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फेस्टिव सीजन में IndiGo यात्रियों को लग सकता है झटका, महंगे हो सकते हैं फ्लाइट टिकट

 नई दिल्ली आने वाले दिनों में हवाई यात्रा का बजट कितना होगा, यह काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों पर निर्भर कर सकता है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने फिलहाल ईंधन की कीमतों को पहले से सुरक्षित करने यानी हेजिंग की योजना से दूरी बना ली है। इसका मतलब है कि कंपनी अभी ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम सीधे बाजार के भरोसे उठाएगी। अगर ईंधन महंगा होता है तो इसका असर एयरलाइन के खर्च और आगे चलकर टिकट के किराये पर भी पड़ सकता है। क्यों हेजिंग नहीं करेगी इंडिगो इंडिगो के सीईओ विली वाल्श ने कहा कि घरेलू बाजार में दूसरी प्रतिस्पर्धी एयरलाइंस भी फिलहाल हेजिंग नहीं कर रही हैं। ऐसे में अकेले इंडिगो का हेजिंग करना कंपनी के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि हेजिंग का मकसद कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव करना है, न कि कीमतों पर दांव लगाना। यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर? एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च में करीब 40 प्रतिशत हिस्सा विमान ईंधन का होता है। जब एटीएफ महंगा होता है तो कंपनियों का खर्च बढ़ जाता है। इसकी भरपाई के लिए एयरलाइंस टिकट के किराये बढ़ा सकती हैं या फ्यूल सरचार्ज लगा सकती हैं। एअर इंडिया पहले ही ले चुका है फ्यूल सरचार्ज का सहारा एअर इंडिया समूह पहले ही बढ़ती ईंधन लागत के असर को कम करने के लिए फ्यूल सरचार्ज का सहारा ले चुका है। हेजिंग करने वाली एयरलाइन को ईंधन की कीमत बढ़ने पर कुछ सुरक्षा मिल सकती है। वहीं बिना हेजिंग वाली कंपनी को बाजार में बढ़ी कीमतों का सीधा असर झेलना पड़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हेजिंग करने वाली एयरलाइन का टिकट हमेशा सस्ता और बिना हेजिंग वाली एयरलाइन का टिकट हमेशा महंगा होगा। किराये पर मांग, प्रतिस्पर्धा और दूसरी परिचालन लागतों का भी असर पड़ता है। इंडिगो कब बदलेगी अपनी रणनीति  कंपनी 2028 की दूसरी तिमाही से एयरबस ए350 विमानों के जरिए लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का विस्तार करने की तैयारी में है। वाल्श के मुताबिक, इस विस्तार से पहले कंपनी अपनी हेजिंग नीति की समीक्षा करेगी। यूरोप की कुछ एयरलाइंस अपनी जरूरत के 70 से 80 फीसदी तक ईंधन की हेजिंग करती हैं।  

यूपी चुनाव 2027 से पहले NDA का कुनबा बढ़ाने की तैयारी, एक और पार्टी की एंट्री के संकेत

