samacharsecretary.com

हाईकोर्ट की सख्ती: निजी कंपनी पर 3 लाख का जुर्माना, याचिका खारिज

 चंडीगढ़

 पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक निजी निर्माण कंपनी पर तीन लाख का जुर्माना लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब केवल सरकारी अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि निराधार और फालतू याचिकाएं दायर करने वाले निजी पक्षकारों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए।

यह आदेश जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की पीठ ने एम/एस वी के कंस्ट्रक्शन द्वारा दायर अवमानना याचिका को खारिज करते हुए सुनाया। कंपनी ने आरोप लगाया था कि रोहतक-बावल राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का कार्य पूरा करने के बावजूद उसके बिलों का भुगतान नहीं किया गया और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की जाए।हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि यह याचिका उसी मामले में दूसरी अवमानना याचिका है।

इससे पहले 2023 के आदेश के अनुपालन न होने पर एक अवमानना याचिका दायर की गई थी, जिसे मई 2025 में यह कहते हुए निपटा दिया गया था कि संबंधित प्राधिकरण ने याचिकाकर्ता की शिकायत पर निर्णय ले लिया है।अदालत ने कहा कि इसके बावजूद दोबारा अवमानना याचिका दायर करना न्यायिक प्रक्रिया का “स्पष्ट दुरुपयोग” है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस प्रकार की याचिकाएं न केवल अदालत के बहुमूल्य समय की बर्बादी करती हैं, बल्कि सरकारी अधिकारियों को अनावश्यक रूप से परेशान भी करती हैं। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अवमानना क्षेत्राधिकार का प्रयोग अत्यंत सावधानी और विवेक के साथ किया जाना चाहिए और केवल उन्हीं मामलों में किया जाना चाहिए, जहां आदेश की जानबूझकर अवहेलना स्पष्ट रूप से सिद्ध हो।

इसे व्यक्तिगत द्वेष निकालने या अधिकारियों को परेशान करने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सामान्यत जब अधिकारी कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करते, तो उन पर जुर्माना लगाया जाता है और यह राशि उनके वेतन से वसूली जाती है। लेकिन वर्तमान मामला इसका उल्टा उदाहरण है, जहां अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन किया, फिर भी उन्हें निशाना बनाया गया।

कोर्ट ने कहा कि बार-बार निराधार याचिकाएं दाखिल करने से न केवल न्यायिक संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि वास्तविक मामलों की सुनवाई भी प्रभावित होती है। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त संदेश देना जरूरी है। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने और उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए याचिकाकर्ता पर तीन लाख का जुर्माना लगाया जाता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सके।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here