samacharsecretary.com

पौधरोपण, बांस शिल्प, वनोपज और हर्बल उत्पादों के जरिए दिखी वन संरक्षण और रोजगार संवर्धन की तस्वीर

रायपुर

छत्तीसगढ़ के 26वें स्थापना दिवस पर नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव स्थल में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ आदिवासी संस्कृति, ग्रामीण आजीविका और आत्मनिर्भरता की पहल एक साथ देखने को मिल रही हैं। आज राजधानी रायपुर में राज्योत्सव के दूसरे दिन वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने विभागीय स्टॉल का निरीक्षण भी किया। इस दौरान मंत्री  कश्यप ने वनोपजों से बने उत्पादों को चखा और उत्पादन. प्रसंस्करण को लेकर वन धन विकास केन्द्र के समिति सदस्यों से जानकारी ली। 

गौरतलब है कि राजधानी रायपुर में राज्योत्सव स्थल पर अनेक विभागों की प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की योजनाओं और विभागीय जानकारी प्रदान करने प्रदर्शनी भी है। इसमें विभागीय प्रदर्शनी का मुख्य द्वार इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर के प्रसिद्ध चेंदरू द्वार की तर्ज पर बनाया गया है। इसमें बस्तर के आदिवासी युवक चेंदरू और बाघ की मित्रता को दर्शाया गया है, जो मानव और वन्यजीव के सह-अस्तित्व का प्रतीक है। सोमवार 2 नवंबर को विभागीय मंत्री  केदार कश्यप प्रदर्शनी निरीक्षण के लिए पहुँचे। मंत्री  कश्यप ने वनोपजों से बनी औषधियों के बारे में समिति और विभागीय अधिकारियों से जानकारी ली। इस दौरान लहसुन व अन्य वनोपज से बनी दवाओं के औषधीय गुणों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कोदो से बने बिस्कुट का स्वाद चखा और इसकी सराहना की। मंत्री  कश्यप ने कभी नक्सलवाद से जुड़ी रहने वाली आत्मसमर्पित महिलाएँ जो अब वन धन विकास केन्द्रों से जुड़कर मुख्यधारा में काम कर रही हैं, उनसे चर्चा की। 

राज्योत्सव के दौरान वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से ‘संवरता छत्तीसगढ़’ थीम के अंतर्गत ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की उपलब्धियां प्रदर्शित की गई हैं। विभाग के अनुसार वर्ष 2024 में  3.50 करोड़ और वर्ष 2025 में 3.55 करोड़ पौधे रोपे गए। किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत 36,896 किसानों ने अपनी 62,441 एकड़ निजी भूमि पर 3.67 करोड़ पौधे लगाए हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाने के अवसर भी बने हैं।

बदलता बस्तर’ पैनल में क्षेत्र में आए बदलाव और आजीविका संवर्धन के प्रयासों को दर्शाया गया है। इसके तहत 572 देवगुड़ियों का निर्माण एवं जीर्णाेद्धार किया गया है। मनरेगा के माध्यम से 21.67 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ है। वनोपज संग्रहण से ग्रामीणों को सीधा लाभ मिल रहा है। कांगेर वैली क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 35 जिप्सियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे लगभग 200 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। संयुक्त वन प्रबंधन एवं रोजगार स्टॉल पर बांस से बने घर, नाव, मछली, लालटेन, मंदिर, फूलदान और सजावटी उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। ये उत्पाद ग्रामीण कारीगरों की कला और कौशल को सामने लाते हैं। वन धन केंद्रों में तैयार शहद, आंवला और अन्य उत्पाद भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

औषधीय पादप बोर्ड की ‘घर की बाड़ी में औषधीय पौधों का रोपण’ योजना के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आय के अवसरों से जोड़ने की जानकारी दी जा रही है। बोर्ड के अनुसार बाड़ी में सिंगी और सतावर जैसे पौधे लगाकर महिलाएं सालाना 20 से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर सकती हैं और इसका लाभ 20 वर्षों तक मिल सकता है। धमतरी जिले के 27 गांवों में पायलट परियोजना के तहत 1.21 लाख पौधे लगाए गए हैं। छत्तीसगढ़ हर्बल्स स्टॉल पर सफेद मूसली चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, आंवलकी चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू, महाभृंगराज तेल और एलोवेरा साबुन जैसे उत्पाद प्रदर्शित हैं। कांगेर घाटी, तीरथगढ़ जलप्रपात और ग्रामीण तालाब के मॉडल भी दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं।

प्रदर्शनी देखने पहुंचे ग्राम मरोद के  त्रिवेंद्र साहू और  रवि निर्मलकर ने कहा कि वन विभाग की प्रदर्शनी देखकर लगा, जैसे पूरे छत्तीसगढ़ के जंगल की खूबियां एक ही जगह सिमट आयी हो। बांस की कलाकृतियां, औषधीय पौधों की जानकारी और हर्बल उत्पाद बहुत उपयोगी हैं। उन्होंने जंगलों के संरक्षण के साथ ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने की पहल को सराहनीय बताया।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here