पटना बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और राज्य के मौजूदा स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में जनता दल (यूनाइटेड) के बड़े प्लान का खुलासा किया है। वाराणसी दौरे पर आए निशांत कुमार ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी JDU साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के बैनर तले चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर रही है। निशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि यूपी में जेडीयू किसी तरह की प्रतिस्पर्धा के बजाय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'विकास मॉडल' को मजबूती देने और अपने पिता के 20 साल के बिहार सुशासन मॉडल को राज्य के कोने-कोने तक पहुंचाने का काम करेगी। योगी जी के नेतृत्व में लड़ेंगे, कोई मुकाबला नहीं: निशांत कुमार वाराणसी में पार्टी कार्यकर्ताओं और मीडिया से बातचीत करते हुए बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने गठबंधन और अपनी पार्टी के विजन पर खुलकर बात की। निशांत ने कहा, "हमारी पार्टी का संगठन देश के कई राज्यों में हमेशा से रहा है। मैं यहां संगठन को मजबूत करने और उसका विस्तार करने आया हूं। 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए हम मैदान में उतरने पर विचार कर रहे हैं और एनडीए के एक घटक दल के रूप में यह चुनाव लड़ने का प्रयास करेंगे।" मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ टकराव या मुकाबले की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, "योगी आदित्यनाथ जी खुद विकास की गाड़ी को आगे बढ़ा रहे हैं। हम उनके साथ मजबूती से खड़े हैं और उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ सकते हैं। मेरा उद्देश्य अपने पिता की सोच को आगे बढ़ाना और विकास की रफ्तार को और तेज करना है।" निशांत कुमार ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि नीतीश कुमार ने पिछले 20 सालों में बिहार में विकास और सुशासन का जो मॉडल खड़ा किया है, उसे यूपी के एक-एक नागरिक तक पहुंचाया जाए। जेडीयू का यह ऐलान खासकर पूर्वांचल के लिए महत्वपूर्ण है। वाराणसी से शुरुआत कर जेडीयू कुर्मी, अति-पिछड़े और महिला मतदाताओं में नीतीश के ‘सुशासन और शराबबंदी’ नैरेटिव को आजमाना चाहती है। अखिलेश-राहुल की बढ़ने वाली हैं मुश्किलें? अखिलेश यादव और राहुल गांधी के लिए खतरा जदयू की सीट-जीत से ज्यादा वोट-कटौती की संभावना से है। यूपी में NDA का वोट-बैंक पहले से बड़ा है। JDU अगर कुर्मी और अति-पिछड़ी जातियों और महिला मतदाताओं में थोड़ा भी अलग पहचान बनाए, तो सपा-कांग्रेस के लिए कुछ सीटों पर मार्जिन और सिकुड़ सकता है। लेकिन इसका असर शहरों या सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं होगा। जेडीयू की यूपी में संगठनात्मक पकड़ एकदम कमजोर है, इसलिए असर मुख्य रूप से पूर्वांचल और चुनिंदा जातीय-सामाजिक समीकरणों वाली सीटों तक ही सीमित रह सकता है। इसमें भी सबसे शुरुआती मुद्दा सीट शेयरिंग का है, क्योंकि अभी यह भी देखना होगा कि अगर जेडीयू यूपी चुनाव लड़ती भी है, तो बीजेपी उसे कितनी और कौनसी सीटें देगी। यूपी में कैसा रहा JDU का चुनावी रिकॉर्ड? भले ही भारतीय जनता पार्टी और जेडीयू के बीच सीट-शेयरिंग को लेकर अभी तक कोई औपचारिक बातचीत या ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन हिंदी पट्टी के इस सबसे बड़े राज्य में जेडीयू अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए आतुर है। उत्तर प्रदेश के पिछले चुनावों में जेडीयू के प्रदर्शन पर एक नजर डालें-     2002 चुनाव: जेडीयू ने भाजपा के साथ गठबंधन में 16 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जिनमें से 2 सीटों पर जीत दर्ज की।     2007 चुनाव: 16 सीटों पर चुनाव लड़ा और 1 सीट जीती।     2012 चुनाव: जेडीयू ने अकेले 219 सीटों पर प्रत्याशी उतारे, लेकिन एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। वोट हिस्सा लगभग 0.36%     2017 चुनाव: पार्टी ने नहीं लड़ा चुनाव।     2022 चुनाव: 27 उम्मीदवार मैदान में उतारे, लेकिन एक भी नहीं जीता।

इंदौर के स्कूली बच्चों के साथ हिमाचल में बड़ा हादसा, खाई में गिरा वाहन; 8 लोग घायल

इंदौर   हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल एवं स्पीति में एक बड़ा सड़क हादसा सामने आया है। मध्य प्रदेश के इंदौर से शैक्षणिक व पर्यटन भ्रमण पर पहुंचे स्कूली विद्यार्थियों और उनके शिक्षक का टेंपो ट्रैवलर सोमवार को कोकसर क्षेत्र में अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गया। हादसे के वक्त वाहन में 11 बच्चे, एक शिक्षक और चालक मौजूद थे। दुर्घटना में शिक्षक समेत 7 विद्यार्थी चोटिल हुए हैं। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में किसी भी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ और सभी सुरक्षित हैं।

