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रेल ट्रैक धमाके के पीछे खालिस्तानी संगठन का दावा, पंजाब में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अमृतसर
पंजाब के सरहिंद में रेलवे ट्रैक पर हुए विस्फोट की जिम्मेदारी आतंकी संगठन 'खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स' ने ली है। फोर्स के सरगना रणजीत सिंह नीटा ने हस्ताक्षर वाला एक नोट वायरल हो रहा है। इसमें रणजीत सिंह नीटा ने कहा कि यह तो सिर्फ ट्रेलर था। हम यह विस्फोट पैसेंजर ट्रेन में भी कर सकते थे लेकिन हमारा इरादा किसी का जानी नुकसान करना नहीं है। यह भारत सरकार को एक चेतावनी है। हमारी खालिस्तान की मांग पहले भी थी और आगे भी जारी रहेगी। न ही हम आराम से बैठे हैं और न ही बैठने देंगे। खालिस्तान बनने तक यह संर्घष जारी रहेगा। हमारे एक्शन सरकार की नींद हराम करते रहेंगे।

डीआईजी पहुंचे जांच करने, अभी आतंकी हमला मानने से इनकार
गणतंत्र दिवस से पहले पंजाब के फतेहगढ़ साहिब के सरहिंद में रेलवे ट्रैक पर जोरदार धमाका हुआ है। आरडीएक्स जैसे विस्फोटक से रेलवे ट्रैक के परखच्चे उड़ गए। इसमें मालगाड़ी के ड्राइवर को चोटें आई हैं। इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को चिंता में डाल दिया है। रोपड़ रेंज के डीआईजी नानक सिंह ने घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने बताया कि पुलिस और अन्य एजेंसियां जांच कर रही हैं। वैज्ञानिक तरीके से सबूत जुटाए जा रहे हैं। बड़ा संपत्ति नुकसान नहीं हुआ और चालक को सिर्फ हल्की चोटें हैं। ट्रैक और गाड़ी को गंभीर क्षति नहीं पहुंची।

क्षतिग्रस्त ट्रैक की मरम्मत कर रेल यातायात को बहाल कर दिया गया है। डीआईजी ने फिलहाल इसे आतंकी हमला मानने से इनकार किया। हालांकि उन्होंने कहा कि यह एक आपराधिक गतिविधि लगती है। जांच पूरी होने पर ही साफ होगा। इलाके में नाकेबंदी की गई है और संदिग्धों की तलाश चल रही है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
नीटा ने आईएसआई की मदद से किया था खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का गठन
आतंकी संगठन खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स की स्थापना रणजीत सिंह नीटा ने की थी। वह जम्मू का मूल निवासी है, लेकिन लंबे समय से पाकिस्तान में रह रहा है। उसने पाकिस्तान में आईएसआई की मदद से खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का गठन किया। इस संगठन का उद्देश्य सिखों को कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित कर उन्हें अपने संगठन में भर्ती करना था। नीटा ने 1980 के दशक में पाकिस्तान में अपने संपर्कों की नींव रख दी थी। उसने जम्मू के सिंबल कैंप, आरएस पुरा और अन्य सिख बहुल इलाकों में अपनी पकड़ बनाई, जहां सिख समुदाय की बड़ी संख्या थी।

1990 के दशक में वह पाकिस्तान चला गया और वहां जाकर खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का गठन किया। उस दौर में इस संगठन ने दिल्ली और पंजाब के बीच चलने वाली बसों और ट्रेनों को निशाना बनाया था। इसके बाद, इसने अपनी रणनीति बदलते हुए धार्मिक नेताओं को भी टारगेट करना शुरू कर दिया। 2009 में इस संगठन ने राष्ट्रीय सिख संगत के प्रमुख रुलदा सिंह की हत्या कर दी, और विएना में संत रामानंद की हत्या में भी इसका हाथ था। साल 2017 के बाद खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स ने अपनी गतिविधियों को और बढ़ा दिया और पंजाब के कई पुलिस थानों में धमाके किए। खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स की मौजूदगी भारत में नहीं, बल्कि इसके सदस्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, नेपाल, स्विट्जरलैंड और इटली जैसे देशों में भी मौजूद हैं। खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स भारत में पहले से ही प्रतिबंधित है लेकिन इसके सदस्य विदेशों में सक्रिय होकर अपनी साजिशों को अंजाम देने में जुटे हुए हैं।

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