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प्रदूषण नियमों की अनदेखी करने वाले कंक्रीट प्लांट पर बड़ी कार्रवाई, गुरुग्राम में सबसे बुरा हाल

गुरुग्राम

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के कड़े निर्देशों के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रेडी मिक्स कंक्रीट प्लांट पर कार्रवाई शुरू कर दी है। बोर्ड ने पूरे राज्य में 370 से आरएमसी प्लांट को चिन्हित किया है। इनमें से 184 प्लांट बोर्ड की अनुमति से चल रहे हैं जबकि 186 बिना अनुमति के चल रहे हैं। पर्यावरण के मानकों का उल्लंघन करने वाले 108 प्लांट पर आठ लाख रुपये से लेकर एक करोड़ 13 लाख तक जुर्माना लगाया गया है, जबकि 73 पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है। हालांकि जिन प्लांट पर जुर्माना लगाया गया है। उनमें से अधिकतर प्लांट मालिकों ने अभी तक जुर्माना जमा नहीं किया है।
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एनजीटी ने यह आदेश एक शिकायत के आधार पर दिया था। एनजीटी को दी गई शिकायत में बताया गया था कि हरियाणा में प्लांट पर्यावरण के मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। अधिकतर प्लांटों ने बोर्ड से अनुमति भी नहीं ली। धूल नियंत्रण का कोई उपाय नहीं किया गया है। इससे वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है, जो इलाके में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन रहा है। इसके साथ ही भूमिगत जल का दोहन किया जा रहा है। इसके लिए किसी अथॉरिटी से स्वीकृति नहीं ली गई है। बोर्ड की ओर से पेश की गई प्रारंभिक रिपोर्ट में इसे गंभीर समस्या माना गया। इसके बाद पूरे हरियाणा में इसकी जांच की गई और उल्लंघन करने वाले प्लांट पर कार्रवाई करने के आदेश जारी किए गए।

आरएमसी प्लांट से ऐसे फैलता है प्रदूषण
आरएमसी प्लांट एक रेडी-टू-यूज कंक्रीट बनाने वाली एक स्वचालित फैक्ट्री होती है, जो निश्चित अनुपात में कंक्रीट का मिश्रण बनाती है। इस प्लांट से धूल का उत्सर्जन ज्यादा होता है। इसमें सीमेंट, रेत और गिट्टी के खुले भंडारण, मिक्सिंग और लोडिंग के दौरान महीन धूल के कण हवा में फैलते हैं, जो सबसे प्रदूषक हैं। इसके अलावा ट्रकों और भारी वाहनों के आने व जाने से काफी धूल उड़ती है जिससे आसपास के क्षेत्रों की दृश्यता की काफी कम हो जाती है। वहीं, भारी मिक्सर, मशीनरी, जनरेटर और ट्रकों की आवाज के कारण आसपास के क्षेत्रों में तेज ध्वनि प्रदूषण होता है। पानी का भी खूब दोहन किया जाता है।

गुरुग्राम में सबसे ज्यादा अवैध मिले आरएमसी प्लांट
गुरुग्राम में 150 से ज्यादा आरएमसी प्लांट संचालित हो रहे हैं। इनमें से आधे से ज्यादा प्लांट बिना अनुमति के चल रहे थे। उनके पास बोर्ड की कोई अनुमति नहीं थी। इनमें से 60 प्लांट पर 80 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ तक जुर्माना लगाया गया है। अंबाला में कुल छह प्लांट है, जिनके पास स्वीकृति है। बल्लभगढ़ में कुल 21 प्लांट है। इनमें सिर्फ चार बिना प्लांट के चल रहे हैं। चारों प्लांट को सील कर दिया गया है। फरीदाबाद में कुल 23 प्लांट हैं। इनमें से नौ प्लांट पर कार्रवाई की गई है। यमुनानगर में 11 में से 9 प्लांट बिना स्वीकृति के संचालित हो रहे थे। इन पर कार्रवाई की गई है। बहादुरगढ़ में कुल 37 प्लांट है। इनमें से नौ पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है 

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