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Monsoon Session 2026: दो-तिहाई बहुमत की तैयारी में NDA, शरद पवार गुट के 8 सांसद बने चर्चा का केंद्र

 नई दिल्ली संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने वाला है और इससे पहले सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) दो तिहाई बहुमत जुटाने की जुगत में जुटा हुआ है. पहले तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के पाला बदल और फिर उद्धव ठाकरे की पार्टी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की पार्टी में शामिल होने के बाद अब एनडीए की नजर शिवसेना (यूबीटी) की गठबंधन सहयोगी शरद पवार की पार्टी के सांसदों पर है।  सूत्रों की मानें तो एनसीपी (शरद पवार) के लोकसभा में आठ सांसद एनडीए के संपर्क में हैं. हालांकि, इसे लेकर अभी कुछ भी तय नहीं है कि इस सांसदों का ठिकाना कौन सी पार्टी होगी. एनडीए की अगुवाई कर रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इन सांसदों को लेने के लिए तैयार नहीं है. बीजेपी नेतृत्व ने इनमें से किसी को मंत्री पद देने के कयास भी खारिज कर दिए हैं।  शरद पवार की पार्टी के सांसद भविष्य में सुनेत्रा परिवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में जा सकते हैं. एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की संभावनाएं फिलहाल नकारी जा रही हैं. एनसीपी (शरद पवार) के सांसदों की बगावत के पीछे पार्टी के कांग्रेस में विलय के कयासों को वजह बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि कांग्रेस में विलय की अटकलों से शरद पवार की पार्टी के सांसदों में बेचैनी है।  एनसीपी शरद गुट में बेचैनी  दरअसल, कांग्रेस और एनसीपी शरद पवार के विलय की अटकलों से भी इन सांसदों में बेचैनी की बात कही जा रही है. वे 2029 के लोक सभा चुनाव में अपनी संभावनाओं को लेकर आश्वस्त नहीं बताए जा रहे हैं. इनमें से कई का मानना है कि कांग्रेस में विलय से शायद उनकी संसद में वापसी की संभावना प्रबल न रहे. इनमें से एक सांसद ने बताया कि वैसे भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव तीन साल दूर हैं. ऐसे में राज्य और केंद्र दोनों सरकारों से दूरी बनाना और उनका विरोध करना उनके संसदीय क्षेत्रों में उन्हें कठिनाई पैदा कर रहा है।    परिसीमन बिल पर सरकार का देंगे साथ? सूत्रों के अनुसार महिला आरक्षण और परिसीमन के लिए संविधान संशोधन विधेयक पर एनसीपी शरद पवार के इन सांसदों के समर्थन के रास्ते तलाशे जा रहे हैं. यह पता लगाया जा रहा है कि क्या वे संविधान संशोधन विधेयकों का समर्थन कर सकते हैं या फिर मतदान के दौरान अनुपस्थित रह कर दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा कम करने में सरकार की मदद कर सकते हैं. एक नेता के अनुसार महाराष्ट्र में शरद पवार ने मुख्यमंत्री रहते हुए ही सबसे पहले महिला आरक्षण का कदम उठाया गया था. स्थानीय स्वशासन निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था. ऐसे में सैद्धांतिक तौर पर एनसीपी शरद पवार को इस बिल का समर्थन करने में परेशानी नहीं आनी चाहिए।    शरद गुट में टूट की संभावना नहीं  यह कहा जा रहा है कि शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों की ही तरह एनसीपी शरद पवार के सांसदों के टूट कर विलय की संभावना फिलहाल नहीं है. बीजेपी नेतृत्व भी इसके पक्ष में नहीं बताया जा रहा है. पार्टी नेतृत्व शरद पवार और सुप्रिया सुले से दूरी बना कर रखना चाहता है. ऐसे में उन अटकलों को खारिज कर दिया गया है कि एनडीए को समर्थन के बदले एनसीपी शरद पवार के नेताओं को केंद्र में मंत्री पद दिया जा सकता है।  फिलहाल अजित गुट के साथ विलय नहीं  दूसरी ओर एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की संभावना को फिलहाल नकार दिया गया है. एनसीपी अजित पवार के नेताओं के मुताबिक अजित पवार के निधन के बाद से ही इस बारे में बात आगे नहीं बढ़ी है. कांग्रेस में एनसीपी शरद पवार के विलय की अटकलों ने इन संभावनाओं पर फिलहाल पूरी तरह से रोक भी लगा दी है. हालांकि, आगे चल कर एनसीपी शरद पवार के लोक सभा सांसदों के एनसीपी अजित पवार में विलय की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।  शरद पवार की पार्टी के सांसद 2029 के लोकसभा चुनाव में अपने टिकट को लेकर सशंकित हैं. एनसीपी (एसपी) के कुछ सांसदों का यह भी कहना है कि केंद्र में एनडीए की सरकार है ही, महाराष्ट्र में भी एनडीए ही सत्ता में है. ऐसे में उनको अपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान कराने, विकास कार्य कराने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।  इन सबके बीच चर्चा इस बात की है कि शरद पवार की अगुवाई वाली पार्टी के सांसदों का समर्थन किस तरह से एनडीए ले सकता है, इसकी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. इस पूरी कवायद के पीछे महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिशें हैं। 

