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अमेरिका में ऐतिहासिक पहल: सिएटल में स्थापित हुई स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा

शिकागो

 भारतीय दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद की अमेरिका में पहली जीवन-आकार की कांस्य प्रतिमा का अनावरण सिएटल के व्यस्त वेस्टलेक स्क्वायर में किया गया। यह अमेरिका में किसी भी शहर सरकार द्वारा होस्ट की गई स्वामी विवेकानंद की पहली ऐसी प्रतिमा है।

भारतीय मूर्तिकार नरेश कुमार कुमावत द्वारा बनाई गई यह जीवन-आकार की कांस्य प्रतिमा सिएटल के डाउनटाउन स्थित वेस्टलेक स्क्वायर में स्थापित की गई है। प्रतिमा रोजाना चार लाख से अधिक आगंतुकों वाले इस व्यस्त स्थान पर अमेजन हेडक्वार्टर के स्फीयर्स, सिएटल कन्वेंशन सेंटर और सिएटल सेंटर मोनोरेल जैसी प्रमुख इमारतों के निकट स्थित है।

प्रतिमा का संयुक्त अनावरण सिएटल की मेयर केटी विल्सन और भारतीय वाणिज्य दूत प्रकाश गुप्ता ने किया। समारोह ICCR डे के अवसर पर आयोजित किया गया।
सिएटल दूतावास का सोशल मीडिया पोस्ट

भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 1893 का शिकागो से 2026 का सिएटल! सिएटल की स्काईलाइन में नया भारतीय आइकन: स्वामी विवेकानंद! सिएटल शहर अब अमेरिका में किसी भी शहर सरकार द्वारा डाउनटाउन के दिल में स्वामी विवेकानंद स्मारक होस्ट करने वाला पहला शहर बन गया है।
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मेयर ने क्या है?
मेयर केटी विल्सन ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह स्मारक सिएटल की समावेशी भावना को दर्शाता है और अमेरिका के पैसिफिक नॉर्थवेस्ट स्थित इस विविधतापूर्ण टेक हब के साथ भारत के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगा।

यह प्रतिमा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की ओर से सिएटल शहर को उपहार में दी गई है। ICCR ने इसे शहर की समृद्ध बहुसांस्कृतिक पहचान और समावेशिता की भावना को मान्यता देते हुए भेंट किया है।

यह अनावरण भारत की व्यापक सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत और अमेरिका के पैसिफिक नॉर्थवेस्ट क्षेत्र के बीच लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना है।

स्वामी विवेकानंद का शिकागो में ऐतिहासिक भाषण
स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में अपना ऐतिहासिक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने हिंदू दर्शन और वेदांत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया था। शिकागो 1893 से सिएटल 2026 तक यह यात्रा भारत-अमेरिका सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बन गई है।

समारोह में ग्रेटर सिएटल क्षेत्र के कई स्थानीय नेता, मेयर, समुदाय के प्रतिनिधि और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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