विश्वविद्यालयों के स्टॉलों पर उमड़ी युवाओं की भीड़, आधुनिक शिक्षा, डिजिटल सुविधाओं और रोजगार के नए अवसरों की मिली जानकारी

रायपुर नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में उच्च शिक्षा विभाग की प्रदर्शनी युवाओं, विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए आकर्षण के साथ ज्ञान और मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण केंद्र बन गई है। प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा लगाए गए स्टॉलों में आधुनिक शिक्षा, डिजिटल तकनीक, नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास और रोजगार की संभावनाओं की झलक देखने को मिल रही है। राज्योत्सव में पहुंचे युवा उत्साहपूर्वक प्रदर्शनी का अवलोकन कर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों और अपने उज्ज्वल भविष्य से जुड़ी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। प्रदर्शनी की विशेषता यह है कि यहां विद्यार्थियों को एक ही परिसर में विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों, शैक्षणिक गतिविधियों, अनुसंधान, तकनीकी सुविधाओं और करियर के अवसरों की जानकारी मिल रही है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को उच्च शिक्षा के बेहतर विकल्पों को समझने का अवसर प्राप्त हो रहा है। एक ही स्थान पर मिली उच्च शिक्षा और भविष्य संवारने की महत्वपूर्ण जानकारी  प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुंचे युवा अभिषेक कुमार साहू और डॉ. एस.आर. कमलेश ने उच्च शिक्षा विभाग की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्योत्सव में विश्वविद्यालयों की गतिविधियों और शासन की शैक्षणिक योजनाओं की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होना विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से विशेष रूप से ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा और उच्च शिक्षा प्राप्त करना अधिक सुविधाजनक होगा। इसी प्रकार प्रदर्शनी देखने पहुंचे विनोद कुमार, तुषार, आराध्या, नीरज कुमार, रिया, महेंद्र, विशाल, शिवम, हर्ष, पवित्र, उमाकांत, सुमन अग्रवाल, कुणाल, संजय और राजकुमार सहित बड़ी संख्या में युवाओं ने विश्वविद्यालयों के स्टॉलों में रुचि दिखाई। इसी तरह विशाल, हर्ष, पवित्र, उमाकांत, सुमन अग्रवाल, कुणाल, संजय और राजकुमार ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल अत्यंत आवश्यक है। उच्च शिक्षा विभाग की यह प्रदर्शनी विद्यार्थियों को अपनी रुचि और योग्यता के अनुरूप आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है। डिजिटल शिक्षा और नवाचार से बदल रही उच्च शिक्षा की तस्वीर उच्च शिक्षा विभाग की प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा), सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी), डिजिलॉकर और अन्य डिजिटल शैक्षणिक सुविधाओं की जानकारी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पीएम-उषा के माध्यम से उच्च शिक्षा संस्थानों में अधोसंरचना और शैक्षणिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए महाविद्यालयों में आधुनिक शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट से विद्यार्थियों के शैक्षणिक क्रेडिट का डिजिटल प्रबंधन और डिजिलॉकर के माध्यम से शैक्षणिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखने एवं आवश्यकता अनुसार प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध हो रही है। इन पहलों के प्रति युवाओं की रुचि यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा और रोजगारोन्मुखी अवसरों को लेकर जागरूक है। ग्रामीण युवाओं और बेटियों के सपनों को मिल रही नई उड़ान   मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा के मार्गदर्शन में प्रदेश के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक उच्च शिक्षा का विस्तार किया जा रहा है। नवीन शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना, अधोसंरचना विकास और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार से विद्यार्थियों को घर के नजदीक उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए ये प्रयास लाभकारी सिद्ध होंगे। घर के समीप उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध होने से समय और आर्थिक संसाधनों की बचत के साथ विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में सहायता मिलेगी। शिक्षा को रोजगार, कौशल और आत्मनिर्भरता से जोड़ना हमारा संकल्प – मंत्री  टंक राम वर्मा  उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और रोजगारोन्मुखी उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की मजबूत आधारशिला है। मंत्री  वर्मा ने कहा कि बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप उच्च शिक्षा को नई तकनीक, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास से जोड़ा जा रहा है। राज्योत्सव में विभिन्न विश्वविद्यालयों की सहभागिता से विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर शिक्षा और करियर की संभावनाओं की जानकारी मिल रही है। यह पहल युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने और भविष्य के लिए सही दिशा चुनने में सहायक होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है। राज्य सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान रूप से बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं, उचित मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों। युवाओं ने मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री के प्रति जताया आभार राज्योत्सव में उच्च शिक्षा विभाग की प्रदर्शनी देखने पहुंचे युवाओं ने आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहन और विश्वविद्यालयों की गतिविधियों से परिचित कराने की पहल की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां युवाओं को नई जानकारियां देने के साथ उच्च शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का सशक्त माध्यम हैं।   राज्योत्सव में उच्च शिक्षा विभाग की प्रदर्शनी केवल योजनाओं और उपलब्धियों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के सपनों को नई दिशा देने वाला मंच बनकर उभरी है। यहां ज्ञान, नवाचार और आधुनिक तकनीक का संगम प्रदेश की युवा पीढ़ी को बेहतर शिक्षा, कौशल और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।

