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पीएम के संदेश को सीएम साय कर रहे साकार

रायपुर  नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में शिल्पग्राम की साज-सज्जा अनायास ही जनमानस को मुग्ध कर रही है। शिल्पग्राम की खूबसूरत सजावट फिर चाहे धातुओं से बनी बेहतरीन कलाकृतियां हों, मिट्टी और लकड़ियों में की गई कारीगरी, सिल्क हो या कपड़े, चारों ओर है कारीगरी की बेजोड़ दुनिया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह स्थान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संदेश वोकल फार लोकल के संदेश को आत्मसात करता दिखाई दे रहा है। शिल्पग्राम में स्थानीय उत्पादों को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है जिससे यह अभिव्यक्त हो रहा है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय पीएम के संदेश को साकार कर रहे हैं। शिल्पग्राम में हथकघरा के उत्पादों में लोगों की खासी दिलचस्पी है। साड़ियां, शर्ट और अन्य उत्पादों से लेकर घर के लिए सजावटी सामानों की विविधता से शिल्पग्राम लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। कोशल फैब का स्टाल बरबस ही सबका ध्यान अपनी तरफ खींचता है। कोशल फैब ब्रांड की जानकारी देते हुए रीतेश कुमार सिंह ने बताया कि अगस्त महीने में ही मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड कोशल फैब की लांचिंग की थी। इस दौरान इन्वेंट्री मैनेजमेंट साफ्टवेयर का भी शुभारंभ किया गया था जिससे नवाचारों के लिए लोकल टू ग्लोबल का सफर आसान बनाया जा सके। 'लूम टू लग्जरी' की अवधारणा पर आधारित यह प्रीमियम ब्रांड छत्तीसगढ़ के कोसा एवं पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने तथा उन्हें वैश्विक स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। शिल्पग्राम में बस्तर की विशिष्ट कलाकृतियां भी लोगों के कौतूहल का केंद्र बनी हुई हैं। विभिन्न अंचलों की लोककलाओं, परंपराओं को कलाकृतियों में जिस तरह से उकेरा गया है उसका सौंदर्य देखते ही बनता है। झारा आर्ट, वैक्स तकनीकि को लेकर आंगतुक खासी जिज्ञासा दिखा रहे हैं। शिल्पग्राम में स्थानीय उत्पादों से तो आंगतुक रूबरू हो रहे हैं। यहां सेल्फी प्वाइंट भी बनाया गया है, जहां सेल्फी लेते लोगों का हुजूम देखा जा सकता है। राज्योत्सव मुख्य मंच के ठीक सामने शिल्पग्राम में भी स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां के लिए एक मंच जिला प्रशासन ने दिया है। यहां स्थानीय कलाकारों की मोहक प्रस्तुतियों से लोगों के चेहरों में आनंद, उत्साह और उल्लास है।

देवास TI हत्याकांड में CBI जांच की मांग, बलिदानी दिलीप पुरी के परिजनों ने उठाए सवाल

 देवास  जिले के खातेगांव में अवैध शराब से भरे ट्रक को रोकने के दौरान बलिदानी हुए थाना प्रभारी (TI) दिलीप पुरी का सोमवार को उनके पैतृक गांव बरमंडल (धार) में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सामाजिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार पार्थिव शरीर को मुखाग्नि देने के बजाय गांव में निर्धारित स्थल पर भू-समाधि दी गई। समाधि देने की यह प्रक्रिया उनके बेटे के माध्यम से पूरी कराई गई। इस दौरान पुलिस बल ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर बलिदानी को अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार के दौरान संभागीय आयुक्त भास्कर लक्षकार, इंदौर रेंज के आईजी अनुराग, धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना, एसपी सचिन शर्मा सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे।

पुस्तक में राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा नीति, ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसरों और ग्रीन एनर्जी से जुड़ी पहलों का समावेश

