samacharsecretary.com

15 अप्रैल राशिफल: कुछ राशियों को मिलेगा शुभ लाभ, तो कुछ को झेलनी होंगी चुनौतियां

आज मेष राशि वालों के लिए आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। आपको थोड़ा कंट्रोल भी रखना होगा रहें। धैर्यशीलता बनाए रखने के प्रयास करें। कारोबार में भागदौड़ अधिक रहेगी, परंतु सेहत का भी ध्यान रखें। आज वृषभ राशि वालों का ग्रहों के कारण मन परेशान रहेगा। आत्मविश्वास में कमी रहेगी, इसलिए आपको कई अटक सकते हैं। आत्मसंयत रहें। धैर्यशीलता बनाए रखें। सेहत का ध्यान रखें। कारोबार के लिए परिवार से धन मिल सकता है। मिथुन राशि वालों के लिए समय उत्तम है। आपको इस समय: आत्मविश्वास से परिपूर्ण रहेंगे।कोशिश करें कि पठन-पाठन में रुचि बढ़ सकती है। बौद्धिक कार्यों से मान-सम्मान की प्राप्ति हो सकती है। किसी मित्र के सहयोग से आय बढ़ सकती है। कर्क राशि वालों के लिए आपका दांपत्य सुख अच्छा रहेगा, आपकी अपनी इनमक में बढ़ोतरी होगी। मन में उतार-चढ़ाव भी हो सकते हैं। परिवार के साथ यात्रा पर जा सकते हैं। सिंह राशि वालों का मन प्रसन्न तो रहेगा, परंतु आत्मविश्वास में कमी हो सकती है। नौकरी में अफसरों का सहयोग मिलेगा, परंतु परिवार से दूर िकसी दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। कन्या राशि वालों को इस खुद पर थोड़ा कंट्रोल करना होगा। धैर्यशीलता बनाए रखने का प्रयास करें। पिता की सेहत का ध्यान रखें। कारोबार में बदलाव हो सकता है। किसी मित्र का सहयोग मिलेगा। तुला राशि वालों के लिए आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन में उतार-चढ़ाव भी रहेगा। कारोबार में वृद्धि होगी। लाभ के अवसर भी मिलेंगे, परंतु सेहत का भी ध्यान रखें धनु राशि के लिए आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन भी परेशान हो सकता है, लेकिन इससे परेशान ना हों। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। पिता का साथ मिलेगा, पर कारोबार में लाभ के अवसर मिलेंगे। वृश्चिक राशि वालों का मन परेशान हो सकता है। माता-पिता की सेहत का ध्यान रखें। भागदौड़ अधिक रहेगी। खर्चों की अधिकता रहेगी। रहन-सहन अव्यवस्थित रहेगा। कुंभ राशि वाले आज आत्मविश्वास से परिपूर्ण रहेंगे। पठन-पाठन में रुचि बढ़ सकती है। किसी मित्र के सपोर्ट से आय में वृद्धि के साथ बन सकते हैं। हेल्थ का ध्यान रखें। मकर राशि के लिए आज दिन अच्छा रहने वाला है। आपको लवलाइफ में अच्छे पल मिलेगें। आर्थिक तौर पर भी आज आगे बढ़ रहे हैं। हेल्थ को लेकर ध्यान रखें। मीन राशि के लिए समय उत्तम है। वाणी और अपनी फैसले लेने पर थोड़ा सोच समझकर फैसला लें। तभी आप सफल हो पाएंगे।