NDA की ताकत बढ़ने के संकेत, 5 सांसद दे सकते हैं साथ; जानिए कितना बदलेगा आंकड़ा

नई दिल्ली मॉनसून सत्र से पहले ही एनडीए का संख्याबल लोकसभा में बढ़ने के आसार हैं। अटकलें हैं कि एक और विपक्षी दल के सांसद टूटकर एनडीए में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। खास बात है कि हाल ही में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना उद्धव बालासाहब ठाकरे के सदस्यों ने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है। क्या टूटेगी शरद पवार की पार्टी? मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि वरिष्ठ नेता शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एसपी के सांसदों में टूट हो सकती है। कहा जा रहा है कि 5 पार्टी सांसद एनडीए को समर्थन देने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, अब तक साफ नहीं हो सका है कि ये सांसद कौन हैं। कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद एनसीपी में टूट की अटकलें होने जा रही थीं। खबरें ये भी थीं कि शिवसेना यूबीटी में टूट के बाद शरद पवार ने सांसदों से संपर्क साधा था। हालांकि, पार्टी ने इसका औपचारिक ऐलान नहीं किया है। नंबर गेम समझें टीएमसी के 20 सांसदों ने अलग गुट बनाकर नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय करने का ऐलान कर दिया था। इस संबंध में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को समर्थन पत्र भी सौंपा जा चुका है। वहीं, सोमवार को ही शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों ने बगावत कर एनडीए को समर्थन दे दिया है। ये सभी सांसद महाराष्ट्र सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे। फिलहाल, एनसीपी एसपी के पास 8 लोकसभा सांसद हैं और अगर 5 टूटते हैं, तो एनडीए को फायदा हो सकता है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। लोकसभा में कुल सीटें 543 हैं और दो तिहाई के लिए 362 सीटों की जरूरत है। अब जब निचले सदन में नौगांव, बशीरहाट और शिलॉन्ग के रूप में 3 सीटें खाली हैं, तो यह संख्या घटकर 360 पर आ जाती है। अप्रैल में एनडीए कमजोर समर्थन के चलते परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन बिल पास नहीं करा पाया था। फिलहाल, एनडीए के पास 293 सदस्य हैं। अटकलें ये भी हैं कि 37 लोकसभा सांसदों वाली समाजवादी पार्टी में भी टूट हो सकती है। भाजपा के कई नेता ऐसा दावा कर रहे हैं। हालांकि, अखिलेश यादव की अगुवाई वाली पार्टी ने इससे इनकार कर दिया है। गणित NCPI के 20 सांसदों, शिवसेना के 6 सांसदों के समर्थन के बाद एनडीए 319 सीटों पर पहुंच जाएगा। हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन दो तिहाई बहुमत के आंकड़े से खासा दूर है। अगर एनसीपी एसपी के 5 और सांसद समर्थन देते हैं, तो संख्या 324 पर पहुंच जाएगी। अगर द्रमुक मतदान से दूर रहती है, तो सदन में एनडीए को लाभ हो सकता है।  

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के 5 साल बाद देश को मिलेगी पहली NDA-प्रशिक्षित महिला फाइटर पायलट