नई दिल्ली मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एवं एक्सपो-2026 के दौरान छत्तीसगढ़ के प्रदर्शनी स्टॉल पर राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा नीति, निवेश संभावनाओं और हरित ऊर्जा विकास पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक में छत्तीसगढ़ की रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी, ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसरों, ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की योजनाओं तथा राज्य में स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा विकास की संभावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और नवाचार के नए अवसरों के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य हरित ऊर्जा को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। यह पुस्तक निवेशकों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को छत्तीसगढ़ की नीतियों, उपलब्ध संसाधनों तथा भविष्य की संभावनाओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस अवसर पर क्रेडा के अध्यक्ष  भूपेन्द्र सवन्नी, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित अन्य उपस्थित रहे।  

खाना खजाना जोन में छत्तीसगढ़ी व्यंजन स्टॉल बना आकर्षण का केन्द्र

रायपुर नवा रायपुर में चल रहे राज्योत्सव में खाना खजाना जोन में छत्तीसगढ़ी व्यंजन स्टॉल लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। स्टॉल क्रमांक 12 "छत्तीसगढ़ी व्यंजन – जय जोहार जय छत्तीसगढ़" पर पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ उठाने के लिए लोगों की कतार लगी हुई है। यहां परोसे जा रहे मूंग बड़ा का स्वाद लोगों को सबसे ज्यादा भा रहा है, खासकर पताल (टमाटर) की चटपटी चटनी के साथ इसका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है। गर्मागर्म मूंग बड़ा और चटपटी चटनी के कॉम्बिनेशन की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं। उपरवारा के प्रीतम पटेल, उमेश देवांगन और उर्मिला कुमारी ने की तारीफ – स्टॉल पर पहुंचे उपरवारा निवासी  प्रीतम पटेल,  उमेश देवांगन और मती उर्मिला कुमारी ने व्यंजनों का स्वाद लेकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि "पताल की चटनी के साथ मूंग बड़ा का स्वाद बिल्कुल घर जैसा है। ऐसे स्टॉल से हमारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है।" स्टॉल के संचालक बलौदाबाजार के  नीरज चंद्राकर ने बताया कि उनके स्टॉल पर छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को पूरी शुद्धता और पारंपरिक तरीके से तैयार किया जा रहा है।  चंद्राकर ने बताया कि विधानसभा सत्र के दौरान भी विधानसभा परिसर में उनके द्वारा ठेठरी, खुरमी सहित अन्य छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की सप्लाई की गई थी, जिसे काफी सराहा गया था।

अर्णब के बाद मुरासु का कहर, उत्तर भारत में मौसम लेगा करवट; दिल्ली-UP से राजस्थान तक अलर्ट

नई दिल्ली बंगाल की खाड़ी में समुद्री सतह का तापमान बढ़कर 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इसके चलते पहले अर्णब तूफान आया और अब मुरासु। एक हफ्ते के भीतर यह दूसरा तूफान है, जिसने प्रचंड होकर मौसम का मिजाज बिगाड़ दिया है। गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील मुरासु तेजी से आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। यह सोमवार की रात ढाई बजे से मंगलवार की सुबह चार बजे के बीच आंध्र प्रदेश में तट को पार कर सकता है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है। तूफान का प्रभाव पूर्वी तट से आगे बढ़कर मध्य भारत के कुछ हिस्सों तक पहुंचेगा। मध्य प्रदेश के दक्षिणी इलाकों में भी बारिश बढ़ सकती है। मुरासु का प्रभाव अर्णब से थोड़ा भिन्न होगा। तूफान कमजोर पड़ने के बाद भी अगले कुछ दिनों तक देश के बड़े हिस्से को प्रभावित करता रहेगा। पूर्वी भारत से लेकर मध्य भारत और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों तक बादलों की आवाजाही और बारिश की स्थिति बनी रह सकती है। हालांकि उत्तर भारत में तूफान का सीधा असर नहीं होगा। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। मुरासु तूफान के दौरान हवा की गति अर्णब की तुलना में थोड़ा कम है, लेकिन इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा। सबसे गंभीर असर आंध्र प्रदेश और उत्तरी तमिलनाडु में होगा। आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों और रायलसीमा में भारी से बेहद भारी बारिश का अनुमान है। आंध्र प्रदेश के अलावा तमिलनाडु और तेलंगाना में भी तेज हवा के साथ भारी बारिश होगी। हवा की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी तीन नवंबर से अगले दो दिनों तक भारी बारिश की आशंका है। कर्नाटक और केरल के कुछ हिस्सों में भी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। गिरेगा उत्तर भारत का तापमान पहाड़ों पर पश्चिमी विक्षोभ के चलते जम्मू-कश्मीर में बारिश और बर्फबारी हो सकती है। हालांकि इस दौरान दिल्ली समेत हिमाचल, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड का मौसम शुष्क रहेगा। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के अधिकतर क्षेत्र शुष्क बने रहेंगे। दिन में तेज धूप रहेगी। सुबह और रात के तापमान में हल्की गिरावट होगी, जिससे सर्दी की शुरुआत हो सकती है।  