100 साल के अधिकतम बाढ़ स्तर के आधार पर फ्लड प्लेन जोन तय करेगा सिंचाई विभाग

 गाजीपुर गंगा की धारा की अविरलता और स्वच्छता बनाए रखने के लिए सिंचाई विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पिछले 100 वर्षों में आई बाढ़ के अधिकतम स्तर का सीमांकन कर नदी के किनारे चेतावनी पिलर लगाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह है कि लोग बाढ़ क्षेत्र में निर्माण न करें और नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित न हो। यह कार्य नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर किया जा रहा है। एनजीटी ने गंगा के फ्लड प्लेन जोन (एफपीजेड) को चिह्नित करने के लिए 100 वर्षों में बाढ़ के अंतिम पहुंच बिंदु का निर्धारण करने का आदेश दिया था। इसी के तहत सिंचाई विभाग पत्थर के पिलर स्थापित कर रहा है, जिन पर ‘100 वर्ष’, पिलर संख्या और एफपीजेड अंकित किया जा रहा है। वाराणसी से बलिया सीमा तक गंगा के दोनों किनारों पर लगभग एक हजार पिलर लगाए जा रहे हैं। गाजीपुर में दोनों तरफ मिलाकर लगभग 175 किलोमीटर क्षेत्र में यह कार्य किया जा रहा है और इस पर करीब 50 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस पहल से लोगों को बाढ़ क्षेत्र की स्पष्ट जानकारी मिलेगी और अवैध निर्माण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम न केवल बाढ़ के खतरे को कम करेगा, बल्कि गंगा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को भी संरक्षित करेगा। पिलर लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है और इसे समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्य के माध्यम से स्थानीय निवासियों को बाढ़ के संभावित खतरों के बारे में जागरूक किया जाएगा। पिलर पर अंकित जानकारी से लोग यह समझ सकेंगे कि बाढ़ के समय किन क्षेत्रों में रहना सुरक्षित नहीं है। इससे अवैध निर्माण पर भी अंकुश लगेगा, जो कि नदी के किनारे अव्यवस्थित तरीके से हो रहा है। गंगा नदी भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके संरक्षण के लिए उठाए गए इस कदम को व्यापक रूप से सराहा जा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने भी इस पहल का समर्थन किया है और इसे गंगा की स्वच्छता और अविरलता के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। गंगा नदी के किनारे चेतावनी पिलर लगाने का कार्य न केवल बाढ़ प्रबंधन के लिए आवश्यक है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे न केवल नदी की धारा को सुरक्षित रखा जाएगा, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी बाढ़ के खतरों से बचाने में मदद मिलेगी।इस पहल से गंगा नदी के किनारे रहने वाले लोगों को एक नई दिशा मिलेगी, जिससे वे सुरक्षित और संरक्षित रह सकेंगे।

खाखर गांव में छापेमारी, 8.700 किलो गीली अफीम और 370 किलो डोडा जब्त

 चतरा  चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र अंतर्गत रिमी पंचायत के खाखर गांव में पुलिस ने एक बड़ी और सफल कार्रवाई को अंजाम दिया है. एसपी सुमित कुमार अग्रवाल को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव के अमारिक गंझु, मनोज गंझु, सरजू गंझु समेत अन्य तस्कर अपने घरों में भारी मात्रा में मादक पदार्थ छिपाकर रखे हुए हैं और इसे बाहरी व्यापारियों को बेचने की फिराक में हैं. सूचना की गंभीरता को देखते हुए सिमरिया एसडीपीओ शुभम कुमार खंडेलवाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने खाखर गांव में दबिश दी. करोड़ों का माल और अहम दस्तावेज बरामद मंगलवार को समाहरणालय स्थित कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि विशेष टीम ने जब आरोपियों के एक-एक घर की तलाशी ली, तो वहां से भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद हुए. छापेमारी में कुल 8.700 किलोग्राम गीली अफीम, 370 किलोग्राम डोडा और 109 किलोग्राम पोस्ता दाना जब्त किया गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी जा रही है. इसके अलावा, पुलिस ने मौके से आरोपियों के आधार कार्ड समेत अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जिससे उनकी पहचान पुख्ता हो गई है. तस्कर फरार, गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज हालांकि, पुलिस की आहट पाते ही सभी नामजद आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहे. इस मामले में लावालौंग थाना कांड संख्या 23/26 के तहत एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है. एसपी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं. पुलिस की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से अवैध मादक पदार्थ के कारोबारियों में भारी दहशत का माहौल बना हुआ है. कार्रवाई में शामिल रही बड़ी टीम नशे के खिलाफ इस बड़े अभियान में एनडीपीएस थाना प्रभारी शमी अंसारी, लावालौंग थाना प्रभारी चंदन कुमार, अवर निरीक्षक विधायक प्रसाद यादव सहित जिला पुलिस के कई जवान शामिल थे. चतरा पुलिस की इस उपलब्धि को जिले में नशा मुक्ति अभियान की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है.