पौधरोपण, बांस शिल्प, वनोपज और हर्बल उत्पादों के जरिए दिखी वन संरक्षण और रोजगार संवर्धन की तस्वीर

रायपुर छत्तीसगढ़ के 26वें स्थापना दिवस पर नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव स्थल में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ आदिवासी संस्कृति, ग्रामीण आजीविका और आत्मनिर्भरता की पहल एक साथ देखने को मिल रही हैं। आज राजधानी रायपुर में राज्योत्सव के दूसरे दिन वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने विभागीय स्टॉल का निरीक्षण भी किया। इस दौरान मंत्री  कश्यप ने वनोपजों से बने उत्पादों को चखा और उत्पादन. प्रसंस्करण को लेकर वन धन विकास केन्द्र के समिति सदस्यों से जानकारी ली।  गौरतलब है कि राजधानी रायपुर में राज्योत्सव स्थल पर अनेक विभागों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की योजनाओं और विभागीय जानकारी प्रदान करने प्रदर्शनी भी है। इसमें विभागीय प्रदर्शनी का मुख्य द्वार इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर के प्रसिद्ध चेंदरू द्वार की तर्ज पर बनाया गया है। इसमें बस्तर के आदिवासी युवक चेंदरू और बाघ की मित्रता को दर्शाया गया है, जो मानव और वन्यजीव के सह-अस्तित्व का प्रतीक है। सोमवार 2 नवंबर को विभागीय मंत्री  केदार कश्यप प्रदर्शनी निरीक्षण के लिए पहुँचे। मंत्री  कश्यप ने वनोपजों से बनी औषधियों के बारे में समिति और विभागीय अधिकारियों से जानकारी ली। इस दौरान लहसुन व अन्य वनोपज से बनी दवाओं के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कोदो से बने बिस्कुट का स्वाद चखा और इसकी सराहना की। मंत्री  कश्यप ने कभी नक्सलवाद से जुड़ी रहने वाली आत्मसमर्पित महिलाएँ जो अब वन धन विकास केन्द्रों से जुड़कर मुख्यधारा में काम कर रही हैं, उनसे चर्चा की।  राज्योत्सव के दौरान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से ‘संवरता छत्तीसगढ़’ थीम के अंतर्गत ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की उपलब्धियां प्रदर्शित की गई हैं। विभाग के अनुसार वर्ष 2024 में  3.50 करोड़ और वर्ष 2025 में 3.55 करोड़ पौधे रोपे गए। किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत 36,896 किसानों ने अपनी 62,441 एकड़ निजी भूमि पर 3.67 करोड़ पौधे लगाए हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने के अवसर भी बने हैं। बदलता बस्तर’ पैनल में क्षेत्र में आए बदलाव और आजीविका संवर्धन के प्रयासों को दर्शाया गया है। इसके तहत 572 देवगुड़ियों का निर्माण एवं जीर्णाेद्धार किया गया है। मनरेगा के माध्यम से 21.67 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ है। वनोपज संग्रहण से ग्रामीणों को सीधा लाभ मिल रहा है। कांगेर वैली क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 35 जिप्सियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे लगभग 200 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। संयुक्त वन प्रबंधन एवं रोजगार स्टॉल पर बांस से बने घर, नाव, मछली, लालटेन, मंदिर, फूलदान और सजावटी उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। ये उत्पाद ग्रामीण कारीगरों की कला और कौशल को सामने लाते हैं। वन धन केंद्रों में तैयार शहद, आंवला