CM विष्णु देव साय की पहल से महिलाओं को रोजगार, रेडी-टू-ईट निर्माण बना कमाई का जरिया

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से ग्रामीण महिलाओं को मिल रहे रोजगार के नए अवसर, रेडी-टू-ईट निर्माण से सरस्वती समूह को हर महीने 50 हजार रुपये का मुनाफा मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में रायगढ़ में महिला सशक्तिकरण को मिल रही नई दिशा बिहान योजना से जुड़ी डूमरमुड़ा की 10 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, पोषण आहार निर्माण से परिवार की आर्थिक स्थिति हो रही मजबूत रायगढ़ जिले के 2,709 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन, स्वरोजगार के साथ पोषण सुरक्षा को मिल रहा बढ़ावा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी दिशा में राज्य शासन द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों को पूरक पोषण आहार रेडी-टू-ईट निर्माण का कार्य सौंपने की पहल ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को मजबूत बनाने का माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में रायगढ़ जिले में महिला सशक्तिकरण एवं आजीविका संवर्धन की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उदाहरण रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा स्थित सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह की 10 महिलाएं हैं, जो रेडी-टू-ईट पोषण आहार का निर्माण कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं। समूह को इस कार्य से प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये तक का मुनाफा प्राप्त हो रहा है। महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन की प्राथमिकताओं में महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण और बच्चों एवं माताओं के पोषण स्तर में सुधार शामिल है। महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट निर्माण से जोड़ने की पहल इन दोनों उद्देश्यों को एक साथ आगे बढ़ा रही है। इससे एक ओर ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव और आसपास ही रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराने में सहायता मिल रही है। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में जिले में महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने और स्व-सहायता समूहों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रेडी-टू-ईट निर्माण जैसी गतिविधियां महिलाओं को नियमित आय अर्जित करने के साथ उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और वितरण जैसे कार्यों का व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान कर रही हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और वे परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अप्रैल 2026 से रेडी-टू-ईट निर्माण कर रही हैं सरस्वती समूह की महिलाएं रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा स्थित सरस्वती स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती चम्पा चौहान बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद समूह की महिलाओं को आजीविका के नए अवसर प्राप्त हुए। अप्रैल 2026 से समूह को रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण का कार्य मिला। इसके बाद समूह की सभी 10 महिलाएं इस गतिविधि से जुड़कर