कांग्रेस में राज्यसभा सीट को लेकर बढ़ा कास्ट प्रेशर, दलित- ब्राह्मणों के बाद सिंधी समाज ने भी किया दावेदारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर खींचतान तेज हो गई है। पार्टी में जातीय समीकरणों को लेकर दबाव(कास्ट प्रेशर) लगातार बढ़ रहा है। जहां पहले दलित और फिर विंध्य के ब्राह्मणों की ओर से दावेदारी पेश की गई थी, वहीं अब इस रेस में सिंधी समाज की भी एंट्री हो गई है। सिंधी प्रतिनिधित्व की मांग उठी रीवा शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री दिलीप ठारवानी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर सिंधी समाज से राज्यसभा प्रतिनिधि भेजने की मांग उठाई है। ठारवानी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संबोधित पत्र में लिखा है कि वे लंबे समय से कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं और उनका परिवार पीढ़ियों से पार्टी की विचारधारा से जुड़ा है। सिंधी समाज देशभर में कांग्रेस के प्रति अपनी आस्था और योगदान के लिए जाना जाता है। आगामी राज्यसभा चयन में सिंधी समाज से एक योग्य और समर्पित प्रतिनिधि के रूप में उनके नाम पर विचार किया जाए। इस पत्र की प्रतिलिपि मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी भेजी गई है। त्रिकोणीय हुआ जातीय समीकरण दलित वर्ग: दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने से इनकार करने के बाद कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दलित वर्ग के नेता को राज्यसभा भेजे जाने की मांग की थी। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा भी इसका समर्थन कर चुके हैं। ब्राह्मण समाज: विंध्य क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में उमंग सिंघार और जीतू पटवारी से मुलाकात की थी। उनका तर्क है कि विंध्य में ब्राह्मण समाज का बड़ा प्रभाव है, जिसे राज्यसभा के जरिए प्रतिनिधित्व देना जरूरी है। सिंधी समाज: अब दिलीप ठारवानी की दावेदारी ने इस रेस को और दिलचस्प बना दिया है। ठारवानी का मानना है कि यदि उन्हें अवसर मिलता है, तो वे संसद में पार्टी की नीतियों और जनहित के मुद्दों को पूरी निष्ठा से उठाएंगे। प्रदेश भर में सिंधी समाज कांग्रेस से जुडे़गा। सीट बचाने के लिए कांग्रेस की घेराबंदी मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें जून में रिक्त हो रही हैं। विधानसभा में दलीय स्थिति के अनुसार कांग्रेस को एक सीट मिल सकती है। इस पर प्रदेश के नेता को ही भेजने की मांग उठ रही है। विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष डा. गोविंद सिंह ने प्रदेश से किसी भी जमीनी नेता को भेजने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी नेताओं का मन टटोलने में लगे हैं। उन्होंने वरिष्ठ विधायक अजय सिंह से भी भेंट की। इसे राज्यसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि कांग्रेस के पास एक सदस्य भेजने के लिए चार विधायक ही अतिरिक्त हैं। उधर, भाजपा भी तीसरी सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस ने पिछले दो बार पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को राज्यसभा भेजा था। वे तीसरी बार जाने के इच्छुक नहीं हैं और पार्टी नेतृत्व को अपनी भावना से अवगत भी करा चुके हैं। साथ ही यह भी कह चुके हैं कि यदि किसी एससी वर्ग के व्यक्ति को भेजा जाता है तो उन्हें प्रसन्नता होगी। दरअसल, वे एक बार फिर दलित एजेंडे पर काम कर रहे हैं और बड़ा सम्मेलन भोपाल में कर चुके हैं। प्रदेश में एससी वर्ग के मतदाता कई सीटों पर प्रभावी भूमिका में हैं। उधर, ओबीसी समीकरण के चलते पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव और महिला प्रतिनिधित्व के हिसाब से मीनाक्षी नटराजन के नाम चर्चा में हैं। उधर, डा.सिंह ने यह मांग रख दी कि प्रदेश के किसी जमीनी नेता को राज्यसभा भेजा जाए। अन्य नेता भी इसके पक्ष में हैं। इसी बीच पूर्व नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह, अजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच दो दिन पहले हुई बैठक को चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा गया। दरअसल, यह कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव है। यदि आवश्यक संख्या बल से अधिक होने के बाद भी पार्टी अपना सदस्य नहीं बनवा पाती है तो कार्यकर्ताओं में जोश भरने के प्रयास प्रभावित होंगे। इसका असर अगले साल होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत के चुनावों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि कांग्रेस अभी से घर को सुरक्षित करने में जुट गई है। उधर, जीतू पटवारी ने साफ कर दिया है कि उनके पास प्रदेश अध्यक्ष पद की बड़ी जिम्मेदारी है और उसके लिए पूरा समय देना आवश्यक है। पार्टी जब प्रदेश इकाई से परामर्श करेगी तो कार्यकर्ताओं की भावना से अवगत कराया जाएगा।  