और अन्य उत्पाद भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। औषधीय पादप बोर्ड की ‘घर की बाड़ी में औषधीय पौधों का रोपण’ योजना के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आय के अवसरों से जोड़ने की जानकारी दी जा रही है। बोर्ड के अनुसार बाड़ी में सिंगी और सतावर जैसे पौधे लगाकर महिलाएं सालाना 20 से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर सकती हैं और इसका लाभ 20 वर्षों तक मिल सकता है। धमतरी जिले के 27 गांवों में पायलट परियोजना के तहत 1.21 लाख पौधे लगाए गए हैं। छत्तीसगढ़ हर्बल्स स्टॉल पर सफेद मूसली चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, आंवलकी चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू, महाभृंगराज तेल और एलोवेरा साबुन जैसे उत्पाद प्रदर्शित हैं। कांगेर घाटी, तीरथगढ़ जलप्रपात और ग्रामीण तालाब के मॉडल भी दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। प्रदर्शनी देखने पहुंचे ग्राम मरोद के  त्रिवेंद्र साहू और  रवि निर्मलकर ने कहा कि वन विभाग की प्रदर्शनी देखकर लगा, जैसे पूरे छत्तीसगढ़ के जंगल की खूबियां एक ही जगह सिमट आयी हो। बांस की कलाकृतियां, औषधीय पौधों की जानकारी और हर्बल उत्पाद बहुत उपयोगी हैं। उन्होंने जंगलों के संरक्षण के साथ ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने की पहल को सराहनीय बताया।

दिल्ली पुलिस मुख्यालय में जवानों का हंगामा, वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े पुलिसकर्मी

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में सोवार यानी आज एक अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला। प्रदर्शन करने वाले दिल्ली पुलिस के जवान थे, जो अपनी मांगों और सुरक्षा को लेकर प्रोटेस्ट कर रहे थे। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि लोगों को इंसाफ दिलवाने वालों को ही सड़क पर उतरकर इंसाफ मांगना पड़ रहा है। दरअसल, एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के नेतृत्व में दिल्ली पुलिस के जवानों ने सोमवार को वकीलों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान जवानों को पुलिस कर्मियों द्वारा रोकने की कोशिश की गई लेकिन, उन्होंने एक नहीं सुनी। पुलिस मुख्यालय में नारेबाजी वहीं, प्रोटेस्ट करते हुए दिल्ली पुलिस के जवान दिल्ली पुलिस मुख्यालय में घुस गए और विरोध के नारे लगाए। इस दौरान महिला पुलिसकर्मी भी प्रदर्शन में नजर आईं। उन्होंने भी अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। वकीलों के खिलाफ प्रोटेस्ट बताया गया कि काफी देर हंगामे के बाद पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के साथ पुलिस जवानों की बैठक हुई। इस बैठक में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने कई मांगें रखीं, जिनमें वकीलों के खिलाफ दर्ज केस रद नहीं किया जाना चाहिए। ये हैं प्रमुख मांगें वहीं, दूसरी मांग बार काउंसिल सदस्य का नाम केस नहीं हटाया जाना चाहिए। तीसरी मांग है कि जो भी पुलिसकर्मी आज प्रदर्शन में शामिल हुए उनके खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। अगर पुलिस विभाग निलंबन से लेकर और भी कोई सख्त कार्रवाई करना है तो केवल मेरे खिलाफ की जाए।  