चंडीगढ़  भारतीय सैन्य इतिहास में 13 जून 2026 का दिन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज होने जा रहा है। वर्ष 2021 में महिलाओं को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश देने संबंधी ऐतिहासिक फैसले के पांच वर्ष बाद देश को एनडीए रूट से पहली महिला फाइटर पायलट मिलने जा रही है। चरखी दादरी जिले के गांव छपार की बेटी ईशिता सांगवान आज भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में स्थायी कमीशन प्राप्त कर नया इतिहास रचेंगी। हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी डुंडीगल में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान ईशिता को स्थायी कमीशन प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही वह एनडीए के पहले महिला बैच से फाइटर पायलट बनने वाली देश की पहली अधिकारी बन जाएंगी। देशभर में थीं केवल दो सीटें,पहली महिला फाइटर पायलट बनेंगी ईशिता ईशिता की सफलता उनकी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प की कहानी है। वर्ष 2021 में जब महिलाओं के लिए एनडीए के द्वार खुले, तब वह 12वीं कक्षा की छात्रा थीं। पिता से इस अवसर की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने फाइटर पायलट बनने का लक्ष्य तय कर लिया। राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के लिए वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में केवल दो सीटें उपलब्ध थीं। ईशिता ने लिखित परीक्षा और एसएसबी साक्षात्कार में सफलता प्राप्त करने के साथ-साथ फाइटर पायलट बनने के लिए अनिवार्य कंप्यूटरीकृत पायलट चयन प्रणाली (सीपीएसएस) परीक्षा भी पहली ही कोशिश में उत्तीर्ण कर ली। खड़कवासला से डुंडीगल तक तय किया गौरवपूर्ण सफर पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में तीन वर्ष की कठिन सैन्य प्रशिक्षण अवधि के दौरान ईशिता ने हर चुनौती का सामना किया। इसके बाद उन्होंने एयर फोर्स अकादमी, डुंडीगल में उन्नत उड़ान प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। पासिंग आउट परेड के बाद वह भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम का हिस्सा बनकर देश की वायु सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाएंगी। ईशिता एक शिक्षित परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता चरण सिंह सांगवान विद्यालय प्राचार्य हैं, जबकि माता अनीता सांगवान शिक्षिका हैं। परिवार के अनुसार उनकी सफलता में स्वर्गीय दादी लिछमा देवी के आशीर्वाद और परिवार के निरंतर सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जुड़वां बहन आस्था एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं, जबकि भाई आर्यन पुणे से बीटेक कर रहे हैं। ईशिता सांगवान की यह उपलब्धि न केवल चरखी दादरी और हरियाणा, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। यह बदलते भारत की उस नई तस्वीर को भी रेखांकित करती है, जहां बेटियां अब हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं और आसमान भी उनकी उड़ान को सीमित नहीं कर पा रहा।