शेन वॉर्न की मौत की वजह कोरोना वैक्सीन? 4 साल बाद बेटे ने किया चौंकाने वाला दावा

सिडनी  महान स्पिनर शेन वॉर्न के निधन के चार साल बाद उनके बेटे जैक्सन ने दावा किया है कि इस दिग्गज स्पिनर की मौत संभवतः कोविड के उन 'तीन या चार' टीकों के कारण हुई थी जो उन्हें 'काम करने के लिए मजबूरन लेने पड़े थे।' जैक्सन ने '2 वर्ल्ड्स कोलाइड पॉडकास्ट' पर बात करते हुए अपने पिता की स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को भी स्वीकार किया। वॉर्न का 2022 में थाईलैंड में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उस समय उनकी उम्र 52 वर्ष थी। मुझे पक्का लगता है टीके की वजह से हुई मौत: जैक्सन वॉर्न जैक्सन ने कहा, ‘मुझे पक्का लगता है कि इसमें (कोविड टीके का) हाथ था। मुझे नहीं लगता कि अब यह कहने से किसी तरह का विवाद पैदा होगा। भले ही डैड (पिताजी) को पहले से ही कुछ स्वास्थ्य समस्याएं थीं, लेकिन मुझे लगता है कि टीका लगाने के कारण उनकी बीमारी खुलकर सामने आ गई। यह एक ऐसी बात है जिससे मैं हमेशा सोचता रहता हूं।’ उन्होंने कहा, ‘जैसे ही मैंने (वॉर्न की मौत की खबर मिलने के बाद) फोन रखा तो मेरी पहली प्रतिक्रिया यही थी कि मैंने तुरंत सरकार को दोषी ठहराया। मैंने तुरंत कोविड और टीके को दोषी ठहराया।’ जैक्सन ने कहा कि उन्होंने शोक सभा में अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने से खुद को बड़ी मुश्किल से रोका था। उन्होंने कहा, ‘शायद यह समझदारी भरा कदम था कि मैंने ऐसा नहीं किया, अगर मैंने ऐसा किया होता तो मेरी स्थिति बिल्कुल अलग होती। लेकिन मुझे यही महसूस हुआ।’ 'डैड ठीक थे, उन्होंने 3 या 4 डोज लगवाए थे' जैक्सन ने कहा, ‘पहले भी दिल का दौरा पड़ने से बहुत से लोग मर रहे थे। लेकिन डैड ठीक थे। मुझे लगता है उन्होंने तीन या चार (टीके) लगवाए होंगे। वह टीका नहीं लगवाना चाहते थे लेकिन अन्य लोगों की तरह काम करने के लिए उन्हें मजबूरन इन्हें देना पड़ा।’ उन्होंने कहा, ‘मैं इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहता हूं क्योंकि इससे केवल गुस्सा ही बढ़ता है। गुस्सा किसी के लिए भी अच्छा नहीं होता है।’ वॉर्न की जीवनशैली के बारे में जैक्सन ने कहा कि धूम्रपान और शराब पीने के बावजूद वह अपेक्षाकृत स्वस्थ थे। उन्होंने कहा, ‘उस समय डैड स्वस्थ थे, खुश थे। वे काफी समय बाद इतने अच्छे दिख रहे थे। वह जरूर धूम्रपान करते थे और शराब पीते थे, लेकिन 80 और 90 वर्ष की उम्र के कई लोग डैड की तुलना में कहीं अधिक धूम्रपान करते हैं और शराब पीते हैं।’ वॉर्न निधन से कुछ महीने पहले कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे। जब उनकी अचानक मौत हुई तो तब वह किसी तरह की गंभीर बीमारी से नहीं जूझ रहे थे।