राज्योत्सव में पत्रकारिता विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने देखी छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा और सांस्कृतिक विरासत

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के अवसर पर नवा रायपुर में आयोजित प्रदर्शनी में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने शैक्षणिक भ्रमण कर प्रदेश की विकास यात्रा, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विभिन्न क्षेत्रों में हासिल उपलब्धियों की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा विभाग सहित विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और शासन की योजनाओं, शैक्षणिक नवाचारों तथा आधुनिक तकनीक आधारित सुविधाओं के बारे में जाना। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने उच्च शिक्षा विभाग की प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था, शैक्षणिक नवाचारों तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों की उपलब्धियों की जानकारी ली। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रदर्शनी में उपलब्ध जानकारियों का अध्ययन करने और उन्हें अपने शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। कुलपति प्रो. दयाल ने कहा कि राज्योत्सव केवल उत्सव और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा, सांस्कृतिक पहचान और उपलब्धियों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। यहां विद्यार्थियों को समाज, संस्कृति, प्रशासन, विकास और जनसंचार के विभिन्न आयामों को प्रत्यक्ष रूप से जानने और समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए ऐसे आयोजन विशेष रूप से उपयोगी हैं, क्योंकि इससे उनकी अवलोकन क्षमता, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और रचनात्मक अभिव्यक्ति को नई दिशा मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों से शैक्षणिक भ्रमण के अनुभवों को अपने अध्ययन, शोध और रचनात्मक पत्रकारिता से जोड़ने का आह्वान किया।  विश्वविद्यालय के कुलसचिव  सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है। इससे उनका ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यावसायिक समझ व्यापक होती है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक गतिविधियों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल का स्वागत किया तथा प्रदर्शनी में उच्च शिक्षा से संबंधित गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी।  शैक्षणिक भ्रमण के दौरान मती लीली दयाल, विभागाध्यक्ष डॉ. नृपेंद्र कुमार शर्मा, अतिथि शिक्षक डॉ. कपिल देव प्रजापति, डॉ. अनिल कुमार शुक्ला,  जीतेन्द्र वास सहित विश्वविद्यालय के कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

बस्तर के धनसिंह बघेल को मिलेगा प्रतिष्ठित ‘ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार’