नियमित रूप से कार्य कर रही हैं। पहले महिलाओं के पास आय अर्जित करने के सीमित अवसर थे, लेकिन अब वे समूह के माध्यम से सामूहिक रूप से कार्य करते हुए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं। श्रीमती चौहान बताती हैं कि रेडी-टू-ईट निर्माण से समूह की महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं आय अर्जित कर रही हैं। इससे परिवार के दैनिक खर्चों को पूरा करने में मदद मिल रही है। साथ ही समूह की महिलाओं को सामूहिक निर्णय लेने, कार्यों का प्रबंधन करने और आर्थिक गतिविधियों के संचालन का अनुभव भी प्राप्त हो रहा है। आधुनिक मशीनों से तैयार किया जा रहा पूरक पोषण आहार सरस्वती स्व-सहायता समूह की महिलाएं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रेडी-टू-ईट पोषण आहार तैयार करती हैं। निर्माण प्रक्रिया में सबसे पहले गेहूं, चना, सोयाबीन एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों की मशीनों के माध्यम से सफाई की जाती है। इसके बाद सामग्री की भुनाई, पिसाई और छनाई की प्रक्रिया पूरी की जाती है। तैयार सामग्री को निर्धारित अनुपात में मिक्सिंग मशीन के माध्यम से मिलाया जाता है। मिश्रण तैयार होने के बाद उसकी पैकिंग की जाती है। समूह द्वारा तैयार पोषण आहार का वितरण आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राप्त मांगपत्र के अनुसार किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में समूह की महिलाएं उत्पादन से लेकर पैकिंग और वितरण तक की जिम्मेदारी निभा रही हैं। इससे उन्हें खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का अनुभव प्राप्त हो रहा है और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। हर महीने 50 हजार रुपये तक का मुनाफा, परिवारों को मिल रहा आर्थिक संबल समूह की सदस्य श्रीमती चम्पा चौहान के अनुसार रेडी-टू-ईट पोषण आहार के निर्माण एवं वितरण से सरस्वती स्व-सहायता समूह को प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये तक का मुनाफा प्राप्त हो रहा है। यह आय समूह की महिलाओं और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में सहायक बन रही है। नियमित आजीविका गतिविधि मिलने से महिलाओं में आर्थिक सुरक्षा की भावना बढ़ी है और वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सक्रिय योगदान दे रही हैं। समूह की सफलता यह दर्शाती है कि महिलाओं को उचित अवसर, संस्थागत सहयोग और आजीविका के साधन उपलब्ध होने पर वे सामूहिक उद्यम के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर सकती हैं। बिहान योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को संगठित कर उन्हें उत्पादन आधारित गतिविधियों से जोड़ने की पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाओं को विस्तार दे रही है। जिले के 2,709 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 10 महिला समूहों का चयन रायगढ़ जिले में वर्तमान में कुल 2,709 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार रेडी-टू-ईट निर्माण हेतु 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन किया गया है। इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में पूरक पोषण आहार की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। चयनित महिला स्व-सहायता समूहों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) … Read more