राज्यसभा में बदलता गणित: शरद-सिंघवी की कुर्सी खाली, BJP कब्जे की तैयारी में

नई दिल्ली लोकसभा के बाद राज्‍यसभा में भी इंडिया अलायंस की ताकत घटने जा रही है. चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान क‍िया है. लेकिन यह महज एक रूटीन चुनाव नहीं है; यह भारतीय राजनीति के उन दिग्गजों की विदाई और नए समीकरणों के उदय की कहानी है, जो संसद के गलियारों में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदलने वाला है. सबसे बड़ी सुगबुगाहट उन कुर्सियों को लेकर है जो खाली होने जा रही हैं. विपक्षी एकता के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार और कांग्रेस के संकटमोचक अभिषेक मनु सिंघवी जैसे चेहरों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी इन खाली होती कुर्सियों पर अपना ‘कमल’ खिलाकर राज्‍यसभा में अपनी बादशाहत बनाने जा रही है? 10 राज्य और 37 सीटें चुनाव आयोग के मुताबिक, अप्रैल में खाली हो रही 37 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान और उसी दिन मतगणना होगी. ये सीटें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों से आती हैं. सीटों का गणित एक नजर में महाराष्ट्र    7    असम    3 पश्चिम बंगाल    6    हरियाणा    2 बिहार    6    छत्तीसगढ़    2 तमिलनाडु    6    हिमाचल प्रदेश    1 ओडिशा    4    स्रोत-    ECI शरद पवार से सिंघवी तक… दिग्गजों की विदाई एनसीपी के संस्थापक शरद पवार का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. महाराष्ट्र की बदली हुई राजनीति में, जहां अजित पवार की पार्टी अब एनडीए का हिस्सा हैं, शरद पवार के लिए दोबारा सदन पहुंचना एक बड़ी चुनौती है. वहीं, कांग्रेस के दिग्गज वकील और रणनीतिकार अभिषेक मनु सिंघवी की सीट भी खाली हो रही है. उनके अलावा प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना-UBT), केटीएस तुलसी (कांग्रेस), और रामनाथ ठाकुर (JDU) जैसे नाम भी रिटायर होने वालों की सूची में हैं. इन दिग्गजों की विदाई विपक्ष के लिए एक बड़ा वैचारिक और रणनीतिक वैक्यूम पैदा कर सकती है. महाराष्ट्र और बिहार: एनडीए के लिए ‘लॉटरी’ का मौका महाराष्ट्र में 7 सीटों पर चुनाव होने हैं. अभी यहां बीजेपी और शरद पवार गुट के पास 2-2 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और रामदास आठवले के पास 1-1 सीट है. लेकिन राज्य विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए यानी बीजेपी, एकनाथ शिंदे शिवसेना और अजित पवार यहां ‘क्लीन स्वीप’ की स्थिति में दिख रहा है. जानकारों का मानना है कि बीजेपी यहां अपनी सीटों की संख्या में भारी इजाफा करेगी, जिससे शरद पवार और उद्धव ठाकरे के खेमे को बड़ा नुकसान हो सकता है. बिहार में भी 5 सीटों का समीकरण एनडीए के पक्ष में झुकता दिख रहा है. यहां जेडीयू की 2 और आरजेडी की 2 सीटें खाली हो रही हैं. नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद अब एनडीए यहां 3 सीटों पर मजबूत पकड़ रखता है, जबकि ‘इंडिया’ गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ सकता है. पश्चिम बंगाल और ओडिशा: बीजेपी मारेगी सेंध? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के गढ़ में बीजेपी अपनी पैठ मजबूत करने की तैयारी में है. यहां 6 सीटों पर चुनाव हैं. वर्तमान में TMC के पास 4 सीटें हैं और एक लेफ्ट (सीपीआई-एम) के पास. जिस तरह से बंगाल विधानसभा में वामपंथ का सफाया हुआ है, बीजेपी यहां सीपीआई-एम की सीट छीनकर अपना खाता खोलने और अपनी ताकत बढ़ाने के लिए तैयार है. ओडिशा में भी 4 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है. नवीन पटनायक की बीजेडी और बीजेपी के बीच यहां सीटों का बंटवारा विधानसभा की ताकत के आधार पर होगा, जहां बीजेपी अपनी मौजूदा 2 सीटों को बरकरार रखने या बढ़ाने की कोशिश करेगी. NDA vs INDIA… क‍िसके पास क‍ितने नंबर अनुमानों के मुताबिक, 16 मार्च के चुनाव एनडीए के लिए ‘सुपर संडे’ साबित हो सकते हैं. अनुमान है कि एनडीए को इन चुनावों में कम से कम 6 सीटों का फायदा होगा इससे एनडीए का आंकड़ा 21 के करीब पहुंच सकता है. दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को लगभग 4 सीटों का नुकसान होने की संभावना है. कांग्रेस के लिए तेलंगाना, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से अच्छी खबरें आ सकती हैं, जहाँ वह अपनी स्थिति में थोड़ा सुधार कर सकती है. बीजेपी कर रही रिकॉर्ड की तैयारी     साल 2026 बीजेपी के लिए राज्यसभा में ऐतिहासिक होने जा रहा है. मार्च के इन 37 सीटों के अलावा, पूरे साल में कुल 71 सदस्य रिटायर होने वाले हैं. अप्रैल में 32 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 9 बीजेपी से हैं. जून में 22 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 12 बीजेपी से हैं. इसी तरह नवंबर के अंत में 11 सदस्य रिटायर होंगे, इनमें से 9 बीजेपी से हैं.     बीजेपी न केवल अपनी सीटें बचा रही है, बल्कि क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के कमजोर राज्यों से अतिरिक्त सीटें खींच रही है. अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो बीजेपी अपने दम पर राज्यसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाएगी.     राज्यसभा में कुल 245 सीटें होती हैं. साधारण बहुमत के लिए किसी भी गठबंधन या दल को 123 सीटों की आवश्यकता होती है. वर्तमान में बीजेपी के पास लगभग 95-98 सदस्य हैं. NDA का आंकड़ा 115 से 118 के आसपास पहुंचता है.इस चुनाव के बाद राज्यसभा में एनडीए 123 के बहुमत के आंकड़े को पार कर सकती है. बदल जाएगा राज्‍यसभा का मिजाज शरद पवार और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे कद्दावर नेताओं की कमी विपक्ष को खलेगी, जबकि बीजेपी के लिए यह अपनी विधायी ताकत को और अधिक धार देने का अवसर है. राज्यसभा में बहुमत मिलने का मतलब है कि सरकार को अब विवादास्पद बिलों को पास कराने के लिए बीजेडी या वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. एनडीए की बढ़ती ताकत ने साफ कर दिया है कि ‘उच्च सदन’ की चाबी अब मजबूती से सत्तापक्ष के हाथों में जाने वाली है.  

बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ी, NDA जल्द करेगा विधायक दल की बैठक

पटना बिहार में चुनावी नतीजों के बाद नई सरकार के गठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। जल्द ही NDA विधायक दल की बैठक होगी। सुत्रों ने अनुसार, कल जदयू विधायक दल की बैठक होने वाली है। उम्मीद है कि जदयू की बैठक में नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुना जाएगा, जिसके बाद सरकार गठन की प्रक्रिया रफ्तार पकड़ लेगी। वहीं दूसरी तरफ BJP की बैठक भी कल होने की संभावना है। इस बैठक में मंत्री पदों का फॉर्मूला, डिप्टी सीएम का चयन, पर अंतिम चर्चा होगी।   20 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं नीतीश सीएम हाउस सूत्रों के मुताबिक, 17 नवंबर को नीतीश कुमार राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे। इसी दिन वे नई सरकार बनाने का दावा भी पेश कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, 20 नवंबर को नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। खबर है कि JDU के 11नेता मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। कुल मिलाकर करीब 18 मंत्री शपथ लेंगे।

बिहार चुनाव परिणाम पर शेखावत का बयान—‘जनता ने सच का साथ दिया’

जोधपुर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शनिवार को जोधपुर पहुंचे। एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों, जम्मू-कश्मीर विस्फोट और अंता उपचुनाव सहित कई मुद्दों पर विस्तृत प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और एनडीए गठबंधन के सभी घटक दलों ने इस चुनाव में मजबूत एकजुटता का परिचय दिया और सामूहिक संगठन शक्ति का उपयोग करते हुए चुनाव लड़ा। उन्होंने कहा कि बिहार के चुनाव में मुख्य मुकाबला ‘जंगल राज बनाम विकास’ के बीच था, और जनता ने जब चुनाव का समय आया, तो प्रचंड बहुमत देकर यह संदेश दिया कि अब देश की राजनीति का मुख्य आधार केवल और केवल विकास होगा। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि झूठे नैरेटिव गढ़कर, वोट चोरी जैसे अर्थहीन और आधारहीन आरोप लगाकर, संवैधानिक संस्थाओं पर लांछन लगाने वालों को जनता ने इस चुनाव में सख्त संदेश दिया है। शेखावत ने कहा कि देश में कई बार जनता ने सरकार बदलने के लिए घर से बाहर निकलकर अधिक मतदान किया, लेकिन इस बार जनता ने नकारात्मक और झूठ की राजनीति का जवाब देने के लिए लगभग 10% अधिक मतदान किया और एनडीए को प्रचंड बहुमत दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राजद के नेताओं ने चुनाव को हल्के स्तर पर ले जाने की कोशिश की। माननीय प्रधानमंत्री की माता जी से लेकर छठ मैया तक को उन्होंने नहीं बख्शा। बिहार की जनता ने इनके मुंह पर तमाचा मारकर जवाब दिया है। उन्होंने दावा किया कि जो दल सरकार बनाने की बातें कर रहे थे, वे दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए। शेखावत ने आगे कहा कि एनडीए के सभी घटक दल भाजपा, जदयू, लोजपा और जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ ने एक-दूसरे का समर्थन करते हुए 80 से 90% स्ट्राइक रेट हासिल किया। आतंकवाद पर सरकार का जीरो टॉलरेंस जम्मू-कश्मीर में हुए विस्फोट पर प्रतिक्रिया देते हुए शेखावत ने कहा कि अभी तक पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन दिल्ली हादसे से पहले ही सभी एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ काम कर रही थीं। उन्होंने कहा कि हादसा दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन उससे पहले 2900 किलो विस्फोटक की बरामदगी ने एक बड़े नुकसान को टाल दिया। शेखावत ने कहा, “सरकार का संकल्प है कि आतंकवाद के प्रति हमारा जीरो टॉलरेंस है। ऐसे कृत्यों को अंजाम देने वाले, चाहे देश के भीतर हों या बाहर, उन्हें निश्तेनाबूत किया जाएगा।” अंता उपचुनाव पर कही ये बात अंता उपचुनाव पर शेखावत ने कहा कि उपचुनाव कई मुद्दों से जुड़े होते हैं और इन्हें सामान्य चुनाव की तरह नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि अंता सीट ज्यादातर समय भाजपा के पास रही है, लेकिन जो भी कारण रहे हैं, वह आत्म अवलोकन का विषय है। शेखावत ने कहा, “हम सभी इस पर विचार करेंगे और आगे इस बात पर काम करेंगे कि भाजपा सरकार की नीतियों का प्रभाव देश की जनता के हृदय तक पहुँचे।”  