भदोही की पप्पू देवी ने मशरूम उत्पादन से खड़ी की 10 लाख सालाना कमाई

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के 'राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन' ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में खुशहाली की नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है। पारंपरिक खेती की सीमाओं को तोड़ते हुए अब प्रदेश की महिलाएं उद्यमिता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। इसका सबसे ताज़ा और प्रेरक उदाहरण भदोही जिले की पप्पू देवी ने पेश किया है, जिन्होंने मशरूम उत्पादन को अपनी आय का मुख्य जरिया बनाकर सालाना 8 से 10 लाख रुपये तक की कमाई सुनिश्चित की है। पारंपरिक खेती से अलग चुनी नई राह भदोही जैसे जिले में, जहाँ खेती का अर्थ मुख्य रूप से गेहूं और धान तक सीमित माना जाता था, वहां पप्पू देवी ने अपनी मेहनत और सरकारी योजनाओं के तालमेल से एक नया मॉडल खड़ा किया है। उन्होंने अपनी जमा-पूंजी और 50 हजार रुपये के ऋण के साथ मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया। आज उनका यह छोटा सा उद्यम एक सफल मुनाफे वाले व्यवसाय में तब्दील हो चुका है। रोजगार प्रदाता बनीं पप्पू देवी पप्पू देवी की यह सफलता केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने साथ गांव की अन्य स्थानीय महिलाओं को भी जोड़ा है, जिससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। उनके इस मॉडल को देखकर क्षेत्र के अन्य स्वयं सहायता समूह (SHG) भी मशरूम उत्पादन की ओर प्रेरित हो रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा खास बात यह है कि पप्पू देवी की यह सफलता सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने तक सीमित नहीं है। वे अब अपने गांव की अन्य स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रहीं हैं। उनका यह मॉडल स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और ग्रामीण महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है। महिला उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती पप्पू देवी का मानना है कि अगर महिलाओं को सही ट्रेनिंग और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो वे स्वरोजगार के क्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त कर सकतीं हैं। योगी सरकार के इस प्रयास से प्रदेश में महिला उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिल रही है।  

दो पालियों में होगी प्रतियोगिता परीक्षा, जिले में बनाए गए 13 सेंटर

लातेहार झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (सीधी भर्ती) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा 2026 को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है. यह परीक्षा 19 अप्रैल को दो पालियों में आयोजित की जाएगी. पहली पाली सुबह 10 बजे से 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है. प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराना है. जिले में बनाए गए 13 परीक्षा केंद्र परीक्षा के सफल आयोजन के लिए जिले में कुल 13 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. इन केंद्रों पर परीक्षार्थियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं. प्रशासन ने सभी केंद्रों पर आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो. उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने किया निरीक्षण मंगलवार को उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने जिला मुख्यालय के कई परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया. उन्होंने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर और गांधी इंटर कॉलेज केंद्रों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए. मूलभूत सुविधाओं पर दिया गया विशेष ध्यान निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने केंद्रों पर बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, शौचालय और सुरक्षा जैसे पहलुओं की बारीकी से जांच की. उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और सभी सुविधाएं बेहतर ढंग से उपलब्ध कराई जाएं. कदाचारमुक्त और शांतिपूर्ण परीक्षा पर जोर उपायुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि परीक्षा को कदाचारमुक्त और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है. इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने और सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों को समन्वय के साथ काम करने का निर्देश उन्होंने सभी केंद्राधीक्षकों और संबंधित कर्मियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और समयबद्ध तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. साथ ही परीक्षा के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए. परीक्षार्थियों से समय पर पहुंचने की अपील जिला प्रशासन ने परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय से पहले अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंचें और सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें. इससे परीक्षा प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो सकेगी. निरीक्षण के दौरान कई अधिकारी रहे मौजूद इस दौरान डीआरडीए निदेशक प्रभात रंजन चौधरी, अनुमंडल पदाधिकारी अजय कुमार रजक, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक गौतम साहू, डीटीओ उमेश मंडल, बीडीओ मनोज कुमार तिवारी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे. सभी ने मिलकर परीक्षा की तैयारियों को अंतिम रूप देने पर जोर दिया.

