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खदानें बढ़ीं, समस्याएं नहीं घटीं: माइनिंग के विरोध में ग्रामीण एकजुट

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी

 छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल और नक्सल प्रभावित मानपुर ब्लॉक के खड़गांव थाना क्षेत्र में स्थित भिलाई स्टील प्लांट (सेल) की दुलकी लौह अयस्क खदान को लेकर ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है. भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन ने लीज क्षेत्र में लौह अयस्क की उपलब्धता का आकलन करने के लिए एक्सप्लोरेटरी ड्रिलिंग की अनुमति ग्राम सभा के माध्यम से मांगी है, लेकिन वन प्रबंधन समिति और स्थानीय ग्रामीण फिलहाल इस अनुमति के खिलाफ खड़े हो गए हैं.

इसी सिलसिले में खड़गांव थाना क्षेत्र के ग्राम दौरबा में ग्रामीणों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें ड्रिलिंग कार्य के विरोध में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया. बैठक में वन प्रबंधन समिति बोदरा के सचिव रामकुमार सलामे, ग्रामीण महिला बिमला सलामे सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक ड्रिलिंग और खदान से जुड़ी सड़कों के उपयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी. ग्रामीणों का आरोप है कि खनन कंपनियां केवल खनिज दोहन में रुचि दिखा रही हैं, जबकि नियमों के तहत क्षेत्र में बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ है.

ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि ड्रिलिंग के दौरान होने वाले जमीनी कंपन से गांवों में मकानों को नुकसान पहुंच सकता है. इसके अलावा खदानों से निकलने वाले लाल पानी से खेतों और फसलों पर भविष्य में खतरा मंडराने की बात भी कही गई. ग्रामीणों के अनुसार इन्हीं कारणों से फिलहाल वन प्रबंधन समिति से मांगी गई ड्रिलिंग अनुमति देने पर सहमति नहीं बनी है. हालांकि यह भी तय किया गया कि जल्द ही आसपास के प्रभावित गांवों की मौजूदगी में ग्राम सभा आयोजित कर अंतिम फैसला लिया जाएगा. ग्रामीणों ने कंपनी और प्रशासन के अधिकारियों से भी ग्राम सभा में पहुंचकर क्षेत्रीय विकास और खदान संचालन को लेकर खुली चर्चा करने की अपील की है.

इस पूरे मामले पर कलेक्टर तूलिका प्रजापति ने कहा कि भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन को अनुमति की प्रक्रिया प्रशासन के माध्यम से करनी थी. उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ग्राम पंचायत और BSP प्रबंधन की संयुक्त बैठक बुलाकर यह जानने का प्रयास करेगा कि समस्या कहां है और ग्रामीणों को किस बात पर आपत्ति है. कलेक्टर ने भरोसा दिलाया कि चर्चा के जरिए समाधान निकालते हुए प्रशासन और कंपनी से अपेक्षित विकास सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा.

दो दशक पहले शुरू हुआ खनन, विकास अब भी नदारद
गौरतलब है कि मानपुर ब्लॉक के खड़गांव थाना क्षेत्र में पिछले दो दशकों में तीन लौह अयस्क खदानें स्थापित हुई हैं. वर्ष 2002 में पल्लेमाड़ी शारदा, 2014 में गोदावरी और 2017 में भिलाई स्टील प्लांट की दुलकी माइंस शुरू हुई. खदानों के संचालन के बाद क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि नियमों के अनुसार कंपनियां बुनियादी सुविधाओं के विकास में योगदान देंगी, लेकिन दो दशक बाद भी ग्रामीण विकास से वंचित होने का दावा कर रहे हैं.

बैठक के दौरान बोदरा गांव की एक वृद्ध महिला ने छत्तीसगढ़ी में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “सड़क नई दे, न बिजली नई दे, मैं तो कहात-कहात हार गेंव… अब मर जहूं घला,” यानी न सड़क मिली, न बिजली—मांग करते-करते थक गई हूं. वहीं ग्रामीण महिला बिमला सलामे ने कहा कि चारों ओर पहाड़ और जंगल से घिरे उनके गांव के तीन तरफ पहले ही खदानें खुल चुकी हैं. अब यदि शेष बचे जंगल-पहाड़ क्षेत्र में भी खनन हुआ तो वनोपज, जो उनकी आजीविका का मुख्य साधन है, वह भी छिन जाएगा.

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