धमाकेदार कामयाबी की ओर एनडीए, साय कैबिनेट में उत्सव, मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को दी बधाई

रायपुर बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा नीत एनडीए की ऐतिहासिक प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का पूरा कैबिनेट जश्न मना रहा है. आज हो रही अहम कैबिनेट की बैठक के पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रिमंडल के तमाम सदस्यों को मिठाई खिलाकर एनडीए के प्रदर्शन पर बधाई दी. बता दें कि दोपहर डेढ़ बजे तक बिहार विधानसभा चुनाव में सामने आए रुझान में एनडीए को 201 सीटों पर बढ़त बना चुकी है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल नीत महागठबंधन 36 सीटों पर संघर्ष कर रही है, जिसमें से राजद 27 सीटों पर, कांग्रेस 4 सीटों पर अन्य 5 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.

एनडीए की प्रचंड बढ़त पर ओपी चौधरी का बयान– बिहार में एनडीए की सुनामी

रायपुर बिहार चुनाव 2025 के शुरुआती रुझानों में एनडीए गठबंधन की बढ़त पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होने कहा कि यह सिर्फ एनडीए की बढ़त ही नहीं आंधी और सुनामी भी है. बिहार की जनता ने एनडीए को आशीर्वाद दिया. एनडीए विकसित भारत की नींव डाल रहा है. उन्होंने कहा कि बिहार की जनता भी समझ रही हैं कि भाजपा और उनके सहयोगियों की सरकार बेहतर हैं. भाजपा और एनडीए को आशीर्वाद मिल रहा है. वहां सुशासन स्थापित किया जा रहा है. कांग्रेस पर वित्तमंत्री चौधरी ने साधा निशाना कांग्रेस के वोट चोरी वाले अभियान को लेकर मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कांग्रेस डूबती नांव हैं. महागठबंधन को जनता ने महठगबंधन करार दिया है. उनकी पार्टी के लोग अपनी जान बचाने इधर उधर भाग रहे हैं. इन्हें देश की जनता सबक सिखा रही है. जनता के बीच ये लोग नकारात्मक एजेंडा लेकर जाते हैं, अनर्गल आरोप लगाते हैं, जिसका जवाब जनता दे रही हैं.

घोषणापत्र लॉन्च कर 26 सेकेंड में गायब हुए NDA, कांग्रेस ने कहा – जनता को दिखा दिया सच

