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जेल में संदिग्ध हालात में मौत! शेख हसीना की पार्टी के नेता रमेश चंद्र सेन को लेकर कई सवाल

ढाका
बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले हिंसा की घटनाएं आम हो गई हैं। वहीं इस बार अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को बैन कर दिया गया है। इसी बीच शेख हसीना की पार्टी के एक वरिष्ठ हिंदू नेता रमेश चंद्र सेन की जेल में ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उन्हें दीनाजपुर जिला जेल में रखा गया था। बता दें कि 12 फरवरी को बांग्लादेश में चुनाव होना है। रमेश चंद्र सेन की मौत, उनके इलाज को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है।
 
83 साल की उम्र में जेल में बंद थे सेन
सेन 83 साल के थे और उन्हें इलाज के लिए दीनाजपुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। जेल अधीक्षक फरहद सरकार ने बताया कि सेन का शव उनके परिवार को सौंप दिया जाएगा। 16 अगस्त 2024 को ही उन्हें हिरासत में लिया गया था। इससे पहले कुछ समय वह ठाकुरगांव जिला जिले में बंद थे।

कौन थे रमेश चंद्र सेन
सेन पर हत्या, राजनीतिक हिंसा और अन्य केस दर्ज किए गए थे। उनका जन्म 30 अप्रैल 1940 को हुआ था। वह ठाकुरगांव से कई बार सांसद चुने जा चुके थे। 2024 के आम चुनाव में भी इस सीट पर उन्होंने जीत हासिल की थी। वहीं इस बार उनकी पार्टी को चुनाव लड़ने से बैन कर दिया गया है। बताया गया कि उम्र की वजह से जेल में वह बीमार रहते थे लेकिन उनका ठीक से इलाज नहीं करवाया जाता था।

बांग्लादेश में भड़क रही हिंसा की आग
बांग्लादेश में दक्षिणपंथी इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी की पिछले साल हुई हत्या के मामले में तत्काल न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस से हुई झड़प में संगठन के कम से कम 50 कार्यकर्ता घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों द्वारा अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के आधिकारिक जमुना आवास के पास सुरक्षा अवरोधक को तोड़ने की कोशिश करने और वहां रैलियों के दौरान पहले से घोषित प्रतिबंधों का उल्लंघन किए जाने के बाद ढाका पुलिस ने लाठियां भांजी तथा पानी की बौछार की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने 'साउंड ग्रेनेड' भी दागे।

बांग्लादेश में 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन में हादी अग्रणी कार्यकर्ताओं में शामिल थे। वह 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव के लिए प्रमुख उम्मीदवारों में भी शामिल थे। चुनाव प्रचार के दौरान 12 दिसंबर को राजधानी में हादी को गोली मार दी गई थी और बाद में उनकी मौत हो गई। बांग्लादेश में 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन को जुलाई विद्रोह कहा जाता है और इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की आवामी लीग की सरकार गिर गई थी।

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