकार है? मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से उनका क्या संबंध है? कोर्ट ने दूसरे देश का दिया उदाहरण सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि कोई भारतीय नागरिक दूसरे देश में इसी तरह के विरोध प्रदर्शन में शामिल होता तो क्या उसे वहां बर्दाश्त किया जाता? अमेरिका में ऐसी घटना होने पर संबंधित व्यक्ति को अगली उड़ान से भारत वापस भेज दिया जाता। पीठ ने कहा कि ओसीआइ कार्डधारक होने के नाते खान भारत की उदारता पर निर्भर हैं। यदि उन्हें विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का इतना शौक है तो उन्हें भारतीय नागरिकता लेने पर विचार करना चाहिए। अभिनेता के वकील ने दाखिल किया वचनपत्र सुनवाई के दौरान अभिनेता के वरिष्ठ वकील वेंकटेश धोंड ने अदालत में वचनपत्र दाखिल किया। इसमें आश्वासन दिया गया कि खान भविष्य में किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे और न ही किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा करने के लिए उकसाएंगे। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल वचन देना पर्याप्त नहीं होगा और उन्हें बिना शर्त माफी भी मांगनी होगी। इसके बाद अभिनेता की ओर से माफी पेश की गई। अदालत ने अधिकारियों से भी मामले में उदारता दिखाने की अपील की। कोर्ट ने वसुधैव कुटुंबकम का दिया उदाहरण पीठ ने कहा कि खान बचपन से भारत में रह रहे हैं और उन्हें एक अवसर दिया जाना चाहिए। भारत को 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना के अनुरूप व्यवहार करना चाहिए। हालांकि, पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के तहत सरकार के पास विदेशी नागरिकों को देश से निर्वासित करने की संप्रभु शक्ति है।