रामकथा में श्रीकृष्ण और हनुमान की तुलना कर घिरे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर, बाद में मांगी माफी

छतरपुर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने हाल ही में दिए गए बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए ऐसी टिप्पणी की, जिस पर विवाद खड़ा हो सकता है। 29 अक्तूबर को शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान उन्होंने कहा- हमारे राम सीधे हैं, तुम्हारे कृष्ण टेढ़े। तुम्हारे ठाकुर जी का नाम भी टेढ़ा, चलना भी टेढ़ा और खड़े भी तीन जगह से टेढ़े होते हैं। शास्त्री ने कथा के दौरान भगवान कृष्ण की बांसुरी बजाने और गोवर्धन पर्वत उठाने की लीलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बांसुरी बजाना कोई बड़ी बात नहीं है, कलाकार भी बांसुरी बजा लेते हैं। गाय चराना भी खेल है, लेकिन बंदरों को नचाना खेल नहीं है। उन्होंने भगवान हनुमान का उदाहरण देते हुए कहा- तुम्हारे वाले पर्वत उठा लेते हैं, इसमें क्या बड़ी बात है, हमारे भगवान के चेले ने तो पूरा पर्वत ही उड़ा दिया। उनका इशारा संजीवनी बूटी के लिए पर्वत उठाकर लाने वाले हनुमान जी की ओर था। राम और कृष्ण की मुद्रा को लेकर की तुलना कथा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भगवान कृष्ण की तस्वीरों में वे कहीं कमर लचकाए तो कहीं पैरों पर पैर रखकर बांसुरी बजाते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा- हमारे राम तो एकदम सीधे खड़े होते हैं। हमारे भगवान का नाम भी सीधा, चलना भी सीधा और दिखते भी सीधे हैं। वहीं, तुम्हारे ठाकुर जी का नाम भी टेढ़ा और उनकी मुद्रा भी टेढ़ी होती है। उन्होंने भगवान राम के धनुष चलाने की तुलना भगवान कृष्ण की बांसुरी से करते हुए कहा कि बांसुरी बजाना खेल हो सकता है, लेकिन धनुष चलाना खेल नहीं है। हालांकि, बयान के अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि वे भगवान कृष्ण के विरोधी हैं। यादव समाज ने जताई नाराजगी इसी टिप्पणी को लेकर भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों एवं यादव समाज के लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही सनातन धर्म के आराध्य एवं पूजनीय स्वरूप हैं। दोनों की लीलाएं, आदर्श और जीवन दर्शन अपने-अपने स्थान पर विशेष महत्व रखते हैं। ऐसे में दोनों आराध्य स्वरूपों की तुलना करते हुए की गई टिप्पणी से भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। इस कथित टिप्पणी के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। यादव समाज सहित भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों और श्रद्धालुओं द्वारा इस विषय पर अपनी नाराजगी व्यक्त की जा रही है।  यादव समाज के शिवपुरी निवासी रामकुमार यादव का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण (ठाकुर जी) के बारे में टिप्पणी करने वाले पं. धीरेंद्र शास्त्री का पूरे समाज को विरोध करना चाहिए। हम इस तरह की टिप्पणी को सनातन धर्म के विरुद्ध मानते हैं। उन्होंने मांग की कि पं. धीरेंद्र शास्त्री की कथा कहीं भी आयोजित नहीं कराई जानी चाहिए। साथ ही, जिस व्यक्ति ने यह कथा आयोजित कराई थी, उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए, क्योंकि इसमें ठाकुर जी के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। बागेश्वर बाबा ने मांगी माफी जब मामले ने तूल पकड़ा तो पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस मुद्दे पर सफाई भी दी है और माफी भी मांगी है। उन्होंने कहा कि हमारे भाव को गलत समझा गया। उन्होंने कहा कि वे खुद ठाकुर जी के भक्त हैं व भागवत कथा के दौरान ठाकुर जी का गुणगान करते हैं। एक संत का प्रचलित पद है, जिसमें कहा गया है कि बांसुरी बजाना तो खेल भी है, लेकिन धनुष चलाना खेल नहीं है। वे इसी पद की व्याख्या कर रहे थे। विनोद में कहीं बातों का “अर्थ का अनर्थ” न बनाएं।  प्रदीप मिश्रा के राधारानी पर बयान से भी हुआ था विवाद धार्मिक कथाओं के दौरान देवी-देवताओं को लेकर की गई टिप्पणियों पर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। जून 2024 में कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने राधारानी के विवाह को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि राधारानी का विवाह भगवान कृष्ण से नहीं, बल्कि मथुरा के छाता निवासी अनय घोष से हुआ था। इस बयान के बाद विवाद बढ़ा तो प्रदीप मिश्रा ने बरसाना स्थित राधारानी मंदिर पहुंचकर नाक रगड़कर माफी मांगी थी।

राजस्थान के झुंझुनूं हादसे पर केंद्र की मदद, मृतकों के परिवारों को 2 लाख की सहायता