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय और प्रेरणादायक कार्य करने वाले विभूतियों को सम्मानित किए जाने की परंपरा के तहत इस वर्ष बस्तर अंचल से एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। राज्य शासन ने जगदलपुर के चित्रकोट स्थित प्राथमिक कुडुक मछुआ एवं नौका विहार सहकारी समिति मर्यादित के अध्यक्ष श्री धनसिंह बघेल को राज्य के प्रतिष्ठित ‘ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने की घोषणा की है। शून्य से शिखर तक का सफर- पारंपरिक आजीविका से सहकारिता की मिसाल इंद्रावती नदी के तट पर बसे इस वनांचल अंचल में कभी ग्रामीण पारंपरिक रूप से मछली पकड़ने, वनोपज संग्रहण और सीमित कृषि पर ही आश्रित हुआ करते थे। मत्स्य पालन विभाग के मार्गदर्शन में वर्ष 2009 में मात्र 42 सदस्यों को संगठित कर श्री धनसिंह बघेल ने इस समिति की नींव रखी थी। शुरुआती संघर्षों के बाद इस समिति ने वर्ष 2014 से चित्रकोट सिंचाई जलाशय और ग्राम पंचायत के रावन मुंडा को पट्टे पर लेकर मत्स्य पालन की दिशा में एक नया अध्याय शुरू किया। प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात के पर्यटन महत्व को पहचानते हुए समिति ने सहकारिता विभाग के सहयोग से इसमें श्नौका विहारश् (बोटिंग) को भी जोड़ा, जो आज इनकी सफलता का सबसे बड़ा आधार बन गया है। स्वावलंबन और आर्थिक तरक्की की कहानी वर्तमान में 62 सदस्यों (जिसमें 41 पुरुष और 21 महिलाएं शामिल हैं) की सहभागिता वाली यह समिति आज बस्तर में स्वावलंबन का एक सशक्त केंद्र बन चुकी है। जलाशय और नदी से प्रतिवर्ष क्रमशः 1,980 और 3,600 किलोग्राम मछली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे लगभग साढ़े 9 लाख रुपये की आय हो रही है। पर्यटकों को नौका विहार की सुविधा उपलब्ध कराकर सालाना लगभग 8 लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो रही है। समिति का औसत वार्षिक शुद्ध लाभ अब 10 लाख रुपये तक पहुँच चुका है, जिसमें अकेले वित्त वर्ष 2024-25 में ही 8,32,985 रुपये का शानदार शुद्ध लाभ दर्ज किया गया। आत्मनिर्भरता की नई मिसाल और जीवनस्तर में सुधार  वर्तमान में इस समिति के पास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के रूप में 250 लाइफ जैकेट, 7 नावें और आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। शासन की शुरुआती योजनाओं और अनुदानों से संबल मिलने के बाद अब यह समिति पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुकी है। अपनी मेहनत और वित्तीय मजबूती के दम पर समिति ने खुद के खर्चे से मछली अवतरण के लिए लैंडिंग सेंटर का निर्माण कराया है और परिवहन के लिए पिकअप वाहन भी खरीदा है।         इस सहकारिता मॉडल ने बस्तर के 62 परिवारों के जीवनस्तर में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। आज इन परिवारों के सदस्य अपनी मेहनत के बल पर मोटरसाइकिल जैसी सुविधाएं जुटाने के साथ-साथ अपने बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने में पूरी तरह सक्षम हो रहे हैं। श्री धनसिंह बघेल के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शिता ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय संसाधनों, सहकारिता की शक्ति और पर्यटन के सुनियोजित मेल से वनांचल के लोगों की तकदीर और तस्वीर दोनों बदली जा सकती हैं। उनकी इस उपलब्धि पर पूरे बस्तर अंचल में हर्ष का माहौल है।

पटाखों ने बस में मचाई तबाही! धू-धू कर जली सुपर आनंद बस, 20 यात्रियों ने कूदकर बचाई जान

बालोद छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डौंडीलोहारा-बालोद मुख्य मार्ग पर सोमवार रात एक चलती हुई यात्री बस में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते यह बस आग के गोले में तब्दील हो गई और पूरी तरह जलकर खाक हो गई। समय रहते यात्री बस से उतर गए, इसलिए किसी के हताहत होने की घटना सामने नहीं आई है। बस के भीतर और पिछली डिक्की में भारी मात्रा में पटाखे भरे हुए थे, जो आग की चपेट में आने के बाद एक के बाद एक जोरदार धमाकों के साथ फटने लगे। इन धमाकों की गूंज से आसपास के इलाके में दहशत फैल गई। 

बिजली सब्सिडी बचानी है तो तुरंत कराएं e-KYC, भोपाल के एक लाख उपभोक्ताओं को कंपनी की चेतावनी

भोपाल अटल गृह ज्योति योजना के तहत बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले करीब एक लाख उपभोक्ताओं ने अब तक ई-केवाईसी नहीं कराई है। भोपाल शहर वृत्त में योजना के तहत लगभग दो लाख उपभोक्ता हैं, जिनमें से आधे का ही सत्यापन हो पाया है। बिजली सब्सिडी से होना पड़ सकता है वंचित ई-केवाईसी नहीं कराने पर उपभोक्ताओं को योजना के तहत मिलने वाली बिजली सब्सिडी से वंचित होना पड़ सकता है। योजना के तहत पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने 150 यूनिट तक बिजली खपत पर रियायत दी जाती है। इसमें पहली 100 यूनिट बिजली का बिल अधिकतम 100 रुपये होता है।