संजू सैमसन ने बुमराह को पीछे छोड़ा, जीता ICC का प्रमुख अवॉर्ड

नई दिल्ली भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन को मार्च महीने का आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ चुना गया है. उन्होंने इस अवॉर्ड की रेस में जसप्रीत बुमराह और साउथ अफ्रीका के कॉनर एस्टरहुइजन को पीछे छोड़ा. सैमसन ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई. खास बात यह रही कि टूर्नामेंट की शुरुआत में वह प्लेइंग इलेवन का हिस्सा भी नहीं थे. टीम ने पहले अभिषेक शर्मा और ईशान किशन को मौका दिया, लेकिन जब सैमसन को मौका मिला, तो उन्होंने इसे पूरी तरह भुना लिया।  सुपर-8 में जिम्बाब्वे के खिलाफ 24 रन की तेज पारी से उन्होंने शुरुआत की, लेकिन असली कमाल वेस्टइंडीज के खिलाफ देखने को मिला. नॉकआउट की रेस में सैमसन ने नाबाद 97 रन बनाए और टीम को जीत दिलाई. यह पारी संभलकर खेली गई थी, जिसमें उन्होंने सही समय पर सही शॉट्स लगाए।  सेमीफाइनल और फाइनल में भी जलवा इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ वानखेड़े में सेमीफाइनल में उन्होंने 89 रन की शानदार पारी खेली. यह मैच हाई स्कोरिंग था, लेकिन सैमसन की पारी ने भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया. फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी उन्होंने 89 रन बनाए और टीम को खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई. लगातार बड़े मैचों में इस तरह का प्रदर्शन ही उन्हें सबसे खास बनाता है।  मार्च के इन अहम मैचों में सैमसन ने 3 पारियों में 275 रन बनाए. उनका औसत 137.50 और स्ट्राइक रेट 199.38 रहा. पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने 5 मैचों में 321 रन बनाए, औसत 80.25 और स्ट्राइक रेट 199.38 रहा।  हालांकि जसप्रीत बुमराह ने भी शानदार गेंदबाजी की और कई मैचों में टीम को संभाला, लेकिन सैमसन ने बल्लेबाजी से पूरे मैच का रुख बदल दिया. वहीं महिला क्रिकेट में न्यूजीलैंड की अमेलिया केर को मार्च का प्लेयर ऑफ द मंथ चुना गया है। 

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में नया इको-टूरिज्म स्पॉट, अप्रैल अंत में उद्घाटन संभव

