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इंदौर में साफ-सफाई की मिसाल, लेकिन भागीरथपुरा में गंदा पानी पीकर बुजुर्ग की मौत, 150 लोग बीमार; सीएम ने लिया संज्ञान

इंदौर
मध्य प्रदेश का इंदौर शहर लगातार 8 साल से देश का सबसे स्वच्छ शहर होने का खिताब अपने नाम करता आया है। अब इसी शहर में गंदा पानी पीने की वजह से 150  से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए हैं। पानी पीने के बाद इन लोगों को उल्टी, दस्त और शरीर में पानी की कमी जैसी दिक्कतें हुईं और वे अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। लोगों का शिकायत है कि वे नगर निगम की ओर से सप्लाई किए जाने वाला पानी पीने के बाद बीमार पड़े हैं। मामला गंभीर होने के बाद पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। इस मामले में इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्हव ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

भागीरथपुरा में डायरिया से मौत के बाद मचा हड़कंप, CM ने लिया संज्ञान.

गंदे पानी की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संज्ञान लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सभी मरीजों का सही इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सीएम ने कहा कि इलाज में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरी दवाएं, एक्सपर्ट और संसाधन तुरंत उपलब्ध कराए जाएं।

वहीं इलाज के लिए भर्ती एक बुर्जुग व्यक्ति की मौत हो गई। उल्टी और दस्त के कारण उसे कमजोरी आ गई थी। सुबह कुछ मरीजों को परदेशीपुरा के अस्पताल से छुट्टी भी हो गई है। दूषित पेयजल की आशंका के चलते नगर निगम ने टैंकरों से मंगलवार को बस्ती में जलापूर्ति की। अफसरों ने भी बस्ती का दौरा किया है। बस्ती से पानी के जो नमूने लिए हैं, उनकी रिपोर्ट मंगलवार को आएगी।

पांच दिन में डेढ़ सौ से ज्यादा लोग बीमार हुए हैं। फिलहाल 15 लोग अलग-अलग अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें उल्टी दस्त और कमजोरी की शिकायत है। इस घटना को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी देरी से जागा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रशासन को जरूरी निर्देश दिए हैं। सोमवार रात मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के दौरे के बाद डाॅक्टर मरीजों की जानकारी जुटाने अस्पताल पहुंचे। इलाज के लिए वर्मा अस्पताल में भर्ती नंदलाल पाल की मौत हुई। उनकी उम्र 80 वर्ष थी। उनकी मौत की पुष्टि क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला ने भी की है।

बस्ती में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात की गई है। जिन लोगों को दस्त और उल्टी की शिकायत हो रही है। उन्हें दवाएं दी जा रही हैं। मंगलवार सुबह मेयर पुष्य मित्र भार्गव, पार्षद कमल वाघेला के साथ बस्ती पहुंचे और जलापूर्ति की स्थिति देखी। नर्मदा विभाग के अफसरों का कहना है कि पानी की जांच की गई है। प्रारंभिक तौर पर पानी दूषित नहीं पाया गया।

बस्ती में डायरिया किस वजह से फैला। इसकी जांच के लिए पानी के सैंपल लिए गए हैं। रहवासियों का कहना है कि बस्ती में दूषित पेयजल की सप्लाई हो रही है। नलों में पहले गंदा पानी आता है। फिर कुछ देर के लिए साफ पानी मिलता है। कई बार गंदे पानी की शिकायत अफसरों से की गई, लेकिन समस्या का हल नहीं हुआ। मरीजों का इलाज कर रहे डाक्टरों का कहना है कि पांच दिन से बस्ती के लोग आ रहे हैं। पतले दस्त और उल्टी ज्यादा होने से शरीर में कमजोरी आ गई है। रोज पांच-सात मरीज आ रहे हैं। सभी में डायरिया के लक्षण पाए गए हैं, हालांकि खतरे की बात नहीं है।

देर रात नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, MLA रमेश मेंदोला और मेयर पुष्यमित्र भार्गव वर्मा ने अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने मरीजों से बात की और स्थिति का जायजा लिया।

मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि सभी मरीजों का इलाज पूरी तरह से फ्री होगा और जिन लोगों ने इलाज के लिए पैसे जमा किए हैं, उन्हें वापस कर दिए जाएंगे। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए, वे उबला हुआ पानी पिएं।

कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि शिकायत मिलते ही मेडिकल और प्रशासनिक टीमों को मौके पर भेज दिया गया था। पूरे इलाके पर लगातार नजर रखी जा रही है, और स्वास्थ्य विभाग को इलाज का रेगुलर रिव्यू करने के निर्देश दिए गए हैं।

कांग्रेस ने इस मामले को लेकर वार्ड ऑफिस पर विरोध प्रदर्शन किया। विधानसभा क्षेत्र 2 के जोन नंबर 8 के कार्यकर्ताओं ने शंख और घंटियां बजाकर और मटके फोड़कर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि वार्ड 30, 37 और 28 में लंबे समय से गंदे पानी, जाम ड्रेनेज लाइनों, कूड़े के ढेर और सफाई की अनदेखी की समस्या है, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई।

भागीरथपुरा की घटना ने एक बार फिर शहरी इलाकों में पीने के पानी की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन के अगले कदम पर हैं।

 

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