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एनडीए के ‘संकल्प पत्र 2025’ पर विपक्ष ने जबरदस्त हमला बोला है। कांग्रेस के वरीय पर्यवेक्षक अशोक गहलोत ने इसे झूठ का पुलिंदा करार दिया। उन्होंने कहा, “सिर्फ 26 सेकेंड में घोषणापत्र जारी किया गया और फिर मीडिया के सवालों से बचकर भाग खड़े हुए। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।” पटना के होटल मौर्या में आयोजित प्रेस वार्ता में गहलोत ने सवाल उठाते हुए कहा, “बीस साल से सरकार में रहकर एनडीए ने क्या काम किए, कौन-से वादे पूरे हुए, इसका जवाब क्यों नहीं दे रहे? और इस मौके पर नीतीश कुमार कहां थे? क्या वे बीमार हैं, या फिर उन्हें खुद अपने वादों पर भरोसा नहीं रहा?” गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से भागने का लगाया आरोप उन्होंने कहा कि कांग्रेस जो वादे कर रही है, उसे निभाने का साहस रखती है। गहलोत ने कहा, “हम हर वादा कैबिनेट से पास कराकर पूरा करेंगे। जनता अब जुमले नहीं, जवाब चाहती है।” मोकामा कांड की जांच हो: अनुपम कांग्रेस नेता अनुपम ने मोकामा में हुई हत्या की घटना पर कहा कि “एनडीए प्रत्याशी के काफिले में हथियार कहां से आया? इसकी न्यायिक जांच जरूरी है।” आरजेडी बोली- एनडीए का घोषणापत्र एक थका हुआ भाषण है कांग्रेस की बातों का समर्थन देते हुए आरजेडी प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि एनडीए का घोषणापत्र एक थका हुआ भाषण है जिसमें न योजना है, न नीयत। उन्होंने कहा, “महागठबंधन के काम को कॉपी करके अपने नाम पर बेचने की कोशिश की जा रही है। मगर जनता अब समझ चुकी है कि असली मुद्दा रोजगार, शिक्षा और उद्योग का है, और उस पर एनडीए के पास कोई जवाब नहीं।” गगन ने तंज करते हुए कहा, “नीतीश कुमार अब एनडीए में मुख्यमंत्री कम, मेहमान ज्यादा लग रहे हैं। बीजेपी ने उन्हें किनारे कर दिया है, और जनता इसे साफ देख रही है।”  

नीतीश का सीधा वार चिराग पर, JDU की पहली लिस्ट में उठा सियासी खेल; NDA में खलबली?

पटना बिहार की राजनीति में आज नई हलचल देखी गई जब नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) ने विधानसभा चुनाव 2025 के लिए पहली 57 उम्मीदवारों की सूची जारी की। इस सूची ने चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कुछ प्रमुख दावों पर सीधे चुनौती दी, जिससे गठबंधन के भीतर तनाव और नाराजगी की स्थिति बन सकती है। चिराग पासवान के लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पांच प्रमुख दावों वाली सीटों – मोरवा, सोनबरसा, राजगीर, गायघाट और मटिहानी पर जेडीयू ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। ऐसा बताया जा रहा था कि ये सीटें पहले चिराग की झोली में जाने वाली थीं। एनडीए में बढ़ेगा तनाव? पिछले चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि मोरवा और गायघाट पर 2020 में आरजेडी का दबदबा था, राजगीर और सोनबरसा पर जेडीयू जीता था, जबकि मटिहानी पिछली बार लोक जनशक्ति पार्टी ने जीती थी, लेकिन विजयी राजकुमार सिंह बाद में जेडीयू में शामिल हो गए थे। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के चलते इन सीटों पर सियासी निगाहें खास हैं और उम्मीदवारों की हर चाल का चुनावी मायने बढ़ गया है। इन सीटों पर जेडीयू का उम्मीदवार उतारना गठबंधन में संतुलन बदल सकता है और चिराग समर्थक ताकतों के साथ टकराव के अवसर बढ़ा सकता है जिससे एनडीए की मौजूदा स्थिति जटिल हो सकती है। जेडीयू की लिस्ट में 3 बाहुबली भी शामिल जेडीयू के उम्मीदवारों की सूची में तीन बाहुबली और कई अनुभवी नेता शामिल हैं। विशेष रूप से, मौजूदा सरकार के पांच कैबिनेट मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों से फिर मैदान में उतारे गए हैं। इसमें ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार (नालंदा), जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी (सरायरंजन), सूचना व जनसंपर्क मंत्री महेश्वर हजारी (कल्याणपुर), समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी (बहादुरपुर) और मद्य निषेध मंत्री रत्नेश सदा (सोनबरसा) शामिल हैं। जेडीयू ने 30 नए चेहरों को उतारा गौरतलब है कि जेडीयू की पहली सूची में 30 नए चेहरे और 27 पुराने प्रत्याशी शामिल हैं। चार महिला उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारा गया है, जिनमें मधेपुरा से कविता साहा, गायघाट से कोमल सिंह, समस्तीपुर से अश्वमेध देवी और विभूतिपुर से रवीना कुशवाहा का नाम शामिल है।