बगहा बगहा वन क्षेत्र में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा ‘गेटवे ऑफ वीटीआर’ अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के मदनपुर रेंज में बन रहा यह नया इको-टूरिज्म स्पॉट जल्द ही पर्यटकों के लिए खोला जा सकता है. करीब 0.548 एकड़ क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि गेटवे का अंतिम काम तेजी से चल रहा है. इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 3.13 करोड़ रुपये की लागत आई है. इसमें मुख्य प्रवेश द्वार के साथ हरियाली, बैठने की सुविधा और आकर्षक डिजाइन शामिल हैं. पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केंद्र बनेगा यह इको-पर्यटन स्थल खासतौर पर उन सैलानियों के लिए तैयार किया जा रहा है जो प्राकृतिक वातावरण में सुकून के पल बिताना चाहते हैं. यहां आने वाले पर्यटक न केवल सुंदर नजारे देख सकेंगे, बल्कि आरामदायक माहौल में समय भी बिता पाएंगे. अप्रैल के अंत में उद्घाटन की तैयारी बगहा वन क्षेत्र पदाधिकारी श्रीमान मालाकार के अनुसार, पार्क का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और गेटवे अंतिम चरण में है. यदि सब कुछ प्लान के अनुसार रहा तो अप्रैल के अंतिम सप्ताह में वरीय अधिकारियों द्वारा इसका उद्घाटन किया जा सकता है. जल्द तय होगा प्रवेश शुल्क (Entry Fees) फिलहाल पार्क में प्रवेश शुल्क तय नहीं किया गया है. इसके लिए प्रस्ताव वरीय अधिकारियों को भेजा गया है. उम्मीद है कि जल्द ही शुल्क निर्धारित कर दिया जाएगा, ताकि आम पर्यटक भी आसानी से यहां पहुंच सकें. पर्यटकों के लिए सुविधाओं का खास इंतजाम इस स्थल पर पर्यटकों के लिए बैठने की व्यवस्था, नाश्ते की सुविधा और बच्चों के मनोरंजन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. पूरे परिसर में सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं और जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु घेराबंदी भी की गई है. साथ ही आकर्षक लाइटिंग इसे और भी सुंदर बनाएगी. पर्यटन और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार ‘गेटवे ऑफ वीटीआर’ के शुरू होने से वाल्मीकिनगर क्षेत्र में पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है. इससे न सिर्फ पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

रांची: नागपुरी गायक डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक को मिला ‘गुरु रत्न सम्मान 2026’

रांची  झारखंड के नागपुरी लोक संगीत जगत के प्रख्यात गायक डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित “गुरु रत्न सम्मान” से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान उन्हें 14 अप्रैल को “भारत के गवैयों” संस्था की ओर से प्रदान किया गया. डॉ. बड़ाईक को यह गौरव नागपुरी लोक संगीत के संरक्षण, संवर्धन और इसे वैश्विक मंचों तक पहुंचाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है. इस सम्मान समारोह ने झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को एक नई मजबूती प्रदान की है. सांसद महुआ माजी ने की कलाकार की सराहना इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद महुआ माजी उपस्थित रहीं. उन्होंने डॉ. बड़ाईक को सम्मानित करते हुए कहा कि ऐसे वरिष्ठ कलाकार हमारी संस्कृति और परंपरा के सच्चे संवाहक होते हैं. महुआ माजी ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि लोक संगीत हमारी पहचान का अटूट हिस्सा है और डॉ. बड़ाईक जैसे व्यक्तित्व इसे युवा पीढ़ी के लिए सहेजकर रखने का महान कार्य कर रहे हैं. उन्होंने लोक कला को राजकीय और राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रोत्साहन देने की बात कही. नागपुरी संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में भूमिका डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक लंबे समय से नागपुरी संगीत की जड़ों को सींचने में सक्रिय हैं. उन्होंने न केवल अपने गायन बल्कि अपनी मौलिक रचनाओं के माध्यम से भी झारखंड की लोक कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. वे लगातार विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति देकर लोक संगीत की मिठास को लोगों तक पहुंचा रहे हैं. उनकी विशिष्ट गायकी शैली ने न केवल दर्शकों का मन मोहा है, बल्कि कई युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित भी किया है. सुरों की महफिल में उमड़े संगीत प्रेमी सम्मान समारोह के दौरान पूरा वातावरण नागपुरी धुनों से सराबोर रहा. इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति, प्रख्यात कलाकार और भारी संख्या में संगीत प्रेमी शामिल हुए. डॉ. बड़ाईक ने मंच से अपने कुछ लोकप्रिय नागपुरी गीतों की सुरीली प्रस्तुति भी दी, जिसे श्रोताओं ने भरपूर सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया. इस सम्मान से पूरे नागपुरी संगीत जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है और इसे राज्य की गौरवशाली विरासत के लिए एक सुखद क्षण माना जा रहा है.