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झारखंड के नसबंदी डेटा पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, अन्य राज्यों को भी लगाई फटकार

नई दिल्ली

: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले पर साफ कहा कि राज्य सरकारें सिर्फ हवा में बातें कर रही हैं. धरातल पर कोई ठोस काम नहीं दिख रहा है. एमीकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट के सामने कई राज्यों की रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट ने राज्यों की पोल खोलकर रख दी है. बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख राज्यों के प्रति बहुत सख्त नजर आया है. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लिया है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य के वकीलों को आगे बुलाया और दखल देने वालों को पीछे हटने को कहा. बेंच ने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि वकीलों को संभालना बहुत मुश्किल काम हो गया है. पहले सिस्टम को ठीक करना जरूरी है. सुनवाई के दौरान एमीकस क्यूरी ने चार मुख्य बिंदुओं पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है. इसमें एबीसी सेंटर्स की कार्यप्रणाली और डॉग शेल्टर बनाने की बात शामिल है. संस्थानों से कुत्ते हटाने और हाईवे से मवेशी हटाने पर भी चर्चा हुई है. कोर्ट ने राज्यों के हलफनामों को देखने के बाद उन्हें ‘आई वॉश’ यानी आंखों में धूल झोंकने वाला बताया है. पढ़ें, आज की सुनवाई में क्या-क्या हुआ.

असम और झारखंड के आंकड़ों में क्या है फर्जीवाड़ा?

असम सरकार की रिपोर्ट ने कोर्ट को सबसे ज्यादा हैरान किया है. असम में डॉग बाइट यानी कुत्तों के काटने के आंकड़े बहुत डरावने हैं. साल 2024 में वहां कुत्तों के काटने के 1.66 लाख मामले सामने आए थे. साल 2025 के सिर्फ जनवरी महीने में ही 20900 मामले दर्ज हुए हैं. कोर्ट ने इन आंकड़ों को देखकर बहुत चिंता जाहिर की है. असम के पास कुत्तों के लिए पर्याप्त सेंटर भी मौजूद नहीं हैं. एमीकस क्यूरी ने बताया कि असम में 318 स्टेडियम हैं लेकिन कुत्तों के लिए व्यवस्था नहीं है. कोर्ट ने कहा कि असम के हलफनामे में मैनपावर की जानकारी ही गायब है. असम सरकार ने इसके लिए 6 महीने का समय मांगा है.

वहीं, झारखंड के आंकड़ों ने तो कोर्ट को गुस्से से भर दिया. झारखंड सरकार ने दावा किया कि उन्होंने 1.89 लाख कुत्तों की नसबंदी की है. कोर्ट ने जब गहराई से देखा तो पता चला कि इसमें से 1.6 लाख नसबंदी सिर्फ 2 महीने में दिखाई गई है. कोर्ट ने इसे पूरी तरह फर्जी आंकड़ा करार दिया है. जजों ने पूछा कि एक गाड़ी में एक दिन में कितने कुत्ते पकड़े जा सकते हैं. झारखंड के इन आंकड़ों को कोर्ट ने पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है.

शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों में कुत्तों का खतरा कैसे टलेगा?

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और अस्पतालों जैसे संस्थानों से कुत्ते हटाने पर विशेष जोर दिया है. एमीकस क्यूरी ने बताया कि कर्नाटक ने संस्थानों में कुत्तों की पहचान तो की है लेकिन उन्हें हटाया नहीं गया है. कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक ने अब तक एक भी कुत्ता संस्थानों से बाहर नहीं निकाला है. जजों ने साफ किया कि हर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के पास बाउंड्री वॉल होनी चाहिए. सुरक्षा के लिहाज से यह बहुत जरूरी है. स्कूलों में बाउंड्री वॉल न होना बच्चों के लिए बड़ा खतरा है. कोर्ट ने राज्यों से पूछा कि उन्होंने इन संस्थानों से कुत्ते हटाने के लिए क्या किया है.

हरियाणा जैसे राज्यों का हलफनामा इस मामले में पूरी तरह चुप है. कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य समय मांगते तो समझ आता. लेकिन गलत और अस्पष्ट जानकारी देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. राज्यों को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा कि आप लोग सिर्फ हवा में महल बना रहे हैं. किसी भी राज्य ने डॉग बाइट के सही आंकड़े पेश नहीं किए हैं. केवल असम ने ही इस मामले में डेटा दिया है जो कि बहुत डराने वाला है.

गोवा और केरल के टूरिज्म पर आवारा कुत्तों का क्या असर है?

सुनवाई के दौरान गोवा और केरल के समुद्र तटों यानी बीचेस पर चर्चा हुई है. एमीकस क्यूरी ने बताया कि गोवा के बीचेस पर बहुत ज्यादा कुत्ते मौजूद हैं. वहां ये कुत्ते शैक और मछली के अवशेषों पर निर्भर रहते हैं. कोर्ट ने कहा कि इससे गोवा का टूरिज्म बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. हाल ही में एससीओआरए कॉन्फ्रेस के दौरान जजों ने खुद यह स्थिति देखी है. जजों का कहना है कि इन कुत्तों को वहां से हटाकर अच्छी जगह रखना होगा. इनके लिए कोई बहुत बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की जरूरत नहीं है. बस एक सुरक्षित जगह चाहिए जहां इनकी देखभाल हो सके.

गुजरात सरकार ने बताया कि उन्होंने इसके लिए 60 करोड़ का बजट रखा है. अगले साल के लिए 75 करोड़ का बजट भी तय किया गया है. लेकिन कोर्ट गुजरात की रिपोर्ट से भी संतुष्ट नहीं दिखा है. वहां डॉग पाउंड्स के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है. कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी है कि वे अगले हलफनामे में सही डेटा पेश करें.

हाईवे पर आवारा पशुओं से होने वाले हादसों का जिम्मेदार कौन है?

कोर्ट ने कुत्तों के साथ-साथ हाईवे पर आवारा मवेशियों के मुद्दे को भी उठाया है. एनएचएआई और राज्यों को इस पर मिलकर काम करने को कहा गया है. एमीकस क्यूरी ने हाईवे पर उन जगहों की पहचान करने को कहा है जहां मवेशी सबसे ज्यादा आते हैं. असम में राइनो यानी गैंडों के हाईवे पार करने की समस्या पर भी बात हुई है. इसके लिए वहां एलिवेटेड रोड बनाई गई है. कोर्ट ने कहा कि मवेशियों के हाईवे पर आने के कारणों का पता लगाना जरूरी है. आंध्र प्रदेश ने 14000 संस्थानों की पहचान की है जहां फेंसिंग का काम चल रहा है. लेकिन एमीकस क्यूरी का कहना है कि नसबंदी सेंटर्स की क्षमता का ऑडिट होना चाहिए. राज्यों को यह बताना होगा कि उनके पास मौजूद सेंटर पूरी तरह इस्तेमाल हो रहे हैं या नहीं.

कोर्ट ने कहा कि पालतू कुत्ते भी कभी-कभी काट लेते हैं चाहे उन्हें वैक्सीन लगी हो. इसलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए. कोर्ट अब इस मामले में राज्यों के खिलाफ सख्त आदेश पारित करने की तैयारी में है.

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