 उदयपुरवाटी (झुंझुनूं) राजस्थान के झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में सड़क निर्माण के दौरान हुए भीषण हादसे में आठ मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। इन गंभीर रूप से झुलसे मरीजों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस हादसे की सूचना के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने दुख प्रकट किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजस्थान के झुंझुनूं में हुए हादसे में लोगों की जान जाने से दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। घायल लोग जल्द स्वस्थ हों। साथ ही जान गंवाने वालों के परिजनों को PMNRF से 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50,000-50,000 रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। राजस्थान के राज्यपाल ने गहरा शोक व्यक्त किया राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने झुंझुनूं जिले के छापोली गांव में करंट लगने से हुए हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ईश्वर से मृतकों की पुण्यात्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है। उन्होंने हादसे में घायलों के जल्द स्वस्थ होने की भी कामना की है। छापोली हादसा हृदयविदारक : विधानसभा अध्यक्ष विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में सड़क निर्माण कार्य के दौरान करंट की चपेट में आने से श्रमिकों की मृत्यु की हृदयविदारक घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। देवनानी ने कहा कि झुंझुनूं में हुए इस दर्दनाक हादसे में श्रमिकों की असामयिक मृत्यु अत्यंत पीड़ादायक एवं स्तब्धकारी है। अपने परिवारों के भरण-पोषण में जुटे श्रमिकों का इस प्रकार असमय संसार से विदा होना उनके परिजनों के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दिवंगतों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि शोकाकुल परिवारों को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिले। घटना की जांच के निर्देश दिए – सीएम भजनलाल राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि झुंझुनूं में हुए हादसे में करंट लगने से श्रमिकों की असामयिक मृत्यु का समाचार दुखद है। संबंधित अधिकारियों को घायलों के समुचित उपचार एवं प्रभावित परिवारों को तत्काल हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने तथा घटना की जांच के निर्देश दिए हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान, घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ तथा शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहन करने का संबल प्रदान करें। ॐ शांति!

जगदलपुर में युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित, युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का किया आह्वान

रायपुर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में आज की युवा पीढ़ी की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जब देश अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, तब एक मजबूत और विकसित भारत की बागडोर इसी अमृत पीढ़ी के हाथों में होगी। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने और देश के सर्वांगीण विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया सोमवार को जगदलपुर के कुम्हरावण्ड स्थित शासकीय कृषि महाविद्यालय के सभागार में आयोजित श्युवा संवादश् कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने युवाओं से सीधे संवाद कर लोकतंत्र, रोजगार, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में उनकी प्राथमिक भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। माय भारत प्लेटफॉर्म युवाओं के लिए अवसरों का द्वाररू डॉ. मांडविया डॉ. मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया माय भारत (डल ठींतंज) डिजिटल प्लेटफॉर्म आज के युवाओं को नवाचार, मार्गदर्शन, स्वयंसेवा और करियर के नए अवसर उपलब्ध कराने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। इसके माध्यम से पूरे देश में एक लाख युवा नेतृत्वकर्ता तैयार करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है, जो आगे चलकर नीति-निर्माण और जनसेवा में अपनी प्रभावी भागीदारी निभाएंगे। उन्होंने युवाओं से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के पंच प्रण- विकसित भारत का संकल्प, गुलामी की हर मानसिकता से मुक्ति, अपनी महान विरासत पर गर्व, एकता एवं एकजुटता तथा अपने नागरिक कर्तव्यों का निष्ठा से पालन को अपने जीवन में पूरी तरह अपनाने का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने बल दिया कि युवा चाहे शिक्षा, प्रशासन, उद्यमिता या किसी भी अन्य क्षेत्र में आगे बढ़ें, उनके लिए हमेशा राष्ट्रहित  सर्वाेपरि होना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती और बस्तर के पर्यटन पर चर्चा संवाद सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री ने छात्र प्रांजल से विशेष रूप से मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर चर्चा की। उन्होंने लोकतंत्र को अधिक मजबूत बनाने के लिए पारदर्शी, त्रुटिरहित मतदाता सूची और निष्पक्ष मतदान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि युवाओं की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से देश के शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह के श्युवा संवादश् कार्यक्रमों की श्रृंखला निरंतर जारी रहेगी। इस अवसर पर बस्तर की प्रशंसा करते हुए डॉ. मांडविया ने यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात का विशेष उल्लेख किया तथा क्षेत्र में पर्यटन विकास की अपार संभावनाओं की सराहना की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर के युवा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने और विकसित भारत के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने उपस्थित युवाओं को राष्ट्र सेवा की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप और जगदलपुर विधायक श्री किरण देव सिंह ने भी युवाओं को संबोधित करते हुए अपने विचार रखे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, युवा और विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

