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वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा में क्या करें और क्या नहीं?

वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा अग्नि को दर्शाती है साथ ही इस दिशा में मंगल और यम की दिशा भी कहा गया है। अगर दक्षिण दिशा वास्तु के अनुसार संतुलित न हो तो घर परिवार के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही आर्थिक मामलों में कुछ न कुछ बाधाएं आती रहती हैं। तो आइए जानते हैं वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, दक्षिण दिशा को कैसा होना चाहिए। आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को लेकर क्या नियम बताए गए हैं।

दक्षिण दिशा में क्या नहीं होना चाहिए
1) वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण दिशा में पानी की टंकी नहीं होनी चाहिए। पानी से संबंधित चीजें दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, जल तत्व दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए।

2) दक्षिण दिशा में अग्नि की दिशा बताया गया है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह को कोई एंटी एलिमेंट जैसे पानी की टंकी और वॉशिंग एरिया नहीं होना चाहिए। न ही इस दिशा में पूजा घर बनाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो घर परिवार के सभी लोगों को कामकाज में काफी बाधाओं का सामना करना पड़ता है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार नहीं होता है।

3) दक्षिण दिशा में टॉयलेट भी नहीं बनाना चाहिए। वास्तु के नियमों के अनुसार, दक्षिण में टॉयलेट होने काफी हानिकारक होता है। अगर इस दिशा में टॉयलेट होने पर काम बनते बनते बिगड़ने लगते हैं। साथ ही लोगों की लोकप्रियता भी खराब हो जाती है।

4) दक्षिण दिशा को मंगल की दिशा और यम की दिशा भी माना गया है। इसे यम के द्वार भी कहा जाता है। इस दिशा अगर काले या नीला रंग बोता है तो वह आपको कोर्ट केस या दुर्घटना आदि होने की आशंका अधिक रहती है। साथ ही इस दिशा में घर में पानी का जमाव न होने दें। क्योंकि, इसे सबसे बड़ा वास्तु दोष माना गया है। भूलकर भी इस दिशा में स्फटिक टैंक या स्विमिंग पूल न बनवाएं।

दक्षिण दिशा में क्या बना सकते हैं
1) दक्षिण दिशा को अग्नि की दिशा भी कहा गया है और यह आपकी प्रसिद्धि से भी जुड़ी दिशा में ऐसे में इस एरिया में आप चाहें तो मास्टर बेडरुम बनवा सकते हैं। इस दिशा में मास्टर बेडरुम होने शुभ परिणाम देता है।

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