महिलाएं बनेंगी ई-बसों की ड्राइवर, रायपुर-बिलासपुर समेत चार शहरों में शुरू होगी पहल

 रायपुर  प्रदेश के रायपुर, बिलासपुर समेत चार बड़े शहरों में ई-बस सेवा शुरू होने जा रही है। इन बसों की स्टीयरिंग महिला चालकों के हाथ में नजर आएगी। केंद्र सरकार की पहल पर ई-बसों में महिला चालकों और परिचालकों (कंडक्टर) को प्राथमिकता के साथ अवसर देने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने के साथ ही सार्वजनिक परिवहन में महिला यात्रियों का भरोसा व सुरक्षा बढ़ाना है। संचालन करने वाली एजेंसियां व कंपनियां महिला ड्राइवरों को निश्शुल्क विशेष ड्राइविंग प्रशिक्षण भी मुहैया कराएंगी। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत प्रदेश में 240 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत हैं, जिनमें रायपुर के लिए 100, बिलासपुर के लिए 50, दुर्ग-भिलाई के लिए 50 और कोरबा के लिए 40 बसें शामिल हैं। इसके डिपो और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कार्य जारी है। इलेक्ट्रिक बसों का संचालन आसान विशेषज्ञों के अनुसार परंपरागत डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन आसान होता है। इनमें आटोमैटिक ट्रांसमिशन होने के कारण बार-बार गियर बदलने का झंझट नहीं रहता और संपूर्ण नियंत्रण डिजिटल डैशबोर्ड से होता है। हालांकि इसके लिए महिलाओं के पास भारी वाणिज्यिक वाहन (एचएमवी) का वैध लाइसेंस, जरूरी तकनीकी प्रशिक्षण और सड़क पर वाहन चलाने का अनुभव होना अनिवार्य रहेगा। दिल्ली, भुवनेश्वर, नागपुर जैसे कई शहरों में सफल रहा प्रयोग दिल्ली में आयेाजित कार्यशाला में बताया गया कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की भागीदारी का माडल देश के कई अन्य शहरों में पहले से ही काफी सफल साबित हो चुका है। ओडिशा की भुवनेश्वर 'मो बस' सेवा में लगभग 40 प्रतिशत कंडक्टर महिलाएं हैं। इसी प्रकार नागपुर में वर्ष 2019 से पूरी तरह महिला स्टाफ द्वारा संचालित 'तेजस्विनी' बसें सफलतापूर्वक दौड़ रही हैं। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) में भी 1,000 से अधिक महिला कंडक्टर और 77 से अधिक महिला चालक अपनी सेवाएं दे रही हैं। इसी तरह अब छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में भी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में 'नारी शक्ति' को मजबूती से जोड़ने की तैयारी है। ई-बस डिपो का निर्माण में पिछड़ा रायपुर, 60 प्रतिशत काम बाकी राज्य शहरी विकास एजेंसी (सुडा) की ओर से विभिन्न शहरों में ई-बस डिपो का निर्माण जारी है। दुर्ग-भिलाई के कदंबरी नगर डिपो में 90% काम पूरा हो चुका है। इसी तरह कोरबा के दर्री डिपो में 80% काम पूरा हो चुका है। बिलासपुर के कोनी डिपो में भी 80% कार्य पूर्ण हो चुका है। वहीं रायपुर के जरवाय डिपो स्थल पर 40% काम पूरा हो चुका है, इसकी संभावित पूर्णता तिथि 31 दिसंबर तय की गई है।